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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete

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सेक्सी स्कूल टीचर

लेख़िका - रीना कँवर

बहुत ही गहरे विचारों में डूबी, अड़तिस वर्षीया स्कूल-टीचर, क्लास में अपनी अपनी मेज पे चढ़कर क्षात्रों की तरफ मुँह करके बैठी थी। उसने अपनी दाहिनी टाँग अपनी बाँयी टाँग के ऊपर रखी हुई थी और उसका पैर अनजाने में ही झूल रहा था। उसके पैरों की अँगुलियों से लटका उसका ऊँची एंड़ी का सैंडल कभी भी नीचे गिर सकता था पर नीरा ढिल्लो का इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं था। वोह अपने पति के बारे में सोच रही थी जिसकी सेक्स में रुचि चालीस की उम्र के बाद काफी कम हो गयी थी। नीरा ने खुद को ठीक किया - रुचि कम नहीं बल्कि एकदम खतम हो गयी थी और उसे सिर्फ अपने बिज़नेस में ही रुचि थी।

इस बात से नीरा काफी परेशान थी। नीरा जानती थी की वोह खुद काफी खूबसूरत थी। वोह अपनी पाँच फुट तीन इंच ऊँचाई और 55 किलोग्राम वजन में काफी स्लिम लगती थी। उसके काले-भूरे लम्बे बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठ उसे बहुत ही आकर्षक बनाते थे। नीरा हमेशा सोचती थी कि बढ़ती उम्र के साथ-साथ सेक्स में रुचि कम हो जाना स्वाभाविक होता है पर उसके साथ तो उल्टा ही हुआ था। 35 साल की उम्र के बाद तो उसकी खुद की सेक्स वासना किसी जंगल में लगी आग की तरह दहक उठी थी। पर अपने पति की मरी हुई सेक्स इच्छा के कारण नीरा की चूत की भड़कती आग बुझाने वाला कोई नहीं था।

वोह अभी भी जवान, खूबसूरत, सेक्सी और चुदासी थी और अपने पति को बहलाने-फुसलाने की कितनी ही कोशिशें करती थी पर उसपर कुछ असर नहीं होता था। उसकी चुदाई की पिपासा दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी पर उसने कभी भी अपने पति से बे-वफाई नहीं की थी।

नीरा ने यह सब सोचते हुए अचानक अपनी आँखें उठा के क्लास का निरीक्षण किया। उसके सामने बैठे ग्यारहवीं क्लास के क्षात्र अपना टेस्ट लिख रहे थे और बीच-बीच में उनकी निगरानी करना उसका काम था। नीरा ने एक लड़के को अचानक अपनी आँखें नीचे करके अपनी नज़रें झुकाते हुए देखा। वोह इतनी देर से नीरा को ताक रहा था। नीरा मन-ही-मन मुश्कुरा दी क्योंकी ऐसा अक्सर होता था।

उसे यह जानकर बहुत अच्छा लगता था कि लड़के उसके खूबसूरत सेक्सी बदन को ताकते थे। वोह भी उससे आधी उम्र के लड़के। कभी-कभी अपने पति के साथ उसे भी अपनी बढ़ती उम्र का एहसास होता था। पर जब वोह किसी आदमी या किशोर उम्र के लड़कों की आँखों में अपने लिए लालसा देखती थी तो उसकी चूत भी गीली हो जाती थी और उसे लगता था कि उसमें अभी भी बात है। अभी भी उसका यौवन उनके लण्ड खड़े कर सकता है।

वही लड़का जिसे नीरा ने अभी नज़रें झुकाते हुए पकड़ा था, उसने फिर से नीरा की तरफ देखा पर फिर जल्दी से यह देखकर नज़रें झुका लीं कि टीचर उसको ही देख रही थी। नीरा फिर से मुश्कुराई। उसका शरीर निश्चित रूप से बहुत सेक्सी था जिसे देखकर कितनों के ही लण्ड सलामी के लिए खड़े हो जाते थे और नीरा उसी हिसाब से कपड़े भी पहनती थी। वोह ज्यादातर टाईट सलवार-कमीज़ या साड़ी पहनती थी। उसके ब्लाउज़ या कमीज़ हमेशा काफी लो-कट होते थे और उनके नीचे हमेशा डार्क रंग की ब्रा होती थी।

साथ ही उसे हाई हील के सैंडल पहनने का भी बहुत शौक था और उन्हें पहनकर वोह काफी सेक्सी महसूस करती थी और वोह जानती थी लड़के भी उनकी तरफ आकर्षित होते थे क्योंकी उसने कई बार लड़कों को अपने सैंडलों की तरफ ताकते हुए पकड़ा था। कभी-कभी नीरा स्कर्ट-जैकेट सूट भी पहनती थी क्योंकी यह कानवेंट स्कूल था और टीचर्स को फार्मल स्कर्ट या पैंट के साथ जैकेट सूट पहनने की इजाज़त थी। पर स्कूल की पालिसी के अनुसार स्कर्ट घुटनों से कम से कम दो इन्च नीचे तक होना जरूरी था।

नीरा अब उत्तेजित हो गयी थी और उसका पैर और भी जोर से हिलने लगा। इससे उसकी जाँघें आपस में रगड़ रही थीं और… और उसकी चूत पे दबाव पड़ रहा था। और फिर अचानक पैर के इतना हिलने से आखिर में उसका सैंडल उसके पैर से नीचे गिर ही गया। नीरा ने आज ग्रे रंग का फार्मल स्कर्ट सूट पहना हुआ था। जब वोह ऊँची मेज से नीचे उतरी तो उसने महसूस किया कि उसकी स्कर्ट जाँघों पे थोड़ी ऊपर खिसक गयी थी। नीरा ने देखा कि कई लड़कों ने उसे मेज से नीचे उतरते देखा था और उसे पता था क्यों? नीरा की गोरी माँसल सेक्सी टाँगें देखने के लिए।

पर नीरा को इसका बुरा नहीं लगा। उसे इन किशोर लड़कों को अपनी अदाओं से छेड़ना अच्छा लगता था और अब उसे एक और मौका मिला था। नीरा बेशरम होकर बहुत ही फूहड़ तरीके से घुटने मोड़कर सीधी बैठ गयी जिससे उसकी स्कर्ट घुटनों के ऊपर खिसक गयी। जब उसे अपनी जाँघों पे हल्की सी ठंडी हवा महसूस हुई तो नीरा समझ गयी कि अब उसके स्कर्ट के अंदर का सब कुछ उन लड़कों को दिख रहा होगा, जिन्होंने अपनी टेस्ट की कापियों से नज़र उठा के उसे देखने का कष्ट किया होगा। नीरा साधारण पैंटियां नहीं पहनती थी क्योंकी उसे उनमें आराम नहीं लगता था।

नीरा को सिर्फ र्फ़ैंच-कट या जी-स्ट्रिंग पैंटियां ही पसंद थीं। वैसे बैठे-बैठे ही नीरा सोचने लगी कि आज उसने कौन से रंग की पैंटी पहनी थी और फिर उसे याद आया कि उसने हल्के हरे रंग की बहुत ही छोटी सी पैंटी पहनी हुई थी। अपनी इस शरारत पे उसकी हँसी छूटने वाली थी जिसे उसने दबा लिया और फिर वोह यह सोचकर खड़ी हो गयी कि लड़कों को वोह जरूरत से ज्यादा ही अपनी नग्नता प्रदर्शित कर रही थी। फिर मेज के सहारे खड़ी होकर उसने अपना एक पैर उठा के अपना सैंडल पहन लिया। जब उसने फिर से क्लास की तरफ देख तो एक साथ कई आँखें नीचे झुक गयीं।


