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त्यागमयी माँ और उसका बेटा complete

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नमिता भी प्यार से मुस्कुराती हुई बोली: आऽऽह बदमाश , अपना लौड़ा डाल अपनी माँ की बुर में । आह्ह्ह्ह्ह

राज ने शॉट लगाया और नमिता हाय्य्य्य्य्य्य धीरेएएएएएए से बेटाआऽऽऽऽऽ। तेरा बहुत बड़ा है।

राज: आऽऽह माँ आपकी बुर कितनी टाइट है, आऽऽहहह मज़ा आ गया।

राज ने फिर से धक्का लगाया और इस बार पूरा लौड़ा उसने जड़ तक अंदर कर दिया।

नमिता की सिसकारियाँ गूँजने लगी।

राज: आऽऽहहह माँ बहुत मज़ा आ रहा है आपको चोदने में आऽऽह क्या मक्खन सी बुर है आऽऽहहह।

अब राज उसके ऊपर आकर उसकी चूचियाँ पीते हुए धक्के मारने लगा। नमिता भी गरम होकर नीचे से अपनी कमर उछाल कर चुदवाने लगी।

नमिता: आऽऽऽह बेटा तू बहुत अच्छा चोद रहाआऽऽऽऽ है। हाय्य्य्य्य मेरी प्यास ऐसे ही बुझाते रहना आऽऽऽऽऽहहह।

राज के पोवेरफ़ुल धक्कों से नमिता बहुत मस्ती से भर गयी और उसकी बुर से फ़च फ़च की आवाज़ आने लगी। पलंग भी चूँ चूँ कर उठा। अचानक नमिता को लगा कि वह अब और नहीं रुक सकती तो वह राज के चूतरों को अपनी तरफ़ दबाने लगी जैसे उसके आँड भी अंदर घुसा लेगी। वह चिल्लायी: आऽऽऽऽहहह चोद हाऽऽऽऽयहय फाड़ दे मेरीइइइइइइइइइ बुर । मरीइइइइइइइइइइ मैं तो ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म उइइइइइइइइ मैं गयीइइइइइइइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ।

राज भी उसकी आवाज़ों से गरम हो गया और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाकर झड़ने लगा। उसने अपना वीर्य उस बुर के अंदर छोड़ा जहाँ से वह जन्म लिया था।

फिर वह हाँफते हुए उसकी बग़ल में लेट गया।

अब नमिता भी उसकी तरफ़ करवट लेकर उससे चिपक गयी ।

राज उसकी कमर सहला रहा था और उसकी चूचि चूस रहा था। नमिता ने भी हाथ नीचे लेज़ाकर उसके लौड़े को सहलाया और देखा कि वह अभी भी आधा खड़ा ही है। उसके हाथ में दोनों का कामरस लगा जिसे वह अपने मुँह में लेकर चाट ली। राज अपनी माँ की इस हरकत से मस्ती से भर गया। अब वह नमिता के बड़े चूतरों को दबाने लगा। फिर उसकी उँगलियाँ उसके गाँड़ के छेद से खिलवाड़ करने लगी। वह बोला: माँ आपकी गाँड़ भी मारनी है। आह्ह्ह्ह्ह कितनी मखमली है । ये कहते हुए उसने एक ऊँगली डाल दी उसकी गाँड़ में।

नमिता: आह मार लेना अब तो मैं पूरी तेरी हूँ ना। जो करना है मेरे साथ कर ले।रात को सोते समय आख़री चुदाई गाँड़ मारकर ही करना। तेरा बहुत मोटा है ना इसलिए दुखेगा और एक बार सो जाऊँगी तो सुबह तक ठीक हो जाएगा ।

नमिता की चूचि पीते हुआ उसका फिर से खड़ा हो गया और वह बोला: माँ मेरा तो फिर खड़ा हो गया है।

नमिता उसका लौड़ा पकड़ कर बोली: तेरी उम्र में खड़ा ज़्यादा रहता है नरम कम ही रहता है।

राज: माँ एक बार और चोदने का मन कर रहा है, प्लीज़।

नमिता: चल ठीक है लेट अब मैं चढ़ती हूँ तेरे ऊपर।

ये कहते हुए वह राज के ऊपर आ गयी और उसके लौड़े को हाथ में लेकर सहलायी और फिर उसके सुपाडे पर थूक गिरायी और उसको वहाँ मली और फिर अपनी कमर उठाकर उसके मूसल को अपनी बुर के छेद में रखी और नीचे होने लगी जिससे उसका लौड़ा उसकी बुर के अंदर घुसता चला गया। जब वह पूरा घुस गया तब वह अपनी कमर हिलाकर उसकी पूरी लम्बाई और मोटायी का अहसास अपने बुर में करने लगी।

राज भी उसकी झूलती हुई चूचियों को दबाकर मस्ती से भर गया।

अब नमिता उसके लौड़े पर ऊपर नीचे होकर चुदायी का भरपूर मज़ा ले रही थी।

राज: आऽऽऽहहह माँ क्या चोद रही हो? आह्ह्ह्ह्ह्ह मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है। मस्त बुर है आपकी, क्या पकड़ लिया है उसने मेरे लौड़े को । आऽऽऽहहहह क्या टाइट बुर है। ह्म्म्म्म्म्म कहकर वह भी नीचे कमर उछालने लगा।

अब नमिता आगे को झुक कर अपनी एक चूचि उसके मुँह में दे दी और ज़ोर ज़ोर से चूतरों को उठाकर उसकी जाँघ में पटकने लगी। राज का मस्ताना लौड़ा बुर के अंदर आग सी लगा रहा था और वह भी हाय्य्य्य्य्य्य्य किए ला रही थी।

तभी राज बोला: माँ मैं ऊपर आता हूँ और वह नमिता को लिपटाये हुए ही पलट गया और ऊपर आ कर धुआँधार चुदायी चालू किया। नमिता भी नीचे से चूतरों को उचका कर उसका पूरा साथ देने लगी। नमिता ने अपनी दोनों टाँगे राज के कंधों पर रख दी और वह बैठकर उसकी बुर फाड़ने लगा।

अब फिर से पलंग हिलने लगा और दोनों की चीख़ें और मस्ती भरी आवाज़ें कमरे में गूँजने लगी। थोड़ी देर बाद आह्ह्ह्ह्ह्ह हाय्य्य्य्य्य करके दोनों झड़ गए।

अब नमिता बिलकुल ही थक गयी थी और बोली: मुझे बाथरूम जाना है पर मैं उठ भी नहीं पा रही हूँ।

राज ने उसको गोदी में उठाया और उसको बाथरूम में ले गया और कामोड पर बिठा दिया और नमिता सी सी की आवाज़ के साथ मूतने लगी। राज बोला: माँ थोड़ी सी खड़ी हो ना आपकी सुसु देखना चाहता हूँ।

नमिता बोली: चल हट। इसने क्या देखना है?

राज : माँ थोड़ा सा खड़ी हो ना, प्लीज़।

नमिता आधी खड़ी हुई जिससे उसे बुर से निकलती हुई धार दिख जाए। राज ने अपना हाथ उस धार पर रख दिया और गरम मूत के अहसास से भर गया और उसने उसकी बुर को उसकी मूत से रगड़ दिया। अब नमिता उठी और वह उसके सामने मूतने लगा और नमिता का हाथ पकड़कर अपने लौड़े पर रख दिया। नमिता उसको सूसू कराने लगी।

वह बोली: बेटा जब तू छोटा था तो ऐसे ही तुझे सूसू कराती थी। अब फ़र्क़ ये हो गया है कि तेरा ये नूनी से लौड़ा बन गया है। फिर वह उसके लौड़े को हिलाकर उसकी आख़िरी बूँद भी गिरायी और उसके लौड़े को पकड़कर वह हैंड शॉवर से उसके लौड़े और बॉल्ज़ के आसपास की जगह को अच्छे से साफ़ की ।

अब राज ने भी नमिता की बुर और गाँड़ साफ़ की और नमिता राज के साथ शॉवर लेकर तौलिए से राज का बदन पोंछी और राज भी नमिता का बदन पोछा । नमिता ने आलमारी से सुधाकर की बीवी का एक गाउन निकाला और पहन ली। यह एक ऐसा गाउन था जिसमें बस दो रस्सियाँ थीं सामने से बाँधने की। राज भी अपना लोअर पहना।

अब दोनों सोफ़े पर बैठे और नमिता फ़्रीज़ से कुछ खाने का समान निकाली और कोल्ड ड्रिंक भी निकाली और दोनों बातें करते हुए खाने लगे।

राज उसके गाउन से दिख रही नंगी जाँघ सहलाते हुए बोला: माँ

आज आपको चोद कर बहुत मज़ा आया। आपको कैसा लगा?

नमिता: उसके गाल चूमते हुए बोली: बेटा मैं भी बहुत मज़ा ली। तू तो चुदायी का एक्स्पर्ट हो गया है।

राज: माँ आप मुझसे हमेशा ऐसे ही चुदवाओगी ना?

नमिता: हाँ बेटा मेरा और है ही कौन तेरे सिवा?

राज: माँ एक बात पूँछुँ आप ग़ुस्सा नहीं होना?

नमिता: हाँ हाँ पूछ ले।

राज: माँ आप पहले भी इस फ़ार्म हाउस में आ चुकी हो ना?

नमिता: हाँ आ चुकी हूँ।

राज: माँ आप कल सुधाकर अंकल के साथ यहाँ आयीं थीं ना?

नमिता: तुझे कैसे पता?

राज: माँ वो आपको चाबी जो दिए हैं, इसीलिए बोला।

नमिता: हाँ कल आयी थी।

राज: माँ क्या आपको वह कल चोदे थे?

नमिता एक मिनट की चुप्पी के बाद आह भरी और बोली: हाँ चोदे थे।

राज उसका हाथ अपने हाथ मेंलेकर उसको सहलाते हुए बोला: माँ आपको अंकल अच्छे लगते हैं?

नमिता: हाँ लगते हैं। वो तो अब भी मुझसे शादी करने को तय्यार हैं। पर मैं नहीं मानती कि तुझपर और मनीष और उसकी बहन पर क्या बीतेगी?

राज: माँ मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है अगर आप उनसे शादी करो तो, पर मेरी ये खुराक मुझे मिलती रहनी चाहिए। उसने नमिता की बुर को गाउन के अंदर हाथ डालकर दबाते हुए कहा।

नमिता: हाँ ये भी एक समस्या है किशादी के बाद तू मेरे साथ कैसे ये सब कर पाएगा?

राज: चलो माँ इसका भी हाल ढूँढ ही लेंगे। माँ वैसे खाने में क्या है? नमिता: बहुत कुछ बनाकर गया है कुक । थोड़ी देर में खाएँगे।

राज: माँ आपको अपना वादा याद है ना?

नमिता: कौन सा वादा ?

राज: आपने कहा था कि सोने से पहले आप गाँड़ मरवाओगी?

नमिता: हाँ हाँ याद है बाबा। चल अभी TV देखते हैं, राज नमिता की गोद में लेटकर TV देखने लगा और उसके हाथ गाउन के अंदर जाकर नमिता का भूगोल नापने लगे। नमिता भी लोअर के अंदर हाथ डालकर उसके लौड़े से खेलने लगी।

कोई देखता तो सोचता कि दो प्रेमी लेटे हुए प्रेम क्रीड़ा कर रहे है। कोई सोच भी नहीं सकता था कि ये माँ बेटा हैं।

खाना खाने के बाद राज और नमिता उन्हीं कपड़ों में पूल के आसपास लगे बग़ीचे में एक दूसरे को पकड़े हुए घूमते रहे। राज के हाथ बार बार नमिता के गाउन के अंदर और बाहर घूम रहे थे और उसके उभारों और गहराइयों को दबा रहे थे। नमिता भी उसे बीच बीच में चूम लेती थी। और उसके लोअर के ऊपर से उसके लौड़े को भी दबा देती थी।

राज: माँ एक बात पूँछुँ? सुधाकर अंकल से आप कब से चुदवा रही हो?

नमिता: तेरे पापा के इंतक़ाल के ५/६ महीने बाद से ही।

राज: माँ क्या वह बहुत अछ्चि चुदायी करते है ?

नमिता: बेटा औरत जब किसी को पसंद करती है तो उसे उसके साथ सेक्स करने में मज़ा आता है, चाहे वह बहुत बड़ा चुदक्कड ना भी हो।

राज समझ गया कि माँ बात को गोल कर गयी है, उसने भी आगे दबाव नहीं डाला।

वह फिर बोला: माँ आप तो मनीष से भी चुदवायी हो ना?

नमिता हैरान होकर: ये क्या हो रहा है? तुम मुझे ऐसे सवाल क्यों पूछ रहे हो?

राज: माँ मुझे पता है कि आपने मनीष से भी कई बार चुदावाया है, और मुझे इस सबसे कोई परेशानी नहीं है। पर आप बोल रही थी कि आप अंकल से शादी करने की सोच रही हो तो बताओ आपके दोनों बेटे यानी मैं और नया बेटा मनीष के साथ आपके सम्बंध कैसे होंगे?

नमिता को लगा कि राज का लौड़ा ज़रा ज़्यादा ही तन गया था। वह अभी भी लोअर के ऊपर से ही उसे सहला रही थी।

नमिता: तुम ठीक कह रहे हो, ये भी एक कारण था जिसकी वजह से मैंने सुधाकर को मना किया।

राज: माँ ,मगर मेरी राय यह है कि अगर आप अंकल से शादी कर लेती हो तो हमारी ज़िंदगी ज़्यादा रोमांचक हो जाएगी।

 
नमिता: वह कैसे?

राज: माँ आपको तीन मर्दों का मज़ा मिलेगा। पर हाँ एक बात है कि आपको यह बात अंकल को शादी के पहले बतानी होगी कि शादी के पहले भी मैं और मनीष आपको चोदते थे और शादी के बाद भी चोदेंगे।

नमिता: ओह ये मुश्किल बात होगी। मुझे नहीं पता कि वो मानेंगे या नहीं। और ये बताओ कि तुम और मनीष क्या शादी नहीं करोगे समय आने पर? क्या मुझे ज़िंदगी भर रगड़ते रहोगे?

राज: वो बाद में समय आने पर देखेंगे। अब वह गाउन की रस्सी खोल कर उसके सामने से नंगे बदन को देख कर मस्ती में आकर अपने से चिपका लिया और होंठ चूसते हुए उसकी छातियाँ दबाने लगा। नमिता भी उसके लोअर के अंदर हाथ डालकर उसके लौड़े और बॉल्ज़ सहलाने लगी।

राज: माँ, मैं तो ये सोचकर ही गरम हो रहा हूँ कि कभी मैं और मनीष और कभी हम तीनों आपको एक साथ चोदेंगे ।

नमिता: आऽऽऽहहह बहुत कमीना है तू, अपनी माँ को दूसरों से चुदवाना चाहता है।

राज: माँ, मैं जानता हूँ कि आपको उसमें बहुत मज़ा आयेगा। ये कहते हुए उसने उसकी बुर में दो ऊँगली डाली और उसे बिलकुल गीली पाकर बोला: माँ देखो आपकी बुर भी मेरी बातों से मस्त हो कर पनिया गई है।

नमिता की आऽऽऽहहह निकल गयी और वह बोली: आऽऽऽह सच में तूने मुझे गरम कर दिया है।

राज: तो माँ , अंकल से बात करना इस बारे में ।

नमिता: हाऽऽऽऽऽऽय्यय अच्छाआऽऽऽऽऽ देखूँगीइइइइइइइइ। उइओओओओओओ।

राज की उँगलियाँ अब बुर के अंदर बाहर हो रही थी।

नमिता: आऽऽहहह अब रुका नहीं जा रहा, चल फाड़ दे मेरी बुर अभी के अभी ।

राज: माँ, पहले बुर फाड़ूँगा और उसके बाद गाँड़ भी फाड़ूँगा।

नमिता: हाय्य्य्य्य जो करना है कर ले, मगर अब और ना तरसा।

अब राज ने अपनी भरे बदन की माँ को अपनी बाहों में किसी गुड़िया की तरह उठाया और बेडरूम की ओर चल दिया। उसके होंठ उसकी गर्दन और उसकी चूचियों पर घूम रहे थे ।

राज ने नमिता को बिस्तर पर लिटाया और उलटा करके पेट के बल लिटा दिया। अब वह उसकी गर्दन का पिछला हिस्सा चूमते हुए नीचे पीठ को चूमने लगा। फिर नीचे आकर उसने बड़े बड़े चूतरों को चूमा और दाँत से काटा भी। नीचे जाकर उसकी जाँघों और पिंडलियों को चूमते हुए उसके पैर के पंजे को चूमने और चाटने लगा। नमिता की आऽऽहहह निकलने लगी।

नमिता: आऽऽह क्या कर रहा है? ह्म्म्म्म्म्म

राज फिर उसके पावों को चाटते हुए ऊपर आया और उसकी चूतरोंकी दरार को खोल कर उसने अपना मुँह डालकर वहाँ भी चाटने लगा।

नमिता: आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बेटाआऽऽऽऽऽ उइइओइइइइइ

राज अब उसकी गाँड़ के छेद पर जीभ फिराने लगा।

नमिता: उइइइइओओओ

राज: माँ, थोड़ा चूतर ऊपर उठाओ ना।

नमिता ने अपना पिछवाड़ा उठाकर राज को मस्त कर गयी।

वह थोड़ी देर तक तो उसके पिछवाड़े की सुंदरता को निहारता रहा और सोचा की माँ भी क्या माल है? क्या गोरे गोल मांसल चूतर हैं। भूरि सिकुड़ी सी गाँड़ भी क्या मक्खन जैसी चिकनी है और नीचे बुर का नज़ारा तो ऐसा है की आदमी का दिल ही नहीं भरे। अब राज उसकी बुर भी चाटने लगा।

नमिता: हाऽऽऽय्य्य्य्य बेटाआऽऽऽऽ आऽऽऽऽज माऽऽऽर डाऽऽऽऽऽऽलेगा क्याआऽऽऽऽ।

राज फिर अपना लौड़ा उसकी बुर में रखा और उसने कहा: माँ, डालूँ?

