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ज़िंदगी भी अजीब होती है Restart

गेट खुलते ही वो झट से अंदर आई और बोली कि कोड बताओ मैने कहा कॉन सा कोड तो वो बोली जिस ऑर्गनाइज़ेशन के लिए तुम काम करते हो मैं भी उसी की एजेंट हूँ मैने झूठ बोलते हुए कहा कि मेडम आपको कोई ग़लत फ़हमी गयी है मैं तो एक टूरिस्ट हूँ जो घूमने आया है तो उसने कहा एजेंट शेरशाह, आप कोड बताओ ताकि हम फिर बात कर सके

शेरशाह , तो इसे मेरा कोड नेम पता था पर ये सब तो नॉर्मल था एजेंट्स वास्तव मे बहुत ही शातिर होते है मैने कहा सॉरी ट्रूली आप को ज़रूर कोई वहाँ हुआ है तो वो बोली नोसिखिए लोगो के साथ काम करने का यही प्राब्लम होती है काम आता नही और आ जाते है फील्ड मे तुम्हे पता है तुम्हारा मिशन इम्प्लान्ट हो चुका है हमारा एजेंट पता नही ज़िंदा है या नही और तुम अपनी आइडी के बारे मे सोच रहे हो रूको एक मिनट

उसने तुरंत ही देल्ही हेडक्वॉर्टर मे बॉस से कॉंटॅक्ट किया तब मुझे उस पे ट्रस्ट हुआ और बॉस से लताड़ भी पड़ी बॉस बोले पता नही क्या सोच कर मिनिस्ट्री तुम जैसे को उठा लाई बॉस ने डेड लाइन दी और दो चार और बाते सुना दी मैने उस लेडी को सॉरी कहा उसने कहा की आगे से ध्यान रखना और हा थोड़े से फ्लेक्सिबल हो जाओ ये फील्ड बहुत इम्तिहान लेने वाली है तुम्हारे

मैने उसका नाम पूछा तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि वॉट’स इन आ नेम डियर , बट यू कॅन कॉल मी सोफीया , तो मैने कहा बाकी टीम मेंबर कहाँ है वो बोली शाम तक हमें कंप्यूटर एक्सपर्ट मिल जाएगा वैसे तुम्हे 3-4 लोगो से ही काम चल जाएगा ना मैने कहा हम हो जाएगा दो दिनो मे ही हम ने काफ़ी इनोफ़ॉर्मेशन निकाल ली थी एरपोर्ट के एग्ज़िट के सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि उसने एक टॅक्सी हाइयर की थी

तो उठा लिया टॅक्सी वाले को और जानी की फोटो दिखा कर पूछताछ शुरू की उसने तुरंत ही बता दिया कि कहाँ पर ड्रॉप किया था उसे तो मैने कृष्णन को उस एरिया मे भेजा रेकी के लिए तो पता चला कि जानी जिस घर मे रह रही थी वो वहाँ के एक लोकल गुंडे का घर था जो ड्रग्स मे डील करता था लोकल गुंडे का प्राग की सिटिज़न जानी से कैसे कनेक्षन बात कुछ समझ नही आई

सोफ़िया ने कुछ और जानकारी जुटाई थी जो बड़ी ही इंपॉर्टेंट थी मैं चाहता तो 10 मिनट मे जानी को उठा सकता था पर बॉस का ऑर्डर था कि चुपचाप टास्क कंप्लीट करना तो थोड़ी मुस्किल हो रही थी , सोफीया ने जुगाड़ करके जानी वाले बंगले की सामने वाली बिल्डिंग मे एक फ्लॅट का इंतज़ाम कर दिया था ताकि हम अच्छे से ओब्ज़र्व कर सके बस किसी तरह से ये कोनफेरम हो जाए क़ि मेरा एजेंट उसी बंगले मे है तो मैं उसे झट से निकल लाउ

पिछले कई दिनो से हम लोग अपने प्लान को फिनिश करने के चक्कर मे थे और जैसे ही अंदर के फोन का कॉल रेकॉर्ड मेरे हाथ मे आया तो मेरी आँखे चमक उठी मैने सोफ़िया को कहा कि क्या तुम मेरे साथ आज डिन्नर करने चलोगि कुछ ही दिनो मे उस से थोड़ी दोस्ती सी भी हो गयी थी उसने एक भरपूर निगाह मेरे उपर डाली और बोली ओके चलते है आज शाम

तो मैं भी खुश हो गया सोचा कई दिनो से काम मे पड़े है तो थोड़ा सा रेफ्रेशमेंट भी हो जाएगा और सोफीया जिसका फिगर गीता जैसा था तो उसपे भी थोड़ी सी लाइन मार लूँगा हालत अपने कुछ ऐसे हो गये थे कि कुछ दिन चूत ना मिले तो भारी भारी सा लगता था तो फिर उस शाम मैं और सोफीया निकल पड़े बाहर के लिए

उसको उस सहर के बारे मे काफ़ी अच्छी जानकारी थी तो उसी ने एक रेस्टोरेंट रेकमेंड किया डिन्नर काफ़ी शानदार था उसके बाद हम बाहर रोड पर ही बूज़ करते हुए घूमने लगे फिर हम एक टेलिफोन बूथ के नीचे बैठ गये और बाते करने लगे वो बोली तुम अच्छे पर्सन हो विद प्यूर हार्ट तो मैने कहा तुम भी अच्छी हो इंडिया मे मेरी एक फ्रेंड है तुम्हारी ही एज की

तो मुझे उसकी याद आती है जब भी तुमको देखता हूँ वो बोली मेरी एज की फ्रेंड ?????????????????????????? मैने कहा डियर, एवेरिवन हॅविंग सम नॉटी सीक्रेट्स तो वो मेरी आँखो मे देखते हुए बोली लगते नही हो पर हो बड़े ही घुटे हुए जो मैने कहा सच कहूँ तो तुम भी बड़ी ही प्यारी हो वो बोली इम मेच्यूर लेडी नाउ नोट आ प्रेटी यू कॅन सी सम वृन्केल्स ऑन माइ फेस मैने कहा देन व्हाट दट थिंग्स आर नोट मॅटर

इफ़ यू आर ब्यूटिफुल , यू आर …………. ………………….. तो वो ब्लश करने लगी वो बोली फ्लर्ट कर रहे हो मेरे साथ मैने कहा यार ऑल लॅडीस की यही प्राब्लम होती है अगर कोई उनकी तारीफ करे तो उनको लगता है कि फ्लर्ट कर रहे है वो बोली स्मार्ट आन्सर मैने कहा सोफीया मिशन के बाद हम अलग हो जाएँगे क्या पता फिर कभी मिल पाए या ना मिल पाए

तो वो बोली डॉन’ट वरी वी विल बी इन टच थ्रू फ़ेसबुक आइ विल टेल यू माइ ईद देअर मैने कहा पर यार मेरा तो एकाउंट है ही नही तो वो बोली कि डॉन’ट वरी मैं बना दूँगी तुम्हारा एकाउंट फिर हम वोड्का के सीप लेने लगे ठंडी हवा उसके खुले बालो को और भी लहरा रहे थे तो मुझे वो बड़ी अच्छी लगने लगी मैने कहा डियर कुड आइ एबल टू किस यू

तो उसने मुझे चीक्स पर किस कर दिया मैने कहा आइ डिज़र्व आ स्मूच डियर, तो उसने अपनी आँखे ततेरते हुवे कहा आर यू क्रेज़ी मैने कहा यस आइ आम, और अगले ही पल मैने आगे बढ़ कर उसके लबों को अपने लबों से जोड़ दिया और उसको किस करने लगा पर जल्दी ही मुझसे दूर हो गयी और बोली वी कॅन’ट डू दिस यू आर लाइक माइ सन’स एज मैने कहा डियर दिस थिंग डज़न’ट मॅटर

मैने बूथ का दरवाजा खोला और उसको अपने समेत अंदर खीच लिया उस छोटी सी जगह मे हम दोनो एक दूसरे से सट कर खड़े थे मैने उसकी कमर मे हाथ डाला और उसको अपने से चिपका लिया तो मेरा पॅंट मे उभरा हुवा लंड उसकी योनि वाले हिस्से पर दबाव डालने लगा मैने सोफीया की आँखो मे देखा और फिर से उसको किस करने लगा उसके क्रीमी होठ मेरे होंठों से जुड़ चुके थे मैने अपना हाथ उसकी स्कर्ट मे डाल दिया

