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ज़िंदगी भी अजीब होती है Restart



अपने को तो पिल्ना ही था मैं टंकी का निचला द्वार ओपन करने लगा पर वो खुल ही नही रहा था शायद जाम हो गया था काफ़ी कोशिस के बाद भी वो नही खुला तो चाची ने कहा कि ऐसे करते हैं कि मैं बोरियो पे चढ़ के उपर का ढक्कन खोलती हू और बाल्टी से गेहू निकाल लेते है और बाद मे चाचा से टंकी को ठीक कर वा लेंगे अब चाची ने अपनी चुनरिया मूह पे बाँध ली और बोरियो के ढेर पे चढ़ने की कोशिश करने लगी मैने कहा कि मैं स्टूल लाता हू फिर आप आराम से चढ़ जाना तो उन्होने कहा एक काम करो तुम मुझे पकड़ के चढ़ा दो

कोई ज़्यादा उँचान तो हैं नही मैने उनको कमर से पकड़ा और उपर को उठाने लगा आज ज़िंदगी मे पहली बार मैने उनको टच किया था उनकी कमर का माँस बहुत ही सॉफ्ट था मेरी उंगलिया उनकी कमर मे धँस रही थी मैं हल्का सा खो गया था तो वो बोली अरे क्या हुवा उपर तो करो फिर मैने उन्हे बोरियो पे चढ़ा दिया उन्हने ढक्कन खोला और मुझे गेहू पकड़ाने लगी हमे स्टोर मे आधा घंटा हो गया था उपर से गर्मियों के दिन थे पसीना भी आने लगा था तभी चाची का पैर फिसल गया और वो बाल्टी को लिए लिए मुझ पे आ गिरी मैने उनको थामने की असफल कोशिस की पर नाकाम रहा और इसी बीच मेरे हाथ उनके चुतडो पे लग गये या यू कहूँ कि उनके चुतड मेरे हाथो से दब गये

परंतु उस समय इतना ध्यान नही गया उनकी छातिया मेरे सीने पे गढ़ रही थी मैने उन्हे परे धकेला और वही फर्श मे बैठ गया चाची अभी भी फर्श पे पड़ी हुवी थी उनको उठा ते हुवे मैने पूछा कि आप ठीक तो हो तो उन्होने कहा कि घुटना फर्श पे ठुक गया है और बहुत दर्द हो रहा हैं वो रुआंसी हो गयी थी मैने उन्हे सहारा दिया पर वो चलने की हालत मे नही थी तो मैने कहा चाची बुरा ना मानो तो मैं आपको उठा के ले चलूं

तो उन्होने हाँ करदी हीरो बन ने के चक्कर मे कह तो दिया था पर उठाया जब पता चला कि वो दिखती पतली सी हैं पर वजन पूरा है थोड़ा कोशिस करके उन्हे उनके रूम मे पहुचा दिया और बेड पे लिटा दिया उनकी कोहनी मे भी खरास लग गयी थी मैने कहा दिखाओ कि कहाँ कहाँ लगी है फिर मैं डेटोल लाया और उनकी कोहनी पे लगाया तो जलन से उनकी आह निकल गयी मैने उनका पैर पकड़ा और उसे हिलाने लगा तो वो बोली मत कर बेटा बहुत दर्द हो रहा है

तो मैने पूछा कि चाची घर मे इयोडीक्स है वो बोली बैठक की अलमारिमे है मैं फॉरन ही ले आया और बोला लाओ चाची मैं लगा देता हू तो चाची ने मना करते हुवे कहा कि तुम जाओ मैं लगा लूँगी तो मैने कहा कि नही चाची आप भी तो इतना करती हो घर के लिए तो मेरा भी कुछ फर्ज़ है और मैं बेड पे बैठ गया और उनका पैर उठा के अपनी टाँगो पे रख लिया पर चोट तो घुटनो पे लगी थी ये भी साला एक अजीब ही ट्विस्ट हो गया था

अरे मैने चाची के बारे मे तो बताया ही नही चाची का नाम बबिता है उमर 31 हैं गोरा रंग पतली कमर और मांसल गान्ड बहुत ही गोरी हैं किसी गुड़िया की तरह लगती हैं उनकी शादी को 7 साल हो चुके हैं पर अभी कोई संतान नही हुवी है मैने कहा चाची लहंगा थोड़ा उपर कर्लो तो मैं इयोडीक्स लगा लू उन्होने थोड़ा सा उपर कर लिया पर घुटना अभी थोड़ा दूर था

तो मैने खुद ही उसे उठा दिया तो वो बोली ये क्या कर रहे हो तोमैने कहा कि अगर लहंगा उपर नही करूँगा तो बॉम कैसे लगाउन्गा तो वो कुछ ना बोली और अब मैं उनके घुटने पर इयोडीक्स की मालिश कर रहा था मैने उनके पैर को थोड़ा उपर उठा दिया जिस से अंदर का नज़ारा मुझे सॉफ दिख रहा था गोरी गोरी टाँगे दिख रही थी पर पेंटी नही दिख रही थी क्यों कि पैर इतना ज़्यादा नही उठा सकता था मैं पूरी लगन से उनकी मालिश कर रहा था

मेरे हाथ बीच बीच मे फिसल कर जाँघो पे भी चले जाते थे पर उन्होने कुछ ना कहा अब मैने पैर को थोड़ा सा और उठा दिया और एक नज़र चाची पे डाली वो अपनी आँखे बंद करके लेटी हुवी थी अब घाघरे के अंदर का सब कुछ दिख़रहा था उन्हों नीले कलर की पेंटी पहनी हुवी थी ये देख कर मेरा लंड निक्कर मे थी खड़ा हो गया अब मेरे हाथ घुटने को छोड़ कर थोड़ा उपर की ओर रेंगने लगे थे

क्या बताऊ चाची का बदन बहुत ही कोमल था मेरी रगड़ तेज होती जा रही थी तभी उन्होने कहा कि अब वो थोड़ा ठीक फील रही और उठ के बैठ गयी

 


इधर मेरी निक्कर मे लंड फॅन फानाया हुवा था जिस से थोड़ा बाहर की ओर कुछ फूल सा गया था चाची की नज़र उधर पड़ी तो वो कुछ गोर से देखने लगी

मैं भी भाँप गया था मैने फॉरन अपनी बनियान को नीचे कर लिया अब चाची ने भी अपना ध्यान हटाया और कहा कि मैं जाकर स्टोर मे बिखरे गेहू इकट्ठा कर दूं ऑर वो खाना नही बनाएगी और थोड़ी देर सोना चाहती है

मैने कहा कोई बात नही आप आराम करो और मैं स्टोर मे चला गया वहाँ काफ़ी देर लग गयी थी आया तो पूरा शरीर पसीने और धूल मे सना हुवा था और मैं सीधा बाथ रूम की ओर चल पड़ा मैं नहा रहा था तभी मेरी नज़र वहाँ रखी कछियो पे पड़ी ऐसे ही मैने उन्हे उठा लिया और देखने लगा

