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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete

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नीरा इन दिनों बहुत ही खुश और उत्साहित थी। उसने पहले जैसे ही कालेज में अपनी कामुक हरकतों से लड़कों को तड़पाना जारी रखा और रोहित से जब भी मौका मिलता खूब चुदवाती। नीरा को एक दिन अपने पति के साथ एक फार्म-हाऊस पे पार्टी में जाना पड़ा। नीरा का मूड तो नहीं था पर पति और पति के बिज़नेस-रिलेशंस की वजह से जाने को तैयार हो गयी।

यह पार्टी भी बाकी पाटिर्यों जैसी ही थी। वही पीना-पिलाना और लोगों का छोटे-छोटे झुँड बनाकर चर्चायें करना। नीरा ने उस दिन बहुत ही सेक्सी पार्टी गाऊन पहना हुआ था जिसमें उसके कँधे बिल्कुल नंगे थे। नीरा पहले तो अलग-थलग खड़ी ड्रिंक पीती रही पर जल्दी ही लोगों में घुल-मिल गयी और उसे थोड़ा अच्छा भी लगने लगा। अपनी आदत से मजबूर नीरा का अपने ड्रिंक्स पे कोई नियंत्रण नहीं था और वोह काफी नशे में थी। ऐसी पार्टियों में लोगों का नशे में धुत्त होना अनुचित नहीं समझा जाता था। नीरा अपना चौथा पैग पकड़े दीवार से टिक कर खड़ी हुई थी और चार-पाँच औरतों के साथ उनकी गपशप सुन रही थी कि तभी उसे विक्रम दिखायी दिया। वोह कमरे के दूसरी तरफ एक दम्पति से बातें कर रहा था।

जब तक विक्रम अकेला नहीं हुआ तब तक नशे में होने के बावजूद नीरा उसपर बाज़ की तरह अपनी नज़र रखे रही क्योंकी पार्टी में भीड़ बहुत थी और नीरा उसे खोना नहीं चाहती थी। विक्रम को अकेला पाकर नीरा नशे के कारण अपने हाई हील सैंडलों में लगभग लड़खड़ाती हुई उसके पास गयी और पीछे से विक्रम के कँधे पे थपथपा के बोली- “हाय… पहचाना मुझे?”

विक्रम ने घूम के अपने पीछे खड़ी खूबसूरत औरत का आकलन किया जिसकी मदहोश आँखों से साफ ज़ाहिर हो रहा था कि वोह नशे में थी। नीरा को भी विक्रम के चेहरे की भावों से लगा कि वोह उसे याद करने की कोशिश कर रहा है और फिर विक्रम की आँखें एकदम बड़ी हो गयीं।

“ओह, आप हैं?” विक्रम किसी थप्पड़ या वैसी कुछ आशा करता हुआ बोला। नीरा के चेहरे से पता नहीं लग रहा था कि वोह गुस्से में थी या अच्छे मूड में थी।

“हाँ मैं… क्या कुछ देर के लिए बाहर बगीचे में आओगे? यहाँ बहुत भीड़ है…” नीरा कह के चल पड़ी।

विक्रम बिल्कुल सन्न था पर उसे लगा कि अगर यह औरत उसकी पिछली वारदात को लेकर उसे फटकारना चाहती है तो बाहर बगीचा काफी उप्युक्त था क्योंकी एक तो बाहर अँधेरा था और दूसरे बाहर कोई था भी नहीं। विक्रम ने घूर के नीरा की हाई हील सैंडल के कारण मटकती गाण्ड देखी तो वो थोड़ा घबड़ता हुआ नीरा के पीछे चल पड़ा। बाहर आकर उसे अचानक नीरा कहीं नहीं दिखी पर फिर उसने नीरा को दूर खड़े अपनी तरफ हाथ हिलाते हुए देखा। वोह लोगों की नज़रों से दूर हरे-भरे लान में नीरा के पास जाकर खड़ा हो गया।

“देखिये, मैं उस दिन के लिए आपसे माफी…” विक्रम ने बोलना शुरू किया पर उसे धक्का सा लगा जब नीरा ने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में पकड़कर अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिये। नीरा की इस अक्समात हरकत से विक्रम कुछ क्षणों के लिए जम सा गया। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है पर जब नीरा ने अपनी जीभ उसके होंठों की बीच में गड़ायी तो विक्रम ने अपने होंठ खोलकर नीरा की जीभ अपने मुँह में घुसने दी और फिर दोनों एक दूसरे के मुँह में किस करने लगे।

विक्रम को समझ में नहीं आ रहा था कि अपने हाथों का क्या करे। वोह नीरा को अपनी बाँहों में पकड़ना चाहता था पर उसे डर था कि कहीं पिछली बार की तरह भाग ना जाए। उसने अपने हाथ अपनी साईड पे ही रखे जब तक कि नीरा ने खुद उसकी बाँहों को खींचकर अपनी गाण्ड के इर्द-गिर्द नहीं लपेटा। विक्रम ने नीरा के गाऊन के ऊपर से ही उसकी नर्म-मुलायम गाण्ड को दबाया। वोह अभी भी अनिश्चित सा था पर फिर नीरा के हाथों ने भी बढ़कर विक्रम की गाण्ड दबोच ली।

उन दोनों के होंठ अभी भी एक दूसरे से चिपके हुए थे और दोनों इतने जोश से चूम रहे थे कि उन दोनों की ठोड़ियां उनके थूक के मिश्रण से भीग गयी थीं। नीरा बहुत उत्तेजित थी और उसकी अँगुलियां पागलों की तरह विक्रम की बेल्ट टटोल रही थीं। विक्रम की अँगुलियां भी नीरा का गाऊन पीछे से धीरे-धीरे अपने मुट्ठियों में भरते हुए ऊपर खींच रही थीं। जब नीरा के गाऊन का निचला किनारा उसके हाथ में आ गया तो विक्रम ने ड्रेस को एक हाथ में ऊपर पकड़ लिया और दूसरा हाथ नीरा की गाण्ड पे रख दिया। नीरा चूमते हुए विक्रम के मुँह में ही सिसकने लगी।


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नीरा ने विक्रम की पैंट खोलकर नीची गिरने के लिए छोड़ दी। पैंट जब विक्रम की माँसल जाँघों में फँसने लगी तो विक्रम ने अपनी टाँगें झटका कर पैंट अपने पैरों तक गिरा दी। नीरा ने विक्रम के अंडरवीयर में हाथ डालकर उसका लण्ड पकड़ लिया और विक्रम भी नीरा की पैंटी में हाथ डालकर उसके नंगे चूतड़ मसलने लगा। तब कहीं जाकर उन्होंने चूमना बँद किया।

“मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ…” विक्रम हाँफता हुआ बोला।

“इसमें समझने का क्या है? पिछली बार मैं बेवकूफ थी जो ऐसा मौका छोड़कर भाग गयी और आज मैं अपनी भूल सुधारना चाहती हूँ…” नीरा अपने घुटनों के बल नीचे बैठ गयी और विक्रम का अंडरवीयर झटक के उसकी जाँघों तक खींचकर उसका लण्ड अपने मुँह में भर लिया।

