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खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज complete

मगलू गोल कमरे में पहुचा और चैन की लम्बी सांस ली ।

मन-ही-मन सोचा कि अव भवतारा आ भी जाए तो परवाह नहीं । जव थ्रोड़ा सामान्य हुआ तो बाथरूम में जाकर हाथ-पुंह धोया । मस्तिष्क पुन: दौडने लगा । क्या अभी चाकू दे आए मोना चौधरी औंर सतपाल को? . नहीं, इतनी जल्दी भी ठीक नहीं । पीछे से भवतारा आएगा और उसे न पाकर क्या सोचेगा? इस वक्त उसे सब्र से काम लेना चाहिए ।

और अपनी हरकते सामान्य रखनी चाहिए । लो ही काम करने चाहिए जो हर बात करता है ।

मंगलू अपने कमरे में पहुचा ।

पहने कपेड़े उतारे और खूंटी पर लटका दिए । चाकू पैंट की जेब में ही था । खुद अंडरवियर में ही वेड पर आ लेता था । लेटने के पश्चात वो छत को देखने लगा । सोचे तेजी से दोड़ रही थी । कल वो चाकू मोना चौधरी और सतपाल को दे देगा, फिर क्या वे दोनों भवतारा को समाप्त कर सकेंगे? इस सोच ने मंगलू की नीद उड़ा दी थी कि क्या सच मे भबंतारा मर जाएगा । उससे उसकी जान छूट जाएगी?

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अगली सुवह हुई ।

मंगलू रात क्रो अवतारा के आने से पहले ही सो गया था । वो कब आया, उसे नहीं पता था । अब नीद से उठने के बाद से पहले वो ऊपर भवतारा के कमरे में पहुंचा और भीतर झांका ।

भवतारा बैड पर सोया हुआ था, हाथ-पांव फैलाए।

उसकी कमीज पर लगा काफी सारा खुन नजर आ रहा था ।

मगंलू बहां से नीचे आ गया । कमरे में पहुंचा और खूंटी पर टगी पैंट को चैक किया । चाकू पैट की जेब में मौजूद था । इससे उसे राहत

मिली ।।।

उसके बाद वो नहा-धोकर तैयार हुआ । पैट की जेब से चाकू निकलकर नई पेंट की जैव में रखा, फिर बाहर निकल आया । मोना चौधरी और सतपाल के पास पहुच जाना चाहता था वो ।

" मंदिर के बाहर पुलिया के पास से निकला तो कामिनी की याद ताजा हुई ।

परंतु कामिनी की याद फौरन ही मस्तिष्क से गुल होगई क्योंकि उसके पास काम था । चाकू था और वो चाकू इस वक्त मुसीबत से ज्यादा लग रहा था । उससे वो पीछा छुडा लेना चाहता था । उसकी जेब में पैसे न थे कि बस या टैक्सी लेकर मोना चौधरी, सतपाल के

पास होटल पहुच पाता ।

इसलिए सारा रास्ता मगलू ने पैदल ही तय किया ।

तेज-तेज चलने पर भी उसे होटल तक पहुंचने में डेढ़ घंटा लगा । जब मगंलू ने कमरे में प्रवेश. किया था तो तेज-तेज सांसे लेता हाफ़ रहा था । मोना चौधरी और सतपाल की निगाह उस पर टिक गई ।

“तुम......!"

मंगलू ने जेब से चाकू निकाला और टेबल पर रख दिया ।

"ये रहा चाकू शैतान बेटे का चाकू तुम इसी चाकू को मांग रहे थे ।" सतपाल की आंखों में चमक आ गई ।

मोना चौधरी मुस्करा पडी ।

“तुमने तो वहुत बड़ा काम कर दिया मंगलूं !! मोना चौधरी कह उठी । सतपाल ने आगे बढ़कर चाकू को उठाया । देखा ।

"हां ।" सतपाल ने चाकू अपनी में डालते हुए कहा…"यही है शैतान के बेटे का चाकू।"

"मैंने अपना काम कर दिया है !" मगंलू बोला।

"मुझे शेतान के बेटे की दिनचर्या बता ।" सतपाल बोला ।

मंगलू ने बताया कि भवतारा दिन में क्या-क्या करता है!

"कल वो कामिनी के साथ शादी कर रहा है ।" एकाएक मंगलू कह उठा ।

"कल-शादी?"

“हां-----बो. ..।"

"ये तो वहुत अच्छा मौका होगा उस पर वार करने का।" सतपाल कह उठा ।

"कहां करेगा वो शादी?" मोना चौधरी ने पूछा ।

" ये अभी उसने बताया नहीं । रोज सुबह उठने के बाद के कामिनी की झोंपडी में जाता है ।"

"सुबह ।"

" उसकी सुबह दिन के बारह-एक बजे होती है ।" मंगलू बोला ।

"तब बों अकेला होता है ?"

"हां ।"

“इसका मतलब आज की सुबह तो निकल गई ।" मोना चौधरी बोली…"कल हमारा काम हो सकता है ।"

"कर वो शादी कर रहा है ।" मोना चौधरी के चेहरे पर कड़वे भाव उभरे।

"लेकिन शादी कर नहीं पाएगा । वो मंदिर से निकलेगा और मारा जाएगा ।"

" सच मे वो मरा जाएगा?" पूछा मंगलू ने ।

"हां ।" सतपाल के दांत भिच गये----" कल वो सच में मरेगा । उसे मारने के लिए उसके चाकू की जरूरत थी, वो तुमने हमे ला दिया और 'खबरी' बनकर उसके वारे में हमें हर खबर दे रहे हो । ऐसे में उसका बचना मुमकिन नहीं ।"

"अब मैंने क्या खबर देनी है? मैंने तो सब कुछ बता दिया।"

"अभी तुम्हारा काम वाकी है ।"

"बाकी -नही, मैं अब और कोई काम नहीं करूगां । चाकू लाकर देना ही आखरी काम....!"

" मगंलू , जहाँ तुमने इतना काम किया है वहां-थोड़ा-स्रा और ....!"

"बो मुझे मार देगा । मैं बार-बार उसे धोखा नहीं दे सकता । वै चालाक है । भांप जाएगा कि .....!"

"आखिरी मौके पर तुम हमारा साथ छोड देना चाहते हो?"

