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Guest
मैं वहीं थोड़ा सा हटकर खड़ी हो गयी...हिम्मत नहीं हो रही थी कि उनकी ओर जाउ..वो खुद चलते हुए मेरे पास आ गये..........
"वो..वू.....क्लाशस ख़त्म हो गयी....???."आलोक भी शायद मुझसे पहली बार अकेले मे बात करने मे झिझक रहे थे.
"जी, आप यहाँ...??.."मैने बस इतना ही कहा.
"हां वो मैने सोचा की आप को लेता चलूं कॉलेज से..तो......?? "
"पर आज अंजू नहीं आई……..बताया नहीं उसने..??" पहली बार मैं मुझे किसी को छेड़ने मे मज़ा आ रहा था.
"जी..बा..बताया उसने.. तभी तो मैं आपको लेने......."आलोक के मूह से अचानक निकल गया...और फिर जैसे अचानक ब्रेक लगा दिया उन्होने……….मुझे हँसी आ रही थी.....मैने भी ज़्यादा परेशान करना ठीक नहीं समझा ,…..हँसी को कंट्रोल करते हुए बोली.......
"मुझे लेने ?.....ओके..चलिए" और पहली बार मैं हल्क सा मुस्कुरा दी……..
आलोक एक टक मुझे देखते रह गये, मुझे बड़ा अजीब लग रहा था..
."चलें??" मैने थोड़े ज़ोर से कहा.
"आओ...हां...प्लीज़ आइए......"
आलोक के साथ उनकी बाइक पर बैठ, आज जिंदगी मे पहली बार मुझे महफूज होने का अहसास हो रहा था...जाने क्यू?? हम दोनो ही शांत थे आलोक ने बाइक की स्पीड काफ़ी कम रखी थी ..और मैं उस से थोड़ा दूर हटकर बैठी थी.
"आप इतनी चुप क्यू हैं आज......" आलोक ने बात सुरू की.
"जी...नहीं तो..वो अंजू की तबीयत ठीक है अब ?? .......मेरा मतलब जब आप आए तो ??" मैं भी उल्टे सीधे सवाल पुच्छ रही थी.
"हां ....ठीक तो थी..कही बाहर गयी है शायद...क्यू कुछ हुआ था क्या उसे..."आलोक ने कहा.
मुझे बड़ा अजीब लगा......मुझसे तो बोला कि तबीयत ठीक नहीं....और अब बाहर गयी...फिर मुझे लगा कि क्या पता आलोक से छुपाना चाहती हो........मैं चुप हो गयी.
"जी वो यू ही आज कॉलेज नहीं आई तो ...." मैने बस इतना ही कहा.
अचानक एक मोड़ पर बाइक थोड़ी सी लहराई तो मैने जल्दी से आलोक के कंधे पर हाथ रख दिया....एक सुकून मिला था मुझे......एक अहसास कि मैं बेसहारा नहीं हूँ......एक मीठी सी हुक दिल मे उठी..........काश ये सहारा उमर भर का सहारा बन जाए तो ज़िंदगी कितनी खूबसूरत हो जाए.
"काजल जी, कही कॉफी पीएँ क्या...आज जाने क्यू बड़ा मन कर रहा है...." आलोक ने कहा.
"जी बस थोड़ी देर मे आप अपने घर पहुच जाएँगे.......ज़रूर पी लीजिएगा......." मैने कहा.
"अरे...घर पर कौन कॉफी बनाएगा...वो अंजलि की बच्ची?? अरे वो तो कॉफी का काढ़ा बना देती है.........और फिर आप कहा होंगी घर पर..." आलोक ने इस बार पिछे मूड कर देखते हुए कहा, एक शरारत थी उन आँखो मे.
"आप प्लीज़ आगे देखिए.......कहीं बाइक ठोक दी तो...मुझे अभी नहीं मरना...." मैं ज़िंदगी मे पहली बार शायद इतने बेतकुल्लफि से किसी से बात कर रही थी.
जवाब मे आलोक ज़ोर से हँसने लगे...
"तो एक कॉफी हो जाए...हां कर दीजिए ना"
इस बार मैं मना नहीं कर पाई.......... यही सब मेरी खताये थी बाजी !! जिनकी सज़ा मुझे मिल रही है…क्यू ना मना कर दिया उन्हे मैने……??..क्यू ना मना कर दिया …..??” काजल का बस चलता तो वो शायद अपने अतीत के हर पन्ने को जला देती.
ऋुना उसे देखती रही, क्या खता है इस मासूम सी बच्ची की…...........इसमे क्या ग़लत है उसे समझ मे नहीं आ रहा था…लेकिन काजल को सब अपना कसूर लग रहा था.....सबकुछ.
ऋुना ने उसके गाल पर बह आए आँसुओं को पोन्छ दिया….काजल आगे बोलने लगी………
“कॉफी शॉप मे बैठे,आलोक मुझे देखे जा रहे थे और मैं परेशान हो रही थी........
"अब मैं कभी आपके साथ नहीं आउन्गि" मैने परेशान होकर कहा.
"क्यू"
"ऐसे ही........"
मैं चुप हो गयी...थोड़ी देर आलोक भी चुप रहे........
आँखे तो आलोक की बहुत कुछ कह रही थी पर होठ शायद अभी भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे...
वो पहली बार था जब हम दोनो साथ बाहर रहे थे.