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चुदाई का ज्ञान

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कहानी में साथ बने रहने के लिए सभी पाठकों को बहुत बहुत थैंक्स।कहानी पढ़ने के बाद अपनी राय अवश्य लिखे की कहानी आपको कैसी लगी।अगला अपडेट जल्दी ही।
 
वो आदमी पास आया। दीपाली ऐसे बर्ताव कर रही थी.. जैसे उसको पता ही ना हो कि कोई उसे देख रहा है।

बूढ़ा- अरे आज फिर यहाँ खड़ी हो कर खुजा रही हो.. मैंने कहा ना मेरी बात मान लो.. मेरे साथ चलो मलहम लगा दूँगा.. ठीक हो जाओगी…

दीपाली- अरे आप कब आए और क्या सच में.. आपके पास ऐसी मलहम है?

बूढ़े के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई थी।

बूढ़ा- हाँ बेटी.. मेरी बात का यकीन कर.. मुझसे डर मत.. चल यहीं पास में ही मेरा घर है.. आज तेरी खुजली का पक्का इलाज कर दूँगा।

दीपाली ने सोचने का नाटक किया और मन ही मन बोलने लगी।

दीपाली ने मन ही मन कहा- बुड्डे.. तुझसे कौन डर रहा है तू क्या बिगाड़ लेगा मेरा.. मैं तो आज तेरा हाल बिगाड़ दूँगी.. आज के बाद तू किसी को मलहम लगाने का नाम नहीं लेगा।

बूढ़ा- बेटी क्या सोच रही है.. चल ना मेरे साथ…

दीपाली ने हल्की मुस्कान दी और बूढ़े के साथ हो गई.. रास्ते में बूढ़े ने सामान्य बातें की।

‘कहाँ रहती हो..? पढ़ाई कैसी है..? इस वक्त कहाँ पढ़ने जाती है..?’

बस इन सब बातों में ही बूढ़े का घर आ गया.. जो एक आलीशान कोठी थी।

दीपाली- वाओ अंकल.. आपका घर तो काफ़ी बड़ा है.. कौन-कौन रहता है यहाँ?

बूढ़ा- मेरा नाम सुधीर मोदी है.. चौक पर जो होटल है.. वो मेरा है.. मेरे दो बेटे अमेरिका में हैं उनकी फैमिली भी वहीं रहती है.. यहाँ मैं अकेला हूँ बस…

दीपाली- ओह.. आप अकेले बोर नहीं हो जाते.. आप के बेटे आपको अकेला क्यों छोड़ गए.. आप भी चले जाते उनके साथ वहीं…

सुधीर- नहीं.. ऐसी बात नहीं है.. यहाँ मुझे अच्छा लगता है.. मेरी पत्नी के मरने के बाद मेरे बेटे मुझे साथ ले जा रहे थे मगर मैं ही नहीं गया.. बस सुबह से शाम तक होटल में वक्त निकल जाता है.. रात को घर पर आराम करता हूँ.. ऐसे ही जिन्दगी चल रही है।

दीपाली- आपके घर का काम कौन करता है.. आप खाना कहाँ खाते हो?

सुधीर- अरे सारी बात यहीं करोगी क्या? चलो अन्दर आ जाओ वहाँ आराम से बात करेंगे।

दोनों अन्दर चले जाते हैं. अन्दर का नजारा देख कर दीपाली चौंक जाती है। हॉल में एक तरफ लकड़ी का बड़ा सा काउंटर लगा था.. उस पर बहुत सी शराब की बोतलें रखी हुई थीं और वहाँ काफ़ी आलीशान सोफे वगैरह रखे थे।

सुधीर- यहाँ बैठो.. मैं कुछ खाने को लाता हूँ।

दीपाली- नहीं.. उसकी कोई जरूरत नहीं है आप यहाँ बैठो.. मुझे आपसे बातें करना अच्छा लग रहा है और कुछ बताओ ना अपने बारे में…।

सुधीर- सुबह फ्रेश होकर सीधा होटल जाकर ही नाश्ता करता हूँ। फिर एक औरत शांति आ जाती है.. उसके पास घर की दूसरी चाबी है। वो घर की साफ-सफ़ाई, कपड़े धोना ये सब काम निपटा कर चली जाती है। उसके बाद दोपहर का खाना भी वहीं ख़ाता हूँ शाम को हल्का नाश्ता करके घर आ जाता हूँ..। रात को बस कुछ नमकीन के साथ शराब पीता हूँ और सो जाता हूँ.. यही है मेरी जिन्दगी।

दीपाली- छी: छी:.. आप शराब पीते हो.. कितनी बुरी बात है।

सुधीर- अरे इसमें क्या बुराई है.. ये तो बहुत लोग पीते हैं.. चल जाने दे इन सब बातों को.. जिस काम के लिए तुझे यहाँ लाया हूँ.. वो कर लेते हैं।

दीपाली- क..कौन सा काम.. मुझे जाना होगा.. बहुत देर हो गई है।

(दोस्तों उस वक्त तो दीपाली ने शरारत के चक्कर में मलहम लगवाने की बात पर ‘हाँ’ कह दी थी और यहाँ आ गई थी। मगर अब उसको घबराहट होने लगी थी और होनी भी चाहिए उसकी उम्र ही क्या थी अभी!)

सुधीर- अरे यहाँ तू मलहम लगवाने आई है ना.. बस लगवा ले और चली जा.. मैं कुछ नहीं करूँगा.. मुझसे ऐसे डर मत..

दीपाली को फिर से विकास की बात याद आ गई कि बूढ़े का लौड़ा खड़ा नहीं होता है और हो भी जाए तो कुछ कर नहीं सकता। बस दीपाली में थोड़ा हौसला आ गया।

दीपाली- मैं डर नहीं रही हूँ और आपसे किस बात का डर.. आप कर भी क्या सकते हो?

