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ज़िंदगी भी अजीब होती है Restart

प्रीतम के बाडे पे नज़र मारी तो वहाँ कोई दिखा नही था अब बस इंतज़ार ही था कोई आधे घंटे बाद फिर देखा तो वहाँ पे लाइट जल रही थी तो मैं समझ गया कि वो आ गयी होगी मैं कच्छे-बनियान मे ही था सावधानी से इधर उधर देखा और उसके बाडे की दीवार पे चढ़ के अंदर कूद गया धम्म्म्म की आवाज़ हुई तो वो थोड़ा चोंक गयी और थोड़ा ज़ोर से पूछा कॉन है मैं जल्दी से उसके पास गया तो वो मुझे देखते हुए बोली तुम यहाँ कैसे क्या कर रहे हो तो मैने उसे चुप करते हुए कहा मैं तो तुमसे मिलने आया हू उसने फॉरन लाइट बंद की ओर हम वहाँ बैठ गये

वो फुसफुसाते हुए बोली कि तुम भी मुझ मरवा के छोड़ोगे एक दिन इतनी भी क्या आग लगी है अब उसे क्या बता ता कि किस कदर आग लगी पड़ी थी मैने उसे मक्खन लगाते हुए कहा कि बिना आग के तुमसे मिलने नही आ सकता क्या तो वो थोड़ा फूल गयी और मेरा हाथ हल्का सा दबा दिया मैने उसे कहा कि चलो मेरे प्लॉट मे चल ते है मैने पूरा इंतज़ाम कर दिया हैं बस तुम्हारा ही इंतजार था तो वो बोली कि यहाँ पे रहना भी तोजरूरी है अगर कोई पशु चोर आ गया तो मैने उसे आश्वस्त करते हुए कहा कि डार्लिंग मेरा प्लॉट पास ही तो हैं और कुछ ऐसा होगा तो हमे पता चल ही जायगा

पर वो मान ही नही रही थी बहुत मिन्नते करने के बाद वो मानी और बोली अभी तुम जाओ मैं कुछ देर मे यहाँ पे पूरी तसल्ली करने के बाद आउन्गी तुम लाइट बंद रखना और गेट खुला छोड़ देना. फिर मैं बचते बचाते वापिस आ गया और उसका इंतज़ार करने लगा पूरे एक घंटे बाद वो आई और खुद ही गेट बंद कर्दिया और सीधा मेरे सीने से आके लग गयी आज रात भर के लिए वो मेरे पास थी ये सोचते ही मेरे बदन मे आग जल उठी

मैं बेतहाशा उसे चूमने लगा वो भी नागिन की तरह मुझे लिपटी हुई थी आज दो प्यासे फिर इस युद्ध के मैदान मे आ डटे थे प्रीतम बहुत ही खुली हुई लड़की थी ख़ासकर सेक्स के मामले मे जिस से मेरा मज़ा और भी बढ़ जाता था मैं उसके निचले होंठ को अपने दांतो से काट रहा था और उसने मेरे कच्छे मे हाथ डालके मेरे लंड को हिलाने लगी थी वो अपने अंगूठे से मेरे सुपाडे की खाल को रगड़ने लगी मेर मूह से आह फूट गयी तो वो और ज़ोर से रगड़ने लगी मैं उसकी अदा का कायल हो गया

मैने एक झटके मे उसका सूट निकाल दिया और खाट पे रख दिया मैं उसके पीछे आके खाड़ा हो गया और पीछे से उसको बाहों मे भर लिया लंड महा राज प्रीतम की गान्ड मे घुसने को मचल उठे ब्रा के उपर से ही उसके गदराई हुई चूचियो को सहलाने लगा वो मदहोश होने लगी कुछ ही देर मे ब्रा भी उतर चुकी थी मैं बोला डार्लिंग क्या बात हैं तुम्हारी चूची तो बहुत ही मोटी हो गयी है तो वो बोली तुमने ही तो किया हैं और मुझसे ही पूछ रहे हो और हम हँसने लगे मैने फॉरन सलवार खोली और कच्छि के साथ ही उतार दिया और अपनी बनियान भी उतार दी

मैने उसे अपनी बहो मे उठाया और वहाँ बने बाथरूम की ओर लेके चल दिया उसने भी अपनी बाहें मेरे गले मे डाल दी बाथरूम तो क्या था बस इटो को लगा के नहाने का जुगाड़ सा किया हुआ था वो मुझसे चिपके हुई खड़ी थी मैने पानी दोनो के शरीर पे डालना शुरू किया ठंडा पानी जब उसके गरम शरीर पे पड़ा तो उसे कंपकंपी होने लगी मैने साबुन उठाया और उसके कोमल जिस्म पे लगाना शुरू किया उसकी बूबो पे साबुन बार बार फिसल रहा था बहुत ही मज़ा आ रहा फिर उसकी पीठ से होते हुए उसकी गान्ड पे ढेर सारा साबुन लगा दिया था अब मेरे हाथ उसकी ठोस जाँघो पे थे

और चूत की ओर बढ़ रहे थे उसके पूरे शरीर पे साबुन लगाने के बाद अब साबुन प्रीतम के हाथ था उसने भी वो ही प्रिकिरया दोहराई और मेरे लंड को पूरा साबुन के झाग से ढक दिया चुदाई का कीड़ा अब कुलबुलाने लगा था मैने प्रीतम को वही पे घोड़ी बनाया और अपना लंड चूत मे पेल दिया प्रीतम की चूत मे घप से लंड घुस गया और उसके कूल्हे पीछे की ओर हो गये मैं उसे चोदने लगा बीच बीच मे मैं हमारे शरीर पे पानी भी डालता जा रहा था जिस से साबुन भी अपना कमाल दिखा रहा था

मेरे हाथ प्रीतम की बोबो पे फिसल रहे थे बहुत ही जोरो से हम चुदाई मे लगे हुए थे टाँगो के बीच से फ़च पच की सर्ली आवाज़ आ रही थी अब प्रीतम खड़ी हुई और मेरी गोदी मे बैठ के चुदने लगी हमारे होंठ एक दूसरे स जुड़ चुके थे वो पूरी जोश से अपने कुल्हो को हिला रही थी बहुत ही जबरदस्त अनुभूति हो रही थी प्रीतम पूरे जोशमे लंड पे कूद रही थी उसकी साँस फूलने लगी थी पर वो पूरी ताल मेरे लंड पे दे रही थी मेरे हाथ उसके कुल्हो को सहला रह थे कुछ देर तक कूदने के बाद वो आकड़ी और निढाल होके गोदी मे ही लेट सी गयी मैने थोड़ी देर झटेक दिए और फिर मैं भी झाड़ गया

पर वो ऐसे ही गोदी मे बैठी रही कुछ देर बाद वो उठी ओर अपने शरीर पे पानी डालने और चूत को भी पानी से सॉफ करने लगी और फिर उसने मेरे लंड को भी सॉफ किया हम काफ़ी देर तक ऐसे ही छेड़खानी करते हुए नहाते रहे फिर मैने उसके संगमरमरी बदन को तोलिये से पोन्छा और उसको उठा के बिस्तर पे लिटा दिया और खुद भी उस हुस्न की अप्सरा के पास लेट गया वो मेरे सीने को सहलाते हुए बोली तुम पता नही क्या करते हो मैं तुम्हे कभी मना कर ही नही पाती हू तो मैने भी कहा कि मैं कॉन सा तुम्हारे बिना तड़प ता ही रहता हू उसने पूछा कि कभी ओर किसी को चोदा हैं क्या तुमने तो मैने सॉफ झूट बोल दिया कि नही तुम ही मेरी पहली चूत हो

तो मेरे सीने मे मुक्का मारते हुए बोली कुत्ता कहीं का और अपना चेहरा मेरे सीने मे छुपा लिया मैं उसकी गोल गान्ड को सहलाने लगा था जो नहाने के बाद थोड़ा चिकनी हो गयी थी प्रीतम ने भी देर ना करते हुए मेरे लंड को अपनी मुट्ठी मे भर लिया और पपोल्ने लगी उसकी उंगलियो मे भी नशा था मेरा लंड हौले हौले झूमने लगा था शरीर मे जोश का संचार होने लगा था मैने प्रीतम के चुतडो को थपथपाया और उसे 69 की पोज़िशन मे कर दिया प्रीतम ने बड़े ही प्यार से अपनी चूत मेरे मूह से लगा दी और दूसरी तरफ लंड को अपने होंटो की तपिश देने लगी

उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ उसकी चूत से क्या मोहक सुगंध आ रही थी मैं उपर से नीचे पूरी चूत को चाट रहा था चूत से हल्का हल्का पानी बहने लगा था वो बाद ही प्यार से मेरे लंड को चूस रही थी अब उसके चुतड हिलने लगे थे वो मेरे चेहरे पे अपने कुल्हो का दबाव डालने लगी थी अब मैने अपनी जीभ उसकी चूत मे सरका दी दो उसने भी मेरे लंड को जड़ तक अपने मूह मे भर लिया अपने थूक से सान दिया तभी प्रीतम ने लंड को मूह से निकाला और बोली बस अब देर ना करो और जल्दी से डाल दो और अपनी टाँगे फैला की लेट गयी मैने लंड को उसकी चूत की छेद पे रगड़ना शुरू किया

 


वो ओर भी गरम हो गयी और बोली अब डाल भी दे ना कितना तडपाएगा मुझसे रुका नही जा रहा है तो मैने ईक शॉट मारा और उसपे छाता चला गया मैं बहुत धीरे धीरे अपनी कमर को हिला रहा था तभी उसने अपना एक बोबा मेरे मूह मे दे दिया और मैने भी उसे गॅप से अपने मूह मे भर लिया वो थोड़ा टेढ़ी हो गयी मेरी तरफ मूह करके अब मैं उसकी चूची पीते हुए उसे गपा गॅप रगड़ रहा था मैं उसकी गान्ड को भी मसल रहा था अब उसका निचला होंठ मेरे मूह मे था और मैं बहुत ही मज़े से उसे निचोड़ रहा था

कुछ देर बाद उसकी जांघे मेरे कंधो पे थी वो अपने बोबे खुद ही मसल्ने लगी थी और मेरे लंड को अपनी चूत मे ले रही थी मैने लंड को चूत से निकाला और उसके मूह मे दे दिया और बोला ले आज अपनी चूत का रस भी चख ले प्रीतम ने बुरा सा मूह बनाया और लंड को मूह मे भर लिया 5 मिनिट चूसने के बाद मैने फिर से चूत की शोभा बढ़ाई और लंड को उसकी गहराइओ मे उतार दिया प्रीतम का बदन हर धक्के पे हिल रहा था और तभी उसकी चूत की फांके फड़फडाने लगी उसने अपनी टाँगो को मेरी कमर पे कस दिया और चूत से काम रस की नदी बह चली

उसने चूत से लंड निकाल दिया और सुसताने लगी मैने कहा इसका तो काम करो वो बोली कुछ देर रुक जाओ पर मेरा भी बुरा हाल था मैने फॉरन उसे उल्टा लिटाया और ढेर सारा थूक उसकी गान्ड पे लगाया और लंड को गान्ड मे उतार दिया चूँकि ये सब बहुत ही जल्दी हो गया था वो संभाल ना पाई उसकी दबी दबी सी चीख निकल गयी और मुझे गालियाँ देने लगी मैने कहा इतरा मत पहले भी तो गान्ड मरवाई थी तूने तो वो बोली आराम से करना मेरी जान निकाले गा क्या मैने उसकी बातों पे ध्यान नही दिया और गान्ड मारने लगा लंड मस्ती से गपा गॅप अंदर बाहर हो रहा था सच कहूँ तो चूत से ज़्यादा मज़ा गान्ड मारने मे आ रहा था प्रीतम हाई हाई कर रही थी ऐसेही 15-20 शॉट मारने के बाद मैं भी गान्ड मे ही झाड़ गया और उसके उपर ही पसर गया और अपनी सांसो को समेटने लगा

कुछ देर हम ऐसे ही पड़े रहे रात अपने पूरे शबाब मे थी फिर वो उठी और पेशाब करने गयी सर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर सर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर उसकी चूत से बहते पेशाब की आवाज़ मुझे सॉफ सॉफ सुनाई दे रही थी तो मैंभी उसकी ओर चल पड़ा मुझे देख के वो बोली अब क्या है चैन से मूतने भी नही देगा क्या तो मुझे हँसी आ गयी फिर मैने भी पेशाब किया और लंड को पानी से धोया औ फिर से बिस्तर पा आ गये मैने उसके सर के बालो को सहलाना शुरू कर दिया रोमॅन्स अपने चरम पे था प्रीतम भी मेरी बाहों मे सिमट सी गयी थी

रात काफ़ी बीत चुकी थी पर हमारी हसरते अभी भी बाकी थी मैं उसे छेड़ते हुए बोला आज कल तू बहुत मोटी हो गयी है क्या बात हैं कुछ मुझे भी तो बता दे तो वो बोली इतना चुदुन्गि तो माँस तो चढ़ेगा ही ना मैं अपनी टाँगो को उसकी टाँगो से रगड़ने लगा वो बोली अब मैं जाती हू तो मैने कहा कुछ देर ओर रुक जाओ ना तो वो बोली अब कर तो लिया और क्या बाकी हैं अब मुझे जाने दे ना पर मैं चाहता था कि वो आज पूरी रात मेरे साथ गुज़ारे क्यों कि ये बहुत ही अनोखे पल थे जो हर किसी को नसीब नही होते हैं अब मैने उसको खींच और अपने उपर लिटा लिया उसके गोल मटोल बोबे मेरी छाती मे धँस गये बिल्कुल किसी फोम की तरह

और लंड उसकी चूत पे रगड़ खाने लगा मैने उसके माथे को चूम लिया और धीरे से अपने होन्ट उसकी गालो से लगा दिए टमाटर से लाल गाल मुझे उसके गाल चूमना बहुत पसंद था साथ ही साथ एक हाथ से उसके चुतड भी सहलाता जा रहा था उसने लंड को अपनी मोटी मोटी जाँघो मे दबा लिया तभी उसे पता नही क्या सूझा उसने अपने होन्ट आगे बढ़ाए और मेरे होंटो को चूसने लगी मैं भी उसका साथ देने लगा अचानक से ही वो बहुत ही आक्रामक हो गयी थी मुझे उसका ये अंदाज बहुत अच्छा लगा मैं उंगली से उसकी गान्ड के छेद को कुरेदने लगा उसके चुतड मचलने लगे थे वासना का संचार शरीर मे होने लगा था

 


प्रीतम की चूत के गीले पन को मेरा लंड महसूस करने लगा था उसे घुमाया और मैं उसके उपर आ गया उसने लंड को अपने हाथ मे लिया और चूत पे रगड़ने लगी मेरे बदन मे सिरहन दौड़ गयी ओर मैं और भी ज़ोर से उसकी जीभ को चूसने लगा वो लगातार लंड को रगडे जा रही थी मैं बुरी तरह से उत्तेजित होता जा रहा था कुछ ऐसा ही हाल उसका भी था मैने अंदर घुसाने को थोड़ा सा धक्का लगाया तो उसने इशारे से मुझे रोक दिया और वैसे ही लंड को रगड़ती रही मज़ा भी बहुत आ रहा था अब रुकना मुश्किल था मैने उसका हाथ हटाया लंड को थोड़ा सेट किया और सीधा उसकी चूत के अंदर पहुचा दिया और एक दूसरे मे समा गये

उसने अपने टाँगे विपरीत दिशाओ मे चौड़ी कर ली मैं खुल के स्ट्रोक मार रहा था उसने अपने नाख़ून मेरी पीठ पे रगड़ने शुरू कर दिए थे वो मस्ती के पूरे शबाब मे थी वो लगातार नखुनो को धंसा रही थी जिस से मुझे चुभन भी हो रही थी परंतु उस चुबन का भी एक अलग सा ही मज़ा था जो शब्दो मे व्यक्त किया ही नही जा सकता हैं मैं लंड को पूरा बाहर की तरफ निकालता और झटके से अंदर घुसा देता था तो प्रीतम भी अपने कुल्हो को उठा कर लंड का स्वागत कर रही थी ऐसे ही चुदाई चल रही थी उसकी आर्म्पाइट से बहते पसीने की स्मेल मुझे मदहोश कर रही थी

