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तवायफ़ की प्रेम कहानी complete

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"यही राजन है.....अंजलि ने उस लड़के की तरफ इशारा किया..."

"इसने हम दोनो की वीडियो बना ली थी और मुझे तरह तरह से ब्लॅकमेन्ल करने लगा....पैसे की बात तक तो मैं बर्दाश्त करती गयी..फिर यहाँ तक...कि..कि..मुझे अपने दोस्तो के साथ.......मुहब्बत कभी थी ही नहीं इसे....."अंजलि की आवाज़ आँसुओ मे भीग गयी.

आलोक का चेहरा गुस्से से लाल हो गया...तमतमाया हुआ आगे बढ़ा और उस लड़के का गिरहबान पकड़ लिया...आलोक के घूँसे की चोट नाक पर पड़ते ही वो एकदम

लड़खड़ा कर ज़मीन पर गिर पड़ा..... आलोक अपने पैरो से उसे बुरे तरह मारने लगा...अंजलि ने जल्दी से आगे बढ़कर आलोक के आगे हाथ जोड़ दिए.

"नहीं भाई, अब नहीं...प्लीज़...इसे कॅन्सर है......बस कुछ दिन हैं....." अंजलि ने रोते हुए कहा....आलोक को एका-एक जैसे ब्रेक लग गया.

उस लड़के की नाक से ब्लड निकलने लगा था...वो चुपचाप उठकर खड़ा हुआ और अपना चेहरा सॉफ कर लिया.....आलोक दुखी मन से आकर काजल के पास खड़ा हो गया.

"आगे बोलो" आलोक ने कठोर स्वर मे कहा.

अंजलि फिर से बताने लगी........

"भाई, आप इस शहर मे थे नहीं, और शायद आपसे या पापा से कहने की मेरी हिम्मत भी नहीं होती......मुझे कुछ समझ मे नहीं आ रहा था कि क्या करूँ,...एक काजल ही बची थी जिसे मैं ये बता सकती थी ..मैं हॉस्टिल पहुचि......काजल को सारी बात बताई...अपने दुख मे दुखी मैं ये भी ना समझ पाई कि काजल खुद कितने बड़े दर्द मे थी....काश मुझे पता होता काजल...क्यू नहीं बताया तूने मुझे , बता ...क्यू..?"अंजलि ने रोते हुए काजल से पुछा.

"अंजलि , जब तुम मेरे पास आई ,उस समय मेरा मन बहुत दुखी था...मेरे पास जीने की कोई वजह ना थी...लेकिन तुम्हारी बात सुनकर एक वजह मिल गयी थी...मैने उसे समय सोच लिया था कि क्या करना है..."

" अंजलि की बात सुनकर जैसे मुझे एक मकसद मिल गया था...मैने अंजलि को ये कहकर वापस भेज दिया कि मैं उसे मिलकर समझाउन्गी . इसे यकीन दिलाना आसाना ना था लेकिन मैने समझाया कि एक कोशिस करने मे क्या बुराई है, आख़िर अंजलि मान गयी.....मैने राजन का फोन नंबर लिया...बात की फोन पर, जितना मैने सोचा था ये उस से कही ज़्यादा कमीना निकला...."काजल ने एक नफ़रत भरी निगाह कुछ दूर खड़े राजन पर डाली...

“उम्मीद तो मुझे पहले भी नहीं थी लेकिन इस से बात करके यकीन हो गया था कि यो क्या चाहता है. किसी भी कीमत पर ये समझने वाला नहीं था”

"राजन ने कयि बार मुझे देखा था अंजलि के साथ, इसने खुद मुझसे कहा...इसने मुझसे भी वी चाहा जो इसने अंजलि के साथ किया था...और बदले मे इसने मुझे वो वीडियो टेप देने का वादा किया.....मैं अच्छी तरह से समझ रही थी कि अंजलि को इस दलदल से निकालने मे मैं खुद उसी दलदल मे फँसने जा रही थी...और ये भी अच्छी तरह से जानती थी कि ये सौदा सिर्फ़ एक धोखा था..वो क्लिप ये कभी मुझे नहीं देगा...”