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नीरा अब क्लास में घूमते हुए क्षात्रों पे नज़र रखने लगी। नीरा को घूमते देखकर कई लड़के बेचैन होकर अपने-अपने खड़े लण्ड छिपाने के लिए अपनी टाँगें डेस्क के नीचे और ज्यादा खिसकाने लगे। लड़कों की इस हरकत पे नीरा मुश्कुराए बिना नहीं रह सकी। उनमें से एक लड़का कुछ ज्यादा ही बौखलाया हुआ था और नीरा ने उसे थोड़ा और तंग करने का सोचा। नीरा अपनी चूचियां उस लड़के के कंधे पे दबाते हुए पीछे से उसके डेस्क पर झुकी।

“अनिल… कुछ दिक्कत हो रही है तुम्हें? नीरा अपनी गरम साँसें उसके कान पे छोड़ती हुई फुसफुसाई…”

“न…नहीं, मैडम… मैं… उह… कोई दिक्कत नहीं…” वोह लड़का बौखलाते हुए हकलाने लगा।

नीरा मुश्कुरा के आगे बढ़ गयी। उसने अपना घूमना ज़ारी रखा और इसी तरह बीच-बीच में किसी भी लड़के को अपनी हरकतों से बेकरार कर देती थी। घूमती हुई नीरा जानबूझ कर लड़कियों की तरफ भी गयी ताकि ऐसा ना लगे कि वोह लड़कों पे ही ध्यान दे रही है। नीरा को कई लड़कों की पैंटों में उनके खड़े लण्ड दिखे और उसकी खुद की चूत में चींटियां रेंगने लगीं। नीरा को एहसास था कि उसकी पैंटी बिल्कुल भीग चुकी थी और उसने मन में सोचा कि क्या इन लड़कों को उसकी रिसती चूत की महक आ रही होगी।

उस दिन जब नीरा घर पहुँची, तो वोह बहुत चुदासी थी। रात को नीरा ने अपने पति को चुदाई के लिए रिझाने की कोशिश की पर उसपे कुछ असर नहीं हुआ।

नीरा ने बाथरूम में नहाते हुए एक मोटे से बैंगन से अपनी चूत की गरमी शाँत करने की कोशिश की। बाथटब में अपनी एक टाँग टब के साईड से बाहर लटका के वोह अपनी चूत में बैंगन अंदर-बाहर करती हुई चोद रही थी और साथ में क्लास के तरुण लड़कों की कल्पना कर रही थी। उनके चेहरों की तरुणाई, उनकी ताकती आँखें, उनके खड़े हुए जवान लण्ड जो हमेशा उसके लिए तैयार रहते थे।

“नीरा ढिल्लो… साली राँड…” नीरा खुद को डाँटते हुए हुई बोली- “अगर तूने अपने मन को वश में नहीं रखा तो बदनामी के साथ-साथ जेल की हवा खानी पड़ेगी। तू आग से खेल रही है छिनाल… यह लड़के बहुत छोटे हैं…” लेकिन फिर उसके दिल से आवाज आयी कि आखिर वोह इन लड़कों के साथ सिर्फ़ शरारत ही तो करती है। उनसे सचमुच चुदवा तो नहीं रही। क्या मुझ जैसी चुदाई की भूखी को थोड़ी सी शरारत से खुद को खुश करने का भी हक नहीं? यह सब सोचते हुए उसे जैसे उसके दिमाग में आकाशवाणी गूँजी और वोह लगभग उछलती हुई बोली- “मैं स्कूल छोड़ के कालेज में पढ़ाऊँगी…”

अगले दिन सुबह, नीरा काफी रोमाँचित महसूस कर रही थी। वोह शाम को स्कूल के बाद पास के एक डिप्लोमा कालेज में लेक्चरर के लिए आवेदन करने वाली थी। किसी ना-बालिग लड़के के साथ कोई अनहोनी होने से रोकने के लिए उसे कुछ तो करना ही था। ऐसा नहीं था कि उसका सचमुच किसी नाबलिग लड़के के साथ चुदवाने का इरादा था। पर उसे डर था कि कहीं खेल-खेल में कोई दुघर्टना ना हो जाये। कुछ भी चुदाई से सम्बंधित जो उसे किसी बड़ी मुसीबत में डाल दे। वैसे भी स्कूल का यह साल खतम होने वाला था और डिप्लोमा कालेज में पढ़ाना शुरू करने के लिए अच्छा समय था। उस दिन अपने कपड़े चुनते हुए नीरा ने सफेद रंग का चूड़ीदार सलवार कमीज़ पहनने का निश्चय किया।

उसने अपनी अँगुलियां अपनी सलवार पे फिराईं। उसकी सलवार बहुत ही पतली काटन की बनी थी और काफी पारदर्शी और टाईट थी। उसकी स्लीवलेस कमीज़ भी टाप-नूमा थी और और उसके घुटनों से बहुत ऊँची थी और सिर्फ़ उसके चूतड़ों तक ही पहुँचती थी लेकिन कमीज़ उसकी सलवार की तरह पारदर्शी नहीं थी क्योंकी उसमें नीचे लाइनिंग (अस्तर) लगी थी। जब नीरा क्लास में जाकर खड़ी हुई तो उसे एहसास हुआ कि उसने यह कपड़े पहनने का सही निर्णय लिया था, क्योंकी सब लड़कों की आँखें नीरा पे ही टिकी थीं और वोह भी उसकी कमर के नीचे। नीरा जानती थी कि उसके चार इंच ऊँची पेंसिल हील के सैंडल उसकी सल्वार को और भी ज्यादा भड़कीला बना रहे थे।

पढ़ाते हुए नीरा को जब भी मौका मिलता वोह किसी भी बहाने से झुक के अपने भारी चूतड़ लड़कों की तरफ उघाड़ रही थी। कमीज़ ऊँची होने की वजह से पास से देखने पर नीरा की पारदर्शी टाईट सलवार में से उसकी पिंक पैंटी का अभास दिखता था। कई बार नीरा ने बहाने से किसी लड़के के डेस्क पे झुक के अपनी गाण्ड साथ वाले लड़के के चेहरे के बिल्कुल सामने ठेल दी। एक बार तो उसने अनजान बनते हुए अपनी सल्वार कमर से पकड़कर ऊपर खींची जिससे उसकी टाईट सलवार उसकी चूत पे कसकर जैसे चिपक-सी गयी। फिर नीरा हमेशा की तरह कुर्सी की बजाय मेज पे आगे बैठकर पढ़ाने लगी। उसने आज स्कर्ट नहीं पहनी थी इसलिए नीरा अपनी टाँगें कुछ ज्यादा ही चौड़ी करके बैठी थी।

नीरा जानती थी कि उसकी चूत पे कसी हुई पतली टाईट सलवार में से उसकी पैंटी और चूत का उभार उसके बिल्कुल सामने बैठे लड़कों को साफ दिख रहा होगा। नीरा बिल्कुल अनजान बनी हुई पढ़ा रही थी। जब उसने अपने सामने बैठे लड़कों की तरफ देखा तो उन में से कुछ ने तो उसकी टाँगों के बीच में गड़ी अपनी नज़रें भी नहीं हटायीं।

जब नीरा ने एक जोर की सिसकारी सुनी तो अपना लेक्चर रोक कर उसने चिंता से उस ओर देखा। एक लड़का अपने डेस्क पे झुक कर अपनी बाहों में मुँह दबाये हुए था और उसे हल्के से झटके लगते हुए प्रतीत हो रहे थे। जब उस लड़के ने ऊपर देखा तो उसके चेहरे पे लाली और पसीना था। नीरा को लगा कि शायद वोह बीमार है पर जब उस लड़के ने नीरा को अपनी तरफ देखते हुए देखा तो उसका चेहरा और भी चुकँदर की तरह लाल हो गया। वोह लड़का लपक के उठा और सारी बोल के क्लास से बाहर चला गया। पर नीरा को उसकी ग्रे रंग की पैंट के आगे एक काला धब्बा दिख गया।


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***** *****To Be Contd... ...

