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नीरा इन दिनों बहुत ही खुश और उत्साहित थी। उसने पहले जैसे ही कालेज में अपनी कामुक हरकतों से लड़कों को तड़पाना जारी रखा और रोहित से जब भी मौका मिलता खूब चुदवाती। नीरा को एक दिन अपने पति के साथ एक फार्म-हाऊस पे पार्टी में जाना पड़ा। नीरा का मूड तो नहीं था पर पति और पति के बिज़नेस-रिलेशंस की वजह से जाने को तैयार हो गयी।
यह पार्टी भी बाकी पाटिर्यों जैसी ही थी। वही पीना-पिलाना और लोगों का छोटे-छोटे झुँड बनाकर चर्चायें करना। नीरा ने उस दिन बहुत ही सेक्सी पार्टी गाऊन पहना हुआ था जिसमें उसके कँधे बिल्कुल नंगे थे। नीरा पहले तो अलग-थलग खड़ी ड्रिंक पीती रही पर जल्दी ही लोगों में घुल-मिल गयी और उसे थोड़ा अच्छा भी लगने लगा। अपनी आदत से मजबूर नीरा का अपने ड्रिंक्स पे कोई नियंत्रण नहीं था और वोह काफी नशे में थी। ऐसी पार्टियों में लोगों का नशे में धुत्त होना अनुचित नहीं समझा जाता था। नीरा अपना चौथा पैग पकड़े दीवार से टिक कर खड़ी हुई थी और चार-पाँच औरतों के साथ उनकी गपशप सुन रही थी कि तभी उसे विक्रम दिखायी दिया। वोह कमरे के दूसरी तरफ एक दम्पति से बातें कर रहा था।
जब तक विक्रम अकेला नहीं हुआ तब तक नशे में होने के बावजूद नीरा उसपर बाज़ की तरह अपनी नज़र रखे रही क्योंकी पार्टी में भीड़ बहुत थी और नीरा उसे खोना नहीं चाहती थी। विक्रम को अकेला पाकर नीरा नशे के कारण अपने हाई हील सैंडलों में लगभग लड़खड़ाती हुई उसके पास गयी और पीछे से विक्रम के कँधे पे थपथपा के बोली- “हाय… पहचाना मुझे?”
विक्रम ने घूम के अपने पीछे खड़ी खूबसूरत औरत का आकलन किया जिसकी मदहोश आँखों से साफ ज़ाहिर हो रहा था कि वोह नशे में थी। नीरा को भी विक्रम के चेहरे की भावों से लगा कि वोह उसे याद करने की कोशिश कर रहा है और फिर विक्रम की आँखें एकदम बड़ी हो गयीं।
“ओह, आप हैं?” विक्रम किसी थप्पड़ या वैसी कुछ आशा करता हुआ बोला। नीरा के चेहरे से पता नहीं लग रहा था कि वोह गुस्से में थी या अच्छे मूड में थी।
“हाँ मैं… क्या कुछ देर के लिए बाहर बगीचे में आओगे? यहाँ बहुत भीड़ है…” नीरा कह के चल पड़ी।
विक्रम बिल्कुल सन्न था पर उसे लगा कि अगर यह औरत उसकी पिछली वारदात को लेकर उसे फटकारना चाहती है तो बाहर बगीचा काफी उप्युक्त था क्योंकी एक तो बाहर अँधेरा था और दूसरे बाहर कोई था भी नहीं। विक्रम ने घूर के नीरा की हाई हील सैंडल के कारण मटकती गाण्ड देखी तो वो थोड़ा घबड़ता हुआ नीरा के पीछे चल पड़ा। बाहर आकर उसे अचानक नीरा कहीं नहीं दिखी पर फिर उसने नीरा को दूर खड़े अपनी तरफ हाथ हिलाते हुए देखा। वोह लोगों की नज़रों से दूर हरे-भरे लान में नीरा के पास जाकर खड़ा हो गया।
