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त्यागमयी माँ और उसका बेटा complete

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कार में बैठे हुए राज ने नमिता का पर्स लेकर अपनी गोद में रख लिया और ख़ुद नमिता से सट कर बैठ गया। थोड़ा एक तरफ़ को होने के कारण ड्राइवर को अब राज की हरकत शायद ना दिखे। अब उसने नमिता के हाथ को अपने पैंट पर लौड़े के ऊपर रखा और दबाने का इशारा किया। नमिता का हाथ पर्स के नीचे होने के कारण ड्राइवर को मिरर से भी नहीं दिखेगा।

नमिता मुस्कुराकर उसके लौड़े को दाबने लगी। वह भी अपना हाथ नमिता की जाँघ पर रखकर उसको सहलाने लगा। जल्दी ही वह गरम हो गया और इसने अपनी ज़िपर खोल के नमिता को इशारा किया की वह अंदर हाथ डाल के मज़ा करे। नमिता ने अंदर हाथ डाला और उसके बॉल्ज़ और लौड़े को चड्डी के अंदर से छू कर मस्त होती चली गयी। अब राज ने एक हैंड्बैग नमिता की गोद में रखा और उसकी पैंट खोलकर उसकी पैंटी को सहलाने लगा।

जल्दी ही दोनों गरम हो चुके थे। फिर नमिता फुसफुसाई: चल अब बस कर नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी और क्या पता तू भी झड़ जाए। राज हँसते हुए अपना हाथ वापस ले लिया। पर उसने नमिता को दिखाकर अपनी उँगलियाँ चाटीं। नमिता भी मस्ती में आके अपनी ऊँगली चाटी।

थोड़ी देर में राजधानी आ गयी और शानदार सड़कें और इमारतें दिखनी लगी। ड्राइवर ने एक बहुत बड़े माल के आगे कार रोकी और वह दोनों माल के अंदर चले गए ।

वो कई दुकानों में गए और ख़ूब हँसी मज़ाक़ किए।

नमिता बोली: चल तुझे कपड़े ले दूँ?

राज: क्या ले दोगी जींस या टी शर्ट।

नमिता: दोनों ले ले।

दुकान में काफ़ी भीड़ थी। नमिता एक काउंटर पर टी शर्ट देखने लगी तभी उसको अपने चूतरों पर एक हाथ का अहसास हुआ। वह मुस्करायी और सोची कि क्या लड़का है थोड़ी देर भी सबर नहीं कर सकता। नमिता भी हाथ के स्पर्श से मस्त हो रही थी। फिर वह बोली: राज बस कर, कोई देख लेगा।

तभी उसने देखा कि राज तो सामने खड़ा कपड़े देख रहा है। वह हड़बड़ा कर पीछे देखी तो एक अधेड़ सा आदमी खड़ा था और मुस्कुरा रहा था।

वह वहाँ से दूर चली गयी और राज के पास जाकर खड़ी हो गयी। वह आदमी हँसते हुए चला गया।

अब राज ने कुछ कपड़े पसंद किए। तभी नमिता बोली: देख यहाँ सेक्सी चड्डियाँ भी मिल रही हैं। ले ले अपने लिए।

राज: माँ चड्डी क्या करनी है आपको बिना चड्डी के ही सब दिखाता रहता हूँ।

नमिता: हा हा चल ले ले , बड़ा सेक्सी दिखेगा तू इसमें।

राज: ठीक है माँ आपको कौन सी पसंद है?

नमिता: ये वाली जॉकी की बड़ी सेक्सी है। तुम्हारे बड़े बॉल्ज़ को अच्छा सहारा मिलेगा।

राज: ठीक है माँ आपको ये पसंद है तो यही सही।

नमिता ने राज के कपड़े ख़रीदने के बाद कहा: चल अब खाना खाते हैं।

राज: चलो ड्राइवर कोई अच्छे रेस्तराँ में ले जाएगा।

जब दोनों रेस्तराँ में खाना खाने के लिए टेबल पर बैठे तो नमिता बोली: मैं हाथ धो कर आती हूँ। जब वह हाथ धो रही थी तो उसने देखा कि एक उसकी ही उम्र की औरत इंतज़ार कर रही थी अपनी बारी की। अचानक नमिता को लगा कि वह उस औरत पहचानती है। फिर नमिता बोली: इशा ? तुम इशा हो ना?

इशा: हाँ और तुम नमिता हो ना?

दोनों गलें लगीं। इशा: आज हम २० साल के बाद मिल रही है नमिता: हाँ स्कूल के बाद तो हम मिली ही नहीं ।

इशा: चल तुझे अपने परिवार से मिलाती हूँ। तेरे साथ कौन है?

