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चलते पुर्जे
सब इंस्पेक्टर हैदर अली ने आतिशबाजी की दुकान में दाखिल होते हुए उसके मालिक से कहा -"एसएसपी साहब के यहां से फोन पर फ्लावर बम और पेपर बम का आर्डर गया था ।"
"ओह यस !" कहने के बाद शापकीपर ने ऊंची आवाज में नोकर से एसएसपी के आर्डर वाला डिब्बा लाने के लिए कहा ।
इधर हैदर अली ने पेमेंट किया, उधर नोकर ने गत्ते का बना एक वर्गाकार डिब्बा लाकर काउंटर पर रख दिया ।
शापकीपर ने पूछा-""क्या मैं जान सकता हूइंस्पेक्टर साहब कि एसएसपी साहब के यहां क्या र्फक्शन है ?'
"उनके पांच वर्षीय बेटे वारिस खान का बर्थ डे हे ।”
“वर्थ डे, तब तो उन्होंने वहुत ही उम्दा किस्म की आतिशबाजी का आर्डर दिया है । फ्लावर बम ओर पेपर बम किसी को नुकसान नहीं पहुँचाएंगे ओर बच्चे इनके फटने पर खुश भी बहुत होंगे । बस हल्की हल्की धमाकों के साथ फूलों और पेपर की कटिंग की बरसात होगी । ये सारे बम केक वाली मेज के चारों तरफ लगवा दीजिएगा और असली मजा देखना चाहें तो इन सबमें एकसाथ आग लगवा दीजिएगा । चारों तरफ से एकसाथ होने वाली फूलों की बारिश को देखकर बच्चे नाच उठेंगे ।"'
हैदर ने बगेर कुछ कहे डिब्बा उठाया ।
दुकान के ठीक सामने पार्किग एरिया में खडी पुलिस जीप की पिछली सीट पर रखा और स्वयं घूमकर अगली बाईं सीट पर बैठता ड्राइवर से बोला…"चलौ ! "
ड्राइवर ने जीप आगें बढा दी ।
शीघ्र ही जीप सड़क से गुजर रहे ट्रेफिक का हिस्सा बन गई और मुश्किल से पंद्रह मिनट बाद वह ऐसी सड़क से गुजर रही थी जिस पर नाममात्र का ट्रेफिक था ।
अचानक वातावरण मेँ किसी महिला के चीखने की आवाज़... उभरी'…“बचाओ...वचाओ ।"'
ड्राइवर और हैदर अली चौंके ।
दोनों ने पलटकर एक दूसरे सरे की तरफ देखा ।
"आवाज़ उधर से आई ।"' हैदर अली ने सामने नज़र आ रहे सड़क के मोढ़ की तरफ इशारा किया…“त्तेज चलो !"
ड्राइवर के पेर का दबाव स्यत: एक्सीलेटर पर बढ़ गया ।
बचाओ...बचाओ की आवाज तेज़ होती जा रही थी।
हैदर अली ने होलेस्टर से रिवाल्वर खींच लिया ।।
जीप ने टायरों की चरमराहट के साथ मोड़ काटा ।
केवल सो गज दूर एक 'ब्लेक हंडरेड' के आगे, सिल्वर कलर की "सीडान' सढ़क पर तिरछी खडी नजर आई। साथ ही नज़र आए शक्ल सूरत से गुंडे से नजर आ रहे वे दो लढ़कै जो एक लड़क्री को स्रीडॉन की तरफ घसीटने की कोशिश कर रहे थे।
विरोध करती लडकी लगातार चीख रही थी ।
जीप कै टायरों की चरमराहट ने लड़कों को चोकाया ।
हैदर अली जोर से चीखा…""रोक्रो...रोक्रो .""
ड्राइवर ने पूरी ताकत से ब्रेक पैडल दबाया ।
टायरों की चिंघाड़ कै साथ जीप ब्लेक हंइरेड की बगल में रुकी ।
जीप कै पूरी तरह रुकने से पहले ही सढ़क पर कूदते हुए हेदर अली ने हवाई फायर किया था ।
लडकी को कब्जाए लडके अवाक मुद्रा में खड़े रह गए । उनकी तरफ लपकता हैदर अली दहाढा'…'"ज़रा भी हिले तो गोली...