“मेरे पास सिर्फ़ एक ही रास्ता था..... जीने की कोई वजह नहीं थी, मैने सोच लिया था कि पहले इस कुत्ते को ख़त्म करूँगी और फिर खुद को....कम से कम अपनी दोस्त के किसी काम तो आ सकूँगी....उसकी ज़िंदगी तो बच जाएगी.... बड़ी मुश्किल से एक गन का इंतज़ाम किया और इसके बताए जगह पर पहुचि......"काजल आलोक का हाथ अपने हाथो मे लिए बोलती जा रही थी.

"मुझे नहीं पता था कि मेरे अंदर इतनी हिम्मत कहाँ से आ गयी थी..........शायद जीने की ख्वाहिश ख़त्म हुई तो मरने का डर भी ख़त्म हो गया था........मैं वहाँ पहुचि........इसके साथ दो लोग और भी थे उस कमरे मे....और अब मुझे लगने लगा था कि जो मैं सोच कर आई हूँ वो कितना मुश्किल है......"

" इस से पहले ये मेरे साथ कुछ करता मैने वो क्लिप दिखाने को बोला , जो इसने मुझे देने को कहा था..., क्लिप इसने दिखाई मुझे............अब मुझे किसी भी तरह से वो क्लिप इस से लेकर उसे डेस्ट्राय करना था......मैं ये भी समझ रही थी कि अब मेरे साथ क्या होने वाला है...मैने बिना कोई देर किया इस पर गन तान दी.....और इससे वो क्लिप माँगने लगी...."

 


"मुझे पता था ये देगा नहीं, और इसे भी लग रहा था कि मैं सिर्फ़ डरा रही हू....मैने इसके एक साथी के पैर मे गोली मार दी.......जिस से इसे यकीन हो गया कि मैं सिर्फ़ डरा नहीं रही....और आख़िरकार डरकर इसने मे वो क्लिप मेरे हवाले कर दी...”

“ इस से पहले कि मैं इन सब को गोली मार कर खुद को ख़त्म कर पाती पिछे से कोई भारी चीज़ मेरे सर पर लगी , मेरे हाथ गन पर अपने आप कस गये और एक गोली और चली और उसी के साथ एक चीख भी गूँजी.........किसे लगी, कहाँ लगी मुझे कुछ पता ना चला......आँखो के सामने अंधेरा सा छाने लगा...और बेहोश होने से पहले जो आख़िरी बात मुझे याद थी वो ये कि मैने वो क्लिप पास मे रखी शराब की बॉटले मे डाल दी थी....."

अंजलि की आँखो मे आँसू थे, कितना कुछ किया था काजल ने उसके लिए.....आलोक की आँखे भी भर आई थी..कुछ दूर खड़े राजन को ऐसे घूर रहा था कि उसका बस चले तो टुकड़े टुकड़े कर दे अभी उसके.

सदानंद एक दम चुप थे..जैसे जैसे काजल बोलती जा रही थी उनके चेहरे पर भी दर्द की लकीरे बढ़ती चली जा रही थी.

काजल ने एक नज़र राजन पर डाली और फिर लैला पर...फिर से बोलने लगी...

"मेरी आँख खुली तो पता चला कि मैं पोलीस स्टेशन मे थी....एक बार को लगा कि शायद कुछ अच्छा होगा मेरे साथ लेकिन मैं ग़लत थी....एक कमरे मे मैं थी और 3-4 पोलीस वाले और ये " उसने लैला की ओर इशारा करते हुए कहा.

"पोलीस इनस्पेक्टर मुझे किसी भेड़िए की तरह घूर रहा था...मैं समझ गयी कि सिर्फ़ चेहरे बदले थे , हैवानियत यहाँ भी उतनी ही थी....वो इनस्पेक्टर मुझसे बोला..

"छोरि, वो लड़का तो मर गया जिसको तेरी गोली लगी थी.......अब तो तुझे फाँसी होगी फाँसी !!...पर मैं बचा सकता हूँ तू कहे तो..."इसने एक हवस भरी नज़र मुझ पर डाली...

मैं इतनी मजबूर थी कि कुछ कह नहीं पा रही थी.. लैला मुझे बड़ी देर से घूर रही थी...फिर इसने उस इनस्पेक्टर को बाहर ले जाकर कुछ कहा..और फिर कुछ देर बाद लैला मेरे पास आई...