और पेंटी क उपर से ही चूत को दबाने लगा वाइट पैंटी धीरे धीरे गेली होने लगी थी मैने फिर उसकी पैंटी को घुटनो तक सरका दिया और अपनी ज़िप खोलकर लंड को बाहर निकाल कर उसके हाथ मे दे दिया वो उसे सहलात हुए बोली यू गॉट सच आ हॉट रोड और उसे भीचने लगी जबकि मैं अब उसकी गर्दन को चूमने लगा था सोफीया का शरीर भी अब अच्छे से रेस्पॉंड करने लगा था

 
मैने उसकी ड्रेस को खोल दिया और उसकी ब्रा के उपर से ही उसके बूब्स को दबाने लगा तो वो बोली डू इट फास्टर वी डॉन’ट हॅव मच टाइम डॉन’ट फर्गेट वी आर ऑन ड्यूटी उसने अपनी टाँगे थोड़ा सा फैला दी तो मैनी अपने लंड को वहाँ पर लगाया और अंदर डालने लगा सोफीया ने मुझे कस कर पकड़ लिया और मैं धीरे धीरे करके लंड को अंदर करने लगा मेरे जीवन मे ये पहला चान्स था

किसी गोरी में को रगड़ने का तो मैं थोड़ा सा ज़्यादा ही उत्तेजित हो रहा था और उपर से कुछ शराब का नशा तो मैं उसके लबों को पीते हुवे बस चोदना शुरू किया ही था कि मेरे फोन की रिंग बज उठी मैने झट से फोन को पिक किया तो मेरी टीम मेंबर ने बताया कि सर इसी वक़्त आप यहाँ आ जाइए कुछ इंपॉर्टेंट इन्फर्मेशन हाथ लगी है अब उसे कॉन बताए कि सर भी तो इंपॉर्टेंट काम ही कर रहा था

मैने चूत से लंड को बाहर निकाला और पॅंट को पहन ने लगा तो सोफीया बोली व्हाट हॅपंड तो उसने मुझे देखते हुए स्माइल दी और बोली बेटर लक नेक्स्ट टाइम फिर हम ने पार्किंग लॉट से कार ली और अपने अड्डे पर पहुच गये अब साला काम भी ऐसा था कि इसमे तुरंत ही रेस्पॉंड ज़रूरी था वरना हम इंडियन्स तो हर काम को टालने मे बड़े ही माहिर है

मैने कहा हाँ भाई बता क्या बात है तो उसने कहा कि सर, दो दिन बाद जानी एक पार्टी ऑर्गनाइज़ कर रही है और बात चेट से पता लगा है कि कुछ माफिया डॉन्स और इंटरनॅशनल हेड्स भी आने वाले है मैने कहा जैसे कि तो वो बोला सर जैसे …….. तो वो बोला सर लिस्ट ये रही आप ही पढ़ लो जैसे जैसे मैं लिस्ट पढ़ता गया तो मेरी आँखे फैलती गयी

मैने कहा ज़रा अपने डेटा बेस से लिस्ट मॅच करो तो बोला सर वो मई पहले ही कर चुका हूँ पर ख़ास बात ये है कि कुछ नाम ऐसे है जिनके बारे मे अलग अलग लोकेशन्स पर हमारे एजेंट्स के मिशन आक्टीवेट है मैने कहा कनेक्ट टू दा बॉस इमीडीएटली तो लगा फिर से फोन बॉस को मैने कहा सर ये बात है ईमेल देखिए लिस्ट आपके पास आ चुकी है तो कुछ देर बाद वो बोले

देखो बात ऐसी है कि हम डाइरेक्ट रूप से मिशन आक्टीवेट नही कर सकते वहाँ पर इस से दुश्मनो को फिर से युनाइटेड नेशन्स मे हमारे खिलाफ केस करने का मोका मिल जाएगा हा पर अगर तुम कुछ ऐसा प्लान कर सको कि बस अपना काम भी निकल जाए और पता भी ना हो तो फिर कुछ हो सकता है बॉस की ये ही बात तो मुझे बड़ी बुरी लगती थी दोनो हाथो मे लड्डू रखना हमेशा

मैने कहा सर कुछ लोग मर वर जाएँ तो , वो बोले मुझे पता था कि तुम्हे खुजली हो गयी होगी जो करना है करो पर इतना ध्यान रखना कि कही से भी ये नही लगना चाहिए कि रॉ की इनवोलव्मेंट है मैने कहा सर यू डॉन’ट वरी अब मैं मिशन पूरा होने के बाद ही कॉल करूँगा मैने सीपी को कहा कि जल्दी से बंगले का इन्नर और आउटर नक्शे का एग्ज़ॅक्ट ब्लूप्रिंट दो तो वो अपने काम मे लग गया

शराब का नशा कब का उतर चुका था अब टाइम था अपने प्लान को एक्सेक्यूट करने का मैने कहा हम अलग अलग एंट्री करेंगे बंगल मे सोफीया तुम गेस्ट बनकर जाओगी, पंकज तुम केर्टेकर बनकर और मैं जाउन्गा वेटर बनकर मैने सीपी से कहा तुम इधर ही रहोगे और हमे मॉनिटेर करोगे और जो भी हो पल पल की रिपोर्ट हमे देते रहोगे और हाँ सबसे मेन बात देअर् इस नंबर प्लान बी अगर कोई भी गड़बड़ होती है तो सीधा अंबुस करेंगे जो होगा देखा जायगा

तो फिर आख़िर वो दिन आ ही गया जब हमें अपना टारगेट सेट करना था पर अभी तक ये कनफार्म नही हुआ था कि हमारा एजेंट उधर था या नही तो लास्ट मोमेंट मैने थोड़ा सा चेंज किया कि टीम जानी को उठाएगी और मैं अपने एजेंट को देखूँगा अंदर और क्या पता कुछ और इन्फर्मेशन निकल आए तो तय दिन हम सब अपने अपने तरीके से एंटर कर गये

मैं वेटर के भेस मे था तो आसानी से लगभग पूरे ही बंगल मे घूम फिर रहा था तो मैने ओब्ज़र्व कर ही लिया कि अपराध की दुनिया की कई बड़ी हस्तिया मोजूद थी पर अपने को क्या अपने को तो बस अपने काम से काम रखना था पर कही पर भी जानी नही दिख रही थी मैने सोफीया से कहा कि जानी दिखी तो उसने भी मना किया तो मैं सोच मे पड़ गया कि कही सालो का ट्रॅप तो नही है ये

पर जल्दी ही मेरी चिंता दूर हो गयी जानी अपने किसी दोस्त या बाय्फ्रेंड जो भी था उसके साथ ही आ गयी और फिर पार्टी शुरू हो गयी तो एक डेढ़ घंटे बस फालतू का नाच गाना ही होता रहा फिर हमारे सीपी ने इन्फर्मेशन दी कि सर उपर के एक कमरे मे एक मीटिंग शुरू हो गयी है और अपना बंदा भी उधर ही है वो ही कुछ ऑपरेट कर रहा था मतलब की साला डबल गेम खेल गया था एजेन्सी के साथ

 


मैने कहा सोफीया दस मिनट बाद हम अपना प्लान एक्सेक्यूट कर देंगे तुम्हारा फोकस बस इस बात पे होना चाहिए कि जानी को सफाई से किडनॅप करना और फिर तुम बस निकल जाना मेरी या किसी भी टीम मेंबर की कोई फिकर करने की ज़रूरत नही है जल्दी ही हम सब नये अड्डे पर मिलेंगे ऑर्डर मैने दोबारा से दोहराया मैने फिर अपने साथी को कहा मैं उपर जा रहा हू ठीक दो मिनट बाद लाइट कट कर देना

जो भी करना है बस दो मिनट मे ही होगा , मैने फुर्ती से गन पर साइलेनसर लगाया और नाइट विजन पहन लिया लाइट कट होते ही मैने उस कमरे का लॉक खोला और एंटर कर गया हर कोई लाइट वालो को ही चिल्ला रहा था जबकि मैने चुपके से अपने एजेंट के पास जाकर उसकी बाँह को पकड़ लिया पर मुझसे एक बड़ी चूक हो गयी थी कि मैं भूल गया था की आजकल पवर बॅकप भी होता है

एक मिनट मे ही बल्ब फिर से रोशन हो गये और प्लान की ये खामी अब बड़ी मुसीबत खड़ी करने वाली थी , लाइट आते ही मेरी सिचुयेशन अकवर्ड हो गयी थी मैं अब टेबल के पास अपने एजेंट की बाँह पकड़े खड़ा था पालक झपकते ही कई गन्स मेरी तरफ तन गयी , मैने थोड़ी फुर्ती करते हुए मेज को अपनी ढाल बनाया और खिड़की को तोड़ते हुवे नीचे को कूद गया उसको लेकर

