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चुदाई का ज्ञान

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अनुजा- देख वैसे तो वो लड़के सही नहीं है और तू भी उनसे चुदना नहीं चाहती.. मगर प्रिया को उनसे चुदने में कोई एतराज नहीं है.. तू ऐसा कर मैं जो बताऊँ वो कर.. तुम्हारी चिंता भी खत्म हो जाएगी और प्रिया का अरमान भी पूरा हो जाएगा।

अनुजा ने कुछ टिप्स दीपाली को दिए और अच्छे से उसको समझा दिया कि बड़े ध्यान से सब करना।

दीपाली- ओह्ह.. दीदी यू आर ग्रेट.. क्या आइडिया दिया है.. अब तो बस सारी परेशानी ख़त्म हो गई.. अच्छा अब मुझे जाने दो, सुधीर को भी थोड़ा खुश कर दूँ ताकि काम में कोई रूकावट ना आए।

अनुजा- अच्छा जा मेरी बहना, कभी मौका मिला तो मैं भी उस बूढ़े को अपनी चूत का स्वाद दे दूँगी मगर उसको मेरे बारे में अभी कुछ मत बताना।

दीपाली- नहीं नहीं दीदी मैं कुछ नहीं कहूँगी.. आप बेफिकर रहो…

(दोस्तो, अनुजा की कही बात अगर मैं यहाँ लिखती तो आगे आपको कहानी को पढ़ने में मज़ा नहीं आता.. इसलिए अब आगे जो भी होगा या दीपाली करेगी आप समझ जाना कि अनुजा ने ये सब दीपाली को समझाया था.. इसमें दो फायदे हैं एक तो मुझे एक ही बात को दो बार नहीं लिखना पड़ेगा और दूसरा आपको मज़ा ज़्यादा आएगा कि अब क्या होगा? तो चलिए वापस कहानी पर आती हूँ।)

दीपाली वहाँ से निकल कर सुधीर के घर की ओर चल पड़ी और कुछ ही देर में वो सुधीर के घर पहुँच गई। दरवाजा खुला था तो वो सीधे अन्दर चली गई। ... सुधीर बैठा हुआ शराब पी रहा था उसको पता नहीं चला कि दीपाली कब उसके पीछे आकर खड़ी हो गई।

सुधीर- ओह्ह.. मेरी छोटी सी गुड़िया, जल्दी आ जाना.. उफ़फ्फ़ तेरे इन्तजार मैं तेरा ये आशिक मरा जा रहा है.. उफ्फ आज तू कितनी सेक्सी लग रही थी.. बस एक बार आ जा मेरी जान.. जब तू जा रही थी तेरी गाण्ड बड़ी मटक रही थी.. आज तो तेरी गाण्ड ही मारूँगा..

सुधीर ना जाने क्या-क्या बोले जा रहा था.. दीपाली पीछे खड़ी मुस्कुरा रही थी।

दीपाली- अच्छा तो ये बात है.. मेरी पीठ पीछे आप मेरे बारे में इतना गंदा सोचते हो।

सुधीर एकदम से चौंक गया और उसने पीछे मुड़ कर देखा तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना ना रहा।

सुधीर- ओह्ह.. मेरी दीपाली! तू आ गई.. कसम से कब से तेरा इन्तजार कर रहा था.. तू इतनी जल्दी आ जाएगी, ये तो मैंने सोचा ही नहीं था.. आओ मेरे पास आओ।

दीपाली- नहीं आती.. अपने शराब क्यों पी.. मुझे चिढ़ है शराब और शराबी से.. अब मैं जा रही हूँ।

सुधीर- अरे नहीं.. नहीं.. बस थोड़ी सी पी है मैंने.. मुझे अगर पता होता पहले तो कभी ना पीता.. प्लीज़ तुम मत जाओ.. इस बूढ़े पर थोड़ा तो रहम खाओ.. बरसों बाद तो मेरे सोए हुए लौड़े को तूने जगाया है.. अब इसको ऐसे ही छोड़ कर मत जाओ।

दीपाली- अरे अरे.. इतने भावुक मत हो आप… अच्छा नहीं जाती बस… सुधीर खुश हो गया और उसने दीपाली के होंठों पर अपने होंठ रख दिए.. मगर दीपाली ने फ़ौरन मुँह हटा लिया।

दीपाली- छी: छी: कितनी गंदी बू आ रही है.. आपके मुँह से उह..हो.. मेरा तो जी बैचेन हो गया..

सुधीर- सॉरी सॉरी.. आज के बाद कभी नहीं पिऊँगा.. अच्छा चल चुम्बन नहीं करता.. आज तूने बहुत अच्छे कपड़े पहने हैं. मैं अपने हाथों से आज एक-एक करके सारे कपड़े निकालूँगा और तुझे नंगी करूँगा।

दीपाली- जो करना है.. जल्दी करो आज मैंने पढ़ाई भी नहीं की.. वहाँ से फ्रेंड से मिलने का बहाना करके आपके पास आई हूँ।

सुधीर- ओह.. माय डार्लिंग.. यू आर सो स्वीट.. मेरे लिए तूने इतना सोचा चल आ जा कमरे में.. जल्दी से सब करूँगा… आज तेरी मटकती गाण्ड मारूँगा.. बड़ा मन हो रहा है मेरा..

दीपाली- वो तो ठीक है.. मार लेना मगर आपका लौड़ा बस एक ही बार खड़ा होता है.. अगर गाण्ड मारोगे तो मेरी चूत की आग कैसे शान्त करोगे?

