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Guest
गहरी सांस छोडी जेलर ने और बोला.. इसमें मैं क्या कह सकता हूं .. मेरा फर्ज यही है कि जेल में आये हर कैदी की सुरक्षा का पूरा इंतजाम करना और उसे भागने का कोई मौका न देना...
आप अपने इस फर्ज पर कायम रहीयेगा..
क्या मतलब ? चौंकते हुए कहा जेलर ने
दुश्मन जेल के अंदर भी हो सकता है जेलर साहब.. और यह बात मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मेरे यहाँ आने कि खबर दुश्मनों को लग चुकी है..
अ.आप किन दुश्मनों की बात कर रहे हैं शर्मा जी.. जेलर ने कुछ भी न समझते हुए सवाल किया
आपकी किसी भी बात का जवाब देने से पहले मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहूंगा..
पूछिये ... कुर्सी पर सीधे बैठते हुए कहा जेलर ने
मै सिगरेट पी सकता हूं ?
श्योर ...
थैंक्यू ... कहकर पुनीत ने सिगरेट का पैकेट निकाल कर एक सिगरेट निकाली और उसे लाइटर से सुलगा कर एक लम्बा कश लिया तथा धुंये को नाक की दोनाली से बाहर फेंकते हुए बोला..
आपने विशाल को तो देखा ही होगा ?
बिल्कुल देखा है ... बोला जेलर
क्या लगता है आपको ? क्या वह ऐसा मुजरिम है जिसे फांसी पर लटका दिया जाये ?
जेलर ने लम्बी सांस छोड़ते हुए कहा.. इस जेल में मैं आपको कई ऐसे चेहरे दिखा सकता हूं जो देखने में ऐसे लगते हैं जैसे उन्होंने जिंदगी में कभी मक्खी तक नहीं मारी हो, जबकि असल में वे कई कत्ल कर चुके हैं ...
मैं सिर्फ विशाल की बात कर रहा हूँ जेलर साहब
हो सकता है वह भी भीतर से कुछ और हो, और बाहर से कुछ और ही हो ...
पुनीत ने सिगरेट का एक कश लगाया और आगे बोला ... आपको यह तो मालूम ही होगा कि उसे फांसी की सजा क्यों मिली ?
जी हाँ... वह अपनी बहन से धंधा करवाता था जबकि उसकी बहन रवी नाम के किसी लड़के से प्यार करती थी ... मगर विशाल उन दोनों के प्यार के बीच दीवार बन कर खडा हो गया और...
यह तो विशाल पर लगाया गया इल्जाम है जेलर साहब , जबकि हकीकत तो वो है जो विशाल ने अदालत में बयान की थी ....
जेलर की आँखों में हैरानी भर गई... कहीं आप यह तो नहीं कहना चाहते कि चौधरी साहब, एस पी राजीव सेन, मजिस्ट्रेट प्रताप सिंह और बैरिस्टर सुरेश पाटील असली अपराधी है.
चुईगम चबाते हुए बड़े ही मोहक अदांज में मुस्कुराया पुनीत शर्मा ...
इंसान की शक्ल देख कर ही उसके भीतर झांक लेने की ताकत है मुझमें ... मैं दावे से कह सकता हूं कि असली गुनहगार वे चारों चांडाल है और विशाल उनकी घिनौनी साजिश के तहत फंसाया गया एक बेगुनाह और निर्दोष इंसान हैं ...
इस बार जेलर भी मुस्कुराया और बोला... अगर इतने ही अंतर्यामी है आप तो बतायें, मैं भीतर से कैसा हूं ?
प्रत्युत्तर में पुनीत भी मुस्कुराया... उसने सिगरेट का कश लगाया और जेलर की आँखों में झांकते हुए रहस्यमय स्वर में कहा ....
साफ साफ बता दूं ?
बेशक
बुरा तो नहीं मानेंगे
हडबडाया जेलर... बुरा क्यों मानूंगा मैं ...
पुनीत की मुस्कान अपने पूरे शबाब पर थी और उसी मुस्कान के साथ बोला
सच्चाई बहुत कडवी होती है जेलर साहब
आ. आप बताइए ना, मैं कतई बुरा नहीं मानूंगा ....
अब तो जेलर भी सस्पेंस के मारे यह जानने बेताब हो गया था ....
पुनीत ने सिगरेट का आखरी सुट्टा मारा और उसकी आँखों में झांकते हुए कहा ...
औरत के मामले में आप बेहद कमजोर शख्स हैं, आप हर रोज किसी नई औरत के साथ सोने के रसिया है... यह मैं नहीं आपका चेहरा बता रहा है
हैरत के प्रशांत महासागर में गोते लगाने लगा जेलर... आँखों में शर्म और बेचैनी भरने लगी...
जेलर अभी भी हैरत के झूले झूल ही रहा था कि पुनीत बोल पड़ा ...
लेकिन विलासप्रिय होने के बावजूद भी आपने औरत को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया , आपकी आँखें बता रही है कि फर्ज के मामले में आप मिस वर्ल्ड को भी ठुकराने की ताकत रखते हैं
जेलर हैरानी से आँखें फाडे पुनीत शर्मा को देखने लगा.. उसकी आँखों में हैरानी के साथ साथ अविश्वास के साये भी लहराते नजर आ रहे थे
पुनीत के होंठों पर अभी भी सदाबहार मुस्कान थी .. कहिये , मैंने जो कहा वो सच है या झूठ ?
आप ज्योतिष विद्या जानते हैं क्या ?
जी नहीं ... मैं सिर्फ आदमी को जानता हूँ, उसे पहचानता हूँ ... मैं यह नहीं बता सकता कि आप कितने ज्यादा भ्रष्ट हैं ... आपकी आंखों में लालच जरूर है , मगर इतना भी नहीं कि लालच में अंधे हो जायें आप.... अब ये लालच औरत के लिए है या पैसों के लिए , यह आपसे बातें करके ही मालूम कर सकता हूं , अन्यथा नहीं...