मुझे बार बार चाची का ही ध्यान आ रहा था पर ये नही पता था कि उनकी पेंटी कॉन सी है पर मैने एक को अपने लंड पे रख दिया और उस से लंड पे रगड़ने लगा बहुत ही अच्छा लग रहा था ऐसे ही मैने मूठ मारनी शुरू करदी

मैने अपनी आँखे बंद करली और चाची को सोचते हुवे मूठ मार रहा था और थोड़ी देर बाद अपना वीर्य उसी कछि पे गिरा दिया और उसे वही पे रख दिया जहाँ से उठा या था और नहा कर बाहर आ गया था फिर थोड़ी देर आराम किया और फिर प्लॉट की ओर चल दिया

…. वहाँ जाके घास काटी और पशुओ को चारा खिलाया अब बारी उन्हे नहलाने की थी मैने पानी भरने के लिए टंकी का नल खोला तो उसमे पानी बहुत ही धीरे आ रहा था मैं अंदर गया तभी ध्यान आया कि मोटर तो प्रीतम के बाडे मे है मैं उसे लेने गया

तो देखा वो और उसकी मा वही पे थे मैने मोटर माँगी तो प्रीतम बोली तुम चलो मैं थोड़ी देर मे देने आ जाउन्गि और मैं वापिस आ गया थोड़ी देर बाद वो आई चूँकि प्लॉट मे और कोई नही था मुझे खुराफात सूझी मैने उसे पकड़ लिया और वही पे एक खटिया पड़ी थी उसपे गिरा दिया

तो वो कसमसाते हुवे बोली छोड़ो मुझे क्या कर रहे हो जाने दोमुझे पर मैं तो चुदाई की आग मे जलने लगा था मैने उसकी सलवार मे हाथ डाल दिया और चूत को मसल्ते हुवे बोला कुछ नही होगा बस 10 मिनिट मे ही कर लूँगा पर वो नही मानी वो बोली मेरी मा इधर ही हैं अगर मैं ज़्यादा देर रुकूंगी तो वो कही इधर ही ना आ जाए तो मैने थोड़ी देर उसको किस किया और फिर जाने दिया

उस दिन और कुछ ज़्यादा नही हुवा भाभी का साथ तो छूट ही गया था प्रीतम भी कुछ ज़्यादा काम आ नही र्है थी कुल मिलाके बस कट ही रही थी और मैं चाची के प्रति आकर्षित होने लगा था अब मेरी नज़र बदल गयी थी

 


अब वो मुझे बस एक चूत दिखती थी जिसमे मैं अपना लंड डालना चाहता था पर ये बहुत ही मुश्किल था तभी एक अच्छी बात हुई गाँव मे मेला लगा मैने पहले ही पूरा प्लान बना के प्रीतम को लिख दिया था कि मेले वाले दिन वो किसी तरहा हमारे प्लॉट मे आ जाय और हम थोड़ा टाइम साथ बीतायँगे और उसने कहा अगर चान्स मिला तो वो ज़रूर आ जाए गी आख़िर उसकी चूत भी कुलबुला रही थी

आप तो समझ सकते हैं कि गाँव के लोगो के लिए मेलों की क्या अहमियत होती हैं जो मज़ा मेले मे आता था वो मज़ा हज़ारो र्स खर्च करके भी शॉपिंग माल मे नही आता हैं

मेले वाले दिन मैं 11 बजे घर से मेला जाने को कह कर निकला और प्लॉट मे पहुच गया अब बस प्रीतम डार्लिंग का इंतज़ार था काफ़ी समय बीत गया पर वो अभी तक नही आई थी फिर कुछ देर बाद उसने गेट पे दस्तक दी मैने जल्दी से उसको अंदर किया और गेट बंद कर दिया और जल्दी से उसको लेके कमरे मे आ गया

वो झट से मेरे गले लग गयी मैने भी उसको अपनी बाहों मे भर लिया उसकी गरम सांस मेरे चेहरे पे पड़ रही थी उनमे एक अलग सी खुश्बू थी जो हर पल के साथ मुझे मद होश कर रही थी मैं उसकी गान्ड को सलवार के उपर से ही सहलाने लगा

वो भी अधीर होते हुवे बोली कि तुम जल्दी ही कर लेना उसे मेले भी जाना हैं मैने अपनी उंगली उसके होंटो पे रख दी और उसको चुप करवा दिया उसकी नशीली आँखें मेरे उपर डोरे डालने लगी थी मैने बिना देर किए उसके होन्ट अपने मुहमे भर लिए और उनको चूमने लगा

वो भी मेरा साथ देने लगी मेरी जीभ उसके मूह मे घूम रही थी और मैने उसके हाथ को अपने लंड पे रख दिया और वो उसे मसल्ने लगी काफ़ी देर तक उसके होंठ ही चूस्ता रहा तब उसने मुझे हटा या और बोली अब क्या इन्हे सुजा के छोड़ोगे मैने उसके सूट को उपर करना शुरू किया और निकाल ही रहा था की वो बोली पागल मत बनो कोई आ गया तो मैने कहा गेट अंदर से बंद है और आज मेला हैं तो इतना रिस्क तो बनता है

वो हँसते हुवे बोली एक दिन तुम मुझे मरवाओगे सफेद ब्रा मे उसकी मोटी मोटो चूचिया बाहर आने को मचल रही थी मैने देर ना करते हुवे उनको आज़ाद किया और एक को थोड़ा नीचे झुकते हुवे अपने मूह मे भर लिया इधर प्रीतम ने मेरे पाएजामे और अंडरवेर को नीचे करते हुवे लंड को बाहर निकाल लिया और अपनी उंगलिया उसपे कस दी मैं उसकी चूची पी रहा था बिल्कुल गुलाबी निप्पल्स बहुत ही संवेदन शील थे जितना मैं उनपे जीभ फेरता उतना ही प्रीतम के बदन मे मस्ती का संचार हो रहा था अब मैने उसकी सलवार और पेंटी एक साथ ही उतार दी और उसको नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया मेरा लंड उसकी चूत पे रगड़ खा रहा था वो बोली जल्दी करो ना तो मैने लंड पे थूक लगाया और उसकी एक टाँग को थोड़ा उठाया और लंड को चूत मे डाल दिया और खड़े खड़े ही चूत मारने लगा

प्रीतम की चूत से फ़च फ़च की आवाज़ आ रही थी और हर लम्हे के साथ वो मस्ती मे डूब ती जा रही थी अब मैने उसको वही फरश पे लिटा लिया और उसकी टाँगो को चौड़ा किया और उसमे समाता चला गया मैं दुबारा उसके होंटो का रस पीने लगा था चुदाई के समंदर मे हमारी नाव तेज गति से तैर रही थी तभी मुझे ध्यान आया कि उस रात चाचा किस पोज़िशन मे चाची को रगड़ रहे थे

