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ज़िंदगी भी अजीब होती है Restart



मैं उनके पास लेट गया और उनको अपने से चिपका लिया वो मेरे लंड से खेलने लगी वो तेज़ी से अपने हाथ को लंड पर उपर नीचे कर रही थी जब मुझसे रहा नही गया तो मैने मामी को पोज़िशन मे लिया और लंड को चूत से मिलन के लिए तैयार कर दिया मामी बोली बस घुसाओ ना इतनी देर क्यो लगा रहे हो तो मैने दो चार तेज के झटके लगाए और अपने लंड को मामी की चूत की गहराइयो मे उतार दिया

मामी आआ हाआआआआआआअ आआआआआआ हह करने लगी पूरा लंड चूत मे जा चुका था तो मामी ने मेरे गाल पर किस किया और अपनी बाहें मेरे गले मे डाल दी तो मैं अपने कुल्हो को उचकाते हुए मामी को चोदने लगा तो मामी ने अपने पैरो को फ्लॅट कर लिया ताकि चूत और भी अच्छे से लंड पर कस जाए और चुदाई मे मज़ा आए तो धक्के पे धक्का लगाते हुए मैं मामी मे समाए जा रहा था और वो मुझ मे मामी ने अपने हाथ मेरी पीठ पर कसे हुए थे और पूरी मस्ती से अपनी चूत मरवा रही थी इस सेक्स मे वासना से ज़्यादा प्रेम का भाव था हम दोनो को कोई भी जल्दी नही थी बस कोशिश थी कि ज़्यादा से ज़्यादा एक दूजे मे समाए रहे मामी आज रात फिरसे मेरी दुल्हन बनी हुई थी और अपनी सुलगती जवानी की आग को मेरे प्यार के छींटो से बुझा रही थी

पूरे आधे घंटे तक हम दोनो बस उस एक ही पोज़िशन मे एक दूसरे मे समाए रहे फिर मैं उनकी चूत मे ही झड गया तो दोस्तो उस पूरी रात हम फिर से नही सोए उनको भी पता था कि अगले दिन मैं जाने वाला हूँ तो वो भी एक एक पल को लूटना चाहती थी और कुछ ऐसी ही हसरत मेरी भी थी तो पूरी रात मामी और मैं अपनी इच्छाओं की पूर्ति करते रहे

अगले दिन दिल थोड़ा सा उदास सा हो रहा था नाश्ते के बाद मैं तैयार हो चुका था जाने के लिए हालाँकि सभी लोग चाहते थे कि मैं कुछ दिन और रुकु पर आज तो मुझे निकल ना ही था सब लोगो से मिलने के बाद आख़िर अपन वहाँ से रुखसत हो ही लिए सहर आकर जयपुर के लिए बस पकड़ ली सफ़र थोड़ा लंबा था तो कानो मे इयरफोन लगाया और सो गया फिर आँख सिंधी कॅंप बस स्टॅंड ही खुली

शाम के 4 बज रहे थे, बस से उतर कर बाहर के रेस्टोरेंट मे कुछ खाया पिया और फिर वापिस आके अजमेर की बस पकड़ ली ढाई-तीन घंटे और लग जाने थे अभी खिड़की वाली सीट पर बैठे मैं बाहर के नज़ारे देखता हुआ सफ़र के ख़तम होने का इंतज़ार कर रहा था आख़िर अपनी प्राण प्यारी से जो मिलना था आज तो वो सफ़र भी कट ही गया किसी तरह से

अजमेर बस स्टॅंड पे उतरते ही मैने मिता को फोन किया तो उसने कहा कि वो अभी रेलवे स्टेशन के पास वाले बाजार मे है तो उधर ही आ जाउ फिर साथ रूम पर चलेंगे तो मैने ऑटो लिया और उधर ही पहुच गया मिता की लोकेशन फिर से पूछी और फिर आख़िर कर अपनी डार्लिंग के दीदार हो ही गये हाथो मे सब्जियो से लदा हुआ थैला उसके हाथो मे देख कर हँसी आ गयी मुझे

मैं ऑटो वाले को किराया दिया और फिर मिता को गले से लगाया मैने कहा कितनी पतली हो गयी है तू तो वो बोली बस तुम्हारी जुदाई मे ही हो गयी हूँ अब तुम तो पता नही कहाँ लगे रहते हो तो मेरी फिकर कॉन करेगा मैने कहा यार अब तुझे तो सब पता ही है ना कि कैसी लाइफ है मेरी तो बार बार क्या शिकायत करनी बल्कि तुम्हे तो आदत डालनी चाहिए आख़िर एक फोजी की घरवाली जो बन ने जा रही हो

वो बोली सारी बात इधर ही करोगे या रूम पे भी चलोगे तो फिर हम पैदल पैदल ही रूम पर आ गये मैने अपना बॅग रखा और बेड पर बैठ गया मिता सामान रखने लगी कुछ भी तो नही बदला था उस छोटे से कमरे मे सब कुछ पहले जैसा ही था आज भी मिता चाइ बना ने लगी तो मैने रेडियो ऑन कर दिया धड़कन फिल्म का गाना सुनकर दिल रोमॅंटिक सा होने लगा था

चाइ का प्याला पकड़ते हुए उसकी उंगलिया जो मेरे हाथो से छुई तो दिल पे कुछ काबू सा ना रहा मैने चाइ साइड मे रखी और मिता को अपनी बाहों मे ले लिया वो बोली आते ही शुरू हो गये मैने कहा तेरी मेरी जुदाई भी तो कुछ ज़्यादा ही लंबी होती है ना मिलन का पल ना जाने कब आएगा तो वो बोली बस कुछ दिनो की बात है एक बार घर वालो से सब फाइनल हो जाए

तो अपनी गृहस्थी बसने का रास्ता भी खुले आख़िर कब तक हम लोग यूँही भटकते रहेंगे मैने कहा यार अब सच मे ही नही रहा जाता तुम्हारे बिना तो वो मेरे अंदर थोड़ा सा और सिमट ते हुए बोली और मैं अपना हाल किसे कहूँ कितनी अकेली हूँ मैं तुम्हारे बिना मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए बोला कि डार्लिंग मैं भी तो अधूरा ही हूँ ना तुम्हारे बिना कल तुम्हारी माँ से मिल तो रहे है

देखते है कि क्या होता है, वो प्रार्थना करते हुए बोली बस मेरी ये मन्नत पूरी हो जाए तो मेरा जीवन भी सफल हो जाए मैने कहा तुम चिंता ना करो सब ठीक ही होगा मिता बोली चाइ पी लो ठंडी हो रही है तो मैं चाइ की चुस्किया लेने लगा वो पूछने लगी कि शादी कैसी थी तो मैने सबकुछ बताया उसको तस्सल्ली से तो वो थोड़ा सॅड होते हुए बोली काश अगर अपनी शादी पहले हो गयी होती तो अपन भी एंजाय कर सकते थे

 


मैने कहा तो क्या हुआ और भी तो मोके आएँगे पर पहले अपनी शादी हो जाए बाकी तो बाद की बाते है चाइ पीने के बाद मैं बाथरूम मे घुस गया और वो डिन्नर की तैयारी करने लगी फिर खामोशी मे ही हमारा डिन्नर हुआ मिता को खाते वक़्त बात करना बिल्कुल भी पसंद नही था खाने के बाद हम दोनो वॉक के लिए निकल गये कुछ कुछ सी सिमिलॅरिटीस थी निशा और मिथ्लेश मे

दो नो ही मुझे जान से प्यारी थी दोनो ही सादगी से भरी हुई थी बेहद ही सिंपल लड़किया थी और खाना तो दोनो ही मस्त बना ती थी , वो बोली कहाँ खो गये तो मैने कहा यार कहीं तुम्हारी मम्मी मना ना करे और मेन बात तो तुम्हारे पिताजी से हाँ करवानी है वो है असली काम तो वो बोली मनीष अब तक तो हम लोग बस प्रेम की पढ़ाई कर रहे थे पर अब आख़िरी इम्तिहान देने की घड़ी आ गयी है

