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गहरी चाल compleet

गहरी चाल पार्ट--13

नंदिता ने दीवार पे तंगी घड़ी पे नज़र डाली,1 बज रहे थे & षत्रुजीत अभी तक घर नही आया था.तभी उसके कानो मे किसी कार के बंगल के अंदर दाखिल होने की आवाज़ आई.उसमे इंटरकम उठा के नंबर दया,"साहब आ गये क्या?"

"नही,मेमसाहब.साहब नही आए केवल अब्दुल भाई आए हैं.",नंदिता ने इंटरकम रखा & बत्ती बुझा कर अपने बिस्तर पे लेट गयी,फिर अपना मोबाइल ऑन किया & 1 नंबर मिला के अपने कानो से लगा लिया.

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कामिनी की नींद खुली तो उसने देखा की चंद्रा साहब अभी भी उसके आगोश मे वैसे ही करवट से लेते हुए उसकी चूची के निपल को चूस रहे हैं.उसने सर उठा के घड़ी को देखा,अभी सवेरा होने मे बहुत वक़्त था.तभी चंद्रा साहब ने उसके निपल पे हल्के से काट लिया,"..आहह.."

उसने अपनी बाई टांग उनकी कमर पे चढ़ा दी & उनका चेहरा अपने सीने से उठाया.चंद्रा साहब ने बाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे लगाई & दूसरी से उसकी कमर को जकड़ते हुए उसकी भारी गंद दबाने लगे.कामिनी उन्हे बाहो मे भरे उनके होंठ चूमे जा रही थी की चंद्रा साहब ने 1 बार फिर 1 झटके मे ही अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.

दोनो 1 दूसरे को कस के बाहो मे जकड़े हुए थे & इस कारण की कामिनी की बड़ी चूचिया उनके बालो भरे सीने से बिल्कुल पीस गयी थी & उसे वाहा गुदगुदी का एहसास हो रहा था.चंद्रा साहब जिस जोश के साथ उसे चोद रहे थे उस से कामिनी को समझ मे आ गया की जब तक उनकी बीवी वापस नही आती तब तक वो उसे यहा से जाने नही देंगे.इस ख़याल ने उसे थोड़ा और मस्त कर दिया,उसने अपनी टांग से अपने गुरु की कमर को कस लिया & उनसे चुड़ाने लगी.

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जगबीर ठुकराल अपनी ऐषगाह के फूलो से सजे बिस्तर के हेडबोर्ड से टेक लगाए टाँगे फैलाए नंगा बैठा था.1 लड़की उसकी टाँगो के बीच झुकी उसकी आँखो मे आँखे डाले उसका लंड चूस रही थी.ये बिल्कुल नयी लड़की थी,उसने कल ही 1 लड़की को चलता किया था-उस से उसका जी भर गया था & उसकी जगह इस नयी लड़की को लाया था.बाकियो की तरह ये लड़की भी बला की खूबसूरत & सेक्सी थी.

लंड मुँह से निकाल उसने उसे अपनी बड़ी छातियो के बीच दबा दिया.ठुकराल के जिस्म मे मज़े की लहर दौड़ गयी,ठीक उसी वक़्त उसका मोबाइल बजा.उसने उसे उठाके नंबर देखा & उसे अपने कान से लगा लिया,"बोलो माधो...क्या?!...मगर क्यू?"

"मालिक,उसकी बेटी की ससुराल मे कुच्छ अज़रूरी काम आ गया है इसलिए वो अभी नही आ पा रही है..इसी चलते प्लान 5 दीनो के लिए टालना पड़ेगा."

"और कोई रास्ता नही है,माधो?",वो लड़की के चेहरे को सहला रहा था & लड़की मस्त हो रही थी.

"नही,मलिक,और फिर मुझे लगता है कि हमे अभी ज़्यादा जल्दबाज़ी भी नही करनी चाहिए.अगर उसकी बेटी यहा नही आती थी तो फिर पोलीस को कौन खबर करेगा."

"ह्म्म..ठीक है.चलो,5 दिन और सही.",ठुकराल ने मोबाइल किनारे रख दिया.उसका मूड खराब हो गया था & उसे ठीक करने के लिए उस लड़की को आज काफ़ी मेहनत करनी थी.लड़की लंड को हाथो मे भर उसके सूपदे पे जीभ फेर रही थी.ठुकराल ने उसे उठाया & अपनी गोद मे अपने लंड पे बैठने का इशारा किया.लड़की की आँखो मे मस्ती भरी हुई थी.वो तेज़ी से ठुकराल के कंधो पे हाथ रख उसके लंड पे बैठने लगी.उस बेचारी को पता नही था की कल देर सुबह तक उसे यू ही अलग-2 तरीक़ो से इस राक्षसी लंड को अपनी फूल सी कोमल चूत मे लेना था.

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करण अपने होटेल के कमरे मे लेटा कामिनी का नंबर ट्राइ कर रहा था मगर शायद उसने अपना मोबाइल ऑफ कर रखा था.वो कुच्छ सोचते हुए अपने शॉर्ट्स मे हाथ डाल अपने लंड को सहला रहा था कि तभी उसका मोबाइल बजा.नंबर देख उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.उसने अपनी शॉर्ट्स उतार दी & मोबाइल ऑन कर अपने कान से लगा लिया,"हेलो..जान.."

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सवेर चंद्रा साहब नाश्ता कर रहे थे & कामिनी अपने घर जाने की तैय्यरी,"अच्छा,सर मैं चलती हू."

चंद्रा साहब नाश्ता छ्चोड़ मेज़ से उठ गये,"कब तक आओगी?"उन्होने उसे बाहो मे भर लिया.

"सर,कोर्ट के बाद थोड़ी देर के लिए ऑफीस जाना है,उसके बाद तो आप ही के पास आओंगी.",सवेरे उठाते ही चंद्रा साहब ने उस से कह दिया था की जब तक उनकी बीवी अपने भाई के घर से वापस नही आती,उसे यही रहना होगा.कामिनी को भला इस से क्या ऐतराज़ हो सकता था,करण भी उस से पहले टूर से वापस नही लौटने वाला था,तब तक के लिए चंद्रा साहब ही उसका अकेलापन दूर करने का सहारा थे.

"श..सर..अभी नही...शाम को..",उन्होने उसे चूमते हुए उसकी स्कर्ट मे हाथ घुसाना चाहा तो वो हंसते हुए उन्हे परे धकेल कर लगा हुई & दरवाज़े की ओर बढ़ गयी.

"बाइ!शाम को जल्दी आ जाऊंगी.",उसने दरवाज़े पे मूड मुस्कुराते हुए कहा & फिर अपनी कार की ओर बढ़ गयी.

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कोर्ट जाने के पहले कामिनी को ख़याल आया की उसे 1 बार करण को फोन कर लेना चाहिया.रात उसने क्लब से निकलते वक़्त मोबाइल ऑफ कर दिया था,वो नही चाहती थी की जब वो & चंद्रा साहब करीब आ रहे हो,तब कोई भी खलल पड़े.सवेरे मोबाइल ऑन करते ही उसके मेसेजस & मिस्ड कॉल डीटेल्स दिखे थे.

उसने नंबर मिलाया,"हेलो..मिल गयी फ़ुरसत आपको.रात भर मोबाइल ट्राइ करता रहा.बंद क्यू कर दिया था?"

"कुच्छ काम कर रही थी.नही चाहती थी की कोई डिस्टर्ब करे.",कामिनी शरारत से बोली.

"रात को काम!अकेली कर रही थी या फिर किसी के साथ?",करण ने भी उसे छेड़ा.

"किसी के साथ थी."

"हॅयियी...और मैं यहा इस नीरस शहर मे अकेला पड़ा हू."

"तो ढूंड लो वाहा किसी को."

"ढूंड तो लू पर उपरवाले ने तुम्हारे जैसी दूसरी बनाई ही नही है."

"अच्छा जी!अब बाते बनाना छ्चोड़ो.",थोड़ी देर तक इसी तरह की बाते करने के बाद उसने फोन रख दिया & कोर्ट चली गयी.

क्रमशः.....................
 
GEHRI CHAAL paart--13

Nandita ne deewar pe tangi ghadi pe nazar dali,1 baj rahe the & Shatrujeet abhi tak ghar nahi aaya tha.tabhi uske kano me kisi car ke bungle ke andar dakhil hone ki aavaz aayi.usme intercom utha ke number daya,"sahab aa gaye kya?"

"nahi,memsahab.sahab nahi aaye kewal Abdul bhai aaye hain.",nandita ne intercom rakha & batti bujha kar apne bistar pe let gayi,fir apna mobile on kiya & 1 number mila ke apne kano se laga liya.

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Kamini ki neend khuli to usne dekha ki Chandra sahab abhi bhi uske agosh me vaise hi karvat se lete hue uski chhati ke nipple ko chus rahe hain.usne sar utha ke ghadi ko dekha,abhi savera hone me bahut waqt tha.tabhi chandra sahab ne uske nipple pe halke se kat liya,"..aahhhh.."

usne apni baayi tang unki kamar pe chadha di & unka chehra apne seene se uthaya.chandra sahab ne baayi banh uski gardan ke neeche lagayi & dusri se uski kamar ko jakadte hue uski bhari gand dabane lage.kamini unhe baaho me bhare unke honth chume ja rahi thi ki chandra sahab ne 1 bar fir 1 jhatke me hi apna lund uski chut me ghusa diya.

dono 1 dusre ko kas ke baaho me jakde hue the & is karan ki kamini ki badi choochiya unke balo bhare seene se bilkul pis gayi thi & use vaha gudgudi ka ehsas ho raha tha.chandra sahab jis josh ke sath use chod rahe the us se kamini ko samajh me aa gaya ki jab tak unki biwi vapas nahi aati tab tak vo use yaha se jane nahi देंगे ।is khayal ne use thoda aur mast kar diya,usne apni tang se apne guru ki kamar ko kas liya & unse chudne lagi.

