S
StoryPublisher
Guest
.
उसकी हाँ से मेरे मुरझाये हुए लण्ड में थोड़ा जान आ गई। उसके हाथ भी उसको सहला रहे थे और फिर हम रचित के लण्ड की बात करने लगे। मेरा खड़ा हो गया। मैंने बात-बात में कहा और आज हमने रचित के यहाँ जो-जो किया वो उसको सुना दिया।
वो चौंक गई- “अरे…”
फिर मैंने कहा- “कल तुमको भी रचित से चुदवा दूँगा। घबराओ मत…” फिर हम लोग आराम से सेक्स करने लगे। चुदाई के तीसरा दौर था तो मेरा निकल ही नहीं रहा था, सुजाता रचित के लण्ड के ख्याल में खोई हुई मस्त हो रही थी। और मैं मस्त धक्के दे रहा था।
वो दो बार झड़ गई, बोली- “ओह नवीन, आज तो तुमने बहुत मजा दिया, क्या किया आज बबीता भाभी ने जो तुमको इतना जोश आ गया?”
“कल देखना रचित कैसे तुमको चोदता है। अब मुझे और सुजाता को भी ऐसे बात करने में मजा आने लगा और फिर मैंने कहा- “यार, मैं झड़ने वाला हूँ…” और मैंने अपना सारा वीर्य अंदर चूत में ही गिरा दिया।
मैंने रात को ही रचित को फोन किया- “लाइन साफ़ है, कल का कार्यक्रम तय है भाई…” और फोन सुजाता के कान में लगा दिया।
वो बोला- “ठीक है भाई, तू कल देखना कि मैं तेरे बीवी को कैसे चोदता हूँ। वो बोलेगी कि मजा आ गया, नवीन ने कभी नहीं किया ऐसा जोरदार सेक्स। कल भाभी की चूत को सही लण्ड मिलेगा…”
“ठीक है, बाय यार, कल मिलते हैं, कल चोद लेना जितना चोदना हो अपनी भाभी को…” आने वाले कल का जोश सबके सर चढ़कर बोल रहा था।
सवेरे हम अपने काम पर निकल गए, शाम को सबको रचित के घर जमा होना था, खाना भी वहीं था और पीना भी। हमने साथ बैठकर शराब पी और मस्ती का दौर चालू हो गया।
मैं रचित के लण्ड पर हाथ लगा कर बोला- “देखो सुजाता, रचित का…”
और रचित ने भी मेरा लण्ड पकड़ लिया।
सुजाता शरमा गई।
फिर भाभी आ गई- “हटो, मैं मजा लूंगी नवीन के साथ तो…”
रचित हट गया, मैंने सुजाता के भी कपड़े खोलने शुरू कर दिए और साथ ही मैं बबीता भाभी को भी चूम रहा था। जैसे ही मैंने सुजाता की ब्रा खोली।
तो रचित बोला- “वाह भाभी… आपके चूचे क्या माल हैं?” वो उनके ऊपर झुक गया, उनको ऐसे चूमने लगा जैसे उसने पहली बार चूचियाँ देखी हों।
बबीता भाभी भी नंगी हो गई। अब हम सब नंगे थे।
सुजाता ने जैसे ही रचित के लण्ड के हाथ लगाया, वो बोली- “वाह… इसको कहते हैं लण्ड। यार नवीन, धन्यवाद यार, तुम जैसा पति सबका होना चाहिए…”
भाभी बोली- “नहीं सुजाता, रचित जैसा पति… इन्हीं का चमत्कार है कि हम दोनों एक दूसरे के पति से चुद रही हैं…”
सुजाता ने रचित का लण्ड मुँह में ले लिया और इधर भाभी ने भी मेरा लण्ड मुँह में ले लिया। आज मैं ऐसा नजारा देखकर जल्दी झड़ने वाला था तो मैंने कहा- “भाभी मैं झड़ने वाला हूँ…”
“आने दो भैया… मैं तुम्हारे वीर्य की प्यासी हूँ…”
सुजाता ने उसको ऐसा करते हुए देखा तो बोली- यह क्या भाभी?
भाभी ने कहा- “ऐसा तो बहुत अच्छा लगता है, एक बार तुम भी रचित का पीकर देख लो, अच्छा लगे तो आगे करना और नहीं लगे तो कोई बात नहीं…”
.
