S
StoryPublisher
Guest
मैं उठा और पानी की बॉटल अपने मूह से लगाली तभी प्रीतम ने लाइट जला दी और अपने बालो को बाँधते हुवे बोली मैं नीचे सोने जा रही हू तुम दोनो एंजाय करो अगर मेरा मन हुआ तो मैं फिर आ जाउन्गि तब तक तुम लगे रहो और नंगी ही नीचे चली गयी अब बचे हम दोनो ज्योति ने बेड की चादर अपने पे लपेट ली थी मैने किवाड़ को बंद किया पर कुण्डी नही लगाई और बेड पे आके ज्योति के पास बैठ गया हमारी आँखे एक दूसरे से टकराई वो शरमाते हुवे बोली प्लीज़ बल्ब बुझा दो तो मैने कहा फिर मैं तुम्हारे इस मादक जिस्म का दीदार कैसे करूँगा तो उसने अपने चेहरा नीचे की ओर कर लिया मैने उसके मुखड़े को अपने हाथो से उपर की ओर उठाया और उसके होंटो पे अपनी उंगलिया फेरने लगा
उसका बदन पता नही क्यों कांप रहा था तो मैने उसे बिल्कुल रिलॅक्स होने को कहा और बोला कि अगर वो कंफर्टबल नही है तो रहने देते हैं तो वो बोली नही ठीक हैं तो मैने अपना हाथ उसकी गर्दन मे डाला और उसे थोड़ा मेरी ओर खींच लिया ज्योति कसमसाने लगी मैने देर ना करते हुवे उसके गालो को चूम लिया अब गरम तो वो थी ही बस थोड़ा ठहराव आ गया था गालो को चूमते चूमते मैं उसके हल्के लाल लाल होंटो की ओर बढ़ रहा था और फिर मैने अपने होंठ उसके होंटो से जोड़ दिए ऐसा लगा जैसे को पिघली हुवी आइस क्रीम हो धीरे से मैने उसके शरीर पे लिपटी चादर को एक साइड कर दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा फिर उसे लिटा दिया और उसका हाथ अपने लंड पे रख दिया
अबकी बार उसने बिना किसी शरम के उसे थाम लिया मैं एक बार फिर से उसके कोमल अधरो का रस चूसने लगा वो उत्तेजना के शिखर की ओर अग्रसर होने लगी उसके हाथ का दबाव लंड पे बढ़ता ही जा रहा था ज्योति का बदन ऐसे तप रहा था जैसे उसे बुखार चढ़ा हो अब मैने उसके बोबे को चूसना शुरू किया और उसकी चूत पे अपनी उंगलिया फेरने लगा बिना बालो की एक दम करारी चूत जिसपे आज मेरे लंड की मोहर टिकने वाली थी उसकी निप्पल बिल्कुल गुलाबी रंग की थी वो खुद मेरे चेहरे को अपनी छातियों पे दबाए जा रही थी जब मेरी उंगलिया उसकी चूत से टकराई तो मैने गीलापन सॉफ मह सूस किया उसकी चूत थोड़ी लंबी सी थी बाकियों से थोड़ी अलग सी मैं उसके दाने को जोरो से रगड़ने लगा
उसकी टाँगे अकड़ने लगी मैं थोड़ा उपर हुआ और उसके होंठो को एक बार फिर अपने मूह मे भर लिया मैं बहुत ही ज़ोर से उंगली करता जा रहा था ज्योति बुरी तरह कांप रही थी मैने दूसरी उंगली भी चूत मे सरका दी और पूरी स्पीड से अंदर बाहर किए जा रहा था उसका हाल बहुत बुरा हो रहा था फिर मैं झट से नीचे आया और चूत पे अपने होंठ टिका दिए अब मेरी जीभ उसे अपना कमाल दिखाने लगी वो 5 मिनिट भी ना टिक पाई और अपना गाढ़ा सफेद पानी छोड़ दिया और किसी लाश की तरह पसर गयी उसकी आँखे बंद थी और छातिया किसी ढोँकनी की तरह उपर नीचे हो रही थी मैं उसके पास लेट गया और उसे से सट गया उसने आँख खोली और बड़े प्यार से मेरी ओर देखने लगी