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Guest
"नहीं जुंमन, इतनी सहूलियत तो है मेरे अंदर की इंसान पहचान सकूँ...हां जवानी के दिनो मे धोखे खाए कुछ लोगो को पहचानने मे लेकिन अब नहीं....बहुत प्यार करता है वो इस कोहिनूर से........जिस तरह से वो सदानंद के खिलाफ हो गया था, सॉफ लग रहा था कि वो आज भी कोहिनूर को बहुत चाहता है.........आज भी ..."
"बाजी आज जिंदगी मे पहली बार कुछ अच्छा करने को दिल किया है...जान भी चली जाए तो कोई गम नहीं.........पर एक कोसिस तो करूँगा मैं.....आप साथ दोगि ना...."
"हां जुंमन ..मैं ज़रूर साथ दूँगी...लेकिन कोहिनूर से छुपा कर सब करना होगा ...नहीं तो वो कभी मानेगी नहीं...तुम समझ रहे हो ना..........अब बताओ क्या करना है.........."
"ठीक है बाजी...एक कोसिस करते हैं ...बाकी जो पर्वरदिगार की मर्ज़ी..........."जुंमन ने दुआ मे हाथ उपर उठा दिए.
वो ऋुना को समझाता चला गया और ऋुना हां मे सर हिलाती रही......वो कुछ कुछ बाते कर ही रहे थे कि अंदर से काजल की आवाज़ आई..............
"ऋुना बाजी...??"
"आप जाइए ऋुना बाजी , मैं आया अभी........एक घंटे मे हम लोग यहाँ से निकल लेंगे..........कुछ दूर पर मेरा गाओं है............लगभग 2 घंटे लगते है रेलवे स्टेशन से...वहाँ चल कर रुकेंगे....मुझे नहीं लगता कि वहाँ का पता किसी के पास भी होगा...आपके गाओं तो शायद 6-7 घंटे मे वो सब पहुँच जाएँगे प्लेन से आए तो....." जुंमन ऋुना को समझाता हुए बोला.
"ठीक है जुंमन , मैं कोहिनूर को तैयार करती हू....."
अंदर से फिर कोहिनूर की आवाज़ आई....जुंमन बाहर गाओं की ओर चल दिया.
"हां , बस आई बेटा........."ऋुना ने बड़े प्यार से कहा और अंदर आ गई.
"वो मैं बाहर गयी थी...पड़ोस से कुछ सामान लेने...........अभी वो पहुचा जाएगी...ज़रा चाय पी लेते हैं फिर बातें करेंगे...अभी दुकाने नहीं खुली होंगी ना.........??"
"जी" काजल ने बस इतना ही कहा...उसका चेहरा बुझा हुआ सा था...लेकिन बहुत खूबसूरत लग रही थी....ऋुना ने मन ही मन बलाइयाँ ले ली.
"जुंमन कह रहा था कि यही थोड़ी दूर पर उसका गाओं है, चलोगि घूमने...वैसे भी यहाँ तो रहना ही है...जुंमन शायद वही से चला जाए ...??"
"ठीक है बाजी, जैसा आप कहे......"कोहिनूर को कोई दिलचस्पी नहीं थी कही आने जाने मे , लेकिन ऋुना का दिल रखने के लिए हां कह दिया था.
थोड़ी देर बाद एक लड़की पड़ोस से कुछ सामान दे गयी ...ऋुना ने चूल्हे मे आग जलाई और चाय रख दी पतीले मे.
वो किसी चिराग से निकले जिन्न की तरह बहुत तेज़ी से सारे काम कर रही थी और कोहिनूर वहीं पास मे रखे तख्त पर लेट गयी...............लेटते ही उसकी आँख लग गयी रात भर जागी थी.
"बाजी आज जिंदगी मे पहली बार कुछ अच्छा करने को दिल किया है...जान भी चली जाए तो कोई गम नहीं.........पर एक कोसिस तो करूँगा मैं.....आप साथ दोगि ना...."
"हां जुंमन ..मैं ज़रूर साथ दूँगी...लेकिन कोहिनूर से छुपा कर सब करना होगा ...नहीं तो वो कभी मानेगी नहीं...तुम समझ रहे हो ना..........अब बताओ क्या करना है.........."
"ठीक है बाजी...एक कोसिस करते हैं ...बाकी जो पर्वरदिगार की मर्ज़ी..........."जुंमन ने दुआ मे हाथ उपर उठा दिए.
वो ऋुना को समझाता चला गया और ऋुना हां मे सर हिलाती रही......वो कुछ कुछ बाते कर ही रहे थे कि अंदर से काजल की आवाज़ आई..............
"ऋुना बाजी...??"
"आप जाइए ऋुना बाजी , मैं आया अभी........एक घंटे मे हम लोग यहाँ से निकल लेंगे..........कुछ दूर पर मेरा गाओं है............लगभग 2 घंटे लगते है रेलवे स्टेशन से...वहाँ चल कर रुकेंगे....मुझे नहीं लगता कि वहाँ का पता किसी के पास भी होगा...आपके गाओं तो शायद 6-7 घंटे मे वो सब पहुँच जाएँगे प्लेन से आए तो....." जुंमन ऋुना को समझाता हुए बोला.
"ठीक है जुंमन , मैं कोहिनूर को तैयार करती हू....."
अंदर से फिर कोहिनूर की आवाज़ आई....जुंमन बाहर गाओं की ओर चल दिया.
"हां , बस आई बेटा........."ऋुना ने बड़े प्यार से कहा और अंदर आ गई.
"वो मैं बाहर गयी थी...पड़ोस से कुछ सामान लेने...........अभी वो पहुचा जाएगी...ज़रा चाय पी लेते हैं फिर बातें करेंगे...अभी दुकाने नहीं खुली होंगी ना.........??"
"जी" काजल ने बस इतना ही कहा...उसका चेहरा बुझा हुआ सा था...लेकिन बहुत खूबसूरत लग रही थी....ऋुना ने मन ही मन बलाइयाँ ले ली.
"जुंमन कह रहा था कि यही थोड़ी दूर पर उसका गाओं है, चलोगि घूमने...वैसे भी यहाँ तो रहना ही है...जुंमन शायद वही से चला जाए ...??"
"ठीक है बाजी, जैसा आप कहे......"कोहिनूर को कोई दिलचस्पी नहीं थी कही आने जाने मे , लेकिन ऋुना का दिल रखने के लिए हां कह दिया था.
थोड़ी देर बाद एक लड़की पड़ोस से कुछ सामान दे गयी ...ऋुना ने चूल्हे मे आग जलाई और चाय रख दी पतीले मे.
वो किसी चिराग से निकले जिन्न की तरह बहुत तेज़ी से सारे काम कर रही थी और कोहिनूर वहीं पास मे रखे तख्त पर लेट गयी...............लेटते ही उसकी आँख लग गयी रात भर जागी थी.