S
StoryPublisher
Guest
जिन्दगी के सबसे यादगार तीन दिन
सुबह हो चुकी थी।
राज और डॉली एक-दूसरे से लिपटे हुए किसी अचल मूर्ति की तरह जमीन पर पड़े हुए थे।
''राज।"-डॉली फुसफुसाते से स्वर में बोली- ''सुबह हो गई है।"
राज के शरीर में हरकत हुई। उसने डॉली को अपनी बांहों के घेरे से आजाद किया और अपनी जगह पर उठ खड़ा हुआ।
सामने अब भी वो मकान सिर उठाये खड़ा था।
''हमारे अलावा कोई नहीं बचा क्या ?"-राज ऐसे बोला जैसे अपने आप से कह रहा हो।
''नहीं।"-डॉली बोली-''मैंने ऊपर डोंगरा की लाश देखी थी। रिंकी ने उसे चाकू से...।
"-कहते-कहते डॉली बीच में ही चुप हो गई। डोंगरा की क्षत-विक्षत लाश को याद कर वो मन ही मन दहल उठी थी।
तभी कुछ अजीब से शोर जैसी आवाज सुनाई देने लगी।
राज सावधान हो गया।
क्या अब फिर कुछ होने वाला था?
रात भर चला खूनी घटनाओं का सिलसिला शायद अब भी खत्म नहीं हुआ था। विचित्रताओं और भयानक घटनाओं से भरी वो रात अतुल के जीवन की सबसे अजीब रात थी।
सामने वो भुतहा मकान किसी विशाल राक्षस की तरह खड़ा लग रहा था।
वो शोर की आवाज मकान के सामने के हिस्से की ओर से आ रही थी।
''चलो, डॉली।"-राज ने सहारा देकर डॉली को उठाने की कोशिश की।
''नहीं।"-डॉली भय से कांप उठी- ''मत जाओ।
"
''मुझे देखने जाना होगा...।"
''नहीं। मैं नहीं जाऊंगीं। मैं अब ये सब और बर्दाश्त नहीं कर सकती।
"
''अच्छा ठीक है। तुम यहीं रूको। मैं देखकर आता हूं।"
''नहीं।"-उसने मजबूती से राज का हाथ पकड़ लिया-''तुम भी मत जाओ।"
''मुझे जाना होगा।"-राज ने उसका हाथ थपथपाया-''हम हमेशा यहां इस तरह बैठे नहीं रह सकते। तुम यहीं रहना। मैं बस गया और आया।"
डॉली को समझाकर राज आगे बढ़ा और पेड़ों के झुरमुट से निकलकर मकान के पिछले हिस्से में पहुंचा।
मकान के पिछले हिस्से में पहुंचते ही सबसे पहले उसकी नजर स्टोर रूम के दरवाजे पर पड़ी।
दरवाजा बंद था।
जहां रात में अनुराग की लाश पड़ी थी, वो जगह भी खाली थी।
आवाज तेज हो गई थी और मकान के सामने के हिस्से की ओर से आ रही थी।
राज मकान के सामने के हिस्से में पहुंचा। वहां का दृश्य देखकर वो सुखद आश्चर्य से भर उठा।
घर के आंगन में एक हैलीकॉप्टर खड़ा था।
वो शोर की आवाज उसी की थी।
हैलीकॉप्टर! यहां। क्या ये कोई सपना था? या उसकी नजर धोखा खा रही थी?