सुधीर- उसकी फिकर तू मत कर.. मैं सब कर दूँगा.. चल अब आ भी जा मेरी जान.. कब से तड़पा रही है।

सुधीर कमरे में जाते ही दीपाली को नंगा करने लगा। दीपाली भी अदाएं दिखाती हुई कपड़े निकलवा रही थी। जब दीपाली पूरी तरह से नंगी हो गई तो सुधीर ने अपने कपड़े भी निकाल फेंके और दीपाली के मम्मे दबाने और चूसने लगा। दीपाली भी सुधीर के लौड़े को हाथ से पकड़ कर हिलाने लगी.. जो अभी आधा-अधूरा ही कड़क हुआ था।

दीपाली- ऊ आह्ह.. आराम से दबाओ ना.. आह्ह.. क्या करते हो उफ्फ…

सुधीर- जानेमन, भगवान ने तुझ जैसा नायाब तोहफा मुझे दिया है तो जरा खुल कर मज़ा लेने दो ना.. आह्ह.. क्या मस्त चूचे हैं तेरे…
 
थोड़ी देर में ही दीपाली ने लौड़े को दबा-दबा कर कड़क कर दिया था। सुधीर अब मम्मे को छोड़ कर दीपाली के चूतड़ों को दबाने लगा और निप्पल चूसने लगा। दीपाली अब पूरी तरह गर्म हो गई थी और उसका मन लौड़े को चूसने का कर रहा था। उसने सुधीर को धक्का देकर बिस्तर पे गिरा दिया और टूट पड़ी उसके लंड पर..

सुधीर- हाय मार डाला रे.. अरे गुड़िया, लौड़ा चूसने का इतना शौक है तो किसी जवान लड़के का चूसा कर.. आह्ह.. मेरे लौड़े में इतनी सहनशक्ति नहीं है.. चल घोड़ी बन जा और मुझे गाण्ड मारने दे.. कहीं आज भी मेरा सपना टूट ना जाए।

सुधीर की हालत समझते हुए दीपाली ने लौड़ा मुँह से निकाल दिया और घुटनों के बल बैठ गई।

दीपाली- लो मेरे बूढ़े आशिक, मार लो गाण्ड.. आप भी क्या याद रखोगे कि किस से पाला पड़ा है।

सुधीर ने गाण्ड पर थूका और अपना लंड उस पर रख कर एक ज़ोर का धक्का मारा.. पूरा लौड़ा ‘फच’ की आवाज़ के साथ गाण्ड में समा गया।

दीपाली- आह मज़ा आ गया.. उफ़फ्फ़ अब मारो .. उह्ह.. आपका लौड़ा आज तो बहुत गर्म हो रहा है.. गाण्ड में ऐसा महसूस हो रहा है जैसे कोई गर्म लोहे का सरिया घुसा दिया हो.. आई.. आह्ह.. मारो मेरे प्यारे अंकल आह्ह…

सुधीर- उह्ह उह्ह.. अरे कितनी बार बोलूँ.. आह्ह.. सुधीर बोलो.. जानू बोलो.. ये अंकल क्यों बोलती हो…

दीपाली- उई आह्ह.. अब बस मुझे जो समझ में आह्ह.. आएगा.. मैं बोल दूँगी.. आह्ह.. ज़ोर से मारो मेरी गांड आ.. आह्ह..

सुधीर अपनी पूरी ताक़त से लौड़े को आगे-पीछे कर रहा था। दीपाली भी गाण्ड को हिला-हिला कर सुधीर का साथ दे रही थी।

कोई 15 मिनट तक सुधीर गाण्ड मारता रहा.. मगर 60 साल का बूढ़ा घोड़ा कब तक दौड़ लगाता.. थक गया.. मगर उसने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पूरी ताक़त से दीपाली की गाण्ड मारने लगा।

सुधीर- आह्ह.. आ.. हहा हहा.. ले अहहा.. हहा.. ले मेरी जान आह्ह..

दीपाली- आह आई.. अरे वाहह… आ.. अंकल आह्ह.. आप तो जोश में आ गए आह.. हाँफ क्यों रहे हो.. आह्ह.. थोड़ा रेस्ट कर लो.. आह्ह.. मेरी चूत में भी बहुत खुजली हो रही है.. आई.. आपको उसको भी आहहह.. शांत करना है आह…

सुधीर के लौड़े ने लावा उगल दिया और दीपाली की गाण्ड को पानी से भर दिया। अब सुधीर एक तरफ लेट कर हाँफने लगा था।

दीपाली- आह ससस्स क्या गाण्ड मारी है अई.. आपने… मज़ा आ गया.. अरे ये क्या आह्ह.. मेरी चूत की आग तो ठंडी करो.. आह्ह.. प्लीज़ उठो ना…

सुधीर- मेरी जान लौड़ा तो अब उठेगा नहीं.. तू ऐसा कर चूत मेरे मुँह के पास ले आ.. ऐसा चाटूँगा कि तेरी सारी खुजली मिटा दूँगा।

दीपाली मन मार कर अपनी चूत सुधीर की तरफ कर देती है और बड़बड़ाने लगती है।

दीपाली- उह्ह.. मेरा भी दिमाग़ खराब है जो इस बूढ़े से चुदने आ गई ... कोई जवान होता तो मज़ा आता.. सर भी ना, आज चले गए। अब तो कुछ करना ही पड़ेगा.. ये चूत की आग तो दिन पे दिन बढ़ती ही जा रही है।

सुधीर- अरे क्यों बड़बड़ा रही है.. मैं आज रात किसी काम के सिलसिले में बाहर जा रहा हूँ.. कल देर रात तक आऊँगा.. तू अपने उस दोस्त को कल यहाँ ले आ.. जितना चुदना है.. उससे चुदवा लेना.. अब मुझे चूत चाटने दे…

