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Guest
मैं उनके पास लेट गया और उनको अपने से चिपका लिया वो मेरे लंड से खेलने लगी वो तेज़ी से अपने हाथ को लंड पर उपर नीचे कर रही थी जब मुझसे रहा नही गया तो मैने मामी को पोज़िशन मे लिया और लंड को चूत से मिलन के लिए तैयार कर दिया मामी बोली बस घुसाओ ना इतनी देर क्यो लगा रहे हो तो मैने दो चार तेज के झटके लगाए और अपने लंड को मामी की चूत की गहराइयो मे उतार दिया
मामी आआ हाआआआआआआअ आआआआआआ हह करने लगी पूरा लंड चूत मे जा चुका था तो मामी ने मेरे गाल पर किस किया और अपनी बाहें मेरे गले मे डाल दी तो मैं अपने कुल्हो को उचकाते हुए मामी को चोदने लगा तो मामी ने अपने पैरो को फ्लॅट कर लिया ताकि चूत और भी अच्छे से लंड पर कस जाए और चुदाई मे मज़ा आए तो धक्के पे धक्का लगाते हुए मैं मामी मे समाए जा रहा था और वो मुझ मे मामी ने अपने हाथ मेरी पीठ पर कसे हुए थे और पूरी मस्ती से अपनी चूत मरवा रही थी इस सेक्स मे वासना से ज़्यादा प्रेम का भाव था हम दोनो को कोई भी जल्दी नही थी बस कोशिश थी कि ज़्यादा से ज़्यादा एक दूजे मे समाए रहे मामी आज रात फिरसे मेरी दुल्हन बनी हुई थी और अपनी सुलगती जवानी की आग को मेरे प्यार के छींटो से बुझा रही थी
पूरे आधे घंटे तक हम दोनो बस उस एक ही पोज़िशन मे एक दूसरे मे समाए रहे फिर मैं उनकी चूत मे ही झड गया तो दोस्तो उस पूरी रात हम फिर से नही सोए उनको भी पता था कि अगले दिन मैं जाने वाला हूँ तो वो भी एक एक पल को लूटना चाहती थी और कुछ ऐसी ही हसरत मेरी भी थी तो पूरी रात मामी और मैं अपनी इच्छाओं की पूर्ति करते रहे
अगले दिन दिल थोड़ा सा उदास सा हो रहा था नाश्ते के बाद मैं तैयार हो चुका था जाने के लिए हालाँकि सभी लोग चाहते थे कि मैं कुछ दिन और रुकु पर आज तो मुझे निकल ना ही था सब लोगो से मिलने के बाद आख़िर अपन वहाँ से रुखसत हो ही लिए सहर आकर जयपुर के लिए बस पकड़ ली सफ़र थोड़ा लंबा था तो कानो मे इयरफोन लगाया और सो गया फिर आँख सिंधी कॅंप बस स्टॅंड ही खुली
शाम के 4 बज रहे थे, बस से उतर कर बाहर के रेस्टोरेंट मे कुछ खाया पिया और फिर वापिस आके अजमेर की बस पकड़ ली ढाई-तीन घंटे और लग जाने थे अभी खिड़की वाली सीट पर बैठे मैं बाहर के नज़ारे देखता हुआ सफ़र के ख़तम होने का इंतज़ार कर रहा था आख़िर अपनी प्राण प्यारी से जो मिलना था आज तो वो सफ़र भी कट ही गया किसी तरह से
अजमेर बस स्टॅंड पे उतरते ही मैने मिता को फोन किया तो उसने कहा कि वो अभी रेलवे स्टेशन के पास वाले बाजार मे है तो उधर ही आ जाउ फिर साथ रूम पर चलेंगे तो मैने ऑटो लिया और उधर ही पहुच गया मिता की लोकेशन फिर से पूछी और फिर आख़िर कर अपनी डार्लिंग के दीदार हो ही गये हाथो मे सब्जियो से लदा हुआ थैला उसके हाथो मे देख कर हँसी आ गयी मुझे
मैं ऑटो वाले को किराया दिया और फिर मिता को गले से लगाया मैने कहा कितनी पतली हो गयी है तू तो वो बोली बस तुम्हारी जुदाई मे ही हो गयी हूँ अब तुम तो पता नही कहाँ लगे रहते हो तो मेरी फिकर कॉन करेगा मैने कहा यार अब तुझे तो सब पता ही है ना कि कैसी लाइफ है मेरी तो बार बार क्या शिकायत करनी बल्कि तुम्हे तो आदत डालनी चाहिए आख़िर एक फोजी की घरवाली जो बन ने जा रही हो
वो बोली सारी बात इधर ही करोगे या रूम पे भी चलोगे तो फिर हम पैदल पैदल ही रूम पर आ गये मैने अपना बॅग रखा और बेड पर बैठ गया मिता सामान रखने लगी कुछ भी तो नही बदला था उस छोटे से कमरे मे सब कुछ पहले जैसा ही था आज भी मिता चाइ बना ने लगी तो मैने रेडियो ऑन कर दिया धड़कन फिल्म का गाना सुनकर दिल रोमॅंटिक सा होने लगा था
चाइ का प्याला पकड़ते हुए उसकी उंगलिया जो मेरे हाथो से छुई तो दिल पे कुछ काबू सा ना रहा मैने चाइ साइड मे रखी और मिता को अपनी बाहों मे ले लिया वो बोली आते ही शुरू हो गये मैने कहा तेरी मेरी जुदाई भी तो कुछ ज़्यादा ही लंबी होती है ना मिलन का पल ना जाने कब आएगा तो वो बोली बस कुछ दिनो की बात है एक बार घर वालो से सब फाइनल हो जाए
तो अपनी गृहस्थी बसने का रास्ता भी खुले आख़िर कब तक हम लोग यूँही भटकते रहेंगे मैने कहा यार अब सच मे ही नही रहा जाता तुम्हारे बिना तो वो मेरे अंदर थोड़ा सा और सिमट ते हुए बोली और मैं अपना हाल किसे कहूँ कितनी अकेली हूँ मैं तुम्हारे बिना मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए बोला कि डार्लिंग मैं भी तो अधूरा ही हूँ ना तुम्हारे बिना कल तुम्हारी माँ से मिल तो रहे है
देखते है कि क्या होता है, वो प्रार्थना करते हुए बोली बस मेरी ये मन्नत पूरी हो जाए तो मेरा जीवन भी सफल हो जाए मैने कहा तुम चिंता ना करो सब ठीक ही होगा मिता बोली चाइ पी लो ठंडी हो रही है तो मैं चाइ की चुस्किया लेने लगा वो पूछने लगी कि शादी कैसी थी तो मैने सबकुछ बताया उसको तस्सल्ली से तो वो थोड़ा सॅड होते हुए बोली काश अगर अपनी शादी पहले हो गयी होती तो अपन भी एंजाय कर सकते थे