" उफ ।" बिजय जेसा व्यक्ति झुझला उठा-"तुम समझते.. क्यों नहीँ विकास-मजलिस्तान दो महाशक्तियों की पालिटिक्स का केंद्र बना हुआ है--इनकै बीच मे पडना हमारे मुल्क के हक में नही…तुम्हारी हरकतोकी वजह से भारत की बदनामी हो-रही है…लौट चलो ।"
"ये खूब रही अंकल-पालिटिक्स महाशक्तियां करें और पिसे मजलिस्तान छोटे देशो की बेगुनाह जनता-नही गुरु…यह अन्याय है-ऐसा नहीं चलेगा-ऐसी जनता का. प्रतिनिधित्व' बिकास जरुर करेगा अंकल मै यहां किसी महाशक्ति की प्रालिटिक्स नहीं होने दूंगा ।"
"रुक जाओ विक्रास-रूक जाओ I”
लडका जंजीरों में जकड़े बिजय के सामने पहुचा…जिस वक्त वह विजय की आखों मे झाक' रहा था, उस वक्त विजय ने उसकी आखों मे आंसू देखे-उसके बाद अचानक ही वह विजय के चरणों में झुक गया -पूरी श्रद्घा के साथ चरण स्पर्श किए, वोला…"माफ करना अंकल…आपका बेटा आपकी तरह पत्थरदिल नही बन सका-आपको बहुत परेशान करता_ हूं न मैं-आपकै जज्वातों को चोट भी पहुचाता हूं-सजा के लिए तैयार रहूगा गुरु ।"
कहने के बाद वह तेजी से उठा-बिजय से नजरे मिलाए बिना फुर्ती मे घूमा और लंबे-लबे' कदमों. के साथ हाँल पार कर गया-बिजय को लगा कि यहां जाते वक्त वह रो रहा था…"फिर अंधेरी सुरग में से उसे अपने र्जिगर के टुकड़े की फूट-फूटकर रोने की आवाज आई ।
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"ये तुम क्या कह रहे हो विकास?" मुमताज बिस्तर से उछल पड़ी ।
"यह सच हैं मुमताज-अपने हाथों से मैँने हाशमी और गद्दाफी को मार डाला…कह चुका हू कि क्यों…'उनकी यही सजा' थी…आने वाले कल में वे मजलिस्तान को पश्चिम का गुलाम बना डालते !"
"'ल..लेकिन... ।"
"लेकिन क्या-क्या तुम्हारे.. विचार से मैंने यह गलत किया?"
"नहीं I” मुमजात बेहिचक बोली-"यद्रि वे ऐसे थे तो नि:सदेह इसी सजा के हकदार थे, किंतु जिन मेजर हाशमी की मैं इतने दिन तक इज्जत करती रही…उनके बारे में अचानक ही यह सव कुछ सुनकर_ शाॅक-सा लगा है और यह भी सोच रही हुं कि . . ।"
" क्या ?"
"कि अब आगे क्या होगा?"
"रक्त तिलक की प्रत्यक्ष सरदार तुम हो मुमताज---हजारो युवा तुम्हारे एक इशारे पर अपने प्राणों की आहुति देने के लिए तैयार हे…वे नहीं जानते किं रक्त तिलक का तुमसे ऊपर भी कोई सरदार. था…-तुम भी भूल जाओ-सोचो कि वे कभी रहे ही नहीं थे, क्योंकि उनका नाम रक्त तिलक के साथ जुडकर रक्त तिलक जैसा पाक-साफ सगठन भी दागदार-सा लगता हैं I"
" म.....मगर मै अकेली इतने बड़े दल को संभाल सकूंगी ??"
" क्यों नही--- तुममे हिम्मत है--ताकत और बुद्धि है-- तुम तो इस देश को संभाल सकती हो l"
" विकास !"
"मेरे दिमाग में एक स्कीम है मुमताज !"
" कैसी स्कीम? "
" इस मुल्क को आजाद कराने की स्कीम ?"
" क्या ?"