"नहीं, मैं अब कोई काम नहीं करूंगा ।" मंगलू ने मोना चौधरी को देखकर क्या…"मै अब वापस नहीं जाऊंगा ।" '

"ये तो तुम जानते ही हो कि हम जो भी कर रहे हैं, उससे तुम्हारा फायदा भी है ।" मोना चौधरी गंभीर स्वर मे बोली ।

"मेरा फायदा? "

"उसके मरते ही कामिनी तुम्हें मिल जाएगी । तुम्हारा प्यार तुम्हें वापस मिल जाएगा ।”

मंगलू ने सूखे होंठों पर जीभ फेरी ।

"सोचो, तब तुम्हें कितना अच्छा लगेगा, कामिनी को जब अपने पास पाओगे ।"

मंगलू ने व्याकुलता से पहलू बदला ।
 
"मुझें तो लगता है कि ये कामिनी की मज़बूरी ही है, जो बो उसके साथ कल शादी कर रही है है"

"सच बात तो ये है कि मुझें यकीन नहीं कि तुम लोग उसे खत्म कर दोगे ।" मंगलू ने गहरी सांस ली ।

"तुम इसी तरह हमारा साथ देते रहे तो हम उसे हर हाल में खत्म कर देंगे ।"

"तुम समझती क्यो नहीं, वो मुझे मार देगा । उसे पता चल जाएगा कि मैं तुम लोगों से मिल चुका हूं।”

"नहीं पता चलेगा । आखिरी बार हमारा साथ दे दो ।"

मगलू इस ब्त से सहमत न होते हुए भी सहमत हुआ ।

"क्या चाहते हो अब मुझसे?"

"तुम्हें वापस वहीं पर जाना होगा, सिर्फ आज रात के लिए !"

“क्या करूँगा, वहां जाकर ।"

" उस पर नजर रखोगे और जो नई ख़बर होगी, वो हमे दोगे ।"

"नई खबर ?"

" हां , जैसे कि लै शादी कहां कर रहा है? उसकी शादी कितने बजे की है? वो कब बाहर निकलेगा ?"

"औऱ ये खबर देने मैं यहां इतनी दूर आऊगा, होटल में ।"

"नहीं ।” सतपाल कह उठा--" हम मंदिर के आस-पास ही किसी सुरक्षित जगह अपना ठिकाना वना लेंगे, ताकि खबर देने मे तुम्हें परेशानी न हो । हमें खबर देकर तुम वापस मंदिर में जा सको !"

“ठीक है ।" मगलू ने गहरी सांस ली--“इसकै बाद मैं तुम लोगों की कोई बात नहीं मानूगा ।"

"शायद फिर जरूरत ही न पड़े, तुमसे कोई काम कहने की ! " सतपाल मुस्कराया ।

"तुम लोग अपने काम में सफल होओ या नहीं;ये रात मेरी आखिरी रात होगी भवतारा के पास ।"

"मंजूर…।"

"क्या खाओगे...!" मोना चौधरी ने मुस्कराकर पूछा ।

" कुछ नहीं, जब से भवतारा का साथ मिला है, मतलब कि इस, चाकू का साथ, तब से मुझें न तो भूख लगती है और न प्यास । तब भी पूरी तरह स्वस्थ रहता हूं।" मंगलू ने बताया ।

मोना चौधरी ने सतपाल को देखा ।

सतपाल गंभीर स्वर में कह उठा ।

"शैतानी शक्तियों का असर तुम पर डाला जा चुका है, लेकिन कल ठीक हो जाएगा सब ।"

"कल कैसे ठीक हो जाएगा !" मंगलू ने पूछा ।

"क्योंकि कल हैम शैतान के बेटे को मार देगे ।"

"भगवान ही जाने कर क्या होगा?" मंगलू नै बेचैनी से कहा ।।

“तुम मुझे खबर देते रहो, सब ठीक हो जाएगा ।"

मंगलू उठ खडा हुआ ।

"मैं जाता हूं ।"

"आज रात हमने मंदिर के पास डेरा लगाना है । तुम हमें कहां, मिलोगे?" मोना चीथरी ने पूछा।

"रात अंधेरा हो जाने के बाद आठ और नौ बछू कें बीच मैं मंदिर के गेट के बाहर मिलूंगा । वहां पहुंच जाना ।"

दोनों ने सहमति से सिर हिला दिया ।

मंगलू चला गया ।
 
मोना चौधरी ने सतपाल को देखकर पूछा ।

" क्या शेतान का बेटा इस चाकू से वास्तव में खत्म हो जाएगा?"

" तुम्हें संदेह है क्या?"

" मै इन बातों के बारे में ज्यादा नहीं जानती इसलिए पूछा है !" मोना चौधरी ने कहा।

"इस चाकू के बारों के साथ मुझे एक खास मंत्र को चालीस वार दोहराना है, ऐसा होते ही उसकी मौत निश्चित है ।"

मोना चौधरी सिर हिलाकर रह गई, फिर कह उठी ।

" ‘कामिनी के चक्कर में मगलू हमारा साथ दे रहा है, वरना ये कभी भी 'खबरी' न बनता, शैतान के बेटे के खिलाफ ।"

"ऐसा होना ही था ।" सतपाल ने गंभीर स्वर में कहा ।

" क्यो ?"

"तांत्रिक मोहम्मद ने खबरी के बारे में हमें पहले ही खबर दे ही थी कि वो मिलेगा ।"

“ओह !"

"कोई कितना, भी त्ताकतवर हो उसकी ताकत को तोड़ने का कारण भी ताकतवर के साथ पैदा हो जाता है ।"

मोना चौधरी सिर हिलाकर रह गई ।

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"जंबाई बाबू?" बसन्ती ने सामने आते भवतारा को देखा तो कह ऊठी----" कल तुम जो साडी… !"

"चुप कर ।" प्रेस करता हुआ दीनू झल्लाकर बोला ।

"तू चुप कर बूढे! बीच में मत बोला कर बसन्ती खा जाने वाले स्वर में बोली ।

भवतारा इतने में पास आ पहुचा था ।

" बैठो-बैठो !" बसन्ती पहले ही रखी कुर्सी को थपथपाकर बोली…“खड़े-खड़े थक जाओगे।"

भवतारा बैठा ।

"तुम्हारे पास गाड्री-वाडी नहीं है !" एकाएक बसन्ती ने पूछा ।

" बहुत हैं ।"

"बहुत हैं ।" वसन्ती मुस्कराई, दीनू क्रो देखकर कह उठी...."देखा, मैं न कहती थी कि दो-चार गाडियां तो होंगी ही ।"

"कब कहा तूने?” दीनू के होंठो से निकला।

" लो कर लो बात ।।" बसन्ती आखें तरेरकर कह उठी------" आज सुबह ही तुम मेरा सिर खाते रहे कि जंवाई बाबू कै पास गाड्री है कि नहीं अब इतनी जल्दी भूल भी गए ।"

दीनू ने मुह फेर लिया । वसन्ती पुन कह उठी भवतारा से।

"जंवाई बाबू मैं कह रही थी कि कल तुम जो मेरे लिए सिल्क की पीली साड्री लाए, वो बहुत अच्छी है । पहनकर देखी थी मैंने, परंतु कुछ जंची नही ! उसमे मै कुछ मोटी लग रही हु । पीला रंग ही ऐसा है, लेकिन नीले रंग में मैं मोटी नहीं दिखती । आज तुम नीले रंग की बनारसी साडी ला देना । उसमें तो मैं बिल्कुल पतली लगती हूँ । मुझे देखकर कल सब लोग कहेगे कि बेटी तो बेटी सास भी कुछ कम नहीं है ।"

दीनू आहत भाव से बसन्ती को देखने लगा ।

भवतारा मुस्कराया ।

"आज बाजार जाना है ना कामिनी के साथ?"

