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नगमा की आखों में हैरानी के भाव उभर आए । चौरसिया की तरफ इस तरह देखने लगी वह जैसे चिडियाघर के सबसे बिचित्र जानवर को देख रही हो ! बोली--------" ऐसा क्या सूझ गया तुम्हें ?"
" तुम्हें नहीं उस सूरमा को बताऊंगा !"
" किसे ?"
" तुम्हारे नवाबजादे को !"
" अचानक ही तुम बहुत कांफिडेंस से भरे और रहस्यमय नजर आने लगे हो ! उस चक्रव्यूह में घुसने को पूरी तरह तैयार जिस में फंसकर तुम जैसे तीन हुनरमंद अपनी जान गवां चुके हैं !"
" इसमें कोई शक नहीं कि अब मैं तुम्हारे नवाब से मिलने के लिए बेचैन हूं ! यह अलग बात है कि इसके अलावा मेरे पास कोई चारा भी नहीं है ! भागने के सारे रास्ते उसने बंद कर ही रखे हैं !"
" पता नहीं अचानक ही तुम कौन सी हवा में उड़ने लगे हो फिर भी , मैं एक नेक सलाह देने से खुद को रोक नहीं पा रही हूं !"
" दो !"
" नवाब को धोखा देने की कोशिश मत करना !"
" तो क्या उन तीनों फारेनर हैकर्स ने नवाब को धोखा दिया था, जिन्हें उसने कत्ल कर दिया ?"
" नवाब को धोखा देना इतना आसान नहीं है ! लेकिन वे तीनों विदेशी , नवाब की उम्मीदों से कहीं ज्यादा स्मार्ट बन रहे थे ! उन्होने धोखा देने की कोशिश की और सजा पाई !"
" यानी अगर मैं तुम्हारे कथित नवाब को धोखा देने का इरादा नहीं रखता तो मुझे फिक्र करने की जरूरत नही है ! मेरा हश्र पहले वाले हैकर्स जैसा नहीं होगा ?"
" अपने काम के आदमियों और वफादारों को तो वह सिर आंखों पर बैठा कर रखता है ! तुम्हारे पास भी एक हुनर है , जिसका नवाब इस्तेमाल करना चाहता है , जिसके लिए वह तुम्हें अॉफर करेगा ! मेरी निजी सलाह यही है कि खामोशी से उसका काम कर देना और अपनी कीमत लेकर शहर से निकल जाना ! "
" हूं !" चौरसिया ने सोचपुर्ण भाव से हुकार भरी -----" मेरे एक सवाल का सच सच जबाब दोगी ?"
"पूछो ?"
" क्या तुम्हें नहीं मालुम कि वह मुझ से क्या कराना चाहता है ?"
" नहीं ! यह एक सीक्रेट है , जिसके बारे में नवाब के अलावा और कोई नहीं जानता ! लेकिन यह निश्चित है कि यह कोई कम्प्यूटर की दुनिया से जुड़ा काम ही होगा , जिसके कि तुम एक्सपर्ट हो ! पिछले साल तुमने जिस तरह से मुल्क के बैंक सिस्टम में सेंध लगाकर दिन दहाड़े ढाई सौ करोड़ रूपये लूटे थे, नवाब ने तुम्हारे उसी कारनामे से प्रभावित होकर तुम्हें फोन करके मुम्बई बुलाया है ?"
" अर्थात नवाब का वह कम्प्यूटर हैकिंग के जरिए किसी बैंक को लूटना हो सकता है ?"
" नवाब बैंक रोबर नहीं है, न ही उसने पहले कोई ऐसा ओछा काम किया है ! फिलहाल अपनी जिज्ञासा को शांत रखो !" उसने अपनी रिस्टवॉच देखी ----" नवाब से तुम्हारी मीटिंग का वक्त करीब आ पहुंचा है ! अब केवल बीस मिनट शेष है और हमें ब्रेकफास्ट भी करना है !"
चौरसिया ने एक क्षण सोचा फिर सहमति में सिर हिलाता हुआ बोला -------" ठीक है ! मुझे भी भूख लगी है ! चलती हूं ! मगर ........
" फिर अटक गये ?"
" आखरी सबाल ?"
" जल्दी ?"
" मान लिया कि मैं नवाब का काम कर देता हूं ! क्या उसके बाद भी वह मुझे तुमसे मिलने की परमीशन दे सकता है ?"
