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मगलू गोल कमरे में पहुचा और चैन की लम्बी सांस ली ।
मन-ही-मन सोचा कि अव भवतारा आ भी जाए तो परवाह नहीं । जव थ्रोड़ा सामान्य हुआ तो बाथरूम में जाकर हाथ-पुंह धोया । मस्तिष्क पुन: दौडने लगा । क्या अभी चाकू दे आए मोना चौधरी औंर सतपाल को? . नहीं, इतनी जल्दी भी ठीक नहीं । पीछे से भवतारा आएगा और उसे न पाकर क्या सोचेगा? इस वक्त उसे सब्र से काम लेना चाहिए ।
और अपनी हरकते सामान्य रखनी चाहिए । लो ही काम करने चाहिए जो हर बात करता है ।
मंगलू अपने कमरे में पहुचा ।
पहने कपेड़े उतारे और खूंटी पर लटका दिए । चाकू पैंट की जेब में ही था । खुद अंडरवियर में ही वेड पर आ लेता था । लेटने के पश्चात वो छत को देखने लगा । सोचे तेजी से दोड़ रही थी । कल वो चाकू मोना चौधरी और सतपाल को दे देगा, फिर क्या वे दोनों भवतारा को समाप्त कर सकेंगे? इस सोच ने मंगलू की नीद उड़ा दी थी कि क्या सच मे भबंतारा मर जाएगा । उससे उसकी जान छूट जाएगी?
@@@@@@@@@@@@@@@@@@
।
अगली सुवह हुई ।
मंगलू रात क्रो अवतारा के आने से पहले ही सो गया था । वो कब आया, उसे नहीं पता था । अब नीद से उठने के बाद से पहले वो ऊपर भवतारा के कमरे में पहुंचा और भीतर झांका ।
भवतारा बैड पर सोया हुआ था, हाथ-पांव फैलाए।
उसकी कमीज पर लगा काफी सारा खुन नजर आ रहा था ।
मगंलू बहां से नीचे आ गया । कमरे में पहुंचा और खूंटी पर टगी पैंट को चैक किया । चाकू पैट की जेब में मौजूद था । इससे उसे राहत
मिली ।।।
उसके बाद वो नहा-धोकर तैयार हुआ । पैट की जेब से चाकू निकलकर नई पेंट की जैव में रखा, फिर बाहर निकल आया । मोना चौधरी और सतपाल के पास पहुच जाना चाहता था वो ।
" मंदिर के बाहर पुलिया के पास से निकला तो कामिनी की याद ताजा हुई ।
परंतु कामिनी की याद फौरन ही मस्तिष्क से गुल होगई क्योंकि उसके पास काम था । चाकू था और वो चाकू इस वक्त मुसीबत से ज्यादा लग रहा था । उससे वो पीछा छुडा लेना चाहता था । उसकी जेब में पैसे न थे कि बस या टैक्सी लेकर मोना चौधरी, सतपाल के
पास होटल पहुच पाता ।
इसलिए सारा रास्ता मगलू ने पैदल ही तय किया ।
तेज-तेज चलने पर भी उसे होटल तक पहुंचने में डेढ़ घंटा लगा । जब मगंलू ने कमरे में प्रवेश. किया था तो तेज-तेज सांसे लेता हाफ़ रहा था । मोना चौधरी और सतपाल की निगाह उस पर टिक गई ।
“तुम......!"
मंगलू ने जेब से चाकू निकाला और टेबल पर रख दिया ।
"ये रहा चाकू शैतान बेटे का चाकू तुम इसी चाकू को मांग रहे थे ।" सतपाल की आंखों में चमक आ गई ।
मोना चौधरी मुस्करा पडी ।
“तुमने तो वहुत बड़ा काम कर दिया मंगलूं !! मोना चौधरी कह उठी । सतपाल ने आगे बढ़कर चाकू को उठाया । देखा ।
"हां ।" सतपाल ने चाकू अपनी में डालते हुए कहा…"यही है शैतान के बेटे का चाकू।"
"मैंने अपना काम कर दिया है !" मगंलू बोला।
"मुझे शेतान के बेटे की दिनचर्या बता ।" सतपाल बोला ।
मंगलू ने बताया कि भवतारा दिन में क्या-क्या करता है!
"कल वो कामिनी के साथ शादी कर रहा है ।" एकाएक मंगलू कह उठा ।
"कल-शादी?"
“हां-----बो. ..।"
"ये तो वहुत अच्छा मौका होगा उस पर वार करने का।" सतपाल कह उठा ।
"कहां करेगा वो शादी?" मोना चौधरी ने पूछा ।
" ये अभी उसने बताया नहीं । रोज सुबह उठने के बाद के कामिनी की झोंपडी में जाता है ।"
"सुबह ।"
" उसकी सुबह दिन के बारह-एक बजे होती है ।" मंगलू बोला ।
"तब बों अकेला होता है ?"