मैने कहा यार इम्तिहान से नही डरता हूँ बस डर है तो इस बात का कि कही तुम्हे खो ना दूं, तुम नही जानती कि तुम्हारे बिना जीने की कल्पना भी नही कर सकता मैं जब कभी ये ख़याल आ जाता है तो मेरा दिल कितना घबरा जाता है तुम क्या जानो तो वो बोली ये समाज ने भी कैसे बंधन बनाए है दो प्यार करने वाले अपनी मर्ज़ी से साथ जी भी नही सकते

 
अगले दिन मिता बहुत ही घबरा रही थी बार बार वो एक ही बात दोहरा रही थी कि अच्छे से बिहेव करना और सेट्टिंग कर लेना सर्दी के मोसम मे भी पसीना उसके माथे से टपक रहा था मैने कहा टेन्षन ना ले जो होगा ठीक ही होगा और फिर ये तो फर्स्ट स्टेप है माँ के बाद तेरे पिताजी से भी बात करनी है तो तू घबरा मत बल्कि घबराना तो मुझे चाहिए

पर असल मे टेन्षन मुझे भी थी आख़िर खुद अपने मुँह से अपने लिए शादी की बात करना वो भी इस सिचुयेशन मे थोड़ा सा अनकमफर्टबल सा महसूस हो रहा था दोपहर तक उसकी मम्मी आ ही गयी तो मैने भी उन्हे नमस्ते की हाई हेलो चाइ-पानी के बाद आख़िर वो घड़ी आ ही गयी तो मिता ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि मम्मी ये मनीष है मैने इनके बारे मे आपको बताया था ना

तो माजी ने उसको इशारे से चुप रहने को कहा और मुझ से बात करती हुई बोली बेटा देखो मैं सीधी बात बोलती हूँ कि तुम दोनो जो भी सोच रहे हो वो कभी हो नही पाएगा बेटा मेरी बात का बुरा मत मान ना पर सरपंच जी कभी नही मानेंगे कि उनकी बेटी दूसरी जात वाले के घर ब्याही जाए और तुम तो जानते हो कि गाँवो मे इज़्ज़त के पीछे जान चली जाती है

मैने कहा आंटी जी पर मैं और मिता एक दूसरे को बहुत दिनो से जानते है और अब हम अलग होने का सोच लें ये तो चान्स ही नही है वो बोली बेटा नया खून हो तो तुम बात को समझते नही हो , हमारे घर मे औरतो की नही चलती है हर फ़ैसला मर्द ही लेते है और फिर तुम्हारी जात दूसरी हमारी जात दूसरी और दोनो गाओ का भाई चारा सरपंच जी एक मिनिट ही नही सुनेंगे और कही उन्हे भान भी हो गया की उनकी बेटी प्रेम करती है

गैर जात वाले से तो वो इसे मार ही डालेंगे मेरा इधर आने का यही मकसद है कि तुम दोनो को समझा सकूँ, ठीक है साथ पढ़ते थे तो दोस्ती हो गयी पर बेटा ये सब दोस्ती तक ही रहे तो ठीक रहेगा इस से आगे ना बढ़ो मेरी बेटी तो मुझसे सवाल जवाब करती है पर मैं तुमसे कहती हू मान जाओ और फिर क्या दुनिया मे लड़के लड़कियो की कमी थोड़ी ना है

तुम कही और ब्याह कर्लो हम इसका कहीं और कर देंगेओर फिर ब्याह के बाद तुम सब भूल जाओगे और अपनी अपनी गृहस्थी मे रम जाओगे मिता बोली मम्मी पर आप हमारी भी तो सुनो तो उन्होने उसे चुप करवाते हुवे कहा तुमसे भी बात करूँगी पर पहले मेरी बात ख़तम नही हुई है मैने अपनी 30 साल की गृहस्थी मे कभी तुम्हारे पिताजी के आगे मुँह नही खोला

जो फ़ैसला उन्होने कर दिया हम ने मान लिया और फिर ये प्यार मोहब्बत कुछ नही होते जब दो दो पड़ेंगे तो सब खुमारी उतर जाएगी और वैसे भी बेटा मिता की शादी हम अपने हिसाब से करेंगे तुम एक मामूली फोजी हो तो कैसे चलेगा तो मिता बोली मम्मी वो अफ़सर है फोज मे और बहुत पैसे भी है उसके पास तो ये बाते तो आप रहने ही दो तो वो बोली बेटा पर जात तो अलग अलग है ना ठाकूरो की छोरी जाटों के घर कैसे ब्याही जाएगी

कल को समाज क्या कहेगा, गाँव गली मे थू थू होगी आख़िर क्या तू ये चाहती है कि तुम्हारे पिताजी की इज़्ज़त दो पल मे धूल मे मिल जाए बेटा यही सच्चाई है जितना जल्दी तुम लोग मान लोगे उतना ही अच्छा रहेगा तुम्हारे लिए और ना मनोगे तो सरपंच जीका गुस्सा तो तुम जानती ही हो दो मिनिट भी ना लगाएँगे अपनी इज़्ज़त के लिए बेटी का खून भी कर डालेंगे वो

और बेटा मैं भी तुम्हारी माँ जैसी ही हूँ, तो मैं क्या तुम्हारा बुरा चाहती हूँ बस दुनिया की हक़ीकत से रूबरू करवा रही हूँ ताकि कल को तुम परेशान ना पाओ अब बेटी दुखी होगी तो माँ का कलेजा भी रोएगा ना और जिस रास्ते पर तुम लोग चलने की सोच रहे हो ना बेटा उस रास्ते पर बस दर्द और रुसवाई ही मिलेगी तुम्हे इसके सिवा कुछ नही मिलेगा और जान जाएगी वो अलग

मिता को गुस्सा आने लगा था वो बोली मम्मी मैं तो शादी करूँगी तो मनीष के साथ ही वरना मैं कही नही करूँगी मैने कहा आंटी जी आपको हमारी मदद करनी होगी मैं नही जी सकूँगा मिथ्लेश के बिना नोकरि भी इसलिए ही की ताकि इस से शादी कर सकूँ कुछ भी कीजिए पर हमें अपना आशीर्वाद दे दीजिए हम नही रह पाएँगे एक दूसरे से जुदा होकर तो वो बोली बेटा मैं तो माँ हूँ अपने बच्चो की खुशी मे ही मेरी खुशी है पर मेरी इतनी हसियत नही है कि

मैं तुम लोगो की इस काम मे मदद कर सकूँ मैं अपने पति को जानती हूँ राज़ी राज़ी तो सपने मे भी तुम्हारा ब्याह नही हो पाएगा पर एक रास्ता है अगर तुम कहो तो बताऊ तो वो बोली कि बेटा तुम मिता को लेकर कही दूर भाग जाओ और ब्याह कर्लो पर फिर मुड़कर भी इधर ना आना हमारी थू-थू होकर रह जाएगी पर बेटी तो चैन पाएगी चले जाना दूर कही परदेश मे मे तो दिल पर पत्थर रख लूँगी की बेटी थी ही नही

 
मिता बोली मम्मी अगर ये करना होता तो कब का कर चुके होते तो आंटी बोली बेटी बस यो ही रास्ता है नही तो बस तेरे भाग मे इस छोरे का साथ कोन्या और फिर तू सारी ज़िंदगी कोसेगि कि माँ की बात मान लेती बेटी हम उस वंश का खून है जहा इज़्ज़त अपनी जाई से भी घनी प्यारी होवे सै,थारे प्रेम ने कोई ना सोचेगा काट के फेक देवेंगे थाने किते लाषो को चील कोवे ही खाएँगे

तुम भाग जाओ किते दूर, तो मैने कहा आंटी जी कोई चोरी ना कर रहे प्यार करे सै घर बसाना चाहवें सै ब्याह तो मिता की इच्छा से ही होगा बारात तो आपके घर आएगी ही तो आंटी बोली बेटा क्यो मोत के मुँह मे कूदो सो मैने कहा मिता कल के कल तू मेरे साथ तेरे घर चल रही है शादी की बात अब तुम्हारे पिताजी से ही होगी