नमिता: आऽऽहहह क्या पंडित बुलाऊँ और मुहूर्त निकलवाऊँ, अरे नालायक डाऽऽऽऽऽऽल नाआऽऽऽऽऽऽ।

राज: हा हा , पंडित क्या करेगा? पर आप बोलो की साले मादरचोद डाल, तभी डालूँगा।

नमिता: आऽऽऽहहह क्यों तंग कर रहा है? डाल दे ना। वह अपनी कमर को पीछे की ओर हिलाकर बोली।

राज: पहले बोलो तब डालूँगा। ये कहते हुए उसने उसकी बुर में अपना सुपाड़ा रगड़ा ।

नमिता: आऽऽऽऽहहह डाऽऽऽऽल्लल्ल कमीने साले मादरचोद ।

राज हँसते हुए बोला: क्या डालूँ माँ , बोल ना।

नमिता: मादरचोद, अपना मोटा लौड़ा और क्या डालेगा। हाय्य्य्य्य्य अब ड़ाऽऽऽऽल दे ना मेरा राजा बेटा।

राज ने अपना लौड़ा उसकी बुर में ठेला और बोला: लो मेरा लौड़ा अपनी बुर में । और उसने ज़ोर से धक्का मार कर अपना लौड़ा पूरा पेल दिया, जड़ तक। उसके बड़े बॉल्ज़ उसकी गाँड़ के छेद से रगड़ने लगे।

अब उसने चुदायी चालू की और धक्कों की स्पीड भी बढ़ाता चला गया। अब वह नमिता की लटकती हुईं चूचियाँ भी दबाने लगा और उसके अंगूर जैसे बड़े निपल्ज़ को भी मसलने लगा।

नमिता : आऽऽऽऽहहहह बहुत अच्छाआऽऽऽऽऽऽ लग रहाआऽऽऽऽऽऽ है बेटाआऽऽऽऽऽऽऽ। और जोओओओओओओओओओर्रर्र से चोओओओओओओओओदो आऽऽऽहहह फ़ाऽऽऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओओ । उइइइइइओइइइइइइइ मैं तो गयी । कहते हुए वह ज़ोर ज़ोर से पीछे को धक्का लगाने लगी और उसके लौड़े को अपनी बुर में ज़ोर से भींच लिया।

राज भी स्वर्गिक सूख का आनंद लेते हुए बोला: ले और ले । ह्म्म्म्म्म्म ले। आऽऽहहहह और ले साऽऽऽऽली क़ुतियाआऽऽऽऽऽऽऽऽ।

नमिता उसके मुँह से ये शब्द सुनकर थोड़ी देर के लिए हैरान हुई पर फिर अपनी वासना की आँधी में बहते हुए झड़ने लगी। राज को अहसास हो गया की उसकी बुर ने पानी छोड़ना चालू कर दिया है।

पर राज का तो कुछ और ही प्लान था। उसने अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया और नमिता बिस्तर पर गिर सी गयी ।वह अब पेट के ही बल थी अभी भी।

नमिता: आऽऽहहह बेटा पानी पिला दे ना।

राज फ्रिज से पानी लाया और बोला: माँ मुझे माफ़ कर दो , मैंने आपको गालियाँ दे दीं।

नमिता पानी पीकर उसके अभी भी पूरे खड़े और रस से भीगे लौड़े को पकड़कर बोली : अरे कोई बात नहीं, मैं जानती हूँ तूने उत्तेजना वश ये कहा है , कोई बात नहीं।

राज: माँ अब गाँड़ मार लूँ, देखो मेरा तो हुआ ही नहीं।

नमिता मुस्कुरा के बोली: ये क्यों नहीं कहता कि क्योंकि गाँड़ मारनी है इसलिए रस बचा कर रखा है।

राज हँसकर : हा हा सच बात तो यही है।

नमिता उठते हुए बोली: तेरा इतना मोटा मैं ऐसे ही गाँड़ मैंने नहीं ले पाऊँगी। इसके लिए थोड़ी सी तय्यारी करनी होगी।

फिर उसने आलमारी खोली और वहाँ से गाँड़ में डालने वाला एक बट प्लग़ निकाली और उसके साथ ही एक क्रीम भी निकाली। राज हैरानी से ये सब देख रहा था।

नमिता ने कहा: ले ये क्रीम मेरी गाँड़ और इस प्लग़ ( जो एक छोटे से लौड़े के आकार का था ) में भी लगा दे। यह कहकर वह पेट के बल लेट गयी और उसने पेट के नीचे दो तकिए रखे और अपने चूतर ऊपर को करके अपनी गाँड़ राज को दिखायी। अब राज ने उस प्लग़ और नमिता की गाँड़ में अच्छे से क्रीम लगा दी। फिर नमिता के निर्देश के अनुसार उसने प्लग़ को नमिता की गाँड़ में डाल दिया और उसकी मशीन को चालू कर दिया। ह्म्म्म्म्म्म्म्म की आवाज़ के साथ वह नमिता की गाँड़ में हरकत करते हुए हिलने लगा। अब राज ने उस प्लग़ को गोल गोल घुमाते हुए अंदर बाहर करना चालू किया।

नमिता को सिसकियाँ निकल पड़ी और वह चिल्लायी: आऽऽह्ह्ह्ह्ह बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽ। आऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ है बेटाआऽऽऽऽऽऽ हाय्य्य्य्य्य्य्य ।

अब नमिता बोली: देख छेद खुला क्या? उसे बाहर निकाल ले।

राज ने उसे बाहर निकाला और देखा कि सच गाँड़ का छेद बड़ा सा और खुला हुआ दिख रहा था।

वह बोला: हाँ माँ ये तो मस्त खुल गया। फिर उसने उसने तीन उँगलियाँ डाली तो नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठी। वह बोली: थोड़ी देर और प्लग़ को हिला गाँड़ में फिर तेरे लौड़े के लायक हो जाएगा।

राज ने फिर से क्रीम लगाके प्लग़ को अंदर करके उसको चालू किया और नमिता की फिर से चीख़ें निकलने लगी। अब राज उसको गोल घूमाकर छेद को बड़ा करने लगा।

थोड़ी देर बाद उसने उसे निकाला और सच में अब तो छेद बहुत खुला सा दिख रहा था। आ। उसने अपने लौड़े और उसकी गाँड़ पर क्रीम लगाके उसकी गाँड़ में अपना सुपाड़ा डाल के धक्का दिया और खच से उसका सुपाड़ा अंदर चला गया।

नमिता आह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठी।

अब राज ने उसकी कमर को पकड़कर एक ज़बरदस्त धक्का दिया और नमिता की चीख़ निकल गयी: हाऽऽऽऽऽऽऽयय्यय माआऽऽऽऽऽऽऽर्रर्र डाआऽऽऽऽऽऽऽऽला रेएएएएएएएएए।

राज: माँ बस पूरा चला गया। अब नहीं दुखेगा।

नमिता: आऽऽहहह फट गयी मेरीइइइइइइइ। आह्ह्ह्ह्ह अब चूचि दबा बेटा और बुर की clit भी मसल।

अब राज उसकी चूचि दबाकर उसकी बुर के clit को भी सहलाने लगा। जल्दी ही वह गरम हो गयी और बोली: आऽऽहहहह अब मज़ाआऽऽऽ आऽऽऽय्यय्या ना। हाय्यय्यूय चल अब चोद मेरा राजा बेटा अपनी माँ की गाँड़ को। हाय्य्य्य्य्य्य्य्य।

 
अब नमिता की चुदायी सही माने में चालू हुई। राज के धक्कों से पूरा कमरा ठप ठप और पलंग भी चूँ चूँ कर रहा था। उसकी मर्दाना जाँघें नमिता के चूतरों से टकराकर मस्ती वाली ठप ठप की आवाज़ निकाल रही थी।

नमिता भी हाऽऽऽयय्यय बेएएएएएएएएएटा कहते हुए अपने चूतरों को पीछे की ओर दबाकर चुदायी का पूरा मज़ा ले रही थी।

राज के जवान जिस्म की पूरी ताक़त का अन्दाज़ अब नमिता को हो रहा था और हर धक्के के साथ वह सुख के गहरे सागर में गोते लगा रही थी। राज के हाथ उसकी clit और चूचि पर थे और वह अब फिर से स्खलन के क़रीब पहुँच चुकी थी। वह चिल्लायी: आऽऽऽऽहहह बेटा फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽड़ दे मेरीइइइइइइइइ गाँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽड़ ।

राज भी आह्ह्ह्भ्ह्ह्ह्ह्ह क्याआऽऽऽऽऽऽऽ मस्त चिकनी गाँड़ है माँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ। हाऽऽऽयय्यय । कहते हुए झड़ने लगा। और नमिता की भी बुर का बाँध टूट गया और वह पानी छोड़ने लगी ।राज का पूरा हाथ उसके पानी से गीला हो गया।

अब नमिता पेट के बल नीचे हो गयी और राज उसकी गाँड़ में अपना वीर्य छोड़ता ही चला गया।

नमिता अपने बेटे के गरम गरम वीर्य का अहसास अपनी गाँड़ के अंदर पा कर मस्त हो गयी।

वह बोली: आऽऽह बेटा, आज तक अपनी गाँड़ मरवाने में मुझे कभी इतना मज़ा नहीं आया जो कि आज तूने दिया है। तू तो पक्का चोदू हो गया है।

राज उसके बग़ल में लेटकर बोला: माँ चोदू नहीं पक्का मादरचोद हो गया हूँ।

इस पर वह दोनों हँसने लगे।

राज: माँ गाँड़ दुःख तो नहीं रही है?

नमिता: आह इतना मोटा मूसल वहाँ जाएगा तो दुखेगी ही , पर सहने लायक है। ये दर्द उस मज़े के सामने कुछ भी नहीं है जो तुमने मुझे दिया है।

यह कहते हुए वह राज के होंठ चूसने लगी। राज भी नमिता के गदराए बदन से चिपक कर बहुत मस्त हो रहा था ।

अब नमिता बोली: चल हट अब मुझे बाथरूम जाना है।

राज: चलो मैं भी आपके साथ चलता हूँ और आपकी गाँड़ भी साफ़ कर दूँगा।

नमिता हँसते हुए बोली: आऽऽऽहहह पहले गंदा करता है और फिर साफ़ भी करेगा ।

बाथरूम में दोनों ने मूता और राज ने उसकी बुर और गाँड़ को साबुन पानी से अच्छी तरह से साफ़ किया। नमिता ने भी उसके लौड़े को अच्छी तरह से धोया।

अब दोनों बाहर आकर बिस्तर पर लेटे और जल्दी ही एक दूसरे से नंगे ही लिपटकर सो गए।

अगली सुबह जब नमिता की नींद खुली तो उसने देखा को राज पीठ के बल सोया हुआ है और पतली चादर से उसका मोर्निंग इरेक्शन साफ़ दिखाई पद रहा था। उसने गाउन पहना और वह उठकर बाथरूम गयी और फ़्रेश होकर चाय बनाई और राज को उठायी और चाय दी।

राज भी फ़्रेश होकर बाहर नंगा ही आ गया ।

राज: माँ गाँड़ दुःख तो नहीं रही है?

नमिता: नहीं बेटा अभी बिलकुल ठीक है।फिर वह उसके गाल को चूम ली।

नमिता बोली: बेटा लोअर पहन ले अभी नौकर आएँगे और सफ़ाई करके खाना बनाएँगे।

चलो हम बेडरूम की चादर बदल देते हैं क्योंकि उसमें हमारे रस गिरे हुए हैं।

दोनों ने मिलकर चादर बदली और नमिता ने उसे वॉशिंग मशीन में डाल दिया।

थोड़ी देर में तीन नौकर आए और सफ़ाई करने लगे। बहुत बड़ा घर था सो वो चुपचाप काम में लगे रहे। फिर एक कुक आया और उसने उनको नाश्ता कराया । नमिता ने उसे खाना बनाने को और टेबल पर रख देने को कहा। क़रीब ११ बजे सब नौकरों को नमिता ने विदा कर दिया ।

राज बोला: आह माँ मुझे तो लगा कि ये जाएँगे ही नहीं, चलो अब कुछ मज़ा करें।

नमिता हँसती हुई बोली: हम्म बोल क्या करना है?

राज: माँ चलें पूल में नंगे नहाएँ ।

नमिता: चल जो तू चाहेगा वही होगा।

पूल पर दोनों नंगे हुए और पूल में कूद गए और तैरने लगे।

अब राज नमिता को पकड़कर उसे अपने से लिपटा कर प्यार करने लगा ।

जल्दी ही वो दोनों गरम हो गए और राज बोला: माँ चलो ना बाहर चलें। मज़ा करते हैं।

नमिता: ठीक है चलो बाहर निकलो ।

अब दोनों बाहर आए और नमिता ख़ुद ही पूल के पास रखे ही एक शानदार तख़्त पर बैठ गयी जिसमें कुशन भी था। राज ने अपना लौड़ा उसके मुँह के सामने कर दिया और नमिता उसका लौड़ा चूसने लगी। राज भी अपनी कमर हिला कर उसके मुँह को चोदने लगा। उसका हाथ नमिता की चूचि दबाने लगा था। अब राज ज़ोर ज़ोर से उसके मुँह को चोदने लगा। नमिता भी मस्त होकर चूसे जा रही थी। वह अब उसके बॉल्ज़ को भो सहला रही थी। राज जोश में आकर आऽऽऽहहह करके उसके मुँह में झड़ने लगा। नमिता भी उसका रस पीती ही चली गयी। उसकी आख़िरी बूँद भी वह चाट के पी गयी।

राज भी मस्त होकर अब नमिता के पास बैठ गया और बोला: आऽऽह माँ क्या चूसती हो आप, पागल कर देती हो।

नमिता: सच मज़ा आया ना, मुझे भी बहुत मज़ा आया। तुम्हारा रस बड़ा स्वाद है बेटा।

अब राज फिर से पूल में कूदा और तैरने का मज़ा लेने लगा। नमिता भी थोड़ी देर तैर कर बाहर आयी और तौलिए से पोंछ कर ड्राइंग रूम में चली गयी और एक गाउन पहन ली। राज भी पीछे से आया और नमिता से सट कर बैठ कर बोला: माँ आपकी बुर तो गरम हो गयी होगी मेरा लौड़ा चूस कर।

नमिता: हाँ गरम तो है पर अभी थोड़ी देर बाद कर लेना।

राज फिर नमिता की गोद में लेट गया और वो दोनों बातें करने लगे ।

राज: माँ एक बात बोलूँ थोड़ा सूना सूना सा नहीं लगता है यहाँ?