उसके हाथ मेरे कुल्हो पे पहुच गये थे और वो दबाव डाल रही थी जैसे की मैं पूरा ही उसकी चूत मे घुस जाउ खाट हमारे धक्को से चरमराने लगी थी मैं पूरी ताक़त से उसे चोद रहा था फिर मैने उसे घोड़ी बनाया और पीछे सी चोदने लगा मेरे हाथो ने उसकी कमर को थामा हुवा था और लपा लॅप चूत मारी जा रही थी प्रीतम हाँफ रही थी उसकी चूचिया बहुत नीचे की ओर लटकी हुई थी मैने हाथ बढ़ा के उनको पकड़ लिया लंड चूत मे फिसलता हुए अंदर बाहर हो रहा था मुझे लगने लगा था कि किसी भी पल मैं डिसचार्ज हो सकता हू तो मैने लंड को निकाला और उसके मूह मे दे दिया

और उसके सर को कस के पकड़ लिया और अपना सफेद पानी उसके मूह मे छोड़ दिया जो सीधा उसके गले से होते हुए पेट मे चला गया प्रीतम ने झट से लंड को बाहर निकाला और खांसने लगी और उल्टी करने की कोशिश करने लगी मैं भाग के गया और एक गिलास पानी लाके दिया तब उसकी जान मे जान आई और वो बैठ गयी टाइम 3 से उपर हो गया था तो उसने अपने कपड़े पहने फिर मैं उसको हिफ़ाज़त से उसके बाडे मे छोड़ने चला गया वो खुद की खाट पे लेट गयी मैं भी उसकी बगल मे ही पसर गया वो मुझे जाने को बोली तो मैने एक लंबा किस किया और वापिस आके सो गया

सुबह काफ़ी देर तक सोता रहा धूप सर चढ़ आई थी रात के बाद शरीर बुरी तरह थक गया था बिस्तर से उठने की हिम्मत नही हो रही थी किसी तरह खुद को संभाला और नहाया-धोया और घर का रास्ता नापा. पापा और चाचा जा चुके थे दादी और मम्मी आँगन मे बैठे थे चाची ने मुझे नाश्ता दिया जैसे ही उनका हाथ मेरे हाथ से टकराया पूरे बदन मे झंझनाहट दौड़ गयी चाची मुस्कुरा के रसोई मे चली गयी आज उनकी गान्ड कुछ ज़्यादा ही उभरी हुई लग रही थी जल्दी से नाश्ता किया और रसोई मे प्लेट रखने के बहाने से घुस गया

और इधर उधर देखती हुए उनको पकड़ लिया और गान्ड को मसल दिया तो उन्होने आँख तरेरते हुए कहा बड़ी शैतानी करने लगे हो मेरा हाथ उनकी गोल गान्ड पे रेंग रहा था मैने पूछा कि आज खेत पे चलोगे क्या तो उन्होने मना करते हुए कहा कि नही वो नही जाएँगी तो मेरा दिल टूट गया तभी मम्मी ने आवाज़ लगाई और कहा कि आज तुम्हे पापा के ऑफीस जाना है तैयार हो जाओ मैने बुरा सा मूह बनाया और साइकल उठा के सहर की ओर चल दिया आधे-पोने घंटे बाद मैं वहाँ पहुच गया था उन्होने मुझे बैठने को कहा

और बोले कि अब तुम्हारा दाखिला यहा के ईक स्कूल मे करवा रहे हैं तो चलो तुम एक बार स्कूल देख लो मैं खुश हो गया अब तक तो बस सरकारी मे ही गान्ड घिसी थी अब मोका मिला था प्राइवेट स्कूल मे पढ़ने का ये स्कूल थोड़ा सिटी के आउटसाइड था स्कूल क्या था कॉलेज ही लग रहा था हम अंदर गये फॉर्म वग़ैरा खरीदा और कुछ फॉरमॅलिटीस पूरी की इन्सब मे कोई दो घंटे लग गये थे एक हफ्ते बाद से क्लास लगनी थी जब मैं घर पहुचा तो साढ़े 3 बज गये थे

अंदर गया तो देखा आज मम्मी भी घर पे ही थी ओर सो रही थी दादी भी आराम कर रही थी मैं दबे पाँव चाची के कमरे की ओर बढ़ने लगा वो कुर्सी पे बैठ के कोई किताब पढ़ रही थी मुझे देख के बोली खाना दूं क्या तो मैने मना किया और उनके बेड पे बैठ गया वो बोली भूक नही है क्या तो मैने डबल मीनिंग यूज़ करते हुए कहा भूक है तभी तो आपके पास आया हू तो वो थोड़ा ब्लश करने लगी मैने उन्हे दीवार के सहारे लगा दिया औ उनके मिस्री से भी मीठे होन्ट चूसने लगा

वो थोडा डर रही थी की कही कोई आ ना जाए मैं मस्ती से लगा हुवा था कहा कुछ महीनो पहले बस मुट्ठी ही मार कर गुज़ारा होता था अब चूते ही चूते थी पता नही कितनी देर मैं उन्हे चूमता रहा उफ्फ कितने क्रीमी होंठ थे उनके बहुत ही ज़्यादा सॉफ्ट फिर उन्होने मुझे हटाया और अपनी सांसो को नियंत्रित करनी लगी उनकी चूचिया बहुत तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी फिर वो बाहर की ओर भाग गयी बकरे की मा कब तब खैर मनाएगी ये सोचते हुए मैं भी बरामदे मे आ गया

चाइ का टाइम हो गया था मम्मी भी उठ गयी थी फिर चाइ पी थोड़ी बातचीत दादी से की ओर बाहर खेलने चल पड़ा मैं अब चाची को जल्दी से जल्दी चोदना चाहता था क्यों कि फिर मेरी समस्या का समाधान हो जाता भाभी का साथ तो छूट ही गया था प्रीतम भी रेग्युलर्ली नही मिल पाती थी तो मैं सोच रहा था अगर चाची चुद जाए तो पर वो हाथ नही आ रही थी तो मैं थोड़ा हताश भी होने लगा था तभी मुझे एक आइडिया आया और मैं फॉरन दुकान पे गया और एक कम पॉवर का बल्ब खरीद लिया और मोका देख के आँगन वाले बल्ब से बदल दिया

क्यों कि चाचा-चाची रात को वही सोते थे अब बल्ब की रोशनी कम होगी तो मैं उन्हे छुप के देख पाउन्गा डिन्नर हो ही गया था तभी पापा बोले आज प्लॉट मे सोने नही जाएगा क्या तो मैने झूठ बोल दिया कि उधर मच्छर बहुत ज़्यादा हैं तो नींद नही आती और अपना बिस्तर छत पे लगा दिया और इंतज़ार करने लगा छत से हल्का सा झाँका तो पाया कि आज चुदाई नही हो रही थी और वो दोनो घोड़े बेच के सो रहे थे मैं अब बाथरूम मे गया और चाची की पेंटी उठा लाया और उसपे मुट्ठी मार के सोगया

 


. अगले दिन मुझे प्रीतम मिली और उसने बताया कि दो दिन बाद उसका भाई ट्रैनिंग पे चला जाएगा फिर उसकी मा पशुओ के पास सोया करेगी और वो घर मे अकेली ये सुनके मैं खुश तो हो गया पर अब मेरा मन तो बस चाची की चूत मे ही बस गया था पर प्रीतम का ख्याल रखना भी ज़रूरी था आख़िर वो भी मुझे बहुत कुछ देती थी दो दिन ऐसे ही कट गये बिना कुछ ख़ास हुए अब स्कूल भी शुरू होने वाला था अब ये दोहरी जिंदगी मुझे पीसने को तैयार थी प्रीतम को लेटर लिखा कि कब आऊ उसके घर तो उसका जवाब बहुत ही निराशा जनक था उसने लिखा कि उसे मासिक आया हुवा हैं तो अभी कुछ नही कर सकते अब ऑर प्राब्लम खड़ी हो गयी

इधर चाची भी चूमा चाटी से आयेज नही बढ़ रही थी शायद उन्हे भी मुझे तड़पाने मे मज़ा आ रहा था इसी तरह कुछ दिन ऑर निकल गये नया स्कूल बहुत ही अच्छा था पर प्रतियोगिता बहुत ज़्यादा थी तभी किस्मत ने एक खेल ऑर दिखाया जब मैं लाइब्ररी जाने के लिए सीढ़िया चढ़ रहा था तो मेरी नज़र एक चेहरे पे पड़ी वक़्त जैसे एक पल के लिए ठहर ही गया था अरे यह तो वो ही लड़की थी जो उस दिन मेले मे मुझसे टकरा गयी थी उसकी साँवली सी रंगत दिल मे उतर गयी चलो ये तो पता चल ही गया था कि वो मेरे ही स्कूल मे पढ़ती थी