"हां ।"

"तो फिर साडी ले ही आना । कल व्याह है, अब वक्त ही कहां रहा, जो मैं खुद बाजार जाकर लांऊ ?"

" कामिनी कहीं है?" भवतारा ने पूछा ।

"झोंपडी में तैयार हो रही है । ये तो बताओ, शादी करनी कहां है ?"

"मंदिर में ।"

"जहां तुम ठहरे हो ?"

"हां ।"

"वो हम जैसे लोगों का मंदिर नहीं है । उस मंदिर का देवता कोई और ही है । हम तो भगवान के मंदिर में शादी करेंगे । तुम कहो तो कल यहीं पर चार डंडे गाड़कर मंडप बनवा देती दूं। शादी कराने वाला पडित भी ले जाऊंगी।"

" ये ठीक रहेगा ।" भवतारा ने कहा ।

"तुम्हारी तरफ़ से कोई रिशतेदार वगैरा आ रहे है या नहीं?"

" बैसे तो नहीं आ रहे, लेकिन आप कहैं तो रिश्तेदारों को..... !"

"रहने दो जंवाई बाबू क्या जरुरत है बुलाने की । खामखाह कोई होते काम में टाग न मार दे । मैं भी किसी रिशतेदार को नहीं बुला रही, जिसने शगुन देना होगा तो यहां आकर बाद में भी दे जाएगा । क्यों जी मैंने ठीक कहा ना?"

"भाग्यवान! तुम गलत कब कहती हो !" दीनू बोला।

तभी कामिनी झोंपडी में से बाहर निकली ।
 
वो सजी--धजी इतनी खूबसूरत लग रही थी जैसे कि कोई परी है?"

भवतारा मंत्र मुग्ध सा प्यार-भरी नजरों से उसे देखता रह गया ।

“जंवाई बाबू !" उसकी नजरे पहचानकर बसन्ती मुस्कराकर कह उठी…"मैं तो इस उम्र में कामिनी से भी ज्यादा सुन्दर होती थी ।

भवतारा की विचार-तंद्रा भंग हुई ।

"मैंने तो कभी इसे सुन्दर रूप में नहीं देखा ।" दीनू बडबडा उठा ।

"क्या कहा तुमने?" बसन्ती बोली ।

"भाग्यवाना बच्चों की उम्र है , तू अपने बीते वक्त को याद करके अपने आपको क्यों तकलीफ देती है?”

भवतारा और कामिनी में आखो-ही-आखों में बात हुई ।

"मां, हम बाजार जा रहे हैं ।" कामिनी कह उठी ।

"जाओ-जाओं, मैं शादी की तैयारियां करती हू । आज तो फुर्सत ही नहीं मिलने वाली । हां, वो नीली बनारसी साडी ले आना । कल ब्याह के वक्त वो ही पहनूंगी और फोटो खींचने वाले को भी पुछ लूंगी । देखें तो सही कि नीली साडी में मैं कैसी लगती हूं !"

कामिनी और अवतारा बाजार चले गए ।

"कितना अच्छा लग रहा है कि कामिनी का व्याह हो रहा है, इतना अच्छा तो मुझे अपने व्याह में भी नहीं लगा था ।" बसन्ती बोली ।

" तेरे को अच्छा क्यों लगता, सारी फुलझडियां तो तूने व्याह से पहले ही बजा ली थीं! व्याह के बाद बजाने को बचा ही क्या था, जो तू खुश होती? मेरे हाथ में फुलझड्री की तीली ही आई, उस तीली को अभी तक ढो रहा हूं !"

"तीली तो है ।" हाथ हिलाकर बोली…"खुशनसीब हो, कइयों को तीली भी नहीं मिलती ।"

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1

वो दिन बीता ।

भवतारा कामिनी के साथ दोपहर तक बाजार में घूमता रहा । कामिनी ने आज भी पेट भरकर पानी-पूरी खाई और मन-पसंद सामान खरीदा । बनारसी नीली साडी भी खरीदी बसन्ती के लिए ।

शाम चार बजे वे दोनों वापस आए । कामिनी ने सामान झोंपडे पर छोडा और भवतारा के साथ मंदिर चली गई ।

भीतर मंगलू मौजूद था । भवतारा के साथ कामिनी को वहां आया देखकर मगंलू को अच्छा न लगा । उसने कामिनी के साथ कोई बात न की ।

भवतारा ने मंगलू को बाहर भेज दिया, और कामिनी के साथ प्यार-परी बातों में लग गया ।

मंगलू बाहर पुलिया पर आ बैठा था ।

रह-रहकर मगलू की निगाह मंदिर के गेट की तरफ जा रही थी । मन व्याकुल था, ये सोचकर कि भीतर भवतारा और कामिनी अकेले हैं । समय बीतने के साथ-साथ मगंलू की बेचैनी बढने लगी । ।

वो जानता था कि अंधेरा होते ही भवतारा शैतान वन जाएगा । उसे प्यास लगेगी इंसानी खून की, कहीं कामिनी ही उसका शिकार न जाए ।।

परेशान हो उठा इस सोच के साथ ही. वो ।

भीतर जाने का मन था, परंतु जानता था कि अवतारा को उसका इस वक्त भीतर आना अच्छा नहीं लगेगा ।

इससे पहले कि शाम खत्म होती कामिनी को मंदिर से बाहर आती देखा ।

अब भवतारा भी बाहर निकलेगा । उसे साथ चलने को कहेगा?
 
अगले ही पल मंगलु पुलिया से उठा और पास ही कच्ची ढलान पर उतरता चला गया ।

कुछ देर वाद ही कामिनी सामने से निकल गई । मंगलु उसे देखता रहा । खूबसूरत लग रही थी वो । खुश भी थीं वो ।।

मगंलू के दिल मे पीड़ा हुई कि कामिनी गलत इंसान से प्यार कर बैठी । भवतारा उसे कभी भी खुशियां नहीं दे सकता ।

मंगलू वहीं छिपा रहा।

वो भवतारा को नजर नहीं जाना चाहता था ।

अगर भवतारा ने उसे देख लिया तो उसे साथ चलने को कह देगा, जबकि आठ और नौ बजे के बीच मोना चौधरी और सतपाल ने उससे मिलना था !!