तो मैने अपना लंड निकाला और उसको टेढ़ी करते हुए उसकी एक टाँग को थोड़ा उठाया और पीछे से चूत मे लंड को घुसा दिया प्रीतम बोली आहहह ये क्या करते हो थोड़ा आराम से डालो मैने अपना एक हाथ उसके साइड से निकालते हुवे चूची को पकड़ लिया और उसे भींच ने लगा लंड सरपट सरपट चूत के अंदर बाहर हो रहा था मैने अब उसके गालो को चूसना शुरू कर दिया था प्रीतम भी पूरी मस्ती मे अपने गुदाज कुल्हो को पीछे कर रही थी गर्मी की दुपहरी मे दो जवान पसीने से भीगे जिस्म एक अलग ही लड़ाई मे लगे हुवे थे

 


अब मैने उसे सीधी लिटाया और चुदाई करने लगा उसके कुल्हो की थिरकन बढ़ ती ही जा र्है थी तभी उसने अपने चुतड पूरी तरह उठा दिए और अपने बदन को ऐंठते हुवे झड़ने लगी चूत मे पानी की बढ़ आ गयी थी जिस से लंड फिसलने लगा मैं भी लग भग करीब आ ही गया था और कुछ देर में एक ज़ोर की आह भरते हुवे चूत मे ही झाड़ गया…………

अब वो उठी और अपने कपड़े उठाने लगी तो मैने उसके हाथ को पकड़ ते हुवे कहा कि अभी क्यों पहन रही हो अभी थोड़ी देर रुक जाओ पर वो नही मानी और बोली तुम को जो चाहिए था वो तो तुम्हे दे ही दिया है मैं तुम्हारी लगती भी क्या हू मैं तो तेरे लिए एक रांड़ हू बस चोदने के लिए उसकी बात मुझे चुभ गयी

मैने कहा कि क्या तुम मेरी दोस्त नही हो तो वो बोली कि रे बावले दोस्ती को क्यों बदनाम करता है ये तू भी जानता है कि जिस दिन मुझसे अच्छी मिल जायगी मुझे भूल जायगा और थोड़ी एमोशनल होगयि बात तो उसने 100% सही कही थी आख़िर उसका मेरा रिश्ता ही क्या था दोस्ती तो बस चुदाई के लिए ही थी

तो मैने भी पूछ लिया कि जब तुम्हे पता ही हैं तो क्यों आती हो वो बोली अच्छा लगता हैं तेरा साथ जब तेरे साथ होती हू तो थोड़ा हँसने-मुस्कुराने का बहाना मिल जाता है ना जाने क्यो उसकी बात दिल के अंदर धाड से लगी मैने कुछ भी नही कहा और बस उस को अपनी बाहों मे भर लिया

उसने मुझे हटाया कि छोड़ो पेशाब करना है और बाहर जाके मूतने बैठ गयी साली कमिनी थी पूरी ज़ालिम मेरी ओर मूह कर की ही मूत रही थी मैं चूत से बहती पेशाब की धार को देख रहा था जो उसकी फांको को भिगोरहि थी फिर वो मेरे पास आके बैठ गयी और बोली क्या सोचने लगे तो मैने कहा कुछ नही मैने अपनी जेब मे हाथ डाला और 300 रुपये उसको देते हुवे बोला ये मेरी तरफ से रख लो

तो वो नाराज़ होती हुए बोली मैं तेरे साथ सोती हू पर रंडी नही हू जो पैसो से तोल रहा है तो मैं बोला तुम ग़लत समझ रही हो ये तो मेले के लिए गिफ्ट है तो वो बोली अगर गिफ्ट देना ही था तो खुद खरीद भी सकते थे और गुस्से मे पैर पटक ते हुए चली गयी मैं उसे रोकना चाहता था पर ना रोक सका ना चाहते हुवे भी आज उसने दिल मे एक हूक सी जगा दी थी

मैं भी उठा और थोड़ा पानी पिया और मुँह धोया पता नही चुदाई के बाद प्यास कुछ ज़्यादा ही लगती थी फिर घर की ओर चल दिया वहाँ जाके देखा कि मेन गेट पे ताला लगा हैं तो ध्यान आया कि घर वाले तो मेले मे गये हैं भूख भी लग रही तो मैं भी मेले की ओर चल दिया

हालाँकि मुझे पसंद नही था पर मेरे कदम चल ही पड़े उस ओर या यूँ कहूँ कि तक़दीर कुछ ओर ही खेल खेलना चाहती थी वहाँ पहुच के सबसे पहले दो समोसे खाए तब थोड़ी जान आई गरम हवा सरपट दौड़ रही थी और कुछ भीड़ गर्मी सब कुछ जैसे उबल सा रहा था तो सोचा कि लगे हाथ क्यों ना गन्ने का रस भी पी लिया जाए मैं भी अब मेले के रंग मे रंगने लगा था

तभी एक विचार आया कि क्यों ना प्रीतम की लिए कुछ खरीद लूँ थोड़ा डर भी था कभी कोई देखना ले कि मैं लड़कियों का समान किस के लिया खरीद रहा हू और कुछ गले मे पहन ने के लिए देखने लगा

तभी पीछे से कोई मुझसे टकरा गया मैने फॉरन पीछे मूड कर देखा तो बस देखता ही रह गया साँवली रंगत चेहरे पे हल्की सी ज़ुल्फ़िें बिखरी हुई उसने फॉरन ही मुझसे सॉरी कहा तो मैं भी मुस्कुरा दिया ये उसकी ऑर मेरी पहली मुलाकात थी वो मुस्कुराइ और इठलाती हुई आगे बढ़ गयी मैं बस उसे जाते हुवे देखता ही रहा…………………….. ……..

 


वो लड़की कुछ ही सेकेंड मे एक छाप से छोड़ गयी थी फिर प्रीतम के लिए कुछ खरीदा और थोड़ी देर मेले मे घूमने के बाद घर की ओर प्रस्थान किया शाम हो चली थी लाइट भी नही आ रही थी तो ओर भी मुश्किल सी हो गयी थी मैने आँगन मे खाट बिछाई और उसी पे लेट गया

चाची झाड़ू लगा रही थी उनकी पीठ मेरी ओर थी मैं उनकी गान्ड को देख रहा था साली जिंदगी भी दो तरह से चल रही थी एक तरफ मैं लुस्ट मे डूबा जा रहा था और दूसरी ओर एक नयी राह भी थी जिसपे चलने की तैयारी होने लगी थी मेरा ध्यान पूरी तरह से चाची पे ही था जी कर रहा था कि उसी वक़्त उन्हे चोद दूं पर मजबूरी थी तो सीधा उठके बाथरूम मे घुस गया और उनकी कच्छि को लंड पे रगड़ते हुए मूठ मारने लगा

अब जाके थोड़ा चैन आया उन दिनो साला लंड भी जब चाहे खड़ा हो जाता था पेंटी को उसकी जगह पे रखा और हाथ मूह धोके मैं फिर वापिस आ गया पापा और चाचा भी आ चुके थे तो मैं उनसे बाते करने लगा मई के लास्ट दिन चल रहे थे