"हां ।"
“इसका मतलब आज की सुबह तो निकल गई ।" मोना चौधरी बोली…"कल हमारा काम हो सकता है ।"
"कर वो शादी कर रहा है ।" मोना चौधरी के चेहरे पर कड़वे भाव उभरे।
"लेकिन शादी कर नहीं पाएगा । वो मंदिर से निकलेगा और मारा जाएगा ।"
" सच मे वो मरा जाएगा?" पूछा मंगलू ने ।
"हां ।" सतपाल के दांत भिच गये----" कल वो सच में मरेगा । उसे मारने के लिए उसके चाकू की जरूरत थी, वो तुमने हमे ला दिया और 'खबरी' बनकर उसके वारे में हमें हर खबर दे रहे हो । ऐसे में उसका बचना मुमकिन नहीं ।"
"अब मैंने क्या खबर देनी है? मैंने तो सब कुछ बता दिया।"
"अभी तुम्हारा काम वाकी है ।"
"बाकी -नही, मैं अब और कोई काम नहीं करूगां । चाकू लाकर देना ही आखरी काम....!"
" मगंलू , जहाँ तुमने इतना काम किया है वहां-थोड़ा-स्रा और ....!"
"बो मुझे मार देगा । मैं बार-बार उसे धोखा नहीं दे सकता । वै चालाक है । भांप जाएगा कि .....!"
"आखिरी मौके पर तुम हमारा साथ छोड देना चाहते हो?"
"नहीं, मैं अब कोई काम नहीं करूंगा ।" मंगलू ने मोना चौधरी को देखकर क्या…"मै अब वापस नहीं जाऊंगा ।" '
"ये तो तुम जानते ही हो कि हम जो भी कर रहे हैं, उससे तुम्हारा फायदा भी है ।" मोना चौधरी गंभीर स्वर मे बोली ।
"मेरा फायदा? "
"उसके मरते ही कामिनी तुम्हें मिल जाएगी । तुम्हारा प्यार तुम्हें वापस मिल जाएगा ।”
मंगलू ने सूखे होंठों पर जीभ फेरी ।
"सोचो, तब तुम्हें कितना अच्छा लगेगा, कामिनी को जब अपने पास पाओगे ।"
मंगलू ने व्याकुलता से पहलू बदला ।
मन-ही-मन सोचा कि अव भवतारा आ भी जाए तो परवाह नहीं । जव थ्रोड़ा सामान्य हुआ तो बाथरूम में जाकर हाथ-पुंह धोया । मस्तिष्क पुन: दौडने लगा । क्या अभी चाकू दे आए मोना चौधरी औंर सतपाल को? . नहीं, इतनी जल्दी भी ठीक नहीं । पीछे से भवतारा आएगा और उसे न पाकर क्या सोचेगा? इस वक्त उसे सब्र से काम लेना चाहिए ।
और अपनी हरकते सामान्य रखनी चाहिए । लो ही काम करने चाहिए जो हर बात करता है ।
मंगलू अपने कमरे में पहुचा ।
पहने कपेड़े उतारे और खूंटी पर लटका दिए । चाकू पैंट की जेब में ही था । खुद अंडरवियर में ही वेड पर आ लेता था । लेटने के पश्चात वो छत को देखने लगा । सोचे तेजी से दोड़ रही थी । कल वो चाकू मोना चौधरी और सतपाल को दे देगा, फिर क्या वे दोनों भवतारा को समाप्त कर सकेंगे? इस सोच ने मंगलू की नीद उड़ा दी थी कि क्या सच मे भबंतारा मर जाएगा । उससे उसकी जान छूट जाएगी?
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अगली सुवह हुई ।
मंगलू रात क्रो अवतारा के आने से पहले ही सो गया था । वो कब आया, उसे नहीं पता था । अब नीद से उठने के बाद से पहले वो ऊपर भवतारा के कमरे में पहुंचा और भीतर झांका ।
भवतारा बैड पर सोया हुआ था, हाथ-पांव फैलाए।
उसकी कमीज पर लगा काफी सारा खुन नजर आ रहा था ।
मगंलू बहां से नीचे आ गया । कमरे में पहुंचा और खूंटी पर टगी पैंट को चैक किया । चाकू पैट की जेब में मौजूद था । इससे उसे राहत
मिली ।।।
उसके बाद वो नहा-धोकर तैयार हुआ । पैट की जेब से चाकू निकलकर नई पेंट की जैव में रखा, फिर बाहर निकल आया । मोना चौधरी और सतपाल के पास पहुच जाना चाहता था वो ।
" मंदिर के बाहर पुलिया के पास से निकला तो कामिनी की याद ताजा हुई ।
परंतु कामिनी की याद फौरन ही मस्तिष्क से गुल होगई क्योंकि उसके पास काम था । चाकू था और वो चाकू इस वक्त मुसीबत से ज्यादा लग रहा था । उससे वो पीछा छुडा लेना चाहता था । उसकी जेब में पैसे न थे कि बस या टैक्सी लेकर मोना चौधरी, सतपाल के
पास होटल पहुच पाता ।
इसलिए सारा रास्ता मगलू ने पैदल ही तय किया ।
तेज-तेज चलने पर भी उसे होटल तक पहुंचने में डेढ़ घंटा लगा । जब मगंलू ने कमरे में प्रवेश. किया था तो तेज-तेज सांसे लेता हाफ़ रहा था । मोना चौधरी और सतपाल की निगाह उस पर टिक गई ।
“तुम......!"