नमिता: बोर हो गया क्या?

राज: नहीं माँ , मतलब कि थोड़ा अकेलापन सा लग रहा है।

नमिता: अगर बोर हो गया हो तो कल ही वापस चले जाएँगे अपने घर।

राज: नहीं माँ जगह तो मस्त है, माँ एक बात बोलूँ आप नाराज़ तो नहीं होगी?

नमिता: बोल ना क्या बात है?

राज: माँ कल अपना आख़री दिन है ना, क्यों ना नदीम और उसकी माँ को भी बुला लें।

नमिता हैरान होकर बोली: मतलब? यहाँ बुलाएगा उनको?

राज: माँ आपको तो पता है ना की नदीम आपको चोदने के लिए मरा जा रहा है और वह कई बार कह भी चुका है। अगर वह और आयशा आंटी आ जाएँगे तो हमें भी उनका साथ मिल जाएगा और नदीम आपको और मैं आयशा आंटी को चोद लूँगा।

ये कहते हुए उसने नमिता की चूचि चूसनी शुरू कर दिया।

नमिता: बस एक दिन में ही माँ से बोर हो गया ? और आंटी की चुदायी का सोचने लगा।

राज: माँ आप बात को कहाँ से कहाँ ले जा रही हो? मेरा ये मतलब नहीं था।

उसने उसकी चूचि दबाते हुए कहा।

नमिता: तू सच ये चाहता है कि नदीम मुझे चोदे ?

राज: हाँ माँ और मैं भी आंटी को चोदूं साथ ही में।

नमिता कुछ देर बाद बोली: चल ठीक है जैसी तेरी मर्ज़ी।

राज ख़ुश होकर नमिता के होंठ चूम लिया। फिर बोला: माँ अपना फ़ोन दो ना।

नमिता से फ़ोन लेकर उसने नदीम को फ़ोन लगाया और स्पीकर पर रख कर बोला: हाय नदीम क्या हाल है?

नदीम: मैं ठीक हूँ और पेपर ख़त्म हो गए?

राज: हाँ यार आजकल छुट्टी चल रही है और कल आख़िरी दिन है छुट्टी का।

नदीम: अरे भाई तो आजा ना हमारे घर मज़ा करते हैं, अम्मी के साथ।

नमिता यह सुनकर राज को हैरानी से देखी कि नदीम को कितनी जल्दी है राज के साथ अपनी अम्मी को चोदने की?

राज: अरे सुन ना , एक काम कर तू और आंटी क्यों नहीं आ जाते हमारे पास?

नदीम: मतलब तूने आंटी को पटा लिया? चुदायी भी हो गयी क्या?

नमिता का चेहरा लाल हो गया कि हे राम ये लड़के कैसी बातें करते हैं!

राज: हाँ यार सब हो गया, तभी तो तुझे आंटी के साथ आने के लिए बोल रहा हूँ ताकि वो जो हमारी इच्छा है वह हम पूरी कर लें।

नदीम: सच यर मेरा तो तेरी बात सुनकर ही खड़ा हो गया है । आंटी मान गयीं हैं मुझसे चुदवाने के लिए?

नमिता अब और लाल हो गयी!

राज ने नमिता की चूचि सहलायी और बोला: हाँ वह तय्यार है , तू आएगा ना कल आंटी के साथ?

नदीम: ज़रूर आऊँगा, यार कितने बजे आऊँ?

राज: कल ११ बजे आ जाना पर मेरे घर नहीं एक फ़ार्म हाउस में । फिर उसने नदीम को विस्तार से बताया कि वह क्यों और कहाँ है ,और पूरा पता दे दिया।

नदीम: यार कल संडे है मेरी दुकान भी बंद रहेगी मज़ा आ जाएगा। यार एक बार आंटी से भी बात करा दे ना

नमिता ने सिर हिलाकर कहा कि मुझे बात नहीं करनी। पर राज नहीं माना और बोला: हाँ यार ले बात कर ना।

नमिता: हैलो ।

नदीम: नमस्ते आंटी जी , आप कैसी है ?

नमिता: मैं ठीक हूँ, तुम कैसे हो?

नदीम: आंटी बहुत ख़ुश हूँ, अभी अभी राज बोला कि आप और राज अब सिर्फ़ माँ बेटे नहीं रहे बल्कि वैसे ही आशिक़ बन गए हैं जैसे मैं और अम्मी हैं।

नमिता: हम्म

नदीम: और आंटी ये भी कि आप मुझसे भी मस्ती करने के लिए मान गयी है।

नमिता: हम्म

नदीम: आंटी मैं तो आपके रूप पर बहुत दिन से पागल हूँ। अब कल के इंतज़ार में कहीं पागल ना हो जाऊँ।

नमिता: चलो कल मिलते हैं, अब रखती हूँ। और उसने फ़ोन काट दिया।

नमिता: तूने क्यों मुझे फ़ोन पकड़ा दिया था? क्या अनाप शनाप बक रहा था वह।

राज उसकी चूचि दबाकर बोला: माँआपका सच्चा आशिक़ है वो। देखना कल कितनी सेवा करेगा आपकी

नमिता: और तू आयशा की सेवा करेगा, यही ना ?

राज उठा और नमिता का गाउन खोला और उसके सामने घुटनों के बल बैठ कर उसकी जाँघें फैला दिया और उसकी बुर में दो ऊँगली डाला और बोला: माँ आप तो बिलकुल चुदासि हो रही हो। उसने उसको अपनी गीली उँगलियाँ दिखाते हुए कहा और फिर उनको चाट लिया।

अब वह उसकी बुर को चाटने लगा और ऊँगली भी करने लगा जल्दी ही नमिता सिसकियाँ भरने लगी।

राज: माँ बोलो ना नदीम की बात से गरम हो गयी हैं ना आप?

नमिता: आऽऽऽहहह सीइइइइइइ हाँ अच्छा तो लगता है ये सब आऽऽहहह।

राज: तो माँ उससे आपने ठीक से बात क्यों नहीं की?

नमिता की बुर के clit को उसने जीभ से खुजाया।

 
नमिता: आऽऽऽहहह बेटाआऽऽऽऽ पहली बार में थोड़ी झिझक तो होओओओओओओओओती है नाआऽऽऽऽऽ आऽऽहहहह। क्या कर रहा है, मैं झड़ जाऊँगी। चल बिस्तर पर और चोद मुझे।

राज उठकर खड़ा हुआ और नमिता को गोद में उठाके बिस्तर पर लिटा दिया और ख़ुद भी उसके बग़ल में लेट गया। अब वो दोनों एक दूसरे की तरफ़ मुँह करके लेटे थे ।नमिता ने अपनी एक टाँग राज के कमर में रखी और उसका लौड़ा पकड़कर अपनी बुर में रखा और कमर आगे को करके आधा लौड़ा अंदर करके आऽऽँहह करी।

राज भी अपनी कमर दबाकर अपना लौड़ा और गहरायी तक पेल दिया।

राज ने अपनी जीभ नमिता के मुँह में दे दी और वह उसको चूसने लगी। राज ने अपना हाथ उसके चूतरों पर रखा और उनको दबाकर ज़बरदस्त तरीक़े से कमर हिलाकर उसको चोदने लगा।अब नमिता भी गाँड़ हिला हिला कर उसका साथ दे रही थी। चुदायी की फ़च फ़च की आवाज़ें भी आ रही थी। और राज और नमिता दो साँपों की तरह एक दूसरे से लिपटे हुए एक दूसरे में समाए हुए थे।

नमिता की सिसकारियाँ निकल रही थीं, और वह हर धक्के के साथ आऽऽह करती थी और राज भी ह्म्म्म्म्म करते जा रहा था। करीब बीस मिनट की धुआँधार चुदायी के बात नमिता की उइइइइइइइइइइ और हाय्य्य्य्य्य्य्य के साथ मैं गयीइइइइइइइइइइइ बेटाआऽऽऽऽऽऽऽ की आवाज़ें निकलने लगी और वह अपने आप को राज के लौड़े पर पूरा दबाकर स्खलन के आनंद से भर गयी । राज भी माँआऽऽऽऽऽऽ मैं भी झढाआऽऽऽऽऽऽऽऽ कहकर छोटे छोटे धक्कों के साथ अपना वीर्य नमिता की बुर में डाल दिया और दोनों शांत हो गए।

अब दोनों वैसे ही लिपटकर सो गए। दोपहर को नींद खुली और खाना खाकर वो tv देखने लगे।

एक दूसरे के बदन से खेलते रहे, फिर राज बोला: माँ पूल के आगे एक दरवाज़ा है, उसके बाद क्या है?

नमिता: मुझे नहीं पता । दरबान से फ़ोन पर पूछ लो।

राज को दरबान ने बताया कि पीछे सुंदर जंगल है और वो वहाँ घूम सकते हैं ।

राज टी शर्ट और लोअर पहना और नमिता ने भी एक राज का ही टी शर्ट और उसका ही लोअर पहना और दोनों बाहर आकर पीछे का दरवाज़ा खोलकर सामने के दृश्य को देखकर मस्त हो गए ।सामने हरियाली थी और घना जंगल था। वो दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर जंगल में प्रेमी जोड़े की तरह घूम रहे थे। राज ने नोटिस किया कि नमिता की चूचियाँ बिना ब्रा के टी शर्ट से क़ातिलाना लग रही थीं और उसके निपल्ज़ अलग से ही तने हुए दिख रहे थे। उसके लोअर से उसके बिना पैंटी के पिछवाड़ा भी बहुत मादक लग रहा था ।

राज का लौड़ा खड़ा होने लगा और वह नमिता को पीछे से पकड़ लिया और अपना लौड़ा उसकी गाँड़ पर रगड़ने लगा । उसने चूचियाँ भी अपने पंजों मे दबोच लीं।

नमिता: आऽऽऽहहज क्या करता है बेटा?

राज: माँ आप बहुत सेक्सी हो,मस्त माल हो।

नमिता: आऽऽह छोड़ ना मार ही डालेगा क्या?

राज: माँ चुदायी से कोई नहीं मरता। फिर उसने अपना लोअर नीचे किया और हवा में लौड़ा लहराकर नमिता को बोला: माँ थोड़ा सा चूस लो ना।

नमिता उकड़ूँ बैठी और उसका लौड़ा चूसने लगी। वह अपनी जीभ उसके बॉल्ज़ पर भी घुमाने लगी ।

सुनसान जंगल में राज की ह्म्म्म्म्म्म गूँजने लगी । अब राज ने नमिता को उठाया और उसके टी शर्ट को ऊपर करके उसकी चूचियाँ दबाने और चूसने लगा। नमिता आऽऽहहह सीइइइइइइइ कर उठी।

अब उसने नमिता का लोअर नीचे किया और उसकी बुर को ऊँगली करके उसके गीलेपन का अहसास कर के मस्त हो गया और नमिता को बोला: माँ इस झाड़ के सहारे खड़ी हो कर झुक जाओ , मैं पीछे से डालता हूँ। नमिता पेड़ के पास आकर उसका सहारा लेकर झुक गयी और राज उसके पीछे आकर अपना लौड़ा उसकी बुर में डाल और धीरे से चुदायी करने लगा। उसका एक हाथ नमिता की चूचियाँ दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़कर वह ज़ोर से धक्के लगाने लगा। नमिता भी हाय्य्य्य्य्य कहकर अपने चूतरों को पीछे की ओर दबाकर पूरे लौड़े का मज़ा ले रही थी। जंगल में एक दम शांति थी और उसमें उनकी चुदायी कि फ़च फ़च गूँज रही थी। नमिता की दबी सिसकारियाँ भी निकली जा रही थीं। फिर वह झड़ने लगी और ज़ोर ज़ोर से कमर हिला रही थी और अपनी जाँघों में उसके लौड़े को भींच रही थी।

राज भी अब झड़ने लगा और वह भी ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर पूरा लौड़ा अंदर डालकर उसके चूतरों से चिपका ही रह गया। उसका वीर्य उसके अंदर गिरता चला गया।

फिर वह अपना लौड़ा बाहर निकाला और रुमाल से उसे साफ़ किया और फिर उसने नमिता की बुर को भी साफ़ किया।

राज: माँ इसलिए साफ़ किया कि आप पैंटी नहीं पहने हो सब रस लोअर में गिर जाता।

नमिता मुस्कुराते हुए बोली: तू मेरा कितना ख़याल रखता है!

अब दोनों वापस घूमकर फ़ार्म हाउस वापस आ गए।

नमिता ने नौकरों को शाम को आने को कहा था सो वो अपना काम कर रहे थे । उन दोनों को चाय पिलायी और खाना बनाकर वह ८ बजे चले गए।

बाद में वो खाना खाए और रात में एक चुदायी का दौर और चला और फिर वो दोनों सो गए।

अगली सुबह राज पहले उठ गया और नमिता को बग़ल में लेता देख कर उसको चूम लिया और चादर के अंदर वह भी नंगी ही थी। राज उठकर बाथरूम चला गया और बाहर आकर किचन में चाय बनाकर अपने लिए और नामिता के लिए लेकर आया। वह झुककर नमिता के होंठ चूमा और बोला: माँ उठो ना। चाय पी लो। ये कहते हुए उसने चादर हटाकर उसकी चूचियों को नंगा किया और झुक कर निपल्ज़ को चूस लिया।

नमिता : आऽऽह या तो दूध पी ले या फिर मैं चाय पी लूँ।

राज: हा हा माँ आप चाय पी लो।

अब दोनों चाय पीने लगे और फिर नमिता फ़्रेश होने चली गयी। राज भी लोअर पहन कर ड्रॉइंग रूम में TV देखने लगा। तभी नमिता आयी और फ़ोन से नौकरों को बुलायी। अब उसने भी एक गाउन डाल लिया था।

राज: माँ ये नौकर आने वाले हैं , इनके आने के बाद हम पूल में नहा लेंगे।

नमिता: हाँ बाद में हम नाश्ता कर लेंगे।

नौकरों के आने के बाद वह दोनों पूल का दरवाज़ा बंद करके आकर पूल के पास रखे तख़्तों पर लेट गए और बातें करने लगे।

राज: माँ क्या सोचा आपने सुधाकर अंकल से शादी की बात करोगी?

नमिता: पता नहीं करूँगी कि नहीं , उनको ये बताने में मुझे बहुत झिझक हो रही है की मैं तुमसे और मनीष से भी चुद रही हूँ।

राज: अरे अंकल खुले दिमाग़ के हैं, वह मान जाएँगे।

नमिता: पर उनकी एक बेटी भी है जो अब नानी के पास रहती है, शायद वह भी इस साल यहीं ११थ में भरती होने की सोच रही है। उसका क्या होगा?

राज: माँ उसको भी हम अपने ग्रूप में शामिल कर लेंगे।

नमिता: ओह, पता नहीं सुधाकर इस बात को कैसे लेंगे?

राज: माँ हो सकता है कि अंकल भी अपनी बेटी को चोदना चाहें, क्या पता?

नमिता: ओह, मुझे याद है एक बार हमारे ऑफ़िस की एक कमसिन लड़की साक्षी को वह किसी क्लाइयंट को ख़ुश करने को भेज रहे थे, वह मुझे आकर बोली कि मैं सर को बोली कि आप तो मेरे साथ सोते हो पर मुझे दूसरे लोगों के पास क्यों भेजते हो? अगर आपकी अपनी बेटी होती तो क्या उसको भी भेजते? इस पर सुधाकर उसको बोला था कि यही तो अफ़सोस है कि मेरी बेटी मेरे पास नहीं रहती, मेरी सास उसको हज़म कर ली है। वरना तुम जैसी लड़की की मुझे ज़रूरत ही नहीं होती।

राज: इसका मतलब ?