विक्रम अपने मेज़बान के लान में अँधेरे में खड़ा था और एक शादी-शुदा औरत उसका लण्ड चूस रही थी। विक्रम को दूर से लोगों की आवाजें सुनायी दे रही थीं पर उसका ध्यान अपना लौड़ा चूसती नीरा के मुँह से निकल रही सुड़कने की आवाजों पर था। नीरा ने अपने मुँह से लण्ड निकाला और इस अजनबी विक्रम को जिसे उसने पिछली बार दुत्कार दिया था, उसकी आँखों में ऊपर देखती हुई अपनी मुट्ठी उसके भीगे हुए लण्ड पे ऊपर-नीचे चलाने लगी। विक्रम विश्मित सा नीरा को ताक रहा था जो अपने चेहरे पे लण्ड रगड़ते और लण्ड को नीचे से छोर तक चाट रही थी। जब नीरा को अपनी हथेली में लण्ड की चिकनाहट कम होती महसूस होती तो वोह फिर अपने मुँह में डालकर चूसने लगती।

विक्रम के तने हुए सख्त लण्ड को रात की ठंडी हवा में धड़कता हुआ छोड़कर नीरा अचानक बोली- “अब मैं तुमसे चुदवाना चाहती हूँ। अब चोदो मुझे अपने लौड़े से…”

विक्रम झुकते हुए उसे धक्का देकर वहीं लिटाने वाला था.

पर नीरा ने उसे रोक दिया- “नहीं… मुझे अपनी ड्रेस पे घास के धब्बे नहीं लगवाने…”

विक्रम यह सुनकर हक्का-बक्का रह गया। उसका लण्ड इतना सख्त होकर फुफकार रहा था और इस औरत को अपने कपड़े गंदे हो जाने की फिक्र हो रही थी। नीरा ने खड़ी होकर विक्रम का हाथ पकड़ा और मकान के साईड की तरफ चलने लगी। विक्रम ने जल्दी से अपनी पैंट घुटनों के ऊपर खींची और अनिश्चित सा अपनी पैंट पकड़े हुए नीरा के पीछे चल पड़ा।

जब वोह दोनों उस मकान के पीछे नीरा की पसंद के स्थान पर पहुँचे तो नीरा ने अपनी ड्रेस ठीक से उतारकर तह करके एक तरफ रख दी। चाँदनी रात में अब नीरा सिर्फ पैंटी और हाई हील के सैंडल पहने किसी संगमरमर की मूर्ती लग रही थी। नीरा ने फिर अपनी पैंटी नीचे खींची और लात मारकर उसे घास पे फेंक दिया। विक्रम को फिर अपने नज़दीक खींचकर नीरा ने कूदते हुए अपने टागें विक्रम की कमर पे और अपनी बाँहें उसकी गर्दन में लपेट दीं।

विक्रम अचानक चौंक गया और यन्त्रवत उसने नीरा की गाण्ड पकड़कर ऊपर ऊठा लिया और दोनों को गिरने से बचाया। विक्रम की पैंट एक बार फिर उसके पैरों के इर्द-गिर्द गिर गयी और उसका तना हुआ लौड़ा लचक कर नीरा की चूत के खुले छेद से सट गया। विक्रम कोई मुर्ख तो था नहीं। उसने अपने हाथ से अपना लौड़ा पकड़कर नीरा की गीली चूत में ढकेल दिया।

“हाँ… उम्म्म…” विक्रम के लौड़े पे नीचे धँसती हुई नीरा सिसकी, मुझे यह पहले ही कर लेना चाहिए था।

“तो फिर किया क्यों नहीं?” नीरा को अपने लण्ड पे ऊपर-नीचे उछलने में मदद करते हुए विक्रम ने पूछा।

“मैं बहुत बड़ी बेवकूफ थी। शायद… पर अब मुझे अकल आ गयी है…” नीरा अपनी चूत को उसके लण्ड पर सिकोड़ कर हँसते हुए बोली।


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उसके बाद दोनों ने कोई बात नहीं की। नीरा ने उसके लण्ड को अपनी चूत में चोदने के लिए जितना हो सका उतनी जोर से विक्रम को कस के जकड़ लिया। इस तरह चुदवाना सुविधाजनक नहीं था पर यह तरीका कुछ अलग था और दूर से लोगों के हँसने और बोलने की आवाजें नीरा को और भी उत्तेजित कर रही थीं। विक्रम भी नीरा की गाण्ड पकड़े हुए जितना हो सकता था उतनी जोर से अपना लण्ड नीरा की चूत में ऊपर पेल रहा था। इसी तरह दोनों चुदाई करते रहे।

और फिर नीरा ने थरथराते हुए अपनी चूत का रस छोड़कर विक्रम के लण्ड को भिगो दिया। विक्रम नीरा के सम्भल जाने तक थोड़ा रूका और फिर नीरा की कमर पीछे दीवार पे टिकाकर जोर-जोर से अपना लण्ड नीरा की चूत में अंदर-बाहर ठेलने लगा और जल्दी ही अपने लण्ड का रस नीरा की चूत-रस में मिला दिया। दोनों हाँफते हुए एक दूसरे को जकड़े हुए उसी तरह पाँच मिनट तक रूके रहे।

जब विक्रम का लण्ड ढीला पड़ने लगा और उसकी उत्तेजना कम हो गयी तो नीरा भी उसे भारी प्रतीत होने लगी। नीरा की चूत में से अपना लण्ड बाहर निकालते हुए विक्रम ने नीरा को धीरे से नीचे उतारा। जब नीरा के पैर घास पर पड़े तो नीरा ने अपनी पकड़ छोड़ दी और दोनों अलग हो गये। नीरा ने अपनी पैंटी ढूँढ़कर पहनी और फिर अपना गाऊन सीधा करके पहना। अँधेरे में भी उसे कुछ सलवटें दिख रही थीं पर उसने कुछ फिक्र नहीं की। नीरा विक्रम के होंठों पे एक चुम्मा देकर जल्दी से घर के अंदर वापस चली गयी और अँधेरे में अकेला खड़ा विक्रम अचिम्भत सा उसे देखता रहा।

नीरा सीधी बाथरूम में गयी। फिर से अपनी पैंटी उतारकर उसने अपने गाऊन का अगला छोर ऊठाकर अपने ठोड़ी के नीचे दबाया और एक तौलिया गिला करके अपनी वीर्य से भरी चूत और टाँगें साफ कीं और फिर वोह तौलिया मैले कपड़ों की टोकरी में डाल दिया। नीरा को यह सोचकर हँसी आ गयी कि जब वोह कपड़े धुलेंगे तो किसी को इस बात का पता नहीं होगा की उसकी दूसरे मर्द के साथ चुदाई का सबूत भी धुल रहा है। जब नीरा को लगा कि अब वोह पार्टी में जाने योग्य दिख रही है तो वोह बाहर निकली।

नीरा के पती ने जब उसे देखा तो उसके पास आकर प्यार से बोला- “डार्लिंग… कहाँ थी तुम इतनी देर?”