" इस वक्त मजलिस्तान में किसी का शासन नहीं है…राष्ट्रपति . भवन बिल्कुल खाली पड़ा हे ---हां फिलहाल उस पर सेमिनेरियन सेनाओं का कब्जा जरूर है ---- बैसे भी सेमिनेरियन सैनाए सारे मजलिस्तान में फैली हुई 'किंतु` बिना अफसर के सेनाएं बहुत कमजोर होती हे !"
" सेमिनार शीघ्र ही गार्जियन और तोम्बो की जगह किन्हीं अन्य अफसरौं र्कों वहा भेज देगा।" ~
" हा- वह ऐसी कोशिश जरूर करेगा, किंतु पश्चिमी देश उसे आसानी से कामयाब नहीँ होने देगा I"
"क्या मतलब ।"
"मतलब यह कि मज़लिस्तानं पर कब्जा करने के लिए वे आपस में टकराएगे उनके टकराव में समय लगेगा…और हमे उसी समय का लाभ उठाकर इस मुल्क की बागडोर संभाल लेनी हे I”
" कैसे ?"
"उसके लिए जख्मी होने के बावजूद तुम्हें चद काम करने होंगे ।"
" मै जख्मी हू कहां? " मुमजात्त कह उठी… "वह तो तुमने जबरदस्ती इस बिस्तर से चिपकाकर मुझे जख्मी बना दिया हे-मुझे बिल्कुल स्वस्थ समझो विकास---हर काम करने, के लिए तैयार ॥॥"
एक बार को तो विकास का भी दिल चाहा क्रि वह खुलकर इस लडकी की प्रशंसा करे किंतु अपने इस बिचार क्रो मजबूती के साथ दिल ही मे दबाकर बोला…"परसो-या ज्यादा-से-ज्यादा उससे अगले दिन तक तुम रक्त तिलक की देशभर की शाखाओं तक यह पैगाम पहुचा दो कि एक ही समय पूरे देश में वे सेमिनंरियन सेना के खिलाफ खुली जग शुरू कर दें ।"
"यह काम तो हो जाएगा-मगर 'पूरे देश में हमारे पास इतने युवक हैं कहा जो सेना से टक्कर ले सकें…वेसे भी रक्त तिलक कै पास हथियार आदि नहीं हैं ।"
" क्रांतिकारियों का सबसे बडा हथियार उनके हौंसले हैं मुमताज-और फिर जिन्हें तुम हथियार कह रही हो वे कम-से-कम मजलिस्तानी फौज पर तो हैं ही ।"
"क्या मतलब?"
" इबलीस की मौत से पहले मज़लिस्तान की सेना दो गुटों में बटी हुई है…सादात यानी तुम्हारे डैडी और इबलीस के पक्ष मे…इबलीस के साथ भी वही हुआ जो सादात के साथ हुआ था-अतः अब यानी इबलीस की मौत के बाद हर सैनिक के मन मेँ सेमिनेरियनो के खिलाफ जहर भरा होगा ।"
मुमताज को बात जची बोली-"इबलीस की मोत को मैंने इस कोण से नहीं लिया था…दरअसल इतनी दुर तक सोच ही नहीं सकी थी मैं ।"
"सभी के मन में आग होगी…सिर्फ चिगारीभर दिखाने की देर है l"
"मगर-वह चिंगारी लगे कैसे?"
" एक आइडिया है I”
" क्या ? "
"कुछ पपलेट छपवाए जाए--लाखो की तादाद मेँ-उन पपलेटों के जरिए मज़लिस्तान के हर नागरिक क्रो सबोधित किया जाए-भले ही वह क्रोई भी हो…सेनिक-असेनिक-क्लर्क अफसर-बूढा जवान-बच्चा या औरत-सभी को सबोधित करके लिखा जाए कि फला समय-समय निर्धारित कर दिया जाए…मजलिस्तान कै हर नागरिक को अपने घर से निकलकर सडकों पर आ जाना है-भूखे भेडियों की तरह सेमिनेरियन सैनिकों पर झपट पडना है I"
"क्या ऐसा सभव है?"