" बाद तुम मुझसे मिलना क्यों चाहोगें? मैं एक शादी शुदा औरत हूं और अब तो सही मायने में औरत ही नहीं हूं ----औरत के नाम के नाम को धब्बा लगाने बाली एक जिस्मफरोश हूं ! तबायफ हूं !"
" मुझे नहीं पता ! पर सच यह है कि मै तुमसे बार बार मिलना चाहूंगां, और एक बार दुनिया के उस खुशकिस्मत इंसान को भी जरूर मिलना चाहूंगा, जिसे तुम जैसी पत्नी मिली ! जहां तक जिस्मफरोश और कालगर्ल की बात है तो वह अगर तुम जैसी होती है तो मैं अपने बनाने बाले से यही दुआ करूगां कि मुझे हर जन्म में ऐसी ही जिस्मफरोश और कालगर्ल बीबी मिले ! ऐसी तबायफ पर तो हजार जानें कुर्बान की जा सकती हैं !"
" अच्छा !" पहले झटके में नगमा हंसीं ! फिर संजीदा हुई और फिर चौंककर चौरसिया को देखने लगी ! वैसी ही नजरों से जैसे चिडियाघर के सबसे बिचित्र जानवर को देख रही हो !
मिशन मुस्तफा के लिए कल्यान होलकर ने अपनी जो टीम तैयार की, उसमें होलकर के अलावा कुल पांच लोग शामिल थे ! उन पांचों के नाम थे----प्रताप, शेखरन , भल्ला, गिरीश, और अमरीक !
पाचों आईबी के तेजतर्रार , युवा तथा जोशिले एजेंट थे और इससे पहले भी एक अन्य मिशन पर होलकर के साथ कर चुके थे, पिछला तजुर्बा अच्छा रहा था, इसीलिये होलकर ने उन पांचों का चुनाव किया था !
आईबी चीफ बलवंत राव तथा होलकर की मीटिंग के खत्म होने के करीब एक धंटे भर बाद ही टेरेरिस्टों का अगला संदेश वाया गृहमंत्रालय बंलवत के पास पहुंच गया था , जिसमें मुस्तफा तथा चादनी सिंह की अदला बदली का समय , स्थान और शेष तमाम बातें मुकर्रर कर दी गई थी !
" तुम्हें नहीं उस सूरमा को बताऊंगा !"
" किसे ?"
" तुम्हारे नवाबजादे को !"
" अचानक ही तुम बहुत कांफिडेंस से भरे और रहस्यमय नजर आने लगे हो ! उस चक्रव्यूह में घुसने को पूरी तरह तैयार जिस में फंसकर तुम जैसे तीन हुनरमंद अपनी जान गवां चुके हैं !"
" इसमें कोई शक नहीं कि अब मैं तुम्हारे नवाब से मिलने के लिए बेचैन हूं ! यह अलग बात है कि इसके अलावा मेरे पास कोई चारा भी नहीं है ! भागने के सारे रास्ते उसने बंद कर ही रखे हैं !"
" पता नहीं अचानक ही तुम कौन सी हवा में उड़ने लगे हो फिर भी , मैं एक नेक सलाह देने से खुद को रोक नहीं पा रही हूं !"
" दो !"
" नवाब को धोखा देने की कोशिश मत करना !"
" तो क्या उन तीनों फारेनर हैकर्स ने नवाब को धोखा दिया था, जिन्हें उसने कत्ल कर दिया ?"
" नवाब को धोखा देना इतना आसान नहीं है ! लेकिन वे तीनों विदेशी , नवाब की उम्मीदों से कहीं ज्यादा स्मार्ट बन रहे थे ! उन्होने धोखा देने की कोशिश की और सजा पाई !"
" यानी अगर मैं तुम्हारे कथित नवाब को धोखा देने का इरादा नहीं रखता तो मुझे फिक्र करने की जरूरत नही है ! मेरा हश्र पहले वाले हैकर्स जैसा नहीं होगा ?"
" अपने काम के आदमियों और वफादारों को तो वह सिर आंखों पर बैठा कर रखता है ! तुम्हारे पास भी एक हुनर है , जिसका नवाब इस्तेमाल करना चाहता है , जिसके लिए वह तुम्हें अॉफर करेगा ! मेरी निजी सलाह यही है कि खामोशी से उसका काम कर देना और अपनी कीमत लेकर शहर से निकल जाना ! "
" हूं !" चौरसिया ने सोचपुर्ण भाव से हुकार भरी -----" मेरे एक सवाल का सच सच जबाब दोगी ?"