नीरा ने उसके होंठों पे किस करते हुए बताया कि वोह और लोगों के साथ घुलमिल रही थी और उसके पति को बिल्कुल शक नहीं हुआ। अपनी पति को चूमते हुए नीरा को हँसी-जनक लगा क्योंकी नीरा के यही होंठ थोड़ी देर पहली किसी दूसरे मर्द के लण्ड पे लिपटे हुए थे। पर जो बात उसके पति को नहीं मालूम, वोह बात उसे चोट नहीं पहुँचा सकती। कम से कम नीरा ने तो खुद को यही दलील दी।

उसे अपने पति के अलवा औरों से चुदाई का आनन्द मिल रहा था और आगे भी गैर-मर्दों से चुदवाते रहने का नीरा का इरादा था। अगर उसका पति उसकी चूत की दहकती आग नहीं बुझा सकता तो दूसरे बुझायेंगे। और अब तक उसे अपना एक स्टूडेंट मिल गया था जो खुशी से नीरा की सब शारिरिक जरूरतें पूरी कर रहा था और अब उसे एक और अजनबी मिल गया था।


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***** दूसरा भाग समाप्त End of part-2

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***** ***** तीसरे और अंतिम भाग के लिये साथ में बने रहिये।

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सेक्सी स्कूल टीचर - तीसरा और अंतिम भाग

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नीरा ढिल्लो की ज़िंदगी में फिर से बहारें थीं। हालांकि उसके पति में कुछ भी सुधार नहीं हुआ था और चुदाई के प्रती वो पहले जैसा ही उदासीन था पर नीरा को अब दूसरों से चुदाई का मज़ा मिल रहा था। नीरा का स्टूडेंट, रोहित, उसकी चूत की आग बुझाने में पूरी तरह से समर्थ था और नीरा को चोदने के लिए हमेशा तत्पर रहता था। साथ ही, पार्टी में विक्रम से चुदवाने के बाद नीरा ने विक्रम का पता और फोन नंबर भी खोज निकाला था। पार्टी के बाद से दोनों अनेक बार मिले थे। पार्टी में मेजबान के घर के पिछवाड़े में चुदाई हालांकि उत्तेजक थी पर पकड़े जाने के डर के बिना खुलकर पूरी तरह नंगे होकर पूरे जोश में चुदवाने में कहीं ज्यादा मज़ा था। नीरा हफ्ते में कई-कई बार अपने पति को धोखा देकर रोहित और विक्रम से चुदवाने लगी और चुदाई कि आवृति को कम करने का नीरा का कोई इरादा नहीं था।

एक दिन नीरा और रोहित होटल के कमरे में जोरदार चुदाई के दौर के बाद बिल्कुल नंगे लेटे हुए थे। उन दोनों की चुदाई हमेशा वासना और हवस से भरपूर होती थी। उसमें प्रेम का कोई स्थान नहीं था। दोनों इस बात को समझते थे और इसी में खुश भी थे। नीरा ने उठकर व्हिस्की का पैग बनाते हुए पूछा- “रोहित, उस दिन क्लास में पीछे से मेरी गाण्ड पकड़कर दबोचने के लिए तूने इतनी हिम्मत कैसे जुटायी थी?”

“कब? जब हमने क्लास में पहली बार चुदाई की थी?” रोहित ने पूछा।

“नहीं।… उससे पहले… मेरा ख्याल है कि जिस दिन हमने पहली बार चुदाई की थी, उससे एक दिन पहले क्लास में से बाहर निकलते हुए तूने यह हरकत की थी…”

रोहित दिमाग पे जोर डालकर याद करने की कोशिश करने लगा- “मुझे तो याद नहीं पड़ता कि मैंने ऐसा कभी किया था…”

अब चौंकने की बारी नीरा की थी। नीरा को उस दिन की घटना याद आने लगी। जब सब क्षात्र क्लास से बाहर निकल रहे थे तो किसी ने नीरा की गाण्ड पे हाथ रखकर दबोच दिया था और उसी क्षण नीरा जब घूमकर पीछे पल्टी थी तो उसे बहुत सारे लड़के क्लास से बाहर निकलते हुए दिखायी पड़े थे। अगले दिन दोषी लड़के को पकड़ने के लिए नीरा ने बहुत निलर्ज्ज होकर अपना अंग-प्रदर्शन करते हुए बहुत ही कामुक हरकतें की थीं और उसके बाद रोहित ने नीरा का लगभग बलात्कार ही कर डाला था। नीरा यह सब याद करके मुश्कुराने लगी। रोहित उस दिन काफी जोश और जिद्द में था और फिर नीरा भी जल्दी ही स्वेछा से चुदाई में शामिल हो गयी थी। उस पहली चुदाई की घटना के बाद नीरा ने मान लिया था कि रोहित वोह लड़का था जिसने उसकी गाण्ड दबोची थी।

“रोहित… क्या और लड़के भी मेरे बारे में बातें करते हैं?” नीरा ने अपना ड्रिंक पीते हुए धीमे से पूछा।

“हाँ… बहुत बातें होती हैं। आखिर तुम सबसे गरम और सेक्सी टीचर हो कालेज में और फिर हमेशा क्लास में अपनी कामुक हरकतों से और कुछ ना कुछ दिखाकर लड़कों को तड़पाती रहती हो…”

“कुछ ना कुछ दिखाने से तेरा क्या मतलब है?”

“तुम जानती हो… टाँगें, चूचियां, पैंटी वगैरह…”

यह सुनकर नीरा के मुखड़े पर लाली आ गयी। यह सब हरकतें करना एक बात थी पर अपने स्टूडेंट से अपनी हरकतों का इतना स्पष्ट वर्णन सुनना एक अलग बात थी।

“तो क्या बातें करते हैं लड़के मेरे बारे में?” नीरा ने आगे पूछा।

“तुम्हारे नाम की, हर रोज पता है कितनी मुठ मारी जाती है। सब तुम्हें चोदने का सपना देखते हैं…”

“क्या वोह सच में ऐसा कहते हैं?”

“और नहीं तो क्या? बहुत से लड़के बोलते हैं…”

“तूने किसी को हमारे बारे में बताया तो नहीं ना?” नीरा थोड़ी सी चिंतित हो गयी।

“क्या बात करती हो मैडम… इतना तो मैं भी समझता हूँ…”

नीरा ने आगे झुक कर बड़े प्यार से रोहित के होंठ चूमे, “थैंक्स” नीरा बोली- “मुझे बता… क्या कोई विशेष लड़का है जो खासतौर से ऐसा प्रतीत होत हो कि… उम्म… कैसे कहूँ?”

