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खौफनाक इमारत
बाइ -इबने सफ़ी
सूट पहेन लेने के बाद इमरान आईने के सामने लच्छक-लच्छक कर टाइ बाँधने की कोशिश कर रहा था !
ओह…फिर
वही…छोटी-बड़ी…मैं कहता हूँ टाइ ही ग़लत आने लगी है
वो बॅड-बड़ाता रहा
‘लाहोल विला क़ुव्वत… नही बाँधता
यह कह कर उसने झटका जो मारा तो रेशमी टीए की गाँठ फिसलती हुई ना सिर्फ़ गर्दन से जा लगी, बल्कि इतनी तंग हो गयी की उसका चेहरा सुर्ख हो गया और आँखे उबल पड़ी
बाख…बाख…खि…
उसके हलक से घुटि-घुटि सी आवाज़े निकलने लगी और वो फेफड़ो का पूरा ज़ोर लगा कर चीखा
अरे मारा… बचाओ सुलेमान
एक नौकर दौड़ता हुआ कमरे में दाखिल हुआ
पहले तो वो कुछ समझा नही कि इमरान सीधा खड़ा हुआ दोनो हाथो से अपनी टांगे पीट रहा था
क्या हुआ सरकार ? नौकर भर्राई आवाज़ में
बोला
सरकार के बच्चे मर रहा हूँ
अरे… लेकिन…मगर…?
लेकिन…मगर…अगर…
इमरान दाँत पीस कर नाचता हुआ बोला, अबे ढीली कर
क्या ढीली करूँ ? नौकर ने हैरान हो कर कहा
अपने बाप के कफ़न की डोरी… जल्दी कर…अरे मरा
तो ठीक से बताते क्यूँ नही ? नौकर भी झुन्झुला गया
अच्छा बे
तो क्या मैं ग़लत बता रहा हू ?
मैं यानी
इमरान एम.एस.सी, पी-एच.डी. क्या ग़लत बता रहा हू
आबे कम्बख़्त
इसे उर्दू में इस्ते-आरा
और
अँग्रेज़ी में मोटेफर कहते है
अगर मैं ग़लत कहे रहा हूँ तो बा-क़ायदा भेज कर मरने से पहले यही सही
नौकर ने गौर से देखा तो उसकी नज़र टाइ पर पड़ी जिसकी गाँठ गर्दन में बुरी तरह से फसी हुई थी और नसें उभरी हुई थी
दिन में केयी बार उसे इस क़िस्म की हिमाकतों का सामना करना पड़ता था
उसने इमरान के गले से टाइ खोली
अगर
मैं ग़लत कह रहा था तो यह बात तेरी समझ में कैसे आई ? इमरान गरज कर बोला
ग़लती हुई साहब
फिर वही कहता है,किससे ग़लती हुई ?
मुझसे
साबित करो कि तुमसे ग़लती हुई
इमरान एक सोफे में गिर कर उसे घूरता हुआ बोला
नौकर सर खुजाने लगा
जुएँ है क्या तुम्हारे सर में इमरान ने डाँट कर पूछा
नही तो
तो फिर क्यूँ खुजा रहा थे ?
यूही
जाहिल…गवार…काम्खा बेतुकी हरकते कर के अपनी एनर्जी बर्बाद करते हो
नौकर खामोश रहा
युंग की साइकॉलजी पढ़ी है तुमने ? इमरान ने पूछा
नौकर ने ‘नही’ में सर हिला दिया
युंग के हिज़्जे जानते हो
नही साहब नौकर उकता कर बोला
अच्छा याद कर लो…जे-यू-एन-जी…युंग
बहुत से जाहिल इसे जुंग पढ़ते है और कुछ जूंग… जिन्हे क़ाबिलियत का हैज़ा हो जाता है वो योंग पढ़ने और लिखने लगते है…फ्रांसीसी में जो ‘जे’ की आवाज़ देता है. मगर युंग फ्रांसीसी नही था
शाम को मुर्ग खाएँगे…या तीतर ? नौकर ने पूछा
आधा तीतर आधा बटेर
इमरान
झुन्झुला कर बोला हां तो मैं अभी कह रहा था…व्होन
खामोश हो कर सोचने लगा
आप कहे रहे थे कि मसाला इतना भूना जाए कि सुर्ख हो जाए नौकर ने संजीदगी से कहा
हाँ और
हमेशा नर्म आँच पर भुन इमरान बोला
कदची को इस तरह देघची में ना हिलाओ की खनक पैदा हो और पड़ोसियो की राल टपकने लगे
वैसे
क्या तुम मुझे बता सकते हो कि मैं कहाँ जाने की तैयारी कर रहा था ?