सुधीर- चल सारी बातें जाने दे.. मैं ट्यूब ले आता हूँ फिर तुझे मलहम लगा दूँगा।

दीपाली- नहीं नहीं.. जाने दो… आपकी ट्यूब में कहा अब पेस्ट होगा.. अब तक तो सूख गया होगा..

सुधीर के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और वो दीपाली के एकदम पास आकर खड़ा हो जाता है।

सुधीर- एक बात कहूँ.. अब तक तो मैं असली मलहम की ही बात कर रहा था.. मगर तुम कुछ और ही समझ रही थीं.. और अब तुम्हारी बातों से साफ पता चल गया कि तुम कहना क्या चाहती हो.. लो खुद देख लो कि इस ट्यूब से पेस्ट निकलता है या नहीं हा हा हा हा…

सुधीर ने निगाहें लौड़े पर डाल कर ये बात कही थी.. जिसको दीपाली अच्छी तरह समझ गई।

दीपाली- ओह.. क्या मतलब है आपका.. मैंने भी असली मलहम की ही बात की है.. कुछ नहीं…

सुधीर- बेटी.. ये बाल मैंने धूप में सफेद नहीं किए.. जवानी में बहुत सी लड़कियों की खुजली मिटाई है और आज भी मेरी ट्यूब में इतना पेस्ट है कि किसी को भी आराम से लगा सकता हूँ और गारन्टी के साथ उसकी खुजली मिटा सकता हूँ।
 
दीपाली भी समझ गई कि अब बात छुपाने से कुछ नहीं होगा.. बूढ़ा बड़ा शातिर है.. सब समझ गया है। अब उसने मन ही मन पक्का निर्णय ले लिया कि अब तो इस बूढ़े को चैक करना ही पड़ेगा.. क्योंकि उसको ये यकीन था कि इस बूढ़े में दम नहीं है.. ये उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

दीपाली- अच्छा ये बात है.. तब तो जरूर आजमा कर देखूँगी.. दिखाओ तो अपनी ट्यूब…

सुधीर- अब मैं क्या दिखाऊँ.. खुद ही देख लो..

दीपाली- नहीं.. मैं नहीं देखूँगी.. अगर दिखानी है तो दिखाओ.. नहीं तो मैं जाती हूँ।

सुधीर समझ गया कि अब क्या करना है.. उसने पैन्ट खोली और नीचे सरका दी। अंडरवियर उसने पहनी नहीं थी तो बस सीधा प्रसारण शुरू हो गया.. उसका लौड़ा सोया हुआ.. कोई 3″ का होगा और मज़े की बात देखो झांटें एकदम साफ थीं.. शायद कल ही सशेव की हुई होगीं।

दीपाली- हा हा हा ये छोटा सा इसके दम पर खुजली मिटाओगे?

सुधीर- बेटी सोए हुए पर मत जाओ.. जरा इसे जगाओ.. उसके बाद देखो कि इसमें कितना दम है..

दीपाली- अच्छा.. ये जागता भी है क्या इस उम्र में…

सुधीर- हाँ खुद देख लो.. अपने मुलायम हाथ तो लगाओ इसे…

दीपाली ने लौड़े को सहलाना शुरू कर दिया.. सुधीर ने मज़े में आँखें बन्द कर लीं और बस दूसरी दुनिया में खो गया। दीपाली बड़े प्यार से लौड़े को सहलाने लगी और उसकी उम्मीद से बाहर वो धीरे-धीरे अकड़ना शुरू हो गया। अभी कोई 5 मिनट ही हुए होंगे कि वो तन कर अपने पूरे शबाब पर आ गया।

दीपाली तो बस देखती रह गई, वो करीब 7″ लम्बा होगा और मोटा भी अच्छा ख़ासा था.. लग ही नहीं रहा था कि किसी बूढ़े आदमी का लंड है। एकदम तना हुआ फुफकार मारता हुआ जवान लौड़ा लग रहा था ... उसको कहाँ बर्दाश्त हुआ.. वो झट से सुपाडा मुँह में लेकर चूसने लगी।

अबकी बार चौंकने की बारी सुधीर की थी.. क्योंकि उसने सोचा ही नहीं था कि इतनी जल्दी ये हो जाएगा। वो बस सोच ही रहा था कि इसको कहूँ ‘एक बार मुँह में लो मज़ा आएगा’ ... मगर दीपाली तो बिना कहे ही लौड़ा चूसने लगी। अब तो सुधीर के वारे-न्यारे हो गए.. वो बस मज़े की दुनिया में खो गया।

सुधीर- आह्ह.. आह.. मज़ा आ रहा है.. तुम बहुत अच्छे से चूस रही हो.. उफ्फ क्या पतले होंठ हैं तुम्हारे.. आह्ह.. अब बस भी करो.. माल निकाल कर ही दम लोगी क्या.. आह्ह.. चूत की खुजली नहीं मिटवानी क्या उफ़फ्फ़…

दीपाली ने लौड़ा मुँह से निकाल दिया और हाथ से सहलाने लगी।

दीपाली- बस इतनी ही देर में माल आने वाला है.. मेरी खुजली क्या खाक मिटाओगे?

सुधीर- तू शक बहुत करती है.. एक बार मौका दे कर तो देख.. सारी खुजली मिटा दूँगा.. अपनी नारंगियां तो दिखा.. उनका थोड़ा रस पी लूँगा तो और जोश आ जाएगा। अपनी चूत के दर्शन भी करा.. ताकि उसका रस चाट कर तुझे गर्म करूँ.. तेरी खुजली और बढ़ाऊँ.. उसके बाद मलहम लगाऊँगा।

दीपाली- चलो.. अब यहाँ तक आ गई हूँ तो आपके लौड़े का कमाल देख कर ही जाऊँगी.. लो खुद ही निकाल दो मेरे कपड़े।

दीपाली उसके सामने खड़ी हो गई और वो एक-एक करके उसके कपड़े निकालने लगा। जैसे-जैसे दीपाली का गोरा बदन उसकी आँखों के सामने आ रहा था.. वैसे-वैसे उसका लौड़ा झटके खा रहा था। दीपाली के मम्मों और चूत की फाँकें देख कर लौड़े से पानी की बूँदें निकल आई थीं।

सुधीर- उफ़फ्फ़ क्या यौवन है.. कभी सपने में भी मैंने ऐसे जिस्म को नहीं देखा था.. आज आँखों के सामने देख कर अपनी किस्मत पर यकीन ही नहीं हो रहा है।

दीपाली- अभी तो देखा है.. जब भोग भी लोगे.. तब क्या हाल होगा आपका?

