S
StoryPublisher
Guest
आए लौन्डे ज़ुबान संभाल के बात कर, वरना में तेरा वो हाल करूँगा – वो हाल करूँगा..कि… तडाक….!!
अभी बात पूरी भी नही कर पाया वो मरियल के जगेश ने उसके कान पर एक और बजा दिया.
अपने मुँह पे ताला लगा हरामी वरना, यही टेन्टुअ दबा दूँगा साले, एक मिनट में खेल ख़तम कर दूँगा… तू हमें नही जानता.. मैने तैश में आकर कहा..,
तभी वो इनस्पेक्टर उठ खड़ा हुआ और इससे पहले की वो कुछ कहता या करता,
मे बोला- आए इनस्पेक्टर होश में आ, ऐसा ना हो कि तुझे भी लेने के देने पड़ जाएँ, ला फोन दे इधर, और फोन अपनी तरफ करके एसपी का नंबर लगा दिया..
दूसरी तरफ बेल जा रही थी, तभी इनस्पेक्टर बोला.. करले-2 फोन बुला ले तेरा जो भी कोई बाप हो उसे.. मे भी देखता हूँ तू क्या कर पाता है..
थोड़ी देर में एसपी ने फोन पिक कर लिया और हेलो बोलके पुछा- एसपी सिन्हा हियर, कॉन बोल रहे हैं.
मे- सर मे अरुण मेसी कॉलेज से…!
एसपी- ओह अरुण बोलो कैसे फोन किया.. सब ठीक तो है..?
मे- सर कुछ भी ठीक नही है, वरना मे आपको कष्ट ही क्यों देता..?
एसपी- अब क्या प्राब्लम हो गयी भाई.. ?
मैने उन्हें पूरी बात बताई तो उन्होने पुछा कॉन सा इनस्पेक्टर है, ज़रा फोन तो देना उसे..!
मैने फोन उस इनस्पेक्टर को दे दिया..
इंस्पेक्टर- हेलो ! हां ! में इनस्पेक्टर यादव बोल रहा हूँ, क्या तकलीफ़ है तुम्हें..?
एसपी- तकलीफ़ तो तुझे हो सकती है यादव, लगता अब तेरी वर्दी ही उतरवानी पड़ेगी, तेरी अकड़ अभी गयी नही..?
इंस्पेक्टर- हकलाते हुए… स.स.सस्स. जय हिंद सर.. सॉरी सर.. मुझे पता नही था, आप हैं फोन पर..!
एसपी- वो सब छोड़, ये क्या किस्सा है…? क्यों हर किसी से बदतमीज़ी से पेश आते हो, देखो तुम फिर कोई मुसीबत में पडो उससे पहले अरुण जैसे कहे वैसा करो, वरना इस बार तुम्हारी नौकरी भी नही बचेगी सोच लो.
इंस्पेक्टर- लेकिन सर दूसरी तरफ एमएलए साब के लड़के का मामला है, अब बताइए मे क्या करूँ..?
एसपी- अच्छा ? तुम अरुण को फोन दो एक मिनट. उसने मुझे फोन दिया.., एसपी आगे बोले- देखो अरुण हमारी भी मजबूरी समझो, लोकल लीडर को भी हमें तबज्जो देनी पड़ती है, तो जो आसानी से हल निकल सके वो निकाल लो प्लीज़..!
मे- ये आप क्या कह रहे हैं एसपी साब, उसको अभी छोड़ दिया तो वो फिरसे गुंडा गर्दि करेगा, इसने ज़बरदस्ती चार लड़कियों को उठवाया है.. ये कोई मामूली घटना नही है… अगर पोलीस ने कुछ नही किया तो जानते हैं क्या होगा..?
मेसी कॉलेज तो मेरे साथ है ही, इन लड़कियों का कॉलेज भी सड़क पे उतर आएगा और देखते-2 शहर के सभी स्कूल, कॉलेजस सड़कों पे होंगे, फिर एमएलए तो क्या, आपको और कमिशनर साब को भी जबाब देना भारी पड़ेगा.
आँखों देखे मे तो मक्खी नही निगल सकता, शहर में खुले आम गुंडागर्दी नही होने दूँगा मे..! चाहे इससे मेरा मशबिरा समझिए, या धमकी.
और आपको भी पता है, मे कोरी धमकी नही देता..! अब आप सोचिए क्या करना है..!
एसपी- ठीक है उस इनस्पेक्टर को फोन दो..! मैने फोन उसे पकड़ा दिया..
एसपी- यादव ! मामला इतना सीधा नही है, अरुण जो कहता है वो करो, एक एमएलए के लौन्डे को बचाने के लिए हम पूरे शहर की शांति को भंग नही कर सकते..! और जो वो कह रहा है, अगर ऐसी नौबत आ गयी, तो ये एमएलए भी रातों रात अपनी कुर्सी नही बचा पाएगा, फिर कॉन बचाएगा तुम्हें.
इंस्पेक्टर- ठीक है सर… जय हिंद सर…..!
आए हवलदार ! इन गुण्डों को हवालात में डालो जल्दी, क्या साला मुशिबत है, नेता की मानो तो पब्लिक भड़कती है, और पब्लिक की सुनो तो साले नेता हमारी बजाते हैं.