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Jagbir Thukral apni aishgah ke phoolo se saje bistar ke headboard se tek lagaye tange failaye nanga baitha tha.1 ladki uski tango ke beech jhuki uski aankho me aankhe dale uska lund chus rahi thi.ye bilkul nayi ladki thi,usne kal hi 1 ladki ko chalta kiya tha-us se uska ji bhar gaya tha & uski jagah is nayi ladki ko laya tha.baakiyo ki tarah ye ladki bhi bala ki khubsurat & sexy thi.

lund munh se nikal usne use apni badi chhatiyo ke beech daba diya.thukral ke jism me maze ki lehar daud gayi,thik usi waqt uska mobile baja.usne use uthake number dekha & use apne kaan se laga liya,"bolo Madho...kya?!...magar kyu?"

"malik,uski beti ki sasural me kuchh azroori kaam aa gaya hai isliye vo abhi nahi aa pa rahi hai..isi chalte plan 5 dino ke liye taalna padega."

"aur koi rasta nahi hai,madho?",vo ladki ke chehre ko sehla raha tha & ladki mast ho rahi thi.

"nahi,malik,aur fir mujhe lagta hai ki hume abhi zyada jaldbazi bhi nahi karni chahiye.agar uski beti yaha nahi aati thi to fir police ko kaun khabar karega."

"hmm..thik hai.chalo,5 din aur sahi.",thukral ne mobile kinare rakh diya.uska mood kharab ho gaya tha & use thik karne ke liye us ladki ko aaj kafi mehnat karni thi.ladki lund ko hatho me bhar uske supade pe jibh fer rahi thi.thukral ne use uthaya & apni god me apne lund pe baithne ka ishara kiya.ladki ki aankho me masti bhari hui thi.vo tezi se thukral ke kandho pe hath rakh uske lund pe baithne lagi.us bechari ko pata nahi tha ki kal der subah tak use yu hi alag-2 tariko se is rakshasi lund ko apni phool si komal chut me lena tha.

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Karan apne hotel ke kamre me leta kamini ka numer try kar raha tha magar shayad usne apna mobile off kar rakha tha.vo kuchh sochte hue apne shorts me hath daal apne lund ko sehla raha tha ki tabhi uska mobile baja.number dekh uske hotho pe muskan fail gayi.usne apni shorts utar di & mobile on kar apne kaan se laga liya,"hello..jaan.."

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saver chandra sahab nashta kar rahe the & kamini apne ghar jane ki taiyyari,"achha,sir main chalti hu."

chandra sahab nashta chhod mez se uth gaye,"kab tak aaogi?"unhone use baaho me bhar liya.

"sir,court ke baad thodi der ke liye office jana hai,uske baad to aap hi ke paas aaongi.",savere uthate hi chandra sahab ne us se kah diya tha ki jab tak unki biwi apne bhai ke ghar se vapas nahi aati,use yahi rahna hoga.kamini ko bhala is se kya aitraz ho sakta tha,karan bhi us se pehle tour se vapas nahi lautne vala tha,tab tak ke liye chandra sahab hi uska akelapan dur karne ka sahara the.

"ohh..sir..abhi nahi...sham ko..",unhone use chumte hue uski skirt me hath ghusana chaha to vo hanste hue unhe pare dhakel kar laga hui & darvaze ki or badh gayi.

"bye!sham ko jaldi aa jaoongi.",usne darvaze pe mud muskurate hue kaha & fir apni car ki or badh gayi.

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court jane ke pehle kamini ko khayal aaya ki use 1 bar karan ko fone kar lena chahiya.raat usne club se nikalte waqt mobile off kar diya tha,vo nahi chahti thi ki jab vo & chandra sahab kareeb aa rahe ho,tab koi bhi khalal pade.savere mobile on karte hi uske messages & missed call details dikhe the.

usne numer milaya,"hello..mil gayi fursast aapko.raat bhar mobile try karta raha.band kyu kar diya tha?"

"kuchh kaam kar rahi thi.nahi chahti thi ki koi disturb kare.",kamini shararat se boli.

"raat ko kaam!akeli kar rahi thi ya fir kisi ke sath?",karan ne bhi use chheda.

"kisi ke sath thi."

"haiii...aur main yaha is neeras shehar me akela pada hu."

"to dhoond lo vaha kisi ko."

"dhoond to lu par uparwale ne tumhare jaisi dusri banayi hi nahi hai."

"achha ji!ab baate banana chhodo.",thodi der tak isi tarah ki baate karne ke baad usne fone rakh diya & court chali gayi.

 
गहरी चाल पार्ट--14

गतान्क से आगे...............

देर शाम कामिनी जैसे ही काली टी-शर्ट & टेन्निस खिलाड़ियो जैसी काली मिनी स्कर्ट मे चंद्रा साहब के घर मे दाखिल हुई उन्होने उसे बाहो मे जाकड़ लिया,"कितनी देर कर दी तुमने!",उन्होने उसके रसीले होंठ चूम लिए.

"क्या कर रहे हैं,सर!छ्चोड़िए ना...इतना वक़्त तो है हमारे पास..ऊओव....",उन्होने अपना बाया हाथ उसकी शर्ट मे घुसा उसकी पीठ से लगा दिया & दाए को नीचे से उसकी स्कर्ट मे घुसा उसकी गंद पे चिकोटी काट ली थी.वो कामिनी की गर्दन पे चूम रहे थे & अब हाथ उसकी गंद से नीचे उसकी जाँघ पे ले आए थे.उन्होने ड्रेसिंग गाउन पहना हुआ था & उसके भीतर से उनका खड़ा लंड कामिनी की चूत पे दस्तक दे रहा था.उन्होने उसकी दाई जाँघ के नीचे हाथ लगा उसकी टांग को उठा लिया & हल्के-2 अपनी कमर हिलाने लगे,"..प्लीज़...सर..छ्च..ओडीए ना..पहले कुच्छ खा..ने के लिए बन..लू..फिर का..रें..गे.."

चंद्रा साहब ने उसकी उठाई हुई जाँघ को कस के मसला,"..कुच्छ बाहर से मंगवा लेंगे..",तभी उनका मोबाइल बजा तो उन्होने चौंक के अपना सर उसकी गर्दन से उठा लिया,कामिनी को मौका मिल गया & उसने उन्हे परे धकेल दिया,"..नही,वैसे भी कल से आप बाहर का कुच्छ ज़्यादा ही खा रहे हैं.",उसने उनकी तरफ शोखी से मुस्कुराते हुए देखा.

उसके इस दोहरे मतलब वाली बात से चंद्रा साहब थोड़े और जोश मे आ गये पर मोबाइल उठना भी ज़रूरी था.वो मोबाइल की तरफ बढ़े & कामिनी किचन मे घुस गयी.कोई 15 मिनिट तक चंद्रा साहब फोने पे बात करते रहे,इस बीच कामिनी ने चूल्‍हे पे खाना चढ़ा दिया था.

"हन्न्न..!",कामिनी चौंक गयी,चंद्रा साहब ने उसे अचानक पीछे से बाहो मे भर लिया था,उन्होने हाथ का मोबाइल वही चूल्‍हे के बगल मे किचन के काउंटर पे रख दिया & अपना बाया हाथ उसकी शर्ट मे घुसा उसके पेट को सहलाने लगे,कामिनी आँखे बंद कर पीछे हो उनके बदन के सहारे खड़ी हो गयी.

उसने अपनी बाई बाँह पीछे ले जा उनके गले मे डाल दी & उनके बॉल सहलाने लगी.उसकी गर्दन चूमते हुए चंद्रा साहब ने अपना हाथ थोड़ा उपर ले जाके उसकी चूचियो को ब्रा मे से निकाल लिया & उन्हे दबाने लगे,उनका दाया हाथ कामिनी की स्कर्ट मे उपर से घुस चुका था & अब उसकी पॅंटी मे दाखिल हो उसकी चूत की तरफ बढ़ रहा था,"..आआहह...",उनकी उंगलिया जैसे ही उसकी चूत मे घुसी कामिनी मज़े से कराही.

चंद्रा साहब की उंगलिया उसकी चूत मे अंदर-बाहर हो रही थी & उसकी मस्ती बढ़ती जा रही थी.उसने अपना दाया हाथ पीछे ले जा गाउन के उपर से ही उनके लंड को दबोच लिया & मसल्ने लगी.चंद्रा साहब उसके बाए गाल को चूमते हुए उसकी चूचियो को मसल रहे थे,तभी उनकी उंगली कामिनी की चूत के दाने से टकराई & उन्होने उसे ज़ोर से रगड़ दिया,"..ऊहह..!"

कामिनी जैसे ये सह ही ना पाई & घूम के अब अपने गुरु के सामने आ गयी.उन्होने उसकी कमर पकड़ उसे चूल्‍हे के बगल मे काउंटर पे बिठा दिया & 1 झटके मे उसकी टी-शर्ट निकल दी.सामने उसकी गोरी,बड़ी चूचिया कड़े,गुलाबी निपल्स के साथ छलक पड़ी.उनके नीचे उसका काला ब्रा फँसा हुआ था.कामिनी ने 1 नज़र चूल्‍हे पे चढ़े खाने पे डाली,उसे डर था कही उनके इस मस्ताने खेल मे कही वो जल ना जाए.

चंद्रा साहब उसकी टाँगो के बीच खड़े हो गये & उसे अपनी बाँहो के घेरे मे ले लिया,फिर उसे चूमते हुए अपने हाथो से उसके ब्रा हुक्स खोल कर उसे उसके जिस्म से अलग कर दिया.वो झुके & उसकी नंगी चुचियो को अपने मुँह मे भर लिया,"...उउउम्म्म्मम..",उसने अपना दाए हाथ से उनके सर को पकड़ लिया.उनका गाउन से ढका लंड उसकी चूत पे दबा हुआ था.कामिनी मस्ती मे उड़ती हुई अपना हाथ नीचे ले जाके गाउन की डोरी को खींचा & हाथ अंदर घुसा दिया.

कामिनी का हाथ सीधे चंद्रा साहब के नंगे बालो भरे सीने से टकराया,उन्होने गाउन के नीचे कुच्छ पहना ही नही था.कामिनी उनके सर को चूमते हुए उनकी छाती को सहलाने लगी.चंद्रा साहब उसकी बाई चुचि के निपल को अंगूठे & 1 उंगली के बीच मसलते हुए उसकी दाई चूची को चूस रहे थे.