सुधीर- बरसों पहले एक कच्ची कली को चोदा था.. उसके बाद कभी मौका नहीं मिला… आज तुम मेरी किस्मत बदलने आ गई हो।

दीपाली कुछ नहीं बोली बस मुस्कुरा दी।
 
दीपाली को नंगा करने के बाद सुधीर ने जल्दी से अपने कपड़े निकाल कर फेंक दिए और दीपाली के होंठ चूसने लगा। दीपाली भी उसका साथ देने लगी। होंठों का रस पीते-पीते सुधीर ने उसे बाँहों में उठा लिया और कमरे में ले गया। वहाँ एक आलीशान बिस्तर था उस पर दीपाली को लिटा कर वो भूखे बच्चे की तरह उसके चूचों पर टूट पड़ा और निप्पल चूसने लगा।

दीपाली- आह्ह.. उफ़फ्फ़ सस्स.. आराम से आह्ह.. काटो मत.. आह्ह.. निशान पड़ जाएँगे आह्ह..।

सुधीर- अरे क्या करूँ.. उफ़फ्फ़ कंट्रोल करना मुश्किल है.. ऐसे मस्त मम्मे हैं कि बस मुँह हटाने का मन नहीं करता.. कितना रस है तेरे संतरों में..

दीपाली- उफ़फ्फ़ सस्स आह्ह.. मेरी चूत में आह्ह.. इससे भी ज़्यादा रस है.. आह्ह.. उसको चूसो ना.. उफ्फ और आह्ह.. मुझे भी उफ्फ सस्स अपना लौड़ा चुसाओ.. बहुत मन हो रहा है।

सुधीर उसकी बात को समझ गया और 69 की स्थिति में आ गया।

अब दोनों बड़े मज़े से रस का मज़ा ले रहे थे। सुधीर जीभ चूत के अन्दर तक घुसा कर चूत को चाट रहा था और दीपाली पूरा लौड़ा मुँह में लेकर होंठ भींच कर चूस रही थी।

लगभग दस मिनट तक ये चुसाई चलती रही.. सुधीर ने चूत को इतनी बुरी तरह से चूसना शुरू कर दिया कि दीपाली लौड़ा चूसना भूल गई और सिसकने लगी।

दीपाली- आआह्ह.. आह आपने ये क्या आह्ह.. कर दिया चूत जलने लगी है.. अब डाल दो.. बस आह्ह.. बर्दास्त नहीं हो रहा मुझसे…. प्लीज़ जल्दी घुसा दो।

सुधीर उसकी हालत को समझ गया और उसे सीधा लेटा कर उसके पैरों को मोड़ दिया.. लौड़े को चूत पर टिका कर हल्के से दबाने लगा.. लौड़ा चूत में घुसना शुरू हो गया।

दीपाली- आह्ह.. उफ़फ्फ़ आपका लौड़ा मोटा है.. मज़ा आ गया.. ज़ोर से एक साथ पूरा घुसा दो ना आह्ह..

सुधीर ने लौड़ा पीछे किया और ज़ोर से एक झटका मारा.. पूरा लौड़ा जड़ तक चूत में समा गया।

दीपाली- ओह्ह.. उफ़फ्फ़ चोदो आह्ह.. अब ज..ज़ोर से चोदो आह्ह.. मज़ा आ रहा है.. मेरी चूत की सारी खुजली मिटा दो.. आह्ह.. अपनी भी ख्वाहिस पूरी कर लो आह्ह.. चोदो..

सुधीर जोश में आ गया और रफ्तार से चोदने लगा.. एक कमसिन कली को चोदने के अहसास से ही उसकी नसों में उफान आ रहा था.. वो उम्र से ज़्यादा जोश दिखा रहा था.. लेकिन दीपाली जैसी यौवना के आगे बुढ़ापा कहाँ तक रेस लगाता.. कुछ देर बाद वो थक गया और उसकी रफ्तार टूटने लगी।

दीपाली- आह्ह.. आह क्या हुआ.. आह्ह.. रफ्तार से चोदो ना.. आह्ह.. प्लीज़ मज़ा आ रहा था.. आह्ह…

सुधीर चोदने के साथ-साथ उसके मम्मों को भी चूस रहा था। लौड़े की रफ्तार के साथ उसके मुँह की रफ्तार भी कम हो गई। वो अब बिल्कुल झटके नहीं मार रहा था। बस लौड़ा जड़ तक घुसा कर दीपाली पर लेट गया।

दीपाली- हटो मेरे ऊपर से.. उफ़फ्फ़ सारा मज़ा खराब कर दिया.. छोड़ो ना आ प्लीज़ छोड़ो…

सुधीर ने लौड़ा चूत से निकाल लिया और बिस्तर पर ढेर हो गया।

सुधीर- आह्ह.. मेरी हिम्मत नहीं है अब… तू ऊपर आ जा.. कूद मेरे लौड़े पे आ..

दीपाली ने बातों में समय खराब नहीं किया और झट से सुधीर के लौड़े पर बैठ गई और रफ्तार से कूदने लगी।

वो बहुत ज़्यादा उतेज़ित हो गई थी। अब उसके बर्दाश्त के बाहर हो गया था.. और उसने इस अदा के साथ चुदना शुरू किया कि सुधीर ज़्यादा देर टिक ना सका और चरम पर पहुँच गया।

सुधीर- आह उहह.. ज़ोर से कूद आह्ह.. मेरा पानी आने वाला है.. आह…

दीपाली- आहइ आहइ उईईइ कककक आह मेरा भी आह.. आने वाला है अयेए ईई…

दो मिनट बाद दीपाली की चूत ने पानी का फव्वारा खोल दिया.. उसके साथ ही सुधीर भी आँखें बन्द करके झड़ने लगा.. मगर उसके लौड़े से बहुत कम पानी बाहर निकला और उसमें कोई रफ्तार भी नहीं थी।

दीपाली- आ आह्ह.. मेरा हो गया उईइ आह्ह.. तुम भी जल्दी से पानी निकालो आह्ह..