नमिता: बस मैं और मेरा बेटा हैं। पति का देहांत हो गया है।

इशा: ओह , सॉरी, मेरे पति का बिसनेस है ।

बाहर आके वह नमिता को उस टेबल पर ले गयी जहाँ उसका परिवार बैठा था। नमिता ने देखा कि एक थोड़ा मोटा सा आदमी इशा का पति था। उसके पास एक लड़की एक स्कर्ट टॉप में बैठी थी। उसकी चूचियाँ अभी पूरी तरह से बड़ी भी नहीं हुई थी। उसके सामने एक स्मार्ट लड़का बैठा था और वह इशा को देखा और बोला: माँ कहाँ रह गयी थी आप?

इशा: बेटा इनसे मिलो ये मेरी सहेली नमिता है और ये रोहन हैं मेरा बेटा , १२ थ में पढ़ता है । ये मानसी है मेरी बेटी १० थ में है। ये मेरे पति हैं राकेश ।

नमिता ने राकेश को नमस्ते की और बच्चों को प्यार से मुस्कुरा कर देखी। तभी नमिता ने राज को आवाज़ दी और उसके आने पर बोली: ये मेरा बेटा राज है। १२थ में पढ़ता है। राज ने भी सबका अभिवादन किया।

राकेश: अरे आप लोग यहीं हमारे साथ बैठिए ना, साथ में खाना खाएँगे।

सब बातें करते हुए खाना खाने लगे। तभी नमिता का चम्मच नीचे गिर गया। वह झुकी नीचे चम्मच उठाने और उसकी आँख वहाँ टेबल के नीचे चल रहे खेल पर टिक गयी। उसने देखा कि राकेश का हाथ मानसी के स्कर्ट के अंदर था और वह उसकी जाँघ सहला रहा था। नमिता को थोड़ा सा आश्चर्य हुआ कि यहाँ तो बाप बेटी का चक्कर चल रहा है।

वह सोची कि क्या इशा को इसके बारे में पता है? फिर उसने देखा कि रोहैन भी बार बार इशा से चिपक कर बात कर रहा था।

तभी उसने देखा कि रोहन उसके कान में कुछ बोला और नमिता ने देखा कि उसकी एक बाँह उसकी एक चूची को दबा रही थी। और इशा उससे दूर होने का प्रयास भी नहीं कर रही थी।

नमिता को कुछ अजीब सा लगा ये सब और वो जानती थी कि इशा शादी के पहले भी मज़े से सेक्स का सुख लेती थी। शायद अभी भी कुछ ऐसा ही है।

तभी नमिता ने देखा कि राकेश रोहन को देखा और मानसी के कान में कुछ बोला। मानसी भी देखी कि रोहन का हाथ इशा की चूचि को साइड से दबा रहा था। दोनों सीक्रेट रूप से मुस्कुराने लगे।

नमिता को लगा कि ये शायद बहुत ही ख़ास परिवार है कुछ उसके ख़ुद के परिवार जैसा ही -इन्सेस्ट परिवार।

तभी इशा बोली: नमिता याद है हम लोग कितनी मस्ती करती थीं? बहुत अच्छे दिन थे वो भी।

नमिता: हाँ याद है बहुत मस्ती करते थे।

नमिता ने देखा कि राकेश की आँखें अब उसकी टॉप के ऊपर थीं। वह उसकी चूचियों को देखे जा रहा था। नमिता सोचने लगी कि ये आदमी तो बड़ा ही रंगीला है अपनी बेटी से तो मज़ा ले ही रहा है और अब मुझे भी देखे जा रहा है।

थोड़ी देर बाद सबने खाना खा लिया और इशा बोली: आप दोनों को अब हमारे घर चलना है क्योंकि इतने साल बाद मिले हैं, बहुत सी बातें करनी है।

नमिता: हमको वापस भी जाना है यहाँ से तीन घंटे लगेंगे हमको वापस पहुँचने में।

इशा: मैं कोई बात नहीं सुनूँगी अभी के अभी चलो , दो तीन घंटे बाद चले जाना।

नमिता: ठीक है यार तुमसे तो मैं जीत नहीं सकती चलो।

बाहर आके नमिता ने कार बुलायी और इशा और नमिता उसने बैठ गयी। इशा ने देखा कि राकेश नमिता की चूचियों को टॉप के ऊपर से घूर रहा था। इशा राज को रोहन के साथ आने को बोली।

दूसरी कार राकेश कार चला रहा था और राज उसकी बग़ल में आके बैठा था और पीछे भाई बहन बैठे थे।

