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चुदाई का ज्ञान

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दीपक- आह्ह… क्या हुआ मेरी जान निकाल क्यों दिया.. आह्ह… मज़ा आ रहा था।

दीपाली- तुम्हें बताने के लिए कि पहली बार नहीं दूसरी बार तुम्हारे लौड़े पर लड़की के होंठ टच हुए हैं. पहली बार तो ये उस बेचारी के मुँह में ही झड़ गया था।

दीपक- क्या बकवास कर रही हो.. मैंने बताया ना.. मैं किसी लड़की के पास नहीं गया.. कौन है वो.. जिसने तुम्हें ये झूठी बात बताई है.. प्लीज़ अब बता भी दो.. मत तड़पाओ.. सारा मज़ा खराब हो रहा है…

दीपाली- ये बात झूठ नहीं एकदम सच है.. वो तुम्हारी दीवानी है.. बस तुमसे डर रही है.. इसलिए सामने नहीं आई.. उसने मुझसे मदद माँगी.. इसी लिए तुमको मैंने यहाँ बुलाया है।

दीपक- आह्ह… कौन है वो.. नाम बताओ और मैं खुद चूत का प्यासा हूँ.. साली ऐसी कौन लड़की होगी.. जो मुझसे चुदना चाहती हो और मैं उसको चोद नहीं रहा.. बकवास बात है ये.. मैं नहीं मानता.. अगर तुम सच बोल रही हो तो नाम बताओ उस साली कुतिया का..

दीपाली मुस्कुराते हुए उसके लौड़े पर जीभ फेरती है और बड़े प्यार से बोलती है।

दीपाली- आह क्या लौड़ा है तुम्हारा.. वो लड़की प्रिया है मेरे राजा..

दीपक ने ज़ोर से धक्का मारा और गुस्सा हो गया।

दीपक- क्या बकवास कर रही हो.. प्रिया मेरी बहन है।

दीपाली- बकवास नहीं.. सच कह रही हूँ वो लड़की प्रिया ही है.. जिसने पहली बार तेरे लौड़े को चूसा है और अब तुझसे चुदने के लिए बेकरार हो रही है।

दीपक- चुप कर साली कुछ भी बोले जा रही है।

दीपाली- ओए हैलो.. जुबान को लगाम दो.. पहले शान्ति से मेरी बात सुन लो उसके बाद जो बोलना है बोलना.. तुम्हें याद होगा कि तू एक बार ज़्यादा नशे में घर गया था और तेरे पापा ने मार कर तुझे घर से निकाल दिया था। उस वक़्त तुझे प्रिया के पापा अपने घर ले गए थे और उसी रात प्रिया ने तेरे लौड़े को चूसा था समझे…

दीपक एकदम हक्का-बक्का रह गया।

दीपल- क्क्क..क्या बोल रही हो.. तत..तुम आह्ह… ऐसा कुछ नहीं हुआ था स..समझी…

दीपाली- तू तो नशे में था.. तुझे कहाँ कुछ याद होगा… प्रिया ने खुद मुझे सारी बात बताई हैं… समझे.. शुरू से सुन तब तुझे यकीन आएगा।

दीपाली ने प्रिया की कही सारी बातें विस्तार से दीपक को बताईं।

दीपक- ओ माय गॉड.. प्रिया ने ऐसा कैसे कर दिया… वो मेरी बहन है।

दीपाली- बहन हा हा हा.. अब सुन, तुझे एक ज्ञान की बात बताती हूँ.. जो मेरी गुरू ने मुझे बताई है.. गौर से सुनना.. इस दुनिया में बहुत से रिश्ते हैं मगर लौड़े का सिर्फ़ 4 चीजों से गहरा रिश्ता है.. उसके अलावा इसकी ना कोई माँ है.. ना बहन.. अब वो चार रिश्ते क्या हैं सुन… सबसे पहला और सबसे मजबूत रिश्तेदार हाथ से होता है.. क्योंकि जब लौड़ा जवान होता है या उत्तेज़ित होना सीखता है तो हाथ ही उसको सहला कर शान्त करता है.. जो काफ़ी सालों तक या मरते दम तक इसका साथ नहीं छोड़ता।