कामिनी ने हाथ नीचे ले जा उनके लंड को पकड़ लिया & हिलाने लगी.चंद्रा साहब मस्ती मे भर गये & उसके सीने से सर उठा के उसके होंठो को पागलो की तरह चूमने लगे.कामिनी ने पानी जीभ उनकी जीभ से लड़ानी शुरू कर दी.वो उनके बालो भरे आंडो को अपने हाथो मे भर उन्हे दबा रही थी.

उसने आँखो के कोने से देखा की खाना जलने वाला था,उसने उन्हे परे धकेला & काउंटर से उतार के खाने को देखने लगी,"सत्यानाश हो जाता इसका आपके चक्कर मे!",चंद्रा साहब ने अपना गाउन उतार दिया & उसके सामने बिल्कुल नंगे खड़े हो गये & अपना लंड हिलाते हुए फिर से उसके पीछे आ गये,"..ना अभी नही!पहले इसे बनाने दीजिए."

चंद्रा साहब घूमे तो उसे लगा उन्होने उसकी सुन ली,"..हन्न्न्न्न्न्न्न्न..",वो हैरत से चीखी.अपने घुटनो पे बैठ चंद्रा साहब ने 1 झटके मे ही उसकी स्कर्ट & पॅंटी खींच के फेंक दिया था & उसकी कमर थाम अपना मुँह उसकी गंद की फांको के बीच घुसा दिया था.

कामिनी ने चूल्हा बंद किया & किसी तरह उनके चंगुल से छूटने की कोशिश करने लगी.किसी तारह वो चूल्‍हे के सामने से हटी पर चंद्रा साहब ने उसे बड़ी मज़बूती से कमर से पकड़ा हुआ था & अपनी जीभ को उसकी चूत के लगातार अंदर-बाहर कर रहे थे.वो बस बेबस सी मच्चली की तरह तड़प रही थी.वो किचन काउंटर पे झुक सी गयी & उनकी जीभ से मस्त होने लगी.

चंद्रा साहब खड़े हुए & उसकी दाई टांग को घुटने से मोड़ काउंटर पे चढ़ा दिया.ऐसा करने से उसकी चूत उनकी नज़रो के सामने और उभर आई थी.वो उसे निहारने लगे,कामिनी की गुलाबी उसी के रस से भीगी कसी चूत बड़ी प्यारी लग रही थी.कामिनी ने गर्दन घुमा के कंधे से उन्हे नशीली आँखो से ऐसे देखा मानो कह रही हो की देखते ही रहेंगे क्या.

चंद्रा साहब आगे बढ़े & 1 ही झटके मे अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया,"..उउम्म्म्मम..",चंद्रा साहब की झांते उसकी चूत के आस पास के हिस्से पे गुदगुदी सी कर रही थी & उसे बहुत मज़ा आ रहा था.

चंद्रा ने दाए हाथ से उसकी कमर को थामा & बाए हाथ से उसके बूब्स को पकड़ उसे चोदने लगे.कामिनी ने अपना बदन काउंटर से उपर उठा लिया & आहे भरते हुए उनसे चूड़ने लगी.चंद्रा साहब ने हाथ उसकी चूचियो से खींच कर उसकी कमर पे रख लिए & उसकी पीठ & गंद को सहलाते हुए ज़ोर के धक्के लगाने लगे.

"..ऊऊव्व्व..!",कामिनी चिहुनक गयी,चंद्रा साहब ने अपनी 1 उंगली उसकी गंद के छेद मे डाल दी थी.कल से जिस तरह से वो उसकी गंद पे ध्यान दे रहे थे,उसे इस बात का थोडा तो अंदाज़ा हो गया था.उसने गर्दन घुमा के उन्हे थोड़ी नाराज़गी से देखा पर वो तो बस उसे चोद्ते हुए सूकी गंद मे उंगली किए जा रहे थे,"..कामिनी.."

"ह्म्म.."

"यहा भी करू?"

"क्या सर?",कामिनी ने अंजान बनने का नाटक किया.

"तुम्हारी गंद मे भी डालु अपना लंड?".चंद्रा साहब झुक के उस से बिल्कुल सॅट गये & उसके कान मे फुसफुसाए.कामिनी की गंद आज तक कुँवारी थी,विकास ने बहुत कोशिश की थी पर उसने उसे भी कभी नही करने दिया था.

"..उम्म..नही..बहुत दर्द होगा.."

"कोई दर्द नही होगा,देखो..कितनी आसानी से उंगली अंदर बाहर हो रही है.."

"पर वो तो उंगली से इतना ज़्यादा बड़ा है!"

"क्या बड़ा है?..ज़रा नाम तो लो.."

"आपका लंड..",कामिनी ने धीरे से कहा तो चंद्रा साहब जोश से भर गये & गहरे धक्के लगाने लगे.

"प्लीज़..कामिनी...कोई तकलीफ़ नही होगी..मैं बहुत आराम से करूँगा..प्लीज़..",वो किसी बच्चे की तरह ज़िद कर रहे थे.

"ठीक..है..पर ज़रा भी तकलीफ़ होगी तो आपको निकलना होगा.."

"हां-2..",उन्होने इधर-उधर देखा तो उन्हे अपने काम की 1 चीज़ नज़र आई,मक्खन का पॅकेट.उन्होने उसे उठाया & थोड़ा मक्खन ले के कामिनी की गंद मे भर दिया.फिर उसे अपनी उंगली से अंदर मलने लगा.उंगली & कामिनी के जिस्म की गर्मी से पिघल कर मक्खन उसकी गंद की दीवारो से चिपक गया.चंद्रा साहब ने लंड चूत से बाहर खींचा.

 
लंड पूरी तरह से कामिनी के रस से गीला था,फिर भी उन्होने उसपे भी मक्खन लगे & फिर उसकी गंद के छेद पे लंड को रख धक्का दिया,"..ऊऊऊऊ....",थोड़ी ही देर मे उनका चौड़ा सूपड़ा उसकी गंद मे था,वो बड़ी मज़बूती से उसकी कमर को थामे बड़े ही हल्के धक्के लगाने लगे..कोई 5-7 मिनिट बाद लंड कोई 5 इंच तक गंद मे घुस गया.

"आआहह...और नही ..दर्द होता है..",कामिनी कराही तो उन्होने उतने ही लंड से उसकी गंद मारना शुरू कर दिया.बाए से उन्होने उसकी कमर थामी हुई थी & दाए से वो उसकी चुचिया दबा रहे थे.थोड़ी देर बाद कामिनी को भी मज़ा आने लगा तो वो अपने दाए हाथ से अपनी चूत मारने लगी.तभी चंद्रा साहब का पास रखा मोबाइल बजा.

उन्होने उसे कान से लगाया,"हेलो..हां..कहो कैसी हो?..हां कल तो क्लब मे ही खाया था...आज..आज कामिनी आ गयी थी..पता चला की तुम नही हो तो किचन मे घुस गयी है...वही कुच्छ बना रही है..हां..अभी बात कराता हू...",उन्होने उसे फोन थमाया,"..तुम्हारी आंटी है."

कामिनी अब काउंटर पे पूरा झुकी हुई थी.उसकी चूचिया काउंटर के मार्बल से बिल्कुल पीसी हुई थी & वो उसपे कोहनी रखे पड़ी थी.उसने फोन लिया,"हेलो..नमस्ते आंटी..!"

चंद्रा साहब ने 1 हाथ आगे ले जाके उसका हाथ हटा उसकी चूत पे लगा दिया,"..हम्म..नही..आंटी तकलीफ़ कैसी..पर सर को समझाइये..बाहर का खाना इन्हे बहुत पसंद है & मुझ से कह रहे थे..की ..थोड़ा मक्खन भी डाल दो..",उसने गर्दन घुमा के उनकी तरफ नशीली आँखो से देखा & होंठो को गोल कर उन्हे चूमने का इशारा किया,"...जी ...आंटी..मैने तो बिल्कुल सादा खाना बनाया है...& आप फ़िक्र मत करे ..जब तक..आप नही आती मैं इन्हे यहा देख जाया करूँगी..& रोज़ अपनी निगरानी मे खाना खिलवंगी..ओक...नमस्ते आंटी..!",उसने मोबाइल किनारे रखा.अपने गुरु का लंड अपनी गंद मे लिए उनकी पत्नी से बाते कर वो और गरम हो गयी & अपनी कमर हिलाने लगी.

चंद्रा उसकी चूत ज़ोरो से रगड़ते हुए उसकी गंद मे तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगे.....कामिनी काउंटर पे पूरा झुक गयी & अचानक बहुत ज़ोर से आहे भरने लगी...उसकी चूत चंद्रा साहब की उंगलियो पे कसने-ढीली होने लगी & वो झाड़ गयी.उसी वक़्त चंद्रा साहब के लंड से भी 1 तेज़ धार निकली & कामिनी की गंद उनके विर्य से भर गयी.

लंड ढीला हुआ तो चंद्रा साहब ने उसे गंद से बाहर खींचा & उसे अपनी बाहो मे उठा के अपने बेडरूम मे ले गये,उनकी भूख शायद अभी शांत नही हुई थी.

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उस दिन कोर्ट मे बहुत भीड़ थी,कामिनी किसी केस की सुनवाई के बाद अपने चेंबर की ओर जा रही थी की तभी किसी ने उसे पीछे से आवाज़ दी,"कामिनी जी."

कामिनी मूडी,आते-जाते लोग उस से टकरा रहे थे की तभी उसके सामने कोई 50-55 बरस का लंबा चौड़ा शख्स आया & उसकी बाँह पकड़ उसे 1 किनारे ले गया,"यहा बहुत भीड़ आप इधर आ जाइए,कामिनी जी."उस आदमी की पकड़ मे केवल उसे खाली जगह पे ले जाने का इरादा नही बल्कि उसे च्छुने का इरादा ज़्यादा नज़र आ रहा था.

"मेरा नाम जगबीर ठुकराल है.."

"नमस्ते ठुकराल साहब,मैं जानती हू आपको.कहिए मैं आपकी क्या मदद कर सकती हू?"

"1 केस है,कामिनी जी..",लोगो का 1 और रेला आया तो ठुकराल ने उसे फिर उसकी बाज़ू पकड़ थोड़ा किनारे कर दिया.कामिनी को उसका ये बार-2 छुना कुच्छ अच्छा तो नही लगा पर कुच्छ था उसके छुने मे जिसने उसका दिल धड़का दिया,"..हम मेरे चेंबर मे चल के बात करे?"