तो आंटी बोली रूको तुम और मेरी बात सुनो पहले तुम ऐसा कुछ नही करोगे, क्यो अपने पैरो मे कुल्हाड़ी मार रहे हो मैने तुम्हे रास्ता दे दिया है कि यहा से दूर भाग जाओ और अपना घर बसा लो बस ये ही एक्लोता रास्ता है तुम्हारे मिलन का मैं किसी से भी नही कहूँगी कि मिथ्लेश कहाँ है मैने कहा ठीक है आंटी जी चलो मान भी लेते है मैं तैयार हूँ कोर्ट मॅरेज के लिए

पर आपकी बेटी तो चाहती है कि उसकी डोली बस आपके घर से ही उठे तो वो बोली बावली हो गयी है ये छोरी के बचपन से इसने घर का माहौल नही देखा जो ये सोच रही है , इसकी ये इच्छा इस जनम मे तो क्या किसी भी जनम मे नही पूरी होगी मेरे बच्चो तुम जो कदम उठाने की सोच रहे हो वो उस राह की कोई मंज़िल है ही नही और राह मे लाख तकलीफे है पर तुम कभी भी मंज़िल नही पा सकोगे

बेटा, ये कोई तुम लोगो की बच्पने की ज़िद नही है जो माँ-बाप पूरी कर देंगे बाकी तुम लोगो ने अगर फ़ैसला कर ही लिया है तो मैं तो रो कर सबर कर लूँगी और अब मैं इसके सिवा कुछ कर भी क्या सकती हूँ कुछ देर के लिए कमरे मे शांति छा गयी हमारे पास सीधा सा रास्ता था कि कोर्ट मे मॅरेज कर ले और सब लोगो की नज़र से दूर किसी सहर मे अपना छोटा सा आशियाना बसा ले

पर मिथ्लेश की भी तो हमेशा से ही बस यही इच्छा थी कि उसकी डॉली उसके घर से ही उठे पर दुल्हन वो मेरी बने अब करे भी तो क्या करे मैने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि मिटा एक बार तुंमहरे पिताजी से भी बात करनी ही होगी फिर देखते है कि क्या होता है मैने कहा मिता हम अभी तुम्हारे घर चल रहे है तो वो बोली ठीक है पर मनीष संभाल लेना मेरी हर उम्मीद तुमसे ही है

उसकी मम्मी बार बार हमे मना करती रही पर एक ना एक दिन तो ये सब फेस करना ही था तो फिर अभी क्यो नही वो रात हम तीनो मे से कोई भी नही सोया सबके दिमाग़ मे कुछ ना कुछ चल रहा था अगले दिन शाम तक हम मिता के घर पहुच गये बचपन मे कई बार बाहर से तो उसके घर की झलक देखी थी पर आज अंदर जा रहा था , जब हम अंदर गये तो उसके पिताजी से साक्षात्कार हुआ

बड़े ही रोबीले से इंसान थे वो , तो वो मेरी ओर देखते हुए बोले कि माफ़ कीजिए आपको पहचाना नही तो मिता बोली पिताजी ये मेरे दोस्त है तो उन्होने उसे एक गहरी नज़र से देखा पर कहा कुछ नही फिर मेहमान खाने मे बिठा दिया गया कुछ चाइ नाश्ते की व्यवस्था की जाने लगी पर मैने डाइरेक्ट्ली मुद्दे की बात छेड़ दी तो उन्होने मेरी एक एक बात को पूरी तसल्ली से सुना

पर उनके चेहरे पर कोई भाव नही था तो मैं उनके रियेक्शन को समझ नही पा रहा था फिर उन्होने मिता को कहा कि छोरी तू भीतर जा, उसके जाने के बाद वो मेरी और मुखातिब हुवे और बोले कि देख छोरे, तने अभी बेरा ना है कि तू के कह रहा है और फिर तेरी हिम्मत भी गजब है तू खुद ही घर तक आ गया , देख मैं मान्यू सूं की आजकल छोरे-छोरी साथ पढ़या करे सै

तो बोल-चाल भी हो जाया करे है पर यो जो प्यार मोहबात है ना अपने इधर ना चलया करे और फेर थारे गाँव और म्हारे गाँव मे भाई चारा भी तो सै हम थारे गाँव की छोरिया ने बेटी माने सै और थारे लोग म्हारे गाँव की छोरिया ने तो तू क्यू गाँवो का भाई चारा खराब करना चाहवे सै और फेर तेरी जात अलग और ठाकुर भरपूर सींग अपनी छोरी दूसरी जात आले के ब्याह दे या तो हो ना सके

म्हरी भी गाँव बस्ती मे इज़्ज़त है समाज मे रसुख है और फिर थारी हसियत ही के सै म्हारे आगे बेरा सै छोरी के ब्याह मे कितना रुपया खरच करूँगा मैं मैने हाथ जोड़ते हुए कहा सरपंच जी इतना तो मैं कमा लेता हूँ की मिता सुख से रह लेगी आप बस बेटी को विदा कर दीजिए वो मेरे साथ बहुत खुश रहेगी तो वो बोले बस छोरे बहुत हुआ तेरी ज़ुबान पर आज के बाद मेरी छोरी का नाम नही आना चाहिए , नही तो ठीक नही होगा छोरी का मामला है और तू इस टाइम मेहमान बनकर आया है तो मैं सबर कर रहा हूँ जा चला जा और आज के बाद अगर मेरी छोरी के पास भी दिखा तो ठीक नही रहेगा मैने कहा पर मिता भी मुझसे बहुत प्यार करती है तो वो गुस्से से गरजते हुए बोले छोरे बस आख़िरी बार कह रहा हूँ कि चला जा इधर से

हमारे यहाँ महमानो का अनादर करने के रीत नही है काई ऐसा ना हो कि रीत टूट जाए उनके गुस्से की आवाज़ सुनकर मिथ्लेश भी भाग कर आ गई और रोते हुए बोली पिताजी मैं इसके बिना ना जी पाउन्गी तो वो बोले मर तो सकेगी ना ना जाने मेरी परवरिश मे कॉन सी कमी रह गयी जो इसी कुलच्छिनी बेटी मिली मन्ने

 
मैं उसके पिता के सामने जाकर खड़ा हो गया और उनकी आँखो मे आँखे डाल कर बोला

सर जी, फोजी हूँ घमंड खून मे दौड़ता है, अगर आप की भी ज़िद है तो मेरी भी सुन लीजिए चाहते तो भाग कर भी जा सकते थे पर ये ना मानी क्योंकि इसे आपकी झूठी इज़्ज़त का भान था और रही बात हमारी तो इतना वादा है मेरा कि मिथ्लेश की माँग मे मेरा ही सिंदूर होगा जब प्यार कर लिया है तो निभाना भी जानते है हम ब्याह तो होगा ही राज़ी राज़ी नही तो बेराजी अब आप फ़ैसला बता दो

उसके पिता ने बंदूक उठा ली और मेरे सीने पर तान दी मैने कहा मार दीजिए सदियो से प्यार करने वालो का यही तो अंजाम होते आया है वो गुस्से से बोले छोरे आग से ना खेल इस नयी पीडी की यही तो दिक्कत है सब कुछ करना है खुद अरे जो माँ-बाप थमने पाले पोसे है उनके बारे मे भी सोच लिया करो आज या प्यार कर रही है काल गाँव की कोई और छोरी करेगी परसो कोई और

सदियो से चले आ रही रीतियो को तोड़ के के साबित करना चाहो सो थम मैने कहा ठाकुर साहब काश आप कभी प्यार को समझ पाते कभी आप अपनी बेटी को समझ पाते वो बोले छोरे मैं अंतिम बार कह रहा हूँ मेरे घर से निकल जा कही मे अपनी मर्यादा भूल गया तो ठीक ना रहेगा मिता बोली मनीष तुम अभी चले जाओ यहाँ से तुम्हे मेरी कसम है, तो मैने कहा ठीक है मिता तेरे कहने से जा रहा हूँ पर जल्दी ही आउन्गा बारात लेकर तुझे अपनी बना ने को