मंगलू ने जेब से चाकू निकाला और टेबल पर रख दिया ।
"ये रहा चाकू शैतान बेटे का चाकू तुम इसी चाकू को मांग रहे थे ।" सतपाल की आंखों में चमक आ गई ।
मोना चौधरी मुस्करा पडी ।
“तुमने तो वहुत बड़ा काम कर दिया मंगलूं !! मोना चौधरी कह उठी । सतपाल ने आगे बढ़कर चाकू को उठाया । देखा ।
"हां ।" सतपाल ने चाकू अपनी में डालते हुए कहा…"यही है शैतान के बेटे का चाकू।"
"मैंने अपना काम कर दिया है !" मगंलू बोला।
"मुझे शेतान के बेटे की दिनचर्या बता ।" सतपाल बोला ।
मंगलू ने बताया कि भवतारा दिन में क्या-क्या करता है!
"कल वो कामिनी के साथ शादी कर रहा है ।" एकाएक मंगलू कह उठा ।
"कल-शादी?"
“हां-----बो. ..।"
"ये तो वहुत अच्छा मौका होगा उस पर वार करने का।" सतपाल कह उठा ।
"कहां करेगा वो शादी?" मोना चौधरी ने पूछा ।
" ये अभी उसने बताया नहीं । रोज सुबह उठने के बाद के कामिनी की झोंपडी में जाता है ।"
"सुबह ।"
" उसकी सुबह दिन के बारह-एक बजे होती है ।" मंगलू बोला ।
"तब बों अकेला होता है ?"
"हां ।"
“इसका मतलब आज की सुबह तो निकल गई ।" मोना चौधरी बोली…"कल हमारा काम हो सकता है ।"
"कर वो शादी कर रहा है ।" मोना चौधरी के चेहरे पर कड़वे भाव उभरे।
"लेकिन शादी कर नहीं पाएगा । वो मंदिर से निकलेगा और मारा जाएगा ।"
" सच मे वो मरा जाएगा?" पूछा मंगलू ने ।
"हां ।" सतपाल के दांत भिच गये----" कल वो सच में मरेगा । उसे मारने के लिए उसके चाकू की जरूरत थी, वो तुमने हमे ला दिया और 'खबरी' बनकर उसके वारे में हमें हर खबर दे रहे हो । ऐसे में उसका बचना मुमकिन नहीं ।"
"अब मैंने क्या खबर देनी है? मैंने तो सब कुछ बता दिया।"
"अभी तुम्हारा काम वाकी है ।"
"बाकी -नही, मैं अब और कोई काम नहीं करूगां । चाकू लाकर देना ही आखरी काम....!"
" मगंलू , जहाँ तुमने इतना काम किया है वहां-थोड़ा-स्रा और ....!"
"बो मुझे मार देगा । मैं बार-बार उसे धोखा नहीं दे सकता । वै चालाक है । भांप जाएगा कि .....!"
"आखिरी मौके पर तुम हमारा साथ छोड देना चाहते हो?"
"नहीं, मैं अब कोई काम नहीं करूंगा ।" मंगलू ने मोना चौधरी को देखकर क्या…"मै अब वापस नहीं जाऊंगा ।" '
"ये तो तुम जानते ही हो कि हम जो भी कर रहे हैं, उससे तुम्हारा फायदा भी है ।" मोना चौधरी गंभीर स्वर मे बोली ।
"मेरा फायदा? "
"उसके मरते ही कामिनी तुम्हें मिल जाएगी । तुम्हारा प्यार तुम्हें वापस मिल जाएगा ।”
मंगलू ने सूखे होंठों पर जीभ फेरी ।
"सोचो, तब तुम्हें कितना अच्छा लगेगा, कामिनी को जब अपने पास पाओगे ।"
मंगलू ने व्याकुलता से पहलू बदला ।