शाम अंधेरे की तरफ़ सरकी । भवतारा उसे बाहर निकलता दिखा । मंगलू वहीं पर दुबककर बैठ गया ।

भवतारा पुलिया के पास से निकलकर आगे बढता चला गया । मंगलू उसे जाता देखता रहा ।

भवतारा दूर होता हुआ निगाहों से ओझल हो गया ।

मंगलू ने राहत की सांस ली और छिपी जगह से बाहर, पुलिया के पास आया और मंदिर के गेट की तरफ वढ़ गया । उसका दिल हौले हौले बज रहा था , कल के बारे मे सोच कर कि क्या होगा कल ?

मोना चौधरी और सतपाल क्या भवतारा को खत्म कर पाएंगे?

जाने क्यों मंगलू को विश्वास नहीं हो रहा था कि भवतारा को मारा जा सकता है । उसने भवतारा का रूप उस रात देखा था, जव वो गली में युवती के गले पर दांत गड़ाए खून पी रहा था और कार की हैडलाइट उस पर पडी थी । वो उसका वेहद ज्यादा भयानक रूप था, जब कि मंगलू को वो नजारा याद आता तो वो सिहर उठता था । तब से ही वो मन-ही-मन भवतारा से डरने लगा था, वरना पहले उसके मन में ऐसा डर नहीं था । मंगलू मंदिर के भीतर ठिकाने पर पहुंचा । सोचा कि कुछ देर पहले कामिनी यहां थि, भवतारा के साथ ।

मंगलू ने अपने दिमाग को समझाया कि उसे ये सव बाते नहीं सोचनी हैं । मोना चौधरी और सतपाल के बारे में सोचना है, भवतारा की मौत के बारे में सोचना है, कल के बारे में सोचना है ।

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2

मंगलू जव मंदिर से निकला तो नौ, पौने नो का वक्त हो रहा था है मंदिर में बाहरी लोगों का आना-जाना बंद हो चुका था, परंतु गेट अभी खुला था । दस बजे बंद होता था गेट ।

गेट से बाहर निकलकर मंगलू ठिठका और इधर-उधर नजरें घुमाने लगा । मोना चौधरी और सतपाल उसे न दिखे । अभी आए ही नहीं होंगे । उसने इंतजार करने की सोची ।

तभी अंधेरे से निकलकर वे दोनों उसके पास आ पहुंचे ।

"तुम लोग यहां हो ।" मंगलू उन्हें देखते ही बोला-----" अब वो ग्यारह-बारह बजे आएगा और सो जाएगा ।"

"पहले भी तो आ सकता है, हमे उधर चलकर बात करनी चाहिए ।" मोना चौधरी ने कहा ।

"आज तक तो वो पहले कभी आया नहीं । इस वक्त वो व्यस्त रहता है, फिर भी उधर अंधेरे में चलते हैं ।"

तीनों चंद कदम दूर सड़क से उतरकर अंधेरे से पहुंचे ।

"खबर क्या है?" सतपाल ने पूछा ।

" कल शादी कर रहा है वो कामिनी से ।" मंगलू बोला ।

"कहां ?"

"ये नहीं पता । भवतारा ने बताया नहीं और मैंने पूछा नहीं । "

"क्या कितने बजे वो मंदिर से निकलेगा?"

"मेरे ख्याल में बारह और एक बजे के ब्रीच निकलेगा ।"

" पहले भी तो निकल सकता है? कल उसने शादी करनी है ।" सतपाल बोला ।

“हो सकता है वो शादी की वजह से पहले निकल आए।" मंगलू सोच-जरे स्वर में बोला-----"बैसे रात को भरपूर नींद लेता है और सुबह उठने की कभी जल्दी नहीं करता ।"

सतपाल ने मोना चौधरी को देखा।
 
"हमेँ कल सुबह से ही उसके घात में तैयार होकर बैठना होगा ।" मोना चौधरी ने कहा ।

"हां शैतान के बेटे को शेतानलोक में कल वापस भेजना है तो हमें हर पल सतर्क रहना होगा ।"

अंधेरे में वे तीनों एकं-दुसरे का चेहरा स्पष्ट न देख पा रहे थे ।

"क्या तुम लोग कल सच में उसे मार दोगे?" मगंलू ने पूछा।

“हां ।" सतपाल के दांत भिंच गएं-"कल मैं शैतान बेटे को शैतानलोक भेज दूंगा । वो हर हाल में मरेगा ।"

" वो बच भी सकता है ।" मंगलू बोला ।

"वो मरेगा ।"

"मानी तुम्हारी बात, लेकिन तुम भी मेरी बातं मानो कि वो बच सकता है ।" मंगलू ने प्रतिवाद किया ।

चंद पलों के लिए उनके बीच चुप्पी रही, फिर सतपाल बोला ।

"हां बो वच भी सकता है।"

"वो बच गया तो तब क्या होगा?"

" तुम चिंता मत करो । जो करना होगा, हम ही करेगे ।"

" तुम लोग जो मर्जी करों । मैंने तुम लोगों की बाते मान ली हैं, जो नहीं माननी चाहिए थी । मैंने अपने आपको खबरी बनाकर खतरे में डाल लिया है । आज की रात यहीं पर मेरी आखिरी रात है । सुबह मैं यहां से दुर चला जाऊगां। वो बच गया तो सबसे पहले मुझे मारेगा । दो पलों में ही समझ जाएगा कि सव मेरा किया धरा । मैंने ही तुम लोगों को यहाँ बुलाया है !"

"तुमने हमारे लिए वहुत कुछ किया है ।" मोना चौधरी ने गंभीर स्वर मे कहा -- “सच बात तो ये है कि तुम्हारी सहायता के बिना हम शायद शैतान के बेटे तक नहीं पहुच पाते । तुम हमारे लिए, महत्वपूर्ण हो, ।"

"तुम क्या समझती हो कि ऐसा सुनकर मै अंपने को और खतरे में डाल लूंगा । कभी नहीं ।"' मंगलू बोला------" मै....!"