तभी चाचा बोले कि 10+2 मे वो मेरा अड्मिशन सिटी मे करवाएँगे ताकि मैं बेहतर ढंग से स्टडी कर सकूँ ये सुनके मैं बहुत ही खुश हो गया तभी चाचा बोले कि जा रसोई मे देखके आ कि खाना बन ने मे कितनी देर हैं मैं वहाँ पे गया तो देखा कि चाची आटा ही लगा रही थी वो बोली बस बना ही रही हैं वो स्लॅब के पास खड़ी आटा लगा रही थी अचानक मुझे पता नही क्या सूझा मैं उनके पीछे खड़ा हो गया

थोड़ी चापलूसी करते हुए बोला चाची आप सारा दिन कितना काम करती हो कभी आराम भी किया करो घर मे ऑर भी हैं वो भी खाना बना सकते है तारीफ औरत की सबसे बड़ी कमज़ोरी होती हैं मैं थोड़ा और मक्खन लगाते हुए बोला कि क्या मैं उनकी हेल्प करू और थोड़ा और उनके करीब सट गया अब मेरी जांघी उनके पिछवाड़े पे टच हो रही थी मेरा नागराज भी खड़ा होने लगा था मैने थोड़ी हिम्मत करते हुए अपना हाथ उनके पेट पे रख दिया और उसपे हाथ फेरने लगा चाची थोड़ा कसमसा गयी पर कुछ ना बोली और आटा लगाती रही मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ गयी और मैं उनसे बिल्कुल ही चिपक गया था लंड उनके कुल्हो पे रगड़ खा ने लगा था मुझे सॉफ पता चल रहा था कि उनकी सांसो मे ठहराव आ गया था तभी उन्होने भी अपने कुल्हो को थोड़ा पीछे कर दिया

अब हम दोनो ही जानते थे कि ये चाची-बेटे के प्यार से थोड़ा बढ़ कर कुछ ऑर ही हो रहा था तभी चाचा ने आवाज़ लगाई और मैं घबराते हुए बाहर की ओर भाग चला. फिर कुछ नही हुवा डिन्नर के बाद मैने अपना बिस्तर छत पे लगाया और रेडियो को ऑन करके लेट गया आज गाने भी कुछ ज़्यादा ही रोमॅंटिक चल रहे थे

मुझे तभी उस लड़की का ध्यान आया जो मेले मे टकराई थी दो पल की मुलाकात फिर से मुझ पे हावी होने लगी थी कुछ तो रोमॅंटिक गानो का सुरूर ओर कुछ उस लड़की की कशिश हालाँकि कशिश तो मैने भाबी और प्रीतम मे भी महसूस की थी पर ये कुछ अलग ही था नींद उड़ गयी थी मैने सोचा गाँव की तो नही हो सकती है होती तो पता चल ही जाता पता नही कॉन थी कहाँ रहती थी

एक तो वैसे ही बैचैन था उपर से लव गुरु भी रेडियो पे उस खुमारी को ऑर भी बढ़ा रहे थे गला सूखने सा लगा था पानी की बॉटल टटोली तो पाया आज तो बोतल नीचे ही भूल आया था मैं नीचे की ओर चल पड़ा रसोई मे जा ही रहा थी कि तभी किसी के हल्के से हँसने की आवाज़ आई तो मेरे कान खड़े हो गये

थोड़ा दीवार की पास चिपक के आँगन की ओर देखा कि चाचा ने चाची को पलंग पे घोड़ी बनाया हुवा हैं . दोनो संभोग करने मे मस्त हैं मैं छुप के उन्हे देखने लगा जाने कब मैने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और उसे हिलाने लगा

कुछ ज़्यादा सॉफ तो नही दिख रहा था पर जितना भी था काफ़ी था अब चाची चाचा के लंड पे बैठ के उछल कूद मचा रही थी मेरा पानी भी निकलने ही वाला था तभी साला जुलम हो गया लाइट अचानक आ गयी और पूरे आँगन मे बल्ब की रोशनी मे नहा गयी मैं एक दम से हड़बड़ा गया छिपने की कोई जगह भी नही थी और तभी चाची की नज़र मेरे उपर पड़ी

उनकी आँखे हैरत से फैल गयी मेरे हाथ मे मेरा तना हुआ लंड झूल रहा था और उधर वो नंगी अपने पति के लंड पे कूद रही थी मैने आव देखा न ताव और सीढ़ी पर दौड़ लगा दी और घर के बाहर चबूतरे पे आके बैठ गया …………..

सुबह हुई तो मैं सीधा प्लॉट मे चला गया रात का घटना क्रम आँखो के सामने ही घूम रहा था समझ नही आ रहा था कि कैसे चाची को फेस करूँगा फिर प्रभु का नाम लिया और सोचा कह दूँगा ग़लती हो गयी और माँफी माँग लूँगा

नहाया धोया पशुओ को नहलाया उसी मे काफ़ी टाइम हो गया था पेट मे चूहे भी दौड़ने लगे थे पर हिम्मत नही हो रही थी घर जाने की तो मैने सोच कि गाँव के बस स्टॅंड की ओर घूम आता हू और वही कुछ खा भी लूँगा

जैसे ही जेब मे हाथ दिया तो वो खाली थी कोई बात नही दिल को समझाया और फिर भी उधर ही चल पड़ा तभी विचार बदला और सोचा क्यों ना प्रीतम के घर की तरफ राउंड लगाया जाए कई दिन से उसका दीदार भी नही हुआ था

तो वो अपने गेट मे ही खड़ी थी मैने उसे देखा और स्माइल पास की उसने अपनी छोटी को घूमाते हुए मुझे चिड़ाया तभी उसने आने का इशारा किया मैने चारो ओर देखा और साव धानी से उसके घर मे घुस गया

 
उसने फॉरन ही गेट बंद कर दिया मैने पूछा घर वाले कहाँ गये तो वो मंद मंद मुस्कते बोली कि उसकी मा और भाई सहर गये हैं और और शाम तक ही वापिस आएँगे मेरे चेहरे पे कुटिल मुस्कान छा गयी

पर मुझे भूक लग रही थी तो मैने उस से रोटी के लिए कहा तो बोली अभी तो कुछ नही हैं रात की बासी रोटी ही हैं और थोड़ी चटनी हैं तुम चाहो तो वो ख़ालो या रुक जाओ मैं गरम बना दूं

तो मैने कहा कि जो है वो ही दे दो और रोटी खाने लगा उसने एक गिलास मे लस्सी भी डाल दी. उस दिन पता चला कि खाने का स्वाद क्या होता हैं थी तो बस चटनी रोटी पर आज तक उस स्वाद को तरसता हू

मुझे खाना खाते देख प्रीतम बहुत ही खुश हो रही थी खाना ख़तम हुवा उसने बर्तन समेट दिए और मुझे उनके चॉबारे मे ले आई और मेरी गोद मे आ के बैठ गयी