पीछे से धना धन गोलिया चलनी शुरू हो गयी नीचे गिरते ही थोड़ी चोट सी लग गयी सेफ लॅंडिंग हो नही पाई थी दूसरे बंदे की वजह से तो फिर मैने अपने को जैसे तैसे कवर किया था कि हमारी गाड़ी आ गयी मैने उसको धक्का देते हुए अंदर डाला और फिर खुद भी चढ़ गया ये सब बड़ी ही तेज़ी से हो गया था मैने कहा निकलो यहाँ से पर हमारे पीछे कुछ ही सेकेंड्स मे उनकी कार्स भी लग गयी थी

और सबसे बड़ी प्राब्लम ये थी कि बॅकप नही था और कंट्री भी दूसरी थी पर अब जो होना था वो तो होकर ही रहना था मैने उसको गन के बट से मारकर बेहोश किया और अपने साथी से बोला कि तू बस पूरा फोकस यहाँ से निकलने मे लगा बाकी मैं देखता हू उसने कहा सर सीट के नीचे फुल कोटा है अम्मू का मैने कहा वाह मेरे शेर अब देख तू आगे और पीछे मैं संभालता हू

पर तभी गोलियो की बोछार से हमारी कार का पिछला शीशा टूट गया तो मैने भी फाइरिंग शुरू कर दी तो दो चार बंदे उधर के भी गिर ही गये पर वो लोग उम्मीद से बहुत ही ज़्यादा थे मैने कहा यार देख सच्चाई तो ये है कि हम इनका सामना नही कर पाएँगे तू कोई शॉर्ट कट है तो बता वो बोला सर आगे एक इलाक़ा आएगा जहा पर कई सुनसान घर है उधर कुछ हो सकता है

मैने कहा उधर ही चल पर वो लोग भी लगातार पीछे बने हुए थे आख़िर मैने मक्ष 9 गन ली उसकी फाइरिंग रेंज कमाल की होती है कुछ कुछ एके 56 जैसी ही होती है मैने कहा कोशिश तो करता ही हूँ कुछ तो साले कम होंगे ही उपर से मुसीबत ये हुई की इतनी फाइरिंग की वजह से लोकल पोलीस भी ऐक्शन मे आ गयी थी तो सिचुयेशन बिल्कुल भी हमारे पक्ष मे नही थी

पर बस हम थे , तो मतलब हम ही थे, उस इलाक़े मे पहुचते ही हम तुरंत कार से उतरे और ऑपोसिट साइड के एक फ्लॅट मे घुस गये और फिर जल्दी ही वो इलाक़ा पोलीस और गंडो से भर गया मैने कहा आगे पीछे की लोकेशन बता जल्दी से तो पता चला कि हमारे से दो बिल्डिंग छोड़ कर एक लेक थी मैने कहा ठीक है हम लेक के रास्ते ही यहाँ से एस्केप करते है वो बोला पर सर पासिबल नही है

मैने कहा देख पोलीस और माफिया भिड़ रहे है तो हमे थोड़ा टाइम मिल रहा है और क्या तूने कभी रन्निंग नही की क्या तो वो बोला ठीक है सर जैसा आप कहे तो मैने उस बेहोश बोझ को अपने उपर लादा और बिल्डिंग के पार्किंग एरिया के पिछले एग्ज़िट से होते हुए लेक के रास्ते से निकल गये अगली सुबह हम अपने अड्डे पर थे वहाँ जाकर पता चला कि अफ़रा तफ़री के महॉल मे सोफीया ने जानी को उड़ा लिया था

सभी लोग बड़े ही थक गये थे , तो कुछ खाने पीने के बाद मैने कहा सोफीया जानी को इंटेरोगेट करो अच्छे से और हाँ कोई भी रहम नही करना तो वो हँसी और बोली देखते जाओ मैं क्या करती हू, दूसरी तरफ मैने हेडक्वॉर्टर मे बॉस को सारी रिपोर्ट दी और कहा की सर भाई साहब तो बड़े खिलाड़ी हो गये है बताओ क्या करू तो वो बोले उसको अभी कुछ नही करना है

मैं जल्दी ही टीम के वहाँ से निकालने का इंतज़ाम करता हूँ तुम इसे लेकर आओगे और सोफीया गायब हो जाएगी और जानी को दूसरे मेंबर्ज़ कवर करेंगे वो बोले कल रात तक तुम्हारा इंडिया लोटने का इंतज़ाम हो जाएगा पॅकिंग कर्लो मैं भी रिलॅक्स हुआ चलो मिशन कंप्लीट हुवा मैने फिर सोफीया को बुलाया और कहा जाने दो साली को और ज़रा मेरे साथ आओ

 
मैने कहा आओ ज़रा थोड़ा सा घूम फिर कर आते है तो सोफीया बोली अभी मुझे थोड़ा सा काम है तो शाम को चलते है मैने कहा ठीक है , फिर मैं भी अपनी पॅकिंग करने लग गया उसके बाद मैने सोचा की थोड़ी सी पूछताछ कर लेता हूँ हालाँकि मुझे उस चीज़ का ऑर्डर नही था पर ऐसे ही मेरे मन मे आया तो मैं दूसरे रूम मे गया और कुर्सी पर बैठ गया

मैने कहा हाँ तो भाई , चल अब फटाफट से बता दे कि तूने डिपार्टमेंट से गद्दारी क्यो की और क्या क्या इन्फर्मेशन उन लोगो से शेअर की पर ये जो एजेंट्सद होते है ना ये बड़े ही ढीठ होते है अब जो आसानी से मूह खोल दे वो साला कलंक ही है एजेंट के नाम पर तो मैने कहा ठीक है भाई मत बता पर तुझे भी अब पता तो है ही कि जो तेरे साथ बीतेगी तो भी वो कुछ ना बोला

मेरे मन मे तो आया कि इसकी गान्ड तोड़ दूं पर फिर जाने दिया , तो लंच करके मैं सो गया तो शाम को सोफी ने ही उठाया और कहा कि कितना सोते हो तुम मैने कहा यार आजकल तो नींद ही पूरी नही होती है वो मुझे ड्रिंक देते हुए बोली ये लो और रेडी हो जाओ हम लोग बाहर रहे है तो मैने कहा पर यहाँ इन कमिनो की सेक़ुरिटी तो वो बोली डॉन’ट वरी आइ विल मॅनेज ऑल थिंग्स

तो करीब घंटे भर बाद हम लोग बीच के लिए निकल पड़े शाम हो रही थी बड़ी मस्तानी हवा चल रही थी वाइट टॉप और ब्लू जीन्स मे सोफी बड़ी ही कमाल लग रही थी उसकी मोटी टाँगे जीन्स मे क़ैद बड़ी ही कातिल लग रही थी मैने कहा आज तो बड़ी ही हॉट लग रही हो तो वो ब्लश करने लगी कार ड्राइव करते हुवे मैं उसकी थाइस को रब करने लगा तो वो बोली ड्राइविंग पर ध्यान दो ना

पर मैं पूरे मूड मे था उस से छेड़खानी करने के तो मैने अपनी पॅंट की ज़िप को खोला और अपने टूल को बाहर निकाल लिया और सोफी का हाथ उसपर रख दिया तो वो बोली कही भी शुरू हो जाते हो मैने कहा जब साथ मे इतना हॉट पीस हो तो कंट्रोल करना मुश्किल होता है वो मेरे लंड को अपनी मुट्ठी मे भर कर दबाने लगी उसके गरम हाथो के स्पर्श से लंड मे जान आने लगी तो वो जल्दी ही खड़ा हो गया

मैने कहा सोफी, डार्लिंग, प्लीज़, किस इट, तो वो झुकी और मेरे लंड पर किस करने लगी मज़ा ही आ गया थोड़ी देर तक पूरे लंड पर किस करने के बाद उसने अपना मूह खोला और धीरे धीरे से उसको अपने मूह मे लेने लगी उसकी गरम सांसो से एक अलग ही अनुभूति हो रही थी सोफी ने फिर लंड को अपने दाँतों तले दबा लिया तो मेरे होंठो से सिसकारी निकल गयी

मैं बोला काट कर खाने का इरादा है क्या तो वो बोली तुम बस ड्राइविंग पर ही ध्यान दो ये मेरा पहला केस था जहाँ मैं गाड़ी चलाते हुए किसी को लंड चुस्वा रहा था धीरे धीरे सोफी पूरी मस्ती मे आकर लंड को चूसने लगी थी पूरा लंड उसके थूक मे सन चुका था मेरी जाँघो के बीच झुकी हुवी उस मस्त लेडी के कहने ही क्या थे और कितनी शिद्दत के साथ वो लगी हुवी थी