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जब नीरा ने एक जोर की सिसकारी सुनी तो अपना लेक्चर रोक कर उसने चिंता से उस ओर देखा। एक लड़का अपने डेस्क पे झुक कर अपनी बाहों में मुँह दबाये हुए था और उसे हल्के से झटके लगते हुए प्रतीत हो रहे थे। जब उस लड़के ने ऊपर देखा तो उसके चेहरे पे लाली और पसीना था। नीरा को लगा कि शायद वोह बीमार है पर जब उस लड़के ने नीरा को अपनी तरफ देखते हुए देखा तो उसका चेहरा और भी चुकँदर की तरह लाल हो गया। वोह लड़का लपक के उठा और सारी बोल के क्लास से बाहर चला गया। पर नीरा को उसकी ग्रे रंग की पैंट के आगे एक काला धब्बा दिख गया।

बेचारा लड़का नीरा की हरकतों से उत्तेजित होकर अपनी पैंट में ही झड़ गया था।

जब क्लास खतम हुई तो नीरा से भी रहा नहीं गया और वोह भी लगभग भागती हुई स्टाफ-टायलेट में घुसी और दरवाजा लाक करके फटाफट अपनी सलवार और पैंटी नीचे खींच डाली। बैठने का कष्ट किए बगैर नीरा के हाथ उसकी टाँगों के बीच में पहुँच गए और नीरा जोर-जोर से अपनी चूत और चूत का दाना रगड़ने लगी। कुछ ही क्षणों में जैसे ही नीरा झड़ने को हुई तो उसे अपना निचला होंठ दाँतों से काटकर खुद को चीखने से रोकना पड़ा। फिर नीरा मुँह हाथ धोकर वापिस अपनी अगली क्लास के चली गयी। अभी जो कुछ भी हुआ उसके पश्चात नीरा ने उस दिन किसी भी क्लास में लड़कों से शरारत नहीं की।

वोह सोच रही थी कि वोह उस क्लास में कुछ ज्यादा ही उत्साही हो गयी थी और अपनी उत्तेजना में उसने काफी बड़ा खतरा उठा लिया था और उसे अब कुछ ना कुछ कदम उठाना ही पड़ेगा। उस दिन जब स्कूल खतम हुआ तो वोह सीधी डिप्लोमा कालेज गयी और लेक्चरर के पद के लिए आवेदन किया। स्कूल के आखिर के दिन बिना किसी मुसीबत में पड़े निकल गये। उसने अपनी हरकतें ज़ारी रखी थीं पर वोह कभी अपनी हद के बाहर नहीं गयी। जब उसे डिप्लोमा कालेज से आफर आया तो उसे राहत मिली कि अब उसे अपनी सुलगती चूत के साथ छोटे ना-बालिग लड़कों के आस-पास नहीं रहना पड़ेगा। गरमियों की छुट्टियों के बाद उसे कालेज में पढ़ाना शुरू करना था।

गरमियों की छुट्टियों के दौरान ऐसी कई स्थितियां आयीं जब नीरा को अपने सब्र की परीक्षा देनी पड़ी। क्योंकी उसके पति का बहुत फैला हुआ कारोबार था, इसलिए नीरा को अपने पति के साथ कई बार पाटिर्यों में जाना पड़ता था और जैसे वोह स्कूल में क्षात्रों के साथ खिलवाड़ करती थी वैसे ही इन पाटिर्यों में भी दूसरे मर्दों के साथ फ्लर्ट करती थी। ऐसी ही एक पार्टी में, नीरा को एक आदमी बहुत ही सेक्सी लगा। नीरा ने पार्टी में थोड़ी ज्यादा ही पी ली थी और वोह हल्के से नशे की मस्ती में थी। नीरा ने अपना काफी समय उस आदमी के आसपास ही फ्लर्ट करते हुए बिताया।

ग्रुप में उससे बात करते हुए नीरा उसके पास ही खड़ी थी और कई बार बात करते हुए वोह अपनी बगैर ब्रा की चूचियां उस आदमी से सटाते हुए उसपर झुकी। वोह लोगों की बातों पे अपने सेक्सी अंदाज़ में खिलखिलाती और अपना हाथ बीच-बीच में उस आदामी की कमर पे रख देती। वोह आदमी, जिसका नाम, विक्रम था, नीरा पे नज़र रख रहा था। वोह भी नीरा की नियत को भाँप गया था। बाद में जब उसने नीरा को हाल से बाहर बगीचे में खुली हवा में जाते देखा तो वोह भी उसके पीछे हो लिया। जब नीरा ने उसका हाथ अपने चूतड़ों से ज़रा सा ऊपर अपनी कमर पे महसूस किया तो चौंक के उछल गयी।

“ओह… आप हैं…” नीरा उसकी तरफ घूमते हुए बोली।

“हाँ… अंदर काफी भीड़ है। नहीं?” वोह सिगरेट का कश लेते हुए बोला।

“काफी बड़ी पार्टी है। थोड़ी ठंडी हवा के लिए मैं बाहर आ गयी…” नीरा अपने पैग का घूँट लेते हुए बोली।

“जरूर… यहाँ बाहर काफी अच्छा है…” विक्रम ने बोल के नीरा की कमर में हाथ डाल दिया।

जब नीरा ने कुछ आपत्ति नहीं की तो वोह नीरा की कमर के साइड पे हाथ फिराने लगा और धीरे-धीरे उसके हाथ फिराने का दायरा तब तक बढ़ाता गया जब तक उसका अँगुठा नीरा की चूचियों के साइड पे टकराने लगा। नीरा उसका हाथ दूर हटाने ही वाली थी कि विक्रम ने अपनी सिगरेट फेंकते हुए झुक कर अपने हाथ से नीरा की ठोड़ी पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठा दिया। फिर जब विक्रम ने अपने होंठ नीरा के होंठों पे रखे तो नीरा के मुँह से सिसकारी निकल गयी और उसके होंठ विक्रम की जीभ अंदर लेने के लिए खुल गये।

नीरा ने अपना ग्लास वहीं घास पे गिरा दिया। जब वोह दोनों किस कर रहे थे तो विक्रम का एक हाथ अभी भी नीरा की कमीज़ के ऊपर से उसकी साईड ऊपर-नीचे सहला रहा था और दूसरे हाथ से विक्रम ने उसकी कमर पे रखकर नीरा को अपने से सटाया हुआ था। फिर जब उसके हाथ ने कमर से नीचे फिसल कर नीरा के चूतड़ों को पकड़ा तो नीरा ने विक्रम के मुँह में ही सिसकारी भरी और उसे अपनी टाँगें कमजोर होती मालूम पड़ीं। कितने लम्बे समय के बाद किसी आदमी ने उसके साथ ऐसा किया था।