" क्यों नहीं?" उत्साहित-से विकास ने कहा…"किसी भी मुल्क का अवाम जव घरो से निकलकर सडकों पर आ जाए तो तोपों तक के मुहे बद हो जाते हैँ-उन्हें तो सिर्फ सेमिनेरियन फौज से टकराना हे-ऐसी' फौज से, जिसे ठीक से क्रट्रोल करने वाला कोई भी अफसर इस वक्त मजलिस्तान मेँ नहीं है ।"
"लेकिन बिकास. . . ।"
"जरा सोचो मुमताज-जब एक निर्धारित समय पर मजलिस्तान की जनता शहर से लेकर गाव तक के स्तर. पर घर से बाहर निकलकर सडक_ पर आ जाएगी तो सेमिनेरियन सेना कर ही क्या सकेगी-रक्त तिलक. वाले अपने ढग से झपट पडेगे.-मजलिस्तान- सेना हथियार उठा लेगी-ज्यादा बडा हथियार न सही, किंतु मजलिस्तान ,के हर घर में कम-से-कम एक लाठी तो जरूर होगी-जरा कल्पना करो-यदि मजलिस्तान के हर घर का मर्द सडक. पर आ जाए…महिलाएं चिमटे लेकर निकल पड़े-बच्चे अपने घरों की छत पर चढकर ईटे ही बरसाने लगें तो क्या होगा…सेमिनेरियन सैनिक एकदम से बौखला नहीं जाएगे-क्या उनके पाव नहीं उखड-जाएगे?"
"कलपना तो तुम्हारी ठीक, हे विकास, लेकिन. . . ।'"
"रूक क्यों गई…बोलो?"
" 'क्या जरूरी हे कि हमारे पपलेट से हर मजलिस्तानी सडक पर आ ही जाए?"
"यह पपलेट के मेटर पर निर्भर है…उसमें लिखा मेटर ही ऐसा होना चाहिए कि यदि उसे बूढा. पढ़ ले तो उसकी रगे फ़डक. उठे-कायर भी पढे. तो जोश से भर जाए…ऐसे पंपलेटों' का उपयोग कई बार ऐसी फौजों पर किया जाता है, जो निरुत्साहित हो गई हों-जिनका मनोबल टूट गया हो…जोशीले भाषण और पपलेट उन्हें जान पर खेलने के लिए उत्साहित करते हैं--हमे वही प्रयोग मज़लिस्तानी जनता पर करना है-पंपलेट में हम ऐसा समा बांध देगे कि बिना अवाम के सडक, पर आए यह मुल्क आजाद नहीं. हो सकेगा और अवाम के निकल पडते_ ही . मुल्क आजाद हो जाएगा-पपलेट' में हम यह साफ शब्दों में लिख देंगे कि-जो निर्धारित समय पर सडक पर नहीं आ गया, वह कायर है-डरपोक है…अपने मुल्क का दुश्मन हे-गुलामी की जिदगी- से बहादुरी की मोत कई गुना अच्छी है…यह आहवान-यह पुकार रक्त तिलक की तरफ़ से हीगी । "
"ऐसा पंपलेट बनाएगा कौन?"
"म.......मैँ ।"
"त तुम…कब?"
" अभी इसी वक्त ॥" विकास ने कहा…"उसे लाखों की तादाद में छपवाना तुम्हारा काम है मुमताज-उसके बाद पपलेट को मजलिस्तान
के हर नागरिक तक पहुचाना रक्त तिलक के युवकों का काम है ।"
"म मगर-उन पपलेटों की जानकारी समय से पहले ही सेमिनेरियनों को भी तो हो जाएगी?"
" हो जाए, कोई फर्क नही पडेगा।" बिकास ने कहा ~ "सेमिनेरियनों की कोंशश यह होगी कि जो समय पपलेटों मेँ लिखा होगा, उससे पहले ही वे मजलिस्तानी जनता को इस हद तक आतककित करें कि योजना के मुताबिक जनता घरो से निकलकर सडक पर न आ सकै…उस वातावरण में जनता हिचक भी सकती है…तब शुरूआत रक्त तिलक को करनी होगी----मजलिस्तानी फौज को करनी होगी----- ऐसे अभियानों की शुरूआत भर होने की देर हाती है…एक बार शरू हुआ नहीं कि काम खत्म ।"