इसका दूसरा रिश्ता गाण्ड से होता है जब नई-नई जवानी आती है और कोई लड़की हाथ नहीं लगती है तब नसीब से किसी दोस्त की गाण्ड मारने को मिल जाती है.. मगर ये रिश्ता ज़्यादा दिन तक लौड़े का साथ नहीं देता।
 
लंड का सबसे प्यारा रिश्ता होता है चूत से ... ज़्यादातर लौड़ों को कच्ची और चिकनी चूत से मोहब्बत होती है। किसी-किसी को नसीब से जल्दी तो किसी को शादी के बाद चूत मिलती है.. मगर मिल जरूर जाती है।

लंड का चौथा रिश्ता मुँह से होता है जो इसको चूस कर मज़ा देता है ... मगर लड़की का मुंह किसी-किसी को ही नसीब होता है। कोई बीवी या गर्ल फ्रेंड लंड को मुँह में लेती है और कोई नहीं भी… तो अब समझ आया।

तुम्हें पता है कि प्रिया तुम्हारी बहन है मगर इस लौड़े को नहीं पता. तू तो होश में नहीं था मगर ये पूरे होश में था ... ये कड़क भी हुआ और इसने पानी भी उसके मुँह में निकाला ... अब बोल, ये ज्ञान की बात तेरे समझ में आई कि नहीं।

दीपक तो हक्का-बक्का रह गया। कल तक जिस लड़की को बहन मानता था आज उसकी ऐसी बात पता चल गई कि उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई।

दीपक- यह गलत है.. नहीं, प्रिया ने पाप किया है.. मगर मैं नहीं कर सकता.. ना, ऐसा नहीं होगा…

दीपाली- तो ठीक है.. मत कर.. मगर इतना सोच ले कि प्रिया ने लौड़े का स्वाद चख लिया है और उसकी चूत लौड़े के लिए तरस रही है ... तू नहीं तो कोई और सही ... वो चुदेगी जरूर और हाँ, दूसरा उसको कौन मिलेगा जानते हो? तुम्हारे खास दोस्त ही उसको चोद कर मज़ा लेंगे. उनके अलावा वो किसी के पास जा ही नहीं सकती। अब सोच ले, सील पैक चूत फ्री में मिल रही है. ऐसा मौका बार-बार नहीं आता. तेरे दोस्त मज़ा लेंगे और तू चूत के लिए तड़पता रहेगा ... मेरी चूत भी नहीं मिलेगी तुझे. पर हाँ, अगर तू प्रिया को चोद दे तो मैं तुझ से चुदवा सकती हूँ, वरना नहीं.

दीपक- साली, तू कैसे नहीं चुदवाएगी.. इस घर में तेरे और मेरे सिवा है ही कौन.. तुझे तो जबरदस्ती चोद लूँगा।

दीपाली- मुझे तो चोद लोगे पर प्रिया? क्या उसके सामने तुम मुझे चोद पाओगे?

दीपक- क्या.. प्रिया कहाँ है यहां?

तभी कमरे का दरवाजा खुलता है और प्रिया अन्दर आ जाती है।

प्रिया- मैं यहाँ हूँ, भाई..
 
दीपक प्रिया को देखता रह जाता है वो सिर्फ़ ब्रा-पैन्टी में खड़ी थी। उसके चूचे आधे से ज़्यादा बाहर को झाँक रहे थे.. चूत का फुलाव पैन्टी में से साफ नज़र आ रहा था और वो दीपक के लौड़े को देख कर होंठों पर जीभ फेर रही थी.. जो आधा-अधूरा खड़ा था या यूँ कहो सोया हुआ था।

दीपक- ये क्क्क..क्या है प्रिया.. छी: तुम्हें शर्म आनी चाहिए..

दीपक कुछ और बोलता तब तक प्रिया उसके एकदम करीब आकर खड़ी हो जाती है और दीपक के लौड़े को देखने लगती है.. जिसमें अब तनाव आना शुरू हो गया था।

प्रिया- भाई.. आपने मेरे पूरे जिस्म को अच्छे से देख लिया और आपके मन में मुझे चोदने की इच्छा भी जाग गई है.. जिसका सबूत यह कड़क होता लौड़ा है.. अब यह झूठा गुस्सा किसलिए?