अब पता करना था किस क्लास में पढ़ती है अब पढ़ाई मे किसका ध्यान था अगले ही दिन उसका पीछा किया और पता कर लिया कि 10+2 सेक्षन सी मे थी और मैं ए मे. अब किताबो मे वो ही दिखती थी अब ना घर मे मन लगे ना कही ऑर प्रीतम भी कई बार मिलने का बोल चुकी थी पर मैने बहाना करते हुए मना कर दिया हम चाची से थोड़ी बहुत शरारत हो ही जाती थी मैने सेक्षन चेंज की अप्लिकेशन भी लगा दी थी पर उसमे कंडीशन थी तो हिस्टरी छोड़के पब्लिक आडमिन. सब्जेक्ट ले लिया और ए से सी मे पहुच गया

इत्तेफ़ाक़ से वो मेरे साइड वाले बेंच की शोभा बढ़ाती थी मेरा तो ध्यान पढ़ाई से ज़्यादा उसी पे रहता था उसका नाम भी पता चल गया था मिता साला दिल मे उतर गया वो बहुत ही ब्राइट स्टूडेंट थी और बहुत प्यारी भी थी समय पंख लगाए दौड़ रहा था एक महीना ऐसे ही गुजर गया था प्रीतम भी नाराज़ चल रही थी क्यों कि कई दिन से मैं उस से मिला नही था

पर वो कहते हैं ना कि भगवान के घर देर हैं पर अंधेर नही मामा का फोन आया तो उन्होने बताया कि वो सवामनि कर रहे हैं अब वहाँ सारे परिवार को जाना था प्रोग्राम से एक दिन पहले हम सब मामा के गाँव पहुच गये शाम को भजन का प्रोग्राम था और अगले दिन जीमना था चूँकि हम सब लंबा सफ़र करके आए थे तो थके भी थे तो चाची ने कहा कि वो भजन मे थोड़ी ही देर जाएँगी फिर थोड़ा सोएंगी और मेरी ओर निगाह डाली मैने सोच लिया कि ये उनका मुझे निमंत्रण है और खुश हो गया

हालाँकि उन्होने वो बात जनरली ही कही थी पर मैने उसका ग़लत अर्थ लगा लिया था मुझे पता तो था ही उनके सोने का इंतज़ाम सबसे अंदर वाले कमरे मे किया हुआ था मैं भजन मंडली मे बैठा था परंतु ध्यान चाची पे ही था मेरी आँखे उन्हे तलाश रही थी पर वो दिख नही रही थी तो मैने सोचा कि वो सोने गयी होंगी और बचते बचाते अंदर वाले कमरे मे पहुच गया वहाँ देखा कि वहाँ पे कुल 3 बिस्तर लगे थे दो पे तो कोई लड़किया सोई थी और एक पे एक बूढ़ी थी और एक पे कोई चादर ओढ़े हुए थे मैने सोचा ये ही चाची होंगी

पर दिमाग़ से काम लेते हुए सबसे पहले बल्ब को उतार दिया अब कमरे मे घुप अंधेरा हो गया मैं फॉरन ही उस चादर मे घुस गया और उनसे सट गया मेरा हाथ उनकी टाँगो पे फेरते हुए मैने साड़ी को उपर कर्दिया ऑर सीधा चूत पे हाथ रख दिया था वो घबराते हुए बोली कॉन हैं मैनी झप से उनके मूह पे हाथ रख दिया और बोला घबराओ मत मैं हू और फॉरन उनके उपर लेट गया वो अब मेरा हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी क्यों कि उन्हे भी पता था कि अब आगे क्या होगा वो मेरा विरोध करने लगी थी

पर मैने तो ठान ही लिया था कि अब नही तो कभी नही और थोड़ा ज़ोर मैं भी लगाने लगा किसी तरह अपनी ज़िप खोली और तने हुए लंड को निकाला उन्होने कच्छि पहनी नही थी तो सीधा लंड एक झटके से घुसा दिया वो उउउउउउउउउउउउउउउउउउउ उूुुुउउ कर रही थी बहुत ही धीमे धीमे क्यों कि आस पास ऑर लोग भी सोए हुए थे मैने धक्के मारने शुरू कर दिए कोई 7-8 मिनिट बाद वो भी नॉर्मल हो गयी क्यों कि चूत गीली होने लगी थी उनके चुतड थोड़े से उपर की ओर उठ गये थे अब मुझे भी थोड़ी तसल्ली हुई ऑर मैने उनकी मूह से अपना हाथ हटा लिया ओर फुसफुसाते हुए बोला कैसा लगा मेरी जान तो वो काँपति हुई बोली तुम कॉन हो हालाँकि कोई विरोध नही था

क्यों कि उन्हे भी मज़ा मिल रहा था अब मैं घबरा गया ये तो कोई और थी और चाची कहाँ थी पर मैने सोचा कोई भी हो चूत तो मिल ही रही है अभी तो इसे ही बजा देता हू और उसके होंटो पे अपने होंठ लगा दिए तो उसने फॉरन अपना मूह फेर लिया तो मैने उसके कान मे फुसफुसाते हुए बोला कि अब जो होना था वो तो हो ही गया हैं तुम भी थोड़ा मज़ा ले लो वो कुछ नही बोली और ऐसे ही पड़ी रही पर चूत और लंड तो कोई रिश्ता नही समझ ते हैं मैं लगातार उन्हे चोदे जा रहा था

 


आख़िर वो थी तो एक औरत ही अब उसके मूह से भी मादक सिसकिया फूटने लगी थी अब मैने अपने होन्ट दुबारा उसके होंटो पे रख दिए और हौले हौले उनका रस पीने लगा वो भी मचलने लगी और मेरे बालो मे अपनी उंगलिया फेरने लगी उसके होंठ बहुत ही पतले से थे तो मज़ा और भी बढ़ गया था उसकी पतली कमर भी अब थिरकने लगी थी आख़िर वो पल भी आया जब हम दोनो ने लग भग एक साथ ही अपने पानी छोड़ दिया

मैं उसकी बगल मे लेट गया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा तो उसने मेरा हाथ छिटक दिया और अपना मूह दूसरी ओर कर लिया तो मैं उस से सट ता हुआ चिपक गया और धीरे से बोला कि देखो किसी ओर के भरोसे मे तुम चुद गयी हो मेरी तुम्हारे प्रति कोई ग़लत भावना नही थी पर अब जो हो गया वो बदला भी नही जा सकता हैं और धीरे से उसके नितंबो को सहला दिया पर वो कुछ ना बोली

मैं लगातार उसके नितंबो को मसल ता जा रहा था पर वो कोई रियेक्शन नही दे रही थी तभी वहाँ सोई बूढ़ी उठी ऑर बोली रे कोशल्या बड़ी प्यास लगी हैं थोड़ा पानी पिलइओ ओह ये क्या हो गया ये तो मेरी मामी थी जिसे मैने अभी अभी चोद डाला था

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चूत मारने की खुशी पल भर मे ही काफूर हो गयी थी मामी उठी ऑर उनके लिए पानी लेने बाहर चली गयी अंधेरे का फ़ायदा उठाके मैं भी उनके पीछे चल पड़ा उहोने मूड के मुझे देखा तो उनकी आँख आश्चर्य से भर गयी ओर वो गुस्से से मुझे डाँटती हुई बोली कि मुझे तुमसे ये उम्मीद नही थी तुमने अपनी सग़ी मामी को खराब करके पाप किया हैं तो मैने उन्हे शांत करते हुए कहा कि प्लीज़ एक बार मेरी बात तो समझ लो और उन्हे मनाने लगा उन्होने पानी भरा और अंदर चली गयी

कोई 15 मिनिट मैं वही खड़ा रहा पर वो वापिस ना आई तो मैने कुछ सोचते हुए कमरे मे घुस गया और मामी की बगल मे जाके लेट गया और उनका हाथ अपने हाथ मे पकड़ लिया और धीरे से बोला मामी इसमे आपकी कोई ग़लती नही है ये सब अंजाने मे हुआ है प्लीज़ माफ़ करदो तो वो रुआंसी सी आवाज़ मे बोली पर मेरी इज़्ज़त तो चली गयी ना तो मैं उन्हे दिलासा देते हुए बोला कि मामी ये राज बस हमारे ही बीच रहेगा आप निसचिंत रहो

