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सेक्सी स्कूल टीचर
लेख़िका - रीना कँवर
बहुत ही गहरे विचारों में डूबी, अड़तिस वर्षीया स्कूल-टीचर, क्लास में अपनी अपनी मेज पे चढ़कर क्षात्रों की तरफ मुँह करके बैठी थी। उसने अपनी दाहिनी टाँग अपनी बाँयी टाँग के ऊपर रखी हुई थी और उसका पैर अनजाने में ही झूल रहा था। उसके पैरों की अँगुलियों से लटका उसका ऊँची एंड़ी का सैंडल कभी भी नीचे गिर सकता था पर नीरा ढिल्लो का इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं था। वोह अपने पति के बारे में सोच रही थी जिसकी सेक्स में रुचि चालीस की उम्र के बाद काफी कम हो गयी थी। नीरा ने खुद को ठीक किया - रुचि कम नहीं बल्कि एकदम खतम हो गयी थी और उसे सिर्फ अपने बिज़नेस में ही रुचि थी।
इस बात से नीरा काफी परेशान थी। नीरा जानती थी की वोह खुद काफी खूबसूरत थी। वोह अपनी पाँच फुट तीन इंच ऊँचाई और 55 किलोग्राम वजन में काफी स्लिम लगती थी। उसके काले-भूरे लम्बे बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठ उसे बहुत ही आकर्षक बनाते थे। नीरा हमेशा सोचती थी कि बढ़ती उम्र के साथ-साथ सेक्स में रुचि कम हो जाना स्वाभाविक होता है पर उसके साथ तो उल्टा ही हुआ था। 35 साल की उम्र के बाद तो उसकी खुद की सेक्स वासना किसी जंगल में लगी आग की तरह दहक उठी थी। पर अपने पति की मरी हुई सेक्स इच्छा के कारण नीरा की चूत की भड़कती आग बुझाने वाला कोई नहीं था।
वोह अभी भी जवान, खूबसूरत, सेक्सी और चुदासी थी और अपने पति को बहलाने-फुसलाने की कितनी ही कोशिशें करती थी पर उसपर कुछ असर नहीं होता था। उसकी चुदाई की पिपासा दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी पर उसने कभी भी अपने पति से बे-वफाई नहीं की थी।
नीरा ने यह सब सोचते हुए अचानक अपनी आँखें उठा के क्लास का निरीक्षण किया। उसके सामने बैठे ग्यारहवीं क्लास के क्षात्र अपना टेस्ट लिख रहे थे और बीच-बीच में उनकी निगरानी करना उसका काम था। नीरा ने एक लड़के को अचानक अपनी आँखें नीचे करके अपनी नज़रें झुकाते हुए देखा। वोह इतनी देर से नीरा को ताक रहा था। नीरा मन-ही-मन मुश्कुरा दी क्योंकी ऐसा अक्सर होता था।
उसे यह जानकर बहुत अच्छा लगता था कि लड़के उसके खूबसूरत सेक्सी बदन को ताकते थे। वोह भी उससे आधी उम्र के लड़के। कभी-कभी अपने पति के साथ उसे भी अपनी बढ़ती उम्र का एहसास होता था। पर जब वोह किसी आदमी या किशोर उम्र के लड़कों की आँखों में अपने लिए लालसा देखती थी तो उसकी चूत भी गीली हो जाती थी और उसे लगता था कि उसमें अभी भी बात है। अभी भी उसका यौवन उनके लण्ड खड़े कर सकता है।