दीपक का लौड़ा एकदम तन गया था और प्रिया को चोदने की दिल के किसी कोने में एक चाहत जाग उठी थी।

दीपक- तू बहन नहीं.. एक रंडी है! आ जा साली.. पहले तुझे ही चोदूँगा..

दीपक ने प्रिया को बाँहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा। प्रिया भी उसका साथ देने लगी।

दीपाली वहीं खड़ी उन दोनों को देख कर मुस्कुराने लगी।

काफ़ी देर बाद दोनों अलग हुए. दीपक भूखे कुत्ते की तरह प्रिया के मम्मों को दबा रहा था और उसने ब्रा को खोल कर एक तरफ फेंक दिया था।

प्रिया- आह्ह… आई.. भाई आराम से करो ना आह्ह… दुख़ता है..

दीपक- साली छिनाल.. अपने भाई के बारे में गंदे ख्याल लाई.. तब नहीं सोचा तूने.. दुखेगा.. अब देख मैं कैसे तुझे मज़ा देता हूँ.. आज तो बहनचोद बन ही जाता हूँ.. जिस नाम से नफ़रत थी.. आज उसी को तूने मेरे से जोड़ दिया है।

दीपाली- ओके प्रिया, मैं अब जाती हूँ ... मेरा काम. हो गया. अब तुम दोनों मज़े करो।

ये सुनकर दीपक ने प्रिया को छोड़ दिया और दीपाली का हाथ पकड़ लिया।

दीपक- तू कहाँ जाती है मेरी बुलबुल.. तेरे चक्कर में तो आज मैं बहनचोद बनने जा रहा हूँ.. पहले तेरी चूत को फाड़ूँगा.. उसके बाद इस कुत्ती की ठुकाई करूँगा.. साली बहन के नाम पर कलंक है ये…

दीपाली- चूत तो मेरी भी खुजला रही है मगर मैंने प्रिया से वादा किया है उसकी सील तुम ही तोड़ोगे।

दीपक- अरे तो मैंने कब मना किया है.. पहले तेरी चूत का उद्घाटन करूँगा उसके बाद प्रिया की चूत का मुहूरत होगा।

प्रिया- नहीं भाई, पहले आप मेरे साथ करो ... मैं जानती हूँ मेरी तरह आप भी एकदम कुंवारे हैं. आपके लौड़े की पहली चुदाई है. तो आप मेरी सील के साथ अपनी भी शुरूआत करो। दीपाली कौन सी सील पैक है.. ये तो चुदी-चुदाई है।

दीपाली- तुम्हें मेरी कसम है प्रिया, इसके आगे मत बोलना।

दीपक- यस यस.. आई वाज राईट.. मुझे पता था साली तू चुद चुकी है.. वो साले नहीं मान रहे थे.. तेरी चाल देख कर ही मैं समझ गया था कि कोई तो है.. जो तेरी जवानी को लूट रहा है.. अब बता भी दे कौन है वो हरामी? जिसने हमारे माल पर हाथ साफ कर लिया।

दीपक की बात सुन कर दीपाली कुछ नहीं बोली।

प्रिया- भाई, क्यों बने-बनाए मूड को खराब कर रहे हो.. होगा कोई भी! आ जाओ, हम मज़े करते हैं।

दीपक- रूक, साली कुत्ती! तुझे बहुत जल्दी है चुदने की. इसे बोल यहीं रूके ... अगर ये रहेगी तभी तुझे चोदूँगा ... क्योंकि मैं आज इसकी चूत को नहीं छोड़ने वाला हूँ.
 
दीपाली- ठीक है, मैं यहीं हूँ ... अब हो जाओ शुरू और कर दो प्रिया की चूत का मुहूरत. उसके बाद मुझे भी चोद लेना ... मैं खुद लंड के लिए तरस रही हूँ।

दीपक- ऐसे नहीं.. तुम पूरी नंगी हो जाओ और बिस्तर पर हमारे साथ रहो।

दीपाली मान गई और कपड़े निकालने लगी.. साथ ही प्रिया भी पूरी नंगी हो गई। दीपक तो पहले से ही उत्तेजित था … उसके लंड का तनाव बढ़ता गया और उसे अहसास हो गया कि जल्दी वो झड़ जाएगा.. चूत का मुहूरत नहीं कर पाएगा।