उसकी हाँ से मेरे मुरझाये हुए लण्ड में थोड़ा जान आ गई। उसके हाथ भी उसको सहला रहे थे और फिर हम रचित के लण्ड की बात करने लगे। मेरा खड़ा हो गया। मैंने बात-बात में कहा और आज हमने रचित के यहाँ जो-जो किया वो उसको सुना दिया।
वो चौंक गई- “अरे…”
फिर मैंने कहा- “कल तुमको भी रचित से चुदवा दूँगा। घबराओ मत…” फिर हम लोग आराम से सेक्स करने लगे। चुदाई के तीसरा दौर था तो मेरा निकल ही नहीं रहा था, सुजाता रचित के लण्ड के ख्याल में खोई हुई मस्त हो रही थी। और मैं मस्त धक्के दे रहा था।
वो दो बार झड़ गई, बोली- “ओह नवीन, आज तो तुमने बहुत मजा दिया, क्या किया आज बबीता भाभी ने जो तुमको इतना जोश आ गया?”
“कल देखना रचित कैसे तुमको चोदता है। अब मुझे और सुजाता को भी ऐसे बात करने में मजा आने लगा और फिर मैंने कहा- “यार, मैं झड़ने वाला हूँ…” और मैंने अपना सारा वीर्य अंदर चूत में ही गिरा दिया।
मैंने रात को ही रचित को फोन किया- “लाइन साफ़ है, कल का कार्यक्रम तय है भाई…” और फोन सुजाता के कान में लगा दिया।
वो बोला- “ठीक है भाई, तू कल देखना कि मैं तेरे बीवी को कैसे चोदता हूँ। वो बोलेगी कि मजा आ गया, नवीन ने कभी नहीं किया ऐसा जोरदार सेक्स। कल भाभी की चूत को सही लण्ड मिलेगा…”
“ठीक है, बाय यार, कल मिलते हैं, कल चोद लेना जितना चोदना हो अपनी भाभी को…” आने वाले कल का जोश सबके सर चढ़कर बोल रहा था।
सवेरे हम अपने काम पर निकल गए, शाम को सबको रचित के घर जमा होना था, खाना भी वहीं था और पीना भी। हमने साथ बैठकर शराब पी और मस्ती का दौर चालू हो गया।
मैं रचित के लण्ड पर हाथ लगा कर बोला- “देखो सुजाता, रचित का…”
और रचित ने भी मेरा लण्ड पकड़ लिया।
सुजाता शरमा गई।
फिर भाभी आ गई- “हटो, मैं मजा लूंगी नवीन के साथ तो…”
रचित हट गया, मैंने सुजाता के भी कपड़े खोलने शुरू कर दिए और साथ ही मैं बबीता भाभी को भी चूम रहा था। जैसे ही मैंने सुजाता की ब्रा खोली।
तो रचित बोला- “वाह भाभी… आपके चूचे क्या माल हैं?” वो उनके ऊपर झुक गया, उनको ऐसे चूमने लगा जैसे उसने पहली बार चूचियाँ देखी हों।
बबीता भाभी भी नंगी हो गई। अब हम सब नंगे थे।
सुजाता ने जैसे ही रचित के लण्ड के हाथ लगाया, वो बोली- “वाह… इसको कहते हैं लण्ड। यार नवीन, धन्यवाद यार, तुम जैसा पति सबका होना चाहिए…”
भाभी बोली- “नहीं सुजाता, रचित जैसा पति… इन्हीं का चमत्कार है कि हम दोनों एक दूसरे के पति से चुद रही हैं…”
सुजाता ने रचित का लण्ड मुँह में ले लिया और इधर भाभी ने भी मेरा लण्ड मुँह में ले लिया। आज मैं ऐसा नजारा देखकर जल्दी झड़ने वाला था तो मैंने कहा- “भाभी मैं झड़ने वाला हूँ…”
“आने दो भैया… मैं तुम्हारे वीर्य की प्यासी हूँ…”
सुजाता ने उसको ऐसा करते हुए देखा तो बोली- यह क्या भाभी?
भाभी ने कहा- “ऐसा तो बहुत अच्छा लगता है, एक बार तुम भी रचित का पीकर देख लो, अच्छा लगे तो आगे करना और नहीं लगे तो कोई बात नहीं…”
.