वो अपनी जगह पर स्थिर खड़ा मंत्रमुग्ध सा हेलीकॉप्टर को देखता रहा गया।
तभी हैलीकॉप्टर का दरवाजा खुला और एक ऊंचे कद का सूट-बूटधारी विदेशी शख्स उसमें से बाहर निकला। उसने हाथ में एक ब्रीफकेस थामा हुआ था। हैलीकॉप्टर का पंखा अब भी घूम रहा था, जिसकी हवा से उस शख्स के बाल उड़ रहे थे।
उसने राज की ओर देख कर हाथ हिलाया।
राज उसके पास पहुंचा। अंदर बैठे पायलट ने हैलीकॉप्टर का इंजन बंद कर दिया,जिससे हैलीकॉप्टर का पंखा धीमा होते हुए रूक गया।
''हैलो, मिस्टर राज!"-उस सूट-बूटधारी व्यक्ति ने राज की ओर हाथ बढ़ाया-''आई एम अरनॉल्ड सिल्वा। फ्रॉम 'पैरानोर्मल होल्ड', न्यूयॉर्क।"
''आप मेरा नाम कैसे जानते हैं?"-राज उसकी ओर हाथ बढ़ाते हुए बोला।
''आप यहां होने वाले 'आइसोलेशन इवेंट' के तीन दिन के प्रोग्राम में शामिल होने वाले थे। जो कुछ कारणों से कम्पनी द्वारा कैंसल कर दिया गया।"
''कैंसल कर दिया गया?"-राज हैरानी से बोला।
''हां। आपने मेल चैक नहीं की?"
राज का दिमाग सांय-सांय कर उठा।
''और मेरे आने की वजह भी यही है।
"-सिल्वा कह रहा था- ''हमें पता चला कि कैंसल करने के बावजूद आप लोग यहां आकर रह रहे थे। हमारा केयरटेकर भी आप लोगों के साथ था। इट्स ब्रीच ऑफ कॉन्ट्रैक्ट। मिस्टर डोंगरा की नौकरी तो गई समझो।"
''मेरे ख्याल से अब इससे मिस्टर डोंगरा को कोई फर्क नहीं पड़ता।"-राज धीमे से बोला।
उसने एक चुभती निगाह राज पर डाली, फिर बोला-''आपके बाकी साथी कहां हैं?"
''हम दो ही बचे हैं। मैं और डॉली। डॉली वहां पीछे जंगल में है।"''बचे हैं?"-सिल्वा का स्वर अजीब-सा हो गया।
''हां।"
''क्या मतलब 'बचे हैं ?"
राज ने उसकी ओर देखा। वो तय नहीं कर पाया कि अगर वो पिछले तीन दिनों में वहां उनके साथ जो कुछ भी हुआ था, उसके बारे में उस शख्स को बताएगा तो वो उसका जरा भी विश्वास कर पाएगा।
वो ही क्यों, दुनिया में शायद कोई भी उनकी आपबीती पर विश्वास नहीं कर पाएगा।
''वो सब मैं आपको बाद में बताऊंगा।"-राज ने उसके सवाल को टाल दिया-''पहले मैं अपनी साथी को ले आऊं।"
''चलिए, मैं भी आपके साथ चलता हूं।"-कहकर सिल्वा भी उसके साथ हो लिया।
वे दोनों घर के पिछले हिस्से में पहुंचे, जहां से पेड़ों मे होते हुए जंगल में उस जगह पहुंचे, जहां संदूक से लिपटी हुई डॉली बेसुध सी पड़ी थी।
डॉली को उस हालत में देखकर सिल्वा के चेहरे पर गम्भीरता छा गई। उसने अपनी आंखों पर पहना हुआ चश्मा उतार दिया।
फिर उसने एक नई नजर से राज की ओर देखा। राज की हालत भी डॉली की तरह ही खराब लग रही थी।
''ओ माई गॉड!"-फिर वो धीमे स्वर में बुदबुदाया-''ओ माई गॉड।"
''डॉली।"-राज खोखले-से स्वर में बोला-''एक बहुत बुरी खबर है। डोंगरा साहब की नौकरी चली गई है।"
डॉली ने न समझ में आने वाले अंदाज में पहले राज, फिर सिल्वा की ओर देखा।
''ये 'पैरानॉर्मल होल्ड' के डेलीगेट मिस्टर अरनॉल्ड सिल्वा हैं। इन्होंने ही मुझे ये मनहूस खबर दी है।"-राज बोला।
''आप लोग"-सिल्वा बोला-''तीन दिनों से यहां रह रहे थे? वो भी तब, जब इवेंट कैंसल कर दिया गया था?"