"तुमने हमारे लिए जो किया, उसका शुक्रिया अदा कर रही हूं और ये भी जानती हूँ कि कल तक तुम हमारे जो काम आ सके, आ गए । उसके बाद तुम हंमारे काम आ भी न सकोगे, क्योंकि शेतान के बेटे के सामने सव कुछ स्पष्ट हो चुका होगा, फिर वो हमारे हाथ नहीं आएगा, बल्कि हमारे लिए भी खतरा बन जाएगा, इसलिए कल हम उसे हर हाल में खत्म करने की कोशिश करेंगे ।"

“जो मन में आए करो । यहां पर आज की रात मेरी आखिरी रात है और कल मैं यहाँ से दूर...... !"

"बेशक चले जाना ।" मोना चौधरी गंभीर थी…“लेकिन हमे बताए बिना चुपचाप खिसकोगे नहीं । तुम्हारा एकाएक गायब हो जाना सव कुछ गड़बड़ कर देगा, शैतान का बेटा शक खा गया तो वो हमारे हाथों से दूर भी हो सकता है ।"

वो चुप रहा ।। अंधेरे में मंगलू के चेहरे के, भाव मोना चौधरी को नजर न आ रहे थे ।

"..हम.... ."। सतपाल बोला-----'' रात-भर यहीँ पर है, ये जगह देख लो, कोई खबर देनी हो, तो तुम रात में कभी भी हमारे पास आ सकते हो।"

" ठीक है ।"

"कामिनी की झोंपडी किधर है?”

" उधर. ."। मंगलू ने हाथ से इशारा किया-'…"इस सारी कच्ची जगह की पार करोगे तो उस तरफ़ कालोनी है, उधर सड़क से भी वहां तक घूम के जाया जा सकता है और पैदल भी ।"

मोना ने अंधेरे में सिर हिला दिया ।

"मैँ जाता हूं कोई बात हुई तो बताने आऊंगा ।" मगलू मंदिर के भीतर चला गया ।

"तुम यहीं रहै ।" मोना चौधरी बोली-“मैं कामिनी की झोंपडी देखेकर आती हूं।"

"जरूरत है उसकी झोंपडी देखने की ?" सतपाल ने पूछा !!

"हां, कल अगर शैतान का बेटा मंदिर से निकलकर कामिनी की तरफ गया तो हमें पता होना चाहिए कि कामिनी का ठिकाना कहां पर है । मेरे ख्याल में कल शैतान का बेटा, शादी के लिए कामिनी की झोंपडी तक अवश्य जाएगा । मैं रास्ता देखकर आती दूं।"

"अंधेरे में तुम्हें परेशानी होगी ।" सतपाल बोला ।

" सब ठीक है ।" मोना चौधरी ने कहा और उस तरफ़ बढ गई, जिधर मंगलू ने कामिनी की झोंपडी होने का संकेत किया था ।

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3

मोना चौधरी ने झोपडी तक का रास्ता देख लिया था । उसने सतपाल को रास्ता दिखा दिया था । अंधेरा अवश्य था , परंतु चंद्रमा की मद्धिम रोशनी में आंखें देख सकने लायक थीं ।

फिर वो दोनों वापस उसी जगह पहुचे ।

नजरे सड़क पर थीं ।

" तुम्हारे दिमाग में आखिर है क्या?" सतपाल ने पूछा ।

" शैतान के बेटे पर कल कावू पाना है, उसी की रूपरेखा तैयार कर रही हूं।"

" कैसी रूपरेखा---मुझे बताओ ।"

"सुबह बतांऊंगी । बो चाकू कहां है?”

"मेरी जैव में !"

"वो मंत्र अच्छी तरह याद है, जिसके बारे में तुमने कहा था कि चालीस बार उस मंत्र को दोहराना पड़ेगा !"

"सब याद है, मेरी तरफ से पूरी तैयारी हैं !"

"उस मंत्र के चालीस बार पढ़ने का फायदा क्या होगा?"

"अनजानी शक्तियां शैतान के बेटे को शैतानलोक में पहुंचाने में मेरी सहायता करेगी । वो मंत्र नहीं पढूंगा तो अकेला पड़ जाऊंगा । तव मेरे सामने कई तरह की कठिनाइयां आ सकती हैं । उस स्थिति में उसे बापस शैतानलोक भेजने मे शायद मैं कामयाब भी न से सकू।”

"ये तुम्हारी बाते हैं, तुम जानो । इन कामों की मुझे समझ नहीं है।" मोना चौधरी ने कहा ।

दोनों के बीच चुप्पी रही।

मोना चौधरी दुर नजर आती खाली सडक को निहारती कह उठी ।

"शेतान का बेटा कभी भी वापस मंदिर में आ सकता है ।"

सतपाल ने सडक की तरफ नजर डाली । बोला कुछ नहीं

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रात बारह से उपर का वत्त हो रहा था तव, जव शैतान का बेटा आता दिखा । मोना चौधरी और सतपाल की निगाह एकटक उस पर टिक चुकी थी । भवतारा मस्त सा झूमता सड़क पर इसी तरफ बढता आ रहा था । रात का सन्नाटा हर तरफ़ फैला हुआ था । झिगुरो की आवाजें रह-रहकर सुनाई दे रही थी । इस सन्नाटे में उभरी जरा-सी आहट भी गूंज जैसी लगती ।

"यही है वो ।" मोना चौधरी ने सरगोशी की-----"अंधेरे मे ही पहचान लिया, कल इसी ने राजन की जान ली थी ।"

" खामोश रहो ।" सतपाल दांत भीचे, फुसफुसाहट भरे स्वर में कह उठा । "

वे दोनों अंधेरे में दुबके उसे देखते रहे ।

भवतारा बंथ गेट पास जाकर रूका ।

उनके देखते-सो-देखते गेट खुद-ब-खुद खुलता चला गया । भवतारा ने भीतर प्रवेश किया तो गेट बंद हो गया ।

"इस वक्त शैतानी ताकते पूरी तरह इसके साथ हैं । रात के अंधेरे में ये बादशाह बन जाता है शक्तियों का ।" सतपाल ने कहा-----" इस वक्त ये जैसी भी बर्बादी चाहे, ला देगा । अंधेरे में इसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता ।"

"और दिन में ।"

"दिन में ये अकेला पड़ जाता है, रोशनी होते ही शैतानी ताकते इसका साथ छोड़ देती हैं और ये साधारण मनुष्य बन जाता है ।"

अंधेरे में मोना चौधरी और सतपाल की नजरे मिली ।

"अब जो होगा, कल होगा ।" मोना चौधरी ने कहा------" ये रात हमें बारी-बारी नीद लेकर बितानी होगी । एक सोएगा, एक जागेगा ।"

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5

बसन्ती और दीनू के लिए ये खुशी भरा दिन था ।

कामिनी का व्याह हो रहा था वो भी पैसे वाले आदमी के साथ । कामिनी तो झोंपड़े में बैठी धीरे-धीरे तैयार हो रही थी । मन में ढेरों तरह के ख्याल कुलबुला रहे थे । कभी मुस्करा जाती तो कभी शरमा जाती । उसके मन का हाल…बेहाल था ।