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विक्रम ने अपनी एक टाँग नीरा की टाँगों के बीच में घुसा दी और अपनी जाँघ उसकी चूत पे रगड़ने लगा। नीरा को भी अपनी टाँग पे उसके खड़े होते लण्ड का कड़ापन महसूस हुआ और बिना जाने ही नीरा अपना बदन विक्रम से रगड़ने लगी। विक्रम का एक हाथ अब नीरा की चूचियों पे था और उसकी चूची को बड़े प्यार से मसल रहा था। नीरा की जीभ भी अब और जोश से विक्रम की जीभ से रगड़ने लगी। उसके चूतड़ों पे रखे विक्रम के हाथ ने कब उसकी कमीज़ को ऊपर उठा दिया, नीरा को इस बात का तब एहसास हुआ जब उसे वोह हाथ अपनी सलवार और फिर पैंटी के अंदर सरकते हुए अपनी गाण्ड पे महसूस हुआ। इस अजनबी आदमी का हाथ अपने नंगे चूतड़ों पे नीरा को बहुत अच्छा लग रहा था।

नीरा रोमाँचित होकर एक सुखद एहसास में खोयी हुई थी लेकिन जब उसे विक्रम का हाथ और नीचे सरकता हुआ महसूस हुआ और उसकी अँगुलियां नीरा की चूत में घिसने की कोशिश करने लगीं तो नीरा उछलकर विक्रम से अलग हो गयी। नीरा की साँसें बहुत तेज चल रही थीं और वोह मुश्कुराते हुए विक्रम को ताकने लगी। नीरा को एहसास हुआ कि वोह क्या कर रही थी और उसका चुदाई की ज्वाला में सुलगता बदन किस हद तक वशीभूत हो गया था और फिर वोह अंदर भाग गयी।

पार्टी में बाकी समय वोह अपने पति के साथ ही चिपकी रही क्योंकी वोह जानती थी कि विक्रम के साथ फिर से अकेली हुई तो खुद को रोक पाने के लिए इच्छा शक्ति उसमें नहीं थी। बाद में रात को जब अपने पति से चुदाई की सब कोशिशें बेकार हो गयीं तो नीरा का मन फिर से विचलित हो गया और वोह पार्टी में मिले अजनबी विक्रम के बारे में सोचने लगी। वोह कल्पना करने लगी कि पार्टी में विक्रम के साथ वोह किस सीमा तक जा सकती थी और क्या वोह चोदने में एक्सपर्ट था। आखिर वोह भी तो विक्रम के सहलाने और उसके लण्ड के स्पर्श से चुदास हो गयी थी।

एक अजनबी पराए मर्द ने उसकी पैंटी में हाथ डालकर उसकी नंगी गाण्ड सहलायी थी और खुद उसने भी तो अपनी टाँगों के बीच में उस आदमी के लण्ड का स्पर्श पाकर अपनी चूत उसकी टाँग पर रगड़ी थी। नीरा जानती थी कि वोह एक शादी-शुदा औरत होते हुए भी अपनी चूत की तड़प से मजबूर होके कुछ देर के लिए बहक गयी थी और इस बात से नीरा बहुत चिंतित थी। पर फिर नीरा के दिल के किसी कोने में उस अजनबी को छोड़ के भाग जाने का पछतावा भी था क्योंकी अगर वोह वहाँ से नहीं भागती तो इस समय उसकी चूत चुदाई की पिपासा की अग्नि में ना जल रही होती।

नीरा का हाथ उसकी चूचियां मसलने लगा। नीरा ने बाथरूम में जाने का भी कष्ट नहीं किया। नीरा कल्पना कर रही थी कि उसकी चूचियों पे उसका खुद का नहीं बल्कि विक्रम का हाथ था। साथ-साथ उसका दूसरा हाथ उसकी टाँगों के बीच में पहुँच गया। नीरा का पति उसकी बगल में ही गहरी नींद में सोया हुआ था और एक अजनबी आदमी के साथ चुदाई की कलपना करती हुई वोह अपनी चूत को अपनी अँगुलियों से चोद रही थी। जब अँगुलियों से उसकी चूत को तसल्ली नहीं मिली तो वोह हाथ फैला के साईड टबेल पे कुछ ऐसा ढूँढ़ने लगी जो कि वोह अपनी चूत में डाल सके पर कुछ भी उपयुक्त उसके हाथ में नहीं आया। जब उसका हाथ ज़मीन पर पड़ा तो उसका एक सैंडल उसके हाथ में आ गया।

और उस सैंडल की लम्बी हील वोह अपनी चूत में घुसेड़कर अंदर-बाहर करके चोदने लगी। थोड़ी देर में जब नीरा झड़ी तो उसने इतनी जोर से सिसकारी मारी कि उसका पति नींद से जाग गया। नीरा ने जब उसे दिलासा दिया कि शायद वोह कोई बुरा सपना देख रही थी तो उसका पति फिर से भुनभुनाता हुआ पलटकर सो गया।

विक्रम के साथ हुई घटना उन गगर्मि की छुट्टियों के दौरान नीरा की वैसी इकलौती वारदात नहीं थी पर वही एक घटना ऐसी थी जो इतनी आगे तक बढ़ गयी थी। नीरा जानती थी कि वोह अपने पति से दगा करके किसी दूसरे मर्द से चुदवाने के कितनी करीब आ गयी थी। वोह ऐसी स्थिति में पड़ना नहीं चाहती थी इसलिए विक्रम की सिर्फ कल्पना करके मुठ मारती थी। नीरा दिन भर इंटरनेट पे चुदाई की कहानियां पड़ती या नंगी फिल्में देखती और शराब पीकर खूब मुठ मारती थी।

इस सबके बावजूद पाटिर्यों में नीरा की शोखियां और दूसरे मर्दों पे डोरे डालना कम नहीं हुआ था। उसे इसकी आदत सी पड़ गयी थी। उसके स्कूल के कच्ची उम्र के लड़कों की तरह जब दूसरे आदमी भी उसको देखकर लार टपकाते थे तो नीरा को बहुत अच्छा लगता था और एक सम्पूर्ण औरत होने का एहसास होता था। मुठ मार के नीरा अपनी चूत की आग जितनी शाँत करने की कोशिश करती थी, उसकी चूत की आग उतनी ही और दहकती थी।

आखिरकार छुट्टियां खतम हो गयीं। नयी नौकरी के पहले दिन की घबड़ाहट जो कि अक्सर लोगों को होती है वैसी ही नीरा को भी थी क्योंकी कालेज का माहौल स्कूल के माहौल से काफी अलग होता है। स्कूल में ज्यादा अनुशासन होता है जबकि कालेज में क्षात्रों ज्यादा बे-फिक्र और फसादी होते हैं। नीरा ने बहुत सोच-विचार के पहले दिन के लिए कपड़े पसंद किये थे जो बहुत ज्यादा टाईट ना हों। उसने पीले रंग की सलवार कमीज़ और साथ में हमेशा की तरह काफी हाई हील के सैंडल पहने थे।


