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Guest
तो सुबह के उजाले तक फाइरिंग बिना रुके चलती ही रही कुछ मारे गये कुछ को हमने पकड़ लिया मिशन पूरा हो गया था फिर हम ने मकान की तलाशी लेनी शुरू की तो एक कमरे मे दबा कर रखा गया बड़ी मात्रा मे अमू मिला हमें ये एक बड़ी सफलता थी मैने तुरंत रेडियो पे अपने कमॅंडिंग ऑफीसर को सूचना दी और लोकेशन बताई शाम होते होते कुछ बड़े ऑफिसर्स आ पहुचे
फिर सीओ साहब ने कहा कि ऑफीसर तुम्हारी टीम ने पिछले कुछ दिनो मे अच्छा काम किया है पर अब मुझे लगता है कि तुम्हे रेस्ट करना चाहिए टीम अब यूनिट मे जाएगी और नये लोग तुम्हारी जगह ले लेंगे इस टाइम तुम्हे रिलीव किया जाता है मैने ऑर्डर बजाया और सल्यूट किया तीन दिन बाद मैं यूनिट मे था
यूनिट मे आने के बाद बस रेस्ट चल रही थी सुबह शाम बस वोलीबॉल्ल खेल कर ही टाइम पास हो रहा था कुछ छोटी-मोटी चोट लगी हुई थी तो वो भी ठीक हो रही थी ले देकर बस ज़िंदगी कट रही थी अपनी ही तरह से अब इधर ऐसे ही था सब कुछ एक शाम में कोर्ट मे प्रेक्टिस कर रहा था कि एक अरदली आया और बताया कि साहब आपको अभी सीओ साहिब ने बुलवाया है
मैने कहा ठीक है आता हूँ , हाथ मूह धोए वापिस आया ड्रेस पहनी और पहुच गये सलामी देने साहब को उन्होने कहा ऑफीसर ये लेटर तुम्हारे लिए देल्ही से आया है मिनिस्ट्री की तरफ से खोल कर देख लो मैने सोचा अब मिनिस्ट्री को मुझसे क्या काम खैर, लेटर खोला और पढ़ने लगा मुझे तो समझ ही नही आया कि मेरी रेकमेंडेशन
पर कैसे , मैने कहा सर ये कब कैसे तो वो बोले ऑफीसर पिछले कुछ महीनो मे हर टास्क को उम्मीद से बढ़कर तुमने पूरा किया है तो फिर मिनिस्ट्री की नज़रों मे तो आना ही था अब फ़ैसला तुम्हारा है यस या नो , मैने कहा पर सर यूनिट छोड़कर कैसे? सीओ साहिब बोले देखो बात ये है कि इस जॉब के लिए लाखो सोल्जर्स मे से बस कुछ किस्मत वालो को ही सेलेक्ट किया जाता है
और तुम्हे तो खुश होना चाहिए कि तुम्हे तो खुद बुलाया गया है और फिर वैसे भी आजकल तो तुम यूनिट के बेस्ट कमॅंडोस मे से ही हो यूनिट के हीरो हो , मैने कहा सर मैं तो अपना काम ही करता हूँ बस तो वो बोले तो फिर ठीक है ना वहाँ जाकर भी तो बस तुम्हे अपना काम ही करना है नेशन को सर्व यहाँ भी करते हो उधर भी जाकर यही काम करना है बस उधर ये ड्रेस नही होगी तुम्हारे पास
पर तुम्हे मिलेगा भी बहुत कुछ सर बोले कल मॉर्निंग मे मुझे तुम्हारा जवाब चाहिए ताकि मैं कुछ फॉरमॅलिटीस कर सकूँ मैने कहा जी सर फिर सल्यूट बजा कर वहाँ से निकल आया लेटर मेरी जेब मे था आप सोच रहे होंगे कि उस लेटर मे क्या था चलो बता ही देता हू , आक्च्युयली वो लेटर इंडियन इंटेलिजेन्स की तरफ से था उन्होने डिमॅंड की थी कि उनको मैं चाहिए था डेप्युटेशन पे
मैं सोचने लगा कि पता नही कितने लोगो को ये गोल्डन ऑपर्चुनिटी मिलती है और फिर घूमने-फिरने को भी मिलेगा और थोड़े दिन फोज की ज़िंदगी से भी रिलॅक्स मिल जाएगा तो मैने फ़ैसला ले लिया और अगली सुबह को साहिब को बता दिया कि मैं डेप्युटेशन पर जाने को तैयार हूँ तो बस फिर कुछ अफीशियल पेपर वर्क करने के बाद मैं चल पड़ा देल्ही की ओर