बाहर बसन्ती ने चार डंडे लन्बे--लम्बे गाड दिए थे और दीनू सुबह-सुबह ही गेंदे के फूलो के ढेर सारे हार ले आया था ।

उन हारों को वो डंडों के साथ बांध रहा था और छत के तौर पर ऊपर बाले हिस्से मे भी बाँध रहा थे ।

बसन्ती ने सुबह-सुबह ही नहा-धोकर नीली बनारसी साडी बांधकर ऊंचा-सा जूड़ा कर कर लिया था । वो सजी-धजी हुक्म चलाने पर आमादा थी और दीनू उसके हुक्म सुन-सुनकर तंग आ चुका था ।

" तू तो तब भी इतनी न सजी थी, जिस दिन तेरा व्याह हुआ था !" जला-भुना दीनू कह उठा ।

"क्योंकि मुझे पता था कि शादी के बाद क्या होता है?"

"क्या पता था?"

"सब पता था ।"

"कैसे पता था?" दीनू हार बाधना छोडकर बसन्ती को देख़ने लगा ।

"अब तेरे को क्या बताऊं, बेटी की शादी कर रहा है, वो ही कर, अपनी शादी की सिलाइयां मत उधेड़ । जव शादी की थि, तब पूछनी थी ये बाते । अब बुढापे में क्यों अपने को दिल का दोरा पडवाता है !"

"तू वहुत बिगड रही है वसन्ती?"

"तब मै कितनी जवान होती थी ।" बसन्ती गहरी सांस लेकर कह उठी-"गोरी-चिट्टी और… . !"

"अब भी तो गौरी है ।"

"अब तो धिस-धिसकर काली हो गई हूं । तेरा सारा काला रंग मुझ पर चढ गया । क्या जवानी के दिन थे, मोटर साइकिलों पर लड़के मेरी झोपडी पर चक्कर लगाया करते थे । किसी की मोटर साइकिल नीली होती तो किसी की लाल ।"

" शरम कर, बेटी की शादी का दिन है और कैसी घटिया बाते कर रही है ।"

"ये शरम की नहीं शान की बात है । इस शान की ही निशानी है कामिनी, वरना दुसरी औलाद होती तो तेरे जैसी सडी हुई होती ।"

"क्या मतलब?"

"बूढे हार बांध । दुल्हा आता ही होगा । जल्दी कर, जल्दी ।" बसन्ती मुंह बनाकर कह उठी और झोंपडी में चली गई ।

"लगता है, इसके लिए भी दूल्हा देखकर इसे भी विदा करना पड़ेगा!"----- दीनू बड़बड़ा उठा…"साली खूसट जवान बनती है !"

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मोना चौधरी और सतपाल की नजरे मंदिर के गेट पर जमी थी । दिन के दस बज चुके थे । अभी तक न तो मंगलू दिखा था, न भवतारा ।

"क्या पता शैतान का बेटा गहरी नीद में हो ।" मोना चौधरी बोली ।।

"जो भी हो, हमें उनके बाहर निकलने का इंतजार करना चाहिए । मंगलू एक बार स्थिति बताने बाहर जा जाता तो ....!"

"मगंलू का बार-बार हमारी तरफ़ आना ठीक नहीं ।" मोना चौधरी कह उठी…"शैतान का बेटा, उसकी किसी हरकत पर शक कर गया तो ठीक न होगा । सच बात तो ये है कि सबसे ज्यादा खतरा मंगलू को ही है।"

सतपाल होंठ भिंचकर रह गया ।

" तुम. . . !" मोना चौधरी बोली-----" डर तो नहीं रहे?"

“डर ।।" सतपाल ने माथे पर बल डालकर मोना ,चौधरी को देखा-“किस बात का?"

"भवतारा पर चाकू से बार करने हैं तुम्हें ।"

“किसी शैतान पर बार करना मेरे लिए मामूली बात है । ऐसे काम मैं-करता ही रहता हूं।" सतपाल कड़वे ढंग से मुस्करा पडा ।

मोना चौधरी ने सिर हिलाया और दूसरी तरफ देखने लगी ।

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7

तब ग्यारह से ऊपर का वत्त हुआ था जब मंगलू और भवतारा मंदिर से बाहर निकले । दोनों ही नहाए--धोए बढिया कपड़े पहने हुए थे । भवतारा व्याह करने जो जा रहा था ।

मोना चौधरी और सतपाल सतर्क हो उठे ।

दोनों की आंखों में खतरनाक भाव मचल रहे थे । उन्होंने देखा मंगलू चलते-चलते लापरवाही से नजरे इधर-उधर दौडा रहा था, शायद उन्हें तलाश कर रहा था । वे दोनों सडक पर से आगे न गए, बल्कि मंदिर के आगे पुलिया के पास से ही कच्चे रास्ते पर नीचे उतर गए । वे दोनों विवाह स्थल पर जल्दी पहुचने के लिए छोटा रास्ता अपना रहे थे । . .

"तेयार हो?" मोना चौधरी खतरनाक स्वर में कह उठी ।

"हाँ ।" सतपाल का स्वर र्भिचा हुआ था ।

"हम थोडा-सा उधर से घूमकर चलते हैं, बीच रास्ते में जहाँ पेड हैं । उस जगह पर उसे घेरेगे ।" मोना चौधरी बोली ।

"जल्दी चलो।” '

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"आज तुम्हारी शादी है" । मंगलू मुस्कराकर कह उठा----“कैसा लग रहा है तुम्हें?”

"बहुत अच्छा!" भवतारा मुस्कराया----"मुझे इस बात की ज्यादा खुशी है कि मेरा व्याह कामिनी के साथ हो रहा है ।"

बाते करते मंगलू मोना चौधरी और सतपाल की तलाश मैं भी छिपी निगाह दौड़ा रहा था परंतु वे नजर नहीं आ रहे थे । मंगलू इस बात से परेशान हो उठा कि कही डरकर वे भाग तो नहीं गए ।

“कामिनी और तुम्हारी जोडी बहुत अच्छी लगती है ।" मंगलु बोला ।

" ये तुम कह रहे हो ?"

"हां, सच बात कही है मैँने।"

चलते-चलते भवतारा ने मंगलू के कंधे पर हाथ रखा और मुस्कराकर बोला ।

“तुम मेरे खास दोस्त हो । प्यारे दोस्त! "

" तुम भी वहुत अच्छे हो ।" मगलू मुस्कराया परंतु मन मे परेशानी थी कि मोना चौधरी और सतपाल किधऱ चले गए ।

"अब हमे अलग होना पडेगा ।"

" क्यों ?"