सुधीर की बात दीपाली को समझ आ गई और उसने कुछ सोच कर हल्की सी मुस्कान देते हुए कहा।

दीपाली- हाँ अंकल अब लाना ही पड़ेगा आह्ह.. आप अभी तो मुझे शान्त करो आइईइ.. मेरी चूत जल रही है.. आह प्लीज़ आह्ह.. ऐसे ही आह्ह.. मज़ा आ रहा है चाटो आइईइ.. उफ़फ्फ़ प्लीज़ आह उफ़फ्फ़ क्या मज़ा आ रहा है…

सुधीर चूत को होंठों में दबा कर उसको ज़ोर-ज़ोर से चूस रहा था। दीपाली आनन्द के मारे छटपटाने लगी थी और ज़्यादा देर वो इस चुसाई को सहन ना कर पाई और कमर उठा-उठा कर सुधीर के मुँह में झड़ने लगी। सुधीर भी पक्का लौंडीबाज था.. सारा रस ऐसे चाट रहा था जैसे कोई रसमलाई की मलाई हो। चूत की आग ठंडी होने के बाद दीपाली ने सुधीर के गाल पर एक पप्पी दी और अपने कपड़े पहनने लगी।

सुधीर- अरे रूको गाण्ड पर मेरा रस लगा है.. साफ कर लो ... कपड़े गंदे हो जाएँगे।

दीपाली- ओह.. मैंने देखा नहीं.. आप ही साफ कर दो ना प्लीज़…

सुधीर ने पास पड़े एक कपड़े से दीपाली की गाण्ड साफ की और ललचाई निगाहों से उसको देखने लगा।

दीपाली- क्या हुआ.. ऐसे क्या देख रहे हो?
 
सुधीर- क्या बताऊँ ये तो उमर का तकाजा है.. वरना ऐसी मस्त गाण्ड को बार-बार मारने का दिल करता है.. काश तुम मेरी जवानी में मुझे मिली होतीं तो बताता कि मैं क्या चीज था।

दीपाली की हँसी निकल जाती है.. वो अपने कपड़े पहनने लगती है और सुधीर को देख कर आँख मारते हुए कहती है- जो बीत गया..सो बीत गया.. उसको भूल जाओ.. जो सामने है.. उसका मज़ा लो.. चलती हूँ अंकल.. आपको समय-समय पर ठंडा करने आती रहूँगी ओके.. बाय अब चलती हूँ।’

दीपाली अपने घर चली गई और जैसा कि आप जानते हो चुदाई के साथ साथ उसको पढ़ाई की भी फिकर रहता है.. तो पढ़ने बैठ गई।

अगले दिन जब दीपाली स्कूल गई, सोनू और दीपक गेट के पास खड़े थे. मैडी उनसे दूर खड़ा किसी लड़के से बात कर रहा था।

जैसे ही दीपाली की नज़र दीपक पर गई.. उसको प्रिया की कही हुई बात याद आ गई और उसकी नज़र दीपक की पैन्ट पर चली गई शायद उसकी आँखें लौड़े का दीदार करना चाहती हों.. मगर यह कहाँ मुमकिन था। वो बस देखती हुई गाण्ड को मटकाती हुई चली गई।

हाँ.. आज दीपाली थोड़ा ज़्यादा ही अदा के साथ चल रही थी.. शायद उनको तड़पाने का इरादा हो।

सोनू- अरे यार.. ये साली तो दिन पे दिन क़यामत होती जा रही है.. कसम से साली की गाण्ड देखी तूने.. क्या लहरा रही थी…

दीपाली अन्दर चली गई थी तब तक मैडी भी उनके पास आ गया था।

दीपक- यार मुझे शक हो रहा है।

मैडी- कैसा शक बे.. बता तो…

दीपक- यार मुझे लगता है.. हम पेड़ के नीचे बैठ कर आम के पकने का इन्तजार कर रहे हैं और कोई साला पेड़ पर चढ़कर कच्चे आम का ही मज़े ले रहा है।

सोनू- यार पहेली मत बुझा.. सीधे से बता ना क्या हुआ?

दीपक- तूने गौर नहीं किया क्या.. साली के चूचे बड़े-बड़े लग रहे हैं और गाण्ड भी ज्यादा उभरी हुई है.. लगता है कोई साला इसकी ज़बरदस्त ठुकाई कर रहा है.. हम साले लौड़े हिलाते रह गए हैं।
 
कहानी में साथ बने रहने के लिए सभी पाठकों को बहुत बहुत थैंक्स।कहानी पढ़ने के बाद अपनी राय अवश्य लिखे की कहानी आपको कैसी लगी।अगला अपडेट जल्दी ही।
 
मैडी- क्या बकवास कर रहा है साले.. हमारे सिवा किसके लौड़े से चुदवाएगी ये.. तुझे भ्रम हो गया लगता है..

सोनू- हाँ यार.. ऐसी निराशा वाली बातें मत कर.. बस दो दिन की बात है सोमवार को तो ये हमारी हो ही जाएगी।

दीपक- अबे सालों.. माना मैंने किसी को नहीं चोदा.. मगर ये नजरें कभी धोखा नहीं खा सकतीं.. बहुत सी लड़कियों को ताड़ चुका हूँ भाभियों को भी नहीं बख्शा.. कुँवारी और चुदी हुई लड़की की चाल में बहुत फ़र्क होता है.. तुम मानो या ना मानो.. ये पक्का चुद चुकी है।

मैडी- अबे बस भी कर साले… जब ये हाथ आएगी तब देख लेना, इसकी सील मैं ही तोड़ूँगा.. तब बोलना जो तुझे बोलना है।

दीपक- चल लगी 1000 की शर्त.. अगर ये सील पैक हुई तो मैं हारा.. नहीं तो तुम.. ओके?