“देखिये, मैं उस दिन के लिए आपसे माफी…” विक्रम ने बोलना शुरू किया पर उसे धक्का सा लगा जब नीरा ने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में पकड़कर अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिये। नीरा की इस अक्समात हरकत से विक्रम कुछ क्षणों के लिए जम सा गया। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है पर जब नीरा ने अपनी जीभ उसके होंठों की बीच में गड़ायी तो विक्रम ने अपने होंठ खोलकर नीरा की जीभ अपने मुँह में घुसने दी और फिर दोनों एक दूसरे के मुँह में किस करने लगे।
विक्रम को समझ में नहीं आ रहा था कि अपने हाथों का क्या करे। वोह नीरा को अपनी बाँहों में पकड़ना चाहता था पर उसे डर था कि कहीं पिछली बार की तरह भाग ना जाए। उसने अपने हाथ अपनी साईड पे ही रखे जब तक कि नीरा ने खुद उसकी बाँहों को खींचकर अपनी गाण्ड के इर्द-गिर्द नहीं लपेटा। विक्रम ने नीरा के गाऊन के ऊपर से ही उसकी नर्म-मुलायम गाण्ड को दबाया। वोह अभी भी अनिश्चित सा था पर फिर नीरा के हाथों ने भी बढ़कर विक्रम की गाण्ड दबोच ली।
उन दोनों के होंठ अभी भी एक दूसरे से चिपके हुए थे और दोनों इतने जोश से चूम रहे थे कि उन दोनों की ठोड़ियां उनके थूक के मिश्रण से भीग गयी थीं। नीरा बहुत उत्तेजित थी और उसकी अँगुलियां पागलों की तरह विक्रम की बेल्ट टटोल रही थीं। विक्रम की अँगुलियां भी नीरा का गाऊन पीछे से धीरे-धीरे अपने मुट्ठियों में भरते हुए ऊपर खींच रही थीं। जब नीरा के गाऊन का निचला किनारा उसके हाथ में आ गया तो विक्रम ने ड्रेस को एक हाथ में ऊपर पकड़ लिया और दूसरा हाथ नीरा की गाण्ड पे रख दिया। नीरा चूमते हुए विक्रम के मुँह में ही सिसकने लगी।
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नीरा इन दिनों बहुत ही खुश और उत्साहित थी। उसने पहले जैसे ही कालेज में अपनी कामुक हरकतों से लड़कों को तड़पाना जारी रखा और रोहित से जब भी मौका मिलता खूब चुदवाती। नीरा को एक दिन अपने पति के साथ एक फार्म-हाऊस पे पार्टी में जाना पड़ा। नीरा का मूड तो नहीं था पर पति और पति के बिज़नेस-रिलेशंस की वजह से जाने को तैयार हो गयी।
यह पार्टी भी बाकी पाटिर्यों जैसी ही थी। वही पीना-पिलाना और लोगों का छोटे-छोटे झुँड बनाकर चर्चायें करना। नीरा ने उस दिन बहुत ही सेक्सी पार्टी गाऊन पहना हुआ था जिसमें उसके कँधे बिल्कुल नंगे थे। नीरा पहले तो अलग-थलग खड़ी ड्रिंक पीती रही पर जल्दी ही लोगों में घुल-मिल गयी और उसे थोड़ा अच्छा भी लगने लगा। अपनी आदत से मजबूर नीरा का अपने ड्रिंक्स पे कोई नियंत्रण नहीं था और वोह काफी नशे में थी। ऐसी पार्टियों में लोगों का नशे में धुत्त होना अनुचित नहीं समझा जाता था। नीरा अपना चौथा पैग पकड़े दीवार से टिक कर खड़ी हुई थी और चार-पाँच औरतों के साथ उनकी गपशप सुन रही थी कि तभी उसे विक्रम दिखायी दिया। वोह कमरे के दूसरी तरफ एक दम्पति से बातें कर रहा था।
जब तक विक्रम अकेला नहीं हुआ तब तक नशे में होने के बावजूद नीरा उसपर बाज़ की तरह अपनी नज़र रखे रही क्योंकी पार्टी में भीड़ बहुत थी और नीरा उसे खोना नहीं चाहती थी। विक्रम को अकेला पाकर नीरा नशे के कारण अपने हाई हील सैंडलों में लगभग लड़खड़ाती हुई उसके पास गयी और पीछे से विक्रम के कँधे पे थपथपा के बोली- “हाय… पहचाना मुझे?”