सुधीर- उफ़फ्फ़ आह्ह.. मेरा निकल गया आह्ह.. अब उतर जाओ आह्ह..

दीपाली नीचे उतर कर उसके लौड़े को देखने लगी जो बिजली की तेज़ी से छोटा होने लगा था और कुछ ही देर में वो सो गया।

दीपाली- आह मज़ा आ गया.. लेकिन आपका पानी बहुत कम निकला.. मुझे पता भी नहीं चला.. कब निकल गया।

सुधीर- अरे तू क्या जाने.. इस उम्र में तेरी जैसी कमसिन कली को चोद लिया.. ये ही बहुत बड़ी बात है.. वरना इस उम्र में तो कोई 40 साल की औरत भी नहीं मिलती.. इतना पानी भी कहाँ से निकल आया.. पता नहीं।

दीपाली- हाँ ये बात तो है.. मैंने तो सोचा था आपका खड़ा भी नहीं होगा मगर आपने तो मुझे संतुष्ट कर दिया.. पावर तो है आपके लंड में…

सुधीर- मैंने तो सोचा भी नहीं था.. तू ऐसी होगी.. एकदम पक्की रंडी जैसे चुदी है तू.. मगर मैं जानता हूँ.. तू रंडी नहीं है.. ज़्यादा चुदी हुई भी नहीं है मगर वो कौन ख़ुशनसीब है जिसने तेरी सील तोड़ी?

दीपाली- है बस कोई भी.. आपको उससे क्या? आपने तो मज़ा ले लिया ना.. अब मुझे जाना होगा वरना मम्मी गुस्सा होगी।
 
सुधीर- एक बात कहूँ.. कभी भी मेरी किसी भी तरह की हेल्प की जरूरत हो, तो मुझे बोल देना.. मैं हमेशा तैयार रहूँगा और हो सके तो कभी-कभार इस बूढ़े के लौड़े का भी ख्याल रख लेना.. माना कोई तगड़ा लौड़ा तुम्हें मज़े देता होगा.. मगर मेरे लौड़े से भी कभी शिकायत का मौका नहीं दूँगा।

दीपाली आगे बढ़ी और सुधीर को एक चुम्बन किया।

दीपाली- आप चिंता मत करो.. जल्दी ही आपको दोबारा मज़ा देने आऊँगी और कभी कुछ काम होगा तो बता दूँगी.. ओके बाय.. मॉम गुस्सा करेगी।

सुधीर के चेहरे पर ख़ुशी के भाव आ गए.. वो खड़ा होकर कपड़े पहनने लगा। इधर दीपाली ने भी कपड़े पहन लिए थे।

दीपाली- अच्छा एक बात बताओ आप मुझे मलहम लगाने लाए थे.. उस समय आपके मन में क्या था? सच बताना।

सुधीर- अरे मैं झूठ क्यों बोलूँगा… सुनो उस वक्त मैंने सोचा कि तुम नादान लड़की हो इसलिए ऐसे बीच रास्ते में चूत खुजा रही हो.. मैंने मलहम की बात इसलिए कही कि अगर तुम मान जाओ तो मलहम लगाने के बहाने कम से कम तुम्हारी चूत को छूने का मौका मिल जाएगा और किसी तरह तुम्हें गर्म करके चोदने का ख्याल भी मन में था.. मगर तुम मेरी उम्मीद से ज़्यादा मस्त निकलीं।

दीपाली- ओह्ह इतने गंदे ख्याल थे.. मन में.. चलो कोई बात नहीं.. अबकी बार आऊँगी तब इस बात का जवाब दूँगी.. अब जाती हूँ बाय..

सुधीर- अरे रूको.. मैं तुम्हें घर तक छोड़ आता हूँ।

दीपाली- नहीं.. इसकी कोई जरूरत नहीं है.. आप यहीं रहो.. ओके बाय..

दीपाली वहाँ से निकल गई और अपने घर की और बढ़ने लगी।

इधर अनुजा रोटी बना रही थी और विकास किसी काम में बिज़ी था.. तभी फ़ोन की घंटी बजी ... अनुजा बाहर आई और फ़ोन उठाया।

सामने से दीपाली की माँ थी।

अनुजा- नमस्ते आंटी.. कैसी हो आप.. अब आपके भाई की तबियत कैसी है? आपके पास मेरे घर का नम्बर कहाँ से आया?

दीपाली की माँ- हाँ अब ठीक है.. नम्बर तो तुमने फ़ोन किया था ना.. मेरे फ़ोन में कॉलर आईडी है.. उस पर नम्बर आ गया था और मैंने लिख लिया था.. तुम कैसी हो?

अनुजा- अच्छा ये बात है.. हाँ मैं ठीक हूँ.. कैसे फ़ोन किया आपने?