नमिता: हाँ, एक बात और साक्षी बोलती है कि वह उसको चोदते समय बेटी बेटी कहता है और साक्षी को भी कई बार बोलता है कि उसे पापा कहकर चुदवाए।

राज उछलकर बोला: ओह माँ तब तो पक्का है कि अंकल अपनी बेटी को चोदना चाहते हैं। और अगर आप दोनों की शादी हो गई तो अंकल की सास लड़की को आपके पास आपके भरोसे रहने को भेज देगी और आप बाप बेटी का मिलन करा देना।

नमिता आँख मारकर बोली: और भाई बहन का मिलन?

राज हँसते हुए: हा हा वह भी हो ही जाएगा। माँ क्या मज़ा आएगा हम तीन और आप दो, क्या मज़ा आएगा चुदाई का।

नमिता: मैं देख रही हूँ कि तुझे ग्रूप सेक्स का बड़ा चाव लग गया है?

राज: माँ जब मैं और नदीम आयशा आंटी को एक साथ चोदे थे तब बहुत मज़ा आया था।

नमिता: अरे हाँ नदीम और आयशा आने वाले हैं ना आज?

राज: हाँ प्लान तो था पर आज कोई फ़ोन नहीं आया, अब तक।

तभी नमिता का फ़ोन बजा और नदीम उठकर नमिता के तख़्त पर आकर बैठ गया और नमिता के गाउन को खोलकर उसके पेट को सहलाते हुए बोला: हाय नदीम कैसे हो?

नदीम: सब बढ़िया है।

राज स्पीकर पर रखकर बोला: तो तुम लोगों का क्या प्रोग्राम बना है?

नदीम: बस ११ बजे तुम्हारे साथ होंगे। क्या सामान लाना है?

राज: अरे कुछ नहीं चाहो तो एक जोड़ी कपड़े के आओ बस और कुछ नहीं। वैसे उनकी भी ज़रूरत नहीं होगी , नंगे रहने में ज़्यादा मज़ा आएगा।

नदीम: सही है यार नंगे ही रहेंगे। यार आंटी को नंगी देखने का सोचकर मेरा खड़ा हो गया।

नमिता ने बुरा सा मुँह बनाया।

राज: हाँ यार आंटी को मुझे भी चोदे काफ़ी दिन हो गए।

उसका लौड़ा भी खड़ा हो गया था। वह लोअर से उसको निकाला और नमिता को देखा। नमिता उसको सहलाने लगी। राज भी अपना हाथ नमिता को जाँघों के बीच लेज़ाकर उसको सहलाया और नमिता ने अपनी जाँघों को खोल दिया।

राज: अरे नदीम बस अब तू जल्दी से आजा और हम मज़े करेंगे।

नदीम: चल बस अब निकालता हूँ। बाई ।

नमिता: तुम लोग कितनी गंदी बातें करते हो?

राज ने अपनी उँगलियाँ उसकी बुर में डाली और उसको पूरा गीला पाकर बोला: माँ ये देखो पूरी गीली हो गई है आपकी बुर। आपको हमारी बातों में मज़ा आ रहा था तभी तो गीली हुई?

नमिता: आऽऽऽहहहह कर उठी। राज ने उसकी बुर के दाने को छेड़ दिया था।

राज उसकी जाँघों के बीच आया और उसकी बुर चाटने लगा। नमिता की आँहें निकलनी लगी। और वह राज को बोली: बेटा ६९ करते हैं, मुझे भी तेरा लौड़ा चूसना है।

अब राज नीचे लेटा और नमिता अपने बुर को उसके मुँह पर रख कर उसका लौड़ा चूसने लगी। राज भी उसके चूतरों को चूमते हुए उसकी दरार में मुँह डालकर उसकी गाँड़ चाटा और फिर मुँह को नीचे लेज़ाकर बुर भी चाटने लगा । अब उसने नमिता की गाँड़ में दो ऊँगली डाली और उसकी बुर चाटने लगा।

नमिता भी उसके लौड़े और बॉल्ज़ को चूसे जा रही थी। फिर उसने नीचे जाकर उसके चूतरों को फैलाया और उसकी गाँड़ में भी जीभ फेरने लगी। राज की भी आऽऽहहह निकल गयी। अब नमिता ने भी एक ऊँगली उसकी गाँड़ में डाल दी और उसके लौड़े को डीप थ्रोट का मज़ा देने लगी।

थोड़ी देर बाद नमिता बोली: आऽऽऽहहह तू चोदेगा या ऐसे ही झाड़ देगा मुझे?

राज: आऽऽहहह क्या मस्त बुर है आपकी चूसने से दिल ही नहीं भरता। चलो उठो अभी चोदता हूँ।

उसने नमिता को चौपाया बनाया और उसकी गाँड़ ऊपर करके अपना गीला लौड़ा उसमें सेट किया और एक हल्का सा धक्का लगाकर पूरी गीली बुर में अपना आधा लौड़ा धकेल दिया।

नमिता आऽऽऽऽऽऽहहह कर उठी । अब वह उसकी चूचियाँ दबाते हुए एक और धक्का मारकर अपना पूरा लौड़ा उसके अंदर डाल दिया और उसकी गरम बुर का अहसास अपने लौड़े पर करके मस्ती से भर उठा।

अब नमिता से नहीं रहा गया वह अपने चूतरों को पीछे धकेल कर बोली: हाऽऽय्य अब चोद ना आऽऽऽह किसका इंतज़ार कर रहा है।

राज: अब उसकी चुदायी में लग गया और धीरे धीरे धक्कों की स्पीड भी बढ़ाता चला गया।

अब नमिता की घुटी हुई सिसकारियाँ और फ़च फ़च को आवाज़ आने लगी। राज ने उसके चूतरों को हल्के से थप्पड़ भी मारा और नमिता हाऽऽय्य्य्य्य कहकर और ज़ोर से अपनी गाँड़ हिलाकर चुदवाने लगी।

राज अब उसके निपल्ज़ को मसल रहा था और वह मस्ती से चोदे भी जा रहा था।

नमिता: आऽऽऽऽऽह क्याआऽऽऽऽऽऽऽ मस्त चोओओओओओओओद रहाआऽऽऽऽऽ है मेराआऽऽऽऽऽऽऽ राआऽऽऽऽऽऽजा बेएएएएएएएएटा ।

राज: आऽऽऽऽहहह माँआऽऽऽऽऽऽ क्याआऽऽऽऽऽ बुउउउउउउउउउउर है आपकीइइइइइइइइइ। ह्म्म्म्म्म्म्म मैं तो झड़ाआऽऽऽऽ।

नमिता भी आऽऽहहहह करके झड़ने लगी।

दोनों का ऑर्गैज़म एक साथ हुआ और नमिता की बुर उसके अपने पानी और राज के वीर्य से भर गई।

नमिता अब पेट के बल लेट गयी और राज भी अपना लौड़ा बाहर निकाल कर उसके साथ ही लेट गया।

अब दोनों अपनी साँसों पर क़ाबू पाने की कोशिश कर रहे थे।

राज: माँ भूक लगी है चलो नाश्ता कर लें।

नमिता: चल पहले पूल में थोड़ा सा नहा लेते हैं फिर चलते हैं। अब दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर पूल में उतरे और एक दूसरे से चिपक कर नहाने लगे और थोड़ी देर तैरे भी।

फिर एक दूसरे को तौलिए से सुखाकर कपड़े पहने और वापस ड्रॉइंग रूम में आए। नमिता ने नौकरों को पूल के आसपास सफ़ाई के लिए भी भेजा ।

नाश्ता करने के बाद दोनों ११ बजने का इंतज़ार करने लगे। सभी नौकर खाना बना कर और साफ़ सफ़ाई करके चले गए।

क़रीब ११:१५ बजे दरबान का फ़ोन आया कि कोई नदीम आपसे मिलना चाहते हैं। राज ने उनको अंदर आने का बोल दिया।

 
अब तक नमिता ने साड़ी ब्लाउस डाल लिया था। राज भी टी शर्ट और लोअर में था।

राज उनको लाने के लिए बंगले से बाहर पोर्च तक आया। नदीम अपनी बाइक में अंदर आया और उसके पीछे उसके अब्बा बैठे थे और पीछे अम्मी बैठी थी जिसके हाथ में एक बैग भी था।

राज अंकल को देख कर हैरान रह गया।

ख़ैर उसने सबका स्वागत किया और दुआ सलाम की।

नदीम तो उससे गले मिला। अंकल और आंटी को उसने आदाब किया। आयशा ने काले रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उसके गोरे दूधिया बदन पर बहुत फ़ब रही थी। अंकल पैंट टी शर्ट में थे।

राज सबको अंदर लेकर आया । वो सब ये शान ओ शौक़त देखकर हैरान थे। इतना शानदार मकान उन्होंने भी नहीं देखा था।

राज नदीम को एक तरफ़ ले जाकर पूछा: यार ये अंकल को क्यों ले आया?

नदीम: मैं क्या करूँ, इन्होंने ज़िद पकड़ ली कि मैं भी जाऊँगा। लाख मना करने के बाद भी नहीं माने तो अम्मी ने कहा की चलो ले चलते हैं। कोई चारा नहीं रह गया था।

राज: यार इनके कारण कोई परेशानी तो नहीं होगी?

नदीम: अरे ये तो बस देखेंगे हमको मज़ा लेते हुए , आगे तरी मर्ज़ी है चाहे तो उनको भी मज़ा लेने देना । वैसे भी तेरे लौड़े के वह दीवाने हैं।

राज: ओह, चलो माँ को मैं समझा लूँगा ।

तभी नमिता हाथ में पानी का ट्रे लेकर आयी और सबको पानी दी। सबने एक दूसरे को नमस्ते किया ।

फिर नमिता बोली: आप बैठो चाय बनाती हूँ।

आयशा: दीदी मैं भी आपकी मदद करती हूँ । ये कहकर उसके पीछे किचन में आ गयी।

नमिता ने किचन में आयशा का हाथ पकड़ा और बोली: आयशा, उस दिन के लिए मैं तुमसे माफ़ी माँगती हूँ जब मैं तुमसे लड़ने तुम्हारे घर आयी थी। मैं तुमको डाँट रही थी नदीम से सेक्स करने के लिए, और आज देखो मैं ख़ुद ही अपने बेटे के साथ ही वह सब कर रही हूँ।

आयशा: अरे दीदी, मुझे सब पता है कि हम अपने बच्चों मी भलाई के लिए और अपने परिवार को बचाने के लिए ही सब कर रहे हैं। वह सब मैं भूल चुकी हूँ।

ये कहते हुए वह नमिता का हाथ सहलाने लगी।

नमिता को लगा कि जिस तरह से वह उसका हाथ सहला रही है कहीं ये भी तो बाइसेक्शूअल नहीं है? उसने चेक करने का निश्चय किया।

नमिता: सच तुमने सब भुला दिया, तो आओ मेरे गले लग जाओ और हम सहेलियाँ बन जाएँ।

ये कहते हुए नमिता ने उसको अपनी बहाने में भींच लिया और उसकी गर्दन में एक चुम्बन लिया और अपना हाथ उसकी नंगी कमर पर रख कर सहलाने लगी।

आयशा भी उससे ज़ोर से चिपक गयी और वह भी नमिता की कमर को सहलाने लगी और उसने भी उसकी गर्दन का पिछला हिस्सा चूम लिया।

नमिता को लगा कि अब रियल टेस्ट कर लिया जाए।

नमिता ने उसको अलग किया और उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा: आयशा तुम्हारा एक चुम्बन ले लूँ, तुम बहुत प्यारी हो?

आयशा भी उसकी आँखों की हवस को समझ कर बोली: लो दीदी लो।

यह कहकर उसने अपने होंठ आगे करके नमिता के होंठ से लगा दिए और दोनों एक बहुत ही मादक चुम्बन लेने में मस्त हो गयीं। नमिता के हाथ अब उसकी छातियों तक पहुँचे और वह उनको दबा कर बोली: आऽऽह क्या मस्त टाइट चूचियाँ हैं, इसीलिए मेरा बेटा पागल है तुम पर।

आयशा भी कहाँ पीछे रहने वाली थी, उसने भी नमिता की छातियों को दबाया और बोली: हाऽऽऽऽऽय आपकी तो बहुत बड़ी बड़ी हैं तभी नदीम पागल हुआ जा रहा है इनको चूसने को।

अब फिर से उनके होंठ एक दूसरे से चिपक गए।

तभी बाहर किसी के आने की आवाज़ आयी तो वो अलग होकर चाय बनाने लगी।

राज अंदर आया और बोला: माँ अंकल का तो आने का प्लान नहीं था पर अब आ ही गए हैं तो कुछ नहीं होता। वो सिर्फ़ देखेंगे कर तो कुछ नहीं सकते।

आयशा: हाँ दीदी उनकी तरफ़ से आपको कोई टेन्शन नहीं होगा। वो बेचारे तो नकारा ही हो गए हैं ऐक्सिडेंट के बाद से।

नमिता: कोई बात नहीं, मुझे राज ने सब बताया हुआ है।

चल राज तू ये ट्रे उठा और चाय ले जा मैं कुछ खाने के लिए भी लाती हूँ।

राज के जाने के बाद नमिता और आयशा खाने का सामान लायीं और सब चाय पीने लगे।

नमिता और आयशा एक सोफ़े पर बैठी थी और राज , नदीम और अंकल एक सोफ़े पर थे।

राज: माँ चलो ना इन लोगों को पूल दिखाते हैं।

नमिता: चलो चलते हैं।

अब सब बाहर आए और पूल देख कर वो भी बहुत हैरान हुए।

नदीम: यार ये तो बहुत सुंदर पूल है। पर मुझे तो तैरना नहीं आता ।

अंकल: मुझे और आयशा को आता है , हमने गाँव में सीखा था। नदीम शुरू के हिस्से में पानी कम होता है तुम वहाँ तक तो जा सकते हो।

राज: माँ चले, तैरें ?

नमिता: ठीक है तुम लोग उतरो पहले।

अब राज जानता था कि यही मौक़ा है ICE ब्रेकिंग का। याने सबकी शर्म तोड़ने का।

राज ने अपना टी शर्ट निकाला और उसकी मर्दानी छाती सबके सामने थी। फिर उसने अपना लोअर खोला और अब वह चड्डी में था।

चड्डी में उसका आधा खड़ा लौड़ा ग़ज़ब का सेक्सी दिख रहा था।

अब वह बोला: मेरे पास और चड्डी नहीं है, इसलिए मैं इसको गीला नहीं कर सकता हूँ। वैसे भी अभी जितने लोग यहाँ हैं सबने मुझे नंगा देखा हुआ है।

ये कहते हुए उसने अपनी चड्डी भी उतार दी। अब सबकी आँखें उसके नंगे बदन पर लग गयीं थीं। उसका लम्बा लौड़ा आधा खड़ा होने के कारण बहुत ही सेक्सी दिख रहा था। आयशा की बुर गीली होने लगी। नदीम भी मस्ती में आ गया और अपना टी शर्ट उतार कर अपनी बालों से भरी छाती का नज़ारा सबको दिखाते हुए अपनी जींस भी खोल दिया। अब काली चड्डी में उसका गोरा बदन जो बालों से भरा था चमक उठा। उसकी मोटी पुष्ट जाँघें बालों से भरी थीं। अब उसने भी अपनी चड्डी निकाल दी और उसका लौड़ा उत्तेजना से पूरा ही खड़ा था और क़रीब ६.५ इंच का मोटा गोरा लौड़ा राज से थोड़ा ही छोटा था।

अब राज बोला: माँ आंटी हम तो पानी में जा रहे हैं, आप भी आयिये ना। ये कहते हुए वह पानी में कूद गया और उसके पीछे नदीम भी कम पानी में उतर गया।

नमिता और आयशा ने एक दूसरे को देखा। तभी आयशा ने देखा कि उसका पति भी नंगा होने लगा है।जैसे ही वह नंगा हुआ उसका सुकड़ा हुआ हथियार देख कर नमिता बोली: सच में बिचारे के साथ बहुत अत्याचार हुआ है।

आयशा: सिर्फ़ उनके साथ हीं नहीं मेरे साथ भी।

नमिता: हाँ सच तेरे साथ भी।

आयशा ने देख तब तक वह भी पानी में उतर गया था।

राज गहरे पानी में तैर रहा था और उसका बालों से भरे कठोर चूतर अलग से दिख रहे थे। अब नदीम भी कम पानी में तैरने की कोशिश कर रहा था। पर बीच बीच में खड़े होने की वजह से उसका लौड़ा भी दिख जा रहा था।कमाल ( नदीम के अब्बा) भी तैरने लगा और उसका भी बड़ा सा पेंदा पानी के ऊपर से दिख रहा था।