"देख छोरि, तू मुझे बड़ी सीधी लग रही है इसलिए तेरी मदद करने को दिल चाह रहा है...फँस तो गयी है तू बुरी तरह से...और फाँसी तो छोड़, ये पोलीस वाले तेरे साथ क्या क्या करेंगे तुझे नहीं मालूम...अरे ये तो सबसे बड़े..........खैर छोड़, कोई है जिसे बुलाना चाहेगी...??"मैं लैला की बात का मतलब कुछ कुछ समझ रही थी, लेकिन किसे बुलाती, था ही कौन मेरे पास...??

"देख, उन लौन्डो ने पैसे दे दिए हैं और बयान ये दिया है कि तू एक रंडी है और अपनी मर्ज़ी से वहाँ गयी थी...फिर पैसे की बात ना पटने पर तूने गोली चलाई...और उसका दोस्त मारा गया...अब मेरी बात सुन, पहली बात तो ये कि जैसा मुझे समझ मे आ रहा है तेरा कोई है नहीं इस दुनिया मे, दूसरी बात ये कि ये पोलीस वाले आज रात तेरे साथ सबकुछ करेंगे.......सब कुछ समझ रही है ना.......और तीसरी बात , अब ये हर रोज होगा तेरे साथ जबतक तुझे उम्र क़ैद या 20-25 साल की सज़ा ना हो जाए.." लैला मुझे समझा रही थी या डरा रही थी मुझे नहीं पता, लेकिन उसकी बातें बेबुनियाद नहीं थी.

मैं कुछ कह पाती इस से पहले लैला ने वो कहा जिसके बाद मैं कुछ और सोच ही ना सकी....

"और वो वीडियो क्लिप भी है मेरे पास, उस लौन्डे को पैसे दिया है ना मैने....उस क्लिप के अंदर का सारा "सामान" निकलवा लिया है मैने...वो लड़की जिसकी वीडियो है कौन है री....??? " लैला मेरी हालत से लुफ्त ले रही थी, लेकिन मैं कुछ नहीं कर सकती थी.... अब मैं और ज़्यादा मजबूर थी...मुझे लग रहा था कि मेरी वजह से वो क्लिप अब इस चुड़ैल के पास आ गयी थी और अंजलि की इज़्ज़त भी इसके हाथ मे थी.

मैने पहली बार लैला से बात की..

"आप..आप कौन हो.....और यहाँ क्यू आई हो ??......और क्या हेल्प करोगी आप मेरी...??"

"हां, रानी !!!!,,,ये की ना तूने मुद्दे की बात...तो जैसा कि मैने बताया, मेरा नामा लैला है...संगीत प्रेमी हूँ.........मुंबई मे रहती हूँ...मेरा धंधा.....मतलब मेरा काम धाम यहाँ भी है,,अभी कुछ पंगा हो गया था तो इस इनस्पेक्टर को पैसे खिलाने आई थी.....”

“तेरी जैसी और भी लड़कियाँ है ना मेरे पास.........वो क्या है ना मेरी कुछ लड़कियों को पकड़ लिया था इसने...बहुत बड़ा कमीना है,लेकिन पैसे के लिए कुछ भी करता है..." लैला बता रही थी और अब मैं सब समझ रही थी वो क्या कह रही है.

 


"अभी देख, मैं इसे पैसे खिलाएगी,इसकी रात का जुगाड़ करेगी....और भी बहुत कुछ करना पड़ेगा...उस लड़के को भी पैसे देगी,सब मामला सेट कर लेगी...लेकिन तुझे मेरे साथ चलना होगा...जहा मैं ले चलेगी...और आज से तू वही करेगी जो मैं कहेगी...बोल मजूर है....."

मेरी आँखो से आँसू बह रहे थे लेकिन ऐसा कोई था नहीं जिसे मेरे आँसुओ की परवाह हो....मैं सर झुकाए सुनती रही.

इसने क्लिप और लड़की की वीडियो के बारे मे जो कहा उस से मुझे यकीन हो गया था कि उस क्लिप का डाटा रिकवर करवा लिया था इसने....... लैला ने उसके बाद बहुत देर तक इनस्पेक्टर से बात की.....मैं चाह कर भी कुछ कर नहीं सकती थी..... मैं इसके साथ आ गयी....मैं ये नहीं कहूँगी कि मुझे पता नहीं था कि मैं एक कोठे पर जा रही हू, लेकिन ये जानती थी कि अगर मैं उस रात ना आती तो भी मेरी आबरू की धज्जियाँ उड़ चुकी होती...... मेरे पास कोई रास्ता नहीं था......खुद को किस्मत के हाथो छोड़ दिया .