अभी बात पूरी भी नही कर पाया वो मरियल के जगेश ने उसके कान पर एक और बजा दिया.
अपने मुँह पे ताला लगा हरामी वरना, यही टेन्टुअ दबा दूँगा साले, एक मिनट में खेल ख़तम कर दूँगा… तू हमें नही जानता.. मैने तैश में आकर कहा..,
तभी वो इनस्पेक्टर उठ खड़ा हुआ और इससे पहले की वो कुछ कहता या करता,
मे बोला- आए इनस्पेक्टर होश में आ, ऐसा ना हो कि तुझे भी लेने के देने पड़ जाएँ, ला फोन दे इधर, और फोन अपनी तरफ करके एसपी का नंबर लगा दिया..
दूसरी तरफ बेल जा रही थी, तभी इनस्पेक्टर बोला.. करले-2 फोन बुला ले तेरा जो भी कोई बाप हो उसे.. मे भी देखता हूँ तू क्या कर पाता है..
थोड़ी देर में एसपी ने फोन पिक कर लिया और हेलो बोलके पुछा- एसपी सिन्हा हियर, कॉन बोल रहे हैं.
मे- सर मे अरुण मेसी कॉलेज से…!
एसपी- ओह अरुण बोलो कैसे फोन किया.. सब ठीक तो है..?
मे- सर कुछ भी ठीक नही है, वरना मे आपको कष्ट ही क्यों देता..?
एसपी- अब क्या प्राब्लम हो गयी भाई.. ?
मैने उन्हें पूरी बात बताई तो उन्होने पुछा कॉन सा इनस्पेक्टर है, ज़रा फोन तो देना उसे..!
मैने फोन उस इनस्पेक्टर को दे दिया..
इंस्पेक्टर- हेलो ! हां ! में इनस्पेक्टर यादव बोल रहा हूँ, क्या तकलीफ़ है तुम्हें..?
एसपी- तकलीफ़ तो तुझे हो सकती है यादव, लगता अब तेरी वर्दी ही उतरवानी पड़ेगी, तेरी अकड़ अभी गयी नही..?
इंस्पेक्टर- हकलाते हुए… स.स.सस्स. जय हिंद सर.. सॉरी सर.. मुझे पता नही था, आप हैं फोन पर..!
एसपी- वो सब छोड़, ये क्या किस्सा है…? क्यों हर किसी से बदतमीज़ी से पेश आते हो, देखो तुम फिर कोई मुसीबत में पडो उससे पहले अरुण जैसे कहे वैसा करो, वरना इस बार तुम्हारी नौकरी भी नही बचेगी सोच लो.
इंस्पेक्टर- लेकिन सर दूसरी तरफ एमएलए साब के लड़के का मामला है, अब बताइए मे क्या करूँ..?
एसपी- अच्छा ? तुम अरुण को फोन दो एक मिनट. उसने मुझे फोन दिया.., एसपी आगे बोले- देखो अरुण हमारी भी मजबूरी समझो, लोकल लीडर को भी हमें तबज्जो देनी पड़ती है, तो जो आसानी से हल निकल सके वो निकाल लो प्लीज़..!
मे- ये आप क्या कह रहे हैं एसपी साब, उसको अभी छोड़ दिया तो वो फिरसे गुंडा गर्दि करेगा, इसने ज़बरदस्ती चार लड़कियों को उठवाया है.. ये कोई मामूली घटना नही है… अगर पोलीस ने कुछ नही किया तो जानते हैं क्या होगा..?
मेसी कॉलेज तो मेरे साथ है ही, इन लड़कियों का कॉलेज भी सड़क पे उतर आएगा और देखते-2 शहर के सभी स्कूल, कॉलेजस सड़कों पे होंगे, फिर एमएलए तो क्या, आपको और कमिशनर साब को भी जबाब देना भारी पड़ेगा.
आँखों देखे मे तो मक्खी नही निगल सकता, शहर में खुले आम गुंडागर्दी नही होने दूँगा मे..! चाहे इससे मेरा मशबिरा समझिए, या धमकी.
और आपको भी पता है, मे कोरी धमकी नही देता..! अब आप सोचिए क्या करना है..!
एसपी- ठीक है उस इनस्पेक्टर को फोन दो..! मैने फोन उसे पकड़ा दिया..
एसपी- यादव ! मामला इतना सीधा नही है, अरुण जो कहता है वो करो, एक एमएलए के लौन्डे को बचाने के लिए हम पूरे शहर की शांति को भंग नही कर सकते..! और जो वो कह रहा है, अगर ऐसी नौबत आ गयी, तो ये एमएलए भी रातों रात अपनी कुर्सी नही बचा पाएगा, फिर कॉन बचाएगा तुम्हें.
इंस्पेक्टर- ठीक है सर… जय हिंद सर…..!
आए हवलदार ! इन गुण्डों को हवालात में डालो जल्दी, क्या साला मुशिबत है, नेता की मानो तो पब्लिक भड़कती है, और पब्लिक की सुनो तो साले नेता हमारी बजाते हैं.