अचानक राज चिल्लाया: अरे माँ आप और आंटी भी आओ ना।

नमिता मुस्करायी और अपनी साड़ी खोलने लगी। उसके कहने पर आयशा ने भी अपनी साड़ी खोल दी। अब नमिता ने ब्लाउस और पेटिकोट भी उतार दिए। ब्रा और पैंटी में मस्त गदराई हुई दिख रही थी, आयशा ने अपने होंठों पर जीभ फेरी।

उधर आयशा भी अब ब्लाउस और पेटिकोट में आ चुकी थी, और नमिता उसकी ब्रा में क़ैद चूचियाँ देख कर बोली: यार तुम तो मस्त माल हो। चलो ज़रा बाथरूम में चलते हैं।

वो पूल के साथ ही बने बाथरूम में घुसीं और नमिता ने आयशा को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके होंठ चूसते हुए उसकी ब्रा खोलकर उसकी चूचियाँ दबाने लगी।

आयशा भी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके नमिता की ब्रा खोल कर उसकी चूचि चूसने लगी और बोली: हाय्य्य्य्य्य क्या मस्त बड़ी बड़ी चूचियाँ हैं। आऽऽऽऽऽह कितना रस इनमे । नमिता भी उसकी चूचि चूसी और फिर एकदम से नीचे बैठ कर उसकी पैंटी खोल दी और उसकी बुर में अपना मुँह डाल कर उसे चूमने और चूसने लगी।

आयशा भी हाय्य्य्य्य्य्य्य दीइइइइइइइइइइइदी कहकर उसका मुँह अपनी बुर में दबा दी।

अब आयशा भी बैठी नमिता की पैंटी उतारके उसकी फूली हुई बुर को चूसने लगी । अब दोनों गरम हो चुकी थीं।

नमिता: चल बाहर चलते हैं। हम बाद में पूरा मज़ा करेंगे।

आयशा उठके उसके साथ बाहर आयी और अब दोनों पूरी नंगी थीं।

राज और नदीम इनको इस रूप में देखकर मस्त होकर अपने लौड़े हिलाने लगे।

दोनों नंगी औरतें अब पूल में उतरने लगीं ।

 
राज और नदीम उन दोनों हसीन औरतों को नंगे पानी में उतरते देख रहे थे जो कि रिश्ते में उनकी माँ थीं, पर अभी वह उन दोनों को वासना भरी नज़रों से देखकर चुदायी के लिए जैसे पागल से हो रहे थे ।

राज तो ख़ैर आयशा को चोद चुका था पर नदीम के लिए नमिता एक ऐसा फल थी जिसे वह अभी भी चखा नहीं था। नमिता की हिलती हुई बड़ी बड़ी छातियाँ नदीम को घायल किए जा रही थीं। दोनों पानी में उतर कर तैरने लगी। राज भी तैरते हुए उनकी तरफ़ गहरे पानी में गया और जब वो दोनों एक किनारे पर सीढ़ी को पकड़कर सुस्ता रही थीं तो उनके पास जाकर बोला: माँ बहुत गहरायी में तैर रही हो आप।

नमिता: इसी में तो मज़ा आता है।

आयशा: तुमको तो गहरायी में डुबकी लगाने की आदत है।

और वह दोनों डबल मीनिंग वाली बात करके हँसने लगीं।

राज: आंटी मुझे नहीं इसको गहराई में जाने की आदत है।

ये कहते हुए वह बाहर आया और अपने लौड़े की तरफ़ इशारा किया।

अब वह उनके पास पानी में पैर लटका कर बैठा था। नमिता ने आयशा को देखा और इसके लौड़े को सहला कर बोली: कौन पहले चूसेगा तुम या मैं?

आयशा भी एक हाथ से अपने बदन को सहारा देती हुई पानी के अंदर से ही बोली: आपका अपना माल है, पहले मैं चूस देती हूँ। यह कहते हुए उसने भी लौड़ा सहला दिया।

नमिता: यहाँ गहरे पानी में दिक़्क़त होगी चलो वहाँ चलो जहाँ नदीम बैठा है वहाँ कम पानी है।

अब तक आयशा लौड़े के सुपाडे को चूमने लगी थी। अपनी जीभ उस पर फिराकर बोली: हाँ यहाँ गहरे पानी में तो एक हाथ अपने को सम्भालने में लग जाएगा। मुझे तो एक हाथ से बॉल्ज़ सहलाने में और दूसरे हाथ से लौड़ा पकड़के चूसने में मज़ा आता है।

अब राज उठकर नदीम के पास बैठ गया। दोनों औरतें भी तैर कर उनके पास चली आयीं। अब आयशा राज के लौड़े को सहलायी और उसके बॉल्ज़ को दूसरे हाथ से दबाने लगी। आयशा ने अब उसे चूसना शुरू किया और मज़े से उसके सुपाडे पर जीभ भी फेरने लगी। राज आऽऽहहह आंटी कहता हुआ उसके सिर को दबाके मज़े से भर गया।

नमिता भी यह सब देख कर गरम हो गयी और नदीम के लौड़े को पकड़ा और सहलाने लगी और अब वह भी उसके बॉल्ज़ को भी सहलाई और उनको एक एक करके चूसने लगी।

थोड़ी देर बाद वह उसके लौड़े को चूसने लगी। अब दोनों औरतें एक दूसरे के बेटे का लौड़ा चूसने लगी। दोनों के सिर ऊपर नीचे हो रहे थे। और राज और नदीम उनकी छातियाँ दबाकर मस्ती से भर रहे थे।

अब नदीम बोला: आऽऽऽहहह आंटी आप तो बहुत मस्त चूसती हैं।

राज: आऽऽऽहहह आंटी क्या चूस रही हो, मज़ा आ गया। चलिए ना चुदायी करते हैं।

नदीम: हाँ आंटी मुझसे भी रुका नहीं जा रहा है ।

राज: माँ, चलो ना वो सामने तख़्त पर चलते हैं।

अब दोनों औरतें अपना सिर उठायी और अपना मुँह पोंछती हुईं पानी के बाहर निकलीं । राज ने आयशा का हाथ पकड़ा और उसके हाथ को पकड़कर तख़्त पर लिटा दिया और उसके ऊपर आकर उसके होंठ चूसने लगा। आयशा भी उससे लिपट गई। आयशा का हाथ राज के लौड़े को सहलाने लगा ।

उधर नमिता को तख़्त पर लिटा कर नदीम उसकी चूचियों को दबाते हुए चूसने लगा। नमिता भी उसका सिर अपने सीने पर दबाकर सी सी कर रही थी।

दोनों तख़्त क़रीब एक फूट के ही दूरी पर थे। दोनों लड़के एक दूसरे की माँ पर चढ़े हुए थे।

अब नमिता ने अपनी जाँघें खोल दी और ख़ुद ही नदीम का लौड़ा अपने हाथ में ले लिया और उसको अपनी बुर में लगाकर नीचे से धक्का लगायी और उसके लौड़े को अपने अंदर समा लिया और चिल्लायी: आऽऽऽहहहह ।

अब नदीम भी उसकी चूचि पीते हुए अपनी कमर हिलाकर मस्ती से उसे चोदने लगा। अब नमिता की हाऽऽऽय्यय और उइइइइइइइइइइ की आवाज़ निकल रही थी।

राज भी आयशा की चूचि पीकर मस्त हो चला था और उसने भी आयशा की बुर में तीन ऊँगली डाली और उसके गीलेपन से ख़ुश होकर अपना लौड़ा वहाँ सेट किया और खचाक से एक धक्के में ही आधा अंदर कर दिया। अब आयशा की चीख़ निकली और हाय्य्य्य्य्य कहकर उसके चूतरों को दबाने लगी। उसने अपने दोनों पैर भी उसके चूतरोंपर रख दिया और नीचे से गाँड़ उछाल कर मज़ा लेने लगी।

दोनों जोड़ियों की चुदायी अब पूरे उफान पर थी और फ़च फ़च और आऽऽह और हाऽऽय्यय और मरीइइइइइइइ उईइइइइइइइइ और चोदोओओओओओओओ बेटाआऽऽऽऽऽ फ़ाऽऽऽऽऽऽऽड़ दो हम्म्म्म्म्म की आवाज़ें गूँज रही थी।

तभी नमिता ने देखा की राज आयशा की ज़बरदस्त चुदायी कर रहा है। उसकी आँख आयशा से मिली और दोनों मुस्कुराते हुए चूदने लगीं।

राज भी नदीम को देखा और दोनों ख़ुश दिखे और चुदायी को अपने अंजाम तक ले जाने लगे।

तभी नमिता ने देखा कि कमाल एकदम उसकी कमर के पास खड़ा होकर चुदायी का मज़ा ले रहा था। उसे थोड़ा अजीब लगा कि वह अपने सूखे हुए लौंडे को हिला भी रहा था।

नदीम: आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह राज तेरी माँ मस्त चुदवा रही है, हाय्य्यय क्या मस्त बुर है साली की।

राज: ज़ोर से चोद साले , माँ को ज़बरदस्त चुदायी में ही मज़ा आता है।

नदीम: हाँ तू भी अम्मी को मज़े से चोद , इनको भी रँडी की तरह चुदवाने की आदत है।

राज: ह्म्म्म्म्म ले साली रँडी ले और ले । कहकर धक्का मारने लगा।

नदीम: आह्ह्ह्ह्ह आंटी आप भी रँडी हो ना? बोलो ना?

नमिता: आऽऽहहह हाँ मैं भी आऽऽहहहह रँडी हूँ और आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह और ज़ोर से चोदोओओओओओओओ

अब राज और नदीम के लौड़े एंजिन के पिस्टन की भाँति चल रहे थे। और जल्दी ही चारों आगे पीछे ज़ोर से आह्ह्ह्ह्ह और ह्म्म्म्म्म्म करके झड़ गए।

जैसे ही वह चारों अपनी पीठ के बल लेटे , अचानक नमिता ने देखा कि कमाल आयशा की बुर में अपना मुँह डाल के उसकी बुर में से निकल रहा राज और आयशा का मिश्र रस चाट रहा है। उसके बाद वह राज के थोड़े से नरम पड़ चुके लौड़े का रस भी चाटने लगा।

अब वह दूसरे तख़्त पर आके पहले नदीम का लौड़ा चाटा और फिर नमिता की आँखों में झाँकते हुए उसकी बुर भी चाटने लगा । नमिता की हाय्य्यय निकल गयी यह सोच कर कि वह अपने ही बेटे का रस पी रहा है।

जब वह हट गया तब नदीम बोला: आंटी माफ़ कर दीजिए मैंने आपको गाली दी। असल में उत्तेजना में मेरे मुँह से निकल गयी।

नमिता: अरे बेटा कोई बात नहीं। बल्कि मुझे तो मज़ा आया और मेरी हवस और बढ़ गयी थी।

आयशा: हाँ सच अच्छा लगता है उस समय।

राज: किस समय आंटी?

आयशा उसके लौड़े को हिलाकर बोली: बदमाश उस समय जब तू इसको अंदर डालके चोदता है। हा हा ।

राज : आह आंटी सच में आज आपको इतने दिन बाद चोद कर मज़ा आ गया।

नदीम: हाँ आंटी आपकी भी बुर बहुत मस्त है सच मैं तो आपको चोद कर धन्य हो गया।

कमाल वही खड़ा सबकी बातें सुनकर मुस्कुरा रहा था और बोला: तुम लोगों को भूक नहीं लगी क्या?

नमिता: हाँ भाई जान चलिए मैं खाना लगती हूँ । बस एक बार पूल में डुबकी मार लूँ।

फिर सब पूल में नहाए और सुखाकर डाइनिंग टेबल पर बैठे।

नमिता और आयशा खाना लाने किचन में गयीं।

नमिता: मज़ा आ गया , तेरा बेटा तो मस्त ट्रेन हो गया है चुदायी में।

आयशा: हा हा और राज क्या कम चोदू है?

नमिता: हा हा हमने अपने बेटों को चुदायी की अच्छी ट्रेनिंग दी है। पक्के चुदक्कड हो गयें हैं दोनों। ये कहते हुए उसने आयशा की चूचि दबायी और बोली: हम दोनों का प्रोग्राम कब होगा

आयशा : आआऽऽऽऽह दीदी मैं भी तो मरी जा रही हूँ उसके लिए कि कब मैं इसको चूसूँगी? ये उसने नमिता की बुर सहलाते हुए कहा।

दोनों हँसने लगी और खाना लगायी ।

खाना खाते हुए दोनों की चूचियाँ टेबल पर रखी हुई थी। तीनों मर्द ये दृश्य देखकर मस्त हो रहे थे ।

खाना खाने के बाद सब सोफ़े पर बैठे। राज नमिता की गोद में लेट गया। और नदीम के दोनों तरफ़ उसके माँ बाप बैठ गए। सब TV देखते हुए बातें करने लगे।

आयशा ने नदीम को चूम लिया। सबकी आँखें वहाँ ही चिपक गयीं। जल्दी ही नदीम का लौड़ा सख़्त होने लगा और नदीम आयशा की चूचि पीने लगा। आयशा भी अपना हाथ उसके मर्दाना सीने पर फेर रही थी और उसके निपल्ज़ को नोच रही थी।

राज का भी लौड़ा खड़ा होने लगा। नमिता उसे सहलाने लगी। राज भी उसकी चूचि चूसने लगा।

तभी नदीम नमिता को बोला: आंटी आप अब्बा से अपनी बुर चटवाओ । आपको मज़ा आ जाएगा। क्यों अम्मी सच है ना?

आयशा : हाँ दीदी आप चटवा के देखो आपको मस्त मज़ा आ जाएगा।

राज बोला: माँ चलो ना एक राउंड और करते हैं।

नमिता: अरे थोड़ा साँस तो लेने दे अभी तो खाना खाया है। एक काम करो पीछे एक जंगल है राज, इनको घुमा कर लाओ ना।

राज: ठीक है माँ , नदीम चलो घूम कर आते है । वहाँ कोई भी नहीं होता इसलिए कपड़ा भी पहनने की ज़रूरत नहीं है।

कमाल: मैं भी चलता हूँ।

 
अब तीनों पीछे के जंगल में पहुँचे और हरयाली का आनंद लेने लगे ।

कमाल ने उन दोनों के साथ गे सेक्स किया। (यह मैंने edit कर दिया है)

फिर सब हाँफते हुए थोड़ी देर आराम किए और वापस फ़ार्म हाउस की तरफ़ चल पड़े। पूल के पास के बाथरूम में सफ़ाई करके घर के अंदर पहुँचे और कमाल तो सोफ़े पर ही लेट गया। जबकि राज और नदीम बेडरूम के ओर चल दिए।

उधर जब ये घर के पीछे जंगल की ओर गए तभी आयशा आकर नमिता की गोद मेंलेट गयी और नमिता ने उसके होंठ चूमते हुए उसकी चूचि दबायी और बोली: तो क्या मूड है डार्लिंग?

आयशा: वही जो आपका मूड है डार्लिंग! यह कहते हुए उसने भी नमिता की चूचि दबा दी। इनको वापस आने में कितनी देर लगेगी?

नमिता: आधा घंटा तो लगेगा ही कम से कम।

आयशा हँसते हुए बोली: अगर कमाल की चली तो वह बिना गाँड़ मरवाए वापस नहीं आएगा।

नमिता: कौन मारेगा नदीम?