दीपाली की माँ- बेटी वो दीपाली को भेज दो.. मैंने सोचा वो आ जाएगी.. मगर अब तक नहीं आई.. मैंने उसे कहा भी था कि हम शाम तक आ जाएँगे।

अनुजा के चेहरे का रंग उड़ गया था क्योंकि दीपाली को गए एक घंटा होने को आया था जबकि रास्ता इतना लंबा नहीं था.. वो कुछ बोलना चाहती थी मगर उसकी आवाज़ गले में अटक गई।

दीपाली की माँ- अरे लो, आ गई.. अच्छा बेटी मैंने तुमको ऐसे ही परेशान किया.. अच्छा रखती हूँ।

दीपाली भाग कर अपनी माँ से चिपक गई और प्यार करने लगी। उसकी माँ ने भी उसका माथा चूमा और बस इधर-उधर की बातें करने लगी।

इधर अनुजा सकते में आ गई कि आख़िर दीपाली इतनी देर तक कहाँ थी।

विकास- अरे जानेमन कहाँ खो गईं जल्दी से रोटी बनाओ, भूख लग रही है.. उसके बाद तुम्हारी चूत की ठुकाई भी करनी है।

अनुजा- अरे कर लेना मेरे राजा.. मगर ये दीपाली इतनी देर कहाँ थी।

विकास के पूछने पर अनुजा ने सारी बात बता दी।

विकास- अरे कोई फ्रेंड रास्ते में मिल गई होगी.. उसके साथ कहीं चली गई होगी या बाहर खड़े-खड़े वक्त निकल गया होगा.. तू ज़्यादा सोच मत.. कल उससे पूछ लेना.. चल अब खाना बना…

अनुजा उसी सोच में रसोई में चली गई। खाना तैयार करके वो कमरे में ले गई और दोनों ने बड़े प्यार से एक-दूसरे को खाना खिलाना शुरू कर दिया।

रात में विकास ने 3 बार अनुजा की चूत और गाण्ड को बजाया और दोनों नंगे ही सो गए।
 
सुधीर से चुदवा कर दीपाली को रात अच्छी नींद आई सुबह बड़ी मुश्किल से उसकी मॉम ने उसे उठा कर स्कूल भेजा। स्कूल के गेट पर आज सिर्फ़ मैडी ही खड़ा हुआ था जैसे ही दीपाली आई.. उसने हल्की मुस्कान दी.. बदले में दीपाली भी मुस्कुरा दी।

मैडी- दीपाली तुमने कोई जवाब नहीं दिया.. सोमवार को आओगी ना?

दीपाली- आ तो जाऊँगी.. मगर तुम्हारे दोस्त मुझसे कोई बदतमीज़ी ना करें इसकी गारन्टी दो पहले…

मैडी- अपनी माँ की कसम ख़ाता हूँ कोई कुछ नहीं कहेगा.. बस तुम आ जाना प्लीज़…

दीपाली- ओके पक्का आ जाऊँगी.. आज गुरुवार है ना.. अभी तो बहुत दिन बाकी हैं ओके बाय…

दीपाली गाण्ड को मटकाती हुई स्कूल में चली गई मैडी वहीं खड़ा बस उसकी गाण्ड को देखता रहा।

तभी एक तरफ छुप कर खड़े सोनू और दीपक भी उसके पास आ गए।

दीपक- मान गए यार तूने साली को मना ही लिया.. अब आएगा मज़ा.. वैसे तूने सोचा क्या है.. उसको चुदने के लिए कैसे पटाएगा?

सोनू- साली कुतिया क्या बोल रही थी कि तुम्हारे दोस्तों को कुछ बदतमीज़ी नहीं करना चाहिए.. एक बार आ तो सही साली.. बड़ी शराफत से तुझे चोदेंगे हा हा हा हा…

मैडी- चुप करो सालों.. कोई सुन लेगा.. अब सोमवार तक उसके आस-पास भी नहीं जाना.. नहीं तो बना बनाया काम बिगड़ जाएगा।

दीपक- यार कहीं ऐसा ना हो तू अकेला मज़ा लूट ले.. और हम लौड़ा हाथ में लिए हिलाते और खड़े रहें.. देख एक लड़की के लिए दोस्ती मत तोड़ देना..

मैडी- साले इतना ही भरोसा है क्या मुझ पे.. तुम दोनों के बिना मैं कुछ नहीं करूँगा ओके.. अब चलो अन्दर.. वक्त हो गया…

क्लास में सब सामान्य चल रहा था, जब विकास आया.. तब दीपाली ने एक हल्की मुसकान दी, मगर विकास बस देख कर अनजान बन गया और किताब लेकर पढ़ाने लगा।

विकास- अच्छा बच्चों इम्तिहान के लिए जरूरी सवालों पर निशान लगा लो.. जो याद करने हैं।

कुछ लड़के और लड़कियां एक-दूसरे से धीरे-धीरे कुछ बोल रहे थे और ध्यान नहीं रहे थे। विकास का गुस्सा तेज था बच्चे उससे डरते थे.. मगर आज पता नहीं क्यों सब ध्यान नहीं दे रहे थे।

विकास ने जब ये देखा तो गुस्सा हो गया और ज़ोर से चिल्लाया- क्या बकवास लगा रखी है.. चुपचाप निशान लगाओ..

सब चुप हो गए.. विकास काफ़ी देर तक सवालों के निशान लगवाता रहा इस दौरान वो बार-बार दीपाली को देख रहा था और दीपाली भी बहुत कामुक मुस्कान दे रही थी।

विकास को लगा शायद दीपाली कुछ कहना चाहती है क्योंकि वो बार-बार ऊँगली से कुछ इशारा कर रही थी.. मगर वो समझ नहीं पा रहा था।

विकास- दीपाली खड़ी हो जाओ।

दीपाली खड़ी हो गई और विकास को देखने लगी।

विकास- जाओ स्टाफ-रूम में.. जहाँ एक फाइल रखी है.. उस अलमारी में उसमें एक पेपर रखा है.. वो लेकर आओ।

दीपाली ‘ओके सर’ कह कर वहाँ से निकल गई..

उसको गए हुए कोई एक मिनट भी नहीं हुआ था कि विकास भी निकलने को हो गया।

विकास- बच्चों शोर मत करना.. मैं अभी आता हूँ और दीपाली वो पेपर ले आए तो उससे कहना कि बोर्ड पर उसमें लिखे सवाल लिख दे और सब कॉपी कर लेना.. वो कुछ ऐसे सवाल हैं जो किताब में नहीं हैं मैंने बनाए हैं। अक्सर इम्तिहान में सवालों को घुमा कर देते हैं उत्तर किताब में ही होता है मगर बच्चे समझ नहीं पाते हैं.. तो ध्यान से सब लिख लेना।

विकास क्लास-रूम से बाहर निकल गया मगर फ़ौरन वापस अन्दर आया शायद उसे कुछ याद आ गया।

विकास- प्रिया.. तुम क्लास की मॉनीटर हो.. ध्यान रखना पीछे से कोई शोर ना हो ओके…

प्रिया- ओके सर..
 