वही लड़का जिसे नीरा ने अभी नज़रें झुकाते हुए पकड़ा था, उसने फिर से नीरा की तरफ देखा पर फिर जल्दी से यह देखकर नज़रें झुका लीं कि टीचर उसको ही देख रही थी। नीरा फिर से मुश्कुराई। उसका शरीर निश्चित रूप से बहुत सेक्सी था जिसे देखकर कितनों के ही लण्ड सलामी के लिए खड़े हो जाते थे और नीरा उसी हिसाब से कपड़े भी पहनती थी। वोह ज्यादातर टाईट सलवार-कमीज़ या साड़ी पहनती थी। उसके ब्लाउज़ या कमीज़ हमेशा काफी लो-कट होते थे और उनके नीचे हमेशा डार्क रंग की ब्रा होती थी।
साथ ही उसे हाई हील के सैंडल पहनने का भी बहुत शौक था और उन्हें पहनकर वोह काफी सेक्सी महसूस करती थी और वोह जानती थी लड़के भी उनकी तरफ आकर्षित होते थे क्योंकी उसने कई बार लड़कों को अपने सैंडलों की तरफ ताकते हुए पकड़ा था। कभी-कभी नीरा स्कर्ट-जैकेट सूट भी पहनती थी क्योंकी यह कानवेंट स्कूल था और टीचर्स को फार्मल स्कर्ट या पैंट के साथ जैकेट सूट पहनने की इजाज़त थी। पर स्कूल की पालिसी के अनुसार स्कर्ट घुटनों से कम से कम दो इन्च नीचे तक होना जरूरी था।
नीरा अब उत्तेजित हो गयी थी और उसका पैर और भी जोर से हिलने लगा। इससे उसकी जाँघें आपस में रगड़ रही थीं और… और उसकी चूत पे दबाव पड़ रहा था। और फिर अचानक पैर के इतना हिलने से आखिर में उसका सैंडल उसके पैर से नीचे गिर ही गया। नीरा ने आज ग्रे रंग का फार्मल स्कर्ट सूट पहना हुआ था। जब वोह ऊँची मेज से नीचे उतरी तो उसने महसूस किया कि उसकी स्कर्ट जाँघों पे थोड़ी ऊपर खिसक गयी थी। नीरा ने देखा कि कई लड़कों ने उसे मेज से नीचे उतरते देखा था और उसे पता था क्यों? नीरा की गोरी माँसल सेक्सी टाँगें देखने के लिए।
पर नीरा को इसका बुरा नहीं लगा। उसे इन किशोर लड़कों को अपनी अदाओं से छेड़ना अच्छा लगता था और अब उसे एक और मौका मिला था। नीरा बेशरम होकर बहुत ही फूहड़ तरीके से घुटने मोड़कर सीधी बैठ गयी जिससे उसकी स्कर्ट घुटनों के ऊपर खिसक गयी। जब उसे अपनी जाँघों पे हल्की सी ठंडी हवा महसूस हुई तो नीरा समझ गयी कि अब उसके स्कर्ट के अंदर का सब कुछ उन लड़कों को दिख रहा होगा, जिन्होंने अपनी टेस्ट की कापियों से नज़र उठा के उसे देखने का कष्ट किया होगा। नीरा साधारण पैंटियां नहीं पहनती थी क्योंकी उसे उनमें आराम नहीं लगता था।
नीरा को सिर्फ र्फ़ैंच-कट या जी-स्ट्रिंग पैंटियां ही पसंद थीं। वैसे बैठे-बैठे ही नीरा सोचने लगी कि आज उसने कौन से रंग की पैंटी पहनी थी और फिर उसे याद आया कि उसने हल्के हरे रंग की बहुत ही छोटी सी पैंटी पहनी हुई थी। अपनी इस शरारत पे उसकी हँसी छूटने वाली थी जिसे उसने दबा लिया और फिर वोह यह सोचकर खड़ी हो गयी कि लड़कों को वोह जरूरत से ज्यादा ही अपनी नग्नता प्रदर्शित कर रही थी। फिर मेज के सहारे खड़ी होकर उसने अपना एक पैर उठा के अपना सैंडल पहन लिया। जब उसने फिर से क्लास की तरफ देख तो एक साथ कई आँखें नीचे झुक गयीं।