एक बार उस जगह पहुचि तो समझ मे आने लगा कि मैं अकेली नहीं थी. वहाँ मौजूद हर लड़की की ऐसी ही दास्तान थी...हर लड़की किसी अपने, या किसी धोखे का शिकार थी........मुझे लगने लगा था कि मेरी माँ की भी ज़रूर कोई ऐसी ही मजबूरी रही होगी.....लेकिन मेरी माँ तब भी मुझे मेरी गुनहगार लगती थी...तब तक ,जब तक ऋुना बाजी ने सब सच नहीं बताया उनके बारे मे.

जब इतनी सारी मुझ जैसी, ज़हर का ये घूँट हर रोज हंस कर पी जाती थी तो मैं क्यू नहीं.......जब मेरी जैसे हज़ारो वही दर्द सीने मे लेकर जी रही थी तो मैं क्यू नहीं... उसी दिन से मैने जान देने का ख्याल छोड़ दिया......और एक बार पैरो मे घुंघरू बाँधे तो फिर हर दर्द हर तकलीफ़ उनकी झंकार मे दब कर रह गयी...आँखो की नमी किसी को दिखती ही नहीं, दिखती थी तो सिर्फ़ होंठो की हँसी.

काजल अपनी बात कह चुकी थी, अंजलि का चेहरा आँसुओ से भीग गया था...आलोक की आँखो मे दर्द था और चेहरे पर गुस्सा...वो कभी लैला को घूर रहा था और कभी राजन को....लैला सबको एक साथ देखकर खामोश थी.....उसने हमेशा यही सोचा था कि उस क्लिप के बारे मे कहकर वो कोहिनूर से अपनी हर बात मनवा लेगी , और बदले मे सदानंद से मोटी रकम मिल जाएगी.....लेकिन उसकी हर चाल नाकाम हो गयी थी, और ये कुदरत का इंसाफ़ था जो वक़्त पर राजन और अंजलि को भेज दिया था..लैला कसमसा कर रह गयी.

अंजलि आगे बढ़ी.......

“काजल ! कैसे बर्दाश्त कर गयी मेरी जान, कैसे ??...इतना दर्द..!!..कैसे पी गयी तू जहर का ये घूंठ......”

“काजल ! तुझे नहीं पता....इस कुत्ते ने...राजन ने सब बताया मुझे.......ना तो वो लड़का तेरी गोली से मारा था ना वो क्लिप लैला के पास थी.....वो लड़का इनस्पेक्टर के एनकॉनटर मे मरा था और वो क्लिप तूने पूरी तरह से डेस्ट्राय कर दिया था..... कोई क्लिप नहीं थी लैला के पास.......इनस्पेक्टर ने पैसे लिए और लैला ने अपने कोठे के लिए तेरा सौदा किया.......”

“ लैला राजन को पहले से जानती थी...उस दिन पोलीस स्टेशन मे उसने इसे क्लिप के बारे मे बताया ....इस लैला ने तुझसे झूठ बोला ताकि तू कभी वहाँ से भागने की कोसिस ना करे...क्यूकी इसे पता था जिसके लिए तू जान तक देने को तैयार थी उसके लिए कुछ भी कर सकती थी.....और इनस्पेक्टर ने तुझ से झूट बोला , वजह तू खुद जानती है...." अंजलि रो रही थी ..उसका रोम रोम आज काजल का कर्ज़दार था.

सब लोग शांत थे....लैला और राजन अपने गुनाहो वाले काले चेहरे को उजाले मे देख नहीं पा रहे थे...सदानंद शर्म से सर झुकाए खड़े थे......जिसके लिए हर कदम पर काँटे बोए उसने उनकी इज़्ज़त बचाने के लिए खुद अपनी राह मे काँटे बो लिए थे.....आलोक और अंजलि की आँखे काजल की दीवानगी पर नम थी...... ऋुना और शेरा ऐसी मुहब्बत पर फक्र महसूर कर रहे थे.

और काजल, सिर्फ़ सूनी सूनी आँखो से अपनी हथेली को देख रही थी...शायद कुछ ढूँढ रही थी.....कहाँ खो गयी थी इतने दिनो से वो मुहब्बत वाली लकीर???.

आलोक ने काजल को गले से लगा लिया...