"हाँ,ज़रूर.",कामिनी आगे चलने लगी तो 1 बार फिर उसे भीड़ से बचाने के बहाने ठुकराल ने उसकी पीठ पे ठीक ब्लाउस के नीचे हाथ रख दिया.

"हां,अब बोलिए,ठुकराल साहब."

"1 अर्जेंट केस है कामिनी जी जिसकी सुनवाई बस 2 दिन बाद है."

ठुकराल साहब,फिर तो मैं ये केस नही ले सकती...मेरे पास बिल्कुल भी समय नही है.."

"कुच्छ तो करिए,कामिनी जी!",कामिनी ने देखा की उसकी नज़रे उसकी झीनी सफेद सारी से झँकते उसके ब्लाउस पे जा रही है.

"देखिए,मैं आपका केस ले लू & फिर उसपे ठीक से ध्यान ना दू & सुनवाई पे अपने असिस्टेंट को भेज दू..ये तो ठीक नही होगा ना..ठुकराल साहब आप बहुत उम्मीद लेके मेरे पास आए हैं मैं जानती हू,मगर इसीलिए मना कर रही हू,क्यूकी बाद मे केस पे ध्यान ना देके मैं आपको निराश नही करना चाहती."

"कोई बात नही..मगर आपकी ईमानदारी & साफ़गोई ने मेरा दिल जीत लिया,कामिनी जी...1 वादा चाहता हू आपसे..",उसने 1 बार फिर उसके बड़े सीने को देखा.

"हां,कहिए..",कामिनी को पूरा यकीन हो गया की ये आदमी औरतो का रसिया है मगर उसने ऐसा कुच्छ सुना नही था उसके बारे मे.

"आगे जब भी कभी मैं आपके पास आऊ,आप ज़रूर मेरा केस लेंगी.",उसने कुर्सी से उठते हुए अपना हाथ बढ़ाया.

"वादा तो नही करती..हां..आपको इतना भरोसा दिलाती हू की आगे आपको निराश नही करूँगी.",उसने उस से हाथ मिलाया तो ठुकराल ने उसका हाथ हल्के से दबा दिया & फिर कॅबिन से बाहर निकल गया.

तभी उसका मोबाइल बजा,देखा तो षत्रुजीत का नंबर था,"हेलो,मिस्टर.सिंग."

"हेलो,कामिनी.कैसी हैं?"

"बढ़िया.आप कैसे हैं?"

"मज़े मे..अच्छा कामिनी इस फ्राइडे मैं होटेल ऑर्किड मे 1 पार्टी दे रहा हू & आपको वाहा ज़रूर आना है क्यूकी पार्टी आपके हमारे लीगल आड्वाइज़र बनाने की खुशी मे ही है."

"इसकी क्या ज़रूरत है,मिस्टर.सिंग.."

"ज़रूरत है..तो आप आ रही हैं ना फ्राइडे रात को?"

1 पल को कामिनी ने सोचा,"हां,मिस्टर.सिंग."

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अगली रात कामिनी फिर अपने गुरु के बिस्तर पे नंगी पड़ी हुई थी.वो पेट के बल लेटी थी & चंद्रा साहब उसकी गंद चूम रहे थे,"..उउंम्म..आप भी ना बस उसी से चिपके रहते हैं!"

वो पलटी & उनका हाथ पकड़ के उन्हे पाने उपर खींच लिया,"ये देखिए मेरी छातिया कैसी सुखी पड़ी हैं...!",चंद्रा साहब मुस्कुराए & झुक के उसकी चूचिया पीने लगे,"..हन्न्न..ऐसे ही...दबाइए भी तो सर...ऊओवव्वव..इतनी ज़ोर से नही...हा..अनन्न..ऐसे ही...उम्म.."

"सर,ये जगबीर ठुकराल कैसा आदमी है...ऊफ़फ्फ़...?",चंद्रा साहब केवल निपल को चूस रहे थे,बाकी पूरी छाती उनके मुँह से बाहर थी.

"..बड़ा करप्ट राजनेता है..",कामिनी ने उन्हे पलट दिया & उनके उपर चढ़ गयी & उनकी छाती चूमने लगी.वो अपने हाथो से उनके निपल्स को छेड़ रही थी,"..उसके बारे मे क्यू पुच्छ रही हो?",वो उसके सर & पीठ पे हाथ फेरने लगे.

"आज मुझसे मिलने आया था,चाहता था,मैं उसका कोई केस लेलू पर मेरे पास वक़्त ही नही था सो मैने मना कर दिया.",वो नीचे झुक के उनके खड़े लंड को चूम रही थी.

"ठीक किया.भरोसे के लायक नही है वो.",चंद्रा साहब ने उसका सर पकड़ कर उसे उपर आने का इशारा किया.कामिनी अपनी दोनो टांगे उनके बदन के दोनो तरफ रख 1 हाथ से उनका लंड पकड़े उसपे बैठने लगी,"..क्या उसे औरतो का भी शौक है,सर?"

"ह..",कामिनी ने उनका पूरा लंड अपने अंदर ले लिया था.चंद्र साहब ने उसकी गंद थाम ली,"..बहुत साल पहले जब ठुकराल कोई 30-35 साल का होगा..1 लड़की ने उसपे बलात्कार का इल्ज़ाम लगाया था,मगर फिर कुच्छ सुना नही..वैसे उसने शादी नही की कभी & अकेला ही रहता है 1 खास नौकर के साथ.क्यू पुच्छ रही हो?"

"ऐसे ही.",कामिनी ने झुक कर अपनी बाई चूची उनके मुँह मे दी & दाई को उनके बाए हाथ मे,फिर उनका दाया हाथ अपनी गंद से लगाया & उच्छल-2 कर उनके साथ चुदाई करने लगी.

 
GEHRI CHAAL paart--14

Der sham Kamini jaise hi kali t-shirt & tennis khiladiyo jaisi kali mini skirt me Chandra sahab ke ghar me dakhil hui unhone use baaho me jakad liya,"kitni der kar di tumne!",unhone uske rasile honth chum liye.

"kya kar rahe hain,sir!chhodiye na...itna waqt to hai humare paas..ooow....",unhone apna baay hath uski shirt me ghusa uski pith se laga diya & daaye ko neeche se uski skirt me ghusa uski gand pe chikoti kaat li thi.vo kamini ki gardan pe chum rahe the & ab hath uski gand se neeche uski jangh pe le aaye the.unhone dressing gown pehna hua tha & uske bheetar se unka khada lund kamini ki chut pe dastak de raha tha.unhone uski daayi jangh ke neeche hath laga uski tang ko utha liya & halke-2 apni kamar hilane lage,"..please...sir..chh..odiye na..pehle kuchh kha..ne ke liye ban..lu..fir ka..ren..ge.."

chandra sahab ne uski uthai hui jangh ko kas ke masla,"..kuchh bahar se mangwa lenge..",tabhi unka mobile baja to unhone chaunk ke apna sar uski gardan se utha liya,kamini ko mauka mil gaya & usne unhe pare dhakel diya,"..nahi,vaise bhi kal se aap bahar ka kuchh zyada hi kha rahe hain.",usne unki taraf shokhi se muskurate hue dekha.

uske is dohre matlab vali baat se chandra sahab thode aur josh me a gaye par mobile uthana bhi zaruri tha.vo mobile ki taraf badhe & kamini kitchen me ghus gayi.koi 15 minute tak chandra sahab fone pe baat karte rahe,is beech kamini ne chulhe pe khana chadha diya tha.

"hannn..!",akmini chaunk gayi,chandra sahab ne use achanak peechhe se baaho me bhar liya tha,unhone hath ka mobile vahi chulhe ke bagal me kitchen ke counter pe rakh diya & apna baaya hath uski shirt me ghusa uske pet ko sehlane lage,kamini aankhe band kar peechhe ho unke badan ke sahare khadi ho gayi.

usne apni baayi banh peechhe le ja unke gale me daal di & unke baal sehlane lagi.uski gardan chumte hue chandra sahab ne apna hath thoda upar le jake uski chhatiyo ko bra me se nikal liya & unhe dabane lage,unka daaya hath kamini ki skirt me upar se ghus chuka tha & ab uski panty me dakhil ho uski chut ki taraf badh raha tha,"..aaaahhhhhh...",unki ungliya jaise hi uski chut me ghusi kamini maze se karahi.

chandra sahab ki ungliya uski chut me andar-bahar ho rahi thi & uski masti badhti ja rahi thi.usne apna daya hath peechhe le ja gown ke upar se hi unke lund ko daboch liya & masalne lagi.chandra sahab uske baaye gaal ko chumte hue uski choochiyo ko masal rahe the,tabhi unki ungli kamini ki chut ke dane se takrayi & unhone use zor se ragad diya,"..OOHHHHH..!"

kamini jaise ye seh hi na payi & ghum ke ab apne guru ke samne aa gayi.unhone uski kamar pakad use chulhe ke bagal me counter pe bitha diya & 1 jhatke me uski t-shirt nikal di.samne uski gori,badi chhatiyaa kade,gulabi nipples ke sath chhalak padi.unke neeche uska kala bra phansa hua tha.kamini ne 1 nazar chulhe pe chadhe khane pe dali,use darr tha kahi unke is mastane khel me kahi vo jal na jaye.

chandra sahab uski tango ke beech khade ho gaye & use apni baho ke ghere me le liya,fir use chumte hue apne hatho se uske bra hooks khol kar use uske jism se alag kar diya.vo jhuke & uski nangi chhatiyo ko apne munh me bhar liya,"...uuummmmm..",usne apna daaye hath se unke sar ko pakad liya.unka gown se dhaka lund uski chut pe daba hua tha.kamini masti me udti hui apna hath neeche le jake gown ki dori ko kheencha & hath andar ghusa diya.

kamini ka hath seedhe chandra sahab ke nange baalo bhare seene se takraya,unhone gown ke neeche kuchh pehna hi nahi tha.kamini unke sar ko chumte hue unki chhati ko sehlane lagi.chandra sahab uski baayi chhati ke nipple ko anguthe & 1 ungli ke beech masalate hue uski daayi chhati ko chus rahe the.