"पूछो ?"
" क्या तुम्हें नहीं मालुम कि वह मुझ से क्या कराना चाहता है ?"
" नहीं ! यह एक सीक्रेट है , जिसके बारे में नवाब के अलावा और कोई नहीं जानता ! लेकिन यह निश्चित है कि यह कोई कम्प्यूटर की दुनिया से जुड़ा काम ही होगा , जिसके कि तुम एक्सपर्ट हो ! पिछले साल तुमने जिस तरह से मुल्क के बैंक सिस्टम में सेंध लगाकर दिन दहाड़े ढाई सौ करोड़ रूपये लूटे थे, नवाब ने तुम्हारे उसी कारनामे से प्रभावित होकर तुम्हें फोन करके मुम्बई बुलाया है ?"
" अर्थात नवाब का वह कम्प्यूटर हैकिंग के जरिए किसी बैंक को लूटना हो सकता है ?"
" नवाब बैंक रोबर नहीं है, न ही उसने पहले कोई ऐसा ओछा काम किया है ! फिलहाल अपनी जिज्ञासा को शांत रखो !" उसने अपनी रिस्टवॉच देखी ----" नवाब से तुम्हारी मीटिंग का वक्त करीब आ पहुंचा है ! अब केवल बीस मिनट शेष है और हमें ब्रेकफास्ट भी करना है !"
चौरसिया ने एक क्षण सोचा फिर सहमति में सिर हिलाता हुआ बोला -------" ठीक है ! मुझे भी भूख लगी है ! चलती हूं ! मगर ........
" फिर अटक गये ?"
" आखरी सबाल ?"
" जल्दी ?"
" मान लिया कि मैं नवाब का काम कर देता हूं ! क्या उसके बाद भी वह मुझे तुमसे मिलने की परमीशन दे सकता है ?"
" बाद तुम मुझसे मिलना क्यों चाहोगें? मैं एक शादी शुदा औरत हूं और अब तो सही मायने में औरत ही नहीं हूं ----औरत के नाम के नाम को धब्बा लगाने बाली एक जिस्मफरोश हूं ! तबायफ हूं !"
" मुझे नहीं पता ! पर सच यह है कि मै तुमसे बार बार मिलना चाहूंगां, और एक बार दुनिया के उस खुशकिस्मत इंसान को भी जरूर मिलना चाहूंगा, जिसे तुम जैसी पत्नी मिली ! जहां तक जिस्मफरोश और कालगर्ल की बात है तो वह अगर तुम जैसी होती है तो मैं अपने बनाने बाले से यही दुआ करूगां कि मुझे हर जन्म में ऐसी ही जिस्मफरोश और कालगर्ल बीबी मिले ! ऐसी तबायफ पर तो हजार जानें कुर्बान की जा सकती हैं !"
" अच्छा !" पहले झटके में नगमा हंसीं ! फिर संजीदा हुई और फिर चौंककर चौरसिया को देखने लगी ! वैसी ही नजरों से जैसे चिडियाघर के सबसे बिचित्र जानवर को देख रही हो !
मिशन मुस्तफा के लिए कल्यान होलकर ने अपनी जो टीम तैयार की, उसमें होलकर के अलावा कुल पांच लोग शामिल थे ! उन पांचों के नाम थे----प्रताप, शेखरन , भल्ला, गिरीश, और अमरीक !
पाचों आईबी के तेजतर्रार , युवा तथा जोशिले एजेंट थे और इससे पहले भी एक अन्य मिशन पर होलकर के साथ कर चुके थे, पिछला तजुर्बा अच्छा रहा था, इसीलिये होलकर ने उन पांचों का चुनाव किया था !
आईबी चीफ बलवंत राव तथा होलकर की मीटिंग के खत्म होने के करीब एक धंटे भर बाद ही टेरेरिस्टों का अगला संदेश वाया गृहमंत्रालय बंलवत के पास पहुंच गया था , जिसमें मुस्तफा तथा चादनी सिंह की अदला बदली का समय , स्थान और शेष तमाम बातें मुकर्रर कर दी गई थी !