बातें करते हुए राकेश राज से पढ़ाई के बारे में पूछ रहा था। तभी राज ने देखा शीशे में कि रोहन का हाथ मानसी की जाँघों पर था । उसे थोड़ा अजीब सा लगा कि वह भाई बहन है फिर भी।

तभी अचानक ज़ोर का ब्रेक लगा और राज भी आगे को झुका और जब वह मुड़ा तो उसने देखा कि मानसी की स्कर्ट ऊपर तक चढ़ी हुई थी और उसकी गुलाबी पैंटी दिख रही थी। तभी रोहन ने राज को पीछे देखते हुए देखा तो मानसी की स्कर्ट नीचे कर दिया। राज उसकी चिकनी जाँघ और उसकी पैंटी देख कर मस्त हो गया।

थोड़ी देर में सब उनके घर पहुँचे। अच्छा बड़ा सा घर था।

अंदर जाकर इशा नमिता और राज को ड्राइंग रूम में बैठायी और उनके लिए पानी लायी। इशा ने देखा कि अब उसका बेटा रोहन नमिता की चूचियों को घूर रहा था। वह सोची कि पहले बाप और अब बेटा नमिता को बहुत वासना भरी दृष्टि से देख रहे हैं। तभी उसकी नज़र राज पर पड़ी वह उसे ही घूर रहा था ।

इशा ने आह भरी और सोची कि यहाँ तो सब गरम हो रहे हैं। बाद में इशा नमिता को अपने बेड रूम में ले गयी और दोनों पुराने दिनों की बातें करने लगीं।

उधर राकेश मानसी के बेडरूम में आराम करने चला गया। और राज , मानसी और रोहन ,रोहन के बेडरूम में चले गए।

तीनों अपने स्कूल की बातें करने लगे।

रोहन बोला: मैं ज़रा चेंज करके आता हूँ। वह अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुसा और एक स्लीव्लेस गंजी और हाफ़ पैंट में बाहर आया। राज उसके मसल्ज़ देख कर काफ़ी प्रभावित हुआ। उसकी जाँघे भी राज की जाँघें जैसी बालों से भरी थी।

रोहन राज से बोला: यार तुम भी कपड़े बदल लो और आराम से बैठो। राज भी अपने बैग से कपड़े निकालके बाथरूम में जाकर चेंज किया और बाहर आया। मानसी उसको काफ़ी ध्यान से देख रही थी। राज के मसल्ज़ भी मस्त थे और उसकी जाँघें रोहन की जाँघों से ज़्यादा भारी थीं।

मानसी बोली: मैं भी कपड़े बदल आती हूँ, और अपने कमरे में चली गयी।

रोहन ये सोचके मुस्कुराया कि वहाँ तो पापा लेटे हुए हैं इसके कमरे में। चलो पापा तो मज़ा ले ही लेंगे।

क़रीब १५ मिनट बाद मानसी आयी तो उसकी साँस थोड़ा फूली हुई थी और वह आके उनके पास बिस्तर में बैठ गयी। रोहन मुस्कुराया क्योंकि वह जानता था की पापा ने मस्ती की होगी मानसी के साथ तभी वह गुलाबी हो रही है। अब उसने एक टॉप और स्कर्ट डाल ली थी और उसकी नाभि और पेट नंगा दिख रहा था। जब वह बैठ रही थी तो उसकी गुलाबी पैंटी राज और रोहन को दिख गयी और दोनों अपने लौड़े पैंट में अजस्ट करने लगे। फिर ५ बजे नमिता आयी और बोली: चलो बेटा चलें अब घर।

राज: जी माँ चलते हैं।

 
अचानक राकेश की आवाज़ आयी : अरे सब लोग यहाँ आओ।

सब बाहर ड्रॉइंग रूम में आए जहाँ वह TV देख रहा था।टीवी पर एक समाचार चल रहा था कि उनके राज्यपाल का देहांत हो गया है। और राजकीय शोक घोषित हो गया है और २ दिन स्कूल और दफ़्तर बंद रहेंगे।

राज: ओह माँ ये तो स्कूल की फिर से छुट्टियाँ हो गयीं। क्या बोरिंग है?

रोहन : बोरिंग? यार मज़ा आ गया कि २ दिन छुट्टी मनाएँगे ।

इशा: नमिता तुम कह रही थी राज के स्कूल के कारण ही तुमको जाना है और अब स्कूल तो बंद ही हो गया। चलो अब यहीं रुको २ दिन, और बच्चों को कल पिकनिक पर ले चलेंगे। ठीक है?