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नीरा ने शीशे के सामने खुद को निहारा। उसकी कमीज़ का गला काफी गहरा था पर उसने अपने दुपट्टे से अपनी चूचियों को ढक रखा था। हालाँकि उसकी कमीज़ घुटनों के ऊपर ही थी और उसकी पीली काटन की सलवार पारदर्शी थी पर टाईट नहीं थी और सब मिलाकर नीरा साधारण और उपयुक्त पर साथ ही काफी खूबसूरत भी लग रही थी।

लेकिन जब उसने अपनी कमीज़ को थोड़ी सी ऊपर उठाया तो मुश्कुराए बिना नहीं रह सकी क्योंकी उसकी पारदर्शी पीली सलवार के नीचे से उसकी काली र्फेंच-कट पैंटी साफ दिख रही थी। शायद किसी खुश-किश्मत लड़के को मेरी पैंटी की झलक दिख जाये, नीरा ने मन में सोचा पर फिर अपनी बेशर्मी और नुमाईश की आदत पे खुद को झाड़ा और फिर अपनी कमीज़ ठीक करके कालेज के लिए निकल गयी।

कालेज में जब उसने लड़कों को अपनी तरफ घूरते देखा तो नीरा ने सोचा कि लड़के तो लड़के ही रहेंगे। कालेज के कैम्पस में नीरा को पीछे से एक-दो सीटियां भी सुनायी पड़ीं। ऊपर से तो नीरा थोड़ा गुस्सा दिखा रही थी पर अंदर ही अंदर रोमाँचित हो रही थी कि इस उम्र में भी उसके लिए लड़कों की सीटियां निकल रही थीं। अगर मेरा बदन इतना आकर्षक और सेक्सी है तो उसकी नुमाईश करने में क्या बुराई है। नीरा सोचने लगी। नीरा ने कालेज के आफिस में जाकर सब औपचारिकतायें पूरी की और फिर स्टाफ-रूम में साथी लेक्चररों से परिचय करके अपनी क्लास लेने गयी।

जब उसने क्लास में प्रवेश किया तो वहाँ एकदम चुप्पी छा गयी। नीरा ने देखा कि सब स्टुडेंट्स की नज़रें उसपर ही थीं। जहाँ लड़कियों कि आँखों में नयी लेक्चरर को देखकर जिज्ञासा थी वहीं लड़कों की नज़रों में सरहाना और कामुकता झलक रही थी। क्लास-रूम में आगे चबूतरे पर एक डेस्क और बठने के लिए कुर्सी की जगह एक ऊँचा स्टूल था जिसकी टाँगों पे आधी ऊँचाई पर एक स्टील का रिंग लगा हुआ था पैर रखने के लिए। नीरा ने वोह स्टूल डेस्क के पीछे से खींचकर सामने रखा और अपना एक पैर उस रिंग पे रखकर स्टूल पे चढ़ के बैठ गयी। नीरा की दूसरी टाँग नीचे ही लटक रही थी और उसके सैंडल का आगे का हिस्सा ज़मीन को महज़ छू भर रहा था।

नीरा ने देखा कि उसके बिल्कुल सामने बैठा लड़का उसे मुँह खोले ताक रहा था। नीरा उसी क्षण समझ गयी की बैठते वक्त उसकी ऊँची कमीज़ में से उस लड़के को उसकी जाँघों के बीच का हिस्सा दिख गया होगा पर इस बात का यकीन नहीं था कि उसकी काली पैंटी की झलक उस लड़के को दिखी कि नहीं। जो भी हो, नीरा को उस लड़के की प्रतिक्रिया बहुत दिलकश लगी थी।

नीरा ने उस लड़के पर नज़र रखते हुए लैक्चर ज़ारी रखा। जब नीरा को यकीन था कि वोह लड़का उसी की तरफ देख रहा है तो नीरा ने उसकी तरफ घूमते हुए अपनी दूसरी टाँग भी उठाकर अपने सैंडल की हील स्टील के रिंग में फँसा दी। ऐसा करते हुए जानबूझ कर नीरा ने इस तरह से अपने घुटने फैला दिये कि यह सब एक इत्तेफाक लगे। लेक्चर देते वक्त हर समय नीरा की निगाहें चोरी-चोरी उस लड़के पे ही थीं। वोह लड़का जब आँखें फाड़े नीरा को की टाँगों के बीच में ताकने लगा तो उसकी बाहर को निकली आँखों से साफ ज़हीर हो गया कि उसे अब नीरा की सलवार में से काली पैंटी साफ-साफ दिख रही थी।


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To be contd... ...

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नीरा ने उस लड़के पर नज़र रखते हुए लैक्चर ज़ारी रखा। जब नीरा को यकीन था कि वोह लड़का उसी की तरफ देख रहा है तो नीरा ने उसकी तरफ घूमते हुए अपनी दूसरी टाँग भी उठाकर अपने सैंडल की हील स्टील के रिंग में फँसा दी। ऐसा करते हुए जानबूझ कर नीरा ने इस तरह से अपने घुटने फैला दिये कि यह सब एक इत्तेफाक लगे। लेक्चर देते वक्त हर समय नीरा की निगाहें चोरी-चोरी उस लड़के पे ही थीं। वोह लड़का जब आँखें फाड़े नीरा को की टाँगों के बीच में ताकने लगा तो उसकी बाहर को निकली आँखों से साफ ज़हीर हो गया कि उसे अब नीरा की सलवार में से काली पैंटी साफ-साफ दिख रही थी।

नीरा ने अपनी अपनी कमीज़ को ठीक करते हुए घुटने आपस में मिला लिए लेकिन उसे उस लड़के की बे-करारी से बड़ा रस मिल रहा था। ऐसे ही दिन निकलने लगे और और नीरा भी कालेज के वातावरण की आदी हो गयी। कई तरह से नीरा को स्कूल में पढ़ाने के मुकाबले कालेज ज्यादा आसान लगा क्योंकी कालेज में ज्यादा आज़ादी और फुर्सत थी और साथ दूसरे टीचरों और कालेग मैंनेजमेट की कोई दखल-अँदाज़ी नहीं थी। जल्दी ही नीरा के कपड़े और ज्यादा तँग, चुस्त और पारदर्शी हो गये। उसकी सलवार-कमीज़ों के गलों का कटाव काफी गहरा हो गया जिससे कि उसकी गोरी बड़ी-बड़ी चूचियां दुपट्टे से ढकी ना होने पर साफ दिखती थीं और सलवारें इतनी पारदर्शी थीं कि अगर भीग जायें तो नीरा बिल्कुल नंगी दिखे।

जब वोह साड़ी पहनती तो उसके ब्लाऊज़ इतने छोटे होते कि उनके नीचे ब्रा पहनना ही बेकार था और वोह पारदर्शी साड़ियां भी बहुत कसकर पहनती थी। नीरा अपने अँगों की नुमाईश के नये-नये तरीके ईजाद करने लगी और लड़के-लड़कियां ही नहीं बल्कि स्टाफ के कई लोगों में उसकी चर्चा होने लगी। एक तरफ लड़के नीरा की कामुक अदाओं और बदन की नुमाईश पे मरते थे तो दूसरी तरफ कितनी ही लड़कियां उसे अपना आदर्श समझकर उसकी तरह ही फैशन और मेक-अप वगैरह करने लगीं। नीरा ने भी देखा कि उसकी क्लास में क्षात्रों की अनुपिस्थति, खास करके लड़कों की अनुपिस्थति ना के बराबर थी और इसका श्रेय नीरा की समझ में उसके बदन की नुमाईश और क्लास में उसकी लड़कों के साथ दिल्लगी को जाता था।