मैडी- चल लगी.. अब तो तेरे 1000 लेने ही है।

तीनों बस इसी उलझन में अन्दर चले गए.. क्लास शुरू हो गई।

क्लास में आज वैसे तो कुछ खास नहीं हुआ.. हाँ एक बात हुई.. आज उनके इम्तिहान के बारे में बताया गया।

विकास सर ने ही सबको बताया।

विकास- देखो बच्चों तुम सबको इम्तिहानों के प्रवेश-पत्र तो मिल ही गए हैं। इम्तिहान मंगलवार से शुरू होना है.. तो सब अच्छे से तैयारी करना.. वैसे तो स्कूल की 15 दिन पहले छुट्टी हो जानी चाहिए थी मगर तुमको ज़्यादा पढ़ने का मौका मिल जाए.. इसलिए आज से छुट्टी कर दी गईं हैं.. बस आज ही स्कूल लगेगा.. कल रविवार की छुट्टी तो अब सोमवार को भी आप सब घर पर ही अपनी तैयारी करना। आज स्कूल का आखिरी दिन है.. किसी को कुछ पूछना हो तो पूछ लेना।

सभी खुश थे कि स्कूल से निजात मिल गई.. मगर वो तीनों दोस्त खुश नहीं थे। उनको तो दीपाली को देखे बिना चैन ही नहीं आता था।

सब कुछ नॉर्मल रहा और छुट्टी हो गई। प्रिया और दीपाली एक साथ बाहर निकलीं। मैडी भी उनके पीछे-पीछे चलने लगा।

मैडी- दीपाली रूको.. एक मिनट तुमसे बात करनी है।

दीपाली- क्या है बोलो?

मैडी- वो आज स्कूल का आखिरी दिन है.. अब कल से हम मिल नहीं पाएँगे.. तुम अपना नम्बर दे दो ना.. ताकि पार्टी के लिए तुमको बता सकूँ।

दीपाली- ओह्ह.. ऐसा करो तुम अपना नम्बर दो.. मैं खुद कॉल करके पूछ लूँगी।

मैडी खुश हो गया और अपना नम्बर उसे दे दिया। जाते-जाते मैडी ने प्रिया को भी आने की दावत दे दी।

प्रिया- यार अब तो मैं भी आ रही हूँ क्या सोचा तुमने… कैसे करना है।

दीपाली- मेरी जान फिकर मत कर.. मैंने वादा किया है ना.. तुझे दीपक से जरूर चुदवा दूँगी.. अब घर जा.. पढ़ाई कर, मुझे पता है क्या करना है.. तू मुझे दीपक का नम्बर दे दे।

प्रिया- नम्बर का क्या करोगी… उसको फ़ोन करके कहोगी क्या?

दीपाली- अरे यार तू सवाल बहुत करती है.. तू बस नम्बर दे बाकी मैं संभाल लूँगी।

प्रिया ने नम्बर दे दिया।

प्रिया- ओके यार मुझे तुझ पर विश्वास है.. अच्छा बाय चलती हूँ।

प्रिया अपने रास्ते निकल गई.. सोनू और दीपक दूर खड़े उन दोनों को देख रहे थे।

सोनू- यार ये क्या चक्कर है.. दीपाली की प्रिया से कब से दोस्ती हो गई?

दीपक- अबे काहे की दोस्ती.. इम्तिहान के बारे में बात कर रही होगीं.. दोनों ही पढ़ाकू जो ठहरीं।

सोनू- यार एक बात कहूँ.. प्रिया का रंग साँवला है.. मगर दिखने में नाक-नक्श ठीक-ठाक है।

दीपक- अबे बहन के लौड़े.. क्या बकवास कर रहा है.. वो मेरी बहन है.. समझा साले.. तू दोस्त है तब भी ऐसी बात बोल गया.. अगर किसी और ने बोली होती तो मैं साले का मुँह तोड़ देता।

(हैलो दोस्तों.. सॉरी, कहानी को रोक कर मैं बीच में आ गई.. मगर क्या करूँ.. बात ही टेंशन की है.. ये दीपक तो प्रिया के बारे में सुन कर ही इतना चिढ़ रहा है.. तो उसके ऊपर चढ़ेगा कैसे? मेरा मतलब है.. उसको चोदेगा कैसे? अब दीपाली क्या करेगी? चलो इन सब सवालों के जबाव आगे मिल जाएँगे.. अभी कहानी पर ध्यान दीजिए।)

दीपक वहाँ से किसी काम के लिए चला गया मगर सोनू ने शायद आज पहली बार ही प्रिया को इतने गौर से देखा था। उसका मन प्रिया के लिए मचल गया था।

सोनू वहाँ से सीधा मैडी के घर गया और उसको जरूरी काम है बता कर बाहर बुलाया।

मैडी- अरे क्या है.. अभी तो साथ थे.. तब अपना काम क्यों नहीं बताया.. अब क्या हो गया?

सोनू- भाई आज मैंने वो देखा है.. जो अपने शायद कभी ना देखा हो।

मैडी- ऐसा क्या देख लिया तूने?