दीपक- दीपाली, तूने मुझे बहुत उत्तेज़ित कर दिया है.. पहले तू मेरा लौड़ा चूस कर ठंडा कर ... दो मिनट में ही ये झड़ जाएगा.. उसके बाद प्रिया से शुरूआत करूँगा।

दीपाली मान गई और लौड़े को मुँह में लेकर मज़े से चूसने लगी। दीपक ने आँखें बन्द कर लीं और मुँह को चोदने लगा और कुछ ही देर में उसके लौड़े ने वीर्य की धार दीपाली के मुँह में मार दी। दीपाली पूरा पानी पी गई और लौड़े को चाट कर साफ कर दिया।

दीपक- आह.. ये हुई ना बात.. उफ्फ आज तक मेरे लौड़े ने इतना पानी नहीं छोड़ा जितना आज तेरे मुँह में निकाला है.. आह्ह… मज़ा आ गया।

प्रिया- भाई अब मेरी भी प्यास बुझा दो ना.. आपके लौड़े के लिए तो मैं कब से तड़फ रही हूँ.. लाओ मुझे चूसने दो.. इसे अब दोबारा खड़ा मैं करूँगी।

दीपक- हाँ.. क्यों नहीं मेरी रंडी बहना.. ले चूस ले.. अब तो तुझे चोद कर ही मुझे चैन आएगा और दीपाली तू भी मेरे पास लेट जा.. तेरे चूचे मुझे बहुत पागल बनाते थे.. आज इनका रस पीने दे मुझे.. प्रिया के चूचे भी बहुत मस्त हैं.. मगर ये तो घर का माल है.. जब चाहूँगा मिल जाएगी.. तू तितली की तरह उड़ती रहती है.. क्या पता दोबारा हाथ आए ना आए.. आजा तेरे निप्पल चूसने दे.. इन बड़े-बड़े सन्तरों को दबाने दे।

दीपाली- मैं तो पहले से ही बहुत गर्म हूँ और गर्म कर दे ताकि चूत तो ठंडी हो मेरी।

दीपक- अरे घबरा मत मैं हूँ ना.. आज दोनों की चूत बराबर ठंडी कर दूँगा।

प्रिया सोए हुए लौड़े को जड़ तक मुँह में लेकर चूस रही थी। इधर दीपक दीपाली के मम्मों को चूस कर मज़ा ले रहा था।

दीपाली- आह्ह… उह.. दबाओ मेरे राजा.. आह्ह… मज़ा आ रहा है आह्ह….

थोड़ी देर में ही लौड़ा तन कर अपने विकराल रूप में आ गया।

प्रिया- भाई, अब ये चूत में जाने के लिए तैयार है.. अब थोड़ा मेरी चूत को चाट कर गीला कर दो ताकि मुझे दर्द कम हो।

दीपक- चलो, दोनों सीधी हो जाओ. आज दोनों की चूत एक साथ चाट कर मज़ा देता हूँ।

दीपाली- आह्ह… दे दो राजा.. मेरी चूत सुलग रही है.. आह्ह… जल्दी…

दीपक बड़े प्यार से बारी-बारी से दोनों की चूत चाटने लगा।

प्रिया ने पहली बार इस मज़े को महसूस किया था कि चूत-चटाई क्या होती है.. अब तक तो उसने सिर्फ कहानियों में ही पढ़ा था।

प्रिया- आह ससस्स उह.. भाई मज़ा आ गया आह्ह… ज़ोर से चाटो…

दीपक- आह्ह… बहना.. तेरी चिकनी चूत क्या मस्त है.. कुँवारी चूत का स्वाद कैसा होता है.. आह्ह… आज पता चला।

प्रिया- आह्ह… उई.. जब से आपका लौड़ा देखा है.. आह्ह… आपके लिए ही चूत को साफ रखती हूँ.. क्या पता कब चुदने का ..उई.. मौका मिल जाए आह्ह… देखो आज मिल गया।

दीपक ने अपना मुँह अब दीपाली की चूत पर लगा दिया था और जीभ की नोक से चूत को चोद रहा था.. माना कि दीपक नया खिलाड़ी था मगर जब ऐसी चिकनी चूत सामने हो तो अनाड़ी भी खिलाड़ी बन जाता है।

दीपाली- आह्ह… आई.. दीपक आह्ह… प्लीज़ अब हटना मत.. आह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ आह्ह… पहले मुझे ..आई.. शान्त कर दो उसके बाद आह्ह… सी.. आराम से प्रिया की आह्ह… चुदाई करना..