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सेक्सी स्कूल टीचर
लेख़िका - रीना कँवर
बहुत ही गहरे विचारों में डूबी, अड़तिस वर्षीया स्कूल-टीचर, क्लास में अपनी अपनी मेज पे चढ़कर क्षात्रों की तरफ मुँह करके बैठी थी। उसने अपनी दाहिनी टाँग अपनी बाँयी टाँग के ऊपर रखी हुई थी और उसका पैर अनजाने में ही झूल रहा था। उसके पैरों की अँगुलियों से लटका उसका ऊँची एंड़ी का सैंडल कभी भी नीचे गिर सकता था पर नीरा ढिल्लो का इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं था। वोह अपने पति के बारे में सोच रही थी जिसकी सेक्स में रुचि चालीस की उम्र के बाद काफी कम हो गयी थी। नीरा ने खुद को ठीक किया - रुचि कम नहीं बल्कि एकदम खतम हो गयी थी और उसे सिर्फ अपने बिज़नेस में ही रुचि थी।
इस बात से नीरा काफी परेशान थी। नीरा जानती थी की वोह खुद काफी खूबसूरत थी। वोह अपनी पाँच फुट तीन इंच ऊँचाई और 55 किलोग्राम वजन में काफी स्लिम लगती थी। उसके काले-भूरे लम्बे बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठ उसे बहुत ही आकर्षक बनाते थे। नीरा हमेशा सोचती थी कि बढ़ती उम्र के साथ-साथ सेक्स में रुचि कम हो जाना स्वाभाविक होता है पर उसके साथ तो उल्टा ही हुआ था। 35 साल की उम्र के बाद तो उसकी खुद की सेक्स वासना किसी जंगल में लगी आग की तरह दहक उठी थी। पर अपने पति की मरी हुई सेक्स इच्छा के कारण नीरा की चूत की भड़कती आग बुझाने वाला कोई नहीं था।
वोह अभी भी जवान, खूबसूरत, सेक्सी और चुदासी थी और अपने पति को बहलाने-फुसलाने की कितनी ही कोशिशें करती थी पर उसपर कुछ असर नहीं होता था। उसकी चुदाई की पिपासा दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी पर उसने कभी भी अपने पति से बे-वफाई नहीं की थी।
नीरा ने यह सब सोचते हुए अचानक अपनी आँखें उठा के क्लास का निरीक्षण किया। उसके सामने बैठे ग्यारहवीं क्लास के क्षात्र अपना टेस्ट लिख रहे थे और बीच-बीच में उनकी निगरानी करना उसका काम था। नीरा ने एक लड़के को अचानक अपनी आँखें नीचे करके अपनी नज़रें झुकाते हुए देखा। वोह इतनी देर से नीरा को ताक रहा था। नीरा मन-ही-मन मुश्कुरा दी क्योंकी ऐसा अक्सर होता था।
उसे यह जानकर बहुत अच्छा लगता था कि लड़के उसके खूबसूरत सेक्सी बदन को ताकते थे। वोह भी उससे आधी उम्र के लड़के। कभी-कभी अपने पति के साथ उसे भी अपनी बढ़ती उम्र का एहसास होता था। पर जब वोह किसी आदमी या किशोर उम्र के लड़कों की आँखों में अपने लिए लालसा देखती थी तो उसकी चूत भी गीली हो जाती थी और उसे लगता था कि उसमें अभी भी बात है। अभी भी उसका यौवन उनके लण्ड खड़े कर सकता है।