इतना बोलकर विकास फ़ौरन स्टाफ-रूम की तरफ गया।

दीपाली वो पेपर लिए वहीं खड़ी उसका इन्तजार कर रही थी।

विकास- हाँ अब कहो.. क्या इशारा कर रही थीं और सब के सामने ऐसे मुस्कुराया मत करो.. अगर किसी को शक हो गया तो?

दीपाली- सर किसी को कुछ पता नहीं चलेगा.. आप बेफिकर रहो.. आज सुबह आते समय दीदी को चोद कर आए हो क्या…

विकास- नहीं तो.. रात को मस्त ठुकाई की थी.. सुबह कहाँ वक्त मिलता है.. मगर तुम क्यों पूछ रही हो?

दीपाली- आपकी पैन्ट की ज़िप खुली हुई है.. क्लास में सब देख रहे थे ... ये तो अच्छा है कि अन्दर चड्डी है.. वरना आपका लंड बाहर आ जाता हा हा हा हा…

विकास- अरे धीरे.. कोई सुन लेगा.. ये कैसे खुली रह गई.. बच्चे क्या सोच रहे होंगे.. अच्छा अब तुम जाओ वरना किसी को शक हो जाएगा।

दीपाली- मेरे राजा जी एक बार लण्ड के दर्शन करवाओ ना.. बड़ा मन मचल रहा है।

विकास- तू पक्का मरवाएगी.. शाम को जितना चाहे देख लेना.. अभी जा यहाँ से…

दीपाली जाते-जाते लौड़े को सहला कर चली गई।

विकास डर सा गया अगर कोई आ जाता तो क्या होता… दीपाली के जाने के बाद विकास फाइल में कुछ देखने लगा… उधर दीपाली क्लास में गई तब प्रिया खड़ी हुई और विकास की कही बात उसको बताई वो बोर्ड पर सवाल लिखने लगी।

काफ़ी देर तक जब विकास नहीं आया तो क्लास में शोर होने लगा.. सवाल भी सबने लिख लिए थे।

तभी वहाँ विकास आ गया सब खामोश हो गए और सब की नज़र उनकी ज़िप पर गई जो अब बन्द थी।

कुछ बच्चों ने मुसकान देकर विकास को अहसास करा दिया कि वो क्यों हँस रहे थे।

विकास- प्रिया खड़ी हो जाओ.. कब से देख रहा हू तुम दाँत निकाल रही हो.. क्या हुआ तुम क्लास की मॉनीटर हो… अगर तुम ऐसा विहेव करोगी तो बाकी पर क्या असर पड़ेगा।

प्रिया- सर सॉरी…

विकास- दीपक, तुम मार खाओगे.. क्या ख़ुसुर-फुसुर कर रहे हो?

दीपक- कुछ नहीं सर सॉरी…

विकास- हाँ मैं जानता हूँ तुम सब क्यों हँस रहे थे.. यार मैं भी इंसान हूँ ... जल्दबाज़ी में ग़लती हो गई.. अब इसका ये मतलब थोड़े ही है कि तुम मेरा मजाक उड़ाने लगो।

विकास की बात सुनकर सब बच्चे समझ गए कि सर क्या कहना चाहते हैं।

सब ने एक साथ ‘सॉरी’ कहा.. तभी दूसरे विषय का घंटा बज गया और विकास वहाँ से चला गया।

बाकी का दिन सामान्य ही गुजरा.. छुट्टी के बाद दीपाली जाने लगी.. तब प्रिया ने उसको पीछे से आवाज़ दी।

प्रिया- दीपाली रूको.. मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

(दोस्तो, यह है प्रिया इसकी उम्र 19 वर्ष की है.. इसका रंग साफ नहीं है.. थोड़ी साँवली है.. फिगर 30-26-30 का है मगर लड़के इसे भाव नहीं देते हैं और ये भी ज़्यादा किसी से बात नहीं करती है… बस अपनी धुन में रहती है। हाँ एक बात और यह दीपक के चाचा की लड़की है यानी दीपक की चचेरी बहन है। एक वजह यह भी है कि स्कूल में कोई लड़का इसके पास नहीं आता है। आप तो जानते ही हो.. दीपक और उसके दोस्त एक नम्बर के आवारा हैं और किसकी मजाल जो उनकी बहन को पटाने की सोचे.)

दीपाली- क्या हुआ ऐसे भाग कर क्यों आ रही है.. क्या बात करनी है।

प्रिया- यार बहुत ज़रूरी बात है.. इसी लिए भाग कर आई हूँ।

दीपाली- अच्छा चल बता.. क्या बात है?

प्रिया ने बात बताना शुरू किया तो दीपाली के चेहरे के भाव बदलने लगे चिंता की लकीरें उसके माथे पर साफ दिख रही थीं।

दीपाली- ओह माय गॉड.. तुम सच कह रही हो.. थैंक्स यार तुमने ये बात मुझे बता दी.. अच्छा एक बात सुनो किसी को भी ये बात मत बताना ओके.. मैं अपने तरीके से कुछ सोचूँगी।

प्रिया- अरे नहीं यार मैं पागल हूँ क्या…

दीपाली- थैंक्स यार…

प्रिया- यार प्लीज़.. मेरा एक काम कर दोगी.. प्लीज़ प्लीज़ ना मत कहना…

दीपाली- ओके कहो.. अगर मेरे बस में होगा तो जरूर कर दूँगी…

प्रिया फिर बोलने लगी और दीपाली बस आँखें फाड़े उसको देखने लगी।
 
आप ऐसा समझो कि दीपाली को उसकी बात सुन कर बहुत बड़ा झटका सा लगा।

दीपाली- तू पागल हो गई है क्या.. ऐसा नहीं हो सकता.. तूने ये सब सोचा भी कैसे.. मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नहीं करूँगी ओके…