सोनू- दीपाली के साथ आज प्रिया बात कर रही थी ना.. तब मैंने बड़े गौर से उसकी जवानी पर नज़र डाली.. भाई क्या मस्त आइटम है वो.. क्या फिगर है उसका…

वो आगे कुछ बोलता.. मैडी ने उसे चुप करा दिया।
 
मैडी- चुप कर क्या बकवास किए जा रहा है.. भूल गया क्या प्रिया कौन है.. साले दीपक की बहन है वो.. और दीपक को तू जानता है ना.. कितना अड़ियल दिमाग़ का है.. उसे पता चल गया ना, तेरा मुँह तोड़ देगा वो।

सोनू- क्या कर लेगा वो.. प्रिया कौन सी उसकी सग़ी बहन है और तू भूल गया.. जब मेरी बुआ की लड़की यहाँ आई थी.. तो उस पर सबसे पहले दीपक ने ही नियत खराब की थी.. उसको चोदने तक का प्लान बना लिया था.. क्या वो मेरी बहन नहीं थी?

मैडी- साले उसको तो तू भी चोदना चाहता था.. ये तो अच्छा हुआ वो यहाँ एक दिन भी नहीं रूकी और चली गई वरना सबसे पहले तू ही उसको चोदता।

सोनू- कुछ भी हो.. अगर दीपक उसके बारे में गंदा बोल सकता है तो मैं भी बोलूँगा और यार.. अगर दीपाली हाथ ना आई तो हम सारी जिंदगी क्या लण्ड हाथ से ही हिलाते रहेंगे.. प्रिया का कोई ब्वॉयफ्रेण्ड नहीं है.. मौका अच्छा है पटा लेते है साली को.. यार, रंग पर मत जा.. उसका फिगर देख बस…

मैडी- शुभ-शुभ बोल साले, दीपाली के लिए तो दिन रात तड़फ रहा हूँ वो हाथ कैसे नहीं आएगी।

सोनू- अच्छा आ जाएगी.. बस मगर प्रिया भी फँस जाए तो इसमें बुराई क्या है? कभी-कभी उसको भी चोद लेंगे।

मैडी- साले, मैं कोहिनूर हीरा माँग रहा हूँ और तू कोयले की बात कर रहा है।

सोनू- बस.. बस.. इतनी भी काली नहीं है वो .. तू मान या ना मान मेरा तो प्रिया पर दिल आ गया.. अब मैं तो उसको फँसा कर रहूँगा.. तू साथ दे या ना दे ओके.. अब चलता हूँ।

मैडी- जा तुझे जो करना है कर.. मैं इस काम में तेरा साथ नहीं दूँगा ओके…

सोनू वहाँ से चला गया और मैडी भी अपने घर वापस आ गया।

(चलो दोस्तों, दीपाली के पास चलते हैं वो क्या कर रही है।)

दीपाली अपने कमरे में बैठी पढ़ाई में बिज़ी थी.. मगर उसको बार-बार प्रिया का ख्याल आ रहा था। अचानक वो उठी और दीपक को फ़ोन लगा दिया।

रिंग बजी ... सामने से शायद किसी और ने फ़ोन उठाया।

दीपाली ने काट दिया.. ऐसे ही 2 या 3 बार उसने फ़ोन लगाया.. मगर दीपक ना होने के कारण फ़ोन काट दिया। अब उसका मन नहीं माना तो वो वापस पढ़ने बैठ गई और पढ़ते-पढ़ते उसकी आँख लग गई।

दीपाली काफ़ी देर बाद हड़बड़ा कर उठी.. शायद उसको कोई सेक्सी सपना आ रहा था क्योंकि उठते ही उसने अपनी चूत पर ऊँगली रखी और बड़बड़ाने लगी।

दीपाली- शिट.. ये तो सपना था मगर था अच्छा.. कैसे चूत पानी-पानी हो गई.. आज तो सर से खूब चुदवाऊँगी बहुत मन हो रहा है.. ओह्ह.. वक्त भी होने वाला है.. ऐसा करती हूँ तैयार हो जाती हूँ।

दीपाली बाथरूम गई और फ्रेश होकर बाहर आई.. कपड़े चेंज करने ही वाली थी कि फ़ोन की घन्टी बजने लगी.. जब काफ़ी देर तक किसी ने नहीं उठाया तो वो बाहर गई और फ़ोन उठाया।

दीपाली- हैलो…

अनुजा- हैलो दीपाली.. मैं अनुजा बोल रही हूँ.. अच्छा किया तूने फ़ोन उठा लिया.. यार आज पढ़ने मत आना विकास की फैमिली आई हुई है.. आज वो वाला प्रोग्राम नहीं हो पाएगा।
 
दीपाली- उह्ह.. दीदी अपने तो सारा मूड ही खराब कर दिया.. आज बड़ा मन था मेरा…

अनुजा- अरे तो बूढ़ा किस दिन काम आएगा.. आज उसके पास चली जा..

दीपाली- कहाँ दीदी.. आज वो भी नहीं है.. दूसरे शहर किसी काम से गया है।

अनुजा- तो मेरी जान मैंने जो आइडिया बताया था.. आज वो ही आजमा ले शायद तेरी परेशानी भी ख़त्म हो जाएगी और चूत को आराम भी मिल जाएगा।

दीपाली- आप सही बोल रही हो.. मैं स्कूल से आई तब से ट्राइ कर रही हूँ मगर वो फ़ोन पर आ ही नहीं रहा.. कोई और ही उठा रहा है।

अनुजा- ट्राई करती रह.. ऐसा कर अब लगा… शायद काम बन जाए।

दीपाली- ठीक है दीदी, करती हूँ ओके बाय.. रखती हूँ.. अब कल ही बताऊँगी। पहले उसको फ़ोन तो कर लूँ।

अनुजा- ओके मेरी बहना.. बाय.. बेस्ट ऑफ फक हा हा हा हा…

दीपाली भी हँसने लगी और फ़ोन रख दिया। वो फ़ौरन अपने बैग के पास गई.. प्रिया ने जो नम्बर दिया था उसको देखा और उसको फ़ोन लगा दिया।

दीपाली की किस्मत अच्छी थी.. अबकी बार सामने से दीपक ने ही फ़ोन उठाया।

दीपाली- हाय दीपक.. कैसे हो.. क्या कर रहे हो…?