''हमें इवेंट कैंसल होने की कोई जानकारी नहीं थी।"-राज डॉली को सहारा देकर उठाते हुए बोला, उठते हुए डॉली ने वो सारे लॉकेट वगैरह समेट लिए कि गलती से भी उनमें से कोई वहां रह न जाए।
''लेकिन हमने तो आपको ई मेल किया था...।"
''भाड़ में गया ई मेल।"-राज अपने स्वर को सौम्य बनाए रखने की भरसक कोशिश करते हुए बोला-''क्या आप हम पर इतना अहसान कर सकते हैं कि उस हैलीकॉप्टर से हमें इस जगह से दूर ले जा सकें?"
''क्या? ओह। हां। ऑफकोर्स। लेकिन उससे पहले मेरा आपसे अनुरोध है कि आप मुझे बताएं कि आपके बाकी साथी कहां हैं? क्या सचमुच आप लोग तीन दिनों से यहां थे? मिस्टर डोंगरा कहां हैं ?"
''मिस्टर डोंगरा ऊपर वाली मंजिल पर मरे पड़े हैं।"-डॉली कराहती-सी बोली।
''आपके डोंगरा साहब और उनकी गर्लफ्रेंड को मिलाकर हम आठ लोग तीन दिन पहले यहां आए थे। और अब हम दो ही बचे हैं। और बचे रहने के लिए जरूरी है कि हम जल्दी से जल्दी इस जगह से दूर चले जाएं।"
सिल्वा गम्भीर निगाहों से उनको देखता रहा, फिर बोला-''आपको मेरे हैलीकॉप्टर में लिफ्ट जरूर मिलेगी, मिस्टर राज लेकिन उसके लिए आपको मेरे कुछ सवालों के जवाब देने पड़ेंगें।"
सुबह हो चुकी थी।
राज और डॉली एक-दूसरे से लिपटे हुए किसी अचल मूर्ति की तरह जमीन पर पड़े हुए थे।
''राज।"-डॉली फुसफुसाते से स्वर में बोली- ''सुबह हो गई है।"
राज के शरीर में हरकत हुई। उसने डॉली को अपनी बांहों के घेरे से आजाद किया और अपनी जगह पर उठ खड़ा हुआ।
सामने अब भी वो मकान सिर उठाये खड़ा था।
''हमारे अलावा कोई नहीं बचा क्या ?"-राज ऐसे बोला जैसे अपने आप से कह रहा हो।
''नहीं।"-डॉली बोली-''मैंने ऊपर डोंगरा की लाश देखी थी। रिंकी ने उसे चाकू से...।
"-कहते-कहते डॉली बीच में ही चुप हो गई। डोंगरा की क्षत-विक्षत लाश को याद कर वो मन ही मन दहल उठी थी।
तभी कुछ अजीब से शोर जैसी आवाज सुनाई देने लगी।
राज सावधान हो गया।
क्या अब फिर कुछ होने वाला था?