और उन्हे मना ने लगा काफ़ी मिन्नते करने के बाद वो मानी और मुझे जाने को कहा पर मैं वही लेटा रहा और अपना हाथ उनकी चूचियों पे रख दिया और हल्का सा दबा दिया मामी घबराते हुए बोली ये क्य्ाआआ कर रहे हो तो मैने अपनी उंगली उनके होंटो पे रखते हुए उन्हे चुप रहने का इशारा किया ऑर उनकी गोलाईयों को दबाने लगा वो खुल के विरोध भी नही कर सकती थी क्यों कि उनकी ही बदनामी थी वो हल्के हल्के मुझे रोक रही थी पर मैं तो चुदाई के खेल मे बहुत गहराई में उतर चुका था औरतो की नस नस से वाकिफ़ हो गया था

मैने सोच लिया था कि अगर उन्हे एक बार चोद लिया तो दुबारा भी चोद सकता हू और फिर मोका भी बिल्कुल चोका मारने का था मैने एक हाथ उनकी साड़ी मे डाल और सीधा चूत पे रख दिया और एक उंगली चूत मे घुसा दी ना चाहते हुए भी कोशल्या मामी की आह निकल गयी उनकी चूत का दाना थोड़ा मोटा सा था मैं उसे मसल्ने लगा मामी भी अपनी टाँगो को पटकने लगी थी अब हालात पूरी तरह मेरे कंट्रोल मे थे मैं उठा और उनकी साड़ी मे घुस गया और सीधा उनकी पतली सी छोटी सी चूत को अपने मूह मे किसी गोलगप्पे की तरह भर लिया मामी की तो सांस उपर की उपर ओर नीचे की नीचे अटक गयी

शायद ये पहली बार था कि किसी ने उनकी चूत चाटी हो मैं बड़े मज़े से उनकी चूत का पानी चाटने लगा बड़ा ही नमकीन सा स्वाद था उसका मामी ने अपने दाँतों को कस के भींच लिया कि कही उनकी आह ना निकल जाए तभी उन्होने मुझे उठाया और बोली मेरे पीछे आओ और बाहर की ओर चल पड़ी मैं सधे कदमो से पीछे पीछे चल पड़ा घड़ी मे टाइम देखा तो पोने एक हो रहा था मामी चलते चलते काफ़ी बाहर की ओर बने एक स्टोर के गेट पे आके रुक गयी और मेरी तरफ देख के झाप से अंदर घुस गयी

 


ये उनका भूसी रखने का कमरा था कमरा लगभग भरा ही था बस एक कोने मे ही थोड़ी सी जगह थी मैने जल्दी से कुण्डी अटकाई और मामी को पकड़ लिया मेरे आगोश मे आते ही काँपने लगी ऑर घबराते हुए बोली कि मैं उन्हे क्यों खराब करने मे लगा हू तो मैने कहा कि अगर उन्हे अपनी इज़्ज़त की इतनी ही चिंता हैं तो वो यहाँ पे मेरे साथ क्या कर रही है मैने बिना डरे कहा कि मामी सच तो ये हैं कि आपकी टाँगो के बीच आग लगी है जिसे भुजाने आप यहाँ आई हो तो वो बोली तुम बड़े बदतमीज़ हो ऐसे कोई बोलता है क्या

तो मुझे प्रीतम की कही बात याद आई और मैने उन्हे बोला कि मामी चूत और लंड कोई रिश्ता नही जानते हैं ये तो बस एक दूसरे की प्यास बुझाना चाहते हैं मैने आखरी दाँव खेलते हुए कहा कि अगर आपकी मर्ज़ी है तो ही मैं आपके साथ सेक्स करूँगा और मैं माफी माँगता हू कि उस कमरे मे जो कुछ हुआ वो मेरी ग़लत फहमी से हुआ . तो वो मेरे पास आई और बोली अगर किसी को पता चल गया तो मैने कहा कि किसी को कौन बताएगा आप ………………………………. नही ना तो फिर क्यों चिंता करती हो तो वो बोली कि ठीक है

पर ये जो भी होगा बस आज रात ही होगा तो मैने कहा जैसे आपकी मर्ज़ी और उन्हे अपने से सटा लिया कोशल्या मामी कोई 38-39 साल की औरत थी उनकी शादी को 20 साल हो चुके थे और 3 बच्चे भी थे जो बाहर पढ़ते थे मामी थी तो पतली सी पर चुचि भी कुछ खास नही थी शायद 32 होंगी और गान्ड भी ठीक ही थी पर उनके होन्ट बहुत ही पतले और मादक थे मामी के लाल लाल होंठ काँपते होंटो पे मैने अपनी जीभ जैसे ही फेरी उनका समुचा बदन कांप गया मैं बस अपनी जीभ उनके मुलायम होंटो पे फेरता ही जा रहा था मेरा एक हाथ उनकी पतली कमर को थामे हुए था

मेरे दिल मे लड्डू फूट रहे थे कि चलो चाची की चूत ना मिली तो क्या हुआ मामी ही सही अब मेरी जीभ उनके मूह मे जाने की कोशिस कर रही थी उनका मूह हल्का सा खुला और मैने अपनी जीभ उनके मूह मे डाल दी मामी मेरे अंदाज की कायल हो गयी उनकी जीभ भी अब मेरी जीभ से छेड़खानी करने लगी थी आख़िर उत्तेजना चीज़ ही ऐसी होती है बस एक ही पल मे उनकी सारी शरम पता नही कहाँ खो गयी थी हमारी सांस एक दूसरे मे घुलने लगी ओर मदहोशी का आलम ये था कि अब वो मुझसे ऐसे चिपकी हुई थी जैसे किसी चंदन के पेड़ से कोई नाग चिपकता हैं

अब मैं अलग हुआ और उनका आँचल हटाया और ब्लाउज के उपर से उनकी छोटी छोटी गेंदो को पकड़ लिया और बड़े ही प्यार से उनको दबाने लगा और ब्लाउज के बटन को खोलने लगा तो वो बोली कपड़े मत उतारो तो मैने कहा कि आप थोड़ी देर चुप रहो और बस देखती जाओ और उनके ब्लाउज को उतार दिया अंदर ब्रा नही पहनी थी मैने अब उनकी संतरे जैसे चुचि के निप्पल को अपने मूह मे भर लिया और चूसने लगा मामी की आह्ं निकल गई और वो बोली तू तो बड़ा अच्छा चूस्ता हैं अब वो भी खुल गयी थी और खुद ही बारी बारी से अपना दूध मुझे पिलाने लगी दूसरी ओर मैने उनकी साड़ी भी उतार दी थी अब बस एक पतला सा पेटिकोट ही बचा था मैने झटके से उसका नाडा खोला और वो भी उनके जिस्म की क़ैद से आज़ाद हो गया

मामी पूरी नंगी मेरे सामने थी पर अंधेरे की वजह से उनके हुस्न का दीदार नही कर पा रहा था बस महसूस ही कर सकता था अब मैने भी अपने कपड़े उतार दिए और उनको पीछे से पकड़ते हुए अपना लंड उनकी गान्ड से छुआ दिया तो वो बोली अरे ये क्या हैं जो मुझे पीछे चुभ रहा हैं तो मैने कहा आप ही देख लो ना और उनका हाथ पीछे ले जाते हुए अपने लंड पे रख दिया मामी ने लंड को अपने हाथ से सहलाना शुरूकर दिया मैं उनकी पीठ को चूमने लगा मैं मामी पे अपनी छाप छोड़ना चाहता था ताकि वो मुझे याद रखे मेरे हाथ उनके पेट को सहलाते हुए उनकी चूत की तरफ बढ़ रहे थे गहरे बालो से धकि उनकी चूत , झप से मेरी उंगली उनकी चूत की दीवारो से रगड़ खाती हुई अंदर घुस चुकी थी उन्होने अपनी जाँघो को भीच लिया

जिस से उंगली पे चूत कस गयी थी तो मैने अब अंगूठे से उनकी चूत के दाने को रगड़ना चालू किया मामी अब हल्के हल्के गर्म हो रही थी वो शो नही करना चाहती थी पर उनके जिस्म पे उनका कोई ज़ोर भी नही चल रहा था मैं अब नीचे बैठ गया और मामी की पतली पतली जाँघो को चूमने लगा चूमते चूमते उनकी चूत को हल्का सा काट लिया तो वो चीख उठी अब मैने उनकी चूत की फांको को चूसना शुरू किया तो मामी के शरीर मे भूकंप आ गया वो बोली ये तुमने क्या किया