लंड चूस्टे हुवे सोफी बोली युवर डिक ईज़ सो सो हॉट आंड माइ पुसी इस गोयिंग वेट नाउ उसके होतो की पकड़ इतनी टाइट थी लॅंड पर की मई मस्ती क सागर मे गोते खाने लगा था उसने लंड को जड़ तक अपने गले मे उतार लिया था बराबर उसका मूह उपर नीचे होते हुए मुझे जन्नत का द्वार दिख रहा था मैं तो बुरी तरह से ही पिघल ने लगा था

करीब 15-20 मिनट तक वो ऐसे ही मेरे लंड पर झुकी हुई अपना काम करती रही और फिर मुझे तो झड़ना था ही लंड से सफेद रस की पिचकारी निकली और उसके मूह मे जाने लगी सोफी गटगट मेरे सारे पानी को पी गयी मेरी तो हालत ही पस्त हो गयी फिर उसके कार के डेस्क से टिशू लिया और अपने चेहरे को सॉफ करते हुए बोली युवर क्रीम ईज़ सो टेस्टी बीच भी आने वाला था तो मैने अपने कपड़े ठीक कर लिए

गाड़ी को पार्किंग मे लगा कर हम दोनो टहलने लगे मैने उसका हाथ अपने हाथ मे पकड़ा हुए था बाते करते हुए मैने पूछा तुम इस प्रोफेशन मे कब से हो तो वो बोली हो गये 14-15 साल बस सोच रही हू कि थोड़े दिन मे रिटाइयर्मेंट ले लूँ और शांति से किसी लंड पर ज़िंदगी बिताऊ तो मैं मुस्कुरा दिया . पता नही क्यो आज बीच पर भीड़ कुछ कम लग रही थी

सोफी बोली आओ पानी मे चलते है उसने बॅग से अपने लिए बिकनी निकाली और उसको पहनते हुए बोली तुम भी शॉर्ट्स डाल लो तो मैं भी चेंज करने लगा बिकनी मे उसका भरा हुवा शरीर बड़ा ही हॉट लग रहा था पता ही नही चला की कब मेरा लंड फिर से तन गया मैने उसके होंठो पर एक किस किया और फिर चल पड़े हम समुंदर की लहरो मे कभी हम एक दूसरे के उपर पानी उडेलते तो कभी पानी मे डुबकी लगाते जब लहर तेज़ी से आती तो खरा पानी पल भर मे ही सारॉबार कर जाता

 
करीब आधे घंटे तक हम लोग पानी मे एक दूसरे से मस्ती करते रहे फिर हम बाहर आ गये मैं दौड़ कर दो बॉटल बियर ले आया तो वही किनारे पर बैठ कर हम चुस्किया लेने लगे थोड़ा थोड़ा सा अंधेरा होने लगा था मैने कहा डियर, आओ ज़रा उधर पेड़ों की तरफ घूमने चलते है तो उसने मुझे एक स्माइल दी और फिर हम दोनो पेड़ो की तरफ आ गये उधर आते ही मैने उसको अपनी बहो मे भर लिया और किस करने लगा उसके होंठो पर कुछ बियर की बूंदे लगी हुई थी जिसे मैं चाट गया

सोफी बोली तुम हमेशा ही इतने उतावले रहते हो क्या मैने कहा पहले का तो पता नही पर जब से तुमको देखा है तो बस फिर कुछ याद नही वो बोली बाते अच्छी करते हो तुम , वो बिल्कुल मुझसे सटी हुई थी उसके रसीले होंठो को पीते पीते मैने उसकी पैंटी को नीचे सरका दिया और उसके कुल्हो को अपने हाथो मे थाम लिया सोफी ने भी अपनी बाहें मेरे गले मे डाल दी और किस का जवाब देने लगी

अब मैने उसकी ब्रा को भी खोल कर हटा दिया और उसके मोटे मोटे चुचो को दबा ने लगा तो सोफी गरम होने लगी उसकी निप्पल्स 1 इंच के लगभग बाहर को तन गये थे तो मैं उसके बूब्स को लिक्क करने लगा उसकी स्किन बहुत ही ज़्यादा सॉफ्ट थी वो अपना हाथ नीचे की ओर ले गयी और मेरे लंड को हिलाने लगी दो गरम जिस्म उस वातावरण मे भड़क उठे थे

मैं एक हाथ से उसकी चूची को दबा रहा था तो दूसरी को अपने मूह मे भरे हुए था सोफी की धड़कन बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी करीब बीस पचीस मिनट तक हम लोग ऐसे ही एक दूसरे की अगन को भड़काते रहे फिर मैने सोफी को वही नीचे रेत पर पटक दिया और उसकी जाँघो को फैला दिया उसकी गोरी गोरी चूत के फड़कते होंठ मुझे आमंत्रण दे रहे थे

मैं उस पर झुका और उसकी प्यारी सी चूत को अपने मूह मे भर लिया सोफी उस गरम रेत पर तड़प उठी उसके तन बदन मे एक मस्तानी आग भड़क उठी थी उसकी चूत से बहता हुआ नमकीन पानी का स्वाद मेरी जीभ और होंठो पर लग रहा था मैं चटखारे लेते हुए सोफी की चूत को चाटने लगा तभी उसने पास रखी बियर की बॉटल उठाई और अपनी योनि पर बूंदे टपकाने लगी तो कसम से फिर मज़ा ही आगया

वो थोड़ी थोड़ी देर मे कुछ कुछ बूंदे चूत पर गिरते जाती जिन्हे मैं झट से पीए जा रहा था 5-7 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा फिर मैं वहाँ से हट गया और सोफी को डॉगी स्टाइल मे होने को कहा तो वो झट से ही पोज़िशन मे आ गयी मैने उसके कुल्हो को सहलाया और फिर अपने लंड को उसकी गरम चूत से सटा दिया उस दिन तो काम अधूरा रह गया था पर आज ऐसी कोई बंदिश नही थी

लंड पर गीली चूत के पानी का अहसास होते ही वो फुफ्कार्ने लगा तो मैने भी अब देर ना करते हुए उसको चूत मे उतारने लगा तो सोफी आहे भरने लगी सोफी ने अपनी दोनो जाँघो को आपस मे चिपका लिया तो चूत थोड़ी सी टाइट सी हो गयी और उसकी पंखुड़िया लंड पर दबाव डालने लगी पर वो लंड ही क्या चूत को चीर ना सके तो जैसे ही मैने अगला धक्का लगाया लंड चूत को फैलाता हुआ अंदर प्रविष्ट हो गया

मैने सोफी की कमर को पकड़ लिया और अब हमारी चुदाई स्टार्ट हो गयी सोफी की चूत इतनी गरम हो गयी थी कि मुझे लगा कि कही लंड की खाल आज जल ही ना जाए पर ये तो खाली मेरा वहम ही था काफ़ी देर तक मैं उसको डॉगी स्टाइल मे ही चोदता रहा फिर मैं उसके उपर आ गया और उसको किस करते हुवे रगड़ने लगा सोफी की जीभ मेरी जीभ से टकरा रही थी

और हम दोनो के रगड़ खाते हुए जिस्म एक अलग सा ही घर्षण कर रहे थे दोनो के बदन इस कदर एक दूजे मे समा गये थे कि बस कहना ही क्या आधा घंटा से भी ज़्यादा हम लोग एक दूसरे मे समाए रहे मैने कहा सोफी अंदर ही डिसचार्ज हो जाउ क्या तो वो बोली नो नो उधर नही तो मैने लंड को बाहर खिचा और फिर उसके पेट पर ही अपना पानी छोड़ दिया

मैं भी उसके बगल मे ही लेट गया और अपनी सांसो को संभालने लगा कुछ देर बाद मैने देखा की सोफी अभी भी आँख बंद किए लेटी है तो माब् उठा और अपना शॉर्ट्स पहन ने लगा कुछ देर बाद उसने भी बिकनी को पहन लिया फिर हम चेंजिंग रूम मे जाकर नहाए और तैयार हो कर बाहर आए उसके बाद मैं उसको लेकर वही पास की स्ट्रीट पर डिन्नर के लिए ले कर गया

डिन्नर के बाद हम दोनो बाते कर रहे थे मैने कहा सोफी तुम्हारी बड़ी याद आएगी तो वो बोली अरे हम लोग टच मे रहेंगे और फिर मैं तो 6-7 महीने मे इंडिया आती ही रहती हू तो फिर मिलना भी होता रहेगा और फिर मैने तुम्हारा फ़ेसबुक एकाउंट तो बना ही दिया है तो हम बात करते ही रहेंगे फिर उसने मेरा मूड चियर अप करने के लिए मुझे किस किया