दीपक ज़ोर-ज़ोर से चूत को चाटने लगा और होंठों में दबा कर चूसने लगा।

दीपाली का बदन अकड़ने लगा और वो गाण्ड को उठा-उठा कर मज़े लेने लगी। उसकी चूत ने रस छोड़ दिया जिसे दीपक चाट गया। उसको चूत-रस पी कर एक नशा सा हो गया।

दीपाली- आईईइ आह उफफफ्फ़ मज़ा आ गया आह अब मुझे आराम करने दे.. प्रिया की चूत में लौड़ा डाल.. कुँवारी चूत है, तुझे मज़ा आ जाएगा…
 
प्रिया भी पूरी गर्म हो गई थी। और दीपक भी चोदने के लिए बेताब हो रहा था। उसने प्रिया के पैर मोड़ दिए और लौड़े पर अच्छे से थूक लगा कर उसे चूत पर टिकाया. उसने धक्का मारा और लौड़ा फिसल कर ऊपर निकल गया। दीपक ने कभी चूत देखी भी नहीं थी और आज उसे कुँवारी चूत मिल गई थी ... यह तो होना ही था ... एक-दो बार और कोशिश करने के बाद उसको समझ में आया कि लंड कैसे अन्दर जाएगा.. प्रिया बस सिसकारियाँ ले रही थी।

अब की बार दीपक ने सुपाड़े को चूत में फंसा कर ज़ोर से झटका मारा ... और आधा लंड चूत को फैलाता हुआ अन्दर घुस गया और प्रिया के मुँह से चीख निकली - बाप रे!

यह तो अच्छा हुआ कि दीपाली ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया नहीं तो घर के बाहर भीड़ जमा हो जाती कि आख़िर ये कौन चिल्ला रहा है?

दीपक- आह साला बड़ी मुश्किल से घुसा है … दीपाली ऐसे ही मुँह बन्द रख. अभी आधा गया है. एक झटका और मारता हूँ … पूरा एक साथ अन्दर चला जाएगा तो सारा दर्द एक ही बार में खत्म हो जाएगा।

दीपाली- आराम से दीपक, सील टूटने पर बहुत दर्द होता है. देखो इसके आँसू निकल आए हैं।

दीपक- होने दो दर्द.. साली रंडी को निकालने दे आँसू.. बहन के नाम को गंदा कर दिया कुत्ती ने.. हरामजादी को चुदने बड़ा शौक था ना ... अब ले! आह…

दीपक को शायद प्रिया को चोदना अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए उसको जरा भी रहम नहीं आ रहा था। उसने तो लौड़े को पूरा जड़ तक घुसा दिया और अब दनादन झटके मारने लगा था। प्रिया जल बिन मछली की तरह तड़फ रही थी.. दीपाली ने अब भी उसका मुँह दबा रखा था।

दीपाली- ओफ.. क्या झटके मार रहे हो यार ... मेरी भी चूत में खुजली होने लगी ... अब आराम तो दो बेचारी को ... देखो कैसे आँखें पीली पड़ गई हैं।
 
कहानी में साथ बने रहने के लिए सभी पाठकों को बहुत बहुत थैंक्स।कहानी पढ़ने के बाद अपनी राय अवश्य लिखे की कहानी आपको कैसी लगी।अगला अपडेट जल्दी ही।
 
दीपक- उह्ह उह्ह आह्ह… तू कहती है तो उहह उहह.. ले आराम देता हूँ साली को आह्ह… अब इसका मुँह खोल.. मैं भी देखूँ क्या बोलती है ये?

दीपक रूक गया और प्रिया के ऊपर ही पड़ा रहा। उसका लौड़ा जड़ तक चूत में घुसा हुआ था। दीपाली ने जब मुँह से हाथ हटाया, प्रिया ने एक लंबी सांस ली जैसे मरते-मरते बची हो ... उसका चेहरा आँसुओं से भरा हुआ था और हलक सूख गया था। वो बड़ी मुश्किल से बोल पाई।

प्रिया- आह ब्ब..भाई … आपने ये अच्छा नहीं किया. आह्ह… क्या आह्ह… ऐसे बेदर्दी से कोई अपनी बहन को … चोदता है आह्ह…

दीपक- सही बोल रही है तू. कोई भाई अपनी बहन को बेदर्दी तो क्या प्यार से भी नहीं चोदता. ये तो तेरे जैसी रंडियाँ होती हैं जो अपने भाई को फँसा कर उससे चुदती हैं, समझी?