आयशा : मुझे तो लगता है कि वह आज राज से ही मरवाएगा। नदीम से तो वह क़रीब क़रीब रोज़ ही मरवाता है।

नमिता: ओह, चलो फिर हमारे पास भी समय है चपटी चपटी खेलने का।

अब दोनों हँसते हुए बिस्तर पर आकर आमने सामने होकर लेट गयी और एक दूसरे को चूमने लगीं। फिर वो एक दूसरी की चूचियाँ दबाने और चूसने लगीं। अब नमिता गरम होकर आयशा की बुर पर हमला की और उसको ऊँगली करते हुए चूसने लगी। जल्द ही आयशा आऽऽऽऽऽऽहहह दीइइइइइइइइइदी कहते हुए अपनी गाँड़ उछालने लगी।

अचानक नमिता उठी और उलटी होके अपनी बुर को आयशा के मुँह पर रख दी और फिर से आयशा की बुर चाटने लगी। अब ६९ में दोनों एक दूसरे को मस्त किए जा रही थीं।

नमिता तो आयशा की गाँड़ भी चाटी और उधर आयशा भी उसकी गाँड़ को जीभ से चोदने लगी।

अब नमिता उठी और आलमारी से एक डिल्डो लायी जिसने दोनों तरफ़ रबर के लौड़े बने हुए थे। उसने लौड़े पर क्रीम लगायी और आयशा की बुर में आठ इंचि लौड़ा पेल दिया और दूसरे सिरे में भी क्रीम लगाके अपनी बुर में धीरे से अंदर कर दिया। अब वो उसके ऊपर चढ़ में जैसे आयशा को चोदने लगी। दोनों वासना की आग में जल रही थीं और कमर उछालके मज़े ले रही थीं ।

अब उनकी चीख़ें कमरे में गूँजने लगीं । जल्दी ही आऽऽऽऽह उइइइइइइइइ कहकर वो दोनों झड़ने लगीं ।

बाद में फ़्रेश होकर दोनों आराम से एक दूसरे की बाहों में नंगी ही सो गयीं।

जब राज और नदीम ने उनको सोते देखा तो ख़ुद भी बग़ल के कमरे में जाकर सो गये।

शाम को चाय पर सब फिर से इकट्ठा हुए।

राज बोला: माँ और आंटी आप लोग अपने अपने जीवन की कुछ ऐसी बात बताओ जो हम सबको मस्त कर दे।

नमिता: ऐसी क्या बात बताएँ?

आयशा: मैं समझी नहीं, कोई उदारहण दो ना?

राज: जैसे आपकी सील किसने तोड़ी? या आपकी सबसे यादगार चुदायी किसके साथ हुई थी? वग़ेरह वग़ेरह ।

आयशा: देखो तो क्या बक रहा है ये लड़का?

नमिता: ये कैसी बातें कर रहा है?

राज : माँ बताओ ना ।

नदीम: हाँ अम्मी बताओ ना।

कमाल: अरे आयशा की सील के बारे में तो मैं भी बता सकता हूँ।

नदीम: अब्बा हमको अम्मी के मुँह से सुनना है।

आयशा: ओह यह कहने में मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा है, लेकिन ठीक है सुनो--

मैं अपनी यादगार चुदायी की बात बताती हूँ। बात ज़्यादा पुरानी नहीं है-------

आयशा बोलने लगी:::

बात ज़्यादा पुरानी नहीं है- जब कमाल का ऐक्सिडेंट हुआ तो मेरी जेठानी मेरे साथ रहने के लिए आ गयी क्योंकि ये तो अस्पताल में पड़े थे और नदीम और मैं ही सम्भाल रहे थे । ज़ेठ जी भी आए थे पर कुछ दिन रह कर जेठानी को छोकर वापस चले गए।

कुछ दिनों बाद ही डॉक्टर ने कह दिया कि ये हमेशा के लिए नपुंसक हो गए हैं। मुझपर तो बिजली सी गिर गयी और मैं हताश हो गयी। मेरी जेठानी सलमा मुझसे उम्र में २ साल ही बड़ी है, हम सहेलियाँ बन गयी। हम रात को साथ ही सोती थीं। नदीम अस्पताल में सोता था।

एक दिन उसने मुझे रात को कुछ अजीब तरीक़े से पकड़ कर मेरा बदन सहलाने लगी।

नदीम: माँ खुल के बताओ ना जैसे मुझे और अब्बा को बताया था।

आयशा: ओह तू भी ना, अच्छा चल बताती हूँ, तो वह मेरे होंठ को चूमते हुए मेरी छाती दबाने लगी। मेरे लिए ये एक नया अनुभव था पर मैं प्यासी थी इसलिए मैंने उनको सब करने दिया और चुपचाप पड़ी रही। फिर वह मेरी nighty के ऊपर से मेरी बुर दबानी लगी।अब मैं अपने आप को नहीं रोक पायी और आह करके उससे चिपट गयी। जल्द ही वह मेरी नायटी उतार दी और ब्रा में क़ैद मेरी छातियों को चूमने और दबाने लगी। मेरी ब्रा उतार के वह बहुत देर मेरी छातियों को चूसी और पैंटी खोल के मेरी गीली बुर को ऊँगली से मस्त कर दी। और अब वह अपने कपड़े भी निकाल के नंगी हो गयी। अब मैं भी उसकी छाती सहलाने लगी और उसने मेरा हाथ पकड़कर अपनी बुर पर रखा और बोली: आऽऽऽहहब आयशा , देख कितनी प्यासी है मेरी बुर आऽऽहहह ज़रा ऊँगली कर दे ना। अब हम दोनों एक दूसरे की बुर में ३-३ उँगलियाँ डाल के मज़ा ले रहे थे।

फिर वह बोली: आओ मेरे मुँह पर अपनी बुर रख के ऐसे बैठो जैसे मूतने के लिए बैठती हो। मुझे बड़ा अजीब लगा पर मैं उसके मुँह पर बैठ गयी और उसने मेरी बुर की फाँकों को चूम और चाट कर मस्त कर दिया और जब उसने मेरी बुर की फाँकों को फैलाकर उसने अपनी जीभ डालने के बाद उसको चाटना चालू किया तो मैं सिर्फ़ आऽऽऽहहह। हाऽऽऽऽय्यय ही कर सकी और सिर्फ़ ५ मिनट में मेरा पानी छूट गया और वह उसको पी गयी।

थोड़ी देर बाद उसने मुझे भी बुर चाटना सिखाया और मैं भी उसको बहुत मज़ा दी ।

अब तक नमिता का हाथ अपनी बुर पर चला गया था और वह उसमें दो ऊँगली डालके हल्के से हिला रही थी। अचानक कमाल उठा और आके नमिता की जाँघों को फैलाकर उसके बीच में उसकी बुर को चाटने लगा। अबके नमिता ने भी अपनी टाँगें उठाकर उसकी कंधों पर रखी और मज़े से चूसवाने लगी।

आयशा आगे बोली: ऐसे ही समय बीतता गया और कमाल घर आ गए। अब सलमा वापस जाने के लिए ज़ेठ जी को बुलायी और मुझे बोली कि इस बार तुमको तुम्हारे ज़ेठ जी से चुदवाऊँगी।

मैंने कहा कि छी क्या बोल रही हो। इस पर वह बोली: अरे इसने क्या है इनकी तो तुझपे कई दिनों से नज़र है।

कुछ दिन बाद ज़ेठ जी आए और मेरे सामने जेठानी जो को चूमने लगे। जब मैं वहाँ से जाने लगी तो वो हंस के बोले: अरे बहु कहाँ जा रही हो तुम भी प्यार करवा लो। पर मैं भाग गयी।

कुछ समय बाद सलमा आइ और बोली: चलो भाई जान बुला रहे हैं। कमाल को वह भाई जान बोलती थी।

मैं कमाल के कमरे में पहुँची तो वह बिस्तर पर बैठे हुए थे। ज़ेठ जी बग़ल में बैठे थे। अब कमाल बोले: देखो आयशा मैं जो बात कहने जा रहा हूँ तुमको अजीब सी लगेगी पर ये सच्चाई तुम्हें स्वीकार करनी होगी।

मैं बोली: वह तो मैं स्वीकार कर चुकी हूँ। आप चिंता मत करिए।

तभी नमिता की हाय्य्य्य्ह्य्य निकल गयी और कमाल उसका पानी पीता चला गया।

अब कमाल अपना मुँह पोंछते हुए बोला: आगे क्या हुआ मैं बताऊँ क्या?

राज: नहीं अंकल आंटी को कहने दीजिए।

राज ने आयशा की चूचियाँ दबाते हुए उसको मस्त कर दिया और वह भी उसके पूरे खड़े लौड़े को सहालते हुए बोलने लगी:::

कमाल बोले: देखो रानी जिस्मानी ज़रूरत तो सबकी होती है, अब क्योंकि मैं तुम्हारी ज़रूरत पूरी नहीं कर सकता इसलिए तुम्हें घर के ही सदस्यों से ही चुदवाना चाहिए और मैं चाहता हूँ की भाई जान तुम्हें चोद कर तुम्हारी प्यासी बुर को शांत करें।

मैं : ये कैसे हो सकता है? वो तो मेरे ज़ेठ हैं।

कमाल: तो क्या हुआ ? मेरे भी तो बड़े भाई हैं।

मैं नाटक करते हुए बोली: और जेठानी जी का क्या?

सलमा: मुझे कोई इतराज नहीं है। घर की बात घर में ही रहनी चाहिए।

कमाल: चलो अब भाई जान की गोद में बैठो और उनसे मज़ा लो।

सलमा ने मुझे हल्के से धक्का देकर ज़ेठ की गोद में बिठा दिया। उनकी गोद में बैठते ही मुझे उनके खड़े लौड़े का अहसास हुआ और मैं चिहुंक उठी आह्ह्ह्ह्ह करके।

सलमा हँसके बोली: क्या डंडा चुभ गया?

मैं शर्मा गयी। अब कलाम ने कहा: भाई जान चूचि दबाईये इसकी मस्त टाइट हैं। ये कहते हुए कमाल ने भाई जान का हाथ पकड़कर मेरी छातियों पर रख दिया। और ज़ेठ जी ने उनको मस्ती में आकर मसल दिया और मैं उफ़्फ़्फ़्फ कह उठी। ज़ेठ जी भी अब मस्ती से मेरे होंठ और गाल चूमते हुए मेरी चूचियाँ दबा रहे थे। अब मैं भी मस्त होकर उनका साथ देनी लगी और अपने चूतरों को उनके लौड़े पर दबाने लगी।

अब उन्होंने मेरा ब्लाउस उतारा और ब्रा भी खोल दी और सबके सामने मेरी चूचियाँ चूसने लगे। मेरा उत्तेजना के मारे बुरा हाल था ,हालाँकि जेठानी से चपटी चपटी चल रही थी पर एक लौड़े के लिए मेरी बुर बहुत प्यासी हो रही थी।

अब वो मुझे खड़ा किए और पेटिकोट उतार के मेरी जाँघों को सहलाए और झुकके वहाँ चुमें और फिर पैंटी खोलकर मेरी चिकनी बुर को देखकर सहलाए और मस्त होकर बोले: आह्ह्ह्ह्ह सलमा देख क्या मस्त चिकनी बुर है आयशा की?

सलमा: सिर्फ़ देखेंगे कि कुछ करेंगे भी, बेचारी बहुत प्यासी है।

कलाम : आओ ना यहाँ लेटो । यह कहकर मुझे अपने बिस्तर पर लिटा दिए।

अब ज़ेठ जी मुझे देखते हुए अपने कपड़े उतारने लगे। वह बहुत हट्टे क़ट्टे हैं और उनकी चड्डी में से उनका लौड़ा बहुत ही बड़ा सा दिख रहा था । वह सलमा को बोले: चलो मेरी चड्डी उतारो और लौड़ा चूसो । सलमा ने मज़े से चड्डी के ऊपर से ही पहले लौड़े को दबाया और फिर उनकी चड्डी खोल दी और उनका बड़ा सा लौड़ा हम सबको मस्त कर दिया। अब उसने अपने पति के लौड़े को चूसना शुरू किया और ज़ेठ जी आह्ह्ह्ह्ह करने लगे।

थोड़ी देर बाद वह बोले: रानी जानता हूँ कि तुम भी बहुत प्यासी हो पर पहले मैं एक बार आयशा को चोद लूँ फिर तुमको भी मस्त करूँगा।

यह कहकर वो मेरे ऊपर आए और मेरे होंठ चूसते हुए मेरी छातियाँ मसलने लगे। मैं भी मज़े से उनके चुम्बन का जवाब देने लगी। फिर ज़ेठ जी नीचे आके मेरी बुर को चूसे और मैं चीख़ें मारने लगी। अचानक वो कलाम को बोले: बोलो भाई तुम्हारी बीवी को चोद दूँ?

कलाम ने उनका लौड़ा पकड़ा और मेरी टाँगें फैलाके ऊपर उठा दी और उनके लौड़े को मेरी बुर के छेद में रखा और उसकी फाँकों को फैलाकर बोले: चलो पेल दो मगर धीरे से भाई जान आपका लौड़ा मेरे से बहुत बड़ा है । हो सकता है आयशा को थोड़ा दर्द हो।

अब ज़ेठ जी एक धक्का लगाए और आधा लौड़ा अंदर चला गया और मैं दर्द से चिल्लायी: आऽऽऽऽऽहहहह भाईइइइइइइइ धीरे सेएएएएएएए उईइइइइइइइइइइइ दुखताआऽऽऽऽऽऽ है नाआऽऽऽऽ

वह बिना रुके एक और धक्का मारे और अपने लौड़े को जड़ तक मेरे अंदर घुसेड़ दिए। मैं हाय्ह्य्य्य्य्य कर उठी।

अब वो मेरी चूचि पीने लगे और मेरे निपल्ज़ को मसलने लगे। जल्द ही मैं भी गरम हो गयी और अपने चूतर को उठाकर उनको चोदने का इशारा की ।अब तो जैसे उनको मन माँगी मुराद मिल गयी हो , वो मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे। अब मैं भी कमर उठा कर चुदवा रही थी। उस दिन पहली बार मुझे किसी ने गालियाँ दे दे कर चोदा था। सच मज़ा दुगुना हो गया था।

राज उसकी नाभि में ऊँगली फेरता हुआ पूछा: आंटी क्या गाली दिया उन्होंने?

आयशा: आऽऽहहह क्या नहीं बोला। वो बोले : साली रँडी अब तू मेरी छिनाल क़ुतिया बन गयी है। बोल है की नहीं।

मैं: आऽऽऽह हाँ हूँ।

वो: मादरचोद क्या है ? अपने मुँह से बोल।

मैं: मैं आपकी रँडी हूँ आपकी छिनाल क़ुतिया हूँ।

वो: तू मेरी गाँड़ में ऊँगली डाल बहनचोद और उसको चाट।

मैंने वैसा ही किया और चाट के बोली: आह्ह्ह्ह्ह्ह भाअअअअअअअअअइइइइइइइ जाआऽऽऽऽऽऽन्न्न्न्न्न्न ।

अब वो मुझे और ज़ोर से गाली देते हुए चोदने लगे।

 
मैं तो पागल सी होकर उछल कर चुदवाती हुई झड़ने लगी। मैं वहाँ लेटी हुई हाँफ रही थी। तभी वह खड़े हुए और सलमा की साड़ी उठाकर उसकी पैंटी उतार दिए और उसको बिस्तर के सहारे झुकाके उसकी बुर में पीछे से अपना लौड़ा डाल कर उसको भी चोदने लगे। सलमा भी अपनी कमर हिला हिला के चिल्ला चिल्ला के चुदवाने लगी। वह सलमा को गालियाँ दे दे कर चोद रहे थे। वो बोले: ले बहन की लौड़ी ले और ले मेरे लौड़ा आऽऽहहहह। हम्मनन और साली क़ुतिया क्या मस्त बुर है तेरी आह मादरचोद ले ले और ले । कहते हुए ज़ोर ज़ोर से चोदते हुए वो दोनों झड़ने लगे।

उस रात को फिर से मेरी ज़बरदस्त चुदायी हुई और अगले दिन जाने के समय वह मेरे सामने कमाल को बोले: देखो मैं तो जा रहा हूँ पर अभी भी तुम्हारे घर में एक मर्द है तुम्हारा बेटा नदीम । मैं चाहता हूँ कि वह अब अपनी माँ को चोदे वरना ये बाहर वालों से चुदवयेगी और सबकी बदनामी होगी।

मैंने इस बात का काफ़ी विरोध किया पर मेरी एक नहीं चली और आख़िर में कमाल ने मुझे अपने ही बेटे से भी चुदवा ही दिया। बाक़ी की बातें तुम सब जानते ही हो।

आयशा के चुप होते ही नदीम उसकी चूचियों पर टूट पड़ा और राज उसकी जाँघों के बीच आकर उसकी बुर को चाटने लगा।

नमिता मुस्कुरा के उनको देख रही थी। वह थोड़ी शांत थी क्योंकि कमाल ने उसकी बुर चूसके झाड़ दिया था।

अब आयशा भी दोनों के लौड़े सहला रही थी।

अब राज आयशा को खड़े किया और उसको बैठे हुए नदीम का लौड़ा चूसने को कहा और ख़ुद उसको झुकाके उसकी बुर में अपना लौड़ा डाला और चुदायी करने लगा। आयशा अपनी कहानी सुनाते हुए बहुत गरम हो गयी थी और वह अपनी गाँड़ हिलाके चुदवाने लगी। कमाल भी उठकर आयशा की बुर के नीचे आकर राज के लौड़े और आयशा की बुर पर जीभ फिराए जा रहा था।

जल्द हो नदीम ने अपना माल अपनी माँ के मुँह में छोड़ दिया और उधर राज भी उसकी बुर में झड़ने लगा और आयशा भी आऽऽह्ह्ह्ह्ह मैं गइइइइइइइइइइइइ कहके झड़ने लगी।

अब कमाल ने आयशा की बुर में अपनी जीभ डालके उसके और राज के रस का पान करना शुरू किया।

अब सब लोग शांत होकर बैठ गए और बाथरूम से फ़्रेश होकर आए।

आयशा चाय बनाके लायी और सब लोग चाय पीने लगे।

नदीम नमिता से बोला: आंटी, अम्मी ने तो अपनी चुदायी की कहानी सुना दी , अब आपकी बारी है। आंटी आप बताओ ना आप पहली बार कब और किससे चुदीं ?