मैं उसकी पीठ सहला रहा था उसने अपने होंठ आगे को बढ़ाए तो मैने मना करते हुए कहा कि पहले मैं उस से कुछ बात करना चाहता हू तो बोली हाँ क्यों नही मैं तो बेताब हू कि कब तू मेरी तारीफ करेगा

तो मैने उसकी नशे से भरी आँखो मे देखते हुए पूछा कि तू मेरी कॉन है तो बोली तुझे क्या लगता है तो मैने कहा घुमा मत और बता कि तू मेरी क्या लगती हैं तो बोली कि मैं तेरी अधूरी प्यास हू जो जितना बुझती है उतना ही भड़कती जाती हैं

तो मैने कहा तेरे मेरा क्या रिश्ता है तो वो बोली नदी के दो किनारों का मैने फिर पूछा कि तेरे- मेरे रिश्ते का क्या अंजाम वो हँसते हुए बोली ना कोई आगाज़ ना कोई अंजाम

बोली इतना मत सोचो आख़िर एक ना एक दिन तो हमे बिछड़ना ही होगा तो फिर हम क्यों आस करे कुछ तो बात थी उस लड़की मे उसने मेरी तरफ बढ़ते हुए कहा कि जो चल रहा हैं उसी तरह चलने दो या सब बंद कर दो पर कोई आस कभी मत पालना

क्योंकि जब उम्मीद टूट ती है तो संभालना मुश्किल हो जाता हाँ और नीचे चली गयी कुछ देर बाद वो एक प्याला लेके आई जिसमे कुछ रसगुल्ले थे और मेरी और बढ़ाते हुए बोली कि लो खाओ तो मैं बोला तुम ही खिला दो क्या पता फिर तुम्हारे हाथ से कुछ खाने को मिले या ना मिले

तो वो मेरी गोद मे वापिस आके बैठ गयी और बड़े ही प्यार से मुझे खिलाने लगी उसकी उंगलिया चाशनी मे भीग गयी थी रसगुल्ले के साथ साथ मैं उसकी उंगलियो को भी चाटने लगा वो बस मुस्कुरा रही थी

दो-तीन पीस खाने के बाद मैने उसे खड़ा किया और उसके कपड़े उतारने लगा और खुद के भी उतार दिए अब हम दोनो एक दूसरे के जिस्मो अपनी आँखो से तोल रहे थे मैने एक रसगुल्ला उठाया और उसकी चाशनी प्रीतम के होंटोपे निचोड़ दी

तो वो बोली अरे ये क्या कर रहे हो तो मैने उसे खामोश रहने को कहा कि वो मुझे मेरी मर्ज़ी से उसे प्यार करने दे और उसके मीठे मीठे अधरो को चूमने लगा बहुत ही मनमोहक पल था वो चासनी हमारे मूह मे घुलने लगी थी

ना जाने कितनी देर हम ऐसे हुए एक-दूसरे को चूमते रहे उसकी सांसो को मैं अपने अंदर महसूस कर रहा था अब उसे लिटाया और उसकी 36 इंची चूचियों पे भी थोड़ा रस बिखेर दिया

और उसके निप्पल को चूसने लगा प्रीतम के निप्पल बहुत ही सेन्सिटिव थे और जैसे ही मैं उन्हे चूस्ता तो वो झट से गरम हो जाती थी धीरे धीर मैं उसके पूरे शरीर को चाटने चूमने लगा वो पड़ी पड़ी बस आहें भर रही थी

अब मैं उसकी चूत की ओर बढ़ने लगा और अपनी जीभ उसकी चूत के बालो पे फेरने लगा उसने अपनी जांघे थोड़ा उपर की ऑर फैला ली कमरे मे बस हमारी गहरी साँसे ही गूँज रही थी जीभ अब उसके दाने पे घूमने लगी थी और उसके हाथ उसकी गोल गोल चुचियों को मसल रहे थे

मैने कुछ चाशनी चूत पे भी गिरा दी थी जिस से उसकी चूत का रस और मीठी चासनी मिक्स हो गये थे और खारा मीठा सा टेस्ट आ रहा था अब पूरी गहराई में जहाँ तक मैं जीब डाल सकता था प्रीतम की चूत मे डाल थी

और अंदर बाहर करने लगा वो तो सातवे आसमान मे पहुच गयी थी और उसकी टाँगे बुरी तरह से मेरे चेहरे पे कसी पड़ी थी उसकी चूत की गर्मी मेरे चेहर पे सॉफ पड़ रही थी तभी वो ज़ोर से चीख मारते हुए ढीली पड़ गयी मैं उसका सारा रस पी गया और वो हाँफने लगी

मैने फिर से उसके होटो पे एक लंबा चुंबन दिया और उसके चेरे पे अपना लंड रगड़ने लगा अब लंड उसके होंटो पे रगड़ खा रहा तो उसने अपना मूह खोला और सुपाडे को अपने मूह मे ले लिया और किसी कुलफी की तरह उसे चूसने लगी

चूस्ते चूस्ते उसने लंड को बाहर निकाल दिया तो मैने कहा क्या हुवा तो वो बोली सारा मज़ा क्या तू ही लेगा और बची हुवी चाशनी मेरे लंड और गोलियों पे गिरा दी मैं अब फरश पे खड़ा होके उसे लंड चूसा रहा था और वो नीचे बैठी हुवी थी मैने उसके सर को पकड़ लिया और हल्के हल्के धक्के से मारने लगा

तभी उसने अपनी चूत मे उंगली रगड़नी शुरू कर दी ये देख कर मुझे और भी जोश आ गया 5-7 मिनिट और चूसने के बाद मैने उसे घुटनो के बल झुकाया और चूत मे लंड को सरका दिया उसकी कमर को थामे मैं उसे चोद रहा था प्रीतम भी पूरा सहयोग कर रही थी

तभी मैं अपना एक हाथ उसकी कमर से हटाया और चूत पे रख दिया मेरी उंगली अब उसके दाने को टटोल ने लगी थी ऐसा करने से प्रीतम की उत्तेजना मे और भी इज़ाफा हो गया था वो बोली रे जालिम ये क्या कर दियाआआअ आआआआआआआआआआआआआअ आआआआआआआआ

आज तो मेरी जान ही निकाले गा क्या और बोली ऐसे चोद्ता रह मुझे जब तब मेरी जान ना निकले बस चोद्ता ही रह मुझे बस इसी तरह मेरी प्यास बुझाता रह रुक मत और हाँफने लगी मेरी भी साँस फूलने लगी थे पर मैं अभी झड़ना नही चाहता था

तो मैने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और उसे लिटा ते हुए अपने होंठ एक बार फिर उसकी गरमा गरम चूत पे रख दिए प्रीतम तो जैसे बावली हो गयी थी उसने काँपति आवाज़ मे कहा आक्टिंग मत कर और चोद मुझे ये सुन के मुझे हँसी आ गयी और मैने उसकी टाँगो को अड्जस्ट किया और उसे चोदने लगा

 