मिता का आँसुओ से भीगा हुवा चेहरा मेरी आँखो के सामने था मैने कहा मिता अपना मिलन होगा ज़रूर होगा मैं जल्दी ही आउन्गा तो पीछे से उसके पिता बोले महीने भर मे ही छोरी का ब्याह करवा दूँगा मैने बस चुप चाप सुन लिया पर मैने सोच लिया था कि कुछ भी करके बस मिता को ब्यहना ही है मुझे वैसे ही काफ़ी सीन हो गया था उधर बस शूकर था कि कोई मार पिटाई नही हुई थी

मेरा घर भी तो वहाँ से कुछ किलोमेटेर ही दूर था पर हालत देखो कुछ ऐसे थे कि उधर भी नही जा सकता था हताश सा मैं एक पेड़ के नीचे बैठा हुआ था की मेरे मोबाइल पर कॉल आई बस इतना ही बोला गया कि जहा भी हो तुरंत हेडक्वॉर्टर मे रिपोर्ट करो, सम्तिंग ईज़ अर्जेंट तो मैने देल्ही की बस पकड़ ली और सीधा एजेन्सी ऑफीस मे हाजरी दे दी बॉस ने मुझे कॅबिन मे बुलाया और एक फाइल देते हुवे कहा कि तुम्हारे लिए एक काम है

मैने कहा सर , प्लीज़ मुझे डेस्कजॉब चाहिए कुछ दिनो के लिए माइंड बहुत अपसेट है तो वो बोले ऑफीसर ये एजेन्सी तुम्हारे हिसाब से नही चलती है मुझे भी उपर जवाब देना पड़ता है और फिर शेरशाह क्या थकने लगा है जो उसे डेस्कजॉब चाहिए तुम जानते हो कि मैं कितना भरोसा करता हूँ तुम पर और इस काम के लिए तुमसे बेस्ट कॉन है तुम्हारे जाने की सारी तैयारिया हो गयी है नया पासपोर्ट और टिकेट्स तुम्हारी डेस्क पर तुम्हारे पहुचने से पहले होंगी

अब साली नोकारी भी करनी ज़रूरी , जी तो चाहा कि अप्लाइ कर ही दूं कि वापिस अपने केडर मे डाल दो मुझे पर आर्मी से तो ठीक ही था एक आज़ादी सी थी इधर तो मन मार कर एक चाइ का ऑर्डर दिया और अपनी डेस्क पर आ गया और फाइल को पढ़ने लगा तो मेरा और भी दिमाग़ खराब होने लगा अब बस ज़िंदगी मे ये दिन ही देखना रह गया था मैं ऑफीस से निकला अपना सामान लिया

और घर चल पड़ा , निशा घर पर ही थी तो उस से दुआ सलाम हुई पर मेरा मूड बिल्कुल भी ठीक नही था तो मैं बस अपने कमरे मे आ गया और जाने के लिए बाग पॅक करने लगा तो वो बोली अरे ये क्या अभी आए और अभी जा रहे हो मैने कहा यार कुछ ना पूछ अभी टाइम नही है वरना मैं तुम्हे सब बता देता तो वो बोली ठीक है पर इतना तो बता दो कि फिर कब आओगे ताकि मैं इंतज़ार कर सकूँ

तो मैने कहा अब कुछ नही पता इस बार आना होगा या नही तो वो बोली क्यो क्या हो गया है मैने कहा यार प्लीज़ , तो वो मेरे बालो को सहलाते हुवे बोली शांत हो जाओ और बैठो पास मेरे तो फिर मैने उसे पूरी बात बता दी तो उसने कहा कि तुमने ग़लत किया मिथ्लेश को वहाँ पर छोड़ना ही नही चाहिए था पता नही अब उसके फॅमिली वाले उसके साथ कैसा बिहेवियर करेंगे

मैने कहा मजबूर था मैं यार पर जल्दी ही काम ख़तम होते ही कुछ भी करके मैं उसको वहाँ से निकाल लाउन्गा पर तुम्हे मेरा एक काम करना होगा वो बोली बताओ मैने कहा मैं अपना मोबाइल तुम्हे दे कर जा रहा हूँ और अपनी नयी पोस्टिंग पर जातेही मैं वहाँ का कॉंटॅक्ट नंबर तुम्हे दे दूँगा अगर मिथ्लेश का फोन आए तो उसका नंबर मुझे देना वो बोली ये भी कोई कहने की बात है क्या

फिर मैने निशा का माथा चूमा और कहा कि चलता हूँ , तो वो बोली जल्दी काम ख़तम करके आना कही देर ना करदो मैने कहा यूँ गया और यू आया आज मेरा फर्ज़ भी मेरे आड़े आ गया था तो फिर मैं निकल गया एरपोर्ट के लिए वहाँ से अपनी फ्लाइट ली और बोर्ड कर गया शरीर मेरे साथ था पर दिल मे अपना हिन्दुस्तान मे ही छोड़ आया था

पता नही क्यो मेरा दिल बड़ा ही बेचैन हो रहा था ये सफ़र सुहाना नही लग रहा था मेरे लिए दिल मे सनम का ख़याल और दिमाग़ मे अपना फर्ज़ लेकर आख़िर मैं अपनी मंज़िल पर उतर गया , इंटरनॅशनल एरपोर्ट इस्लामाबाद, पाकिस्तान. वैसे मेरी हमेशा से ही हसरत थी कि मैं उस देश को विज़िट करूँ पर इस हालत मे नही पर अब तकदीर के फ़ैसलो को कॉन टाल सकते है फॉरमॅलिटीस पूरी करने के बाद मैं एरपोर्ट से बाहर आया तो

हमारा आदमी पहले से ही मेरा इंतज़ार कर रहा था अपनी तसल्ली के बाद मैं कार मे बैठ गया और गाड़ी अपनी मंज़िल की ओर चल पड़ी रास्ते पे मुझे कुछ देर के लिए नींद आ गयी पता नही क्या वक़्त हो रहा था उस पहर मे हम पर अंधेरा था आसमान मे मैने कहा जनाब कुछ भूक सी लगी है तो कुछ इंतज़ाम होगा क्या वो बोला जी पास मे ही एक मशहूर शॉप है बस थोड़ा सा इंतज़ार कीजिए

क्या बिरयानी खिलाइ उसने मुझे मैं तो फॅन ही हो गया दिल की सारी परेशानियो को उस खाने के स्वाद ने हर लिया था थोड़ी देर के लिए अब मैने बात को बढ़ाते हुए कहा कि कहाँ इंतज़ाम किया है तो बोला सर, कराची की डिफेन्स कॉलोनी मे मैने कहा पर वो तो हाइ प्राइयारिटी वाला एरिया तो वो बोला पर सर अपने जैसो के लिए सेक़ुरटये के क्या मायने और हँसने लगा

 


मैने कहा कब से हो इधर तो बोला सर 9 साल हो गये है शादी भी इधर ही करली और अब इधर ही रहेंगे मैने कहा वतन की याद नही आती तो बोला अरे सर आप भी कैसी बाते ले कर बैठे हो अपने जैसो का कहाँ कोई देश होता है बस अपना काम करो और बात ख़तम अब परिवार इधर तो अपना जीना मारना भी इधर और फिर अगर कोई प्राब्लम हुई भी तो एजेन्सी है ही

मैने कहा वो तो है पर यार इधर के हालत तो काफ़ी खराब बताए जाते है वो बोला आदत है अपने को तो और फिर लोग इतने बुरे भी नही है पर ये जो पॉलिटिक्स है उसका हाल तो आप जानते ही हो, बस बाकी सब ठीक है फिर वो मुझे एक फ्लॅट मे ले गया और कहा आज आप आराम करे कल कराची के लिए सफ़र करना है मैने कहा ठीक है अगले दिन