दीपक- मैं ठीक हूँ.. तुम कौन बोल रही हो…?

दीपाली- मैं दीपाली बोल रही हूँ।

दीपक- ओह्ह.. हाय दीपाली.. अच्छा हूँ यार.. मुझे यकीन नहीं हो रहा तुमने फ़ोन किया।

दीपाली- ओके ओके.. ठीक है ये बताओ क्या कर रहे हो.. फ्री हो क्या अभी…?

दीपक- अरे यार एकदम फ्री हूँ और अगर नहीं भी होता तो तुम्हारे लिए सब काम छोड़ कर फ्री हो जाता.. कहो क्या बात है?

दीपाली- मेरा घर जानते हो ना..?

दीपक- हाँ जानता हूँ।

बस उसी रास्ते पर एक बीएसएनएल का बड़ा सा बोर्ड लगा है.. उसके पास एक गली जा रही है.. तुम उस गली में अभी आ जाओ.. एक बहुत जरूरी बात करनी है।

दीपक की तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।

दीपक- मैं अभी आया बस 10 मिनट लगेंगे।

दीपाली- और हाँ प्लीज़ अकेले ही आना.. अपने दोस्तों को साथ मत ले आना और उनको बिल्कुल भी मत बताना कि मैंने फ़ोन किया.. बहुत जरूरी बात है सिर्फ़ तुमको बतानी है.. प्लीज़ उनको बिल्कुल मत बताना।

दीपक- ठीक है.. मैं अकेला आ रहा हूँ.. बस अभी निकलता हूँ।

फ़ोन रखने के बाद दीपाली ने एक फोन और किया और फिर अपने कपड़ों में से क्या पहनूं ये सोचने लगी और आख़िर उसे एक ड्रेस पसन्द आई.. झट से उसको पहनने के लिए उठा लिया।

दीपक जल्दी से तैयार हुआ.. खूब सारा परफ्यूम लगा कर वो घर से निकल गया।

इधर दीपाली भी तैयार हो गई थी मगर वो अपने कमरे में बैठकर घड़ी की ओर देख रही थी।

कुछ देर बाद दीपाली ने अपने आप से बात की।

दीपाली- दस मिनट हो गए.. अब तक तो वो आ गया होगा.. अब मुझे भी निकलना चाहिए।

दीपाली अपनी मॉम को बाय बोलकर निकल गई।

(दोस्तों, आपको बताना भूल गई आज दीपाली ने पारदर्शी एकदम पतली सी ब्लॅक टी-शर्ट और उस पर सफ़ेद जैकेट पहना था.. जो बड़ा ही फैंसी था.. और नीचे एक गुलाबी शार्ट स्कर्ट पहना.. उसकी जांघें साफ दिख रही थीं। इस ड्रेस में कोई अगर उसको देख ले तो उस पर चोदने का जुनून सवार हो जाए। आजकल तो वैसे ही लोगों की सोच लड़की के लिए गंदी ही होती है.. अब दीपाली ने इतना सेक्सी ड्रेस पहन लिया तो ना जाने आज रास्ते में क्या क़यामत आने वाली है।)
 
दीपाली घर से निकल गई और जल्दी ही उस गली के मोड़ पर पहुँच गई.. दीपक वहाँ खड़ा उसका ही इन्तजार कर रहा था। जैसे ही उसकी नज़र दीपाली पर गई उसकी आँखें बाहर को निकल आईं और लौड़ा पैन्ट में तंबू बनाने लगा। क्योंकि दीपाली उसकी तरफ बड़े ही सेक्सी अंदाज में आ रही थी। उसके चूचे उसकी चाल के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे.. उसकी चिकनी जांघें दीपक को पागल बना रही थीं।

दीपाली उसके एकदम करीब आकर खड़ी हो गई। वो पागलों की तरह बस उसको देखे जा रहा था।

दीपाली- हैलो किस सोच में डूबे हो?

दीपक- क्क्क..कुछ भी नहीं.. तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो आ…आज तक तुमको बस स्कूल ड्रेस में देखा.. आज तो एकदम प्प….

वो आगे कुछ बोलता.. दीपाली ने अपनी आँखें बड़ी कर लीं और थोड़ा सा गुस्से का इज़हार किया।

दीपक- ओह.. क..क्या कहना चाहती थी तुम.. जो मुझे यहाँ बुलाया…?

दीपाली- देखो बात बहुत जरूरी है.. मैं यहाँ नहीं बता सकती।

दीपक- त..तो कहाँ चलें…?

दीपाली- देखो मेरे पास एक सेफ जगह है.. जहाँ बात हो सकती है.. मैं चलती हूँ.. मुझ से दूरी बना कर पीछे चलो.. किसी को जरा भी शक ना हो कि हम साथ जा रहे हैं।

दीपक ने ‘हाँ’ में सर हिला दिया और दीपाली के पीछे चलने लगा। जब दीपाली चल रही थी.. उन कपड़ों में उसकी गाण्ड कुछ ज़्यादा ही सेक्सी लग रही थी। बेचारा दीपक तो पागल हुआ जा रहा था। उसका लौड़ा आउट ऑफ कंट्रोल हो गया था.. वासना उसके दिमाग़ में चढ़ गई.. एक अजीब सा नशा उस पर सवार हो गया। आज उसने मन में ठान लिया कि अगर मौका मिला.. तो आज दीपाली को ज़बरदस्ती ही सही.. चोद कर ही दम लेगा।