अहहह अहह मात्त्तटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटतत्त करूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ मुझे करेंट साआआआआआआआआआ लगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग र्हाहह माहह उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ तो मैने कहा मामा नही चूस्ते क्या तो वो बोली कि आज तुमने ही पहली बार चुसूइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई हाइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई अहह

 


चूत से खारे पानी की नहर बह चली थी मैं रिस्ति एक एक बूँद को अपने गले मे उतार रहा था मामी के पैर थरथराने लगे थे अब मैं उठा और अपना लंड उन्हे चूसने को कहा तो वो बोली कि उसे ये पसंद नही मैने कई बार कहा पर उन्होने नही चूसा वो बोली मुझे उल्टी आती है तो मैने भी ज़्यादा फोर्स नही किया अब वो पल आने ही वाला था जब हमारे जिस्म एक दूसरे मे समाने वाले थे मैने उधर टटोला तो एक पल्ली मिल गयी मैने उसे बिछाया और उसपे हमारे कपड़े बिछा के एक कामचलाऊ बिस्तर सा बना दिया और मामी को लिटा दिया और उनकी टाँगो के बीच आ गया अब रुकना नामुमकिन था लंड पे थोड़ा थूक लगाया और उसे चूत मे घुसा दिया

मामी की सिसकी निकल गयी मैने उनके होन्ट अपने होंटो से चिपका दिए और उन्हे चोदने लगा मामी भी खुल के चुदाई का आनंद लेते हुए मेरी पीठ पे अपने हाथ फेर रही थी लंड ओर चूत का संग्राम एक बार फिर से शुरू हो गया था कुछ ही देर मे मामी भी अपनी गान्ड उछाल उछाल के चुद रही थी मेरे धक्को की रफ़्तार अब गति पकड़ रही थी मैं उनकी होंठ एक पल की लिए भी नही छोड़ रहा था घनघोर चुदाई के आलम मे बस मामी की मंद मंद ससिसकारिया ही गूँज रही थी मामी जिस तरह चुद रही थी कोई नही कह सकता था कि वो ऐसे भी चुद सकती हैं उनका जोश तो अच्छे अच्छे को पानी पिला दे तभी मामी उठी ओर खुद ही घोड़ी बन गयी

मैने मामी के चुतडो को चूमना शुरू कर दिया मामी उफ्फ उफ्फ करने लगी और बोली अभी मत तडपाओ ऑर मुझे शांत करदो बस तो मैं एक बार फिर लंड को उनकी चूत की सैर करवानी शुरू कर दी मामी के चुतड बुरी तरह से थिरक रहे थे उनका शरीर टाइट होने लगा था मैं उनकी पतली कमर को थामे उनकी चुदाई कर रहा था पसीना बहने लगा था पर रुक भी नही सकता था मामी की चूत की होन्ट बुरी तरह खुल ओर बंद हो रहे थे और मेरे लंड को कस रहे थे मेरे शरीर मे हलचल होने लगी थी

जो संकेत था कि अब किसी भी पल वो लम्हा आ सकता हैं जब इस चुदाई का अंत होगा मैने अपने धक्को की स्पीड और बढ़ा दी और उस पल की ओर बढ़ने लगा और एक तेज धक्के से अपना गर्म गर्म लावा मामी की चूत मे छोड़ दिया और दुनिया के सबसे बड़े सुख को प्राप्त हो गया

मैं उनकी बगल मे लेट गया मामी ने पेटिकोट उठाया और अपनी चूत को सॉफ करने लगी उनकी आर्म पिट से बहते पसीने की खुसबू मुझे मदहोश कर रही थी तो मैने अपना मूह उनकी आर्म्पाइट पे लगाया और वहाँ अपनी जीभ फेरने लगा मामी के बदन मे एक तरंग सी दौड़ गयी वो बोली अरे यह क्या कर रहे हो मुझे गुदगुदी होती हैं पता ही नही चला कब मैं उनके उपर आ गया था मैं लगातार उनकी कांखों के पसीने को चाट रहा था मेरे लंड मे दुबारा खून का दबाव बढ़ने लगा था और वो उनकी टाँगो के जोड़ पे रगड़ खा रहा था

मामी बोली चलो अब वापिस चलते हैं कही कोई मुझे ढूँढ ना रहा हो तो मैने कहा बस थोड़ी देर और फिर जाना तो हैं ही और क्या पता फिर कभी ज़िंदगी मे आपकी चूत मारने को मिले या ना मिले तो वो शरमा गयी और मेरे चेहरे को अपनी छातियों पे दबा लिया अब मेरा मूह उनकी चुचियो की घाटी मे दबा हुवा था और वो बहुत दबाव डाल रही थी उनकी गर्मी से अब मेरे कान भी सुर्ख होने लगे थे चुदाई की कहानी की एक ओर इबारत लिखने की शुरुआत हो रही थी तभी मामी बोली कि उन्हे पेशाब करना है चूँकि वो नंगी थी तो मैने कहा आप इधर ही एक कोने मे कर लो तो वो तपाक से बोली कि मैं तुम्हारे सामने कैसे करू तो मैने चुटकी लेते हुए कहा कि मुझसे चुद सकती हो परंतु मूत नही सकती वैसे भी अंधेरा है आप कॉन सा दिख रही हो कर्लो जल्दी से

तो मामी भी मज़े लेते हुए बोली मेरी मर्ज़ी मेरा मूत है मैं चाहे जल्दिकरु या देर मे तुझे क्या हैं और वही कोने मे बैठ गयी सुउुुुुुुुुुउउर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर की सी आवाज़ मेरे कानो मे आई तो मुझे भी शरारत सूझी मैने मूत ती हुई मामी को अचानक से उठा दिया और उनकी चूत को अपने मूह मे भर लिया उनका मुतना एकदम से रुक गया और वो बोली प्लीज़ मुझे फारिग होने दो कंट्रोल नही हो रहा है पर मैने ध्यान नही दिया और चूत को अपने होंटो से दबाने लगा अब मामी बुरी तरह से फस गयी थी कुछ देर उन्होने कंट्रोल किया और फिर अपनी धार मेरे मूह मे छोड़ दी

उनका पेशाब बहुत ही गरम और एकदम समुन्द्रि नमक सा खारा था उनका मूत मेरे होंटो से होता हुआ नीचे बह रहा था अब उनका मुतना रुक गया था पर मैं अभी भी उनकी चूत को चाट रहा था मामी भी बिना किसी झिझक के खड़ी खड़ी मस्ती से अपनी चूत को चटवा रही थी और अपने हाथो से मेरे सर को सहला रही थी ना जाने क्यों मुझे चूत का रस पीना बहुत ही अच्छा लगता था मैने अपने हाथो का दबाव उनके चुतडो पे कसते हुए उन्हे थोड़ा और आगे की ओर धकेला मामी ने अब अपनी टाँगो को थोड़ा चौड़ा कर लिया ताकि मैं अच्छे से चूत की चुसाइ कर सकूँ मेरी जीभ घूमते हुए उनकी चूत के हर कोने को बराबर चूस रही थी

उनका गीलापन बढ़ने लगा था मामी की कमर अब हिलने लगी थी वो बहुत ही मस्त हो रही थी उनके पैरो का कंपन बढ़ता जा रहा था काश उधर उस टाइम लाइट का जुगाड़ होता तो मज़ा और भी बढ़ जाता मामी के बदन से गर्मी फूट रही थी चूत से उठ ती काम रस की खुसबु मुझे और भी प्रेरित कर रही थी और तभी ठीक उसी पल मामी ने मेरे चेहरे को अपनी चूत पे बुरी तरह कस लिया और अपना गाढ़ा पानी मेरे मूह मे छोड़ दिया उनका रस पीके मेरी आत्मा तृप्त हो गयी अब हम थोड़ी देर लेट गये मैने अपना लंड उनके हाथ मे दे दिया वो मेरे लंड को आहिस्ता आहिस्ता हिलाने लगी

 