प्रिया- देख सोच ले.. तूने पहले हाँ कही है.. अब अगर तू ना करेगी तो मैं कुछ कर बैठूंगी.. बाद में तुमको पछताना पड़ेगा।

दीपाली- यह क्या बकवास है मुझे क्यों पछताना पड़ेगा हाँ.. और तूने यह सोच भी कैसे लिया.. मेरी तो समझ के बाहर है।

प्रिया ने फिर एक बात उसको कही और इस बार तो दीपाली ने अपने हाथ मुँह पर रख लिए.. आज प्रिया उसको एक के बाद एक झटके दे रही थी। दीपाली का गला सूख गया.. बड़ी मुश्किल से उसने बोला।

दीपाली- यार मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा तुझे ये कैसे पता चला…. चल इस बात को गोली मार.. देख प्रिया, तू अच्छी तरह सोच समझ कर देख ले उसके बाद भी अगर तुमको लगता है यह सही है तो ओके मैं तुम्हारा ये काम कर दूँगी.. मगर ये बात राज़ ही रखना।

प्रिया- मैंने अच्छी तरह सोच कर ही तुमको कहा है।

दीपाली- नहीं तू कल मुझे फाइनल बता देना.. उसके बाद समझूंगी.. ओके..

प्रिया- चल ठीक है.. कल बता दूँगी.. अब तू जा और प्लीज़ तू भी किसी को बताना मत…

दीपाली- तू पागल है क्या.. ये बात किसी को बताने की है क्या चल बाय… कल मिलते हैं।
 
(लो दोस्तो, चक्कर आने लगा ना.. कि यह क्या उलझन हो गई.. आख़िर यह प्रिया कहाँ से आ गई और ऐसी क्या बात की उसने दीपाली से.. अब ये सब जानना है तो कहानी को ध्यान से पढ़ते रहना पड़ेगा ना.. क्योंकि आप पिंकी सेन का स्टाइल जानते ही हो ... तो मजा लीजिए दोस्तो, वादा करती हूँ आपका मज़ा बढ़ता ही रहेगा। चलो अब कहानी पर वापस आती हूँ।)

दीपाली वहाँ से सीधी घर चली जाती है और खाने के बाद पढ़ाई में लग जाती है। एक घंटा पढ़ाई करने के बाद उसको नींद आ जाती है और वो गहरी नींद में सो जाती है।

शाम को दीपाली की मॉम उसे जगाती है तब उसे ख्याल आता है कि विकास सर इन्तजार कर रहे होंगे.. वो झट से तैयार होती है और घर से निकल जाती है। रास्ते में उसे सुधीर जाता हुआ दिखाई देता है.. वो पीछे से आवाज़ लगती है।

सुधीर- अरे आओ आओ.. दीपाली में कब से यहाँ खड़ा तुम्हारी ही राह देख रहा था.. मगर आज इधर से आने की बजाय दूसरी तरफ से कैसे आ रही हो ये बात समझ नहीं आई।

दीपाली- मैं रोज पढ़ने जाती हूँ.. आज लेट हो गई तो घर से आ रही हूँ.. समझे आप..

सुधीर- अच्छा अच्छा.. ये बात है.. चलो आज मलहम नहीं लगवाना क्या?

दीपाली- नहीं आज नहीं.. इम्तिहान करीब हैं.. तैयारी करनी है.. फिर कभी लगवाऊँगी.. अच्छा आपसे एक काम था…

सुधीर- हाँ बोलो.. इसमें पूछने की क्या बात है.. तुम तो बस हुकुम करो..

दीपाली ने सुधीर को बताया कि उसको क्या काम है.. सुधीर थोड़ा चौंका मगर जब दीपाली ने पूरी बात समझाई.. तब सुधीर सामान्य हो गया।

सुधीर- अरे ये तो बहुत छोटा सा काम है.. कल ही कर दूँगा और कुछ सेवा करवानी है तो बताओ…

दीपाली- नहीं अंकल बस ये काम कर दो जल्दी.. फिर आपके पास मलहम लगवाने आऊँगी ओके.. अब मुझे जाने दो.. पहले ही देर हो गई है।

सुधीर- अरे कितनी बार समझाऊँ.. अंकल नहीं.. सुधीर बोलो.. तुम्हारे मुँह से मेरा नाम ज़्यादा अच्छा लगेगा.. ओके.. अब जाओ.. कल इसी वक्त मिलना.. समझो तुम्हारा काम हो गया।

दीपाली वहाँ से सीधी अनुजा के घर चली जाती है वो अभी गेट पर ही पहुँची कि उसको अनुजा की आवाज़ सुनाई दी।

अनुजा- विकास.. आज दीपाली नहीं आई क्या बात है?

विकास- हाँ अब तक आ तो जाना चाहिए था.. पता नहीं क्यों नहीं आई स्कूल में तो बड़ी उतावली हो रही थी लौड़े के लिए.. पर अब तक नहीं आई।

विकास ने स्कूल से आते ही अनुजा को सारी बात बता दी थी।

अनुजा- नादान है इसलिए ऐसा किया उसने.. मैं फ़ोन करके पूछती हूँ। तबियत तो ठीक है ना उसकी..

दीपाली- हैलो.. तुमने पुकारा और मैं चली आई.. चूत चिकनी करके आई.. हा हा हा हा…

अनुजा- बदमाश चुप कर खड़ी हमारी बातें सुन रही थी और गाने का मतलब बदल दिया तूने हा हा हा…

विकास- मेरी जान इम्तिहान की जरा भी फिकर नहीं है क्या.. जो इतना देरी से आई.. अब कब पढ़ोगी और कब चुदोगी।

अनुजा- आज तो पढ़ाई और चुदाई एक साथ चलने दो।

विकास- हाँ यह आइडिया अच्छा है.. चल आजा कमरे में… जल्दी से कपड़े निकाल स्कूल में बहुत परेशान किया तूने.. आज ऐसे झटके मारूँगा कि तेरी सारी मस्ती निकल जाएगी।

अनुजा- आप दोनों पढ़ाई और चुदाई का मज़ा लो.. मुझे तो खाना बनाना है..