प्रिया- आह्ह… उ.. माँ आह्ह… मर गई.. मुझे बहुत दर्द हो रहा है ... निकाल लो.. आह्ह… नहीं चुदना आपसे आह्ह… अयेए.. मैं तो समझी आप लंड हिलाते घूम रहे हो.. आह्ह… कुँवारी चूत मिलेगी तो खुश होगे.. आह्ह… मगर आप तो मुझे गाली दे रहे हो आह्ह… इससे अच्छा तो किसी और से अपनी सील तुड़वाती.. आह्ह… सारी जिंदगी मेरा अहसान मानता आह्ह…

दीपक- चुप कर, साली छिनाल.. किसी और की माँ की चूत.. किसमें हिम्मत थी जो तुझे चोदता.. साले का काट देता मैं.

दीपाली- ओ हैलो.. क्या बकवास लगा रखी है.. अब ज़्यादा शरीफ मत बनो.. दूसरों की बहनों के बारे में गंदे ख्याल दिल में रखोगे तो ऐसा ही होगा, समझे? ... अब चुपचाप चोदते रहो ... बेचारी प्रिया कैसे रो रही है।

(दोस्तों सॉरी, बीच में आने के लिए.. मगर आपसे ये बात कहना जरूरी था कि देखो किस तरह दीपक ने दीपाली पर गंदी नज़र डाली और आज उसको अपनी बहन के साथ चुदाई करनी पड़ रही है। तो सोचो हर लड़की किसी ना किसी की बहन या बेटी होती है, अगर उनकी मर्ज़ी ना हो तो प्लीज़ उनको परेशान मत किया करो.. ओके थैंक्स अब कहानी का मजा लीजिए।)

प्रिया- आह्ह… आह्ह… दीपाली तुम किसको समझा रही हो.. ये आह्ह… नहीं समझेगा।

दीपक- चुप.. अब बकवास बन्द करो.. मुझे चोदने दो.. आह्ह… उहह ले आह्ह… साली रण्डी आह्ह… ले चुद.. आह्ह… उहह…

प्रिया- आईईइ आईईईई ओह.. भाई आह्ह… मर गई.. आह उफ़फ्फ़ कककक आह आराम से आह उउउ उूउउ बहुत दर्द हो रहा है आह आह…

दीपक रफ़्तार से चोदता रहा.. पाँच मिनट बाद प्रिया थोड़ी सी उतेज़ित हुई और दर्द के साथ उसकी उत्तेजना मिक्स हो गई.. वो झड़ गई मगर उसको ज़रा भी मज़ा नहीं आया.. दीपक अब भी लगातर चोदे जा रहा था और आख़िरकार प्रिया की टाइट चूत ने उसके लौड़े को झड़ने के लिए मजबूर कर दिया.. दीपक ने पूरा पानी चूत की गहराइयों में भर दिया और प्रिया के ऊपर ढेर हो गया।

प्रिया- आह्ह… आह.. अब हटो भी.. आह्ह… मेरी चूत को भोसड़ी बना दिया आह्ह… अब क्या इरादा है आह्ह… उठो भी… दीपक ने लौड़ा चूत से निकाला तो प्रिया कराह उठी। दीपक एक तरफ लेट गया। दीपाली ने जल्दी से प्रिया की चूत को देखा… कोई खून नहीं था वहाँ ... हाँ, दीपक के लौड़े पर जरा लाल सा कुछ लगा था।

दीपाली- अरे ये क्या.. तेरी सील टूटी पर खून तो आया ही नहीं।

प्रिया- आह्ह… उफ़फ्फ़.. पता नहीं शायद मैंने ऊँगली से ही अपनी सील तोड़ ली होगी.. एक दिन खून आया था मुझे.. आह्ह… मगर दर्द बहुत हो रहा है।

