मैने एक पत्थर उठा कर के फिर से उनकी ओर फेंका, पत्थर उनके ठीक पास में गिरा, फ़ौरन धन्नु की नज़र मेरी ओर हुई, मैने इशारे से अपने पीछे-2 आने को कहा और आगे बढ़ गया उस गेन्डे का पीछा करते हुए......!!
चलते-चलते वो एक पहाड़ी के पीछे मूड गया, मे उससे कोई 100 कदम पीछे ही था, मे भी उसके पीछे जैसे ही मुड़ा, सामने मुझे दो बंदूक धारी खड़े दिखे मे फ़ौरन आड़ में हो गया.
वो गेंडा उनसे कुछ देर खड़ा बात करता रहा फिर आगे बढ़ गया. मे अब और आगे नही जा सकता था, मैने अपने पीछे आरहे धनंजय और रिसभ को रुकने का इशारा किया और मे भी उनके पास लौट गया.
मैने उन्हें पूरी बात बताई, उनकी तो हवा ही निकल गयी..! अभी हमारे पास ज़्यादा बातों का वक़्त नही था, हम फ़ौरन उस पहाड़ी पर चढ़ने लगे जिसके पीछे से वो गेंडा गया था.
जैसे ही हम उसके शिखर पर पहुँचे..! सीन देखते ही फ़ौरन हम पत्तरीली पहाड़ी पर लेट गये..!
वो जगह चारो ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ एक दर्रा जैसा था, जहाँ एक छोटा सा मैदान जैसा बना हुआ था. लगभग 20 आदमी हथियारों से लेस इधर-उधर छोटी-2 चट्टानों पर बैठे थे.
ज़्यादा क्लियर करने के लिए यहाँ शोले के गब्बर का अड्डा याद कर लीजिए, ऐसा ही कुछ-2 था ये भी.
हम जिस पहाड़ी पर थे उसके ठीक नीचे एक चौकोर सी समतल चट्टान पर एक भारी भरकम शरीर वाला व्यक्ति बैठा था, उसकी पीठ हमारी ओर थी तो उसका चेहरा नही देख पा रहे थे.
वो गेन्डे जैसा व्यक्ति उसके सामने खड़ा था और उसे कुछ बता रहा था, उसके हाव भाव से ही लग रहा था कि वो बैठा हुआ आदमी ही गोंदिया होगा.
उनकी बातें तो हमें सुनाई नही दी, तो अब यहाँ रुकने का कोई मतलब भी नही था.. सो हम लौट लिए मेले की तरफ.
मेले में आते-2 दिन छिप गया था, अंधेरा फैलने लगा था, दुकानदारों ने अपने-2 गॅस केरोसिन के हांडे जला रखे थे लाइट के लिए.
जगेश और टीम हमारा ही इंतजार कर रही थी. उन्हें साथ लेकर घर लौट लिए.
घर पहुँच कर हमने एकांत में ऋषभ के पिता को ये सब बातें बताई तो वो हड़बड़ा गये, उनसे तो कुछ बोलते ही नही बन पा रहा था.
जब मैने उनसे सरपंच के बारे में पुछा तो वो बोले- हां ये सही विचार है, उनसे ही बात करते हैं, और हमें लेकर सरपंच के घर पहुँचे.
जगेश भी अब अपनी मेले की मस्ती से बाहर आकर सीरियस्ली हमारे साथ हो लिया था.
मे- सरपंचजी ये गोंदिया कॉन है..?
सरपंच - क्या..???? तुम क्यों पुच्छ रहे हो उसके बारे में..? वो तो एक ख़तरनाक डाकू है. लेकिन तुम लोग… हुआ क्या है..? उसके बारे में क्यों पुच्छ रहे हो..?
मे- आपकी उसके साथ कोई दुश्मनी है..?
सरपंच- कुछ समय पहले उसका गिरोह यहाँ सक्रिय था, बहुत लूट-पाट मचाता था वो, पोलीस थाना भी यहाँ से काफ़ी दूर है तो पोलीस के यहाँ तक पहुँचने तक वो लूट-पाट करके भाग जाता था.
एक बार हम सभी गाँव वालों ने फ़ैसला किया कि अब जो करना है वो हमें ही करना है, एक बार हम सबने मिलकर उसका जो भी साधन उपलब्ध हुए उसी के सहारे हमने उसका विरोध किया, जिसमें 4-5 गाँव वाले भी मारे गये लेकिन चूँकि हम गाँव वालों की संख्या बहुत ज़्यादा थी, और सब एक साथ उन पर टूट पड़े, हमारे एक साथ हमले से हमने उसके भी 10-12 लोगों को मार डाला और उसको खदेड़ दिया, गोदिया मुश्किल से अपनी जान बचा कर भाग गया, तब से फिर उसकी हिम्मत नही हुई हमारे गाँव में घुसने की.