रात भर चला खूनी घटनाओं का सिलसिला शायद अब भी खत्म नहीं हुआ था। विचित्रताओं और भयानक घटनाओं से भरी वो रात अतुल के जीवन की सबसे अजीब रात थी।
सामने वो भुतहा मकान किसी विशाल राक्षस की तरह खड़ा लग रहा था।
वो शोर की आवाज मकान के सामने के हिस्से की ओर से आ रही थी।
''चलो, डॉली।"-राज ने सहारा देकर डॉली को उठाने की कोशिश की।
''नहीं।"-डॉली भय से कांप उठी- ''मत जाओ।
"
''मुझे देखने जाना होगा...।"
''नहीं। मैं नहीं जाऊंगीं। मैं अब ये सब और बर्दाश्त नहीं कर सकती।
"
''अच्छा ठीक है। तुम यहीं रूको। मैं देखकर आता हूं।"
''नहीं।"-उसने मजबूती से राज का हाथ पकड़ लिया-''तुम भी मत जाओ।"
''मुझे जाना होगा।"-राज ने उसका हाथ थपथपाया-''हम हमेशा यहां इस तरह बैठे नहीं रह सकते। तुम यहीं रहना। मैं बस गया और आया।"
डॉली को समझाकर राज आगे बढ़ा और पेड़ों के झुरमुट से निकलकर मकान के पिछले हिस्से में पहुंचा।
मकान के पिछले हिस्से में पहुंचते ही सबसे पहले उसकी नजर स्टोर रूम के दरवाजे पर पड़ी।
दरवाजा बंद था।
जहां रात में अनुराग की लाश पड़ी थी, वो जगह भी खाली थी।
आवाज तेज हो गई थी और मकान के सामने के हिस्से की ओर से आ रही थी।
राज मकान के सामने के हिस्से में पहुंचा। वहां का दृश्य देखकर वो सुखद आश्चर्य से भर उठा।
घर के आंगन में एक हैलीकॉप्टर खड़ा था।
वो शोर की आवाज उसी की थी।
हैलीकॉप्टर! यहां। क्या ये कोई सपना था? या उसकी नजर धोखा खा रही थी?
वो अपनी जगह पर स्थिर खड़ा मंत्रमुग्ध सा हेलीकॉप्टर को देखता रहा गया।
तभी हैलीकॉप्टर का दरवाजा खुला और एक ऊंचे कद का सूट-बूटधारी विदेशी शख्स उसमें से बाहर निकला। उसने हाथ में एक ब्रीफकेस थामा हुआ था। हैलीकॉप्टर का पंखा अब भी घूम रहा था, जिसकी हवा से उस शख्स के बाल उड़ रहे थे।
उसने राज की ओर देख कर हाथ हिलाया।
राज उसके पास पहुंचा। अंदर बैठे पायलट ने हैलीकॉप्टर का इंजन बंद कर दिया,जिससे हैलीकॉप्टर का पंखा धीमा होते हुए रूक गया।
''हैलो, मिस्टर राज!"-उस सूट-बूटधारी व्यक्ति ने राज की ओर हाथ बढ़ाया-''आई एम अरनॉल्ड सिल्वा। फ्रॉम 'पैरानोर्मल होल्ड', न्यूयॉर्क।"
''आप मेरा नाम कैसे जानते हैं?"-राज उसकी ओर हाथ बढ़ाते हुए बोला।
''आप यहां होने वाले 'आइसोलेशन इवेंट' के तीन दिन के प्रोग्राम में शामिल होने वाले थे। जो कुछ कारणों से कम्पनी द्वारा कैंसल कर दिया गया।"
''कैंसल कर दिया गया?"-राज हैरानी से बोला।
''हां। आपने मेल चैक नहीं की?"
राज का दिमाग सांय-सांय कर उठा।
''और मेरे आने की वजह भी यही है।
"-सिल्वा कह रहा था- ''हमें पता चला कि कैंसल करने के बावजूद आप लोग यहां आकर रह रहे थे। हमारा केयरटेकर भी आप लोगों के साथ था। इट्स ब्रीच ऑफ कॉन्ट्रैक्ट। मिस्टर डोंगरा की नौकरी तो गई समझो।"
''मेरे ख्याल से अब इससे मिस्टर डोंगरा को कोई फर्क नहीं पड़ता।"-राज धीमे से बोला।
उसने एक चुभती निगाह राज पर डाली, फिर बोला-''आपके बाकी साथी कहां हैं?"
''हम दो ही बचे हैं। मैं और डॉली। डॉली वहां पीछे जंगल में है।"''बचे हैं?"-सिल्वा का स्वर अजीब-सा हो गया।
''हां।"
''क्या मतलब 'बचे हैं ?"