“जो कि तुम्हारी चूत में अपना लण्ड पेलने को उतावला हो?” रोहित बोलकर धीरे से हँसा- “खैर, ऐसे लड़कों की कमी नहीं है जो तुम्हें चोदने के लिए उतावले हैं। हाँ… अभी-अभी मुझे ख्याल आया। नितेश चौहान ने एक बार तुम्हारी गाण्ड सहलाने की डींग हाँकी थी पर किसी ने भी उसकी बात पर विश्वास नहीं किया था। हो सकता है वही हो…”


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नीरा बड़ी उतावली होकर अगले दिन का इंतज़ार करने लगी, खासकरके उस क्लास का जिसमें नितेश चौहान था और वोह क्लास शाम की आखिरी क्लास थी। नीरा ने घूर के उस लड़के को सीट पे बैठे देखा जो कि नीरा की शंका से बिल्कुल बेखबर था। उस क्लास के दौरान नीरा की कामुक छेड़छाड़ नितेश की तरफ ही लक्षित थी। नितेश को उसकी कुर्सी पे कसमसाते देखकर नीरा को काफी खुशी हुई। नितेश को बार-बार अपनी किताब अपनी गोद में रखनी पड़ रही थी। नीरा को उसके खड़े लण्ड का उभार दिख रहा था और नीरा उसे अपनी कामुक हरकतों से और ज्यादा भड़का कर वहीं पैंट में स्खलित होते देखना चाहती थी पर नीरा ने खुद को रोके रखा। दिन की वोह आखिरी क्लास जब खतम हुई और सब उठकर बाहर जाने लगे।

तो नीरा ने नितेश को पुकारा- “नितेश चौहान, तुम ज़रा रुकोगे कुछ देर यहाँ?” नितेश घबड़ाकर चौंकते हुए धीरे से पलटा और डरते हुए अपनी टीचर की तरफ अपने कदम बढ़ाये।

नीरा अपने डेस्क पे बैठी उसे घूर रही थी। नितेश का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

“येस… मैडम?” नितेश ने डरते हुए कहा।

“बैठो ज़रा यहाँ…” नीरा सबसे आगे की पंक्ति की कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए बोली।

नितेश डेस्क के पीछे कुर्सी पे बैठ गया और सोचने लगा कि उसने ऐसा क्या किया है जो टीचर ने उसे क्लास के बाद रूकने को बोला। उसने अपने दिमाग पे बहुत जोर डाला पर पर उसे कोई कारण नहीं सूझा। वोह गहरी सोच में डूबा था जब उसे अपनी टीचर की आवाज सुनायी दी। उसने नज़रें ऊपर उठायीं तो देखा कि बाकी सब क्लास से बाहर जा चुके हैं।

“मैं तुमसे बात करना चाह रही थी…” नीरा ने बोलना शुरू किया- “कई दिन हो गये इस बात को पर मुझे मौका ही नहीं मिला। तुम्हें नहीं लगता कि किसी की अनुमति के बिना उसे छूना गलत है?”

नितेश के चेहरे के भावों से नीरा को विश्वास हो गया कि नितेश ही वोह लड़का है जिसने उसकी गाण्ड सहलायी थी। नितेश को बहुत सोचना पड़ा कि वोह क्या जवाब दे और फिर वोह बोला- “आप बिल्कुल ठीक कह रही हैं। ढिल्लो मैडम…”

“तो फिर तुमने ऐसा क्यों किया?”

“मैंने? मैं… उह… मैं ऐसा नहीं करूँगा। आपसे किसने कहा कि मैंने कभी ऐसा किया?”

“नितेश चौहान… तुम्हें क्या लगता है कि मैं अँधी हूँ? या मैं बेवकूफ हूँ? मैंने उस दिन तुम्हें क्लास के अंत में मुझे छूते हुए देख लिया था। तुम क्या सोचते हो कि तुम ऐसी हरकत करके बच जाओगे। और मुझे पता नहीं चलेगा? या मैंने नहीं देखा कि मेरे चूतड़ किसने सहलाये?”

उस युवा स्टूडेंट को अब पसीना आ गया। नितेश ने एक बार अपनी टीचर से नज़रें मिलायीं और फिर झुका लीं। उसे किसी कोने में घिरे हुए जानवर जैसा महसूस हो रहा था और उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वोह क्या करे। नितेश को लगा था कि किसी को पता नहीं चलेगा पर अब वोह पकड़ा गया था और उसे विश्वास था की अब उसे जरूर कालेज से निकाल दिया जायेगा। वोह सोच रहा था कि किसी दूसरे कालेज में भी उसे दाखिला मिलेगा या नहीं जब नीरा ने आगे बोलना शुरू किया।

“तो नितेश चौहान… तुम्हें अपनी सफाई में क्या कहना है?”

“ढिल्लो मैडम, आई एम सारी… मेरा वोह मतलब नहीं था…”

“तुम्हारा मतलब है कि तुम्हारे हाथ ने संयोग से चूतड़ पकड़ लिये?” नीरा ने व्यंग से ताना मारा।

“नहीं… मैंने आपको छूना चाहा था पर ऐसा सहज ही हो गया। मुझे नहीं पता कि मेरे दिमाग में अचानक ऐसा करने का ख्याल कैसे आ गया था। मुझे नहीं पता कि मैंने ऐसा क्यों किया। प्लीज़ मुझे माफ कर दीजिए। मैं वादा करता हूँ कि ऐसी गुस्ताखी फिर नहीं होगी…” बेचारा नितेश लगभग रोने वाला था। वो स्वभाव से थोड़ा दब्बू था।

“नहीं… यह काफी नहीं है…” नीरा कठोरता से बोली।

“पर मैडम… अब मैं क्या करूँ? मैं फिर से ऐसा ना करने का वादा करता हूँ…” नितेश की आँखों में आँसू आ गये।

“तुम कह रहे हो कि फिर ऐसा नहीं करोगे…” नीरा बोली।

“हाँ मैडम… मैं वादा करता हूँ कि फिर ऐसा नहीं होगा…”

“लेकिन यही तो मैं सुनना नहीं चाहती…” नितेश नज़रें ऊपर उठाकर अपनी टीचर की बात समझने की कोशिश करने लगा। वोह काफी परेशान और चकराया हुआ था।

“मैं ठीक से समझाती हूँ, नितेश…” नीरा ने बोलते हुए रुक कर नितेश का सफेद पड़ा हुआ चेहरा देखा। नीरा ने एक-एक शब्द पे जोर देती हुई आगे बोली- “मैं नहीं चाहती… कि तुम मुझसे ऐसा वादा… करो…”


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नितेश यह सुनकर और भी दुविधा में पड़ गया।

“तुम्हें क्या लगता है कि मुझे तुम्हारा छूना अच्छा नहीं लगा?”

“पर मैं समझा नहीं। मैडम…”

“आज क्लास में मेरी पैंटी देखना तुम्हें अच्छा लगा?”

“यह क्या कह रही हैं, मैडम। आप?”

“आज मेरी पैंटी कौन से रंग की है? अब यह ढोंग मत करना कि तुमने कुछ देखा नहीं…”

“हरी… मेरा ख्याल है कि वोह हरे रंग की है…” नितेश बोला। उसका सिर झुका हुआ था और वोह अपनी टीचर से नज़रें नहीं मिला पा रहा था।

“क्यों? मेरे ऊँचे कुरते में से मेरी टाँगों के बीच में झाँकना अच्छा लगा?”

“मैडम… वोह ऐसा था कि…”

“क्या? कैसा था? यही ना कि मेरी टांगें फैली हुई थीं? तुम्हें क्या लगता है कि मेरी टाँगें क्यों फैली हुई थी?”