मेरा सफ़र फिर से शुरू हो गया दिन का उजाला था तो चारो तरफ चहल पहल थी ये देश भी मेरे देश जैसा ही था पर थोड़ा सा अलग भी था पर फिर भी अपना सा ही लगा मुझे तो लोग भी जिंदादिल से थे और जी रहे थे अपनी अपनी जिंदगियो को पर मैं कोई टूरिस्ट तो था नही मैं तो एक किराए का कातिल था जो अपना काम करने आया था और फिर खिसक लेना था

कराची पहुचते ही मुझे पाकिस्तानी आइडी मिल गयी और सेलफोन भी सबसे पहले मैने निशा को फोन करके अपना नंबर बताया और कहा कि अगर मिता की मिस्स्कल्ल मेसेज कुछ भी आता है तो तुरंत इनफॉर्म करना और हाँ तुम फोन स्ट्ड से करना वहाँ मुझे साजिद मिला मैने कहा टीम कब तक आएगी तो उसने कहा जनाब हाइकमान का ऑर्डर है कि मिशन आपको अकेले ही पूरा करना है

मैने कहा पागल हुए हो क्या अकेले कैसे होगा सब तो वो बोला सर मुझे उसके बारे मे कुछ नही पता , मेरा काम तो आप तक बस ज़रूरत का सामान पहुचाना है आप बता दीजिए कि क्या क्या चाहिए मैं अरेंज करता हूँ मैने उसको देखा और कहा एक बॉटल बियर ले आ मैने बॉस को कॉंटॅक्ट किया और कहा तो वो बोले शेरशाह तुम तो वैसे भी एक्सपर्ट हो और

फिर पाकिस्तान मे टीम वर्क करेंगे तो नज़रो मे आ जाएँगे उपर से गँवरमेंट. का इतना प्रेशर है और फिर तुम्हारा कोई रेकॉर्ड है ही नही एक दम क्लीन हो तुम मैने कहा सर आपको एक बात कहनी थी वो बोले श्योर, मैने कहा सर एक आइएसआइ एजेंट मुझे जानती है पर्सनली तो सर बोले और तुम मुझे अभी बता रहे हो तुम अभी निकलो उधर से दो घंटे मे लंडन की फ्लाइट मे तुम्हारा टिकेट बुक होगा

मैने कहा सर , अब आया हूँ तो काम निपटा ही दूँगा बस आप मेरे एग्ज़िट का ध्यान रखना तो वो बोले हवा, पानी या बाइ रोड हर रास्ते पर तुम्हारे लिए मदद मिलेगी बस तुम जिंदा रहना और भूल कर भी पकड़ मे नही आना वरना इंटरनॅशनल स्तर पर हमारी वॉट लग जाएगी मैने कहा सर अब मुझे अपने हिसाब से प्लान बना ना होगा और एक सेफ जगह भी चाहिए जहाँ मैं शांति से सोच सकूँ

बॉस बोले मेरे बाप जो करना है कर पर ध्यान रखना अगर गड़बड़ हुई तो रॉ आगे है ना पीछे, मैने कहा वो तो आपका पहला काम है वो बोले बेटे कोई नादानी नही करना अब तक तो पाकिस्तान की इंटेलिजेन्स को पता चल ही गया होगा कि इंडियन रॉ का एजेंट उनके मुल्क मे लॅंड किया है मैने कहा नही सर ऐसा कैसे हो सकता है तो वो बोले होते है कुछ राज पर जल्दी ही तुम मुझे वापिस चाहिए वो भी वन पीस मे

आज से पहले कभी अकेले काम किया नही था तो कुछ घबराहट सी हो रही थी पर चलो ये ही सही मैने कहा साजिद मुझे 20000 पाकिस्तानी रुपये चाहिए और सभी अलग अलग सीरियल मे होने चाहिए और रहने के लिए ऐसी जगह जहाँ कुछ टाइम मिल सके तो वो बोला पर जनाब आपका इंतज़ाम तो डिफेन्स कॉलोनी मे कर दिया गया है मैने कहा जो कहता हूँ वो करो वो बोला बस कुछ देर मे इंतज़ाम हो जाएगा

 


कराची, की बदनाम गलियाँ जैसे अपने यहाँ देल्ही मे जीबी रोड फेमस है कदम रखते ही मैने कहा भाई जान इस से बेहतर कुछ नही मिला क्या तो वो बोला जनाब आप आइए तो सही फिर कुछ सन्करि गलियो से गुज़रते हुए हम लोग एक ख़स्ता हाल सी इमारत मे घुस गये वो बोला सारा इंतज़ाम इधर ही है आपके लिए पर्सनल रूम वित हाई स्पीड इंटरनेट और ये लीजिए आपके पैसे

वो बोला अगर और कुछ मदद चाहिए तो सलमा से कह देना मैने कहा ठीक है मैं अपने प्लान का डेमो तैयार करने लगा पर मेरा दिल बारबार मिथ्लेश की तरफ भाग रहा था वैसे मैं अपने फर्ज़ और पर्सनल लाइफ को हमेशा अलग रखता था पर आज ये साला दिल कुछ ज़्यादा ही खिलाफत कर रहा था मैने लॅपटॉप ऑन किया ही था कि तभी कुण्डी खड खड़ाई

मैने दरवाजा खोला तो बाहर सलमा खड़ी थी पेशे से वो तवायफ़ थी पर बला की हसीन थी वो बोली जी आपके लिए चाइ लेकर आई हूँ मैने कहा अंदर आइए तो वो मेरे लिए चाइ कप मे डालने लगी चाइ पीते पीते बात करने लगी उसने पूछा हिन्दुस्तानी हो मैने कहा जी वो बोली सुना है हिन्दुस्तानी लोगो के दिल बहुत बड़े होते है मैने कहा कोई शक़ है क्या

तो वो बोली पर हम पाकिस्तानी भी बेहतरीन मेहमान नवाज़ी करते है मैने कहा बेशक, अब आपके मेहमान है तो आपकी मेहमान नवाज़ी भी देख लेंगे वो बोली करम हमारा हम बाते कर ही रहे थे कि बाहर से कुछ आवाज़े आई तो सलमा बाहर चली गयी मैं भी उसके पीछे पीछे आ गया तो देखा कि एक आवारा सा दिखने वाला इंसान दारू के नशे मे चूर कुछ लड़कियो से बदतमीज़ी कर रहा था

पर मैं इस मामले मे कुछ नही कर सकता था थोड़ी देर बाद सलमा फिर से वापिस आई और बोली ये मुल्ला बिन क़ासिम का भतीजा है शहर पर इनकी ही हाक़ूमत है सरकार भी कुछ नही बोलती जीना हराम किया हुआ है बिन क़ासिम ये नाम मुझे कुछ सुना सुना हुवा सा लगा तो फिर सलमा के जाने के बाद मैने बिन क़ासिम की डीटेल्स देखी कहने को तो बिज्नीस मॅन था पर सारे दो नंबर के काम थे हथियारो की स्मगलिंग, गोल्ड और नशे का कारोबार करता था

अच्छा रशुख था सहर मे उसका , तो मैने एक आइडिया सोचा और फिर मैने सलमा से कहा कि मैं ज़रा सहर घूम कर आता हूँ यहाँ की आबो हवा से वाकिफ़ हो लूँ वो तो मना कर रही थी पर मैं उधर से निकल आया और उसके भतीजे का इंतज़ार करने लगा जैसे ही वो कोठे से निकला और अपनी कर की तरफ बढ़ा मैने उसका पीछा शुरू कर दिया उस सुनसान गली मे खड़ी एक कार को मैने चुराया

और उसकी गाड़ी के पीछे लगा दिया , मज़ारे शरीफ इलाक़ा यहाँ पर वो पान खा रहा था चारो तरफ भीड़ की गहमा घहमी थी मेरी नज़र बराबर से उसके उपर लगी हुई थी कुछ तो था मेरे मन मे फिर वो अचानक से पब्लिक टाय्लेट की तरफ बढ़ा और मैं भी उधर ही लपक लिया उन बीस तीस सेकेंड्स मे ही मैने अपना काम कर दिया था अगले रोज अख़बार मे सुर्खिया थी एक मर्डर की एक हाइ प्रोफाइल मर्डर की