आप
नौकर कुछ सोचता हुआ बोला
आप मेरे लिए एक सलवार-कमीज़ का कपड़ा खरीदने जा रहे थे बीस हज़ार का लट्ठा और कमीज़ के लिए बॉस्कि
गुड
तुम बहुत क़ाबिल और नमक-हलाल नौकर हो
अगर तुम मुझे याद ना दिलाते रहे तो मैं सब कुछ भूल ज़ाउ
मैं टाइ बाँध दू सरकार नौकर ने बड़े प्यार से कहा
बाँध दो
नौकर टाइ बाँधते वक़्त बॅड-बड़ाता जा रहा था बीस हज़ार का लट्ठा और कमीज़ के लिए बॉस्कि कहिए तो लिख दू
बहुत ज़्यादा अच्छा रहेगा इमरान ने कहा
टाइ बाँध चूकने के बाद नौकर ने काग़ज़ के एक टुकड़े पर पेन्सिल से घसीत कर उसकी तरफ बढ़ा दिया
यूही नही
इमरान अपने सीने की तरफ इशारा कर के संजीदगी से बोला
इसे यहाँ पिन कर दो
नौकर ने एक पिन की मदद से उसके सीने पर लगा दिया
अब याद रहेगा इमरान ने कहा
और
कमरे से निकल गया...
राहदारी तय कर के वो ड्राइयिंग-रूम में पहुँचा…
यहा तीन लड़किया बैठी थी
वाह इमरान भाई इन में से एक बोली
खूब इंतेज़ार कराया कपड़े पहेन्ने में इतनी देर लगाते है
ओह तो क्या आप लोग मेरा इंतेज़ार कर रही थी ?
क्यूँ क्या आप ने एक घंटा पहले पिक्चर चलने वादा नही किया था ?
बाइ -इबने सफ़ी
सूट पहेन लेने के बाद इमरान आईने के सामने लच्छक-लच्छक कर टाइ बाँधने की कोशिश कर रहा था !
ओह…फिर
वही…छोटी-बड़ी…मैं कहता हूँ टाइ ही ग़लत आने लगी है
वो बॅड-बड़ाता रहा
‘लाहोल विला क़ुव्वत… नही बाँधता
यह कह कर उसने झटका जो मारा तो रेशमी टीए की गाँठ फिसलती हुई ना सिर्फ़ गर्दन से जा लगी, बल्कि इतनी तंग हो गयी की उसका चेहरा सुर्ख हो गया और आँखे उबल पड़ी
बाख…बाख…खि…
उसके हलक से घुटि-घुटि सी आवाज़े निकलने लगी और वो फेफड़ो का पूरा ज़ोर लगा कर चीखा
अरे मारा… बचाओ सुलेमान
एक नौकर दौड़ता हुआ कमरे में दाखिल हुआ
पहले तो वो कुछ समझा नही कि इमरान सीधा खड़ा हुआ दोनो हाथो से अपनी टांगे पीट रहा था
क्या हुआ सरकार ? नौकर भर्राई आवाज़ में
बोला
सरकार के बच्चे मर रहा हूँ
अरे… लेकिन…मगर…?
लेकिन…मगर…अगर…
इमरान दाँत पीस कर नाचता हुआ बोला, अबे ढीली कर
क्या ढीली करूँ ? नौकर ने हैरान हो कर कहा
अपने बाप के कफ़न की डोरी… जल्दी कर…अरे मरा
तो ठीक से बताते क्यूँ नही ? नौकर भी झुन्झुला गया
अच्छा बे
तो क्या मैं ग़लत बता रहा हू ?