वो भी पूरे जोश मे थी कुल मिलाके कमरे मे एक तूफान आया हुवा था काफ़ी देर तक चुदाई चलती रही और फिर ऐसे ही हम काम सुख की ओर बढ़ गये पता नही कितनी देर मैं उसके उपर ही पड़ा रहा फिर उसने धक्का देते हुए कहा कि उठो और मैं साइड मे लेट गया दोपहर हो गयी थी

वो बोली मैं खाना बना लूँ तब तक तुम लेट जाओ तो मैने कहा पहले एक राउंड और मार लू तो वो हंसते हुए बोली कि खाना बनाने के बाद और कपड़े पहने और नीचे चली गयी मैने भी अपने को अड्जस्ट किय और उसके पीछे पीछे नीचे चल पड़ा

वो रसोई मे खाने की तैयारी कर रही थी मैं भी वही बैठ गया और उस से बाते करने लगा फिर हम ने खाना खाया इस सबमे लग भग एक घंटा तो लग ही गया होगा कुछ समय बाद हम फिर से बिस्तर पे पहुच चुके थे कपड़े नीचे फर्श पे पड़े हुए थे मैं लगा तार उसकी गान्ड के छेद को सहला रहा था तो वो बोली क्या इरादा है

तो मैं अपनी उंगली गान्ड मे डालने की कोशिश करता हुआ बोला मुझे ये चाहिए अभी तो वो बोली तुम कब से कुछ पूछ के लेने लगे जो अब पूछ रहे हे मैं खुश हो गया और उसको चूम लिया मैने उंगली पे थूक लगाया और गान्ड मे सरका दी प्रीतम की गान्ड तो अनिता भाभी से भी ज़्यादा टाइट थी खैर मोर्चा तो फ़तेह करना ही था

मैने प्रीतम को उल्टा लिटाया और ढेर सा थूक उसकी गान्ड पे लगा दिया और लंड को वहाँ पे रगड़ने लगा प्रीतम को मैने थोडा रिलॅक्स होने को कहा तो वो बोली जिसकी गान्ड मे लंड घुसने वाला हो वो रिलॅक्स कैसे हो सकता हैं तभी मैने लंड को अंदर डालने की कोशिश की पर वो फिसल रहा था मैं थोड़ा थूक और लगाया और थोड़ा ज़ोर लगाते हुए लंड को थोड़ा अंदर डाल ही दिया

जैसे ही लंड अंदर गया उसकी आँखो की आगे अंधेरा छा गया और वो बेहोशी के कगार पे पहुच गयी पर मैने लंड निकाला नही क्योंकि मुझे पता था कि अगर निकाल लिया तो फिर ये डालने नही देगी आँसू आ गये उसकी आँखो मे और वो ज़ोर से रोती हुए बोली ओहमेरी मा आज तो मर ही गयी

तुम अभी इसको बाहर निकाल लो पर मैने उसे थोड़ा सबर करने को कहा और उसे बातो मे उलझाने लगा कुछ देर बाद अब मैने लंड को अंदर सरकाने का सोचा और थोड़ा और अंदर डालने लगा अब वो भी थोड़ा सहज फील कर रही थी तो मुझे भी तसल्ली हुवी और ऐसे ही धीरे धीरे मैने पूरा लंड अंदर घुसा दिया अब मेरे अंडकोष उसके गद्देदार चुतडो पे टकरा रहे थे मुझसे रुका नही जा रहा था आधे लंड को बाहर की ओर खिचा और फिर से अंदर डाल दिया

अब उसकी गान्ड भी थोड़ा रेस्पॉन्स करने लगी थी मैने हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए प्रीतम अभी भी दर्दभरी सिसकारिया निकल रही थी धक्को की रफ़्तार भी अब बढ़ने लगी थी मैं प्रीतम के गालो को मस्ती से काट ते हुए गान्ड चोद रहा था दास-पंद्रह मिनिट तक ऐसे ही करने के बाद मैने अपने लंड को निकाला और उसके मांसल कुल्हो पे अपने वीर्य की धार छोड़ दी उस दिन प्रीतम को कुल तीन बार चोदा घड़ी देखी तो4 .30 हो गये थे प्रीतम बोली अब तुम जाओ घर वाले भी आने ही वाले होंगे और फिर एक किस के बाद मैं उसके घर से निकलकर अपने घर की ओर चल पड़ा

ज्यों ज्यों घर नज़दीक आ रहा था अब मेरी गान्ड फटने लगी थी कि अगर चाची ने रात वाली बात मम्मी को बता दी हो गी तो आज तो गया पर घर तो जाना ही पड़ता वो ही तो एक ठिकाना था दरवाजे पे ही मम्मी के दर्शन हो गये वो मुझे देखते ही गुस्से से बोली कहाँ मर गया था तू सुबह से कुछ अता-पता नही हैं यहाँ हम कितने परेशान है और ये साहिब आवारगार्दी करते घूम रहे थे आज आने दे तेरे पापा को अंदर गया तो चाची टीवी देख रही थी उन्होने मुझ पर एक भरपूर निगाह डाली और उठकर मेरे लिए खाना डालने लगी

 
मैं भी रसोई मे चला गया था मुझे प्लेट देते हुए बोली कहाँ गये थे सुबह से तो मैं कुछ नही बोला तो वो हल्के से डाँटते हुए बोली कि आज कल बहुत बड़ा हो गया है तू मैं चुप ही रहा तो वो बोली कल रात को क्या देख रहा था तो मैने गर्देन नीचे करली और कुछ नही बोला उन्होने फिर सवाल किया बोली आजकल तुम कुछ ज़्यादा ही उड़ रहे हो लगता हैं तुम्हारी शिकायत दीदी से करनी पड़ेगी तो मैं उनके पाँवो मे गिर गया और माफी माँगने आगा तो वो बोली जा अभी खाना खा ले बाद मे बात करेंगे अब कैसा खाना खाना था

पर फिर भी खा ही लिया थोड़ा बहुत तभी चाचा भी आ गये मैं टीवी देखने लग गया रात घिर आई थी मैं तो रोज छत पे ही सोता था दिनभर जो चुदाई की थी तो थकान से जल्दी ही सो गया अगले दिन जब मैं नहा रहा था तो देखा कि आज वहाँ एक सुंदर सी ऑरेंज कलर की पेंटी रखी थी अब तो मेरी आदत ही बन गयी थी चाव्ही की पेंटी मे मूठ मारने की की एक बार फिर मैने वैसे ही दोहराया और फिर नहा के बाहर आ गया मम्मी खेत पे जाने की तैयारी कर रही थी तभी चाची बोली दीदी क्यों ना आज मैं खेत मे चली जाउ

इधर घर ही घर में रहते हुए थोड़ा बोर सा हो गयी हू तो मम्मी ने हाँ करदी और मुझे बुला के कहा कि चाची के साथ खेतो पे चले जाओ और उनकी मदद करना मैं थोड़ा खुश सा हो गया एक घंटे बाद हम खेतों की ओर चल पड़े खेत कोई एक-डेढ़ किलोमीटर दूर पड़ ते थे हम पैदल ही जा रहे थे चाची ने आज हल्केहरे रंग की साड़ी और वाइट ब्लाउज डाला हुवा था जिसमे उनकी खूबसूरती और भी बढ़ गयी थी धूप तेज होने के कारण उनको पसीना आने लगा था तो मैने रुमाल उनको देते हुए कहा चाची पसीना पोंछ लो