kamini ne hath neeche le ja unke lund ko pakad liya & hilane lagi.chandra sahab masti me bhar gaye & uske seene se sar utha ke uske hotho ko paglo ki tarah chumne lage.kamini ne pani jibh unki jibh se ladani shuru kar di.vo unke baalo bhare ando ko apne hatho me bhar unhe daba rahi thi.

usne aankho ke kone se dekha ki khana jalne wala tha,usne unhe pare dhakela & counter se utar ke khane ko dekhne lagi,"satyanash ho jata iska aapke chakkar me!",chandra sahab ne apna gown utar diya & uske samne bilkul nange khade ho gaye & apna lund hilate hue fir se uske peechhe aa gaye,"..na abhi nahi!pehle ise banane dijiye."

chandra sahab ghume to use laga unhone uski sun li,"..hannnnnnnnn..",vo hairat se chikhi.apne ghutno pe baith chandra sahab ne 1 jhatke me hi uski skirt & panty khinch ke fenk diya tha & uski kamar tham apna munh uski gand ki phanko ke beech ghusa diya tha.

kamini ne chulha band kiya & kisi tarah unke changul se chhutne ki koshish karne lagi.kisi tarh vo chulhe ke samne se hati par chandra sahab ne use badi mazbuti se kamar se pakda hua tha & apni jibh ko uski chut ke lagatar andar-bahar kar rahe the.vo bas bebas si machhli ki tarah tadap rahi thi.vo kitchen counter pe jhuk si gayi & unki jibh se mast hone lagi.

chandra sahab khade hue & uski daayi tang ko ghutne se mod counter pe chadha diya.aisa karne se uski chut unki nazro ke samne aur ubhar aayi thi.vo use niharne lage,kamini ki gulabi usi ke ras se bhigi kasi chut badi pyari lag rahi thi.kamini ne gardan ghuma ke kandhe se unhe nashili aankho se aise dekha mano keh rahi ho ki dekhte hi rahenge kya.

chandra sahab aage badhe & 1 hi jhatke me apna lund uski chut me ghusa diya,"..uummmmm..",chandra sahab ki jhante uski chut ke aas paas ke hisse pe gudgudi si kar rahi thi & use bahut maza aa raha tha.

chandras ahab ne daaye hath se uski kamar ko thama & baaye hath se uske boobs ko pakad use chodne lage.kamini na apna badan counter se upar utha liya & aahe bharte hue unse chudne lagi.chandra sahab ne hath uski choochiyo se khinch kar uski kamar pe rakh liye & uski pith & gand ko sehlate hue zor ke dhakke lagane lage.

"..oooowww..!",kamini chihunk gayi,chandra sahab ne apni 1 ungli uski gand ke chhed me dal di thi.kal se jis tarah se vo uski gand pe dhyan de rahe the,use is baat ka thoda to andaza ho gaya tha.usne gardan ghuma ke unhe thodi narazgi se dekh par vo to bas use chodte hue suki gand me ungli kiye ja rahe the,"..kamini.."

"hmm.."

"yaha bhi karu?"

"kya sir?",kamini ne najan banane ka natak kiya.

"tumhari gand me bhi dalu apna lund?".chandra sahab jguk ke us se bilkul sat gaye & uske kaan me phusphusaye.kamini ki gand aaj tak kunwari thi,vikas ne bahut koshish ki thi par usne use bhi kabhi nahi karne diya tha.

"..umm..nahi..bahut dard hoga.."

"koi dard nahi hoga,dekho..kitni aasani se ungli andar bahar ho rahi hai.."

"par vo to ungli se itna zyada bada hai!"

"kya bada hai?..zara naam to lo.."

"aapka lund..",kamini ne dheere se kaha to chandra sahab josh se bhar gaye & gehre dhakke lagane lage.

"please..kamini...koi taklif nahi hogi..main bahut aaram se karunga..please..",vo kisi bachche ki tarah zid kar rahe the.
 
"thik..hai..apr zara bhi taklif hogi to aapko nikalna hoga.."

"haan-2..",unhone idhar-udhar dekha to unhe apne kaam ki 1 ciz nazar aayi,makkhan ka packet.unhone use uthaya & thoda makkhan le ke kamini ki gand me bhar diya.fir use apni ungli se andar malne laga.ungli & kamini ke jism ki garmi se pighal kar makkhan uski gand ki deewaro se chipak gaya.chandra sahab ne lund chut se bahar khincha.

lund puri tarah se kamini ke ras se gila tha,fir bhi unhone uspe bhi makkhan lagay & fir uski gand ke chhed pe lund ko rakh dhakka diya,"..oooooooo....",thodi hi der me unka chauda supada uski gand me tha,vo badi mazbooti se uski kamar ko thame bade hi halke dhakke lagane lage..koi 5-7 minute baad lund koi 5 inch tak gand me ghus gaya.

"AAAAHHHH...aur nahi ..dard hota hai..",kamini karahi to unhone utne hi lund se uski gand marna shuru kar diya.baaye se unhone uski kamar thami hui thi & daaye se vo uski chhatiyaa dabna rahe the.thodi der baad kamini ko bhi maza aane laga to vo apne daaye hath se apni chut marne lagi.tabhi chandra sahab ka paas rakha mobile baja.

unhone use kaan se lagaya,"hello..haan..kaho kaisi ho?..haan kal to club me hi khaya tha...aaj..aaj kamini a gayi thi..pata chala ki tum nahi ho to kitchen me ghus gayi hai...vahi kuchh bana rahi hai..haan..abhi baat karat hu...",unhone use phone thamaya,"..tumhari aunty hai."

kamini ab counter pe pura jhuki hui thi.uski choochiya counter ke marble se bilkul pisi hu thi & vo uspe kohni rakhe padi thi.usne phone liya,"hello..namaste aunty..!"

chandra sahab ne 1 hath aage le jake uska hath hatake uski chut pe laga diya,"..hhmm..nahi..aunty taklif kaisi..par sir ko samjhaiye..bahar ka khana inhe bahut pasand hai & mujh se keh rahe the..ki ..thoda makkhan bhi daal do..",usne gardan ghuma ke unki taraf nashili aankho se dekha & hotho ko gol kar unhe chumne ka ishara kiya,"...ji ...aunty..maine to bilkul sada khana banaya hai...& aap fikr mat kare ..jab tak..aap nahi aati main inhe yaha dekh jaya karungi..& roz apni nigrani me khana khilaungi..ok...namaste aunty..!",usne mobile kinare rakha.apne guru kalund apni gand me liye unki patni se baate kar vo aur garam ho gayi & apni kamar hilane lagi.

chandras ahb uski chut zoro se ragadte hue uski gand me tezi se lund andar-bahar karne lage.....kamini counter pe pura jhuk gayi & achanak bahut zor se aahe bharne lagi...uski chut chandra sahab ki ungliyo pe kasne-dhili hone lagi & vo jhad gayi.usi waqt chandra sahab ke lund se bhi 1 tez dhar nikli & kamini ki gand unke virya se bhar gayi.

lund dheela hua to chandra sahab ne use gand se bahar khincha & use apni baaho me utha ke apne bedroom me le gaye,unki bhookh shayad abhi shant nahi hui thi.

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us din court me bahut bheed thi,kamini kisi case ki sunwai ke baad apne chamber ki or ja rahi thi ki tabhi kisi ne use peechhe se aavaz di,"kamini ji."

kamini mudi,aate-jate log us se takra rahe the ki tabhi uske samne koi 50-55 baras ka lamba chauda shakhs aaya & uski banh pakad use 1 kinare le gaya,"yaha bahut bheed aap idhar aa jaiye,kamini ji."us aadmi ki pakad me kewal use khali jagah pe le jane ka irada nahi balki use chhune ka irada zyada nazar aa raha tha.

"mera naam Jagbir Thukral hai.."

"namste thukral sahab,main jaanti hu aapko.kahiye mai aapki kya madad kar sakti hu?"

"1 case hai,kamini ji..",logo ka 1 aur rela aaya to thukral ne use fir uski bazu pakad thoda kinare kar diya.kamini ko uska ye baar-2 chhuna kuchh achha to nahi lagega par kuchh tha uske chhune me jisne uska dil dhadka diya,"..hum mere chamber me chal ke baat kare?"

"haan,zaroor.",kamini aage chalne lagi to 1 bar fir use bheed se bachane ke bahane thukral ne uski pith pe thik blouse ke neeche hath rakh diya.

"haan,ab boliye,thukral sahab."

"1 urgebt case hai kamini ji jiski sunwai bas 2 din baad hai."

thukral sahab,fir to main ye case nahi le sakti...mere paas bilkul bhi samay nahi hai.."

"kuchh to kariye,kamini ji!",kamini ne dekha ki uski nazre uski jhini safed sari se jhankte uske blouse pe ja rahi hai.

"dekhiye,main aapka case le lu & fir uspe thik se dhyan na du & sunwai pe apne assistant ko bhej du..ye to thik nahi hoga na..thukral sahab aap bahut ummeed leke mere paas aaye hain main janti hu,magar isiliye mana kar rahi hu,kyuki baad me case pe dhyan na deke main aapko nirash nahi karna chahti."

"koi baat nahi..magar aapki imandari & saafgoi ne mera dil jeet liya,kamini ji...1 vada chahta hu aapse..",usne 1 baar fir uske bade seene ko dekha.

"haan,kahiye..",kamini ko pura yakeen ho gay ki ye aadmi aurato ka rasiya hai magar usne aisa kuchh suna nahi tha uske bare me.

"aage jab bhi kabhi main aapke paas aaon,aap zaroor mera case lengi.",usne kursi se uthate hue apna hath badhaya.

"vada to nahi karti..haan..aapko itna bharoas dilati hu ki aage aapko nirash nahi karumgi.",usne us se hath milaya to thukral ne uska hath halke se daba diya & fir cabin se bahar nikal gaya.

tabhi uska mobile baja,dekha to Shatrujeet ka number tha,"hello,Mr.Singh."

"hello,kamini.kaisi hain?"

"badhiya.aap kaise hain?"