असल मे मेरा मकसद था कि मैं सबका ध्यान इस ओर मोड़ कर अपना काम आराम से कर सकूँ पर क्या ये सब इतना आसान था शहर जैसे ठप्प हो गया था पर इन दो दिनो मे मैने उस खास एरिया की रेकी कर के जानकारी निकाल ली थी साजिद की आख़िरी मदद ये थी कि उसने बिल्डिंग का ब्लूप्रिंट निकाल दिया था अब मेरे पास बहुत ही कम टाइम था मुझे जल्दी से जल्दी वापिस हिन्दुस्तान निकलना था

जहाँ मेरी मोहब्बत आँखे बिछाए मेरा इंतज़ार कर रही थी कैसी ये जंग सी छिड़ गयी थी मेरे फर्ज़ और मेरी मोहब्बत के बीच दोनो ही मेरे लिए अज़ीज थे और दोनो ही मुझसे कुर्बानी माँग रहे थे मैं अपने काम मे माहिर एक किराए का कातिल था पर इस बार मेरे पास बॅकप नही था मेरे पास कोई टीम नही थी जो करना था अकेले को करना था

 


पाकिस्तान आर्मी का ख़ुफ़िया प्रिज़न सेल था वो , पर चूँकि पब्लिक एरिया मे था तो सेक्यूरिटी इतनी हाइटीक नही थी पर फिर भी टाइट तो थी ही उस दिन इतनी घबराहट मुझे पहले कभी नही हुई थी उस सुबह से ही मेरा दिल बड़ा घबरा रहा था आख़िर क्या मुझे डर लग रहा था बदन से बार बार पसीना बह रहा था ड्रेनिंग लाइन के रास्ते से मैं बिल्डिंग के सीवरेज टॅंक तक आ गया

पूरा प्लान मेरे हिसाब से सेट कर रखा था मैने वहाँ से किसी तरह मैं एर कंडीशनिंग डक्ट मे घुस गया और फिर आहिस्ता आहिस्ता रेंगते हुए मैं ब्लॉक 57 मे आ गया डक्ट की झिर्रियो से देखा तो उस कमरे का नज़ारा मेरा दिल दहल गया उफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या हालत कर दी थी कमिनो ने , ये थी मेरी वजह यहाँ पर आने की हमारी कोर एजेंट राधा

जिसे पाकिस्तानी रेंजर्स ने बॉर्डर एरिया मे धर लिया था इसी को निकालना था मुझे यहाँ से पर शायद उस दिन किस्मत मेरे साथ नही थी मैने अपनी तरफ से सब कुछ तय कर लिया था एंट्री तक सब पर्फेक्ट था पर जिस चीज़ पर मैने गोर नही किया था वो थी सीसीटीवी कॅमरा और मोशन सेंसर दरअसल इन सब चीज़ो की ज़िमेदारी हमारे कंप्यूटर एक्सपर्ट की होती थी पर यही पर मुझ से गड़बड़ हो गयी

डक्ट तोड़ कर कमरे मे एंटर होते ही मुझे पता चल गया कि पंगा खड़ा हो गया है मेरे उतरते ही मोशन अलार्म बज उठा और बिल्डिंग मे हलचल मच गयी शेरशाह की सारी होशियारी धरी गयी राधा की हालत भी ठीक नही थी पर अब तुरंत फुरंत का काम था और मुझे कोई भी शौक नही था कि राधा के साथ मैं भी क़ैद हो जाउ तो मैने गन निकाल ली और सीधा मेन गेट पर फाइयर किया लॉक टूट ते ही बाहर के दो गार्ड्स को सल्टाता हुआ मैं राधा को घसीट ते हुए भागा , पर इतना आसान नही था एग्ज़िट करना मुझे पता था कि 5 मिनिट मे ही पाकिस्तानी आर्मी चारो और से कवर कर लेगी और मैं एंट्रेन्स से ब्लॉक 57 की दूरी 300-400 मीटर तो थी ही मैने फाइरिंग करते हुए कहा कि राधा तुम होसला रखना मैं कुछ नही होने दूँगा तुम्हे सुरक्षित ले जाउन्गा मैं तुम्हे उसने मेरी ओर उम्मीद से देखा

दो मिनिट के अंदर ही मैं 10-12 गार्ड्स को ढेर कर चुका था पर थे हम अभी भी कॅंपस मे ही तभी मेरी नज़र आर्मी की गाड़ी पर गयी मैं और राधा दौड़ते हुए उधर गये मैने गेट खोला और उसको अंदर धकेला और खुद बैठ ही रहा था कि तभी वो हो गया जो बिल्कुल ही नही होना चाहिए था मेरी आँखे जैसे बाहर को ही आ गयी मैं हाथ नीचे ले गया तो देखा कि खून निकल रहा था

बुलेट हिट कर गयी थी कमर के निचले हिस्से पर सर घूम गया मेरा तो पर फिर खुद को संभालते हुए मैने गाड़ी स्टार्ट की हालत को समझते हुए राधा ने कवर फाइरिंग स्टार्ट कर दी और फिर मैं गेट से निकल गया और गाड़ी आर्मी एरिया की सड़को पर दौड़ ने लगी पास से ही एक शॉर्टकट था जो कि सिविल लाइन्स की तरफ जाता था तो मैने गाड़ी उधर ही दौड़ा दी आँखो से आँसू बह चले थे

दर्द बुरी तरह से बह रहा था राधा ने खून को रोकने के लिए मेरी शर्ट को फाड़कर पट्टी की तरह से लपेट दिया था पर मेरी हिम्मत जवाब देती जा र्है थी पीछे आर्मी की गाडिया लगी थी सिविल लाइन्स मे पोलीस को इत्तिला हो गयी थी तो उधर भी ब्लोकॅज हो रहा था पर दाद देनी होगी पाकिस्तानी आर्मी को गाड़ियाँ बहुत लाजवाब रखते थे तो बारैकेड को तोड़ते हुवे आख़िर मैने वो इलाक़ा भी पार कर लिया

मेरी आँखे बंद होने के कगार पर आ गयी थी बस किस्मत का ही सहारा था और उस उपरवाले ने भी ठीक उसी पल अपना जलवा दिखाया पास मे ही किसी पीर साहब की सवारी जा रही थी तो खूब भीड़ थी उस चौराहे पर तो मैं और राधा किसी तरह से उस भीड़ मे शामिल होगये और फिर कराची बकरी के पास वाली गली से होते हुवे बदनाम मोहल्ले मे घुस गये

जाते ही मैं तो बेड पर पड़ गया अब मोर्चा सलमा ने संभाला उसने फॉरन ही हमे एक तहख़ाने टाइप कमरे मे पहुचा दिया और आधे घंटे से भी कम समय मे डॉक्टर का इंतज़ाम कर दिया साजिद भी वहाँ पर आ गया था राधा के घाव की ड्रेसिंग कर दी गयी और मेरी गोली भी निकाल दी गयी थी डॉक्टर बोला हालत मे सुधार होने तक आपको आराम ही करना होगा

मैने कहा साजिद साले कैसी जॅकेट लाया था गोली तो पार कर गयी वो बोला भाईजान माफी दे दे वो क्या है ना इधर ज़्यादातर माल चाइना से आता है तो ग़लती हो गयी मैने कहा नालयक मुझे तो परेशानी होगयि ना दवाइयों के नशे मे नींद आ गयी होश आया तो दिन निकला हुआ था पता चला कि 18 घंटे बाद उठा था मैं राधा ने मुझे बहुत ही शुक्रिया कहा मैने कहा किसने एजेंट बना दिया जो फँस गयी तो वो कुछ ना बोली साजिद ने बताया कि भाईजान मीडीया मे बात लीक हो गयी है कि कोई हिन्दुस्तानी जासूस घुस आया है उन्होने ये तो नही कहा कि किसी को भगाकर ले गया है पर अब तक तो आइएसआइ भी इन्वॉल्व हो गयी होगी मैने कहा हाँ मुझे पता है उधर सीसीटीवी मे मेरी शकल भी गयी होगी भाई वो बोला कि बॉर्डर एरिया की तरफ जाने वाला हर रास्ता सील कर दिया गया होगा , हर एरपोर्ट, बस स्टेशन, रेल सब जगह सेक्यूरिटी होगी चेकिंग चालू होगी