देल्ही आया एक दिन दोस्त के घर पर आराम किया और अगले दिन पहुच गया पीएमओ ज़िंदगी मे पहली बार आज मैने दर्शन किए थे वारना कहाँ मोका मिला करता है वहाँ पर एक खास व्यक्ति से मिला और फिर कोई घंटे भर बाद मैं एजेन्सी के ऑफीस मे था जो उसी बिल्डिंग मे किसी फ्लोर पर था पहला दिन तो बस यू ही गुजर गया शाम होते होते मुझे मेरे सर्विस क्वॉर्टर की चाबी भी मिल गयी
एक नये घर मे था मैं तो अजीब अजीब सा लग रहा था अब मिलिटरी बॅकग्राउंड का था तो एजंसी के काम काज को समझने मे कुछ ज़्यादा टाइम नही लगा और कुछ दिन यूँ ही गुजर गये फिलहाल तो बस डेस्क-जॉब ही चल रही थी सुबह जाता रात को आते आते आधी रात हो जाती थी बस फिर पड़ते ही सो जाना ज़िंदगी बस जी रहा था मैं किसी तरह से
दिन गुजर रहे थे इधर आए हुए भी दो महीने से ज़्यादा हो गये थे दीवाली भी चली गयी थी ठंड का मोसम आ गया था तो मैने एक दिन अपने बॉस को कहा कि सर मैं कुछ दिन के लिए घर जाना चाहता हूँ तो वो बोले ठीक है कुछ दिनो के लिए चले जाओ और 1 महीने की छुट्टी का जुगाड़ हो गया मैने सोचा कि सबसे पहले मिता के दर्शन ही करता हू
आज रात मैने संदूक से फोन निकाला ऑन किया तो साला चला ही नही रात को ही नया फोन खरीदा नंबर मिलाने ही वाला था कि फिर सोचा कि उसको सर्प्राइज़ देना चाहिए और फिर रात को ही मैने अजमेर की ट्रेन पकड़ ली तो अब बस मिता का दीदार ही करना था स्टेशन पर उतरते ही ऑटो वाले का कहा कि भाई जल्दी से मोड़ दे इसको गवरमेंट. हॉस्पिटल की तरफ ……………
उसके सहर मे आ गया था अब रांझे को बस हीर से मिलना ही था तो हॉस्पिटल पहुच कर पता किया तो पता चला कि मेडम आजकल सर्जिकल वॉर्ड मे है तो किसी से पूछ कर उधर ही हो लिए मिता किसी को इंजेक्षन लगा रही थी उसकी पीठ मेरी ओर थी तो मैने कहा जी क्या हमें भी दवाई मिलेगी बड़े परेशान है हम भी
उसने कहा अभी आती हू और जैसे ही पलटी मुझे देखकर उसको तो कुछ समझ ही नही आया मैने कहा रे पगली मैं ही हूँ वो चल कर मेरे पास आई और एमोशनल होते हुए बोली बड़ी देर लगा दी मेहर्बा आते आते आपके इंतज़ार मे मे तो आधी ही हो गयी मैने कहा यार आ तो गया हू ना किसी ना किसी तरह से
वो बोली तू बैठ मैं आती हू थोड़ी देर मे तो मैं उसका वेट करने लगा आधे घंटे बाद वो आई और बोली आजा घर चलते है मैने कहा ड्यूटी नही करेगी वो हँसते हुए बोली छुट्टी लिख दी है चल आजा फिर हम उसके घर पर आ गये मिता बोली क्या पीओगे चाइ- या कॉफी मैने कहा कुछ नही तुम बस ज़रा देर मेरी आँखो के सामने रहो मैं दीदार करना चाहता हू अपनी दिलरुबा का
वो मुझे चिढ़ाते हुवे बोली कि दिलरुबा ……………………. अपनी समझते तो फोन ना करते जब देखो वो डिब्बा बंद ही पड़ा रहता है मैने कहा डार्लिंग अभी इन फ़िज़ूल बातों का जिकर ना कर और ज़रा मुझे ठीक से देखने दे अपनी प्यारी मिता को कितने दिन हो गये ज़रा आँखो की प्यास बुझने दे…