दीपाली- अरे ये क्या दीदी आप भी साथ में रहो ना… ज़्यादा मज़ा आएगा।

अनुजा- अरे नहीं रात को ही विकास ने बहुत ठुकाई की है और वैसे भी इतना वक्त कहाँ कि हम तीनों साथ में मस्ती कर सकें.. तुम मज़ा लो रविवार को सुबह जल्दी यहाँ आ जाना तब पूरा दिन खूब मज़ा करेंगे।

दीपाली- ओके दीदी यह सही रहेगा.. आप जाओ खाना बनाओ।

अनुजा के जाते ही दीपाली कपड़े निकालने में लग गई।

विकास- अरे वाह.. इतनी रफ्तार से.. लगता है आज चूत में बड़ी खुजली हो रही है.. चल निकाल.. मैं भी निकालता हूँ।

दीपाली- आपका लौड़ा है ही ऐसा की मन ही नहीं भरता और आज तो आपसे पढ़ते हुए चुदवाऊँगी.. नया फन हो जाएगा।

दोनों नंगे हो जाते हैं. विकास दीपाली को बिस्तर पर लिटा कर उसके मम्मों को चूसने लगता है और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगता है।

दीपाली- आह्ह.. ऑउच.. आज क्या हो गया आपको.. इतनी ज़ोर से क्यों दबा रहे हो आह्ह..

विकास- मेरी जान तेरे अनारों को दबाऊँगा.. तभी तो ये आम बनेंगे ना.. उफ्फ.. कितनी बार दबा चुका हूँ.. साले अब तक वैसे के वैसे ही कड़क हैं.।

दीपाली- आह.. आह्ह.. सर मुझे भी लौड़ा चूसना है.. आह.. साइड बदलो ना.. आह्ह.. प्लीज़ उईईइ।

विकास- अभी नहीं.. जब तेरी चूत चाटूँगा.. तब चूस लेना, अभी तो तेरे चूचे दबाने दे.. आज इनको बड़ा करके ही दम लूँगा।
 
दीपाली- आह्ह.. आह.. आप पर ये कैसा भूत सवार हो गया आह.. मेरी चूत को बड़ा करो ना.. आह्ह.. दीदी क्या बोलती हैं उईइ आईईइ भोसड़ी बना दो.. आह मेरी चूत की.. मगर आह मम्मों पर रहम खाओ…

विकास- साली स्कूल में बड़ा मन मचल रहा था ना तेरा.. पूरी रंडी वाली हरकतें कर रही थी.. आज तेरा सारा रंडीपना उतार दूँगा।

दस मिनट तक विकास चूचों को मसलता रहा.. उसका लौड़ा तन कर एकदम कड़क हो गया था और दीपाली की चूत भी गीली हो गई थी।

दीपाली- आह्ह.. अब तो चूसने दो आह्ह.. आपका लौड़ा भी आह्ह.. कैसे मेरी टाँगों में चुभ रहा है।

विकास- चल साली आजा.. अब मेरी ऊपर आकर अपनी चूत का स्वाद लेने दे.. तू आराम से लौड़ा चूस।

दोनों 69 कि स्थिति में आ गए, दीपाली बड़े प्यार से लौड़ा चूसने लगी थोड़ी देर बाद वो दाँतों से लौड़े को दबाने लगी।

विकास- आआ.. साली.. ये क्या कर रही है.. लौड़ा काटने का विचार है क्या? दर्द होता है।

दीपाली- हा हा हा क्यों मेरे मम्मों को दबाया था.. तब नहीं सोचा कि मुझे भी दर्द हो रहा होगा।

विकास- अच्छा ये बात है.. बदला ले रही है.. चल तू अबकी बार काट.. देख में तेरी चूत को कैसे खा जाता हूँ।

दीपाली- नहीं नहीं.. प्लीज़ चूत पर मत काटना.. बहुत दर्द होगा। मैं कुछ नहीं करूँगी।

विकास- अब आई ना लाइन पे… चल चूस मेरी जान.. मुझे भी चूत रस का मज़ा लेने दे।

काफ़ी देर तक ये चटम-चटाई चलती रही.. उसके बाद विकास ने दीपाली से कहा कि जो सवाल मैंने बताए थे उनमें से जो याद हो.. उसका उत्तर बताओ मैं लौड़ा चूत में डाल कर तुझे चोदता हूँ ओके…

दीपाली- हाँ मेरे राजा जी.. ये आइडिया अच्छा है.. आप सुन भी लोगे और चोद भी लोगे.. मज़ा आएगा।

विकास ने दीपाली की टाँगें कंधे पर रखी और ‘घप्प’ से पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया।

दीपाली- आईईइ मर गई रे आह…

विकास- आह.. नहीं सवाल का जवाब दो.. उहह उहह उहह.. वो दिल वाला ओके.. पूरी क्रिया बोलो…

दीपाली- आह्ह.. ओके आह्ह.. सर इंसान के आह्ह.. जिस्म में.. आह्ह.. चोदो आह्ह.. दिल का आह्ह.. बड़ा महत्वपूर्ण आह्ह.. मज़ा आ गया कार्य होता है.. आह ऐसे ही आह्ह.. रफ्तार से लौड़ा अन्दर-बाहर करो आह्ह..

विकास- वेरी गुड.. अच्छा बोल रही हो उह्ह ले उहह.. आगे बता।

पंद्रह मिनट तक विकास लौड़े को अन्दर-बाहर करता रहा.. तब तक दीपाली ने चुदाई के साथ-साथ तीन सवालों के जवाब बता दिए थे।
 
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