दीपाली चलती रही और दीपक किसी कठपुतली की तरह उसके पीछे चलता रहा। कुछ देर बाद सुधीर के घर के पास जाकर दीपाली ने जल्दी से दरवाजा खोला और अन्दर चली गई। दीपक को भी इशारे से जल्दी अन्दर आने को कहा.. दीपाली बाहर दोनों तरफ गौर से देख रही थी कि कहीं कोई उनको देख ना ले।

दीपक जल्दी से अन्दर आ गया और उसके चेहरे पर अचरज के भाव थे। बहुत से सवाल एक साथ उसके दिमाग़ में आ गए.. मगर वो कुछ बोलता उसके पहले दीपाली ने उसे सोफे पर बैठने को बोल दिया और खुद उसके सामने वाले सोफे पर पर पैर चढ़ा कर इस तरह बैठ गई कि दीपक जरा सा नीचे झाँके तो उसकी पैन्टी दिख जाए।

दीपक- ये किसका घर है और वो कौन सी जरूरी बात के लिए मुझे यहाँ बुलाई हो?

दीपाली कुछ नहीं बोली.. बस हल्की सी मुस्कान देती रही और अपनी टांग को हिलाती रही.. जिससे दीपक का ध्यान उस पर जाए और जो वो दिखाना चाहती थी.. उसको दिख जाए… और हुआ भी वही.. दीपक की नज़र उसकी जाँघों के बीच चली गई.. जहाँ से गोरी-गोरी जाँघों के बीच दीपाली की काली पैन्टी जो बड़ी ही सेक्सी थी उसकी झलक दिख गई.. उस बेचारे का तो पहले ही हाल बुरा था.. अब तो पैन्ट में लौड़ा कसमसाने लगा.. उसका हलक सूख गया।

दीपक- यार क..कुछ तो बोलो.. ऐसे चुप रहोगी तो कैसे पता चलेगा?

दीपाली- मैं भी उसी का इन्तजार कर रही हूँ आख़िर क्या बात है बोलो?

दीपक एकदम चौंक गया क्योंकि बात करने दीपाली ने उसे बुलाया था.. अब उसको क्या पूछ रही है?

दीपक- त..तुम ये क्या कह रही हो त.. तुमने मुझे यहाँ ब्ब..बुलाया है.. बात तुम बताओ…

दीपाली- अरे इतना घबरा क्यों रहे हो.. कूल यार.. मेरे कहने का मतलब है कि तुम तीनों मेरे करीब आने की कोशिश कर रहे हो.. खास मेरे लिए मैडी होटल में पार्टी दे रहा है.. इन सब के पीछे तुम लोगों का कुछ तो मकसद होगा.. बस वो ही जानना चाहती हूँ?

दीपक के पसीने निकल गए.. हमेशा चुपचाप रहने वाली लड़की आज इतनी सेक्सी ड्रेस पहन कर आई है.. वो भी एक ऐसी जगह.. जहाँ कोई नहीं है और बातें इतनी गहराई की कर रही है। वो चौंक सा गया कि अब क्या जबाव दे..

दीपक- यार ये तुम क्या कह रही हो होटल की बात तो मुझे पता भी नहीं और मेरा क्या मकसद होगा? ऐसा कुछ नहीं है जो तुम सोच रही हो।
 
दीपाली- मैं कुछ नहीं सोच रही हूँ सीधी सी बात पूछ रही हूँ लड़की को इतना इम्प्रेस करने का कोई तो कारण होता होगा ना.. अब बात को घुमाओ मत सीधे-सीधे पॉइंट पर आ जाओ।

दीपक को लगा.. अब सही मौका है ये खुद इतना बोल रही है तो क्यों ना अपने दिल की बात बोल दी जाए।

दीपाली- उफ़फ्फ़ गर्मी ज़्यादा है आज.. तुम बोलते क्यों नहीं बोलो ना यार…

दीपाली ने जैकेट के बटन खोल दिए उसकी जालीदार टी-शर्ट में से उसकी ब्रा की झलक दिखने लगी थी.. गोरा पेट भी साफ नज़र आ रहा था।

दीपक का लौड़ा पहले ही एकदम तना हुआ था और उसकी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी। उसके लौड़े से पानी की कुछ बूँदें टपक आई थीं और आएं भी क्यों ना.. जिसने आज तक जिस लड़की के सपने देखे.. उसके नाम की मुठ मारता रहा हो.. आज वही लड़की अधनंगी हालत में उसके सामने बैठी उसको अपनी जवानी के जलवे दिखा रही है।

(दोस्तो, आप सोच रहे होंगे सीधी-साधी दीपाली को ये क्या हो गया.. तो आप शायद भूल गए अनुजा ने जो सब आइडिया बताया था.. वो सब यही है.आगे और भी कुछ ऐसे सीन आएँगे जो अनुजा ने बताए कि कैसे सब करना है।)
 
दीपक अपने आप से कहने लगा- साले बोल दे.. लड़की खुद नंगी होना चाहती है.. तू क्या सोच रहा है?