"maze me..achha kamini is friday main hotel Orchid me 1 party de raha hu & aapko vaha zaroor aana hai kyuki party aapke humare legal advisor banane ki khushi me hi hai."

"iski kya zarurat hai,mr.singh.."

"zarurat hai..to aap aa rahi hain na friday raat ko?"

1 pal ko kamini ne socha,"haan,mr.singh."

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agli raat kamini fir apne guru ke bistar pe nangi padi hui thi.vo pet ke bal leti thi & chandra sahab uski gand chum rahe the,"..uummm..aap bhi na bas usi se chipke rehte hain!"

vo palati & unka hath pakad ke unhe pane upar khinch liya,"ye dekhiye meri chhatiya kaisi sukhi padi hain...!",chandra sahab muskuraye & jhuk ke uski choochiy peene lage,"..hannn..aise hi...dabaiye bhi to sir...ooowwww..itni zor se nahi...ha..annn..aise hi...umm.."

"sir,ye jagbir thukral kaisa aadmi hai...oofff...?",chandra sahab kewal nipple ko chus rahe the,baki puri chhati unke munh se bahar thi.

"..bada corrupt rajneta hai..",kamini ne unhe palat diya & unke upar chadh gayi & unki chhati chumne lagi.vo apne hatho se unke nipples ko chhed rahi thi,"..uske bare me kyu puchh rahi ho?",vo uske sar & pith pe hath ferne lage.

"aaj mujhse milne aaya tha,chahta tha,main uska koi case ladu apr mere paas waqt hi nahi tha so maine mana kar diya.",vo neeche jhuk ke unke khade lund ko chum rahi thi.

"thik kiya.bharose ke layak nahi hai vo.",chandra sahab ne uska sar pakad kar use upar aane ka ishara kiya.kamini apni dono taange unke badan ke dono taraf rakh 1 hath se unka lund pakde uspe baithne lagi,"..kya use aurato ka bhi shauk hai,sir?"

"ahhhh..",kamini ne unka pura lund apne andar le liya tha.chandr sahab ne uski gand tham li,"..bahut saal pehle jab thukral koi 30-35 saal ka hoga..1 ladki ne uspe balatkar ka ilzam lagaya tha,magar fir kuchh suna nahi..vaise usne shadi nahi ki kabhi & akela hi rehta hai 1 khas naukar ke sath.kyu puchh rahi ho?"

"aise hi.",kamini ne jhuk kar apni baayi chhati unke munh me di & daayi ko unke baaye hath me,fir unka daaya hath apni gand se lagaya & uchhal-2 kar unke sath chudai karne lagi.

 
गहरी चाल पार्ट--15

कामिनी करण के फ्लॅट के ड्रॉयिंग रूम के सोफे पे बैठी थी & वो उसकी पॅंटी उतर रहा था,दोनो अब पूरे नंगे थे.करण आज सवेर ही टूर से लौटा था & अभी कुच्छ देर पहले ही दोनो बाहर से साथ खाना खा कर लौटे थे.

दोनो सोफे पे 1 दूसरे के बगल मे बैठे थोड़ा घूम के 1 दूसरे की आँखो मे झाँक रहे थे,करण ने उसकी कमर को अपने बाए हाथ से थामा & बाए से उसकी ठुड्डी पकड़ के उसके होंठ चूमने लगा,"..उउंम.... मत कैसे बिताए मैने ये दिन..!",उसने उसके होंठ छ्चोड़ उसे अपने से सटा लिया,कामिनी ने अपने दाए हाथ मे उसका लंड ले लिया.

करण का दिल मज़े से भर उठा ,वो उसके चेहरे को चूमते हुए उसकी जाँघ सहलाने लगा.कामिनी को भी मज़ा आ रहा था.पिच्छले 4 दीनो तक वो चंद्रा साहब से चुद्ति रही थी,इसके बावजूद उसके जोश मे कोई कमी नही आई थी.लंड पे उसके हाथ की गिरफ़्त और कस गयी.

करण ने उसकी जाँघ से हाथ उपर ले जाते हुए उसकी गंद पे रख दिया & थोड़ी देर बाद उसकी गंद से होते हुए हाथ पीछे से उसकी चूत पे आ गया & वो 1उंगली से उसकी चूत कुरेदने लगा.कामिनी की आहे नही सुनाई पड़ रही थी क्यूकी उसके मुँह मे करण की जीभ घुसी हुई थी.

कामिनी के हाथो ने उसके लंड को भी बेचैन कर दिया था,अब वक़्त आ गया था की वो अपनी प्रेमिका की चूत मे उसे घुसा दे.उसने अपना बाई बाँह कामिनी की पीठ पे लगाई & दाई से उसकी दोनो टांगो को घुटने के थोड़ा उपर से पकड़ के उठा लिया & अपने कमरे मे ले गया.

कामिनी को बिस्तर पे लिटा वो उसकी चुचियो पे झुक गया,उसका 1 हाथ उसकी चूत से चिपका उसके दाने को रगड़ रहा था.कामिनी बेचैनी से अपनी कमर हिलाते हुए आहे भरने लगी की तभी को दोनो को ड्रॉयिंग रूम से मोबाइल के रिंग टोन की आवाज़ आती सुनाई दी-ये करण का मोबाइल था.कामिनी को पूरी उम्मीद थी की करण उसे छ्चोड़ फोने के पास नही जाएगा,पर करण ने ऐसा नही किया.मोबाइल का बजना सुन वो कामिनी को छ्चोड़ फ़ौरन ड्रॉयिंग रूम मे चला गया.

कामिनी को ये बहुत बुरा लगा.... कौन था जिसके फोन के लिए वो उसका चमकता बदन छ्चोड़ कर चला गया?5 मिनिट बाद कारण कमरे मे वापस आया तो कामिनी ने उसे देख गुस्से से करवट बदलते हुए मुँह फेर लिया.

"आइ'एम सॉरी.",करण पीछे से उस से सॅट गया & उसके दाए कंधे के उपर से देखते हुए उसका चेहरा अपनी ओर घुमाया,कामिनी ने उसका हाथ झटका दिया,"..इतना गुस्सा!"

"पहले सुन तो लो किसका फोन था..",उसने फिर से उसका चेहरा अपनी तरफ किया,उसका लंड कामिनी की गंद को च्छू रहा था,"..मेरे डॅड थे फोन पे..उन्होने कहा था की इस वक़्त फोन करेंगे.",कामिनी ने उसकी ओर सवालिया नज़रो से देखा,"..इतनी रात को..?"

करण ने उसके गाल पे चूमा,फिर उसे उसकी बाई करवट पे बाई कोहनी के बल लेटने को कहा.वो भी वैसे ही उसके पीछे लेट गया & अपने दाये हाथ से उसके पेट को पकड़ लिया,"..हां,क्यूकी वो जहा हैअभी वाहा शाम के 7 बजे हैं."

कामिनी ने उसका अपना दाया हाथ पीछे ले जाके उसके सर को थाम अपने चेहरे पे झुका लिया,"अच्छा!",करण ने थोड़ी देर उसे चूमा,"..हां,मेरे डॅड लंडन मे रहते हैं.कामिनी,परिवार के नाम पे बस वोही हैं मेरे लिए..",करण का हाथ उसके पेट से उसकी चूत पे चला गया था & वो उसके दाने को सहला रहा था,"..मा तो काफ़ी पहले गुज़र गयी.मेरे चाचा रहते थे लंडन मे,उन्होने पापा को भी वही बुला लिया & वो भी वोही सेटल हो गये..",उसने देखा की कामिनी अब मस्ती मे कमर हिलाने लगी है.

"..मैं काम के सिलसिले मे यहा रहता हू.कभी-2 उनसे मिलने जाता हू.अब समझ मे आया क्यू भागा था फोन के लिए?",करण ने उसकी दाई टांग को हवा मे उठा दिया & पीछे से अपना खड़ा लंड उसकी चूत मे घुसा दिया,"हां.",कामिनी ने मस्त हो उसके सर को खींचते हुए उसके होंठ चूम लिए.

करण वैसे ही घुटने से थोड़ा उपर उसकी जाँघ को हवा मे उठाए,उसे चूमते हुए उसे चोदने लगा.

आज शाम को कामिनी को षत्रुजीत सिंग की पार्टी मे जाना था & उसकी समझ मे नही आ रहा था की वो क्या पहने.वो अपने कपबोर्ड के कपड़े उलट-पलट रही थी की उसकी नज़र 1 झीनी लाल सारी पे पड़ी & उसके दिमाग़ मे 1 ख़याल आया...क्यू ना आज शत्रुजीत को थोड़ा तडपया जाए!वो हुमेशा उसकी हाकतो से -उसके च्छुने से...उसकी और लड़कियो के साथ की गयी कामुक हर्कतो से तड़प उठती थी,तो आज इस बात का बदला चुकाने का अच्छा मौका था.पार्टी की भीड़-भाड़ मे वो उसके बहुत ज़्यादा करीब भी नही आ सकता था ना ही उसके बदन को ज़्यादा च्छू सकता था बस देख कर आहे भर सकता था!

सारी के ब्लाउस को ब्लाउस कहना ठीक नही होगा,वो 1 स्ट्रिंग बिकिनी का ब्रा था.सामने 2 तिकोने छ्होटे कप्स थे जो छातियो को ढँकते & उनको 1 साथ जोड़े हुए डोरिया.1 डोरी जो दोनो कप्स से जुड़ी थी,उसे माला की तरह गले मे डालने के बाद दोनो कप्स के बाहर से निकलती 2 डोरियो को पीछे पीठ पे बाँध उस ब्रा को पहना जाता था....इस लिबास मे उसके बदन को देख कर शत्रुजीत पे क्या बीतेगी..ये ख़याल आते ही कामिनी के होंठो पे मुस्कान खींच गयी.उसने तय कर लिया की आज रात वो यही सारी पहनेगी.उसने सारी को वापस कपबोर्ड मे रख उसे बंद किया & कोर्ट के लिए तैय्यार होने लगी.

 
शाम को कामिनी पार्टी के लिए तैय्यार हो खुद को 1 आख़िरी बार शीशे मे देख रही थी.बँधे बॉल & उसके ब्लाउस की वजह से उसकी पीठ & कमर लगभग नंगे ही थे.झीनी सारी के पार से उसका क्लीवेज भी झलक रहा था.उसने सारी को थोड़ा ठीक किया & फिर पार्टी के लिए निकल पड़ी.