“जरूर इत्तेफाक से ऐसा हुआ होगा…”

“नहीं… यह कोई इत्तेफाक नहीं था…”

यह सुनकर नितेश का झुका सिर एकदम ऊपर उठ गया। उसके चेहरे पर दुविधा और हैरानी थी और उसका मुँह खुला हुआ था।

“हाँ मैं सही कह रही हूँ। मैंने तुम्हारे लिए ही अपनी टाँगें फैलायी थीं। तुम्हें अपनी पारदर्शी महीन सलवार में से अपनी हरी पैंटी की झलक दिखाने के लिए…”

“लेकिन क्यों?” नितेश ने हैरानी से पूछा।

“तुम्हारे लण्ड को खड़ा करने के लिए। हाँ मैंने तुम्हारे लण्ड को सख्त होते देखा था। तो अब तुम समझ सकते हो कि मुझे तुम्हारा फिर से ना छूने का वादा क्यों स्वीकार नहीं है…”

नितेश ने अविश्वास से अपनी टीचर की तरफ देखा।

नितेश ने उसकी बात तो सुनी पर उसके कानों को विश्वास नहीं हुआ। ऐसा तो मुमकिन ही नहीं था। तब तक नहीं जब तक नीरा अपनी डेस्क से उतरकर नितेश की तरफ जाने लगी। नीरा ने अपनी एक टाँग उठाकर नितेश की डेस्क के ऊपर से झुलायी और उस लकड़ी के डेस्क पर बैठ गयी। फिर अपनी जाँघें फैलाते हुए नीरा ने अपने पैर उठाकर नितेश के एक-एक कँधे पर टिका दिए। नितेश ने जब नीरा की फैली टाँगों के बीच में उसकी झीनी सलवार में से उसकी हरी पैंटी देखी तो वोह सन्न रह गया। नीरा ने नितेश का ध्यान आकर्षित करने के लिए उसके सीने के ऊपर अपने सैंडलों की ऊँची नोकीली हील गड़ा दी।

“मैं तो यहाँ से देख नहीं पा रही हूँ…” नीरा बोली- “तुम देखकर बताओ कि क्या तुमने पैंटी का रंग ठीक बताया था?”

“हाँ हाँ…”

“हुम्म्म्म… तो तुम उसे उतारकर मुझे क्यों नहीं दिखाते…”

नितेश को देखकर ऐसा लग रहा था कि उसकी साँसें रुकने वाली हैं और उसे दिल का दौरा पड़ने वाला है। लेकिन उसके काँपते हाथ नीरा की जाँघों को छूते हुए नीरा की कमर तक पहुँच गये। उसने नीरा की सलवार का नाड़ा खोला और पैंटी का इलास्टिक पकड़कर दोनों को एक साथ नीचे खींचा। नीरा ने उसकी मदद करने के लिए अपनी गाण्ड उचकायी तो उसके सैंडलों की ऊँची हील और भी ज्यादा नितेश के सीने में गड़ गयीं। पर नितेश को इस समय किसी पीड़ा की परवाह नहीं थी। नितेश ने सलवार और पैंटी अपनी टीचर के घुटनों तक खींच दी। फिर नीरा ने बारी-बारी से अपन पैर उसके कँधों से हटाये और नितेश ने सलवार और पैंटी उसके पैरों सी झटक कर खींच दी। नीरा की चमचमाती नंगी चूत अब बिल्कुल नितेश की आँखों के सामने थी।

नीरा ने जब देखा कि उसका स्टूडेंट उसकी गरम पैंटी अपने चेहरे पर पकड़े हुए है तो वोह बोली- “अच्छी लगी खुशबू? सीधे खुशबू के श्रोत से ही क्यों नहीं सूँघते?”

नितेश ने एक बार अपनी टीचर के चेहरे की तरफ देखा और फिर उसकी टाँगों के बीच में। वोह थोड़ा सा झिझका, और फिर एक बार नीरा के चेहरे पे नज़र डालकर आगे झुकने लगा।

“इतनी जल्दी नहीं… चूत की खुशबू से पहले ज़रा मेरे पैरों और टाँगों की खुशबू और स्वाद तो ले लो…” नीरा ने अपना एक पैर नितेश के कँधे से हटाकर अपने सैंडल का तला नितेश के चेहरे पर रख दिया।

नितेश अपनी जीभ नीरा के सैंडल के तले पर फिराने लगा और फिर उसके सैंडल की हील अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।

“मम्म्म…” नीरा आनिन्दत होकर सिसकारने लगी और फिर अपना दूसरा पैर भी नितेश के चेहरे के सामने कर दिया। नितेश की जीभ पूरे उत्साह से सैंडल के स्ट्रैपों और नीरा के पैरों की अँगुलियों के बीच में नाचने लगी। नितेश को सैंडलों की मादक महक और नीरा के पैरों के पसीने का तीक्ष्ण स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था। नीरा ने धीरे-धीरे अपने पैर नितेश के चेहरे से हटाकर फिर से नितेश के कँधों पर टिका दिए और नितेश की जीभ अब नीरा की टाँगों को चूमते-चाटते आगे बढ़ने लगी। नितेश की सहूलियत के लिए नीरा ने भी थोड़ा आगे की और उचक कर अपने पैर नितेश की कुर्सी की पीठ पे रख दिए। नीरा की चूत पे अपना मुँह रखने के पहले से ही नितेश को अपनी टीचर की चूत की नशीली महक आने लगी।


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“ओह… हाँ… चाटो इसे… शर्माओ नहीं…चाटो मेरी चूत…” नीरा मस्ती से कुनकुनाई।

नितेश जो अभी तक थोड़ा हिचक रहा था, उसने आगे झुक कर अपने हाथ डेस्क पर सरका कर अपनी टीचर की नंगी गाण्ड पकड़ ली। कुछ दिन पहले जब उसने नीरा की गाण्ड को उसकी सलवार के ऊपर से कुछ क्षणों के लिए सहलाया था तो उसे लगा था कि उसने कितना बड़ा तीर मार लिया। लेकिन अब उसकी अँगुलियां अपनी टीचर के नंगे चूतड़ों में धँसी हुई थी और उसका मुँह अपनी टीचर की चूत पे था। उसने कई बार नीरा की कल्पना करके मुठ मारी थी पर यह अनुभव उन कल्पनाओं से कहीं ज्यादा बेहतर था।

जब नीरा ने नितेश का सिर पकड़कर अपनी चूत पे उसका मुँह दबाया तो नितेश फटाफट नीरा की क्लिट चाटने लगा। नीरा मस्ती में जोर से सिसकने लगी और उसने अपना घुटना मोड़कर अपनी दाँयी टाँग अपने स्टूडेंट की पीठ पर लपेट ली। डेस्क पे मजबूती से टिके अपने हाथों और नितेश की पीठ पर लिपटी अपनी टाँग के सहारे वोह अपने चूतड़ उचकाने लगी। नितेश अपनी टीचर की लिसलिसाती लाल चूत को चाटते हुए अपनी जीभ को चूत में गहराई तक घुसा रहा था।

“ओहहहह… नितेश… चाट मेरी चूत हरामजादे… मेरी चूत को अपनी जीभ से चोद…” हवस में दिवानी होती नीरा ने कराहते हुए कहा। नीरा की चूत में जबरदस्त सैलाब उठ रहा था।

नितेश ने अपनी टीचर की निर्लज्ज चीख सुनी तो वो दुगुनी रफ्तार से चूत चाटने लगा।

“हाँ… हाँ… चाट इसे… अपनी कुतिया टीचर की चूत… मैं… मैं… आआआहहहह…” अपने स्टूडेंट के चेहरे पे अपनी चूत को जोर-जोर से उचकाती हुई नीरा कराहते हुए झड़ने लगी और उसकी चूत ने नितेश के मुँह को गर्म मलाईदार रिसाव से लबालब कर दिया।