तो वो बोली तुझे आजकल मेरी बहुत पड़ी है बड़ा ध्यान रखने लगा हैं मेरा तो मैं बोला यह तो मेरा फर्ज़ है तो वो चुटकी लेते हुवे बोली कि हां तभी तो आज कल मेरी कछियो पे बड़ा फ़र्ज़ निभा रहे हो और मेरी ओर देखने लगी मैने कुछ नही कहा तो बोली अब बड़ा शर्मा रहा हैं जब ये कांड करते हो जब शरम नही आती तो मेरे मूह से निकल गया कि चाची आप हो ही इतनी मस्त रुका ही नही जाता ये सुनके उनके गाल लाल हो गये और मुझे हल्की सी चपत लगाते हुए बोली शरम नही आती अपनी चाची पे लाइन मारते हुए और जोरो से हँसने लगी

तो मैं भी मुस्कुरा दिया अब मेरा डर पूरी तरह से दूर हो गया था मैने विचार किया कि शायद वो भी रूचि ले रही है और ऐसे ही बाते करतहुए हम खीतो मे पहुच गये मैं तो सीधा ही पानी की होदि मे कूद गया और नहाने लगा चाची वही पड़ी चारपाई पे बैठ गयी और मुझे देखने लगी मैं नहाते हुए बोला क्या देख रही हो तो वो कुछ नही बोली और उठ के होदि के पास आ गयी और अपना मूह धोने लगी तो मैने कहा कि अगर इच्छा है तो नहा ही लो तो वो बोली कपड़े नही है और उपर से तुम भी तो हो जो वैसे ही इतनी तान्क झाँक करते रहते हो तो ना चाहते हुए भी मेरे होंटो पे एक शरारती स्माइल आ गयी .

 


नहा के मैने वापिस कपड़े पेहन लिए और बोला कि चलो चाची अब थोड़ा काम कर लेते है और खेतो की उस तरफ चल पड़े जहा कुछ घास उगी हुई थी हम घास काट रहे थे तो चाची जल्दी ही थक गयी क्यों कि वो ऐसे भारी काम थोड़ा कम ही करती थी तो मैं भाग के एक डब्बे मे उनकेलिए पानी लाया और उन्हे दिया जब वो पानी पी रही तो थोड़ा पानी उनके ब्लाउज पे भी गिर गया जिस से अंदर ब्रा दिखने लगी वैसे भी उनके उभार हमेशा ब्लाउज की क़ैद से बाहर आने को मचलते रहते थे मैने उन्हे बैठने को कहा और खुद घास काटने लगा फिर उसको पोटली मे बाँधा और चाची के सर पे रख दिया वो घास की पोटली उठाए मेरे आगे आगे मटकती हुई चल रही थी

मुझे लगा आज उनकी गान्ड कुछ ज़्यादा ही मटक रही थी फिर हम कुवे के पास बने कमरे पे पहुचे और उन्होने पोटली वहाँ रख दी आज कई काम करने थे मैने अब कस्सि उठाई और उग आई खरपतवार को काटने लगा दोपहर होने को आई थी और उपर से गर्मी का क़हर मैने काम को रोका और चाची की पास आके बैठ गया ऑर उन्हे देखने लगा वो भी थका थका महसूस करने लगी थी तो मैने कहा कि अगर वो चाहे तो थोड़ी देर चारपाई पे लेट जाए और चारपाई को कमरे के अंदर डाल दिया वो अब लेट गयी और मैं बाहर आके बचा काम खातम करने लगा पूरे काम मे एक घंटे से भी ज़्यादा लग गया था

जब मैं कमरे मे गया तो चाची अपनी आँख बंद करके लेटी हुई थी पर मेरे जाने से वो जाग गये और बोली अगर काम हो गया तो तुम भी थोड़ा आराम कर्लो मैं बोला मैं नीचे ही लेट जाता हू तो उन्होने कहा कि नही इधर मेरे पास ही चारपाई पे आ जाओ ये सुनके मुझे बड़ी ख़ुसी हुई मैं तो निक्कर बनियान मे ही लेट गया खाट दो लोगो के लिए थोड़ी छोटी थी पर अड्जस्ट तो करना ही था थोड़ी देर बाद मैने अपना हाथ उनके पेट पे रख दिया और उसे सहलाने लगा चाची की आँख बंद थी मैं धीरे धीरे उनके पेट को सहलाता रहा और फिर अपनी एक उंगली उनकी नाभि मे डाल दी और उस से छेड़खानी करने लगा

चाची की छातिया जोरो से उपर नीचे होने लगी थी माथे पे पसीना छलक आया था पर उन्होने आँखे नही खोली और ना ही मुझे रोका मेरा लंड निक्कर मे टॅंट बना ने लगा था अब मैने सोचा जो होगा देखलेंगे और अपना हाथ उनके ब्लाउज पे रख दिया और धीरे से उनकी चूची को दबा दिया उनके मुँह से आहा निकल गयी मुझे पता चल गया कि वो सोने का नाटक कर रही है मैं धीरे से उनके बोबो को दबाने लगा उनका बदन काँपने लगा था अब मेरी हिम्मत बहुत ही बढ़ गयी थी और मोका भी ठीक ही था

तो मैने उनके हाथ को अपनी लंड पे रख दिया उन्होने फॉरन हाथ हटा लिया मैं दुबारा से उनका हाथ अपने लंड पे रख दिया और इस बार अपने हाथ से थोड़ा दबाव भी डाल दिया अब मैं मस्ती से उनकी चूची भींच रहा था और तभी उन्होने अपने हाथ से मेरे लंड को हल्का सा दबा दिया हम दोनो का बुरा हाल था उत्तेजना से परंतु अभी कुछ शरम बाकी थी मैने अपने होंठ उनकी गर्देन पे रख दिए और हल्का सा चूम लिया वो कुछ ना बोली मैं पूरी मस्ती से उनकी गर्देन चूमने लगा

उनका हाथ धीमे धीमे मेरे लंड को निक्कर के उपर से ही सहलाने लगा था मैने अब अपने काँपते होंठ उनके गालो पे रख दिए और उनको चूमने लगा मैं उनके गालो पे लगे सारे . को चाटने लगा चाची मदहोश होने लगी थी उनके हाथ का दबाव मेरे लंड पे बढ़ने लगा था अब मैने उनके गालो को छोड़ा और काँपति हुई आवाज़ मे बोला चाची अब तो आँख खोल दो उन्होने अब आँखे खोली और बोली उफफफफफफ्फ़ ये तुम क्या कर रहे हो मैं चाची तुम्हारी हू रुक जाओ हमे ये नही करना चाहिए हालाँकि कोई विरोध नही था

