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Guest
“चलो नहा लेते हैं,” उन्होने कहा और मुझे अपनी मज़बूत बाहों मे उठा कर बाथरूम मे आ गये. बाथरूम मे बहुत बड़ा बाथ टब था. उन्होने मुझे नीचे उतारा और बाथ टब का नाल खोल दिया. बाथ टब मे हल्का हल्का गरम पानी भरने लगा. उन्होने पानी की गर्माहट को चेक किया और मुझे उठा कर बाथ टब मे बैठा दिया. मेरे पीछे वो भी बाथ टब मे आ गये. बाथ टब काफ़ी बड़ा था इसलिए हम दोनो उसमे आराम से बैठ गये. वो पीछे सहारा ले कर बैठे और मैं उनकी छाती का सहारा ले कर उनके आगे बैठी थी. वो बाथ टब का पानी अपनी हथेलियों मे ले कर मेरे सिर पर डालने लगे तो मुझे बहुत अच्छा लगा. उन्होने मेरे सिर के बाल गीले करने के बाद अपनी हथेली मे शॅमपू ले कर मेरे सिर के बालों मे लगाया और मेरे सिर के बाल धोने लगे. फिर उन्होने मेरे बदन पर साबुन लगाया और मुझे बड़े प्यार से नहलाने लगे. मेरे बदन पर साबुन लगाते लगाते उन्होने मेरी चुचियों पर भी साबुन लगा कर उन्हे मसला. फिर उनका हाथ मेरे पेट से होता हुआ नीचे मेरी चूत तक पहुँचा. उन्होने अपनी उंगली मेरी चूत मे डाल कर मेरी चूत सॉफ की तो मैं आनंद से भर गई. उन्होने अपने अंगूठे से मेरी चूत के दाने को दबाया तो मेरे दिल मे फिर से चुदाई का तूफान उठने लगा.
मैने उनका हाथ हटाया और बाथ टब मे खड़ी हो गई. मेरी गंद उनके चेहरे के सामने थी. उन्होने फिर से साबुन ले कर मेरी टाँगों पर, मेरी गंद पर लगाया. जब मैं उनकी तरफ घूमी तो तो उन्होने मेरे घुटने पकड़ कर अपनी तरफ खींचा तो मेरी चूत उनके मूह से सॅट गई. तुरंत ही मैने उनकी नशीली जीभ को मेरी मस्तानी चूत के अंदर महसूस किया. वो मेरी चूत मे अपनी जीभ डाल कर घुमाते गये और मैं गरम होती चली गई. पानी से गीली मेरी चूत अब मेरे खुद के चूत रस से भी गीली हो गई.
जब मुझ से नही रहा गया तो मैं नीचे बैठ गई और अपने पैरों से उनकी कमर पकड़ ली. इस तरह हम आमने सामने बैठे हुए थे. मैं उनके लंबे किए पैरों पर अपनी गंद टिका कर बैठ गई. उनका तना हुआ लॉडा मेरी चूत का दरवाजा खत खटाने लगा. उन्होने अपने लंड को पकड़ कर मेरी चूत के निशाने पर लगाया और एक ज़ोर का झटका मारा तो उनके लंड के आगे का हिस्सा मेरी चूत मे घुस गया. धक्के लगा कर उन्होने अपने पूरे लंड को मेरी चूत मे घुसा दिया और मेरी चुदाई शुरू हो गई. पानी के अंदर मैं चुद्वा रही थी और बाथ टब का पानी उनके लगाए धक्कों की वजह से ज़ोर ज़ोर से हिल कर बाथ टब से बाहर आने लगा. मैं एक बार फिर उनसे चुद्वाने का आनंद लेने लगी.
उनको फिर से शरारत सूझी और वो अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाले ही, मुझे पकड़ कर बाथ टब मे खड़े हो गये. फिर वैसे ही मुझे उठाकर, अपना लंड मेरी चूत मे घुसाए, मुझे बेड रूम मे ले आए. वहाँ आ कर वो आराम कुर्सी पर बैठे. मैं उनके पैरों पर, उनकी गोद मे बैठी हुई जैसे उनको चोद्ने लगी. मेरी गंद और उनकी गंद दोनो एक साथ हिलने लगी और मैं जल्दी ही एक बार फिर से झाड़ गई. मगर मैं रुकी नही. मैं लगातार उनके उपर बैठी उनको चोदे जा रही थी और उनका लंड मेरी चूत मे अंदर बाहर होता रहा.
बेड रूम मे आराम कुर्सी पर चुदाई का खेल हो रहा था. हम दोनो की रफ़्तार तूफ़ानी हो चुकी थी मैं तो दूसरी बार भी झाड़ चुकी थी और चाहती थी कि उनके लंड से भी जल्दी से पानी निकले. मैं और वो, दोनो उपर नीचे…… उपर नीचे हो रहे थे. जब मैने उनके बदन मे अकड़न महसूस की तो मैं समझ गई कि अब मेरी चूत मे एक बार फिर उनके लंड रस की बरसात होने वाली है.
और मुझे लगा जैसे वो अपने प्यार के पानी का खजाना मेरी चूत मे अपने लंड के रास्ते खाली कर रहे हैं.
