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Guest
मंगलू थका-थका-सा सड़क के किनोरे आगे बढा जा रहा था । भरे-पूरे बाजार से इस वक्त वो गुजार रहा था, परं लोगों की तरफ़ उसका जरा भी ध्यान न था । मन में कामिनी थी, सोचो मे भवतारा था । वो जानता था कि भवतारा किसी भी तरफ से कामिनी के लायक नहीं है । नर-पिशाच था भवतारा, जो इंसानों का खून पीता था । ये बात कामिनी को नहीं पता थी और वो बता भी न सकता था । बताता तो कामिनी को फिर यही सोचना था कि वो जलन की वजह से भवतारा के खिलाफ बोल रहा है और ये बात उसने भवतारा को भी
बता देनी थी । तब भवतारा ने भी उसे अपना दुश्मन मान लेना था।
भवतारा तो पहले ही स्पष्ट रूप से उसे चेतावनी दे चुका है कि उसकी हकीकत को किसी के सामने बयान करने की जुर्रत न करे । ऐसे में उसने अपना मुंह बंद रखना ही ठीक समझा था ।
मगलू को दिल-ही-दिल में वहुत तकलीफ हुई थी कि कामिनी का झुकाव भवतारा की तरफ़ हो गया है । कामिनी अचानक इस तरह, पलट जाएगी, ये तो उसने कभी सोचा भी न था ।
मंगलू को कुछ अच्छा न लग रहा था । बो बस अपनी मां के पास पहुच जाना चाहता था । भवतारा के काम आकर उसे कुछ भी हासिल नहीं हुआ था, बल्कि कामिनी की वजह से दिल ही टूटा था उसका ।
तभी मंगलू ने अपने कंधे पर हाथ महसूस किया किसी का ।
वो ठिठका तुरंत पलटा ।
अगले ही पल चौका ।
मोना चौधरी ने अपना हाथ उसके कंधे पर रखकर, उसे रोका था । उसके पीछे सतपाल खड़ा था ।
मंगलू बारी-बारी दोनों को देखने लगा ।
"अब तुम हमारे हाथों से बच नहीं सकते मंगलू?" मोना चौधरी ¸ कठोर स्वर में बोली ।
मगलू खामोशी से मोना चौधरी को देखने लगा ।
"शैतान का बेटा कहां हैं ?" सतपाल की आवाज में भरपूर सख्ती थी।
"मुझे क्या पता?"
"तुम सब जानते हो?" मोना चौधरी दात भीचकर कह उठी-" क्योंकि तुम भी इसी शहर में हो और शैतान का बेटा भी इसी शहर में है!"
" वो इस शहर में नहीं ।" मंगलू ने जैसे बात खत्म करनी चाही ।
"झूठ मत बोलो, वो इसी शहर में है ।"
"नहीं ।"
" रात मैं उससे मिली थी । बो मेरे पास, सिर्फ चार कदम की दूरी पर बैठा था ।"
मंगलू मोना चौधरी को देखने लगा ।
"हर रात बो किसी-न-किसी का खून पी रहा है । शहर-भर के लोग उसकी वजह से दहशत में है । आगे भी जाने वो कितनों का खून पीएगा । तुम सव जानते हो, क्योंकि तुम उसके खास साथी हो?"
"मैं किसी का साथी नहीं ।" मंगलू थके-से स्वर में कह उठा ।
"फिर झूठ !"