वही लड़का जिसे नीरा ने अभी नज़रें झुकाते हुए पकड़ा था, उसने फिर से नीरा की तरफ देखा पर फिर जल्दी से यह देखकर नज़रें झुका लीं कि टीचर उसको ही देख रही थी। नीरा फिर से मुश्कुराई। उसका शरीर निश्चित रूप से बहुत सेक्सी था जिसे देखकर कितनों के ही लण्ड सलामी के लिए खड़े हो जाते थे और नीरा उसी हिसाब से कपड़े भी पहनती थी। वोह ज्यादातर टाईट सलवार-कमीज़ या साड़ी पहनती थी। उसके ब्लाउज़ या कमीज़ हमेशा काफी लो-कट होते थे और उनके नीचे हमेशा डार्क रंग की ब्रा होती थी।
साथ ही उसे हाई हील के सैंडल पहनने का भी बहुत शौक था और उन्हें पहनकर वोह काफी सेक्सी महसूस करती थी और वोह जानती थी लड़के भी उनकी तरफ आकर्षित होते थे क्योंकी उसने कई बार लड़कों को अपने सैंडलों की तरफ ताकते हुए पकड़ा था। कभी-कभी नीरा स्कर्ट-जैकेट सूट भी पहनती थी क्योंकी यह कानवेंट स्कूल था और टीचर्स को फार्मल स्कर्ट या पैंट के साथ जैकेट सूट पहनने की इजाज़त थी। पर स्कूल की पालिसी के अनुसार स्कर्ट घुटनों से कम से कम दो इन्च नीचे तक होना जरूरी था।
नीरा अब उत्तेजित हो गयी थी और उसका पैर और भी जोर से हिलने लगा। इससे उसकी जाँघें आपस में रगड़ रही थीं और… और उसकी चूत पे दबाव पड़ रहा था। और फिर अचानक पैर के इतना हिलने से आखिर में उसका सैंडल उसके पैर से नीचे गिर ही गया। नीरा ने आज ग्रे रंग का फार्मल स्कर्ट सूट पहना हुआ था। जब वोह ऊँची मेज से नीचे उतरी तो उसने महसूस किया कि उसकी स्कर्ट जाँघों पे थोड़ी ऊपर खिसक गयी थी। नीरा ने देखा कि कई लड़कों ने उसे मेज से नीचे उतरते देखा था और उसे पता था क्यों? नीरा की गोरी माँसल सेक्सी टाँगें देखने के लिए।
पर नीरा को इसका बुरा नहीं लगा। उसे इन किशोर लड़कों को अपनी अदाओं से छेड़ना अच्छा लगता था और अब उसे एक और मौका मिला था। नीरा बेशरम होकर बहुत ही फूहड़ तरीके से घुटने मोड़कर सीधी बैठ गयी जिससे उसकी स्कर्ट घुटनों के ऊपर खिसक गयी। जब उसे अपनी जाँघों पे हल्की सी ठंडी हवा महसूस हुई तो नीरा समझ गयी कि अब उसके स्कर्ट के अंदर का सब कुछ उन लड़कों को दिख रहा होगा, जिन्होंने अपनी टेस्ट की कापियों से नज़र उठा के उसे देखने का कष्ट किया होगा। नीरा साधारण पैंटियां नहीं पहनती थी क्योंकी उसे उनमें आराम नहीं लगता था।
नीरा को सिर्फ र्फ़ैंच-कट या जी-स्ट्रिंग पैंटियां ही पसंद थीं। वैसे बैठे-बैठे ही नीरा सोचने लगी कि आज उसने कौन से रंग की पैंटी पहनी थी और फिर उसे याद आया कि उसने हल्के हरे रंग की बहुत ही छोटी सी पैंटी पहनी हुई थी। अपनी इस शरारत पे उसकी हँसी छूटने वाली थी जिसे उसने दबा लिया और फिर वोह यह सोचकर खड़ी हो गयी कि लड़कों को वोह जरूरत से ज्यादा ही अपनी नग्नता प्रदर्शित कर रही थी। फिर मेज के सहारे खड़ी होकर उसने अपना एक पैर उठा के अपना सैंडल पहन लिया। जब उसने फिर से क्लास की तरफ देख तो एक साथ कई आँखें नीचे झुक गयीं।
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