एक दिन नीरा दोपहर में अपनी आखिरी क्लास खतम होने पर अपने डेस्क के पास एक लड़के से लेक्चर के बारे में बात कर रही थी और बाकी के लोग झुँड में एक दूसरे को लगभग धकेलते हुए जल्दी-जल्दी क्लास के बाहर निकल रहे थे। अचानक नीरा ने महसूस किया कि किसी ने उसके चूतड़ों को हाथ से पकड़कर मसल दिया और वोह चौंक कर तेजी से पीछे घूम गयी पर उसे क्षात्रों के झुँड के अलावा कुछ नहीं दिखा। किसने उसकी गाण्ड को दबाया था यह जानने का नीरा के पास कोई तरीका नहीं था।

नीरा इस घटना से बेचैन हो गयी। जब वो स्कूल में पढ़ाती थी तो नीरा के इतनी छेड़खानी और दिल्लगी करने के बावजूद कभी किसी लड़के ने उसे छूने या बदतमीज़ी की हिम्मत नहीं की थी पर आज कालेज के एक लड़के ने उसे सिर्फ छुआ ही नहीं बल्कि खुल्लम खुल्ला उसके चूतड़ों को मसला था। इससे भी ज्यादा बेचैनी नीरा को इस बात कि थी कि उसे इस हरकत पे गुस्सा नहीं आया था बल्कि उसे मज़ा आया था और उसकी चूत में हलचल सी हुई थी। नीरा ने उस दिन घर जा के अपनी बेचैनी और सुलगती चूत शाँत करने के लिए व्हिस्की पीकर नशे में मदहोश होकर एक मोटे से खीरे से खूब मुठ मारी।

जिस क्लास में उसकी गाण्ड मसली गयी थी, अगले दिन नीरा उस क्लास में बड़े ध्यान से लड़कों के चेहरों को पढ़ रही थी। पर किसी के भी चेहरे से नीरा को कोई सुराग नहीं मिला। नीरा को पता था कि इनमें से ही कोई एक है। पर वोह है कौन? यह जानने के लिए नीरा बेताबी से पागल सी हुई जा रही थी। नीरा ने दोषी लड़के को पहचानने के लिए उन लड़कों को अपनी अदाओं से और भी ज्यादा उत्तेजित करने का फैसला किया। नीरा ने उस दिन उस क्लास में अपनी जवानी के जलवों की इतनी बेहयाई से नुमाईश की जितनी उसने आज तक नहीं की थी। उसने अपने दुपट्टे को चूचियों से हटाकर अपनी गले पे खिसका दिया और झुक-झुक कर अपनी गोरी-गोरी चूचियां की नुमाईश की। अपनी टाँगें खोलकर अपनी पैंटी की झलक देते हुए वोह कई बार अपने डेस्क और ऊँचे स्टूल पे चढ़कर बैठी और एक बार तो बिल्कुल आराम से अपनी कमीज़ थोड़ी सी ऊपर खिसका के सलवार के ऊपर से अपनी चूत भी खुजलायी।

पर जब उसने देखा तो सभी लड़के अपनी सीटों पे अपने खड़े हुए लण्ड लिए बेकरारी से नीरा को ताकते हुए कसमसा रहे थे। दोषी लड़के को पहचानने में नीरा की सब कोशिशें बेकार हो गयीं। जब वोह क्लास खतम हुई तो नीरा अपने डेस्क के पास क्लास के बाहर निकलते हुए स्टुडेंट्स की तरफ पीठ करके खड़ी हो गयी। वोह तैयार थी कि जैसे ही वोह लड़का उसे छूने लगेगा तो वोह घूम के उसे पकड़ लेगी पर किसी ने ऐसा नहीं किया और नीरा क्लास में अकेली रह गयी। फिर नीरा अपने डेस्क पे कुहनियां रखकर स्टूल पे बैठ गयी और अपना चेहरा अपनी हथेलियों से ढक लिया।

“ढिल्लो मैडम, आप ठीक तो हैं न?”

नीरा ने चौंक कर सिर उठा के देखा तो उसका एक स्टूडेंट, रोहित सेठी, उसके पास खड़ा था।

“मैं ठीक हूँ…” नीरा थोड़ी हड़बड़ाती हुई बोली- “बिल्कुल ठीक…”

“पर आप कुछ परेशान लग रही हैं…” वोह बोला।

“नहीं, सिर्फ थोड़ी थक गयी हूँ…”

“असल में आप अच्छी ही दिख रही हैं…”

“रोहित… क्या चाहिए तुम्हें। क्या बात है?” नीरा ने परेशान होते हुए पूछा।

“ढिल्लो मैडम, तुम बहुत ही सेक्सी और दिल्लगी-बाज़ औरत हो…”

“क्या? तुम्हारी इतनी हिम्मत…” नीरा गुस्से से चिल्लाई।

“तुम जब से इस कालेज में आयी हो। तब से हमें अपनी चूचियां गाण्ड और यहाँ तक की चूत की झलकियां दिखा-दिखाकर हमें तड़पा रही हो। पर आज तो आपने अपने बदन की जैसे नुमाईश की और लड़कों को लुभाया, उसके लिए तुमको आस्कर मिलना चाहिए…” रोहित बे-बाक होके बोला।

“सुनो, रोहित अब बहुत हो गया। अगर तुम इसी समय चले जाओ तो मैं तुम्हारे ये बदतमिज़ी को भूलने को तैयार हूं। समझे?”


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नीरा ने राहत महसूस की जब रोहित घूमकर दरवाजे की तरफ जाने लगा। लेकिन रोहित वहाँ से गया नहीं। कालेज उस दिन खतम हो चुका था। रोहित ने जाकर क्लास का दरवाजा बँद किया तो नीरा को चिटकनी लगाने की आवाज़ आयी। नीरा ने रोहित को अपनी तरफ आते देखा तो लपक कर झट से अपने स्टूल से खड़ी होकर पीछे हट गयी। अब उसके पीछे दीवार थी और उसका पूरा शरीर काँप रहा था।

“तो तुम जानबूझ कर अपनी सेक्सी हरकतों से लड़कों को नहीं तड़पाती हो। क्यों?”

रोहित नीरा के बिल्कुल सामने खड़ा होते हुए बोला- “तो फिर मुझे कैसे पता है कि तुम्हारी छोटी सी काली ब्रा के कप्स के बीच में एक छोटा सा लाल फूल बना है। आज तुमने जो पैंटी पहनी है वोह भी काले रंग की जी-स्ट्रिंग पैंटी है…”

नीरा एकदम बे-ज़ुबान हो गयी थी। उसका स्टूडेंट उसी पर इल्ज़ाम लगा रहा था और हाई स्कूल के जिन अनाड़ी लड़कों को वोह पहले अपनी कामोत्तेजक शोखियों से तड़पाती और लुभाती थी, उनसे ये लड़का कहीं ज्यादा दिलेर था।

“और तो और… ढिल्लो मैडम, तुम हम लड़कों के लौड़ों का ज़ायज़ा कर रही थीं। मैंने खुद देखा। तुम्हें क्या लगा कि मैं क्यों अपने डेस्क से पीछे खिसका था? क्या तुमने मेरी पैंट में मेरे खड़े लण्ड के उभार पे हसरत से नहीं देखा था? यही अच्छा लगता है ना तुम्हें? लड़कों को अपनी सेक्सी अदाओं और बदन की नुमाईश कर तड़पाकर उनके लौड़ों को सख्त बनाना ताकि वोह तुम्हारे बारे में सोचते हुए अपने लण्ड हिलाकर मुठ मारें?”