दीपाली- यार पहली बार मुझे भी बहुत हुआ था.. मगर अब चुदने में बड़ा मज़ा आता है।

दीपक- दीपाली ... मेरी जान, बता ना किसने तेरी चूत का मुहूरत किया है.. आख़िर ऐसा कौन आ गया जो मुझसे भी बड़ा हरामी निकला।

दीपाली- तुम्हें उससे क्या लेना-देना, तुमको चूत मिल गई ना. अब अपना मुँह बन्द रखो और जल्दी लौड़े को तैयार करो ... मुझे भी चुदना है.. कब से चूत तड़प रही है लंड के लिए…

दीपक- अरे मेरी जानेमन, तेरे लिए ही तो मैंने ये खेल खेला है.. अपनी बहन तक को चोद दिया.. तू क्यों तड़प रही है.. आ जा, तू ही चूस कर खड़ा कर दे इसे।

दीपाली- नहीं पहले इसे धो कर आओ.. इस पर खून लगा है।

दीपक जल्दी से बाथरूम गया और लौड़े को धो कर वापस आ गया। प्रिया अब वैसे ही पड़ी दर्द के मारे सिसक रही थी.. दरअसल दर्द से ज़्यादा वो दीपक की बातों से दुखी थी।
 
दीपाली- आ जा मेरे राजा.. जल्दी से लौड़ा मेरे मुँह में दे दे.. अब देर मत कर.. मुझे वापस घर भी जाना है और प्रिया को भी एक बार और चोदना है तुझे.. तभी इसका दर्द कम होगा.. देख कैसे चुपचाप पड़ी है।

प्रिया- नहीं दीपाली, मुझे अब इससे नहीं चुदना.. मैंने बहुत बड़ी ग़लती की जो इस बेदर्द से प्यार कर बैठी।

दीपक- ओह्ह.. मेरी बहना इतनी उदास क्यों हो गई तू.. सॉरी यार मैंने बस ऐसे ही गुस्से में कह दिया था.. सॉरी कान पकड़ता हूँ यार…

प्रिया- नहीं भाई आपको कान पकड़ने की कोई जरूरत नहीं.. ग़लती मेरी है जो आपके बारे में ऐसा सोच बैठी।

दीपाली- अरे यार, बात बाद में कर लेना.. पहले मुझे तो चोद ले।

दीपक- नहीं दीपाली, तुझे देर हो रही है ना.. तू जा आज मैं अपनी प्यारी बहन को दिल खोल कर चोदूँगा और तुझे मैं बड़े आराम से फ़ुर्सत से चोदना चाहता हूँ.. जो आज हो नहीं सकता ... कल रविवार है, कल आराम से तेरी चूत को बजांऊगा.. आज मैं अपनी बहन को खुश कर दूँ.. मैंने बड़ी ज़्यादती की है इसके साथ.. अब इसको भरपूर प्यार देना चाहता हूँ।
 
दीपाली- ओह रियली? मैं बहुत खुश हूँ कि तुमने प्रिया के बारे में कुछ तो सोचा.. मगर अफ़सोस भी है कि तुम रात-दिन मुझे चोदने के लिए बेताब थे और अब ना कह रहे हो.. ये बात समझ में नहीं आई…

दीपक- मैंने आज तक चूत का सपना देखा था.. आज जब मिली भी तो मेरी बहन की मिली और मैंने उसको क्या से क्या बोल दिया.. अब जब पानी निकला है तो दिमाग़ सुकून में आया.. अब सोचता हूँ.. तुमको तो बाद में भी चोद लूँगा.. अभी प्रिया को इसके हिस्से की ख़ुशी दे दूँ।

दीपाली- बहुत अच्छी सोच है.. ओके.. अब मैं जाती हूँ लेकिन प्लीज़ अपने दोस्तों को अभी मत बताना कि आज क्या हुआ.. इसमें प्रिया की भी बदनामी होगी।

दीपक- नहीं.. मैं किसी को नहीं बताऊँगा.. प्लीज़ तुम भी इस राज़ को राज़ ही रखना वरना मेरा क्या है.. प्रिया का जीना मुश्किल हो जाएगा।

दीपाली- मैं किसी को नहीं बताऊँगी, ओके.. एंजाय करो और हाँ याद से घर लॉक कर देना और आधी रात के करीब इसका मलिक वापस आ जाएगा तो अच्छे से सब ठीक करके जाना.. चाबी प्रिया को दे देना.. मैं इससे कल ले लूँगी।