मैं उनकी गान्ड को पे हाथ फेरने लगा और एक उंगली उनकी गान्ड के दरवाजे पे रगड़ने लगा उनका छेद काफ़ी बड़ा सा लग रहा था मैने अपनी उंगली को थूक से गीला किया और मामी की गान्ड मे घुसा दी उन्होने अपने चुतडो को थोड़ा सा भींच लिया पर उंगली आराम से अंदर चली गयी तो मैने कहा मामी आप तो गान्ड भी खूब मरवाती हो तो उन्होने जवाब नही दिया बल्कि मेरे लंड को अपनी मुट्ठी मे ज़ोर से दबा दिया मेरे मूह से आह निकल गयी ऐसे ही हमारी छेड़खानी चल रही थी तो वो बोली अब बस करना और चलने को कहा तो मैने कहा एक राउंड और तो वो बोली अब मेरी हिम्मत नही हैं और नींद भी आ रही हैं

तो मैने कहा बस कुछ देर तो रुक जाओ और जल्दी सी अपने लंड को उनकी चूत पे सेट किया और सुपाडे को अंदर डाल दिया और ऐसे ही खिलवाड़ करने लगा मामी कुछ देर ऐसे ही पड़ी रही फिर बोली अब डाल भी दे क्यों तडपा रहा हैं बेदर्दी उनका कहना था और मैने झट से लंड को एकक ही धक्के मे अंदर डाल दिया इस बार मामी के साथसाथ मेरी भी आह निकल गयी मामी ने अपनी टाँगे उठा ली और मेरे कंधो पे रखते हुए बोली भानजे जी अब अपनी मामी की सेवा करो ये सुनके मैं खुश हो गया और उनकी टाँगो को मजबूती से थामते हुए लंड को अंदर बाहर करने लगा

मेरे हर धक्के पे मामी का पूरा वजूद हिल रहा था आज अगर खाट होती तो वो शर्तिया टूट ही जाती अब मैने कुछ नया ट्राइ करते हुए मामी की दोनों टाँगो को उपर उठाया पर दोनो को एक दूसरी से बिल्कुल चिपका दिया इस तरह उनकी चूत की दोनो फांके आपस मे चिपक गयी जैसे उनके कोई सील लगी हो इस पोज़िशन मे चुदाई का मज़ा दुगना हो गया था मैं मामी के चुतडो को थामे हुए उन्हे चोद रहा था मामी अब बस अपनी आँखे मुन्दे उन पलो का आनंद ले रही थी अब उन्होने अपनी टाँगे चौड़ी की और मुझे अपने उपर आने को कहा मामी के होंटो का रस स्वादन करते हुए चुदाई चालू थी मामी मेरे जोश की कायल हो गयी थी और बोली तुम तो बहुत ही अच्छी चुदाई करते हो

किसने सिखाया है तुमको तो मैने कहा बस आप जैसे की मेहरबानी है और कुछ नही और अपने धक्को की गति बढ़ा दी मेरी टाँगे अब जवाब देने लगी थी पर मैं हार नही मान ना चाहता था और मामी भी उचक उचक कर नीचे से ज़ोर लगा रही थी हमें आधे घंटे से भी ज़्यादा हो गया था पर मेरा पानी निकल ही नही रहा था मैने अब पूरी ताक़त से उनको चोदना शुरू किया मेरा शरीर बहुत ही तेज़ी से उनके शरीर मे समाए जा रहा था और कोई दस मिनट बाद मेरे शरीर मे हलचल होने लगी जो संकेत था मैने अपना लंड चूत से बाहर निकाला और अपने वीर्य की धार मामी के मूह मे डालने लगा …

मामी समझ नही पाई कि ये क्या हुआ और थोड़ा गुस्सा करने लगी तो मैने रुमाल से उनका चेहरा पोंछ दिया उन्होने फटा फॅट अपने कपड़े पहने और अपने को दुरुस्त किया और बाहर निकल गयी पर मैं कुछ देर वहाँ पे ही खड़ा रहा और कोई 15 मिनिट बाद वापिस गया सब लोग भजनों मे मस्त थे तो तो मैने अपने लिए सोने का जुगाड़ किया और सपनो की दुनिया मे खो गया सुबह मैं जल्दी ही उठ गया था आँखे थोड़ी लाल लाल सी हो रही थी और उनमे जलन भी थी मैने ठंडे पानी से मूह धोया

आज का दिन काफ़ी बिज़ी होने वाला था पूरा दिन बस गहमा गहमी मे निकल गया एक-दो बार मामी कोशल्या से सामना भी हुआ पर मैने उनसे नज़र नही मिलाई और ना ही उन्होने कोई तवज्जो दी रात को हम काफ़ी देर गप्पे लड़ाते रहे महॉल बहुत ही ख़ुसनूमा था अब मैं थोड़ा अपनी मम्मी की फॅमिली के बारे मे बता दूं मेरे दो मामा है एक आर्मी मे हैं और एक टीचर हैं जो कोशल्या मामी हैं वो मेरे छोटे मामा की पत्नी हैं मामा की पोस्टिंग बाड़मेर के र्राइव. सेकेंडरी स्कूल मे थी वो बस महीने में 3-4 दिन के लिए ही आ पाते थे

बड़े वाले मामा के हिस्से गाँव वाला मकान था और छोटे वाले मामा ने खेतो मे अपना मकान बनाया हुआ था अगले दिन सब अपनी अपनी पॅकिंग मे लगे हुए थे क्योंकि अब घर भी जाना था नाश्ता पानी हो चुका था बस अब चलने की देर थी तभी कौशल्या मामी ने मम्मी को कहा कि दीदी आप *********** को कुछ दिन इधर ही छोड़ जाइए वैसे भी ये काफ़ी दिनो बाद ननिहाल आया हैं मेरे बच्चे तो बाहर ही पढ़ते हैं और ये भी कई कई दिनो मे आते हैं तो कुछ दिन मेरा भी मन लग जाएगा

तो मम्मी ने पापा से पूछा तो उन्होने अपनी रज़ामंदी दे दी कि मैं 2-3 दिन और वही पे रह लूँ फिर वो लोग चले गये और मैं मामा के साथ कुछ बचे हुए कामो को निपटाने लगा और भी रिश्तेदार जो फंक्षन मे आए थे धीरे धीरे अपने घरो की ओर जाने लगे इसी तरह सांझ ढलने लगी तो कौशल्या ने बड़ी मामी से इजाज़त माँगी और अपने घर जाने को कहा बड़ी मामी मुझे अपने घर ही रखना चाहती थी पर मैने कहा कि मैं छोटी मामी के घर जाउन्गा और सुबह उनके पास आ जाउन्गा और अपना बॅग उठा के मामी के पीछे पीछे चल पड़ा

 


कोई पंद्रह मिनिट पश्चात हम उनके घर पहुच गये मामी ने ताला खोला और मुझे आराम करने को कहा मैं सोफे पे लेट सा गया थोड़ी थकान भी हो रही थी मामी रसोई मे जाके खाने की तैयारी करने लगी मैने टीवी ऑन करलिया और गाने चलाने लगा लगभग एक घंटे बाद मामी खाना लेके आई और हम साथ बैठ कर खाने लगे फिर उन्होने मुझे दूध का गिलास दिया खाना ख़ाके मैं थोड़ा बाहर की साइड पे आ गया क्योंकि मुझे थोड़ी गर्मी सी लग रही थी बाहर आके थोड़ा अच्छा फील हुआ

मैने कुएँ पे लगी मोटर ऑन की और नहाने के लिए पास ही बनी होदि में पानी छोड़ लिया और मस्ती से नहाने लगा ठंडे ठंडे पानी की बोछारे बहुत ही सुकून दे रही थी मामी भी बाहर आ गयी और मुझे देखने लगी मैने कहा आप भी आ जाओ तो वो बोली नही मैं तुम्हारे साथ नही नहा सकती हू तो मैने कहा हम आप तो बस चुद सकती हो ऑर कुछ नही कर सकती मैं जानता हू आपने मुझे अपनी झान्टो मे लगी आग ओ बुझाने के लिए ही तो रोका है फिर अब नखरे क्यों दिखाती हो जब मज़ा करना हैं तो खुल के करो

ताकि उसका पूरा मज़ा मिले वरना क्या फ़ायदा तो वो कुछ सोच के बोली कि पर अगर कोई आ गया तो मैने कहा इस टाइम कॉन आएगा आगे अपपकी मर्ज़ी हैं ……………………… ////////////////////////////???????????????????????????????????????????????????????????????