दीपक- द..दीपाली उई आई लव यू।

दीपक ने जल्दी से बोल दिया।

दीपाली- हा हा हा झूठ.. मैं जानती हूँ तुम मुझसे नहीं मेरे जिस्म से प्यार करते हो.. तुम तीनों की बात किसी ने सुन ली थी और मुझे बता दी कि तुम मेरे लिए क्या सोचते हो।

दीपक खड़ा हो गया और दीपाली के एकदम पास आकर उसके कंधे पकड़ लिए।

दीपक- हाँ, मानता हूँ कि मैं तुम्हारे जिस्म का दीवाना हूँ.. जब से तुम्हें देखा है.. रात-दिन तुम्हारे ही बारे में सोचता हूँ.. आज मौका मिला है तेरे इतने करीब आने का.. आज कुछ भी हो जाए.. मैं तुम्हें अपना बना कर रहूँगा।

दीपाली- खुल कर बोलो क्या करोगे आज मेरे साथ…

दीपाली ने ये बात बड़े सेक्सी अंदाज से अपने मम्मे को खुजाते हुए कही.. अब दीपक का हौसला बहुत बढ़ गया था।

दीपक- हाँ मैं डरता हूँ क्या? खुल कर सुनना है तुझे तो सुन, मैं तेरी चूत का दीवाना हूँ ... आज मैं तुझे चोद कर ही दम लूँगा.. तेरे इन रसीले चूचों का सारा रस पी जाऊँगा..

दीपाली- हा हा हा तो रोका किसने है.. पी जाओ और बना लो मुझे अपना..

दीपक को अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ कि दीपाली खुद ‘हाँ’ बोल रही है.. ये सुन कर उसको झटका सा लगा.. उसने दीपाली को छोड़ दिया और पीछे हट गया।

दीपाली- अरे क्या हुआ मेरे आशिक.. मैं सच कह रही हूँ आ जाओ आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो.. चोद दो मुझे.. आ मैं भी बहुत प्यासी हूँ अब देर ना करो.. आ जाओ ना…

दीपक की तो जैसे लॉटरी निकल आई थी.. अब उसमें सोचने-समझने की ताक़त नहीं थी.. वो जल्दी से दीपाली के करीब गया और उसे अपनी बाँहों में ले लिया।

उसके सुलगते होंठों पर अपने होंठ रख दिए और ज़बरदस्त चुसाई चालू हो गई। दीपक दीपाली के होंठ चूसने के साथ-साथ उसकी गाण्ड पर भी हाथ फिरा रहा था। वहीं दीपाली को अपनी चूत पर उसका लौड़ा चुभता हुआ महसूस हुआ तो उसने नीचे हाथ ले जाकर उसको पकड़ लिया। उसका दिल खुश हो गया, लौड़ा काफ़ी भारी-भरकम लग रहा था.. जैसा प्रिया ने बताया था। काफ़ी देर तक एक-दूसरे को चूमने के बाद वो दोनों अलग हुए।

दीपक- मैं सोच भी नहीं सकता था कि ऐसे अचानक तुम मुझे मिल जाओगी.. वो साला मैडी तो प्लान बनाता ही रह गया और तुम मेरी बाँहों में आ गईं। मुझे क्या पता था.. तेरी चूत में भी चुदने का तूफान उठ रहा है। नहीं तो कब का तुझे चोद चुका होता.. आह्ह… आ जाओ मेरी जानेमन, अब बर्दास्त नहीं होता। मेरा लौड़ा कब से पैन्ट से बाहर आने को बेताब हो रहा है।

दीपाली- मेरे राजा यहाँ नहीं.. कमरे में चलो वहाँ दिखाओ कि कैसा लौड़ा है तुम्हारे पास.. जो इतने दिनों से मेरे पीछे पड़े हो।

दीपाली उसको कमरे में ले गई और खुद बिस्तर पर बैठ गई..

दीपक- जान तुम खुद अपने हाथों से लौड़े को बाहर निकालो.. ये बहुत बेताब है तुम्हारे लिए।

दीपाली ने झट से पैन्ट का हुक खोल दिया और अंडरवियर के साथ नीचे कर दी। दीपक का लौड़ा फुफकारता हुआ आज़ाद हो गया।

दीपाली- वाउ क्या मस्त लौड़ा है.. एकदम वैसा ही जैसा उसने बताया था।

दीपक को आज झटके पे झटके लग रहे थे.. वो चौंक गया…

दीपक- क..किसने बताया था?

दीपाली- है कोई तुम्हारी दीवानी.. जैसे तुम मेरे सपने देखते हो.. वो भी तुम्हारे नाम से अपनी चूत ठंडी करती है।

दीपक- ओह..ह.. क्या कोई लड़की ने बताया.. मगर मैंने तो आज तक किसी लड़की को नहीं चोदा.. तो उसने मेरे लौड़े की तारीफ कैसे कर दी.. कौन है वो?

दीपाली- बताऊँगी मेरे राजा.. सब्र करो पहले अपने लौड़े को मेरे हवाले तो करो.. आह्ह… कितना मस्त लग रहा है.. मन करता है खा जाऊँ इसको…

दीपक- उफ़फ्फ़ अब बर्दास्त नहीं होता ... खा ले मेरी जान, तेरे लिए ही तो इतना कड़क हुआ है ये.. आह्ह… वैसे वो लड़की है कौन.. प्लीज़ बता दे ना यार.. सोच-सोच कर दिमाग़ खराब हो रहा है.. अगर मैं ऐसे ही सोचता रहूँगा तो… चुदाई में मज़ा नहीं आएगा।

दीपाली- बता दूँगी.. अभी सोचना बन्द करो और एंजाय करो बस…

इतना बोल कर दीपाली ने लंड के सुपाड़े को मुँह में ले लिया और मज़े से उसे चूसने लगी।

दीपक- आह्ह… उफ़फ्फ़ आई लव यू दीपाली.. आह्ह… मज़ा आ गया.. आज पहली बार मेरे लौड़े ने आह.. नरम होंठों का अहसास किया है.. वरना आह्ह… आज तक तो बस हाथ से ही सहलाता रहा हूँ आह्ह… देखो कितना खुश है ये तेरे होंठों के स्पर्श से…

दीपाली ने लौड़ा मुँह से निकाल लिया और दीपक को देखने लगी।
 
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