"क्या मुहब्बत निभाई है तुमने जान....आइ लव यू...माफ़ कर दो अपने आलोक को कुछ कर नहीं पाया मैं....." काजल आलोक के सीने से लग गयी...

अंजलि की आँखो मे ख़ुसी के आँसू थे.....वही हाल ऋुना और शेरा का भी था..सोफी भी अब थोड़ी सहज लग रही थी....और उसकी आँखो मे भी आँसू तैर रहे थे..

"काजल!" राजन ने बड़ी हिम्मत करके धीरे से पुकारा.

काजल आलोक से अलग हुई और उसकी ओर देखा.....वो धीरे धीरे चलता हुआ काजल के पास आया....

"माफी के लायक तो नहीं हूँ..क्यूकी मेरे माफी माँग लेने से तुम्हारे ज़िंदगी के वो कीमती साल वापस नहीं आ जाएँगे....लेकिन काजल मुझे मेरे किए की सज़ा मिल गयी है...तिल तिल कर मर रहा हूँ......हर रोज एक मौत मरता हूँ....काजल ! वो सब होने के बाद मैने अपने गॅंग के लिए एक मर्डर किया...क़ानून से बचने के लिए मुझे यू.के भेज दिया गया....वहाँ पर भेजकर मुझे मेरे ही लोगो ने अकेला छोड़ दिया.."

 


"कुछ दिन ही हुए कि मेरी तबीयत बहुत ज़्यादा खराब हो गयी....डॉक्टर. से पता चला कि मुझे कॅन्सर हो गया है काजल......शायद अंजलि को धोखा देने और तुम्हारी ज़िंदगी बर्बाद करने की सज़ा मिली है मुझे...मेरे दोनो गुर्दे खराब हो गये हैं....." राजन की आँखो से आँसू निकल गये.

"इलाज तो दूर मेरे पास इंडिया आने के पैसे नहीं थे.....मुझे समझ मे आ रहा था कि तुम जैसी मासूम के साथ जो किया मैने उसकी सज़ा मुझे मिली है..........हर रोज मंदिर जाता था कि किसी तरह एक बार मरने से पहले तुमसे मिल लूँ....तुम्हारे और अंजलि के पैरो पर सर रखकर माफी माग लूँ...शायद दिल का दर्द कुछ कम हो जाए......और आख़िर शायद भगवान को मुझपर तरस आ गया.... एक रोज मुझे अंजलि मिल गयी..."

राजन के चेहरे पर पछतावे के भाव थे और आँखो मे याचना...लेकिन बहुत देर हो चुकी थी और उसका पाप कुदरत के क़ानून मे माफी के लायक ना था.

"अंजलि से माफी माँग ली मैने और सबकुछ बता भी दिया...सच जानकार खुद ये मुझे यहाँ ले आई.......मुझे माफ़ कर दो काजल...मैने तुम्हारी ज़िंदगी बर्बाद कर दी...मुझे माफ़ कर दो...प्लीज़ फर्गिव मी.." राजन काजल के सामने अपने घुटने के बल बैठा हाथ जोड़े रो रहा था.

"चल जा कुत्ते यहाँ से........कोई माफी नहीं......." सदानंद ने झटके से उसका गला पकड़ा और दूसरी ओर ज़मीन पर धकेल दिया.

"सदा बाबू.....!! " ऋुना चिल्ला उठी...

"मोहिनी , काजल की माँ तवायफ़ बनी, आप चाहते तो वो बच जाती....आप भी साझे दार थे.....ग़लतियाँ तो आपने भी कम नहीं की हैं....बोलिए खुद को क्या सज़ा देंगे आप....." ऋुना ने गुस्से से उन्हे घूरते हुए कहा.

"जो तुम कहो ऋुना" सदानंद ने हथियार डाल दिए थे.

"मैं कौन होती हूँ कुछ कहने वाली, "ऋुना ने सर्द लहजे मे कहा.

"मैने तुम्हे माफ़ कर दिया राजन ..."इन सब के बीच एक धीमी सी आवाज़ काजल के होंठो से निकली.

राजन की आँखो से आँसू बह रहे थे, उसने शुक्रिया भरी नज़रो से काजल को देखा और हाथ जोड़ दिए.

आलोक ने काजल का माथा चूम लिया और अपने साथ लगाए गाड़ी की ओर बढ़ गया.