“देखो रोहित… आय-एम-सारी… पर मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था…” नीरा विनती करते हुए बोली- “वोह तो बस ऐसा…”

इससे पहले कि नीरा आगे बोल पाती, रोहित ने उसकी बाँहें पकड़कर खींचते हुए अपने से सटा लिया। नीरा की साढ़े चार इंच ऊँची हील की सैंडल के बावजूद रोहित उससे छः-सात इंच ऊँचा ही था। अपनी एक बाँह नीरा की कमर में डालकर और दूसरे हाथ से उसका सिर पीछे से पकड़कर रोहित ने नीरा के होंठों पे अपने होंठ रख दिए। नीरा उसकी पकड़ से छूटने के लिए थोड़ा फड़फड़ाई पर लड़का काफी मज़बूत था। नीरा उसे पीछे ढकेलने की कोशिश में अपना हाथ उन दोनों के शरीरों के बीच में लायी पर जब उसे रोहित का हाथ अपनी सलवार के अंदर पैंटी के ऊपर से अपनी चूत पे महसूस हुआ तो नीरा का हाथ उसे पीछे ढकेलने कि बजाय रोहित की बाँह पर पहुँच गया। नीरा रोहित की बाँह खींचकर अपनी चूत से हटाने की कोशिश करने लगी पर वोह उतनी मज़बूत नहीं थी। कम से कम, जब रोहित ने पीछे से उसका सिर छोड़ा तो वोह अपने होंठ उसके होंठों से अलग कर सकी।

“रोहित… रुक जाओ…” रोहित की अँगुली की रगड़ अपनी चूत पे महसूस करते हुए नीरा ने फिर विनती की- “तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। है भगवान… रुक जाओ…”

पर रोहित का रुकने का कोई इरादा नहीं था। वोह अपनी टीचर की कमर को अपनी बाँहों में कस के जकड़ के दूसरे हाथ से उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से रगड़ने लगा। नीरा रोहित की छाती पे अपने हाथ से जोर डालकर उसे पीछे ढकेल के छूटने की कोशिश करती रही। पर जब नीरा ने रोहित की अँगुली को जी-स्ट्रिंग पैंटी की पतली सी पट्टी साईड में खिसका के अपनी चूत के अंदर गड़ते हुए महसूस की तो नीरा ने उसे ढकेलना छोड़कर अपनी बाँहें रोहित के इद-गिर्द डालकर जकड़ते हुए अपना सिर उसकी छाती पे टिका दिया। नीरा के विरोध की जगह अब उसकी वासना ने ली थी।

बहुत समय से उसकी चूत में खुद की अँगुलियों के अलावा और किसी की अँगुलियां नहीं गयी थीं। क्लास में अपनी सेक्सी हरकतों से नीरा हमेशा गरम होकर चुदासी हो जाती थी और आज का दिन भी अपवाद नहीं था। आमतौर पर नीरा या तो क्लास के बाद स्टाफ के बाथरूम में या घर जाकर अपनी चूत की उत्तेजना को अपनी अँगुलियों या किसी भी मुनासीब चीज़ से चोदकर कम कर लेती थी। पर आज रोहित क्लास खतम होते ही उसके पास आ गया था। रोहित जवान, हसीन और कफी हट्टाक-ट्टा था और नीरा ने पहले कई बार उसकी पैंट में से उसके खड़े लण्ड का उभार देखा था। हालाँकि रोहित का उसको छूना गलत था पर क्योंकी नीरा की चूत की प्यास इस उम्र में चोटी पर थी और कोई उसकी इस असीम प्यास को बुझाने वाला नहीं था, इसलिए उसे रोहित की यह हरकत अब अच्छी लग रही थी।


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रोहित की दो अँगुलियां पूरे जोश में नीरा की चूत में अंदर-बाहर हो रही थीं। नीरा भी अब बेशरम होकर रोहित को पकड़कर उसकी अँगुलियों को अपनी चूत में चोद रही थी। वोह अपनी कामोत्तेजना में मदहोश थी। रोहित ने जब अपनी बाँह नीरा की कमर से हटायी तो नीरा उससे दूर नहीं हटी बल्कि उससे लिपटी रही और चुदासी कुतिया की तरह कराहती रही। रोहित ने भी अपने खाली हाथ से अपना ज़िप्पर खोलकर अपना तना हुआ कड़ा लण्ड बाहर निकल लिया।

अपनी अँगुलियां नीरा की चूत में से बाहर निकाले बगैर, रोहित ने दूसरे हाथ से अपनी टीचर की सलवार को नीचे खींच दिया और उसकी पैंटी को जब उसने झटके से एक तरफ करना चाहा तो पैंटी का मुलायम नाज़ुक कपड़ा उसकी मजबूत पकड़ में फट गया। रोहित जब अपनी टाँग नीरा की टाँगों के बीच में घुसाने लगा तो नीरा की नीचे खिसकी सलवार बीच में आने लगी। नीरा के इशारे पर उसने नीरा से अलग होकर उसकी टाँगों से सलवार खींच के अलग करके एक तरफ फेंक दी। रोहित ने फिर नीरा को अपनी बाँहों में लेकर अपनी टाँग नीरा की टाँगों के बीच अड़ाते हुए उन्हें फैला दिया और फिर अपना घुटना ज़रा सा झुका कर अपना लौड़ा नीरा की चूत पे सटाकर अंदर घुसेड़ दिया।

रोहित ने उत्तेजना में अपनी टाँगें सीधी कीं और जोरदार धक्का ऊपर की तरफ मारकर पूरा लण्ड अंदर ठेल दिया। नीरा की चूत में जब झटके के साथ रोहित का पूरा लण्ड घुसा तो उसने अपनी दोनों टाँगें उठाकर उछलते हुए रोहित की कमर के इर्द-गिर्द लपेट लीं। नीरा का सिर अब रोहित के कँधे पे था और वो रोहीत के लण्ड को अपनी चूत में लिए हुए रोहित के पहलवानी बदन पे चढ़ी हुई थी। अपनी बाँहें और टाँगें रोहीत के बदन पे कस के वोह उसके लण्ड पे ऊपर-नीचे उछलने लगी।

नीरा को बड़ा अरसा हो गया था किसी के लण्ड से चुदवाए हुए और अब, इस समय उसे रोहित के लण्ड से चुदाई के अलावा और किसी बात की सुध नहीं थी। उसे किसी बात से मतलब नहीं था, जैसे की वोह इस समय क्लास-रूम में चुद रही थी या रोहित उससे उम्र में कितना छोटा था या फिर रोहित उसका स्टूडेंट था और वोह उसकी टीचर और या फिर यह कि वोह एक शादी-शुदा औरत थी। उसकी चूत में इस समय एक जवान और तगड़ा लण्ड था और उन सब बातों से बे-परवाह नीरा का मक्सद इस समय सिर्फ़ चुदाई का मज़ा लेते हुए अपनी चूत की मुद्दतों से दहक रही आग को बुझाना था।

नीरा धीरे से रोहित के कान में फुसफुसाती हुई बोली- “ओहह… रोहित… तुम्हरा लण्ड मेरी चूत में बहुत अच्छा लग रहा है…”