तो मैं बोला मैं आपको बहुत पसंद करता हू प्लीज़ बस एक बार ऑर उनकी चूत को साड़ी के उपर से कस्के मसल दिया ये ही जो लम्हा था जब मैने उनके होंटो पे अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा और साथ साथ चूत को मसलता भी जा रहा था अचानक उन्होने मुझे धक्का दिया और बाहर की ओर भागी मैं समझ ना पाया कि उन्हे क्या हुआ पर फुर्ती दिखाते हुए उन्हे फिर से अपनी बाहों मे जाकड़ लिया पर वो छूटने के लिए ज़ोर लगा रही थी तो मैने पूछा कि क्या हुवा तो वो शरमाते हुए बोली कि उन्हे पेशाब आ रहा हैं

जाने दो प्लीज़ पर मैने भी शरारत करते हुए कहा कि चाची यही करदो ना तो वो बोली नही मुझे जाने दो वो लरजते हुए बोली जाने दो कहीं यही ना निकल जाए तभी मुझे कुछ सूझा और उनकी साड़ी उठा के अंदर घुस गया और कछि के उपर मूह लगाते हुए बोला कि चाची आप मेरे मूह मे पेशाब कर दो तो वो हैरनहो गयी मैने फॉरन उनकी चड्डी नीचे सरका दी और चूत को मूह में भर लिया और उनकी कमर को मजबूती से थाम लिया और चाची का कंट्रोल भी खो गया और पेशाब की मोटी धार मेरे मूह मे गिरने लगी

 


मेरा मूह किसी लॉक की तरह उनकी चूत पे कसा हुआ था पेशाब की आखरी बूँद तक मैने पी ली और अपने दाँत हल्के से गढ़ाते हुए चूत को चूम लिया और वापिस उन्हे चड्डी पहना दी और उनके बराबर मे खड़ा हो गया चाची मुझे गाली देते हुए बोली कमिने कुत्ते तो तो बहुत बड़ा खिलाड़ी निकला मैं तो तुझे बच्चा समझती थी मैने हँसते हुए कहा कि बहुत ही टेस्टी था तो वो शरमा गयी और अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया मैं कमरे का गेट बंद करने ही वाला था कि

तभी मेरी निगाह हमारी ओर आती हुई मम्मी पे पड़ी मैने कहा चाची मम्मी आ रही हैं उन्होने फॉरन अपने कपड़ो को ठीक किया और सलीके से चारपाई पे बैठ गयी और मैं बाहर पानी की होदि की तरफ चल पड़ा और हाथ मूह धोने का बहाना करने लगा मेरा तो साला खड़े लंड पे धोका हो गया था चाची खुद पके फल की तरह गोद मे गिरने को तैयार हो गयी थी पर पता नही मम्मी क्यों टपक पड़ी

अब कर भी क्या सकता था चान्स तो चला ही गया था मम्मी भी पहुच गयी थी और बोली कि तुम लोग दोपहर का खाना तो घर पे भूल आए थे तो मैं ले आई अब उन्हे कैसे बता ता कि उनके बेटे को किस चीज़ की भूक लगी थी, अब दबा के कहाँ या थोड़ी देर आराम किया फिर मम्मी बताने लगी कि कहाँ कहाँ से खरपतवार हटानी थी दिन ढलने तक उन्होने हमे खेतो मे जोता फिर हम घर की ओर चल पड़े चाची अब ओर भी प्यारी लगने लगी थी

मैं मायूस सा उनके साथ साथ चल रहा था एक तो चाची की मटकते चुतड और दूसरा मेरा लंड कुलबुला रहा था घर पहुचे फिर मैं टीवी की आगे बैठ गया पर मन नही लग रहा था तो मैं बाहर की ओर चला गया रास्ते मे मुझे प्रीतम का भाई मिला तो उसने बता या कि उसको आरपीएफ मे जॉब लग गयी है तो मैने उसे बधाई दी तो वो बोला चल यार तुझे मिठाई खिलाता हू और हम गाँव के अड्डे की तरफ चल पड़े वो बोला कि अगर मैं बुरा ना मानूं तो वो एक दो पॅक ड्रिंक करले तो मैने कहा अरे बिंदास होके करना अभी तो तू जॉब वाला हो गया और हम हँसने लगे और दारू के ठेके पे चल दिए

मैं पेप्सी पीने लगा और उसने साले ने पूरा हाफ ही टाँग दिया बिना पानी के और थोड़ी देर मे ही झूम ने लगा उसके कदम बहकने लगे अब साली नयी प्राब्लम हो गयी थी तो मैने फ़ैसला किया और उसको लादे लादे उसके घर पे गया छोड़ने के लिए तो देखा कि प्रीतम की मा आराम कर रही थी और प्रीतम रोटी बना रही थी मैने उसके भाई को खाट पे लिटाया और सुला दिया फिर उसकी मा के बारे मे पूछा तो उसने बताया की मा को बुखार सा हैं इसलिए वो आराम कर रही हैं पर हमारी बाते सुनके वो भी आ गयी और प्रीतम के भाई को देख के गुस्सा करने लगी और मुझे धन्यवाद दिया कि मैं उसको लेके आया तो मैने कहा कि कोई बात नही और वापिस होने के लिए मुड़ा

तो मैने सुना कि प्रीतम की मा कह रही थी कि ये कमीना तो नशे मे पड़ा हैं और मेरी तबीयत ठीक नही हैं अब तू ही जाके बाडे मे सो जइयो आजकल पशु चोर बहुत आते हैं और बॅट्री भी ले जाना और कोई दिक्कत हो तो पड़ोस वाली ताई को जगा लियो ये सुनके मेरा दिल खुराफाती हो गया और मुझे चूत का जुगाड़ दिखने लगा था दौड़ के घर गया और जल्दी से डिन्नर किया और फिर पापा को हुक्का भर के दिया और चापलूसी करते हुए बोला पापा आज कल पशु चोरो ने आतंक मचाया हुवा हैं रोज अख़बार मे आता हैं अगर आप कहे तो मैं प्लॉट मे सो जाया करू उन्होने हैरानी से मेरी ओर देखा ओर कहा तू कब से ज़िम्मेदार होने लगा

वैसे बात तो ठीक है पर तू एक काम करियो तेरे चाचा को भी साथ ले जइयो. ये ऑर मुसीबत हो गयी मैने चाचा को बताया कि आज उन्होने भी मेरे साथ जाना है प्लॉट मे और उधर ही सोना हैं तो वो बोले कि तू खुद तो उल्टे काम करता है और मुझे भी लप्पेट लिया तो मैने कहा कि आप मत जाओ बस पापा को पता ना चले मैं अकेला चला जाउन्गा तो वो बोले ये मेहरबानी किसलिए तो मैने कहा कल 100 रुपये दे देना तो वो हँसने लगे मैं नो बजे प्लॉट मे पहुच गया और अपना बिस्तर लगाया और लेट गया

 
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