राज: मतलब आपकी सील किसने तोड़ी?

नमिता हँसते हुए बोली: ओह तो तुमको मेरे पहले दर्द की कहानी सुननी है???? -----------

नमिता कहने लगी:::::

मैं कभी भी पढ़ाई में अच्छी नहीं थी और ये भी एक कारण है कि मैं चाहती हूँ कि राज ख़ूब पढ़े। मैं जब ग्यारहवीं में पहुँची तो मैं अपनी क्लास में सबसे बड़े उम्र की लड़की थी। मेरा बदन भी थोड़ा ज़्यादा ही भरा हुआ था मेरी क्लास की अन्य लड़कियों की तुलना में।

नदीम उसके पास आके उसकी जाँघ पर हाथ फेरता हुआ बोला: मतलब आप क्लास की सबसे बढ़िया माल थी?

नमिता हँसी और बोली: सही कह रहे हो ।क्योंकि मेरी छातियाँ जल्दी से बड़ी हो चुकी थीं इसलिए सब मुझे एक विशेष नज़रों से देखते थे। स्कर्ट से झाँकती मेरी गोरी जाँघें और टॉप में कसे मेरे कबूतर सबको पागल किए हुए थे। मेरी एक पक्की सहेली थी इशा वो ईसाई थी और साँवली थी पर बदन उसका भी भरा सा था पर मेरे से कम। हम दोनों अपने में ही मस्त रहती थीं और क्लास के लड़कों की तरफ़ ज़्यादा ध्यान नहीं देती थीं। इशा भी पढ़ाई में मेरी ही तरह नालायक थी।

मेरे और इशा में एक ही फ़र्क़ था कि वह चुदायी का मज़ा ले चुकी थी जबकि मैं अभी तक अपनी सील सुरक्षित रखी हुई थी।

वह मुझे अपनी चुदायी की बातें करती रहती थी और मैं भी गरम हो जाती थी। फिर हमारी परीक्षाएँ आ गयीं और हम दोनों का गणित का पेपर बहुत ख़राब हो गया। हम दोनों बहुत चिंतित थीं कि हम फ़ेल ना हो जाएँ। घर वालों की डाँट का बहुत डर था।

अब आख़री पेपर के दिन वह बोली: सुन, मैंने गणित वाले सर से बात की है, रहमान सर हमको पास कर देंगे पर अपनी फ़ीस लेंगे।

मैं बोली: पर कितने पैसे माँग रहे हैं? हम पैसे कहाँ से लाएँगे?

इशा: अरे पगली उनको पैसा नहीं कुछ और चाहिए।

मैं : और क्या चाहिए?

इशा: हमारी जवानी चाहिए।

मैं चौंक कर बोली: मतलब ?

इशा: अरे वह हमें पास करने के लिए वह हमें चोदना चाहते हैं।

मैं: हे भगवान, यह कैसे हो सकता है?

इशा: देख यार अपना तू देख ले , मैं तो अपना तय कर ली हूँ उनके साथ । कल मैं उनके घर जाऊँगी और उनको मज़ा दे दूँगी और अपने नम्बर ठीक करा लूँगी।

मैं: और मेरा क्या होगा? मैं तो फ़ेल हो जाऊँगी।

इशा: ऐसा करते हैं मैं कल उनसे मिल लेती हूँ, फिर तुमको बताऊँगी कि अगर वह सही आदमी होगा तो तुम भी चुदवा लेना और पास हो जाना।

मैं: मतलब? सही आदमी मतलब?

इशा: मेरी बहना, कई मर्द बड़े कमीने होते हैं, वो बहुत तकलीफ़ देते हैं चुदायी के दौरान। और कई बहुत अच्छे होते हैं जो बड़े प्यार से चोदते हैं। तेरा पहली बार है ना इसीलिए मुझे ख़ास चिंता है तेरी।

मैं: वो क़रीब ३५ साल के तो होंगे ही ना? शादी हो गयी है क्या?

इशा: हाँ शादी हो गयी है पर बीवी अक्सर गाँव में रहती है। वह अकेले ही रहते हैं।

मैं: चल फिर तू कल उनसे मिल ले फिर आगे का फ़ैसला करेंगे।

फिर स्कूल की छुट्टियाँ हो गयीं और दो दिन बाद इशा मुझे मिलने आयी घर पर।

मैं: कैसा रहा सर के साथ?

इशा मुस्कुराती हुई बोली: बड़ी उत्सुकता है तुमको ?

मैं: बता ना क्या पास हो जाएगी क्या अब?

इशा: हाँ उन्होंने मुझे नया पेपर दिया और ख़ुद सवाल करवाए और उसी समय नम्बर देकर पास भी कर दिया।

मैं: और वो काम?

इशा अनजान बनते हुए बोली: कौन सा काम ?

मैं शर्माकर: वही चुदायी वाली?

इशा: सच में सर मस्त चोदते हैं। बहुत मज़ा दिया उन्होंने। जानती हो पूरे चार घंटे रोक के रखे और दो बार चुदायी की।

मैं: ओह, तो तू तो पास हो गयी , मेरा क्या होगा?

इशा: तू भी मिल ले उनसे और मज़ा भी ले ले और पास भी हो जा ।

मैं: ओह, पर मुझे डर लगता है, और मेरा पहली बार भी हैं ना?

इशा: बिलकुल मत डरो , बहुत प्यार से करेंगे तुमसे , और उनका हथियार भी सामान्य साइज़ का है। ज़्यादा बड़ा नहीं है।

मैं: ओह, तो तेरी क्या राय है, मिल लूँ मैं भी?

इशा : मैं तो कहती हूँ कल ही मिल ले। तू चाहे तो मैं अभी फ़ोन कर देती हूँ।

मैं: अच्छा कर अभी और पूछ के मुझे कब जाना होगा, उनके पास? तू भी चलेगी ना?

इशा : नहीं तुझे अकेले ही मिलना होगा ।

मैं: चल ठीक है बात कर अभी।

उसने हमारा लैंड लाइन फ़ोन उठाया और उसको स्पीकर मोड में रखकर उसको फ़ोन लगायी और बोली: सर नमस्ते, कैसे है। आप?

सर: मस्त हूँ, तुम्हें मिस कर रहा हूँ।

इशा: सर, मैं आपको कल बतायी थी ना कि मेरी एक सहेली को भी पास होना है, वह आपके पास कल आ जाए क्या?

सर: अरे ज़रूर, क्यों नहीं? दस बजे आने को बोल दो।

इशा: सर , आपको मैंने बताया था ना कि यह उसका पहली बार होगा। आपको आराम से करना होगा।

सर: क्या मैंने तुमको आराम से नहीं किया था? वैसे ही मैं उसकी भी प्यार से लूँगा। तुम निश्चिन्त रहो।

इशा : आप उससे बात कर लो। लो नमिता बात करो।

मैं: सर नमस्ते।

सर: नमस्ते ,बेबी आ जाओ कल दस बजे , तुम्हें पास भी कर दूँगा और बहुत मज़ा भी मिलेगा।

मैं: जी जी सर मैं आ जाऊँगी।

सर: चलो फिर कल मिलते हैं। बाई ।

मैं: बाई।

अब इशा ने मुझे कहा: सर को झाँटे पसंद नहीं हैं। मेरी साफ़ थी तो बड़े ख़ुश हुए । तुम्हारी झाँटे बढ़ी हुई है क्या?

मैं: नहीं मैं साफ़ ही रखती हूँ।

इशा: बस फिर ठीक है। कल दस बजे चली जाना । और उसने मुझे उनका पता दे दिया ।

इशा के जाने के बाद मैं बहुत परेशान थी कि क्या मैंने सही फ़ैसला किया है।

ख़ैर अगले दिन इशा के घर जाने का बहाना बनके मैं सर के घर पहुँची और बेल दबायी। सर ने दरवाज़ा खोला और मुझे देखकर उनकी आँखें चमक उठीं। वो मेरी छाती और मेरी जाँघें देखकर मस्त हो गए थे ।मैं आज भी टॉप और स्कर्ट में थी।

सर: आओ बेबी अंदर आओ।

मैं अंदर आयी और सर ने मुझे सोफ़े पर बैठाया और पानी लाए।

मैं: धन्यवाद सर।

सर: बेबी, क्या लोगी, ठंडा या गरम?

मैं: जी कुछ नहीं।

सर: ओके , अच्छा मैं तुम्हारा पेपर लता हूँ।

फिर वह मुझे मेरा पेपर दिखाया और बोले: देखो कितना ख़राब हुआ है तुम्हारा पेपर ।

मैंने देखा कि मुझे सिर्फ़ १५ नम्बर मिले थे १०० में।

मैं: सर मुझसे गणित होती ही नहीं।

सर: चलो कोई बात नहीं बेबी, हम तुमको पास कर देंगे।

चलो वहाँ टेबल कुर्सी रखी है तुम्हारा पेपर ठीक कर देते हैं।

मैं वहाँ बैठी और वो मुझे सही जवाब दिए । मैंने उसको पेपर में कॉपी कर दिया । क़रीब आधा घंटा लगा और उन्होंने मेरे सामने मुझे ६५ नम्बर देकर पास कर दिया मैं ख़ुश होकर बोली: बहुत बहुत धन्यवाद सर।

सर: सिर्फ़ धन्यवाद ही दोगी या कुछ और भी दोगी?

मैं शर्मा गयी। वह मुझे ले जाकर अपने बेड रूम में के गए और मुझे खींचकर अपने गोद में बिठा लिया। मैं बहुत डरी हुई थी। वो बोले: बेबी, डरो मत। मुझे इशा ने बताया है कि तुम्हारा पहली बार है । डरो मत मैं बहुत आराम से करूँगा और तुमको बहुत मज़ा दूँगा।

अब मेरे नीचे उनका खूँटा गड़ने लगा था। उन्होंने मेरे गाल को चूमा और फिर होंठ चूमने लगे। अब उनका हाथ मेरी छातियों पर आ गया और वह उनको दबाने लगे और मैं भी मस्त हो गयी।

वह बोले: बेबी टॉप उतार दूँ? मज़ा लेना है ना?

मैं: जी ।

वह मेरा टॉप उतारे और मेरी छातियाँ देख कर मस्त हो गए और बोले: बेबी, इतनी बड़ी चूचियाँ इस उम्र में? और वह ब्रा के ऊपर से ही उसको दबाए और नंगे हिस्से को चूमे। फिर वो ब्रा भी उतार दिए। अब मेरी छातियाँ देखकर वो मस्त होकर बोले: आऽऽह कितनी टाइट चूचियाँ हैं । अब वो उनको दबाने लगे। उन्होंने अपना मुँह मेरी छातियों पर रखा और उनको पीने लगे। निपल्ज़ को भी दबा कर मुझे मस्त कर रहे थे। फिर उन्होंने मुझे खड़ा किया और मेरी स्कर्ट निकाल दिए और मेरी जाँघें और पैंटी से फुली हुई बुर देखकर जैसे पागल ही हो गए। अब वो अपने कपड़े उतारने लगे और टी शर्ट उतारे और फिर अपनी पैंट भी निकालके अलग किया। उनकी चड्डी ने खड़ा हुआ लौड़ा मुझे बहुत बड़ा लगा।

अब वो अपना हाथ से मेरे हाथ को पकड़ा और अपने चड्डी के ऊपर से लौड़े पर रख दिया।

मैं तो काँप उठी और बहुत उत्तेजित हो गयी। उनके कहने पर मैंने उनकी चड्डी उतार दी और उनका लौड़ा मेरे सामने था। मैंने पहली बार एक खड़ा लौड़ा इतनी पास से देखा था। मेर बुर गीली हो गई। अब उन्होंने मेरा हाथ अपने लौड़े पर रख दिया और मैंने पहली बार इतनी गरमी महसूस की। उन्होंने मेरा हाथ हिलाके मुझे लौड़ा सहलाना सिखाया।

अब वो मुझे लिटा दिए और मेरे ऊपर आकर मेरी छातियाँ दबाने लगे और बहुत देर तक मेरे होंठ चूसे। मैं भी मस्ती में थी। अब वह मेरी चूचियाँ चूसने लगे। मैं मस्ती से भरकर आऽऽहहहह करने लगी।

अब वो नीचे आकर मेरी पैंटी उतारा और वह बड़ी देर तक मेरी जाँघें फैलाकर मेरी बुर को देखने लगा। फिर उसने वहाँ ऊँगली फेरी और उसके चिकनापन का अहसास करके कहा: आह बेबी, क्या चिकनी बुर है।

फिर वह अपना मुँह मेरी बुर में डालकर उसे चूमा और चूसने लगा। जैसे ही मैंने उसकी जीभ अपनी बुर पर महसूस किया मैं पागल सी हो गयी। अब वह मेरी बुर में ऊँगली डालकर अंदर करने की कोशिश किया और मेरी आह्ह्ह्ह्ह निकल गयी।

वह: ओह, तो सील टूटी नहीं है अभी। चलो मज़ा लो पहली चुदायी का ।

अब वह अपने लौड़े में बहुत सा क्रीम लगाया और मेरी बुर में भी क्रीम लगाया और अपना लौड़ा मेरे छेद पर रखा और बहुत धीरे से धक्का मारा । मेरी चीख़ निकल गयी और वह जैसे तीर सा मेरे छेद में घुसता चला गया। मैं रोने लगी और दर्द से बोली: आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सर निकाल लीजिए ना। दर्द हो रहा है।

वह: अरे बेबी, देखो आधा तो चला गया है। और बात करते हुए एक और धक्का मारे और पूरा लौड़ा अंदर करके मुझसे चिपक गए।

अब वह मेरी चूचियाँ दबाने लगे और चूसने भी लगे। जल्द ही मैं भी गरम हो गयी थी। अब मुझे भी मज़ा आने लगा था।

फिर मैं उनकी चुदायी का आनंद लेने लगी। अब वो मस्ती से कमर दबाकर मुझे चोदे जा रहे थे। मैं भी मस्ती में उनसे पूरी तरह से चिपक गयी थी। जल्दी ही वह भी गरम होकर पूरे ताक़त से मुझे चोदने लगे। मैं आऽऽह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगी। वह भी जल्दी ही झड़ गए।

फिर वो मुझे लेकर बाथरूम गये और मेरी बुर के ख़ून को पोंछकर साफ़ किया और बोले: बेबी डरो नहीं, पहली बार में ये सब होता है। आगे के लिए तुम्हारा रास्ता साफ़ हो गया है। अब ज़िन्दगी भर मज़े से चुदवाना।