रोहित ने अपनी टीचर के चूतड़ अपने हाथों में पकड़े और उसे अपने लण्ड पे ऊपर-नीचे खींचने लगा। नीरा रोहित को अपनी बाँहों और टाँगों से कसकर जकड़े हुए थी और हवा में लटकी हुई रोहित के लण्ड पे जोर से ऊपर-नीचे खिसक रही थी। पर फिर उसे अपने चूतड़ों पे रोहित की पकड़ और ज्यादा कसती हुई महसूस हुई। नीरा ने ऊपर-नीचे खिसकने की कोशिश की पर रोहित ने उसे हिलने नहीं दिया और नीरा को अपनी चूत में रोहित के लण्ड की गरम मलाई छूटती महसूस हुई।

“नहीं… अभी इतनी जल्दी नहीं…” नीरा निराशा और मायूसी से चिल्लाई।

जब रोहित ने झड़ना बँद किया तो वोह बोला- “चिंता मत करो मैडम… मैं अभी पूरा निबटा नहीं हूँ…”

नीरा को खुद से चिपकाये हुए ही रोहित कुछ कदम चला और जब नीरा को अपने नीचे डेस्क महसूस हुआ तो उसने रोहित पे अपनी पकड़े ढीली कर दी। रोहित ने नीरा को बैठने में मदद की। नीरा ने नीचे देखा तो उसके स्टूडेंट रोहित का लण्ड अभी भी उसकी चूत में था और उसके लण्ड पे सफेद धारियां उसके लण्ड के चूत में झड़ने का सबूत दे रहे थे। नीरा ने डेस्क पर पीछे हाथ रखकर खुद को सहारा दिया। नीरा की पकड़ से आज़ाद होकर रोहित फिर से नीरा को धीरे-धीरे चोदने लगा।


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***** *****to be contd... ...

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नीरा को खुद से चिपकाये हुए ही रोहित कुछ कदम चला और जब नीरा को अपने नीचे डेस्क महसूस हुआ तो उसने रोहित पे अपनी पकड़े ढीली कर दी। रोहित ने नीरा को बैठने में मदद की। नीरा ने नीचे देखा तो उसके स्टूडेंट रोहित का लण्ड अभी भी उसकी चूत में था और उसके लण्ड पे सफेद धारियां उसके लण्ड के चूत में झड़ने का सबूत दे रहे थे। नीरा ने डेस्क पर पीछे हाथ रखकर खुद को सहारा दिया। नीरा की पकड़ से आज़ाद होकर रोहित फिर से नीरा को धीरे-धीरे चोदने लगा।

“ओहहह… हाँ… चोद मुझे रोहित… ओहह…ह चोद मुझे…” नीरा ने सिसकारी भरी।

रोहित ने नीरा का दुपट्टा हटाने के बाद झटका मार के नीरा की कमीज़ उसके बदन से खींच दिया जिससे कमीज़ पीछे से थोड़ा चिर गया। फिर रोहित ने नीरा की ब्रा दबोची और उसे भी खींचकर फेंक दिया। नीरा अब कालेज के क्लास-रूम में अपने स्टूडेंट के साथ सिर्फ अपने हाई हील सैंडल पहने हुए बिल्कुल नंगी होकर चुदवा रही थी। रोहित अपनी टीचर की चूत में अपना लण्ड अंदर-बाहर ठेलते हुए आगे झुक कर उसकी एक चूची को चूसने लगा।

“हाँ… रोहित डार्लिंग… चोद मुझे और मेरी चूचियां भी चूस… हाय… बड़ा मज़ा आ रहा है… उम्म्म…” नीरा रोहित को और उकसाते हुए बोली। नीरा की टाँगें डेस्क के किनारे पे लटक कर झूल रही थीं और जब भी रोहित अपना लण्ड उसकी चूत में जोर से अंदर ठेलता था तो नीरा की सैंडल डेस्क पे ठोंकते हुए आवाज कर रहे थे। नीरा ने अपनी टाँगें उठा के रोहित की कमर पे लपेट लीं और थोड़ा आगे खिसक कर अपनी टाँगों से रोहित को और करीब खींच लिया।

“ओह… ओह… ओह… ओहहहह… औंऔंऔं… मैं आयीईईईई… हाँ…” और नीरा जोर-जोर से सुबकती हुई झड़ने लगी और उसका बदन थोड़ा थरथराने के बाद एकदम ऐंठ गया और उसकी टाँगें ढीली होकर रोहित की कमर से नीचे झूल गयीं।

रोहित ने अपनी टीचर को चोदना ज़ारी रखा और नीरा जल्दी ही फिर से गरम हो गयी और उत्तेजना से आगे-पीछे खिसकती हुई रोहित के धक्कों का जवाब देने लगी।

“चोद रोहित मुझे… मेरी चूत बहुत प्यासी है… चोद… जोर-जोर से ठेल अपना लण्ड… बुझा दे अपनी टीचर की चूत की आग…” नीरा बड़बड़ाते हुई चुदवाने लगी।

रोहित भी नीरा की चूत में अपना लण्ड जोर-जोर से पेलने लगा। जब रोहित झड़ने को हुआ तो उससे थोड़ा पहले ही नीरा रोहित के लण्ड पे चूतड़ उठा-उठाकर अपनी चूत चुदवाती हुई फिर से झड़ गयी। रोहित भी नीरा के झड़ने के फौरन बाद उसकी चूत में अपना लण्ड जड़ तक ठाँसकर झड़ गया और नीरा की चूत को दूसरी बार अपने लण्ड की मलाई से भर दिया। रोहित आगे झुक कर नीरा के ऊपर पस्त हो गया।

नीरा ने रोहित को अपनी बाँहों में कसकर लपेट लिया और उसके चेहरे को ताबड़तोड़ चूमने लगी। बीच-बीच में नीरा अपनी चूत को सिकोड़कर रोहित के फड़कते लण्ड को महसूस कर रही थी। नीरा जानती थी कि जो कुछ अभी हुआ वोह बहुत गलत था पर उसे कोई अफसोस या पछतावा नहीं था।

बहुत समय के बाद आज नीरा को कुछ तृपति मिली थी इतना मज़ा आया था। रोहित का लण्ड जब तक नर्म होकर उसकी चूत से बाहर नहीं फिसला तब तक नीरा रोहित को अपने से चिपकाए रही। रोहित ने पीछे हटकर अपनी टीचर को निहारा। नीरा अपनी टाँगें फैलाए डेस्क पर पसरी हुई थी और उसने अपनी टाँगें आपस में मिलाने का कष्ट भी नहीं किया और उसकी नंगी चूत में से रोहित के लण्ड का सफेद गाढ़ा रस बाहर रिस रहा था। नीरा की चूचियां उसकी तेज़ साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं।

“रोहित…” नीरा धीरे से बोली।

“कहिए… ढिल्लो मैडम…”

“थैंक यू…”

“थैंक यू?” रोहित ने अविश्वास से दोहराया।

“हाँ रोहित… थैंक यू… बहुत समय के बाद किसी ने मेरी चूत को चोदकर मुझे इतना प्यारा एहसास करवाया है। मुझे आज बहुत मज़ा आया…”

“काश आप मेरी एनाटामी की टीचर होतीं तो मैं आपसे कालेज के बाद जरूर ट्यूशन लेता…”

“चिंता मत कर रोहित। मैं तुझे एनाटामी बहुत अच्छे से पढ़ाऊँगी…” दोनों हँसने लगे और फिर नीरा बोली- “ओह गाड… मेरे कपड़ों कि हालत तो देखो…”


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