मैने पूछा रिटाइर होने के बाद क्या करोगी तो वो बोली कुछ नही बस पीस से रहूंगी पैसो की तो कोई प्राब्लम है नही मेरे खुद के पास बहुत मनी है और फिर हज़्बेंड प्रोफेसर है तो उनकी भी अच्छी सॅलरी है बस बाकी की ज़िंदगी फॅमिली के साथ ही एंजाय करते हुवे बिताउन्गी इतना ही प्लान है तुम बताओ क्या सीन है मैने कहा कुछ नही बस वापिस जाते ही गर्लफ्रेंड की फॅमिली से बात करूँगा और फिर शादी करनी है

वो बोली गुड आइडिया, रात काफ़ी हो गयी थी और अगली सुबह मुझे निकलना भी था तो फिर हम लोग वापिस आ गये सुबह हुई तो सब लोग अपने अपने बॅग पॅकिंग मे लगे थे आज इस टीम को बिखर जाना था जब तक कि कोई दूसरा मिशन ना हो , तो फिर सब एक दूसरे को अलविदा कहकर अपने अपने रास्ते हो लिए, फ्लाइट का ज़्यादा तर सफ़र सोकर ही कटा और फिर एक थका देने वाले सफ़र के बाद आख़िर मैने मुंबई एरपोर्ट पर लॅंड कर ही लिया

एरपोर्ट से बाहर आया थोड़ा फ्रेश वग़ैरा हुआ फिर बॉस के लिए मेसेज छोड़ा और कहा कि दो चार दिन मुंबई मे ही बिताकर आउन्गा और रिपोर्ट ई-मैल कर दूँगा सुबह के 5 बज रहे थे एक कॉफी पी और फिर एक टॅक्सी हाइयर कर ली पुणे के लिए अब मेरे और निशा के बीच बस कुछ था तो ये थोड़ा सा सफ़र टॅक्सी वाले ने रेडियो पे कुछ रोमॅंटिक सॉंग्स प्ले कर रखे थे तो दिल एक बार फिर से कुमार शानू की आवाज़ मे डूबता चला गया

एक तो इंतज़ार और एक ड्राइवर भी मिला तो ऐसा कि पूछो ही मत जैसे तैसे करके आख़िर मैं पहुच ही गया मैने ड्राइवर से कहा कि किसी गिफ्ट शॉप पे रोकना थोड़ी देर कुछ गिफ्ट्स लेने है तो खरीदारी मे भी थोड़ा सा टाइम लग गया मुझे पल पल भारी हो रहा था दिल मे उमंग , आँखो मे सनम की सूरत लिए आख़िर मैं पहुक ही गया स्टेट बॅंक ऑफ इंडिया की उस आलीशान इमारत के सामने जहाँ पर मेरी सबसे प्यारी दोस्त काम करती थी

तेज तेज कदमो से चलता हुआ मैं अंदर गया ना जाने क्यो मेरी धड़कने कुछ ज़्यादा ही बढ़ गयी थी मैं रिसेप्षन पर गया और वहाँ बैठी लेडी से पूछा की मॅम, लोन ऑफीसर निशा का कॅबिन कॉन सा है तो उसने मेरी ओर देखा और कहा किस डिपार्टमेंट मे, मैने कहा जी लोन ऑफीसर है ना , तो वो बोली सर आइ मीन वो कॉन से डिपार्टमेंट मे है लाइक ऑटोमोबाइल लोन्स, होम लोन्स, एट्सेटरा, मैने कहा वो तो नही पता तो बोली प्लीज़ वेट कीजिए मैं चेक करके बताती हू

4-5 मिनट बाद उसने बताया कि सर इधर निशा मॅम है वो पर्सनल लोन डिपार्टमेंट मे है पर आप अभी उनसे नही मिल सकते शी’ज करंटी इन मीटिंग ना जाने क्यो मुझे कोफ़्त सी होने लगी थी मैने तेज आवाज़ मे कहा तू बस उसका कॅबिन बता कहाँ है मेरी आवाज़ सुनते ही दो सेक्यूरिटी गार्ड्स डोडकर आए और मुझे पकड़ लिया मेरा दिमाग़ खराब होने लगा मैने कहा हाथ छोड़ वरना अगले पल जॉब जाएगी तेरी

 


गार्ड मुझसे उलझते हवुए बोला कॉन है तू डीसी, है एसपी है नेता है मैने कहा देख भाई एक तो मैं बड़ी दूर से आया हूँ तू दिमाग़ खराब ना कर वरना फिर बाद मे मुझे दोष ना दियो तो वो अकड़ने लगा रिसेप्षनिस्ट बोली इस बंदे को बिल्डिंग से आउट करो , तो मेरा दिमाग़ घूम गया मैने कहा साली तू आउट करेगी मुझे तेरा काम है लोगो की हेल्प करना जिसकी गवरमेंट सॅलरी देती है मैने जेब से अपना आइ कार्ड निकाला और उसके हाथ मे देते हुवे बोला

देख गोर से कि मैं कॉन हूँ , हालाँकि मैं ऐसा कोई सीन उधर क्रियेट नही करना चाहता था पर हो ही गया पल भर मे ही उस लड़की के चेहरे का रंग उड़ गया वो सर सर. करने लगी मैने फिर सेक्यूरिटी वालो को धमकाते हुए कहा सालो आम इंसान को तो कुछ नही समझते हो तो वो भी माफी माँगने लगे मैने कहा बता कहाँ है निशा का कॅबिन

तो उसने कहा सर थर्ड फ्लोर पे रूम 56 , लिफ्ट बाहर राइट साइड से है , मैने उसकी तरफ देखा घूरकर और फिर लिफ्ट की ओर चल पड़ा थर्ड फ्लोर पर पहुचते ही मुझे पीओन मिला शायद रिसेप्षन से उपर बताया गया था उसने मुझे निशा के कॅबिन मे बिठाया और बोला सर मेडम बस दस मिनट मे आती ही होंगी आप प्लीज़ वेट करे मैं आपके लिए कॉफी लेकर आता हूँ तो मैने कहा नही अभी उसकी ज़रूरत नही है तू बस पानी ही पिला दे

2-3 गिलास पानी पिया तो कुछ मूड ठीक हुआ गला जो सूख गया था वो भी तर हो गया कुछ देर बाद कॅबिन का गेट खुला और निशा ने आते ही बोली यस, कहिए क्या हेल्प कर सकती हूँ मैं आपकी , और क्या कारण था कि नीचे इतना हंगामा कर दिया आपने मैं पलटा तो देखा कि ये तो कोई और ही है मैने कहा जी आप कॉन मुझे तो निशा मेडम से मिलना है

तो वो बोली सर मैं उनकी असिस्टेंट हू , निशा. मॅम बहुत ही बिज़ी है आज तो आपका मिलना पासिबल नही हो पाएगा आपका लोन का जो भी काम है आप पेपर्स मुझे दे दीजिए मैं देख लूँगी और कल बॅंक होली डे है और फिर दो चार छुट्टिया भी है तो प्लीज़ आप थर्स्डे को ही क्न्सर्न कीजिएगा मैने कहा होल्ड,होल्ड कीजिए मॅम आप को शायद कुछ ग़लत फ़हमी हुई है

मैं यहा पर किसी लोन के सिलसिले मे नही आया हू मैं निशा का फ्रेंड हूँ बड़ी मुश्किल से ढूँढा है उसे आप प्लीज़ मेरी मुलाकात करवाईए , वो बोली सर आप को वेट करना होगा मीटिंग ख़तम होने तक का मैने कहा और ये कब ख़तम होगी तो नेहा जी ने बताया कि सर कोई एग्ज़ॅक्ट टाइम तो होता नही है अब डीस्कशन कितनी देर चलता है ये तो डिपेंड करता है ना

जबकि मैं तो व्याकुल हो रहा था निशा को देखने को और ये लोग अपने रूल्स अपनी मजबूरियो का रोना रो रहे थे मैने झुंझलाते हुए कहा आप एक काम कीजिए कि जाकर बस उसे इतना मेसेज दे दीजिए कि उसका वो दोस्त आया है उस से मिलने जिसे वो अरसे पहले भूल आई थी उस से जाकर बस इतना कह देना कि नीचे रिसेप्षन पर मनीष इंतज़ार कर रहा है उसका