सुबह सुबह इतनी चुदाई करने के बाद हम दोनो बुरी तरह थक चुके थे. उनका लॉडा जब मेरी चूत मे नरम होने लगा तो मैं उनके उपर से उतरी. मेरे पैर चुदाई के मज़े से काँप रहे थे. वो भी खड़े हुए और हमने बाथरूम जा कर अपने नंगे, चुदे हुए जिस्मों की सफाई शवर के नीचे की.
उन्होने बड़े प्यार से मुझे मेरी ब्रा और चड्डी पहनाई तो मुझे बहुत अच्छा लगा. हम दोनो कपड़े पहन कर, तय्यार हो कर, अपना बॅग उठा कर कार मे रखा और घूमने निकल गये. हमने बॅग इसलिए साथ मे लिया कि हमको वापस बंगले मे ना आना पड़े.
दोपहर तक वहाँ घूम कर, खाना खा कर हम अपने वापसी के सफ़र पर रवाना हुए क्यों कि हम वहाँ सिर्फ़ दो दिनो के लिए ही गये थे.
क्रमशः..................................................
मैने उनका हाथ हटाया और बाथ टब मे खड़ी हो गई. मेरी गंद उनके चेहरे के सामने थी. उन्होने फिर से साबुन ले कर मेरी टाँगों पर, मेरी गंद पर लगाया. जब मैं उनकी तरफ घूमी तो तो उन्होने मेरे घुटने पकड़ कर अपनी तरफ खींचा तो मेरी चूत उनके मूह से सॅट गई. तुरंत ही मैने उनकी नशीली जीभ को मेरी मस्तानी चूत के अंदर महसूस किया. वो मेरी चूत मे अपनी जीभ डाल कर घुमाते गये और मैं गरम होती चली गई. पानी से गीली मेरी चूत अब मेरे खुद के चूत रस से भी गीली हो गई.
जब मुझ से नही रहा गया तो मैं नीचे बैठ गई और अपने पैरों से उनकी कमर पकड़ ली. इस तरह हम आमने सामने बैठे हुए थे. मैं उनके लंबे किए पैरों पर अपनी गंद टिका कर बैठ गई. उनका तना हुआ लॉडा मेरी चूत का दरवाजा खत खटाने लगा. उन्होने अपने लंड को पकड़ कर मेरी चूत के निशाने पर लगाया और एक ज़ोर का झटका मारा तो उनके लंड के आगे का हिस्सा मेरी चूत मे घुस गया. धक्के लगा कर उन्होने अपने पूरे लंड को मेरी चूत मे घुसा दिया और मेरी चुदाई शुरू हो गई. पानी के अंदर मैं चुद्वा रही थी और बाथ टब का पानी उनके लगाए धक्कों की वजह से ज़ोर ज़ोर से हिल कर बाथ टब से बाहर आने लगा. मैं एक बार फिर उनसे चुद्वाने का आनंद लेने लगी.
उनको फिर से शरारत सूझी और वो अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाले ही, मुझे पकड़ कर बाथ टब मे खड़े हो गये. फिर वैसे ही मुझे उठाकर, अपना लंड मेरी चूत मे घुसाए, मुझे बेड रूम मे ले आए. वहाँ आ कर वो आराम कुर्सी पर बैठे. मैं उनके पैरों पर, उनकी गोद मे बैठी हुई जैसे उनको चोद्ने लगी. मेरी गंद और उनकी गंद दोनो एक साथ हिलने लगी और मैं जल्दी ही एक बार फिर से झाड़ गई. मगर मैं रुकी नही. मैं लगातार उनके उपर बैठी उनको चोदे जा रही थी और उनका लंड मेरी चूत मे अंदर बाहर होता रहा.
बेड रूम मे आराम कुर्सी पर चुदाई का खेल हो रहा था. हम दोनो की रफ़्तार तूफ़ानी हो चुकी थी मैं तो दूसरी बार भी झाड़ चुकी थी और चाहती थी कि उनके लंड से भी जल्दी से पानी निकले. मैं और वो, दोनो उपर नीचे…… उपर नीचे हो रहे थे. जब मैने उनके बदन मे अकड़न महसूस की तो मैं समझ गई कि अब मेरी चूत मे एक बार फिर उनके लंड रस की बरसात होने वाली है.
और मुझे लगा जैसे वो अपने प्यार के पानी का खजाना मेरी चूत मे अपने लंड के रास्ते खाली कर रहे हैं.
सुबह सुबह इतनी चुदाई करने के बाद हम दोनो बुरी तरह थक चुके थे. उनका लॉडा जब मेरी चूत मे नरम होने लगा तो मैं उनके उपर से उतरी. मेरे पैर चुदाई के मज़े से काँप रहे थे. वो भी खड़े हुए और हमने बाथरूम जा कर अपने नंगे, चुदे हुए जिस्मों की सफाई शवर के नीचे की.
उन्होने बड़े प्यार से मुझे मेरी ब्रा और चड्डी पहनाई तो मुझे बहुत अच्छा लगा. हम दोनो कपड़े पहन कर, तय्यार हो कर, अपना बॅग उठा कर कार मे रखा और घूमने निकल गये. हमने बॅग इसलिए साथ मे लिया कि हमको वापस बंगले मे ना आना पड़े.
दोपहर तक वहाँ घूम कर, खाना खा कर हम अपने वापसी के सफ़र पर रवाना हुए क्यों कि हम वहाँ सिर्फ़ दो दिनो के लिए ही गये थे.
क्रमशः..................................................