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Guest
वो शायद कुछ कहना चाहती थी पर थोड़ी उलझन मे थी, उसकी उंगलिया उसकी चुन्नी के कोने को गोल गोल घुमा रही थी मैने कहा हाँ बताओ क्या बात हैं, तो उसने कहा कि क्या तुम मुझे पैंटिंग सिख़ाओगे मैने कहा इसमे पूछने की क्या बात हैं आप जब भी चाहे ये सुनके उसके चेहरे पे मुस्कान आगयि और वो बड़ी ही अदा से इठलाते हुए चली गयी मैं उसे जाते हुए देखने लगा जब छुट्टी हुई तो टेंपो मे इतनीभीड़ नही थी वो मेरे सामने वाली सीट पे बैठी थी और कनखियो से ही मेरी ओर देख लेती थी उपर से टेंपो वाला भी आशिक़ी फिल्म का धीरे धीरे से मेरी जिंदगी मे आना वाला गाना चलाए हुए था
मेरे शरीर मे इश्क़ हिलोरे मारने लगा आज तो टेंपो वाले ने दिन बना दिया था फिर वो अपने स्टॅंड पे उतर गयी, कुछ देर बाद मैं भी अपने स्टॅंड पे पहुचा बॅग को कंधे पे लटकाए हुए मैं घर की ओर जा रहा था रास्ते मे प्रीतम देवी मिल गयी मैने पूछा कि कहाँ जा रही हो तो वो बोली दुकान गयी थी पेप्सी लेने तो मैने धीमे से कहा आज कल मिलती नही हो वो बोली कल लकड़ी काटने जाउन्गि जंगल मे मिल लियो टाइम लगे तो मैं खुश हो गया घर पहुचते ही सीधा अपने कमरे मे घुस गया कपड़े चेंज किए और किताबो मे खो गया आज काम काफ़ी ज़्यादा था शाम को ही बाहर निकला
चाचा आ चुके थे वो थोड़े हड़बड़ाये हुए थे मैने कहा क्या हुआ तो वो बोले चंडीघर जाना पड़ेगा कोई फाइल अटक गयी है उर्जेंट क्लियर करवानी पड़ेगी मैने कहा मैं भी चलूं घुमाई हो जाएगी तो वो बोले फिर कभी ले चलूँगा और पॅकिंग करने लगे रात की ट्रेन पकड़नी थी पापा भी आ चुके थे डिन्नर के बाद वो उठे और चलने को तैयार हो गये तो पापा ने स्कूटर की चाबी देते हुए कहा कि मैं उनको स्टेशन छोड़ आऊ और स्कूटर आराम से चलाने को कहा मैने एक किक मारी और चल दिए सहर की ओर कोई बीस मिनिट मे ही उन्हे स्टेशन पहुचा दिया ट्रेन टाइम पे ही थी
जब वापिस आ रहा था तो एक ख़याल आया और स्कूटर को बाजार की ओर मोड़ दिया और एक स्टेशनरी शॉप पे पहुँच गया और कुछ वाइट पैंटिंग पेपर ओर कई तरह के रंग खरीद लिए और उन्हे गिफ्ट पॅक करवा लिया बिल पे किया और घर की तरफ मूड गया घर पहुचा तो दस बज चुके थे
तो पापा बोले काफ़ी देर लगा दी तो बहाना बना दिया कि ट्रेन लेट थी और अंदर जा ही रहा था कि उन्होने हुकुम दिया कि तेरे चाचा नही हैं तो खेत पे तू ही सो जा थोड़ा समान पड़ा हैं अगर बारिश हो जाए तो संभाल लियो क्योंकि वहाँ पे काम चलाया हुआ था मैने कहा स्कूटर ले जाउ साइकल तो हैं नही उनकी इच्छा तो नही थी पर उन्होने हाँ कह दी मैने गिफ्ट पॅक को अपने कमरे मे जल्दी से छुपाया और खेतो पे चल दिया