विक्रम ने घूम के अपने पीछे खड़ी खूबसूरत औरत का आकलन किया जिसकी मदहोश आँखों से साफ ज़ाहिर हो रहा था कि वोह नशे में थी। नीरा को भी विक्रम के चेहरे की भावों से लगा कि वोह उसे याद करने की कोशिश कर रहा है और फिर विक्रम की आँखें एकदम बड़ी हो गयीं।
“ओह, आप हैं?” विक्रम किसी थप्पड़ या वैसी कुछ आशा करता हुआ बोला। नीरा के चेहरे से पता नहीं लग रहा था कि वोह गुस्से में थी या अच्छे मूड में थी।
“हाँ मैं… क्या कुछ देर के लिए बाहर बगीचे में आओगे? यहाँ बहुत भीड़ है…” नीरा कह के चल पड़ी।
विक्रम बिल्कुल सन्न था पर उसे लगा कि अगर यह औरत उसकी पिछली वारदात को लेकर उसे फटकारना चाहती है तो बाहर बगीचा काफी उप्युक्त था क्योंकी एक तो बाहर अँधेरा था और दूसरे बाहर कोई था भी नहीं। विक्रम ने घूर के नीरा की हाई हील सैंडल के कारण मटकती गाण्ड देखी तो वो थोड़ा घबड़ता हुआ नीरा के पीछे चल पड़ा। बाहर आकर उसे अचानक नीरा कहीं नहीं दिखी पर फिर उसने नीरा को दूर खड़े अपनी तरफ हाथ हिलाते हुए देखा। वोह लोगों की नज़रों से दूर हरे-भरे लान में नीरा के पास जाकर खड़ा हो गया।
“देखिये, मैं उस दिन के लिए आपसे माफी…” विक्रम ने बोलना शुरू किया पर उसे धक्का सा लगा जब नीरा ने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में पकड़कर अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिये। नीरा की इस अक्समात हरकत से विक्रम कुछ क्षणों के लिए जम सा गया। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है पर जब नीरा ने अपनी जीभ उसके होंठों की बीच में गड़ायी तो विक्रम ने अपने होंठ खोलकर नीरा की जीभ अपने मुँह में घुसने दी और फिर दोनों एक दूसरे के मुँह में किस करने लगे।
विक्रम को समझ में नहीं आ रहा था कि अपने हाथों का क्या करे। वोह नीरा को अपनी बाँहों में पकड़ना चाहता था पर उसे डर था कि कहीं पिछली बार की तरह भाग ना जाए। उसने अपने हाथ अपनी साईड पे ही रखे जब तक कि नीरा ने खुद उसकी बाँहों को खींचकर अपनी गाण्ड के इर्द-गिर्द नहीं लपेटा। विक्रम ने नीरा के गाऊन के ऊपर से ही उसकी नर्म-मुलायम गाण्ड को दबाया। वोह अभी भी अनिश्चित सा था पर फिर नीरा के हाथों ने भी बढ़कर विक्रम की गाण्ड दबोच ली।
उन दोनों के होंठ अभी भी एक दूसरे से चिपके हुए थे और दोनों इतने जोश से चूम रहे थे कि उन दोनों की ठोड़ियां उनके थूक के मिश्रण से भीग गयी थीं। नीरा बहुत उत्तेजित थी और उसकी अँगुलियां पागलों की तरह विक्रम की बेल्ट टटोल रही थीं। विक्रम की अँगुलियां भी नीरा का गाऊन पीछे से धीरे-धीरे अपने मुट्ठियों में भरते हुए ऊपर खींच रही थीं। जब नीरा के गाऊन का निचला किनारा उसके हाथ में आ गया तो विक्रम ने ड्रेस को एक हाथ में ऊपर पकड़ लिया और दूसरा हाथ नीरा की गाण्ड पे रख दिया। नीरा चूमते हुए विक्रम के मुँह में ही सिसकने लगी।
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