“ये इस तरह नहीं मानेगा !" सतपाल के होंठ भिंच गए-"आसे अपने साथ ले चलो ।"
संतपाल के इन शब्दों पर भी मंगलू ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई ।
ये बात मोना चौधरी और सतपाल के लिए हैरानी लायक थे ।
मंगलू शांत भाव से दोनों को देखता रहा ।
मोना चौधरी ने आस-पास से निकलते लोगों पर निगाह डाली और छिपे ढंग से रिवॉल्वर निकालकर मंगलू के पेट से लगा दी । मंगलंके चेहरे पर कोई भाव नहीं आया । मोना चौधरी को अजीब-सा लगा कि मंगलू ज़रा भी विचलित नहीं हो रहा ।
“ये रिवॉल्वर है । गोली चल गई तो तुम मारे जाओगे ।" मोना चौधरी गुर्राई ।
"चला दो गोली ।" मंगलू टूटे-से स्वर में कह उठा ।
मोना चौधरी मंगलू को घूरने लगी ।
बता देनी थी । तब भवतारा ने भी उसे अपना दुश्मन मान लेना था।
भवतारा तो पहले ही स्पष्ट रूप से उसे चेतावनी दे चुका है कि उसकी हकीकत को किसी के सामने बयान करने की जुर्रत न करे । ऐसे में उसने अपना मुंह बंद रखना ही ठीक समझा था ।
मगलू को दिल-ही-दिल में वहुत तकलीफ हुई थी कि कामिनी का झुकाव भवतारा की तरफ़ हो गया है । कामिनी अचानक इस तरह, पलट जाएगी, ये तो उसने कभी सोचा भी न था ।
मंगलू को कुछ अच्छा न लग रहा था । बो बस अपनी मां के पास पहुच जाना चाहता था । भवतारा के काम आकर उसे कुछ भी हासिल नहीं हुआ था, बल्कि कामिनी की वजह से दिल ही टूटा था उसका ।
तभी मंगलू ने अपने कंधे पर हाथ महसूस किया किसी का ।
वो ठिठका तुरंत पलटा ।
अगले ही पल चौका ।
मोना चौधरी ने अपना हाथ उसके कंधे पर रखकर, उसे रोका था । उसके पीछे सतपाल खड़ा था ।
मंगलू बारी-बारी दोनों को देखने लगा ।
"अब तुम हमारे हाथों से बच नहीं सकते मंगलू?" मोना चौधरी ¸ कठोर स्वर में बोली ।
मगलू खामोशी से मोना चौधरी को देखने लगा ।
"शैतान का बेटा कहां हैं ?" सतपाल की आवाज में भरपूर सख्ती थी।
"मुझे क्या पता?"
"तुम सब जानते हो?" मोना चौधरी दात भीचकर कह उठी-" क्योंकि तुम भी इसी शहर में हो और शैतान का बेटा भी इसी शहर में है!"
" वो इस शहर में नहीं ।" मंगलू ने जैसे बात खत्म करनी चाही ।
"झूठ मत बोलो, वो इसी शहर में है ।"
"नहीं ।"
" रात मैं उससे मिली थी । बो मेरे पास, सिर्फ चार कदम की दूरी पर बैठा था ।"
मंगलू मोना चौधरी को देखने लगा ।
"हर रात बो किसी-न-किसी का खून पी रहा है । शहर-भर के लोग उसकी वजह से दहशत में है । आगे भी जाने वो कितनों का खून पीएगा । तुम सव जानते हो, क्योंकि तुम उसके खास साथी हो?"
"मैं किसी का साथी नहीं ।" मंगलू थके-से स्वर में कह उठा ।
"फिर झूठ !"
“ये इस तरह नहीं मानेगा !" सतपाल के होंठ भिंच गए-"आसे अपने साथ ले चलो ।"
संतपाल के इन शब्दों पर भी मंगलू ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई ।
ये बात मोना चौधरी और सतपाल के लिए हैरानी लायक थे ।
मंगलू शांत भाव से दोनों को देखता रहा ।
मोना चौधरी ने आस-पास से निकलते लोगों पर निगाह डाली और छिपे ढंग से रिवॉल्वर निकालकर मंगलू के पेट से लगा दी । मंगलंके चेहरे पर कोई भाव नहीं आया । मोना चौधरी को अजीब-सा लगा कि मंगलू ज़रा भी विचलित नहीं हो रहा ।
“ये रिवॉल्वर है । गोली चल गई तो तुम मारे जाओगे ।" मोना चौधरी गुर्राई ।
"चला दो गोली ।" मंगलू टूटे-से स्वर में कह उठा ।
मोना चौधरी मंगलू को घूरने लगी ।