प्रिया- ओके दीपाली.. थैंक्स तुमने आज जो किया उसको मैं जिन्दगी में नहीं भूल पाऊँगी और भाई, अब आपसे भी कोई शिकायत नहीं.. आपने मुस्कुरा कर मेरी तरफ़ देखा ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।

दीपाली अपने कपड़े पहन कर चली जाती है। हाँ जाने के पहले वो दीपक के लौड़े को चूम कर जाती है। दीपक बड़ा खुश हो जाता है। उसके जाने के बाद दीपक बिस्तर पर प्रिया के पास लेट जाता है और उसके चूचे सहलाने लगता है।

दीपक- प्रिया, वाकयी तू लाजवाब है.. तेरे चूचे बहुत मस्त हैं सच.. बता तूने उस रात और क्या-क्या किया था.. मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा तूने मेरा लौड़ा चूस कर पानी निकाला था।

प्रिया- हाँ भाई सब सच है, मैं तो नंगी हो कर आपके पास सोने वाली थी.. मगर माँ उठ गई थीं और मुझे वहाँ से भागना पड़ा।

दीपक- अच्छा ये बात है.. उस दिन ना सही.. आज तो नंगी मेरे पास है ना…

प्रिया- हाँ भाई.. आप सही कह रहे हो।

दीपक- अच्छा ये तो बता ये दीपाली किस के पास चुदने जाती है? कौन है वो जिसने इसको पहली बार चोदा था?

प्रिया- व्व..वो भाई मुझे उसका नाम नहीं पता ब..बस इतना दीपाली ने बताया कि उसका फ्रेंड है।

दीपक- देख सच-सच बता.. मैं किसी को नहीं बताऊँगा.. मुझे पता है तू जानती है कि वो कौन है?

इस बार दीपक की आँखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था.. मगर प्रिया भी पक्की खिलाड़ी निकली उसने बड़ी सफ़ाई से उसको झूठ बोल दिया कि दीपाली ने खुद उसे बताया था कि कोई लड़का है.. नाम नहीं बताया.. उसने कसम खाली तो दीपक को यकीन हो गया।

दीपक- चल होगा कोई भी.. हम क्यों अपना वक्त खराब करें.. ला तेरी चूत दिखा.. मैंने बहुत ठोका ना.. सूज गई होगी.. अब जीभ से चाट कर आराम देता हूँ.. तू भी मेरे लौड़े को चूस कर मज़ा ले।

दोनों 69 के आसन में आ गए और एक-दूसरे को मज़ा देने लगे।
 
(दोस्तों, इनको थोड़ा चटम-चटाई करने दो… तब तक हम दीपाली के पास चलते हैं। वो कहाँ गई आख़िर इस कहानी की मेन किरदार वही है.. उसके बारे में जानना ज़रूरी है।)

दीपाली वहाँ से निकल कर अपने घर की तरफ जाने लगी। रास्ते में एक भिखारी भीख माँग रहा था.. उसकी उम्र कोई लगभग 35-40 साल के आस-पास होगी। वो हट्टा-कट्टा 6 फुट का था.. मगर वो अँधा था..

भिखारी- कोई इस अंधे गरीब की मदद कर दो है.. कोई देने वाला अंधे को देगा.. दुआ मिलेगी।

वो बस ऐसे ही बोलता हुआ आगे जा रहा था.. उसने एक फटा पुराना कच्छा और बनियान पहन रखी थी और उस फटे कच्छे में से उसके लंड का सुपाड़ा बाहर निकल रहा था।

दीपाली की नज़र जब उस पर गई उसकी आँखें फट गईं क्योंकि वो सुपाड़ा बहुत बड़ा था ... हालांकि उस भिखारी का लौड़ा सोया हुआ था मगर कच्छे में ऐसे लटका हुआ था जैसे कोई हथियार लटका हो।

दीपाली कुछ देर तक उसको देखती रही वो कुछ सोचने लगी और वो बन्दा माँगते-माँगते आगे बढ़ गया। दीपाली भी अपने घर चली गई। अपने कमरे में जाकर उसने कपड़े बदले और एक नाईटी पहन ली तभी उसकी माँ ने उसे आवाज़ दी।
 
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