और मैं फिर वहाँ से निकल कर नीचे आ गया और विज़िटर्स के सोफे पर बैठ गया कुछ ही मिनट बीते होंगे कि मैने देखा निशा , मेरी निशा लगभग दौड़ते हुवे विज़िटर्स हॉल की तरफ आ रही थी मैं सोफे से उठ खड़ा हुआ और उसकी तरफ चलने लगा वो मेरे से बस कुछ ही दूर थी हमारी आँखे आपस मे टकराई और निशा भाग कर मेरे गले लग गई

और मैने भी उसको अपनी बाहों मे समेट लिया कुछ देर तक वो मेरे सीने से लगी रही उसकी धड़कनो को सॉफ सॉफ सुन पा रहा था मैं फिर उसने इधर उधर देखा तो झट से मुझसे दूर हो गयी , वो बोली मनीष तुम , तुम अचानक यहाँ कैसे तो मैने एक तमाचा उसके गालो पर जड़ दिया और फुट फुट कर रोने लगा मैं रोते हुवे बोला कमिनि कहाँ चली गयी थी मुझे अकेला छोड़ कर

जानती है कितना तडपा हूँ मैं तेरे लिए हर पल तिल तिल करके जिया हूँ मैं तेरे लिए कहाँ कहाँ नही ढूँढा मैने तुझे , कोई मंदिर मस्जिद नही जहाँ तेरे मिलने की दुआ नही की हो मैने और तू यहाँ ऐश से रह रही है तेरे घर, मुंबई कहाँ कहाँ भटकता रहा मैं हर एक सांस मे बस तुझे ही याद किया और तुझे एक पल भी अपने दोस्त की ज़रा सी भी याद ना आई

निशा की आँखो से भी आँसू छल छला आए थे पर वो मेरे आँसू पोंछते हुए बोली बस मनीष बस तुम यूँ ना रोओ मुझे तकलीफ़ होती है , मैने कहा अगर इतनी ही तकलीफ़ होती है तो फिर मुझे छोड़कर गयी ही क्यो थी वो बोली मैं सब बता दूँगी तुम दो पल इधर ही बैठो मैं अभी छुट्टी लिख कर आती हू घर चलती हूँ निशा ने मेरे आँसू पोंछे और फिर बोली बस मैं दो मिनट मे आ रही हू

 


निशा


बिल्कुल भी तो नही बदली थी वो जैसा पहले हुआ करती थी वैसे ही आज भी थी बिल्कुल सीधी-सादी सिंपल सी लड़की हाँ वजन कुछ बढ़ गया था पर बाकी पूरी तरह से सादगी से भरी हुई नेवी ब्लू कलर की साड़ी दोनो हाथो मे बस एक एक चूड़ी और होंठो पर हल्की सी लिपीसटिक बस यही था सजने के नाम पर उसके पास वो कहते है ना कि समय की आँधी मे भी कुछ लोग अपने आप को मजबूती से थामे रखते है कुछ ऐसी ही तो थी निशा,

आते ही उसने मेरा हाथ थामा और पार्किंग की तरफ चल पड़ी वहाँ उसने अपनी कार को स्टार्ट किया और फिर हम दोनो उसके घर की ओर चल पड़े मैने कहा अच्छी कार है तो उसने बता या कि कुछ दिन पहले ही ली है मेरी निगाह तो एक पल के लिए भी उस के चेहरे से हट ही नही रही थी आज बड़ी ही खुशी का दिन था मेरी जिंदगी मे , मुझे आख़िर मेरी दोस्त का दीदार हो ही गया था

वो बड़े प्यार से मुझे देखते हुए बोली , ऐसे क्या देख रहे हो मैने कहा बस तुम्हे ही देख रहा हूँ बिल्कुल भी नही बदली पहले जैसी ही छुई मुई सी हो वो बोली तुम भी कहाँ बदले हो एक नज़र मे ही पहचान गयी मैं तो मैने कहा तू बहुत ज़ालिम निकली ऐसा भी कोई किसी के साथ करता है क्या तो वो बोली अब माफ़ भी करदो ना तुम गुस्से मे बिल्कुल भी अच्छे नही लगते हो

तो मैं उसके सर पर चपत लगाते हुए बोला ये गुस्सा भी बस तुम्हारी वजह से ही है ना तुम ऐसे रूठ कर जाती ना मैं गुस्सा होता तो वो बोली मनीष अब तुमसे मेरी ज़िंदगी का कुछ भी तो छुपा नही है ये तो भगवान का शूकर है कि टाइम पर नोकरी मिल गयी तो बस गुज़ारा हो रहा है ज़िंदगी की उलझनों मे कुछ ऐसे उलझी की बस पता ही नही चला की वक़्त कैसे गुजर गया पर मैं वही खड़ी रह गयी

पर अभी इन सब बातों का टाइम नही है अभी तुम मेरे पास हो तो मैं अपने मूड को बिगाड़ना नही चाहती हूँ , वैसे भी मुझे पता है कि तुम्हे भूख लगी होगी तो चलो रेस्टोरेंट चलते है कुछ खा पी लेते है मैने कहा आज अपने हाथो का बना खाना नही खिलाओगी या अब हम इतने पराए हो गये है की बाहर से ही टरकाना चाहती हो तो निशा मेरे होंठो पर उंगली रखती हुवे बोली मनीष , खबरदार जो तुमने दुबारा ऐसा कहा तो

तुम मेरे लिए कभी भी पराए नही हो सकते हो , तुम भी ये अच्छी तरह से जानते हो ये बोलते बोलते निशा एमोशनल हो गयी तो मैने कहा निशा, अब फिर से रुलाओगी क्या तो फिर वो कार चलाने लगी और कुछ हल्की फुल्की बाते करते हुवे हम उसके फ्लॅट मे आ गये 12थ फ्लोर पर उसका दो बेडरूम का सेट था अंदर आते ही दिल को ऐसा सुकून सा मिला की जैसे मैं किसी मंदिर मे आ गया हू

उसने मेरा बॅग अंदर रखा और बोली मैं चेंज करके आती हूँ तब तक तुम भी फ्रेश हो जाओ काफ़ी थके थके से लग रहे हो मैने कहा हाँ बातरूम कॉन सी साइड है तो उसने मुझे बताया थकान तो हो रही थी पर निशा के साथ होने का अहसास भी तो था मैने अपने कपड़े उतारे और नहाने लगा मैने शवर चालू किया और खुद को भिगोने लगा ठंडा पानी जैसे बदन को चीरता ही चला गया पर अपने को क्या फरक पड़े

मैने लगाने के लिए साबुन उठाया तो मेरे होंठो पर एक मुस्कान आ गयी थी उफफफफफफफफ्फ़ ये लड़की भी ना आज भी ये मार्गो साबुन यूज़ करती है बस यही तो उसकी सादगी थी जो उसे औरो से जुदा करती थी ,25-30 मिनट तक अच्छे से रगड़ रगड़ कर नाहया तब जाके शरीर थोड़ा सा रिलॅक्स हुआ मेरा मैं बाहर आया तो देखा कि निशा ने भी ड्रेस चेंज कर ली थी और एक टीशर्ट और पयज़ामा डाल दिया था

उसने जूस का गिलास मुझे पकड़ाया और बोली तो बताओ आर्मी ऑफीसर क्या चल रहा है लाइफ मे और तुमने मुझे आख़िर ढूँढा कैसे , तो मैने कहा बात ये है कि आजकल मैं आर्मी मे नही हूँ तो शॉक्ड होते हुए बोली तुमने जॉब छोड़ दी मैने कहा अरे नही तुम पूरी बात तो सुनो , दरअसल आज कल मैं इंडियन इंटेलिजेन्स मे हूँ डेप्युटेशन पर तो बस उसी मे ही काम कर रहा हू तो वो मुस्कुराते हुवे बोली अच्छा जी तो आपने मेरी जासूसी कर ली

 


मैने कहा यार अब क्या करता पता है कहाँ कहाँ धक्के खाए पर तुम्हारा कोई पता ही नही चल रहा था तो फिर आख़िर एसबीआइ का डेटाबेस हॅक करके तुम्हारा पता लिया वो बोली स्मार्ट हो गये हो आजकल मैने कहा पर तू ये सब छोड़ और बता की आख़िर ऐसा क्या हो गया था कि गाँव को हमेशा क लिए ही बाइ बोल दिया तो वो बोली मैं खाना बना रही हूँ बाद मे बात करेंगे