फिर उन्होंने मुझे लौड़ा चूसना भी सिखाया और एक बार और चोदे ।

मैं मुश्किल से घर पहुँची पर पास हो गयी। यही है मेरी पहली चुदायी की कहानी।

नमिता की कहानी सुनकर सबके सब मज़े से भर गए। नदीम और राज के लौंडे तो पूरे खड़े थे जिसे वो ख़ुद सहलाकर गरम हो रहे थे। अब वो दोनों अपनी अपनी आंटी को पकड़े और बेडरूम में ले गए और फिर शुरू हुआ तूफ़ानी चुदायी का एक और दौर।

वो चारों एक दूसरे के जिस्म में मानो घुसने की कोशिश कर रहे थे। कमाल भी इनके साथ दे रहा था अपनी तरह से उनके यौनांगों को छू छू के।

चुदाई का यही दौर रात को भी चला। फिर सब थक के सो गए।

 
सुबह आयशा और नमिता फ़्रेश हुए , वो गाउन पहन कर किचन जाके चाय बनायीं। चाय दोनों लड़कों को भी देने के लिए वो बेडरूम में पहुँचीं। दोनों के ऊपर चादर ढकी थी और उनके तंबू तने हुए थे। दोनों अपने बेटे के पास आकर उनको उठायीं और लड़के अपनी अपनी माँ को प्यार किए और चूमने लगे। नमिता ने भी राज के लौड़े को सहलाया और चादर हटा के उसको पूरा नंगा किया। आयशा ने भी नदीम की चादर निकाली और नंगे लौड़े को दबाने लगी। सब चाय पी रहे थे।

फिर आयशा बोली: जाती हूँ कमाल को भी चाय पिला देती हूँ।

फिर वो सब तय्यार होकर नौकरों का इंतज़ार करने लगे।

थोड़ी देर में वो आकर सबको नाश्ता कराए और फिर नदीम और उसका परिवार वापस घर जाने के लिए तय्यार होने लगा।

राज और नमिता उनको बाहर तक छोड़ने गए और वो सब एक दूसरे के साथ लिपटके प्यार किए और फिर से मिलने का वादा करके वो चले गए।

अब नमिता और राज पीछे का दरवाज़ा बंद करके पूल में जाकर कपड़े उतारे और तैरने लगे। वो पूरे नंगे थे।

बाद में बाहर आकर वो तख़्त पर बैठ गए और एक दूसरे से गीले ही चिपककर प्यार करने लगे । नमिता ने अपना होंठ राज के होंठ से सटा दिया और दोनों एक दूसरे के चुम्बन का मज़ा लेने लगे। नमिता का एक हाथ राज के गाल पर था और दूसरा उसकी चौड़ी हल्के बाल वाली छाती पर था और राज का एक हाथ अपनी माँ के गाल पर था और दूसरा उसकी चूचि पर था। अब वो दोनों एक दूसरे के होंठ चूसे जा रहे थे। फिर राज ने नमिता को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया और चुम्बन और प्रगाढ़ होता चला गया। नमिता की गाँड़ में राज का लौड़ा हलचल मचाने लगा।

राज के हाथ उसके गाल से होकर उसकी पीठ पर घूमने लगे और नमिता का हाथ उसके गाल से हटकर राज की पीठ पर आ गया । होंठ अब भी चिपके हुए थे और राज का हाथ अब पीठ से होते हुए नमिता के चूतरों तक पहुँचा और वहाँ दबाकर और उसकी दरार में हाथ डालकर वह बहुत गरम हो गया था।

अब नमिता भी अपने चूतरों के नीचे उसके मस्त लौड़े का अनुभव कर के अपनी कमर हिलाकर उसको अपनी बुर से सटा लिया। अब नमिता अपने चूतरों को हिला के मस्ती से अपनी बुर को उसके लौड़े पर रगड़ रही थी।

राज का एक हाथ चूचि दबाए जा रहा था और निपल भी मसल रहा था। और दूसरा हाथ अब उसकी गाँड़ के छेद पर घूम रहा था। साथ ही वह अब उसकी बुर को भी सहला रहा था।

राज: माँ आपकी गाँड़ भी नहीं मारी नदीम ने?

नमिता: अरे मार लेगा फिर कभी ।

राज: माँ मैं मारू अभी?

नमिता: नहीं बेटा , गाँड़ हमेशा सोने के पहले ही मारा कर, ताकि सुबह तक सामान्य हो जाए। वरना यूँ ही दुखती रहती है, तेरा लौड़ा भी बहुत मोटा है ना।

राज उसको चूमते हुए बोला: ठीक है माँ आज रात को मार लूँगा। अब नमिता उठी और अपने आप को राज की तरफ़ घुमाया और फिर से उसके लौंडे को हाथ में लेकर उसकी गोद में बैठते हुए अपनी बुर के अंदर लेने लगी। जैसे जैसे वह उसकी गोद में नीचे को होने लगी वह उसका लौड़ा अपनी बुर में घुसता महसूस करने लगी। अब फिर से उनके होंठ चिपक गए और राज का एक हाथ अभी भी उसकी चुचि पर ही था और दूसरा हाथ उसके चूतरों को सहारा देते हुए आगे की ओर दबा रहा था ताकि पूरा लौड़ा जड़ तक उसकी बुर में समा जाए।

अब नमिता आऽऽऽहहहह कहकर चूतर उछालने लगी।

नमिता भी हाय्य्य्य्य्य पूउउइउउउउउउरा घुसेएएएएएएएएएएड़ देएएएएएएएए नाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ । राज ने भी अपनी कमर उछाली और पूरा लौड़ा अंदर करके ह्म्म्म्म्म्म कह कर नीचे से धक्का मारने लगा।

अब चुदायी पूरे ज़ोर शोर से चल पड़ी। दोनों मस्ती में आकर आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह फ़ाऽऽऽऽऽऽड़ देएएएएएए मेरे बेएएएएएएएएएटे आऽऽहहहह माँआऽऽऽऽऽऽ बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽऽ हैएएएएएएएएए ।

अब राज ने अपनी जीभ नमिता के मुँह में डाल दिया और वह उसे चूसने लगी।

नमिता उछलकर अपनी बुर राज के लौड़े पर रगड़कर मस्ती से भर उठी। अब राज भी नीचे से धक्का लगा रहा था और बहुत मज़े से उसको चोद रहा था।

अब राज झुकके उसकी चूचि चूसते हुए चुदायी करने लगा। अब नमिता भी चिल्लाकर आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बेएएएएएएएएटा मैं झआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽड़ी। राज भी ह्म्म्म्म्म्म माँआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ मैं भी गयाआऽऽऽऽऽऽऽऽ। और उसने उसकी बुर में अपना रस गिराने लगा। दोनों बुरी तरह से चिपक कर अपने अपने ऑर्गैज़म का आनंद लेने लगे। थोड़ी देर बाद राज का लौड़ा नरम होकर उसकी बुर से बाहर आ गया।

अब वह उठकर बाथरूम गयी और सफ़ाई करके आकर एक तख़्त पर लेट गयी। राज भी बाथरूम से आके उसके पास ही बैठ गया और उसको चूमते हुए बोला : माँ नदीम और आंटी के जाने से अच्छा नहीं लग रहा है ना।

नमिता: हाँ थोड़ा सा अकेलापन आ गया है। वैसे भी आज हमें अपने घर वापस जाना है। कल से तुम्हारा स्कूल वापस से शुरू हो जाएगा।

राज: माँ और कुछ दिन यहाँ रहने को मिल जाता तो मस्त रहता।

नमिता: कल से स्कूल खुल रहे हैं। बस अब फ़ायनल पर ध्यान करके ज़ोर शोर से पढ़ाई करना होगा। तभी अच्छे कॉलेज में अड्मिशन मिलेगी ।

राज: तो माँ आज अभी निकलेंगे क्या? मैं तो सोच रहा था कि आपके साथ बड़े शहर चलूँ और हम माल देखें और मूवी देखें किसी अच्छे रेस्ट्रॉंट में खाना खाएँ। पर आप तो वापस जाने की बात कर रहे हो।

नमिता उसको अपनी बाँह में भरके चुमी और बोली: ऐसा करते हैं कि मैं कार बुलाती हूँ और हम अभी निकल जाएँगे। समान कार में पड़ा रहेगा। और तेरी सारी इच्छा पूरी करूँगी।

राज: माँ पैसा बहुत ख़र्च हो जाएगा ना? थोड़ा आप उलटे लेटो ना, प्लीज़।

नमिता पेट के बल लेट गयी और बोली: अरे कौन सा हम रोज़ इस तरह के ख़र्च करते हैं । चल आज मैं तेरी सब इच्छाएँ पूरी करूँगी।

राज उसकी पीठ सहलाते हुए उसके चूतरों को दबाने लगा और बोला: ठीक है माँ, हम अभी समान पैक कर लेते हैं और कार में रख देते है , फिर राजधानी घूमकर अपने शहर को शाम को वापस आ जाएँगे।

ये कहते हुए वह झुक कर नमिता के चूतरों को दबाते हुए चूमने और काटने लगा।

नमिता : आऽऽऽंब क्यों काट रहा है, नालायक।

राज उसके चूतरों को फैलाकर उसकी गाँड़ पे ऊँगली फिराते हुए बोला: माँ, क्या नशीली गाँड़ है आपकी। अभी चोदने का मन कर रहा है।

नमिता: चल मार ले मेरी गाँड़, पर फिर सब घूमने का प्रोग्राम कैन्सल , क्योंकि तेरा मोटा मूसल मेरी फाड़ देगा और मैं तो चल ही नहीं पाऊँगी।

राज उसके गाँड़ के छेद में अपनी जीभ फिराते हुए बोला: उम्म्म्म्म बहुत टेस्टी है आपकी गाँड़। चलो कोई बात नहीं घर पहुँचकर रात को ही मारूँगा आपकी ये मस्तानी गाँड़ । आऽऽऽह क्या मख़मली है।

नमिता: अगर गाँड़ मस्ती हो गयी हो तो चलें तय्यार होते हैं । राजधानी का रास्ता भी २ घंटे का तो होगा ही।

राज आख़िरी बार और उसके चूतरों के चिकनेपन को अपने गालों में अहसास किया अपने गालों को उसके चूतरों पर रगड़ के उठ गया।

नमिता भी हँसकर बोली: हा हा तेरी दाढ़ी क्यों गड़ा रहा है मेरे पिछवाड़े में।

अब दोनों ने कपड़े पहने और अंदर जाकर अपना सामान पैक किया। नौकर बाहर काम कर रहे थे। राज ने कमरा अंदर से बंद कर लिया।

राज: माँ, आप कुछ नया पहनो ना आज ।

नमिता: जैसे?

राज: जैसे जींस टॉप या स्कर्ट टॉप या लहंगा चोली। सब तो यहाँ रखा है , आंटी के कपड़े।

नमिता: अरे इस उम्र में ऐसे कपड़े मुझ पर अच्छे लगेंगे?

राज: माँ आप इतनी सुंदर हो और आपका बदन इतना सेक्सी है कि आप ऐसे माडर्न कपड़ों में तो पटाखा लगोगी।

नमिता हंस कर बोली: चल हट बदमाश, मुझे पटाखा बनाएगा।

राज: माँ मैं कौन होता हूँ आपको पटाखा बनाने वाला , आप ऐसे ही मस्त पटाखा हो।

नमिता हँसते हुए बोली: चलो ठीक है , यहाँ ये जींस है और ये है स्कर्ट , बोलो कौन सी पहनूँ?

राज: माँ ये स्कर्ट तो आपके पूरे पैर ढक लेगी इससे अच्छा तो जींस ही होगी।

नमिता: ठीक है जींस ही पहन लेती हूँ।

राज: पर माँ , पैंटी मत पहनिएगा।

नमिता: अरे कमाल करता है, पैंटी तो पहननी ही होगी ना।

राज: माँ कोई ज़रूरी नहीं है। ऐसे भी जींस आप पहन सकती हो।

नमिता: चल पहनती हूँ। तू बताना कहीं नंगी तो नहीं दिख रही हूँ मैं।

अब नमिता ने अपनी कुर्ता और सलवार उतार दिया । उसने पैंटी नहीं पहनी थी सिर्फ़ ब्रा ही पहनी थी। उसने अब जींस पहनी और राज बोला: माँ, आह क्या फ़िटिंग है जींस की। आपके चूतरों पर तो जैसे चिपक ही गई है। क्या मस्त लग रही हो आप पीछे से आह्ह मेरा तो खड़ा होने लगा है।

नमिता: बिना पैंटी के नंगी तो नहीं दिख रही हूँ ?

राज: अरे नहीं माँ , कुछ नहीं दिख रहा है। चलो अब कोई सेक्सी ब्रा पहनो।

नमिता: यहाँ कई सेक्सी ब्रा पैंटी हैं। तुम चुन लो जो तुमने पसंद हो।

राज ने बहुत एक सेक्सी नेट वाली ब्रा और एक पतली सी पैंटी जिसमें पीछे की ओर पतली सी एक पट्टी थी पसंद की।

राज: माँ मैंने अपना विचार बदल लिया है आप ये ब्रा और पैंटी पहनो।

नमिता हँसते हुए बोली: चल ठीक है , जैसे तुम कहो।

अब वह अपनी ब्रा उतार दी और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ राज के सामने थीं। वह बोला: लाओ माँ , मैं आपको पहना देता हूँ।

नमिता: सुन वह डीओ ले आ और स्प्रे कर दे।

अब राज डीओ लाया और नमिता ने अपनी बाहँ उठा दी और राज ने अपनी नाक वहाँ डाल कर सूँघा और बोला: माँ क्या मस्त गंध है म्म्म्म्म्म्म ।

नमिता: अरे पसीने की होगी चल स्प्रे कर दे।

अब राज ने उसकी बग़लों में स्प्रे किया और फिर उसको ब्रा पहनाई । पहले उसने कप्स में उसकी चूचियाँ डाली और फिर उसने पीछे से स्ट्रैप लगा दिया। अब वह उसको सामने से देखकर मस्त होकर बोला: माँ क्या कामुक लग रही हो ।

अब राज ने उसकी जींस खोल दी और उसको उतार के नंगा कर दिया। अब वह उसकी बुर को सहलाया और बोला: माँ ये पैंटी पहनकर दिखाओ , मस्त लगोगी इसने। अब वह उसको पैंटी पहनाया और उसकी बुर के ऊपर से उसकी पैंटी छुपा कम रही थी दिखा ज़्यादा दिखा रही थी। लेस में से उसकी चूचियाँ और बुर के हिस्से साफ़ दिख रहे थे। उसने नमिता को घुमाया और उसके चूतरों और उसके दरार में फँसी एक पतली सी पट्टी को देख कर अपना लौड़ा मसलने लगा।

अब नमिता को उसने स्प्रे करके टॉप पहनाया और फिर से जींस पहनाया और बोला: माँ आज तो आप आग लगा दोगी। आऽऽहहह माँ आप चुदक्कड माल लग रही हो। टॉप में से आपकी चूचियाँ तो बहुत मस्त दिख रही हैं। लोगों की आँख तो इसपर ही चिपक जाएँगी।आपकी गाँड़ देखकर लोग आज लौड़े मसलेंगे।

ये कहते हुए उसने नमिता की गाँड़ दबा दी। नमिता की आह्ह्ह्ह्ह निकल गयी।

नमिता: चल अब तू भी तय्यार हो जा । मैं तबतक मेक अप कर लेती हूँ।

राज ने भी एक टी शर्ट और जींस पहनी और ड्रेसिंग टेबल पर आकर कंघी की और नमिता की चूचियाँ दबाके बोला: आऽऽहहह माँ आज तो बिजली गिरेगी माल में।

नमिता: चल हट बदमाश।

राज: तो चले माँ इस शानदार मकान को टाटा करके।

नमिता बोली: अगर मैं सुधाकर से शादी करूँगी तो यहाँ आना जाना लगा ही रहेगा। हा हा ।

अब राज और नमिता अपना सामान लेकर बाहर आए और चाबी दरबान को देकर वह कार से राजधानी की ओर रवाना हो गए।

राज और नमिता एक दूसरे का हाथ पकड़कर बैठे थे और कार हाइवे पर भागी जा रही थी। ------

 
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