 


प्राब्लम ये थी कि मुझे हर हाल मे निकलना था वैसे ही दस दिन खराब हो गये थे इधर और मिता के पिताजीने कहा था कि वो महीने भीतर ही उसकी शादी कर देगा हर पल मुझे उधर की चिंता थी और मैं इधर फसा हुआ था और घायल था वो अलग से मैने बॉस से कहा कि सर कुछ भी करके निकालिए इधर से मेरा कहीं पहुचना बहुत ही ज़रूरी है बॉस ने कहा कि केस सेनस्टिव हो गया है

पाकिस्तान ने हम पर आरोप लगाया है तुम्हे तो पता ही है कि वो हमेशा राग अलपता रहता है कि रॉ की इनवोलव्मेंट है तुम किसी भी तरह से किसी भी बॉर्डर साइड पर आ जाओ मैं वादा करता हूँ कि निकल लूँगा उधर से तुमको पर तुम्हारी हालत भी ठीक नही है तुम कुछ दिन आराम करो उधर ही छुपे रहो अपने एजेंट्स मदद करेंगे तुम्हारी और मामला थोड़ा सा ठंडा होते ही तुम आ जाना मैने कहा सर आप समझ नही रहे है , मेरा इंडिया आना बहुत ही ज़रूरी है तो बॉस बोले बॉर्डर तक तो आओ गुरुजी मैने गुस्से से फोन काट दिया अब साला इतनी टाइट सेक्यूरिटी मे कॉन हेल्प करे मेरी मेरा एक एक दिन भारी हो रहा था मुझ पर 5-6 दिन इसी तरह से कट गये और पल पल मेरी जान निकली जाए पर कोई रास्ता ना सुझे तो आख़िर मैने उस दिन साजिद से मेकप करवा के अपना हुलिया बदलवाया और लंगड़ाते हुए वहाँ से बाहर निकल आया

हिम्मत करके किसी तरह से एक पीसीओ तक पहुचा आख़िर मजबूर होकर मैने वो नंबर डाइयल कर ही दिया जो एक दो धारी तलवार साबित हो सकती थी मेरे लिए हो सकता था कि फिर सारी ज़िंदगी याहान की किसी अंधेरी कोठरी मे गुज़रे पर मेरी हालत ऐसी ही थी कि बस अब एक ही दरवाजा था जहाँ पर मुझे मदद मिल सकती थी घंटी गयी पर कोई रेस्पॉन्स नही फिर घंटी गयी पर फिर कोई रेस्पॉन्स नही

10-12 बार मैने वो नंबर लगाया पर सेम रिज़ल्ट और फिर जैसे ही मैं हताश होकर पीसीओ से बाहर निकला ही था कि पीसीओ वाले फोन की रिंग बजी तो मैने लपक कर उठाया मैने बस इतना ही कहा कि तुम्हारा हिन्दुस्तानी दोस्त जल्दी से मुझे कराची बकरी के पास मिलो और फोन रख दिया मुझे पता था कि वो ज़रूर आएगी ये मैने एक बहुत बड़ा रिस्क लिया था

पर अब वो ही थी जो मेरी मदद कर सकती थी रिक्शा लिया और मैं उधर पहुच गया और बीस पचीस मिनिट बाद वो भी उधर आ गई मैं धीमे से चलते हुए उसके पास गया और कहा कि मेरे पीछे आओ मुझे ये भी नही पता था कि वो अकेली है या किसी के साथ है पर फिर हम दोनो पास मे एक जूस की दुकान मे बैठ गये महक बोली तो तुम हो शेरशाह

मैने कहा कोई शक़ वो बोली जिसे पूरे पाकिस्तान की पोलीस, इंटेलिजेन्स शिद्दत से चप्पे चप्पे पर ढूँढ रही है वो खुद मरने को आ गया मैने कहा महक देखो फालतू बातो का टाइम नही है मेरे पास मेरी मोहब्बत मेरा इंतज़ार कर रही है हिन्दुस्तान मे मेरा पहुचना बहुत ही ज़रूरी है वरना मोहब्बत रुसवा हो जाएगी और मैं बेवफा वो बोली तो मैं क्या कर सकती हूँ, मैने कहा इस टाइम मैं तुम पर ही भरोसा कर सकता हूँ प्लीज़ कुछ भी करके मुझे बॉर्डर पार करवा दो तो वो बोली वाह जनाब आप भी ना , आपकी इन्ही अदाओं पर तो हम फिदा है दुश्मनो पर भी आप इतना भरोसा करते है कसम से खुदा ने खूब सोच कर आपको बनाया है जानते है अगर मैं अभी आपको पकड़ लूँ तो मुझे कितना इनाम मिलेगा और प्रमोशन अलग से

मैने कहा महक तुम ये बताओ कि मेरी हेल्प करोगी या नही मैं वादा करता हूँ कि जब भी तुम्हे मेरी हेल्प चाहिए होगी मैं दौड़ा चला आउन्गा तो वो बोली जनाब पर आपकी मदद करके मुझे गद्दार समझा जाएगा मैने उस दिन भी कहा था कि हमारे रास्ते अलग अलग है और बेहतर होगा कि आप फिर कभी ना मिलना मैने कहा अब रिश्ता ही तुमसे ऐसा है तो करे भी क्या

जान तुम्हारे हाथ मे रख दी है चाहे ले लो पर कुछ भी करके हिन्दुस्तान पहुचा दो वरना कही मोहब्बत रुसवा हो गयी तो लोगो का प्यार पर से ऐतबार उठ जाएगा महक अपनी आँखो पर चश्मा पहनते हुए बोली कुछ तो क़र्ज़ है ही आपका मुझे पर शेरशाह जी अब आपकी मदद ना करी तो जन्नत नसीब ना होगी उसने कहा अपना सेल नंबर दो मुझे

और थोड़ा सा टाइम ताकि मैं जुगाड़ कर सकूँ मैने उसका हाथ चूम लिया और कहा तेरी मेरी दोस्ती सरहदों मे कभी नही बटेगी बेशक हम अलग-अलग वतन के सिपाही है पर मेरा वादा है कि मेरी अंतिम सांस तक तू जब भी बुलाएगी तेरे लिए दौड़ा चला आउन्गा महक बोली अभी जाती हूँ तो उसी रात मैने बॉस को फोन किया और कहा कि मैं बॉर्डर पर आ रहा हूँ बीएसएफ से बात कर लेना और एक हेलिकॉप्टर भी चाहिएगा जो मुझे तुरंत ही मेरी मंज़िल पर पहुचा दे वो बोले डॉन’ट वरी हो जाएगा, कुछ अपने करम थे ऐसे कुछ तो बात थी उस महक मे जो मेरी दोस्ती के लिए अपने फर्ज़ से गद्दारी कर गयी थी गद्दार होना मंजूर कर लिया था उसने , अपने सोर्सस के बल पर उसने हमे गुजरात बॉर्डर पार करवा दिया मैने उसका माथा चूमा और कहा तुम्हारा अहसान रहगा हमेशा तो वो आँखो मे आए हुए पानी को बहने ने रोकती हुई बोली