तो मैने उसका हाथ पकड़ा और कहा कि निशा, बता ना तो वो बोली, मनीष तुम तो जानते ही हो कि पिताजी कारगिल युद्ध मे शहीद हो गये थे तो उनकी पेन्षन से माँ ने मुझे जैसे तैसे करके पढ़ाया लिखाया एक खेत हिस्से आया था और छोटा सा घर था काका-ताऊ का हाल तो तुम्हे पता ही था सब लालची कही के कभी मदद करने तो आए नही पर निगाह उस खेत पर थी

फिर तुमसे दोस्ती हो गयी थी तो मैं अपने हालत भूलने लगी थी पर फिर तुम भी चले गये फोज मे और मुझे भी बॅंक मे नोकरी मिल गयी तो मैं मुंबई आ गयी पर पीछे से चाची – ताई माँ से लड़ाई झगड़ा करने लगे एक दिन मैं गाँव मे गयी हुई थी तो मेरे आगे ही काफ़ी बड़ा झगड़ा हो गया उनसे तो फिर मैं माँ को लेकर यहाँ आ गयी मेरी सॅलरी अच्छी थी तो मुझे वैसे भी ज़रूरत नही थी किसी रिश्तेदार की

माँ ही मेरा सब कुछ थी जब मैं उन्हे ही अपने पास ले आई तो फिर वैसे भी गाँव का अब कोई मतलब रह नही गया था

मैने कहा पर तूने मुझे भुला दिया तो वो बोली ऐसा नही है मनीष बस तुम और तुम्हारी यादे ही तो है मेरे जीवन मे जिनके सहारे बस कभी कभी मुस्कुरा लेती हू , मैं तुम्हे चिट्ठि लिखा करती थी मैने कहा हाँ पर फिर तुम्हारी तरफ से जवाब आने बंद हो गये तो मैने फिर घर के पते पर भी कई लेटर्स पोस्ट किए पर तुम्हारा कोई जवाब कभी आया ही नही

मैने कहा यार खडकवासना से मुझे फिर देहरादून जाना पड़ा कुछ हालत ऐसे हुए कि फोन टूट गया तो सारे कॉंटॅक्ट्स डेलीट हो गये और जब मैं घर गया तो पता चला कि घरवालो ने नया घर बना लिया है और मम्मी ने मेरा सारा पुराना समान जला दिया है तो सब कुछ ख़तम ही हो गया मेरे लिए पर चाची ने तुम्हारी कुछ चिट्ठिया बचा ली थी उन्ही से पता चला कि तुम मुंबई मे हो

तो फिर मैं उधर भी गया पर मकान मालिक बोला निशा तो गयी खाली करके तो फिर मैं हताश हो गया पर तुम ने भी कभी चिट्ठी नही डाली फिर दुबारा तो निशा बोली, मनीष मैं एक बार तुम्हारे घर गयी थी तो तुम्हारी मम्मी ने मुझे लताड़ दिया और कड़े शब्दो मे कहा कि मेरे बेटे से दूर रहना , वैसे तो उनकी बात का मुझे बुरा नही लगा पर फिर मैने सोच लिया कि शायद वक़्त की तरह तुम भी बदल गये होंगे तो फिर हिम्मत नही हुई दुबारा चिट्ठी डालने की

उफफफफफ्फ़ ये मम्मी भी ना पता नही क्या क्या करती रहती है आख़िर क्या ज़रूरत थी निशा से झगड़ा करने की, मैने निशा से कहा चल जो हुआ वो हुआ पर अभी मैं हर पल तेरे साथ ही हूँ और तू मेरे तो वो मुस्कुरा पड़ी बोली आओ तुम्हे कुछ दिखाती हूँ और मुझे अपने बेडरूम मे ले गयी तो मैने देखा कि दीवारो पर कुछ पुरानी तस्वीरे टॅंगी हुवी थी जिनमे वो और मैं थे

हमारे पुराने दिनो की बस वो थी और मैं था मैने कहा अब तक है तुम्हारे पास वो बोली बस मेरी तो यही अमानत है तो मैने उसे अपने गले से लगा लिया और अपनी बाहों मे कस लिया निशा रोते हुए बोली मनीष अब मुझे छोड़ कर कही नही जाना मैं बहुत ही अकेली हूँ कुछ भी नही मेरे पास बस तुम्हारी यादो के सिवा तो मैने कहा बस निशा इंतज़ार ख़तम हुआ अब मैं आ गया हू

तभी मैने पूछा माँ कहा है तो उसने एक फोटो की ओर इशारा किया जिसपर एक फूल माला चढ़ि हुई थी वो बोली सालभर पहले दमे के अटॅक की वजह से वो मुझे छोड़कर चली गयी और फुट फुट कर रोने लगी उफफफफफफफफफ्फ़ भगवान क्या तुम्हे सारे दुख इसे ही देने थे और एक मैं था जो पता नही क्या क्या सोचता रहता था कि निशा मुझे भूल गयी है

 


मैने उसे चुप कराते हुए कहा निशा तू बिल्कुल भी अकेली नही है मैं हूँ ना तेरे पास और खबरदार जो अब एक भी आँसू गिराया तो मुझसे बुरा कोई नही होगा मैने उसे पानी का गिलास देते हुवे कहा ले थोड़ा सा पानी पी ले निशा फिर मेरी गोद मे अपना सर रख कर लेट गयी और मैं उसका हाथ थामे पता नही कब तक उस से बाते करता रहा ऐसे ही उसकी आँख लग गयी उसके गालो पर आँसुओ की रेखा देख कर मेरा कलेजा जैसे फट ही गया

जब निशा की आँख खुली तो अंधेरा हो गया था वो शरमाते हुवे बोली अरे मैं इधर ही सो गयी तुमने हटा या क्यो नही तो मैने कहा इतना तो हक़ है ही मुझे तो वो मुस्कुराइ और बोली चलो अब मेहमान आए है तो शानदार डिन्नर की तैयारी करती हूँ और हम किचन मे आ गये वो बोली आज तुम्हारी मनपसंद पनीर की सब्ज़ी बनाती हूँ तुम आराम करो या चाहो तो टीवी देख लो मैं ज़रा बाजार जाकर जल्दी से आती हूँ

तो मैने कहा मैं भी चलता हू तो फिर हम बाजार को निकल पड़े तो मेरी नज़र एक वाइन शॉप पर पड़ी मैने कहा याद है तुझे एक बार हम ने जयपुर मे हवमहल के पास सड़क पर बैठ कर बूज़ किया था तो वो हँसते हुए बोली हाँ और फिर मैने कितनी उल्टिया भी की थी , मैने कहा चल आजा फिर से उस याद को ताज़ा करते है तो वो बोली नही मनीष नही

खमखाँ मुझे नशा हो जाएगा तो फिर ………. ……… मैने कहा मैं हूँ ना तुझे संभालने को चल आजा और फिर मैं भाग के दो कॅन बियर ले आया और वही सड़क क किनारे पाटड़ी पर बैठ कर हम लोग चिल मारने लगे मैने उसका हाथ अपने हाथ मे ले लिया और पूछा यार तूने शादी की क्या तो एक ठंडी सांस लेकर बोली म , म मुझसे कॉन शादी करेगा

मेरा रंग देखा है कॉन अपनी पत्नी के रूप मे काली कलूटी दुल्हन चाहेगा मैने कहा यार ऐसा क्यो बोलती है तू कितनी तो सुंदर है तू मुझसे पूछ तो वो बोली और सच कहूँ तो अब कुछ फरक भी नही पड़ता आदत जो हो गयी है अकेले रहने की मैने कहा पर अब तू अकेली नही रहेगी तू मेरे साथ देल्ही चल रही है और हाँ ना मत करना बता दे रहा हू

वो बोली पर मैं नही आ सकती नोकरी जाना होता है पर जब भी छुट्टी होगी तो पक्का आउन्गि मैने कहा तू तो चलेगी मेरे साथ और जल्दी ही काफ़ी देर तक हम उधर ही बैठे रहे बाते करते रहे फिर हम ने समान खरीदा और घर पे आ गये खाना बनाने , खाने मे ही रात का 1 बज गया था फिर हम दोनो ने मिलकर बर्तन सॉफ किए

जब निशा फ्रिज मे बचा हुआ समान रख रही थी तो मैं उसके पीछे गया और उसके बालो से रिब्बन को खोल दिया तो उसकी जुल्फे खुल कर उसकी कमर तक आ गयी मैं उसके बालो को सहलाने लगा तो वो बोली तुम बिल्कुल भी नही बदले हो आख़िर कोई कैसे ऐसे रह सकता है मैने कहा तुम भी तो वैसे ही हो कितनी सादगी भरी है तुम्हारे अंदर कितनी सॉफ दिल और सच्ची हो तुम तो वो मुस्कुरा कर रह गयी