वहाँ पहुचा ही था की बूंदा-बंदी शुरू हो गयी भाग के सारे सामान को ढका बेरिश तेज होने लगी थी तभी लाइट भी चली गयी हवा काफ़ी ज़ोर से चल रही थी बिजली कडकने लगी मैने बॅट्री ढूंढी पर जल्दबाज़ी मे वो घर पे ही रह गयी थी सामान तो सुरक्षित कर ही दिया था पर सोने की जगह तो थी ही नही तभी मुझे बिम्ला काकी का ध्यान आया मैने सोचा जब तक बारिश होती हैं उनके घर ही बैठ जाउन्गा स्कूटर स्टार्ट किया और उनके घर पहुच गया मैं पूरा भीग चुका था उनके बरामदे मे स्कूटर खड़ा किया और उन्हे आवाज़ दी वो लॅल्टेन लेके बाहर आई
और मुझे देख के बोली तुम इस वक़्त यहाँ पर तो मैने बताया कि आप तो जानती ही हो कि काम चल रहा हैं कुवे पे और बारिश आ गयी तो मैं इधर आ गया वो बोली अच्छा किया और एक तोलिया मुझे दिया मैने पूछा काका कहाँ हैं तो वो बोली कि सहर मे एक सेठ के गोदाम की चोकीदारी करता हैं और रात मे उधर ही रहता हैं दिन मे आता हैं मैने कहा ये तो बहुत बढ़िया बात हैं उन्होने कहा हाँ ठीक ही हैं कम से कम दारू तो नही पिएगा मैने पूछा आपका लड़का ???????????????????? तो उन्होने बताया कि वो नवोद्या स्कूल मे पढ़ता हैं और वही रहता हैं कभी कभी आता हैं तभी मुझे छींक आई तो वो बोली तू अपना बदन पोंछ मैं तेरे लिए दूध गरम करती हू
मैने मना किया पर वो नही मानी और अंदर चली गयी मैने अपने गीले कपड़े उतार दिए और निचोड़ के खूँटि पे टांक दिए बारिश अब बहुत ज़ोर से बरसने लगी थी और मैं बस गीले कच्चे मे खड़ा था काकी एक गिलास मे गरम दूध ले आई उसे पिया तो थोड़ी जान आई काकी मेरे जिस्म को निहारने लगी मैने पूछा क्या देख रही हो तो वो सकपका गयी मैने झट से गिलास ख़तम किया वो अंदर चली गयी मैं उनकी गान्ड को ही देख रहा था उनकी गान्ड बहुत ही बड़ी थी बिल्कुल किसी मटके की तरह तभी मेरे मन मे विचार आया कि आज तो काकी को चोद देता हू मैने अपना कच्छा भी उतार दिया और नंगा खड़ा हो गया
कुछ देर बाद वो वापिस आई तो मुझे नंगा देख बोली ये क्या है तो मैने कहा काकी उस दिन आपकी चूत उधार थी आज मोसम भी कुछ ऐसा ही हैं क्यों ना आज कुछ हो जाए उन्होने एक गहरी साँस ली और बोली ठीक हैं तेरा उधार आज चुका ही देती हू तो मैने कहा चलो छप्पर मे ही चल ते हैं लालटेन की रोशनी से पूरा छप्पर रोशन हो गया उन्होने फॉरन एक चारपाई पे बिस्तर लगाया मैं नंगा तो था ही उनके लहंगे का नाडा भी फॅट से खोल दिया 45 की उमर मे भी क्या गान्ड थी उनकी इतनी बड़ी गान्ड आज पहली बार देख रहा था मैं फॉरन उनसे चिपक गया
और अपने लंड को उनकी मोटी मोटी जाँघो के बीच दे दिया क्या गर्मी मिली उस टाइम सारी सर्दी एक मिनिट मे ही गायब हो गयी काकी बोली लंड तो काफ़ी गरम हैं तेरा कितना टाइम हो गया ऐसा कड़क लंड नही लिया हैं तो मैने कहा चिंता मत कर आज तेरी सारी इच्छा पूरी कर दूँगा और उनके ब्लाउस को भी निकाल दिया अब वो पूरी नंगी मेरे आगे खड़ी थी उनकी चूचिया बहुत ही भारी थी जैसे कोई पपीते हो मैने उन्हे बेदर्दी से मसलना शुरू किया तो वो दर्द से कराहती हुए बोली थोड़ा आराम से कर आज कल के लौडे भी ना किसी औरत को देखते ही कंट्रोल खो देते हैं