परंतु
वाक्य पूरा न हो सका ।
जिन्न की तरह सीडान की बैक से प्रकट होकर तीसरे लड़के ने उस पर जम्प लगा दी ।
जम्प भी ऐसी कि हैदर अली को साथ लिए "धड़ाम' से सडक पर गिरां ।
रिवाल्वर हाथ से निकल गया । लडकी क्रो कब्जाए दोनां लड़कै भी लडकी क्रो छोडकर हैदर पर झपट पड़े । इस दृश्य को देखकर ड्राइवर तेजी से सब इंस्पेक्टर की मदद के लिए लपका ।
सब इंस्पेक्टर हैदर अली ने आतिशबाजी की दुकान में दाखिल होते हुए उसके मालिक से कहा -"एसएसपी साहब के यहां से फोन पर फ्लावर बम और पेपर बम का आर्डर गया था ।"
"ओह यस !" कहने के बाद शापकीपर ने ऊंची आवाज में नोकर से एसएसपी के आर्डर वाला डिब्बा लाने के लिए कहा ।
इधर हैदर अली ने पेमेंट किया, उधर नोकर ने गत्ते का बना एक वर्गाकार डिब्बा लाकर काउंटर पर रख दिया ।
शापकीपर ने पूछा-""क्या मैं जान सकता हूइंस्पेक्टर साहब कि एसएसपी साहब के यहां क्या र्फक्शन है ?'
"उनके पांच वर्षीय बेटे वारिस खान का बर्थ डे हे ।”
“वर्थ डे, तब तो उन्होंने वहुत ही उम्दा किस्म की आतिशबाजी का आर्डर दिया है । फ्लावर बम ओर पेपर बम किसी को नुकसान नहीं पहुँचाएंगे ओर बच्चे इनके फटने पर खुश भी बहुत होंगे । बस हल्की हल्की धमाकों के साथ फूलों और पेपर की कटिंग की बरसात होगी । ये सारे बम केक वाली मेज के चारों तरफ लगवा दीजिएगा और असली मजा देखना चाहें तो इन सबमें एकसाथ आग लगवा दीजिएगा । चारों तरफ से एकसाथ होने वाली फूलों की बारिश को देखकर बच्चे नाच उठेंगे ।"'
हैदर ने बगेर कुछ कहे डिब्बा उठाया ।
दुकान के ठीक सामने पार्किग एरिया में खडी पुलिस जीप की पिछली सीट पर रखा और स्वयं घूमकर अगली बाईं सीट पर बैठता ड्राइवर से बोला…"चलौ ! "
ड्राइवर ने जीप आगें बढा दी ।
शीघ्र ही जीप सड़क से गुजर रहे ट्रेफिक का हिस्सा बन गई और मुश्किल से पंद्रह मिनट बाद वह ऐसी सड़क से गुजर रही थी जिस पर नाममात्र का ट्रेफिक था ।
अचानक वातावरण मेँ किसी महिला के चीखने की आवाज़... उभरी'…“बचाओ...वचाओ ।"'
ड्राइवर और हैदर अली चौंके ।
दोनों ने पलटकर एक दूसरे सरे की तरफ देखा ।
"आवाज़ उधर से आई ।"' हैदर अली ने सामने नज़र आ रहे सड़क के मोढ़ की तरफ इशारा किया…“त्तेज चलो !"
ड्राइवर के पेर का दबाव स्यत: एक्सीलेटर पर बढ़ गया ।
बचाओ...बचाओ की आवाज तेज़ होती जा रही थी।
हैदर अली ने होलेस्टर से रिवाल्वर खींच लिया ।।
जीप ने टायरों की चरमराहट के साथ मोड़ काटा ।
केवल सो गज दूर एक 'ब्लेक हंडरेड' के आगे, सिल्वर कलर की "सीडान' सढ़क पर तिरछी खडी नजर आई। साथ ही नज़र आए शक्ल सूरत से गुंडे से नजर आ रहे वे दो लढ़कै जो एक लड़क्री को स्रीडॉन की तरफ घसीटने की कोशिश कर रहे थे।
विरोध करती लडकी लगातार चीख रही थी ।
जीप कै टायरों की चरमराहट ने लड़कों को चोकाया ।
हैदर अली जोर से चीखा…""रोक्रो...रोक्रो .""
ड्राइवर ने पूरी ताकत से ब्रेक पैडल दबाया ।
टायरों की चिंघाड़ कै साथ जीप ब्लेक हंइरेड की बगल में रुकी ।
जीप कै पूरी तरह रुकने से पहले ही सढ़क पर कूदते हुए हेदर अली ने हवाई फायर किया था ।
लडकी को कब्जाए लडके अवाक मुद्रा में खड़े रह गए । उनकी तरफ लपकता हैदर अली दहाढा'…'"ज़रा भी हिले तो गोली...
परंतु
वाक्य पूरा न हो सका ।
जिन्न की तरह सीडान की बैक से प्रकट होकर तीसरे लड़के ने उस पर जम्प लगा दी ।
जम्प भी ऐसी कि हैदर अली को साथ लिए "धड़ाम' से सडक पर गिरां ।
रिवाल्वर हाथ से निकल गया । लडकी क्रो कब्जाए दोनां लड़कै भी लडकी क्रो छोडकर हैदर पर झपट पड़े । इस दृश्य को देखकर ड्राइवर तेजी से सब इंस्पेक्टर की मदद के लिए लपका ।