मैने एक तकिया और चद्दर ली और सोफे पर पसर गया तो वो मुझे दूध का गिलास देते हुए बोली अरे यहाँ क्यो सो रहे हो बेड कब काम आएगा चलो वहाँ पर और मुझे खीच कर बेडरूम मे ले आई और दूध पीते पीते हम लोग बाते करने लगे ये दिन मेरे जीवन का सबसे अच्छा दिन था आज मुझे पक्का विश्वास हो गया था कि दुनिया मे भगवान नाम की शक्ति भी होती है आख़िर मेरी दुआ जो कबूल हो गयी थी

अगले दिन जब मैं उठा तो निशा पूजा कर रही थी, उसने मुझे एक स्माइल दी और इशारा किया कि अभी आ रही हू मैं सोफे पर बैठ गया मैने फोन ऑन किया और इंडिया का सिम कार्ड डाला तो पता चला कि अशोक भाई के अनगिनत मेसेजस और कॉल्स आए हुए थे तो मैने उन्हे कॉल किया वो बोले अबे कहा था तू और ना कोई फोन ना और कॉंटॅक्ट पता है मुझे कितनी चिंता हो रही थी मैने कहा अब बात क्या है वो बताओ पहले

तो पता चला कि भाई साब की शादी पक्की हो गई है मैने पूछा तारीख तो बताओ तो बोला अगले महीने की17 को मैने कहा भाई बड़ी जल्दी कर दिया काम तो वो बोले भाई अब घरवालो को लड़की पसंद आ गयी तो फिर देर किस बात की , तू भाई, अपनी छुट्टिया ले लियो और दस पंद्रह दिन पहले ही आ जाना शादी का काम है काफ़ी काम करनी होंगे मेरी भी मदद हो जाएगी

और ले तू पहले मम्मी से बात कर तो मैं मामी से बात करने लगा मामी बोली पक्का आना है तो मैने कहा मामी आपको पता तो चल गया ही होगा कि मम्मी और मेरे मे थोड़ी बोलचाल हो गयी थी तो शादी मे वो भी आएँगी तो फिर मेरा आना मुश्किल होगा मामी बोली एक लगाउन्गी कान पे अभी इतना बड़ा नही हुआ है और फिर वो तेरी माँ है तेरा बुरा थोड़ी ना चाहेंगी

 


मुझे कुछ नही पता बस तू टाइम से आ जाना वरना मैं नाराज़ हो जाउन्गी मैने कहा ठीक है आ जाउन्गा अब जाउ तो मरा ना जाउ तो मरा पर मामी को नाराज़ भी तो नही कर सकता था और फिर एक अरसा ही हो गया था मुझे मामा के गये हुए तो सोचा की जाता हूँ इसी बहाने घरवालो के दर्शन भी कर लूँगा इतने मे निशा ने चाइ पकड़ा दी मैने कहा निशा तेरी पोस्टिंग देल्ही नही हो सकती क्या वो बोली अगर कोई तगड़ी सिफारिश हो तो हो जाए वरना देखो कब तक इधर ही रहना होगा

मैने फिर अपने बॉस को फोन किया और रिक्वेस्ट करते हुए कहा कि सर मिनिस्ट्री मे आप अपनी पॉवर का इस्तेमाल करके मेरी एक दोस्त है उसकी देल्ही पोस्टिंग करवा दीजिए तो वो बोले भ्रष्टाचार कर रहे हो ऑफीसर वो भी अपने बॉस के साथ मैने कहा सॉरी सर , पर आप ही मदद कर सकते हो तो वो बोले अरे मैं मज़ाक कर रहा था अब तेरा इतना सा भी काम नही कर सकता तो क्या फ़ायदा ऐसी पोस्ट का तू डीटेल्स मैल कर्दे मुझे मैं मॅटर देख लेता हू

मैने कहा निशा ज़रा मेरा लॅपटॉप तो देना और फिर उस से उसकी सर्विस की पूरी डीटेल्स लेकर बॉस को मैल कर दी मैने कहा मैने कहा था ना कि तू मेरे साथ देल्ही चल रही है जल्दी ही तुझे ट्रान्स्फर लेटर मिल जाएगा वो बोली अपनी पोजीशन और पॉवर का ग़लत फ़ायदा उठा रहे हो तुम मैने कहा क्या फ़ायदा अगर मैं अपनी दोस्त के काम ना आ सका तो

निशा मेरे पास आकर बैठ गयी और बोली क्यो करते हो इतनी परवाह मेरी, आख़िर क्या लगती हूँ मैं तुम्हारी, हम आपके है ही कॉन तो मैने उसके फूल से चेहरे को अपने हाथो मे लिया और उसकी आँखो मे देखते हुए बोला जिनके पास जवाब होता है वो दूसरो से सवाल नही किया करते है निशा मेम्साब बाकी जो है वो तुम्हे अच्छी तरह से पता है

वो बोली बाते बड़ी करना सीख गये हो मैने कहा तुम्हारी जुदाई ने सिखा दिया है वरना हम तो बस खामोश ही रहा करते थे वो हस्ते हुए बोली तो जनाब शायर भी हो गये है मैं कहा कुछ और दिन अगर तुम ना मिलती तो पता नही क्या क्या हो जाते फिर मैने कहा चल यार कही बाहर चलते है तो वो बोली ठीक है और फिर तैयार होकर हम बाहर घूमने चले गये

पहले एक मूवी देखी फिर वही माल मे ही लंच किया मैं निशा के लिए ज्वेल्लेरी खरीदना चाहता था तो फिर मैं उसे लेके एक फेमस ज्वेल्लेर के शोरुम मे चला गया आख़िर कई प्रॉडक्ट्स देखने के बाद मैने उसके लिए एक हार और सोने की चूड़िया खरीद ली और वही पर उसके हाथो मे पहनाते हुए बोला आज से तेरी कलाइयाँ कभी सुनी नही रहेंगी

निशा बोली किस हक़ से तुमने ये कंगन मेरी कलाईयों मे पहनाए है मैने कहा पता नही पर तेरी सूनी कलाइयाँ अच्छी नही लगती मुझे तो निशा बोली एक लड़की को कंगन पहनाने का मतलब समझते भी हो तुम , मैने कहा तुम्हे पता है वही बहुत है मेरे लिए और उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दिया पेमेंट करने के बाद कुछ और शॉपिंग की और फिर थक कर घर आ गये

खाना बाहर खाकर आए थे और फिर मैं बहुत ही थका हुआ था तो बिस्तर पर पड़ते ही नींद आ गयी सुबह मैं उठ कर बाहर जा ही रहा था कि दरवाजे पे निशा से टक्कर हो गयी तो मेरा बॅलेन्स बिगड़ गया एक तो शरीर नींद मे ही था तो गिरने से बचने के लिए मैने उसकी कमर को थाम लिया पर वो भी अचानक से इस घटना से संभाल नही पाई और हम दोनो फरश पर गिर गये

निशा मेरे नीचे दब गयी मुझे तो कई देर तक पता ही नही चला कि आक्च्युयली मे हुआ क्या है तो फिर वो मुझे धक्का देते हुवे बोली अब उठो भी कि यही पर प्लाट कटवा लिया है तो मैं उसके उपर से उतर गया वो झुंझलाते हुए बोली देख कर नही चल सकते हो क्या हाई राम और इतना बोझ मुझ पर लाद दिया खुद तो हड्डिया तुड़वाओगे मुझे भी मरीज बनाओगे

मैने कहा जानबूझकर थोड़ी ना गिरा अब जाने भी दे तो वो बोली बताओ नाश्ते मे क्या खाओगे मैने कहा जो तेरी मर्ज़ी हो वो बना ले अपनी कोई विशेष डिमॅंड होती नही है आजकल फिर मैं नहाने चला गया तो नाश्ते के बाद हम दोनो लेटे हुए बाते कर रहे थे निशा ने पूछा क्या सच मे तुम मेरा ट्रान्स्फर करवा दोगे मैने कहा लो जी इन्हे मज़ाक लग रहा है जब देल्ही आएगी तो मान लेना

मैं बोला यार अब इतने दिन जुदा रही है तो थोड़े दिन मेरे साथ भी तो रहना बनता है ना, तो वो मुस्कुराने लगी फिर हम दोनो अपने पुराने आलबम्स देखने लगे तो ऐसे ही वो 5-6 दिन पता नही कैसे कट गये उसके साथ टाइम इतना तेज भागा कि लगा ही नही की एक हफ़्ता हो गया है पर जनाब ये टाइम होता है वो कहाँ किसी के लिए रुकता है तो निशा की छुट्टिया ख़तम हो गयी थी

 
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