"मेरे पास अब कामिनी रहेगी । तुम नहीं रहोगे ।"

"तो मैं कहां जाऊंगा?"

"तात्रिक बेलीराम के पास चले जाना । वो तुम्हें शिक्षा देगा । तुम बहुत जल्द शैतानी ताकतो को अपना गुलाम वना लोगे ।"

बातों के दौरान वे आगे बढते जा रहे थे ।

" वो तो ठीक है, परंतु तुमने अभी तक मुझे पैसा नहीं दिया । तुमने वादा किया था कि मुझें वहुत सारा पैसा दोगे ।"

"क्या करोगे तुम पैसे का?”

"फिर वो ही बात । मैं कुछ भी करूं । तुम मुझे पैसा दो । मै......!"

" तुम बेलीराम के पास शिक्षा लेने चले जाओगे आज़ । वहां तुम्हें पैसे कौ जरूरत ही नहीं ।"

" तुम ऐसी बाते कहकर मुझें बहला देते हो.....!"

एका एक भवतारा ठिठक गया ।

उसकी आँखें सिकुड गई । माथे पर बल पड गये ।।।

धीरे धीरे उसके होंठ भी मिलने लगे । शरीर मे

क्रोध से भरा तनाव आने लगा ।

दस कदम आगे पेड़ के तने के पीछे से निकलकर मोना चौधरी सामने आ खडी हुई थी ।

मंगलू ने मोना चौधरी को देखा और उसी पल वो घीरे धीरे एक तरफ सरककर भवतारा से दूर होने लगा ।

खामोशी के कई लम्बे पल इसी तरह बीत गए ।

मोना चीथरी और भवतारा एक-दुसरे को देखते रहे ।

भवतारा की गर्दन घूमी और दूर होते मंगलू को देखकर गुस्से बोला ।

" तो तुमने मोना चौधरी को मेरा ठिकाना बताया?" स्वर में धधकता गुस्सा था ।

"'मैं क्यों बताऊंगा ।" अव तक मंगलू पांच-छ: कदम पीछे हो चुका था और होता जा रहा था।

"इस रास्ते पर मोना चौधरी का आ जाना ये ही जाहिर करता है कि इसे तुम लाए । तुमने मुझे धोखा दिया । मैं तुम्हें दोस्त समझता रहा हूं हमेशा ।"

जाने क्यों मंगलू के चेहरे पर कड़वी मुस्कान फैल गई ।

"तुम किसी के नहीं हो सकते ।" मंगलू बोला ।

"क्या बकवास कर रहे हो?”

"तुम किसी के दोस्त नहीं हो सकते । तुम किसी के पति नहीं बन सकतें । तुम राक्षस हो, खून पीने वाले इंसान । दरिन्दे हो तुम । मैं घृणा करता दूंगी । मैंने तुम्हें कभी अपना दोस्त नहीं माना । मैंने हमेशा से नफरत की है । तुम मुझे कभी भी अच्छे नहीं लगे । खुद को मेरा दोस्त कहते हो और मेरी माशूका से व्याह रचाने के लिए मुझे साथ ले जा रहे हो । तुम. .. . . शैतान हो । सच में शैतान हो । तुम्हें क्या मालूम कि दोसा क्या होता है और पत्नी क्या होती है ।" मंगलू कड़वे स्वर में कहता जा रहा था…“तुमने मुझे कहा कि मेरा काम करो, मैं तुम्हें दौलत दूगा । मैंने तुम्हारा काम कर दिया । तुमने दौलत ही नहीं दी । उपर से कामिनी को भी मुझसे दूर कर दिया, खुद ब्याह करने जा रहे हो उससे, तुम्हारी दोस्ती का तो जवाब नहीं ।"

" धोखेबाज ।" दांत किटकिता उठा भवतारा-"गलती मेरी ही थी, जो मैंने अपनी ताकती को तुम पर नजर रंरव्रने को नहीं कहा । कहा होता तो तेरी एक एक हरकत की जानकारी मुझे मिलती रहती । मै तुझे अपना दोस्त मानता रहा और .....!"

" लेकिन मैंने तो तेरे को कभी अपना दोस्त नही माना ? खून पीने बाले इंसान !"

" मै तेरे को नही छोडूगां , मार दूगा तुझे....मै...!"

" तू मूझे नही पकड़ पाएगा मै भाग जाऊँगा यहां से , तू मूझे नही मार सकता !" मगंलू गुर्रा उठा ।।

भवतारा के होठो से गुर्राहट निकली और मोना चौधरी को देखने लगा ।।

मोना चौधरी होट भिंचे एकटक मगंलू को देख रही थी ।।

" तू क्या चाहती है मुझसे ?" भवतारा दांत किटकिटा उठा ।

" तेरी मौत !"

"तू मारेगी मुझे..... मुझे शैतान के बेटे को ।" भवतारा हंसा मौत भरे ढंग से-----" देख, तू मरेगी ..... अब .....!"

"तू इंसानी भेडिया है, जो इंसानों का खून पीता है ! नर पिशाच है तू ।" मोना चौधरी तेज स्वर में कह उठी…“तेरे को मारकर मुझे बहुत खुशी होगी कि मैंने इंसानी भेड्रिए से मासूम लोगों को मुक्ति दिलाई !"

यहीं वो पल थे जबकि भवतारा के पीछे की तरफ से, पेड के मोटे तने के पीछे से चाकू थामे सतपाल निकला और चीते की तरंहे दबे पाव भवतारा की पीठ की तरफ़ बढ़ने लगा ।।

मंगलू ने सतपाल को देखा तो चौका ।।

जबकि मोना चौधरी की निगाह भवतारा पर ही रही ।।

वो जानती थी कि इस वक्त अगर उसकी निगाह पीछे सतपाल पर गई तो शैतान का बेटा भांप जाएगा कि उसके पीछे कुछ गड़बड है !!

मोना चौधरी पुनः कह उठी ।।

“तेरी शैतानी ताकते रात को तेरा साथ देती है, दिन मैं सूर्य की रोशनी में तू कमजोर हो जाता है ।"

"तेरी यहीं गलती तुझे मौत के दरवाजे पर ले आई !" भवतारां क्रूरता-भरे ढंग से मुस्करा पड़ा…“मैं अभी भी.....!"