शाँत होने के बाद नीरा ने अपनी दाँयी टाँग धीरे से नितेश की पीठ और कंधे से उठायी और उचक कर डेस्क के दोनों किनारे अपनी टाँगें लटका कर सीधी बैठ गयी। फिर वोह डेस्क से नीचे उतरी और नितेश की साईड पे घुटनों के बल बैठ गयी और नितेश की कुर्सी को हल्के से अपनी तरफ घुमाया। वोह नितेश की पैंट खोलने ही वाली थी कि नीरा को उसके पैंट पे गहरे रंग का गीला धब्बा दिखायी दिया।

“ओह… हाय रे… तुझसे इतना भी रुका नहीं गया?” नीरा बोली।

नितेश का चेहरा शर्मिंदगी से सुर्ख हो गया- “मैडम… आप परेशान ना हों… मैं जानता हूँ कि क्या करना है…”

नीरा ने अपने स्टूडेंट की पैंट खोलकर खींची और नितेश ने थोड़ा सा ऊपर उठकर नीरा को पैंट उतारने में मदद की। कुछ ही क्षणों में नितेश की पैंट और वीर्य से भीगा अंडरवीयर उसके पैरों के पास थे। नीरा ने उसका लण्ड देखा जो अभी भी काफी कठोर था पर उसके लिसलिसे वीर्य से चुपड़ा हुआ था। नीरा ने आगे झुक कर अपने होंठ उसके लण्ड के इर्द-गिर्द लपेट दिए। जब उसने अपनी टीचर को वीर्य से चुपड़ा लण्ड अपने मुँह में डालते देखा तो नितेश की आँखें फैल गयीं।

नीरा को नितेश का वीर्य से लिसलिसा लण्ड मुँह में लेने में कोई आपत्ति नहीं थी और उसे नितेश के वीर्य का स्वाद पसंद आया। नितेश का इस तरह अपने पैंट में स्खलित हो जाना नीरा को काफी प्यारा लगा। नीरा को एहसास हुआ कि उसके सब क्षात्र उम्र में काफी छोटे हैं। जिन्होंने अभी-अभी जवानी की दहलीज़ पर कदम रखा है। जब नितेश का लण्ड नीरा के मुँह में जाते ही बिल्कुल सख्त हो गया तो नीरा को लण्ड मुँह में लिये हुए ही हल्की सी हँसी आ गयी। इन छोटी उम्र के युवकों में यही एक अच्छी बात थी कि झड़ने के बाद भी इनके लण्ड फटफट फिर से खड़े हो जाते हैं।

नीरा उसके लण्ड को चूसते हुए उसपर लिपटे वीर्य को चाटकर साफ करने के लिए अपनी जीभ का ज्यादा ही इस्तमाल कर रही थी। नितेश का लण्ड चूसते हुए नीरा बीच-बीच में अपनी नज़रें उठाकर अपने स्टूडेंट के चेहरे की तरफ देख लेती थी। ज्यादातर तो उसे नितेश की आँखें बँद ही मिलीं पर कई बार उसने देखा कि नितेश अपनी टीचर को लण्ड चूसते देखने के लिए अपनी आँखें खोलने को बाध्य हो रहा था। नीरा जानती थी कि यह नितेश के लिए विशेष रोमांच की बात थी, विशेष करके इसलिए कि वोह दोनों क्लासरूम में मौजूद थे और वोह क्लास में कुर्सी पे बैठा था और उसकी टीचर उसके सामने अपने घुटनों के बल बैठी उसका लण्ड चूस रही थी।


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*****To Be Contd... ....

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नीरा उसके लण्ड को चूसते हुए उसपर लिपटे वीर्य को चाटकर साफ करने के लिए अपनी जीभ का ज्यादा ही इस्तमाल कर रही थी। नितेश का लण्ड चूसते हुए नीरा बीच-बीच में अपनी नज़रें उठाकर अपने स्टूडेंट के चेहरे की तरफ देख लेती थी। ज्यादातर तो उसे नितेश की आँखें बँद ही मिलीं पर कई बार उसने देखा कि नितेश अपनी टीचर को लण्ड चूसते देखने के लिए अपनी आँखें खोलने को बाध्य हो रहा था। नीरा जानती थी कि यह नितेश के लिए विशेष रोमांच की बात थी, विशेष करके इसलिए कि वोह दोनों क्लासरूम में मौजूद थे और वोह क्लास में कुर्सी पे बैठा था और उसकी टीचर उसके सामने अपने घुटनों के बल बैठी उसका लण्ड चूस रही थी।

नीरा से रहा नहीं गया और वोह जोर-जोर से अपना सिर हिलाकर नितेश का लण्ड चूसने लगी। नीरा का इरादा तो नितेश का लण्ड चूसकर सख्त बनाने के बाद उससे चुदवाने का था पर इससे पहले कि वोह कुछ जान पाती, नितेश की अँगुलियां नीरा के बालों में उलझ गयीं और वोह अपने चूतड़ ऊपर उचकाने लगा। नीरा इस तरह अपने मुँह में लण्ड पेले जाने के लिए तैयार नहीं थी और नितेश का लण्ड अचानक अपने गले में ठेले जाने से नीरा की साँस काई बार उखड़ी और फिर उसे अपने गले में और जीभ पर वीर्य फूट कर गिरता महसूस हुआ। नितेश के स्खलित होने से नीरा को निराशा हुई पर फिर भी स्वेच्छा से नितेश के गाढ़े वीर्य की आखिरी बूँद तक निचोड़ के चटखारे लेकर पी गयी।

“आई एम सारी… मैडम…” नितेश बोला- “मैं खुद को रोक ही नहीं पाया। मुझे पहले ही आपको सावधान कर देना चाहिए था…”

“कोई बात नहीं। मुझे बुरा नहीं लगा। बस बात यह है कि…”

“मैं जानता हूँ। कभी भी मुँह के अंदर नहीं झड़ना चाहिए…”

“नहीं… नहीं… वोह बात बिल्कुल भी नहीं है। तुम कभी भी मेरे मुँह में अपना वीर्य झड़ सकते हो। मुझे तो अच्छा ही लगता है। वोह तो बात बस इतनी सी है कि… मैंने सोचा था हम चुदाई करेंगे… नहीं… बस वो तुम दो बार झड़ चुके हो और…” नीरा ने बोलते हुए जब अपना मतलब जताने के लिए अपने नज़रें नितेश के लण्ड की तरफ झुकायीं तो उसका लण्ड देखकर वोह हैरान रह गयी।

“ओह माय गाड… तेरा लण्ड तो अभी भी खंबे जैसा खड़ा है…”

“वो काफी सख्त है…” नितेश थोड़ा सा संकोच करते हुए बोला- “विशेषकर जब से आप इस कालेज में टीचर बन के आयी हैं…”

“माय गाड… इससे पहले कि ये मुरझा जाये। जल्दी से अपना लौड़ा मेरी चूत में पेल दे…”