ऑर्किड होटेल बस कुच्छ महीने पहले ही खुला था.उसकी 21 मंज़िला इमारत बड़ी शानदार थी.कामिनी जैसे ही होटेल मे दाखिल हुई 1 स्ट्वर्डेस उसकी तरफ आई,"मिस.शरण?"

"एस."

"आप प्लीज़ इधर आइए.",वो उसे 1 लिफ्ट की ओर ले गयी.उसने कुच्छ बटन्स दबाए,"..ये लिफ्ट आपको सीधा मिस्टर.सिंग की पार्टी वाले फ्लोर पे ही छ्चोड़ेगी,मॅ'म."

"थॅंक्स.",लिफ्ट के दरवाज़े बंद हो गये.

"वेलकम कामिनी!",लिफ्ट खुलते ही कामिनी 1 आलीशान से सूयीट के ड्रॉयिंग एरिया मे दाखिल हुई...मगर उसे हैरत हो रही थी...पूरा कमरा खाली था.

"हैरानी हो रही है ना?..आप सोच रही हैं कि बाकी लोग कहा हैं..?",कामिनी बस सर हिला दी.

"कामिनी,आप मेरे लिए मुक़दमे लड़ती हैं & उनमे जीतने पे खुशी या तो आपको होगी या मुझे...तो मैने सोचा की इस खुशी का जश्न भी केवल हम दोनो ही मनाए.",उसने वाइन का ग्लास कामिनी की ओर बढ़ाया जिसे कामिनी ने मुस्कुराते हुए थाम लिया..ये तो पासा ही पलट गया था....आज तो शत्रुजीत ने पूरी तैय्यारि की हुई थी उसे सिड्यूस करने की...ठीक है...अगर वो खेल खेलना चाहता है तो वो भी..कोई कम तो नही थी...,"अच्छा!लेकिन मुझे आपके इरादे कुच्छ ठीक नही लगते,मिस्टर.सिंग!",उसने 1 घूँट भरा.

"मेरे इरादे तो हुमेशा नेक रहते हैं,कामिनी & ये आप मुझे हमेशा मिस्टर.सिंग कह के क्यू बुलाती हैं...शत्रु कहिए.मेरे सारे दोस्त मुझे शत्रु ही बुलाते हैं."

"कैसे दोस्त हैं जो आपको दुश्मन कहते हैं!",कामिनी ने 1 और घूँट भरते हुए उसकी तरफ शोखी से देखा & फिर ग्लास मेज़ पे रख दिया & फिर खिड़की के पास जाकर उसके बाहर देखने लगी.नीचे पंचमहल की बत्तियाँ जगमगा रही थी & उपर आसमान मे तारे-बड़ा ही दिलकश नज़ारा था.

"तो फिर आप क्या कह के बुलाएँगी?"

"मैं आपकी दोस्त कहा हू!",कामिनी ने उसी शोख मुस्कान के साथ उसे पलट के देखा.शत्रुजीत की नज़रे उसकी मखमली पीठ का मुआयना कर रही थी,"..तो दुश्मन भी तो नही हैं!"

उसने रिमोट से म्यूज़िक ऑन किया,"शल वी डॅन्स?"

उसने आगे बढ़ कामिनी का दाया हाथ अपने बाए हाथ मे थामा & उसे कमरे के बीच मे ले आया & फिर अपना दाया हाथ उसकी पतली,नंगी कमर मे डाल उसके साथ डॅन्स करने लगा.कामिनी के जिस्म मे सनसनाहट सी दौड़ गयी.शत्रु का बड़ा सा हाथ उसकी कमर से चिपका हुआ था & उसकी उंगलिया बहुत हल्के से बीच-2 मे उसे सहला रही थी.

"आप सभी लड़कियो को ऐसे ही इंप्रेस करने की कोशिश करते हैं?",कामिनी का बाया हाथ उसके दाए कंधे पे था.

"सभी को नही,सिर्फ़ आपको.",शत्रुजीत ने उसके हाथ & कमर को 1 साथ बड़े हल्के से सहलाया तो कामिनी सिहर उठी & उसकी चूत मे कसक सी उठने लगी.

"मुझपे इतनी मेहेरबानी की कोई खास वजह?",उसने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला हुआ था..उसका जी तो कर रहा था की अभी,इसी वक़्त इस आदमी के चौड़े सीने मे अपना चेहरा च्छूपा ले & वो उसे बस अपनी बाहो मे कस ले.

"आप तो है ही खास!अब इस से खास कोई वजह हो सकती है भला?"

"आपने मुझे अपना वकील भी इसी लिए बनाया था ना की मेरे करीब आ सकें?",शत्रुजीत के माथे पे शिकन पड़ गयी.

"कामिनी,मुझे पता है कि मेरे बारे मे तुम क्या सोचती हो..",उसकी आवाज़ संजीदा हो गयी थी,"..लेकिन मैं अपने काम के साथ कभी भी खिलवाड़ नही करता.तुम्हे अपना वकील बनाने के पीछे बस 1 ही कारण था-तुम्हारी काबिलियत.",दोनो ने डॅन्स करना बंद कर दिया था मगर कामिनी का 1 हाथ अभी भी उसके कंधे पे & दूसरा उसके हाथ मे था.

"..हां,मैं चाहता हू तुम्हारे करीब आना..तुम्हे वैसे प्यार करना जैसे केवल 1 मर्द 1 औरत को कर सकता है..मगर इसके लिए मैं तुम्हारी झूठी तारीफ कर तुम्हारी तौहीन नही करूँगा.आज तक मैने तुम्हारी जितनी भी तारीफ की है तुम उसकी हक़दार हो.तुम जानती हो मुझे तुम मे सबसे ज़्यादा क्या अच्छा लगता है?",कामिनी ने बस आँखो से इशारा किया मानो पुच्छ रही हो की क्या.

"..तुम्हारा खुद पे विश्वास.तुम बहुत खूबसूरत हो & तुम्हारे इस बदन ने तो मुझे पहले दिन से ही दीवाना किया हुआ है मगर जो बात कामिनी शरण को कामिनी शरण बनाती है & मुझे तुम्हारी ओर खींचती है वो यही है-तुम्हारा अपने उपर भरोसा..तुम अगर अभी मुझे ना कह दो तो मैं इसी वक़्त तुम्हारे जिस्म से अपने हाथ खींच लूँगा..",दोनो बड़ी गहरी नज़रो से 1 दूसरे को देख रहे थे,"..मैं पूरी ज़िंदगी तुम्हारा इंतेज़ार कर सकता हू,कामिनी..पूरी ज़िंदगी."

"तुम्हारी इतनी अच्छी बीवी है,फिर भी तुम दूसरी औरतो के पीछे क्यू भागते हो?",कामिनी आज शत्रुजीत नाम की इस पहेली को सुलझा ही लेना चाहती थी.

"नंदिता बहुत अच्छी है पर शायद हम दोनो 1 दूसरे के लिए नही बने हैं."

"अगर वो और मर्दो के साथ सोए तो?"

"उसकी मर्ज़ी..मगर वो ऐसा करेगी नही.ऐसा करेगी तो उसमे & मुझमे कोई फ़र्क नही रहेगा & मेरे जैसा बनना उसे कभी भी मंज़ूर नही होगा.",उसने कामिनी के हाथ को छ्चोड़ा तो कामिनी ने अपना दूसरा हाथ भी उसके दूसरे कंधे पे रख दिया,अब शत्रुजीत दोनो हाथो से उसकी कमर थामे हुए था.

"..वैसे भी किसी को बाँधने से क्या मिलता है!पता है,कामिनी मैं क्या सोचता हू?..अगर कोई औरत & मर्द 1 दूसरे को चाहते हैं तो उन्हे कभी भी शादी नही करनी चाहिए."

"क्यू?"

"चाहत का मतलब 1 दूसरे को बाँधना नही,आज़ाद छ्चोड़ना है."

"तो आज रात के बाद भी तुम मेरी ज़ाति ज़िंदगी से जुड़ा मुझसे कोई सवाल नही करोगे?"

"नही.अगर तुम खुद बोलो तो अलग बात है...मैं तुम्हारा पूरा ख़याल रखूँगा,दिल से चाहूँगा की तुम्हे कोई तकलीफ़ ना हो,मगर तुमपे कभी हक़ जता के तुम्हारी मर्ज़ी से नही रोकुंगा..देखो अगर हम दोनो 1 दूसरे के साथ खुश रहेंगे तो अपने आप ही हम 1 दूसरे की पसंद-नापसंद का ख़याल रखेंगे..अब ज़बरदस्ती तो कोई किसी को नही चाह सकता ना..तो अगर मैं तुम्हे किसी बात से तुम्हारी मर्ज़ी के खिलाफ रोकू तो फिर रिश्ते मे कड़वाहट आ जाएगी!"

"मेरा तो मानना है,कामिनी की जितने भी दिन हम साथ रहे हैं..बस हंसते-खेलते गुज़ारदे...1 पल के लिए भी कड़वाहट हो ही क्यू ज़िंदगी मे!",कामिनी को लगा जैसे वो खुद को बोलते हुए सुन रही हो.वो अपने पंजो पे उचकी & शत्रुजीत की गर्दन को अपनी बाहो मे क़ैद करते हुए अपने रसीले होंठ उसके होंठो से सटा दिए.

 
गहरी चाल पार्ट--16

गतान्क से आगे....................

षत्रुजीत की बाहे भी उसकी कमर पे पूरी कस गयी & दोनो 1 दूसरे को बड़ी शिद्दत से चूमने लगे.कामिनी तो शत्रुजीत के छुने भर से ही बेताब हो जाती थी,आज तो उसका बदन मस्ती से थरथरा रहा था.शत्रुजीत के फौलादी सीने से उसकी नर्म च्चातिया बिल्कुल पिस गयी थी.