सोफी, ऋुना और शेरा भी उनके पिछे पिछे चल दिए.......लैला वही खड़ी रही.

"लैला, दुआ करना कि फिर कभी तेरा मेरा सामना ना हो...मैने आज तक किसी औरत की जान नहीं ली है, लेकिन कोई कसम भी नहीं खाई है.."जाते जाते शेरा गुर्राते हुए लैला से कहता गया.

काजल एक पल को ठितकी , लैला की ओर गयी दो कदम...

 
"लैला बाजी, हर तवायफ़ की तरह आपकी भी ज़रूर कोई मजबूरी रही होगी, लेकिन एक बात कहे जाती हूँ....आपके साथ जो हुआ उसकी सज़ा किसी और को तो नहीं मिलनी चाहिए ना.......वो सारी लड़कियाँ आपकी बेटी जैसी हैं....कभी माँ बन कर सोचिएगा, हर कदम पर खुद को ग़लत लगेंगी आप.....एक औरत होकर एक औरत की मजबूरी का फ़ायदा उठाया आपने....खुदा ना करे कि कभी किसी मासूम की आह लग जाए आप को, एक पल मे सब ख़तम हो जाएगा......खुदा हाफ़िज़ लैला बाजी.." काजल ने कहा और आलोक के साथ चल दी.

लैला को सर झुका हुआ था शर्म से..काजल की बातें सीधे दिल पर लगी थी, कुदरत के कयि करिश्मे तो आज उसने खुद देखे थे...जिन्हे क़ानून सज़ा ना दे पाया उन्हे कुदरत के क़ानून ने दिया था...लैला ने एक बार काजल की ओर देखा लेकिन कुछ कह ना सकी. शायद कहने को ज़्यादा कुछ था नहीं उसके पास.लेकिन बदलने को बहुत कुछ था.

"काजल" सदानंद ने पहली बार उसे उसके नाम से पुकारा था.

आलोक और काजल दोनो ही रुक गये..

"मुझे भी माफ़ कर दो......"

काजल ने मूड कर उनकी ओर देखा...

"जी, कर दिया माफ़....." बस इतना ही कहा उसने.

"आलोक !, कहाँ जा रहा है..घर चल बेटा..." सदानंद फिर से बोले.

"पापा ! मैं अपनी काजल को लेकर यहाँ से जा रहा हूँ...अगर कभी आपको माफ़ कर पाया तो ज़रूर लौट आउन्गा....और एक बात आपसे कह कर जाता हूँ....- कोई मासूम तवायफ़ बनती है सिर्फ़ इसलिए कि आप जैसे सफ़ेदपोश चाहते हैं कि वो तवायफ़ बने......आप जैसे लोगो को वो सिर्फ़ एक जिस्म लगती है....क्यूकी आपके अंदर का इंसान मर गया है.....उनकी पीड़ा नहीं दिखती आपको......दिल रोता है फिर भी वो हँसती है, उन होंठो की हँसी के पिछे एक दर्द होता है और हर उस दर्द की एक कहानी होती है.........जिस दिन आप की सोच बदल गयी, कोई लड़की आपको तवायफ़ नहीं लगेगी.. और उस दिन आपको उसके घुंघरुओं की झंकार नहीं उसके आँसुओं की पुकार सुनाई देगी ..और तब आपको हर कोहिनूर मे एक काजल दिखाई देगी....एक अंजलि दिखाई देगी..."

आलोक मुड़ा और काजल को खुद मे समेटे चल दिया.सदानंद और लैला दोनो के लिए बहुत कुछ रह गया था सोचने और करने को.

वक़्त और हालत के थपेड़ो से लड़कर अपनी मुहब्बत की कश्ती को साहिल तक ले आई थी काजल, हर जख्म , हर दर्द बर्दाश्त कर गयी, शायद इसीलिए कर पाई क्यूकी वो तवायफ़ थी और तवायफ़ का मतलब ही दर्द होता है .काजल की मुहब्बत मे शिद्दत थी, कभी पाना चाहा ही नहीं उसने , बस हर कदम मुहब्बत निभाती गयी थी, और इसीलिए शायद आज उसकी मुहब्बत उसके पास लौट आई थी.......आज एक तवायफ़ की मुहब्बत जीत गयी थी.

दा एंड

समाप्त

दोस्तो कहानी कैसी लगी ज़रूर बताएँ
 
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