नीरा फटाफट नितेश का लण्ड पकड़कर खड़ी हो गयी और नितेश को लण्ड से खींचकर खड़ा करने की चेष्टा की लेकिन अगले ही क्षण उसे अपनी इस पागलपन का एहसास हुआ। नीरा तो कामोत्तेजना से उन्मत्त हो रही थी और उसने नितेश की कलाई पकड़कर उसे खड़ा किया। लेकिन जब नीरा ने नितेश को खींचा तो वोह अपने पैरों पे पड़ी पैंट में उलझ कर लुढ़क कर गिर गया। नीरा की नज़र तुरंत नितेश के लौड़े पे गयी, यह देखने के लिए कि कहीं वोह मुरझा तो नहीं गया लेकिन उसके लण्ड को गर्व से सीधे खड़े देखकर उसे राहत मिली। नीरा ने नीचे बैठकर नितेश के जूते झटक कर उतारे और उसकी पैंट और अंडरवीयर खींचकर उसके पैरों से निकाल दिए। नीरा ने फिर उसे खींचकर खड़ा किया और अपने बड़े डेस्क की तरफ बढ़ गयी। फिर नीरा ने अपना कुर्ता अपनी कमर के ऊपर तक खींचा और डेस्क पे झुक कर अपनी गाण्ड मटकाने लगी।

“आ जा… जल्दी से पेल दे अपना लौड़ा मेरी प्यासी चूत में…” नीरा ने अनुरोध किया।

नितेश अपनी टीचर के पीछे आकर खड़ा हो गया और अपना लण्ड उसकी चूत पे मारने लगा। नीरा को साफ ज़ाहिर था कि इस कच्ची उम्र के लड़के को चुदाई का कुछ अनुभव नहीं था। नीरा ने अपनी टाँगों के बीच में से हाथ पीछे लेजाकर उसके लण्ड को पकड़ा और अपनी गुलाबी रसीली चूत के मुँह पे सटाया। नितेश ने झटपट आगे की तरफ धक्का दिया और पूरा लण्ड नीरा की चूत में धँसा दिया।

नितेश जब आगे पीछे होकर अपना लण्ड नीरा की चूत में अंदर-बाहर ठाँसने लगा तो नीरा ने अपना हाथ आगे लेजाकर अपनी हथेलियां डेस्क पर कस के जमा दीं- “ओह गाड… हाँ… चोद मुझे… मेरी चूत के चीथड़े कर दे… मादरचोद… चोद अपनी टीचर को… फक मी…” नीरा चीखने लगी। अपनी टीचर की वासना भरी चीखें सुनकर नितेश और भी उतावला हो गया और अपनी टीचर को और भी जोश से चोदने लगा।


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नीरा को क्लास-रूम में अपने स्टूडेंट से चुदवाना बहुत मादक लग रहा था। वोह जानती थी कि जिस तरह वोह क्लास में अपनी कामुक अदाओं से लड़कों को छेड़ती थी वोह अनुचित था पर इस तरह चुदवाना तो बिल्कुल ही अशोचनीय था। अपनी चूत में एक नये स्टूडेंट के बलशाली लण्ड के हथौड़ों जैसे प्राहरों से और इस चुदाई की अनैतिकता के एहसास ने नीरा को आनन्द की चरम सीमा पर पहुँचा दिया।

“हाँ नितेश साले… ओहहह… मैं झड़ी… ऊँहहह… चोद डाल साले… आआहहह…” नीरा की आँखों के सामने चरमानन्द की धुँधलाहट छाने लगी। नितेश के लण्ड पे अपनी चूत को सिकोड़ते हुए और कराहते हुए नीरा झड़ने लगी।

नितेश ने अपनी टीचर की पीठ पर झुक कर उसकी चूंचियां पकड़ लीं और उसकी चूत में आगे पीछे अपना लण्ड पेलते हुए उसकी चूंचियां मसलने लगा। नीरा ने डेस्क पर रखे अपने हाथों पे अपना माथा टिकाया हुआ था और झड़ने के बाद भी अपनी चूत में नितेश के लण्ड के धक्कों के कारण चरम-आनंद का एहसास ज्यादा देर तक जारी रहा और उसकी चूत अभी भी रह-रहकर फड़क रही थी। फिर नितेश ने उसके दोनों मम्मे कसकर पकड़ लिए और अपना पूरा लण्ड नीरा की चूत में ठाँस कर स्थिर हो गया। नीरा समझ गयी और उसने अपनी चूत की दीवारों को नितेश के लण्ड पे कस के जकड़ लिया और कुछ ही क्षणों में नीरा को अपने स्टूडेंट का गरमा-गरम वीर्य अपनी चूत में छूटता महसूस हुआ।

जब नितेश के लण्ड से वीर्य झड़ना बंद हुआ तो उसके हाथ भी नीरा की चूंचियां छोड़कर आगे डेस्क पर गिर गये और जब झड़ने के बाद का कामानंद उसके बदन में छाने लगा तो नितेश बीच-बीच में अपने चूतड़ों को झटकने लगा। फिर नीरा को अपनी पीठ पर नितेश के ढहने के कारण उसका वजन महसूस हुआ। नितेश बिल्कुल स्थिर था और नीरा के कान के पास हाँफ रहा था। नीरा अपनी चूत को तब तक नितेश के लण्ड पे सिकोड़-सिकोड़ कर उसे निचोड़ती रही जब तक कि नितेश का लण्ड ढीला पड़कर चूत से बाहर नहीं फिसल गया। फिर नीरा ने धैय र्पूवर्क नितेश के सम्भलने का इंतज़ार किया।

“वाह… ढिल्लो मैडम… गजब का मज़ा आया…” नितेश सीधे खड़ा होता हुआ बोला- “मैंने सोचा भी नहीं था की चोदने में इतना आनंद आयेगा…”

नीरा सीधी होकर पीछे घूमी और फिर अपनी पीठ डेस्क पे टिकाकर नितेश की तरफ देखकर अविश्वास से बोली- “तेरा मतलब है कि तूने अब से पहले कभी चुदाई नहीं की थी?” फिर जब उसने नितेश का चेहरा लाल होता देखा तो जल्दी से आगे बोली- “इसमें शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं। मुझे तो फख्र है कि मैं तेरे लण्ड से चुदने वाली पहली हूँ। उम्म… क्या तेरा लण्ड चूसने वाली भी मैं पहली औरत हूँ?” जब नितेश ने सिर हिलाया तो नीरा बोली- “हाय… काश मुझे पता होता तो मैं खास अच्छे से तेरा लण्ड चूसती…”

“आपने बहुत अच्छी तरह से ही मेरा लण्ड चूसा था मैडम। मैं तो पूरी ज़िंदगी वो आनंद नहीं भूल पाऊँगा…”

नीरा ने आगे बढ़कर नितेश का गाल चूमा और मुश्कुराती हुई बोली- “थैंक यू नितेश… यह मेरे लिए भी बड़ी बात है। मुझे खुशी है कि तुम्हें चुदाई का मज़ा देने वाली मैं पहली औरत हूँ और यह मैं हमेशा याद रखूँगी…”

नीरा ने नितेश को कपड़े पहनने को कहा और खुद भी अपनी सलवार उठाकर पहनने लगी। जब नितेश ने अपने कपड़े पहन लिए तो नीरा ने अपनी पैंटी उठाकर नितेश को पकड़ा दी- “यह तेरी पहली चुदाई की यादगार के लिए…” नीरा मुश्कुराते हुए बोली- “अब तुझे यहाँ से निकलना चाहिए…”