बस इतनी गुज़ारिश है कि आज के बाद मुझे मत मिलना बीएसएफ से सेट्टिंग हो ही चुकी थी तो आख़िर अपनी सरहद मे आ ही गये बीएसएफ कॅंप मे बॉस के वादे के अनुसार हेलिकॉप्टर तैयार खड़ा था मैने उसे कहा कि पहले देल्ही नही चलना है बल्कि मेरे शहर चल तो उसने कहा कि सर ऑर्डर नही है मैने कहा माँ चुदाये ऑर्डर जैसा कह रहा हूँ वैसा ही करो मेरी लाइफ का सवाल है

तो करीब 3 घंटे बाद हम मेरे सहर मे थे मैं तुरंत ही पोलीस के एसपी के पास गया उसको आइडी दिखाई और पूरी बात बताई और फोर्स लेकर मिता के घर पर चल दिया

 


आँखो मे हज़ार सपने और दिल मे अरमान लिए वो शहर से कुछ किलो मीटर का सफ़र बड़ा ही लंबा लग रहा था जिसके लिए मैं सरहद तोड़ आया था वो मेरी मिथ्लेश मेरी आँखो से बस थोड़ा सा ही दूर थी ची चीईइ करती हुई एक के बाद एक कई गाडिया गाँव मे एंटर कर गयी मैने उन्हे अपनी मंज़िल की डाइरेक्षन्स बताई तो गाड़ी तेज़ी से मिथ्लेश के घर की ओर बढ़ चली

पर जैसे ही मैं गाड़ी से उतरा मेरा तो दिमाग़ ही घूम गया घर के बाहर दरि बिछी हुई थी और कुछ लोग बैठे हुए थे किसी अनिष्ट की आशंका से मेरा दिल काँप उठा मैं दौड़ते हुए घर के अंदर गया उसकी माँ मुझे देखते ही दहाड़े मार के रो पड़ी अगले पल जो ख़याल मेरे दिल मे आया मेरा कलेजा कांप उठा मैने डरी सी आवाज़ मे कहा आंटी मिता कहाँ है

तो वो रोते हुए बोले चली गयी ओूऊऊऊऊऊऊऊओ चली गाइिईई हमे छोड़कर चली गयी है राम मेरिइइ बेटिईईईईईईईई गयी वो ओ मेरे तो जैसे घुटने ही टूट गये मैं उधर ही गिर पड़ा आँसू अपने आप मेरी आँखो से बहने लगे गला जैसे जाम ही हो गया उसकी माँ बोली खा गया तू मेरी बेटी को क्या पट्टी पढ़ा दी तूने उसको देख ले तेरे लिए जान दे गयी वो अपनी

अब तो हो जाएगी तस्सली तुझे भी और उसके बाप को खानदान की झूठी इज़्ज़त के ईए बेटी का नाश कर दिया मैं बोला आंटी कह दो कि आप झूठ बोल रही हो मिता की बहन मेरे पास आई और बोली मनीष सच है जीजी अब नही रही परसो सल्फास निगल ली उन्होने उसके ये शब्द सुनकर मेरी रही सही हिम्मत भी टूट गयी और मैं वही पर रोने लगा मेरी मुहब्बत हार गयी थी

मेरा इंतज़ार ना कर सकी वो पगली चली गयी मुझे छोड़ कर जीते जी मार गयी मुझे वो ये कैसी सज़ा दे गयी वो मुझे अपने से इस तरह जुदा कर गयी वो मुझे मेरे सारे ख्वाब टूट कर बिखर गये थे मेरी दुनिया बसने से पहले ही उजड़ गयी थी पर अब करूँ भी तो क्या मुझे तो बस मेरी मिता चाहिए किसी भी कीमत पर पर कहाँ से लाउ उसे

मैने सोचा जब वो ही नही रही तो अब मैं भी जीकर क्या करूँगा मैने अपना सर दीवार पर पटकना शर कर दिया तो पुलिसे वालो ने मुझे पकड़ लिया और कहने लगे कि सर प्लीज़ कंट्रोल कीजिए आप अपने आप पर, कंट्रोल कैसे करूँ मैं मेरा सब कुछ लुट गया बर्बाद हो गया मेरा दिल किया कि कही से कोई बिजली गिर जाए मुझ पर और मैं भी खाक हो जाउ मेरी रूह मिल जाए उसकी रूह से

मैने रोते हुए मिता के पिता से कहा सरपंच आज तो आपका बहुत मान बढ़ गया होगा ना समाज मे सर्टिफिकेट मिल गया होगा आपको इज़्ज़त का काश एक बाप के दिल से सोचा होता आपने लो मुझे भी मार दो कर दो जुदा इस दर्द से मुझे अब नही जी पाउन्गा मैं मिथ्लेश के बिना मैं अरे प्यार ही तो किया था कोई गुनाह नही किया था क्या कसूर था हमारा जो जुदा कर दिया हमको

चाहती तो भाग जाती मेरे साथ पर कहती थी कि बाप के आशीरवाद से ही जाउन्गी तुम्हारी दुल्हन बनकर पर देखो तुम्हारी ज़िद ने क्या कर दिया मुझे नही पता लाकर दो मेरी मिथ्लेश मुझे कही से भी मेरी अमानत तुमको सोन्प कर गया था मुझे बस वापिस कर दो दहाड़े मार कर मैं रो रहा था उस टाइम जो भी लोग वहाँ पर थे सब की आँखे बह चली थी

झूठी इज़्ज़त के लिए मेरी पवित्र सच्ची मोहब्बत की बलि चढ़ गयी थी वो मर्जानी मेरा इंतज़ार क्यो ना कर सकी मैने वादा किया था कि आउन्गा ज़रूर उसे लेने भगवान ये कैसा जुलम कर दिया तूने मुझ पर बसने से पहले ही उजाड़ दिया मेरा घर बता अब कहाँ जाउ मैं कितनी मन्नतें माँगी थी बस एक मिथ्लेश के साथ ज़िंदगी बिताने को ऐसी कोई मज़ार मंदिर मस्जिद नही जहाँ पर ये दुआ ना माँगी मैने

पर क्या एक ने भी नही सुनी जिसे सारी दुनिया ना हरा सकी उसे उसकी तकदीर ने हरा दिया था , सदियो से इस दुनिया मे प्यार करने वालो का यही अंजाम होता रहा था और हमारी कहानी भी अधूरी रह गयी थी हार गया था मनीष और मिथ्लेश का प्यार वो मुझे छोड़ कर चली गयी थी रुसवा कर गयी थी मुझे ये कैसा बोझ दे गयी थी वो मुझे

मैने पूछा कहाँ किया उसका अंतिम संस्कार ले चलो मुझे उधर तो मिता का भाई मुझे उधर ले गया उसकी आँखे भी भारी हुवी थी दो चार लोग और साथ हो लिए उसकी राख को देख कर मेरा कलेजा फट गया मैने कहा उपरवाले तू इतना निष्ठुर नही हो सकता काश वो गोली उस दिन मेरा कलेजा चीर जाती तो आज ये दिन ना देखना पड़ता ये कैसी सज़ा दी है तूने मुझे

आख़िर क्या कसूर था हमारा बस एक साथ जीना ही तो चाहा था हम ने , उसकी राख से ही लिपट गया मेरा अपने ज़ज़्बातो पर कोई काबू ना रहा मेरा कुछ तो तपिश बची थी उस राख मे मेरी जान थी वो मेरा सब कुछ थी मेरी दिल मेरी धड़कन क्यो ये सितम कर गयी मुझ पर पता नही कैसे मेरे घर वाले भी उधर आ पहुचे थे मेरे साथ राधा थी उसने रोते हुवे कहा प्लीज़ चुप हो जाओ काबू रखो अपने आप पर

पर कैसे कैसे संभालू मैं खुद को पापा से लिपट कर खूब रोया मैं उस गम के महॉल मे सबकी आँखे गीली हो गयी थी पापा बोले बस बेटा चुप होज़ा तेरा उसका साथ यही तक था बेटा ये दुनिया तुम लोगो की निस्चल भावना को नही समझ पाई मेरे बेटे सम्भालो खुद को वो तुम्हे छोड़ कर गयी है पर उसकी रूह हमेशा तुमसे जुड़ी रहेगी

 
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