बेचैनी बढ़ी तो कामिनी के हाथ उसके दिल का हाल बयान करते हुए पागलो की तरह शत्रु की पीठ & छाती पे घूमने लगे.कामिनी ने हाथ आगे लेक बिना उसके से अपने लब जुड़ा किए उसकी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया.शत्रुजीत का हाथ उसकी कमर से नीचे सरक के उसकी मस्त गंद पे आ गया था,"..उउंम्म...!",गंद पे उसके हाथो का दबाव महसूस करते ही कामिनी करही,उसने किस तोड़ी & शत्रुजीत की शर्ट निकाल कर उसके सीने को नंगा कर दिया.

अब तक उसने शत्रुजीत के बदन को दूर से ही निहारा था,आज पहला मौका था जब वो उसे करीब से च्छू पा रही थी.उसके मन मे भरी मस्ती की शिद्दत उसके छुने से शत्रुजीत के दिल तक पहुँच रही थी.ऐसी जवान,खूबसूरत लड़की की ऐसी कामुक हर्कतो से कौन मर्द बेक़ाबू हुए बिना रह सकता है,फिर शत्रुजीत तो इस खेल का माना हुआ खिलाड़ी था!

कामिनी उसके सीने के बालो मे उंगलिया फिरस्ते हुए उसके सीने को चूम रही थी & शत्रुजीत उसकी गंद को मसल्ने के बाद हाथो को वापस उसकी कमर पे ला रहा था.कामिनी झुकी & उसके निपल को चूमने लगी,"..आअहह..!",शत्रुजीत के बदन मे सनसनी दौड़ गयी.उसने 1 हाथ कामिनी के बालो मे घुसा दिया & दूसरे को सामने ला उसके चिकने पेट पे फिरने लगा.

कामिनी उसके सीने को लगातार चूम रही थी की तभी शत्रुजीत ने उसकी कमर मे हाथ घुसा कर उसकी सारी खोल दी.बहुत देर से उसके सीने से ढालका आँचल उसके पैरो मे फँस उसे परेशान कर रहा था.कामिनी ने भी उसे झट से अपने बदन से अलग कर दिया & फिर शत्रुजीत से चिपक गयी.

शत्रुजीत ने उसके चेहरे को चूमा& फिर उसके बड़े से क्लीवेज पे झुक गया,"..ऊऊंन्न..ह..!",कामिनी ने उसे अपने सीने पे दबा दिया & उसकी पीठ पे अपने नाख़ून चलाने लगी.शत्रुजीत ने उसकी कमर थाम उसे खुद से पूरा सटा लिया & उसके क्लीवेज से उपर आ उसकी गर्दन चूमने लगा.कामिनी भी उसकी कमर थामे उस से सटी हवा मे उड़ रही थी.शत्रुजीत का लंड उसकी चूत से बिल्कुल सटा हुआ था & चूत का गीलेपान से बुरा हाल था.

कामिनी को ये अंदाज़ा हो गया था की शत्रुजीत का लंड काफ़ी बड़ा है,इस वक़्त उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई पाइप का टुकड़ा उसकी चूत से दबा हो.उसके दिल मे उस लंड को नंगा देखने,उस से खेलने की तमन्ना जाग उठी.उसने हाथ नीचे ला शत्रुजीत की बेल्ट खोल दी तो शत्रुजीत भी उसके पेटिकोट को खोलने की कोशिश करने लगा.

दोनो की बेचैनी इस कदर बढ़ गयी थी की दोनो 1 दूसरे से लगे हुए & जल्दी से अपने कपड़े उतारने लगे.शत्रुजीत ने पॅंट उतार कर सामने देखा तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया,कामिनी अब केवल स्ट्रिंग बिकिनी मे थी.डोरियो से बँधे लाल ब्रा & पॅंटी मे वो इस वक़्त साक्षात रति लग रही थी.कामिनी की निगाहे भी शत्रुजीत के अंडरवेर से चिपकी हुई थी.अंडरवेर बहुत ज़्यादा फूला हुआ था.

शत्रुजीत आगे बढ़ा तो वो भी फ़ौरन उसकी बाहो मे समा गयी.दोनो के लगभग नंगे जिस्म 1 दूसरे से ऐसे चिपके थे की अगर दूर से देखते तो लगता की 1 ही हैं.शत्रुजीत बस कामिनी के बदन को अपने हाथो से मसले जा रहा था & कामिनी भी उसके कसरती जिस्म के 1-1 हिस्से को जैसे च्छू लेना चाहती थी.

थोड़ी देर चूमने के बाद शत्रुजीत ने अपनी बाहे वैसे ही उसके बदन के गिर्द रखे हुए नीचे कर उसकी गंद के नीचे लगाई & उसे उठा लिया & सूयीट के बेडरूम की तरफ बढ़ चला.कामिनी सर झुका कर उसे चूमने लगी.उसके हाथ उसके कंधे पे टीके हुए थे.

कमरे मे घुस दोनो बिस्तर पे घुटनो के बल खड़े 1 दूसरे को चूमने लगे तो कामिनी का हाथ शत्रुजीत की पीठ पे घूमने के बाद नीचे आया & उसका अंडरवेर खोलने लगा.शत्रुजीत खड़ा हुआ & कामिनी ने 1 झटके मे अंडरवेर को उसके जिस्म से अलग कर दिया.

"..हाअ..!",कामिनी का 1 हाथ अपने हैरत मे खुले मुँह पे चला गया,उसके सामने शत्रुजीत का 9 इंच लंबा & मोटा लंड खड़ा था.लंड का रंग बिल्कुल काला था & शत्रुजीत ने चुकी अपनी झांते बिल्कुल सॉफ की हुई थी,वो और ज़्यादा बड़ा लग रहा था.नीचे 2 बड़े से अंडे लटक रहे थे,जोकि इस वक़्त बिल्कुल कसे हुए थे.

"..उउफ़फ्फ़...जीत..कितना बड़ा है ये!",कामिनी ने घुटनो पे बैठ उसके लंड को च्छुआ तो शत्रुजीत के बदन मे सनसनाहट दौड़ गयी & उसने कामिनी के सर को पकड़ लिया.कामिनी के दिल मे भी जोश भर गया,उसने लंड को अपनी मुट्ठी मे कसा तो पाया की उसकी मुट्ठी उसपे पूरी नही कस पा रही थी....उसकी नाज़ुक सी चूत का क्या हाल करेगा ये!1 पल को उसे थोड़ी गबराहट हुई पर अगले ही पल उसके दिलो-दिमाग़ पे च्छाई खुमारी ने उसे ये सोचने पे मजबूर कर दिया की आज उसकी चूत पूरी की पूरी भरेगी बल्कि ये लंड तो शायद उसकी कोख को भी च्छू ले.

उसने लंड को हिलाया & उसकी जड़ के उपर शत्रुजीत को चूम लिया तो उसके मुँह से आह निकल पड़ी.शत्रुजीत ने उसके सर को और कस के पकड़ लिया.कामिनी ने अपना मुँह खोला & लंड को अपने मुँह मे घुसाने लगी.लंड इतना मोटा था की उसके होंठ पूरे फैल गये & उसके मुँह मे थोड़ा दर्द होने लगा.

जितना लंड उसके मुँह मे आसानी से घुसा उसे घुसने के बाद उसने बाहर के हिस्से पे हाथ & अंदर के हिस्से पे ज़ुबान चलाना शुरू कर दिया.शत्रुजीत तो बस मस्ती मे पागल हो गया.वो कामिनी के सर को पकड़े हल्के-2 कमर हिलाने लगा जैसे की वो उसके मुँह को चोद रहा हो.कामिनी भी उसके लंड से बस खेले ही जा रही थी.

लंड को मुँह से निकाल उसने पूरे लंड को उपर से नीचे तक चटा & फिर उसके अंदो को अपनी मुट्ठी मे भर लिया.शत्रुजीत को लगा की उसके अंदर उबाल रहा लावा अभी कामिनी के हाथो मे ही छूट जाएगा.उसने बड़ी मुश्किल से खुद पे काबू रखा.कामिनी तो जैसे दूसरी ही दुनिया मे थी,लंड के आस-पास 1 भी बाल ना होने के कारण वो उसके आस पास भी जम के चूम-चाट रही थी.

शत्रुजीत अभी नही झड़ना चाहता था,उसने उसका सर अपने लंड से खींचा & झुक कर अपने घुटनो पे बैठ गया & उसे बाहो मे भर चूमने लगा.चूमते हुए उसने उसकी ब्रा की डोरिया खोली तो कामिनी ने अलग हो उसकी ब्रा को गर्दन से निकालने मे मदद की.

"वाउ..!कितनी मस्त चुचिया हैं तुम्हारी कामिनी!",उसने उन्हे हाथो मे भर लिया,"..इतनी कसी हुई & ये निपल कितने प्यारे लग रहे हैं..!",अपने प्रेमी के मुँह से अपनी तारीफ सुन कामिनी के दिल मे खुशी की लहर दौड़ गयी,"..तुम्हारी ही हैं जीत..पी जाओ इन्हे...& मेरी भी प्यास बुझाओ."

"ऊव्वववव..!",शत्रुजीत ने उसकी चूचियो को हाथो मे भर अपनी ओर खींचा & मुँह मे भर लिया.कामिनी ने उसके बालो मे बैचेनी से उंगलिया फिराने लगी.उसकी आँखे बंद हो गयी & वो जैसे नशे मे चली गयी.शत्रुजीत के बड़े-2 हाथ उसकी कसी छातियो को पूरा दबोच कर मसलते तो उसके बदन मे जैसे बिजली दौड़ जाती,उसकी चूत मे जैसे कोई बड़ी बेचैनी का एहसास होता & वो अपना बदन मोड़ बेसब्री से पानी कमर हिलाने लगती.

उसकी चूत का बुरा हाल था & उसने इतना पानी छ्चोड़ा था की उसकी पॅंटी पे 1 बड़ा गोल सा धब्बा पड़ गया था.शत्रुजीत ने जी भर कर उसकी चुचियो से खेला,अब दोनो के दिलो मे भड़क रही आग कुच्छ ज़्यादा ही तेज़ हो गयी थी & दोनो बस इसमे जल जाना चाहते थे.शत्रुजीत ने उसकी कमर की दोनो तरफ बँधी पॅंटी की डोरियो को खींचा तो पॅंटी उसकी कमर से तो ढालाक गयी पर उसके रस से भीगी होने के कारण उसकी चूत से चिपकी रही.

 
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