नितेश खुशी से मुश्कुराता हुआ क्लास-रूम से निकल गया। नीरा डेस्क पे बैठकर अपना सामान समेटने लगी। दरवाजा खुलने की आवाज सुनकर नीरा ने घूमते हुए सोचा कि नितेश शायद कुछ भूल गया होगा लेकिन एक दूसरे टीचर को क्लास में दाखिल होते देखकर वोह सन्न रह गयी।

“आलोक जी… आप इस समय यहाँ क्या कर रहे हैं?” नीरा ने सहज होते हुए प्रोफेसर आलोक त्रिपाठी से पूछा।

“वैसे तो मैं कुछ देर पहले भी आया था। पर नीरा जी आप… उम्म… कुछ व्यस्त थीं…”

“क्या? ओह माय गाड… तो आपने सब देखा?” नीरा का दिमाग जोर से दौड़ने लगा। नीरा को याद आया कि नितेश को फुसलाने के लिए उसने सब क्षात्रों के बाहर जाने के बाद दरवाजा बंद तो किया था पर वोह चिटकनी लगाना भूल गयी थी।


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“हाँ… वास्तव में दो बार… पहली बार आप अपने घुटनों पे थीं… अगर आप मेरा अभिप्राय समझ रही हैं तो… और दूसरी बार आप क्लास-रूम में आगे अपने डेस्क के पास थीं…”

“तो अब आप क्या कायर्वाही करेंगे?” नीरा ने बहुत डरते हुए पूछा। नीरा को अपनी पूरी ज़िंदगी… अपने शादी… अपनी नौकरी… अपनी इज़्ज़त… खाक में मिलती नज़र आ रही थी।

“मैं क्या करूँगा? मैं भी चोदूँगा तुम्हें…”

“क्या? लेकिन आप तो शादी-शुदा हैं…”

“वाह… यह तो वही बात हुई कि कोयला कढ़ाई को काला कहे…”

यह सुनकर नीरा को एहसास हुआ कि उसने कितनी बेतुकी बात कही थी।

“लेकिन पहले मैं अपना लण्ड तुमसे चुसवाऊँगा…” प्रोफेसर आलोक त्रिपाठी ने ठीक से दरवाजा बंद करके चिटकनी लगायी और नीरा के पास आकर खड़े हो गये।

नीरा के सामने आकर आलोक ने नीरा की कमीज़ उसके बदन से निकाली तो नीरा ने कोई विरोध नहीं दिखाया और जब आलोक ने उसकी ब्रा के हुक खोले तो नीरा ने खुद ही अपने कँधे झटक कर ब्रा नीचे गिरा दी। नीरा की दोनों चूंचियों को एक साथ मसलते हुए आलोक उसके निप्पल मरोड़ने लगा। नीरा के निप्पल तुरंत कड़क हो गये। आलोक आगे झुक कर नीरा की एक चूची को मुँह में लेकर चूसते हुए अपने जीभ उसके कड़क निपल पर फिराने लगा। नीरा ने अपनी आँखें बंद करके आलोक के सिर के पीछे हाथ रखकर उसे पकड़ लिया और आलोक की जीभ के स्पर्श से उत्तेजित होने लगी।

जब आलोक पीछे हटा तो नीरा ने देखा कि वोह अपनी शर्ट और अंडरवीयर में खड़ा था। जब वोह नीरा की चूची चूसने में व्यस्त था तब उसने अपने पैंट खोलकर अपने पैरों पे गिरा दी थी। आलोक ने पीछे हटकर अपने जूते निकाले और फिर अपनी पैंट में से एक-एक करके अपने पैर बाहर निकाले। नीरा की आँखें आलोक की टाँगों के बीच में जमी थीं। आलोक का लण्ड तो सख्त नहीं लग रहा था लेकिन उसके अंडरवीयर में उभार काफी बड़ा था। फिर जब आलोक ने अपना अंडरवीयर नीचे किया तो नीरा ने जोर से साँस ली। आलोक का लण्ड बहुत ही बड़ा था। जैसे ही आलोक ने अपनी टाँगों से अंडरवीयर निकाला, नीरा झट से अपने घुटनों पे बैठ गयी।

“अभी नहीं… पहले अपनी सलवार निकालो…” आलोक बोला।

नीरा ने बिना हिचकिचाये जल्दी से अपनी सलवार उतारकर किनारे फेंक दी। अब उसने सिर्फ सफेद रंग के हाई हील सैंडल पहने हुए थे और इन सैंडलों के अलावा बिल्कुल नंगी थी। नीरा फिर से घुटनों पे बैठकर आलोक का लण्ड अपने हाथों में पकड़कर उसकी लंबाई का अँदाज़ा लगाने लगी।

“ढीली अवस्था में 8” इंच का है…” आलोक ने कहा जैसे उसने नीरा का मानस पढ़ लिया हो- “लेकिन मैं वादा करता हूँ कि सख्त बन जाने पर यह ज्यादा बड़ा हो जायेगा। हे हे हे… कभी लिया है ग्यारह इंच का लौड़ा अपनी चूत में?”

“ग्यारह इंच? माय गाड… मेरी चूत में नहीं समायेगा ये…”

“इस बात की चिंता मत करो। आराम से समायेगा…”

बातें करते हुए नीरा अपने सहकर्मी का लण्ड सहला रही थी। वोह उसके हाथ में बड़ा तो हुआ लेकिन उतना नहीं जितना आलोक डींग हाँक रहा था। पर पारिभाषिक रूप से वोह अभी पूरी तरह खड़ा नहीं हुआ था। नीरा ने अपनी कजरारी आँखों को मटकाकर आलोक की तरफ ऊपर देखा और अपने होठों पे जीभ फिराते हुए नीरा ने आगे झुक कर अपना मुँह खोला और लण्ड के सुपाड़े को मुँह में भर लिया। अपने होंठों को लण्ड के इर्द-गिर्द कसकर वोह उसे चूसने-चाटने लगी।

नीरा की खुशकिस्मती से लण्ड उसके मुँह में और फूल गया। नीरा को पीछे हटना पड़ा जब बढ़ता लण्ड उसके हलक में घुसने लगा। जब नीरा ने लण्ड अपने मुँह से बाहर निकालकर देखा तो वो बिल्कुल कठोर हो गया था और बहुत विशाल बन गया था। नीरा को इसमें अब बिल्कुल शक नहीं था कि लण्ड का माप इस समय कम-से-कम ग्यारह इंच था। नीरा ने आलोक का लौड़ा अपनी दोनों मुठ्ठियों में ऐसे पकड़ लिया जैसे कि क्रिकेट का बैट पकड़ा जाता है और फिर भी मुँह में लेने जितना लण्ड बाकी था। अपनी मुठ्ठियों में लण्ड को मरोड़ती, खिसकाती और निचोड़ती हुई नीरा उसे मुँह में लेकर पूरे जोश और क्षमता से चूसने लगी। नीरा को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसका मुँह लण्ड से इतना भरा हुआ था और वोह कल्पना करने लगी कि इतना बड़ा लण्ड चूत में कैसा मज़ा देगा।


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