मे- अब वो उसी बात की खुन्दस निकालने के लिए एक बहुत बड़े हमले की योजना बना चुका है, और अगर ये सफल हो जाती है तो कम-से-कम 150-200 लोगों की जाने जा सकती हैं. उसके बाद हमने उन्हें सारी बातें डीटेल में बता दी.
सुनकर सरपंच सकते में आ गये..! उनके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी. वो समझ नही पा रहे थे कि इस समस्या से कैसे निपटा जाए. कुछ सोच कर वो बोले.
सरपंच- हमें लगता है, ये मेला अब कल ही ख़तम कर देना चाहिए, हम जानते-बुझते इतने लोगों को ख़तरे में नही डाल सकते, सुबह होते ही मेला ख़तम होने का एलान करवा देता हूँ.
मे- ऐसा करके आप लोगों की धार्मिक भावनाओं को ढेस पहुँचाएगे, और लोगों का भविष्य में भी आपसे विस्वास उठ जाएगा.
सरपंच- तो तुम्ही बताओ क्या इतनी जानो को बचाने का और कोई रास्ता है इसके अलावा..?
मे- बिल्कुल है.. !! और ऐसा रास्ता है कि गोंदिया का हमेशा के लिए ख़तरा मिट जाएगा इस इलाक़े से. सब मेरे मुँह की ओर देखने लगे…
सरपंच- कुछ देर मेरी ओर देखते रहे फिर जब नही रहा गया तो बोले- क्या रास्ता है तुम्हारे पास..?
मे- वो मे आपको बाद में बताउन्गा, पहले आप पोलीस थाने चलिए..!
हम सभी सरपंच को लेके पोलीस स्टेशन पहुँचे जो करीब गाँव से 10-12 किमी दूर एक कस्बे में था.
सारी बातें डीटेल में बताने के बाद मैने वहाँ के इंचार्ज से कहा.
मे- इनस्पेक्टर साब, हम चार लोग ये सुनिश्चित करेंगे कि उसके आदमी रात को वहाँ बारूद ना बिच्छाने पायें, यही नही वो जिंदा वापस गोंदिया से ना मिल सकें.
इंस्पेक्टर- वो कितने लोग होंगे जो बारूद बिच्छाने का काम करेंगे..?
मे- यही कोई 5-6 लोग ही ये काम करेंगे..!
इंस्पेक्टर- उन्हें मेरे आदमी कवर करेंगे, मे किसी आम नागरिक की जान जोखिम में नही डाल सकता..
मे- उससे वो सावधान हो सकते हैं..! और हमारी आप चिंता ना करो.. हमने इससे भी बड़े-2 कामों को अंज़ाम दिया है..
फिर हमने उसे हकीम लुक्का के ख़ात्मे वाला वाक़या बताया, वो बहुत देर तक हमें प्रशंसा भरी निगाहों से देखता रहा, अब उसे हमारे उपर विस्वास हो चुका था.
इंस्पेक्टर- फिर.. पोलीस का क्या रोल रहेगा..?
मे- कल की पूरी रात आपके कुछ आदमी गोदिया गॅंग की निगरानी करेंगे, उसके हर मूव्मेंट की जानकारी आप तक पहुँचाएंगे, सुबह होने से पहले ही कोई 4 बजे आपकी पोलीस फोर्स उसके अड्डे को चारों ओर से घेर लेगी वो भी कुछ दूर रह कर.
आशंका इस बात की भी हो सकती है कि गोंदिया अपना गॅंग नदी के दूसरे किनारे पर भी ले जाए, उसके आदमियों द्वारा की गयी तैयारियों में कोई गड़बड़ी होने की सूरत में वो स्नान करने वालों पर सीधे अटॅक भी कर सकता है.
उस सूरत में आपकी पोलीस उन्हें पीछे से घेर लेगी, आगे नदी होगी पीछे पोलीस वो फँस जाएँगे.
अगर वो नदी के किनारे तक नही आता है, उस सूरत में जैसे ही हम सुनिश्चित करेंगे कि हमने उसका प्लान फैल कर दिया है, हम चारों उसके अड्डे पर पहुँच जाएँगे और इशारा कर देंगे उसपर एक साथ चारों ओर से अटॅक करने का.
अचानक हुए हमले को वो झेल नही पाएँगे और जल्दी हम उनपर काबू पा लेंगे.