मैं यानी
इमरान एम.एस.सी, पी-एच.डी. क्या ग़लत बता रहा हू
आबे कम्बख़्त
इसे उर्दू में इस्ते-आरा
और
अँग्रेज़ी में मोटेफर कहते है
अगर मैं ग़लत कहे रहा हूँ तो बा-क़ायदा भेज कर मरने से पहले यही सही
नौकर ने गौर से देखा तो उसकी नज़र टाइ पर पड़ी जिसकी गाँठ गर्दन में बुरी तरह से फसी हुई थी और नसें उभरी हुई थी
दिन में केयी बार उसे इस क़िस्म की हिमाकतों का सामना करना पड़ता था
उसने इमरान के गले से टाइ खोली
अगर
मैं ग़लत कह रहा था तो यह बात तेरी समझ में कैसे आई ? इमरान गरज कर बोला
ग़लती हुई साहब
फिर वही कहता है,किससे ग़लती हुई ?
मुझसे
साबित करो कि तुमसे ग़लती हुई
इमरान एक सोफे में गिर कर उसे घूरता हुआ बोला
नौकर सर खुजाने लगा
जुएँ है क्या तुम्हारे सर में इमरान ने डाँट कर पूछा
नही तो
तो फिर क्यूँ खुजा रहा थे ?
यूही
जाहिल…गवार…काम्खा बेतुकी हरकते कर के अपनी एनर्जी बर्बाद करते हो
नौकर खामोश रहा
युंग की साइकॉलजी पढ़ी है तुमने ? इमरान ने पूछा
नौकर ने ‘नही’ में सर हिला दिया
युंग के हिज़्जे जानते हो
नही साहब नौकर उकता कर बोला
अच्छा याद कर लो…जे-यू-एन-जी…युंग
बहुत से जाहिल इसे जुंग पढ़ते है और कुछ जूंग… जिन्हे क़ाबिलियत का हैज़ा हो जाता है वो योंग पढ़ने और लिखने लगते है…फ्रांसीसी में जो ‘जे’ की आवाज़ देता है. मगर युंग फ्रांसीसी नही था
शाम को मुर्ग खाएँगे…या तीतर ? नौकर ने पूछा
आधा तीतर आधा बटेर
इमरान
झुन्झुला कर बोला हां तो मैं अभी कह रहा था…व्होन
खामोश हो कर सोचने लगा
आप कहे रहे थे कि मसाला इतना भूना जाए कि सुर्ख हो जाए नौकर ने संजीदगी से कहा
हाँ और
हमेशा नर्म आँच पर भुन इमरान बोला
कदची को इस तरह देघची में ना हिलाओ की खनक पैदा हो और पड़ोसियो की राल टपकने लगे
वैसे
क्या तुम मुझे बता सकते हो कि मैं कहाँ जाने की तैयारी कर रहा था ?
आप
नौकर कुछ सोचता हुआ बोला
आप मेरे लिए एक सलवार-कमीज़ का कपड़ा खरीदने जा रहे थे बीस हज़ार का लट्ठा और कमीज़ के लिए बॉस्कि
गुड
तुम बहुत क़ाबिल और नमक-हलाल नौकर हो
अगर तुम मुझे याद ना दिलाते रहे तो मैं सब कुछ भूल ज़ाउ
मैं टाइ बाँध दू सरकार नौकर ने बड़े प्यार से कहा
बाँध दो
नौकर टाइ बाँधते वक़्त बॅड-बड़ाता जा रहा था बीस हज़ार का लट्ठा और कमीज़ के लिए बॉस्कि कहिए तो लिख दू
बहुत ज़्यादा अच्छा रहेगा इमरान ने कहा
टाइ बाँध चूकने के बाद नौकर ने काग़ज़ के एक टुकड़े पर पेन्सिल से घसीत कर उसकी तरफ बढ़ा दिया
यूही नही
इमरान अपने सीने की तरफ इशारा कर के संजीदगी से बोला
इसे यहाँ पिन कर दो
नौकर ने एक पिन की मदद से उसके सीने पर लगा दिया
अब याद रहेगा इमरान ने कहा
और
कमरे से निकल गया...
राहदारी तय कर के वो ड्राइयिंग-रूम में पहुँचा…
यहा तीन लड़किया बैठी थी
वाह इमरान भाई इन में से एक बोली
खूब इंतेज़ार कराया कपड़े पहेन्ने में इतनी देर लगाते है
ओह तो क्या आप लोग मेरा इंतेज़ार कर रही थी ?
क्यूँ क्या आप ने एक घंटा पहले पिक्चर चलने वादा नही किया था ?