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???????????????????????????? वो कुछ नही बोली और वैसे ही खड़ी रही तो मैं उनके पास गया और उन्हे उठा के पानी की होदि मे डाल दिया

तो वो बोली बाहर का बल्ब तो बंद कर दो मुझे उनकी ये बात सही लगी और फॉरन ही मैने उसे बंद कर दिया मामी की घाघरा चोली पूरा भीग गये थी हम बड़े ही मज़े से एक दूसरे से अठखेलिया कर रहे थे मैने मामी को अपनी बाहों मे भर लिया और उनके कपड़े उतारने लगा कुछ ही पलो मे हम दोनो बिल्कुल नंगे थे वो मेरी गोदी मे आके बैठ गयी ठंडे ठंडे पानी मे हमारे जिस्मो की गर्माहट घुलने लगी पता नही कितनी ही देर हम पानी मे पड़े रहे बाहर निकलने का मन ही नही कर रहा था

बस ऐसे ही उनको गोदी मे बिठाए रखा तो मामी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि चलो अब अंदर चलते है पानी से भीगी हुई मामी का योवन अपने पूरे शबाब पे था अंदर आके मैने एक तोलिया लिया और उनके बदन को पोंछने लगा आज उन्हे मैं रोशनीमे देख रहा था मैने उन्हे चूमना शुरू किया मेरे तपते होंठ उनके बदन का हर हिस्सा चूम रहे थे आज मामी बहुत ही फ़ुर्सत से चुदने वाली थी मैं बहुत देर तक उन्हे चूमता रहा फिर मैने उन्हे लंड चूसने को कहा

तो उन्होने मना करते हुए बोला कि उन्होने आज तक कभी लंड नही चूसा तो मैने कहा प्लीज़ एक बार तो चूस लो काफ़ी देर पटाने के बाद उन्होने कहा ट्राइ करती हू और नीचे बैठ के मेरे लंड को सूंघने लगी कुछ देर सूंघने के बाद उन्होने घप से मेरे लंड को अपने मूह मे ले लिया और उसपे अपनी जीभ फेरने लगी वैसे तो मैं दो दो को लंड चूसा चुका था पर ऐसा मज़ा पहली बार आया था मामी का थूक उनके मुँह से बाहर गिर रहा था

तभी लाइट चली गयी मामी ने फॉरन लालटेन जला दी लालटेन की मध्यम रोशनी मे उनका बदन और भी सेक्सी लगने लगा था मामी ने दुबारा मेरा लंड अपने मुहमे भर लिया और उसपे अपना जादू चलाने लगी मेरी उंगलियाँ उनके सर के बालो मे फँसाने लगी थी मामी अब बहुत ही चाव से लंड की चुसाइ कर रही थी मामी सुपाडे के छेद मे अपनी जीभ को घुसाने की कोशिश कर रही थी उनकी खुरदरी जीभ का स्पर्श मुझे उत्तेजना के आसमान मे लगा तार उड़े जा रहा था

मैं बोला ओह ममीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई भूत ही अह्चॅयेयीययाया लग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग र्हहाआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईन्न्ननननननननणणन्

तभी उन्होने लंड को बाहर निकाला और मेरी गोलियों को छूने लगी कामुकता अपने चरम पे थी उनकी गरम जीभ मेरी गोलियो पे सितम ढा रही थी तो मैने उन्हे रोका और उठा के बेड पे पटक दिया और उन्हे देखने लगा मामी अपनी चुचियो को मादक तरीके से मसल्ति हुई मेरी ओर देख रही थी तभी मामी ने अपनी चूत को रगड़ना चालू कर दिया वो बिल्कुल किसी रंडी की तरह हरकते करने लगी थी मामी अपनी चूत मे उंगली करती हुई मुझे वो दिलकश नज़ारा दिखा रही थी चूत का गीलापन उनकी उंगलियो पे सॉफ नज़र आ रहा था

शरीर के प्रत्येक कोने मे काम का संचार हो उठा था तो मैने उनकी टाँगे पकड़ी और उन्हे सरकते हुए बेड के किनारे पे ले आया और अपने लंड को चूत पे रख दिया मामी की चूत बहुत ही गरम हो गयी थी बस अब तपते लोहे पे हथौड़ा मारने की देर थी मैं भी लंड को चूत के दाने पे हल्के हल्के रगड़ ने लगा मामी तड़पने लगी उन पलो को सोच के आज भी शरीर का रोम रोम कांप उठता हैं उनकी चूत की पंखुड़िया फडक रही थी और लंड को अपनी ओर बुला रही थी मैने अब एक धक्का मारा और लंड उन कम से भरी पंखुड़ियों को चूमते हुए चूत मे पहुच गया

 


आज मामी अपने पूरे शबाब पे थी मुझे भी आज पता चल रहा था कि वास्तव मे एक गरम औरत कैसी होती थी मामी ने अपनी कामुक आवाजो से पूरे घर को सर पे उठाया हुवा था तभी वो थोड़ा उठी और बैठी सी पोज़िशन मे हो गयी अब मेरा लंड सटा सट मामी की चूत मे अंदर बाहर हो रहा था मामी का चेहरा सुर्ख लाल हो गया था और वो अपने दाँतों को भिचे अपनी चूत मरवा रही थी मामी की संतरे सी चूचिया मेरे हर धक्के पे बुरी तरह हिल रही थी और तभी मामी बेड पे गिर पड़ी और ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगी मैं समझ गया कि उनका स्खलन हो गया है

तो मैं उनके पास लेट गया और उनके होन्ट पीने लगा वो किसी गुड़िया की तरह मेरी बाहों मे सिमट सी गयी थी पर मेरा लंड अभी तक हिलोरे मार रहा तो मैने उनको उल्टी लिटाया और उनके चुतडो पे लंड को रगड़ने लगा मामी ने भी मेरा इरादा समझते हुए एक तकिये को अपने पेट के नीचे लगाया और अपनी गान्ड को उँचा उठा लिया मैने ढेर सारा थूक उनकी गान्ड पे लगाया उनका छेद बहुत ही खुला खुला सा था छेद को एकदम चिकना करने के बाद मैने लंड को गान्ड मे डाल दिया मामी ने भी लंड का स्वागत करते हुए अपनी गान्ड के छेद भींच लिया शायद मामी को चूत से ज़्यादा गान्ड मरवाने का शोक था मेरा पूरा वजन उनपे पड़ रहा था वो भी गान्ड को मटकाते हुए मेरा लंड ले रही थी मैं उनके गालो को काट ते हुई मस्ती से गान्ड मार रहा था और कोई दस मिनिट बाद अपने पानी से उनके छेद को भर दिया और उनकी बगल मे लेट गया …………………..

हम दोनो अगल बगल लेटे हुए थे बिस्तर की चादर सी सलवटें हमारी कहानी को बयान कर रही थी मैं बोला मामी आपकी गान्ड तो बहुत ही मस्त है तो उन्होने बताया कि पिछले कई सालो से उसके मामा चूत तो बहुत ही कम मारते हैं और बस गान्ड ही मारते रहते थे शुरू मे उन्हे बिल्कुल अच्छा नही लगता था पर आहिस्ता आहिस्ता उन्हे आदत हो गयी और अब वो भी जम के मज़ा लेती हैं बोली तुम्हारे मामा कई कई दिन मे आ पाते हैं तो बस चूत मे मूली या बैगन डाल लेती हू कभी कभी गान्ड मे भी मूली चढ़ा लेती हू पर असली मज़ा तो लंड मे ही आता हैं इसीलिए तुम्हे कुछ दिनो के लिए रोक लिया

तभी मामी ने पूछा कि उस रात जब तुमने मेरी ले ली तब तुम किसको चोदना चाहते थे अब उन्हे थोड़े ही बता सकता था कि मैं चाची के चक्कर मे था तो मैने झूठ बोलते हुए कहा कि एक लड़की थी जो मुझे इशारे कर रही थी पर ग़लती से आप चुद गई तो मामी आह भरते हुए बोली चलो अच्छा ही हुआ अब मुझे तेरा लंड मिल गया अपनी प्यास बुझाने के लिए और हँसने लगी मैने भी हां मे हाँ मिला दी मामी बोली अब तो थोड़ी बूढ़ी होने लगी हू तो इतना दम नही बचा है मैने जवाब देते हुए कहा कि आप तो अभी भी बहुत दमदार माल हो तो वो थोड़ा शर्मा गयी

 
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