राज ने उसकी ओर देखा। वो तय नहीं कर पाया कि अगर वो पिछले तीन दिनों में वहां उनके साथ जो कुछ भी हुआ था, उसके बारे में उस शख्स को बताएगा तो वो उसका जरा भी विश्वास कर पाएगा।
वो ही क्यों, दुनिया में शायद कोई भी उनकी आपबीती पर विश्वास नहीं कर पाएगा।
''वो सब मैं आपको बाद में बताऊंगा।"-राज ने उसके सवाल को टाल दिया-''पहले मैं अपनी साथी को ले आऊं।"
''चलिए, मैं भी आपके साथ चलता हूं।"-कहकर सिल्वा भी उसके साथ हो लिया।
वे दोनों घर के पिछले हिस्से में पहुंचे, जहां से पेड़ों मे होते हुए जंगल में उस जगह पहुंचे, जहां संदूक से लिपटी हुई डॉली बेसुध सी पड़ी थी।
डॉली को उस हालत में देखकर सिल्वा के चेहरे पर गम्भीरता छा गई। उसने अपनी आंखों पर पहना हुआ चश्मा उतार दिया।
फिर उसने एक नई नजर से राज की ओर देखा। राज की हालत भी डॉली की तरह ही खराब लग रही थी।
''ओ माई गॉड!"-फिर वो धीमे स्वर में बुदबुदाया-''ओ माई गॉड।"
''डॉली।"-राज खोखले-से स्वर में बोला-''एक बहुत बुरी खबर है। डोंगरा साहब की नौकरी चली गई है।"
डॉली ने न समझ में आने वाले अंदाज में पहले राज, फिर सिल्वा की ओर देखा।
''ये 'पैरानॉर्मल होल्ड' के डेलीगेट मिस्टर अरनॉल्ड सिल्वा हैं। इन्होंने ही मुझे ये मनहूस खबर दी है।"-राज बोला।
''आप लोग"-सिल्वा बोला-''तीन दिनों से यहां रह रहे थे? वो भी तब, जब इवेंट कैंसल कर दिया गया था?"
''हमें इवेंट कैंसल होने की कोई जानकारी नहीं थी।"-राज डॉली को सहारा देकर उठाते हुए बोला, उठते हुए डॉली ने वो सारे लॉकेट वगैरह समेट लिए कि गलती से भी उनमें से कोई वहां रह न जाए।
''लेकिन हमने तो आपको ई मेल किया था...।"
''भाड़ में गया ई मेल।"-राज अपने स्वर को सौम्य बनाए रखने की भरसक कोशिश करते हुए बोला-''क्या आप हम पर इतना अहसान कर सकते हैं कि उस हैलीकॉप्टर से हमें इस जगह से दूर ले जा सकें?"
''क्या? ओह। हां। ऑफकोर्स। लेकिन उससे पहले मेरा आपसे अनुरोध है कि आप मुझे बताएं कि आपके बाकी साथी कहां हैं? क्या सचमुच आप लोग तीन दिनों से यहां थे? मिस्टर डोंगरा कहां हैं ?"
''मिस्टर डोंगरा ऊपर वाली मंजिल पर मरे पड़े हैं।"-डॉली कराहती-सी बोली।
''आपके डोंगरा साहब और उनकी गर्लफ्रेंड को मिलाकर हम आठ लोग तीन दिन पहले यहां आए थे। और अब हम दो ही बचे हैं। और बचे रहने के लिए जरूरी है कि हम जल्दी से जल्दी इस जगह से दूर चले जाएं।"
सिल्वा गम्भीर निगाहों से उनको देखता रहा, फिर बोला-''आपको मेरे हैलीकॉप्टर में लिफ्ट जरूर मिलेगी, मिस्टर राज लेकिन उसके लिए आपको मेरे कुछ सवालों के जवाब देने पड़ेंगें।"