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नीरा ने डेस्क से उतरकर अपनी फटी हुई पैंटी मुश्कुराते हुए उठाकर रोहित को यह कहकर पकड़ा दी कि वोह उनकी आज की चुदाई की यादगार है। रोहित ने भी मुश्कुराते हुए नीरा की पैंटी अपनी जेब में भर ली। रोहित का लण्ड अभी भी पैंट के बाहर लटक रहा था। नीरा ने नीचे बैठकर उसके लण्ड को मुँह में लेकर चूसते हुए साफ किया और फिर उसके लण्ड को पैंट में डालकर उसका ज़िप्पर बँद कर दिया। फिर बिना किसी शरम के अपने होंठों पे चपचपाते हुए जीभ फिरा कर उसके लण्ड का स्वाद लेने लगी और मुश्कुराती हुई बड़े आरम से अपनी ब्रा पहनने लगी। फिर बगैर पैंटी के ही अपनी सलवार पहनते हुए दो अँगुलियों से अपनी चूत में से रोहित के लण्ड का रस निकालकर शरारत से मुश्कुराते हुए चाटने लगी। फिर सलवार पहनकर अपनी फटी कमीज़ को जितनी ढँग से हो सकता था पहन लिया।
“आय एम सारी… मैंने आपके कपड़े फाड़ दिए…” रोहित बोला।
“तू चिंता मत कर… मैं सम्भाल लूँगी पर अगली बार ध्यान रखना…”
“अगली बार मैडम?”
“तू इसे आखिरी बार तो नहीं समझ रहा है ना? अभी तो तुझे एनाटामी और बहुत से लैसन देने बाकी हैं…”
“उम्म… मुझे पता नहीं था कि आप क्या सोचेंगी…”
जवाब में नीरा ने पास आकर अपने होंठ रोहित के होंठों पे रख दिये। रोहित ने भी नीरा को पकड़कर अपनी जीभ नीरा के पहले से खुले होंठों के बीच से उसके मुँह में घुसा दी। दोनों कुछ देर इसी तरह एक दूसरे के मुँह में अपने जीभ डालकर पागलों की तरह चूमते रहे और फिर नीरा साँस लेने के लिए पीछे हटी।
“वाह… मैं तो भूल ही गयी थी कि इस तरह से किस करना कैसा लगता है…” नीरा हाँफती हुई बोली।
फिर दोनों अपने-अपने घर के लिए निकल गये। घर जाते हुए नीरा रोहित से अपनी चुदाई के बारे में ही सोच रही थी और उसे ताज्जुब हुआ कि उसने खुद पहले ऐसा करने का क्यों नहीं सोचा। क्यों वोह सिर्फ अपनी शोखियां और दिल्लगी करके लड़कों को और साथ में खुद को तड़पाती रही। शायद वोह यह सब करके अन्जाने में लोगों को लुभाकर रोहित जैसा कदम उठाने के लिए ही उक्साती थी। पर अब नीरा बहुत खुश थी और उसे इस बात की भी खुशी थी कि वोह स्कूल छोड़ के कालेज में पढ़ाने लगी थी। क्योंकी जो आज हुआ वोह तो कभी ना कभी होना ही था और अगर ऐसा स्कूल के किसी ना-बालिग लड़के साथ हो जाता तो वोह काफी मुसीबत में पड़ सकती थी।
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नीरा ने डेस्क से उतरकर अपनी फटी हुई पैंटी मुश्कुराते हुए उठाकर रोहित को यह कहकर पकड़ा दी कि वोह उनकी आज की चुदाई की यादगार है। रोहित ने भी मुश्कुराते हुए नीरा की पैंटी अपनी जेब में भर ली। रोहित का लण्ड अभी भी पैंट के बाहर लटक रहा था। नीरा ने नीचे बैठकर उसके लण्ड को मुँह में लेकर चूसते हुए साफ किया और फिर उसके लण्ड को पैंट में डालकर उसका ज़िप्पर बँद कर दिया। फिर बिना किसी शरम के अपने होंठों पे चपचपाते हुए जीभ फिरा कर उसके लण्ड का स्वाद लेने लगी और मुश्कुराती हुई बड़े आरम से अपनी ब्रा पहनने लगी। फिर बगैर पैंटी के ही अपनी सलवार पहनते हुए दो अँगुलियों से अपनी चूत में से रोहित के लण्ड का रस निकालकर शरारत से मुश्कुराते हुए चाटने लगी। फिर सलवार पहनकर अपनी फटी कमीज़ को जितनी ढँग से हो सकता था पहन लिया।
“आय एम सारी… मैंने आपके कपड़े फाड़ दिए…” रोहित बोला।
“तू चिंता मत कर… मैं सम्भाल लूँगी पर अगली बार ध्यान रखना…”
“अगली बार मैडम?”
“तू इसे आखिरी बार तो नहीं समझ रहा है ना? अभी तो तुझे एनाटामी और बहुत से लैसन देने बाकी हैं…”
“उम्म… मुझे पता नहीं था कि आप क्या सोचेंगी…”
जवाब में नीरा ने पास आकर अपने होंठ रोहित के होंठों पे रख दिये। रोहित ने भी नीरा को पकड़कर अपनी जीभ नीरा के पहले से खुले होंठों के बीच से उसके मुँह में घुसा दी। दोनों कुछ देर इसी तरह एक दूसरे के मुँह में अपने जीभ डालकर पागलों की तरह चूमते रहे और फिर नीरा साँस लेने के लिए पीछे हटी।
“वाह… मैं तो भूल ही गयी थी कि इस तरह से किस करना कैसा लगता है…” नीरा हाँफती हुई बोली।
फिर दोनों अपने-अपने घर के लिए निकल गये। घर जाते हुए नीरा रोहित से अपनी चुदाई के बारे में ही सोच रही थी और उसे ताज्जुब हुआ कि उसने खुद पहले ऐसा करने का क्यों नहीं सोचा। क्यों वोह सिर्फ अपनी शोखियां और दिल्लगी करके लड़कों को और साथ में खुद को तड़पाती रही। शायद वोह यह सब करके अन्जाने में लोगों को लुभाकर रोहित जैसा कदम उठाने के लिए ही उक्साती थी। पर अब नीरा बहुत खुश थी और उसे इस बात की भी खुशी थी कि वोह स्कूल छोड़ के कालेज में पढ़ाने लगी थी। क्योंकी जो आज हुआ वोह तो कभी ना कभी होना ही था और अगर ऐसा स्कूल के किसी ना-बालिग लड़के साथ हो जाता तो वोह काफी मुसीबत में पड़ सकती थी।
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