यही वो पल थे कि पीछे पहुच चुके सतपाल ने चाकू वाला हाथा उठाया और पूरी ताकत से उसके कधूं पर दे मारा ।

भवतारा ने तो, सपने में भी नही सोचा था कि ऐसा कुछ होगा।।।
 
चाकू उसके कंधे में घंसता चला गया' । भवतारा के मस्तिष्क में तीव्र झटका लगा । उसका शरीर बेहद मद्धिम ढंग से ऐसे हिला जैसे किसी पहाड मे कम्पन आने पर हिलता है । अगले ही पल भवतारा के चेहरे के पर भाव वहशी होने लगे ।

तभी, उसके कंधे में धंसे चाकू को सतपाल ने निकालने की चेष्टा की ।

भवतारा फुर्ती से पीछे पलटा । अब सतपाल सामने था ।

दोनों की नजरे मिली । सतपाल सकपका सा उठा । चाकू नहीं निकाल पाया था वो ।

अगर निकाल लेता तो अब पेट में घुसेड़ सकता था ।

"पीछे से बार करता है कमीने!" कहते हुए भवतारा ने दोनों हाथों से गर्दन पकड ली सतपाल की । सतपाल छटपटा उठा । गर्दन छुडाने की चेष्टा की, परंतु दोनों हाथ लोहे के शिकंजे जैसे थे । दबाव बढने लगा शिकंजे का, सतपाल का दम घुटने लगा । भवतारा का चेहरा क्रोध से वहशी-दर-वहशी होता जा रहा था । दुर खडा मंगलू घबराया-सा ये सब देख रहा था ।

तभी मोना चौधरी चौधरी दौडी और उछाल भरी ।

उसका शरीर हवा में उछला और दोनों पैर भवतारा के कंधे, पर जा टिके, मात्र पल-भर के लिए । इसके साथ ही वो फुर्ती से झुकी और कधें में धंसे चाकू को खींचकर नीचे कूद गई ।

सतपाल का चेहरा दम घुटने के वजह से टमाटर की तरह लाल हो रहा था । शायद कुछ ही क्षणों में उसका दम भी निकल जाता, परंतु तभी मोना चौधरी चाकू के ताबड्र तोड़ वार भवतारा के शरीर पर करने लगी ।

एक. , दो . .तीन.. .चार. . पांच. .छः....सात. ....आठ. ..नौ ,दस. ...ग्यारह ।

मोना चौधरी ठिठकी और हांफने लगी । इन बारों की वजह से भवतारा के हाथों की पकड सतपाल की गर्दन पर से ढीली हो गई, परंतु हाथ तब भी गर्दन से न हटे । मोना चौधरी ने जोरदार कैरेट चाप उसकी बांह पर मारी । तब जाकर भवतारा के हाथ उसके गले से हटे । सतपाल बेजान होकर नीचे गिरा और लगभग टूट चुकी सांसो को ठीक करने की चेष्टा करने लगा । उसका चेहरा अभी तक लाल सा हुआ पडा था । इतने में ही मोना चौधरी भांप चुकी थी कि शैतान के के शरीर में अथाह शक्ति है । मोना चौधरी पुन; चाकू का वार उसकी कमर में मैं किया और चाकू बाहर खींच लिया ।

भवतारा मोना चौधरी की तरफ पलटा ।

"तेरे इन वारो से मेरा कुछ न विगडेगा मोना चौधरी! शाम ढलते ही, मेरी शक्तियां मेरे शंरीर को फिर स्वस्थ कर देंगी, परंतु तू अब नहीं

बचेगी, तुम सब मरोगे ।" भवतारा गुर्रा उठा ।

"ये चाकू देख रहा है !" मोना चौधरी ने खून से सना चाकू उसके सामने लंहराया----" ये तेरा ही है !"

भवतारा ने चाकू को देखा, फिर गर्दन घुमाकर मंगलू को देखा ।

मगंलू ने उसे अपनी तरफ देखते पाकर घबराहट में गले में फंसी थूक सटकी । उसी पल मोना चौधरी ने उसके पेट से चाकू घूसेड़ा औऱ उसे घुमाते हुए बाहर निकाला, फिर पीछे हटी ।

भवतारा के होंठों से गुर्राहट निकली, वो गला फाढ़कर चीखते हुए हैं मोना चौधरी की तरफ दोड़ा । मोना चौधरी को आशा न थी कि शैतान का बेटा ऐसा कुछ करेगा । मोना चौधरी ने बचने की चेष्टा की । वो कुछ बची और कुछ नहीं । भवतारा दोनों हाथों में उसका गला थाम लेना चाहता था । बचने की चेष्टा में मोना चौधरी की बांह ही हाथ आ सकी भवतारा के ।

मोना चौधरी ने चाकू वाला हाथ घुमाया ।

चाकू का फल गाल में जा धंसा । हाथ वापस खीचा तो चाकू बाहर निकल आया । भवतारा की आंखे गुस्से से लाल हो रही थी ।

भवतारा ने जोरों का घूसा मोना चौधरी के चेहरे पर मारा ।

मोना चौधरी के होंठों से तेज चीख निकली । वो गिरने लगी, पंरतु भवतारा ने उसकी बांह न छोडी । मोना चौधरी के होठो से जोरों की चीख निकल गई ।

भवतारा ने उसके चाकू बाले हाथ पर झपट्टा मारा ।

मोना चौधरी ने चाकू वाला हाथ पीछे कर लिया । घूसे की वजह से उसके होंठों से खून निकल रहा था । भवतारा ने घुटना मोना-चौधरी के पेटं मेँ मारा ।।

मोना चौधरी को ऐसा लगा जेसे कोई खम्बा पेट में आ धंसा हो । गला फाड़कर वो चीखी और दोहरी…होकर नीचे बैठती ही चली गई ।

भवतारा ने उसकी बांह छोडी और उसके हाथ में दवे अपने चाकू पर झपटा । मोना चौधरी ने चाकू बाला हाथ पीछे कर लिया ।

किसी भी हाल में चाकू को भवतारा के पास न जाने देना चाहती थी ।।

चेहरे पर लगे घूसे और पेट में लगे घुटने ने, मोना चौधरी की जान निकाल दी थी । उसे पूरी तरह महसूस हो चुका था कि दिन मे भी शैतान का बेटा अथाह शारीरिक शक्ति का मालिक है , आम लोगों की तरह साधारण-सी ताकत नहीं है उसमे ।

इससे पहले कि भवतारा पुन: चाकू छीनने की चेष्टा करता, मोना चौधरी ने चाकू को दूर फेक दिया । सतपाल को देखा वो अभी तक उसी जगह पर बैठा अपने क्रो ठीक करने की चेष्टा में हांफ़ रहा था । अभी वो किसी काबिल नही था ।

भवतारा मोना चौधरी पर भारी पड़ रहा था , मोना चौधरी को अवतारा का मुकाबला करना कठिन लगने लगा था ।
 
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