सब एक साथ चिल्लाए: ठीक है। राज भी उनके साथ ही चिल्लाया।

नमिता: ओह तो राज ने रुकने का प्रोग्राम बना लिया है। चलो ठीक है।

इशा ख़ुश होके बोली: चलो अब डिनर बनाते हैं। और नमिता और वह किचन में चली गयी।

राकेश टीवी देखने लगा, और बच्चे रोहन के कमरे में आ गए। थोड़ी देर बातें करते रहे तभी राकेश ने आवाज़ लगायी: मानसी बेटा पानी देना।

मानसी उठकर बाहर गयी किचन की ओर।

तभी रोहन बाथरूम गया और पता नहीं राज में मन में क्या आया कि वह धीरे से बाहर आके परदे के पीछे से ड्रॉइंग रूम में झाँकने लगा। उसने देखा कि राकेश का हाथ अपने हाफ़ पैंट पर था और वह अपना लौड़ा दबा रहा था, TV चालू था। तभी मानसी पानी लेकर आइ और राकेश ने पानी लेते हुए दूसरा हाथ उसकी छाती पर रखा और उसको दबाने लगा और फिर उसको खींचकर उसके होंठ चूम लिया। पानी पीते हुए उसका हाथ उसकी जाँघों को सहलाने लगा। शायद उसका हाथ उसकी बुर तक चला गया था क्योंकि वह बोल पड़ी: हाय पापा क्या कर रहे हो।मेहमान आए हुए हैं, कोई देख लेगा।

राकेश हँसते हुए उसकी चूचि दबाया और उसको चूमकर छोड़ दिया। वह वापस मुड़ी तो उसके गोल गोल छोटे से चूतरों को भी दबा दिया। मानसी ने अपने कपड़े ठीक किए और वापस भाई के कमरे में आ गयी।

राज भी जल्दी से अंदर आ गया। उसी समय मानसी और रोहन भी आ गए । राज ये बात माँ को बताना चाहता था।

राज: मैं ज़रा माँ से मिल कर आता हूँ। वह किचन में गया और नमिता से बोला: माँ मेरे बैग में कुछ समान नहीं दिख रहा है। एक मिनट आइए ना।

नमिता उसे इशा के बेडरूम में ले गयी और वहाँ राज धीरे से बोला: माँ, अभी अभी मैंने देखा कि अंकल अपनी बेटी के शरीर का मज़ा ले रहे थे । वह उसकी चूचि और बुर भी दबा रहे थे।

नमिता : ओह, मुझे भी लग रहा है कि इस परिवार में कुछ तो चल रहा है । मैंने भी खाना खाते हुए राकेश को मानसी की जाँघ सहलाते देखा था।

राज: एक और बात मुझे लगता है की भाई बहन में भी कुछ चल रहा है क्योंकि वह भी कार में उसकी जाँघें सहला रहा था।

नमिता: ओह तो ये बात है। इशा भी इस सबमे शामिल है क्योंकि दोपहर को रोहन अपनी कोहनी से उसकी छाती दबा रहा था और वो कुछ नहीं बोली।

राज: माँ कहीं ये लोग भी हमारे जैसे तो नहीं हैं? इन्सेस्ट सेक्स मानने वाले।

नमिता: हो सकता है बेटा। मैं देख रही हूँ तू मानसी और इशा दोनों को घूर रहा है, सब ठीक है ना?

राज: माँ आप भी ना, कुछ भी बोल देती हो।

नमिता: देख राकेश और रोहन भी मुझे घूर रहे हैं।

राज: माँ आप क्या बोलती हो, इनके साथ भी हमें ग्रूप सेक्स करना चाहिए क्या?

नमिता: तू बोल।क्या चाहता है?

राज: माँ, ये हो सकता है क्या?

नमिता: मुझे विश्वास है हो जाएगा। बोल करूँ बात इशा से ? पर ये तो बता तू किसको करेगा मानसी को या इशा को?

राज: हा हा दोनों को।

नमिता: ओह, फिर राकेश और रोहन भी मेरी लेंगे , तुझे ऐतराज़ तो नहीं होगा ना?

राज: माँ अगर आपको कोई ऐतराज़ नहीं है तो मुझे भी नहीं है।

नमिता: चल फिर जा मैं जुगाड़ करती हूँ। तेरा खड़ा हो गया है ना? ये कहते हुए उसने उसका लौड़ा पकड़ा और उसकी अकड़न देख कर अपना बुर गीला कर बैठी। राज ने भी उसकी चूचि दबा दी और वह हँसते हुए किचन में वापस जाने लगी ये सोचते हुए कि कैसे बात शुरू करे इशा के साथ इस टॉपिक पर।

उधर रोहन मानसी को बोला: मैं अभी आता हूँ ।और किचन में गया और अपनी माँ को अकेला पा कर उससे लिपट गया और बोला: माँ क्यों इनको रोक लिया अब हम मज़े कैसे करेंगे।

इशा हँसते हुए बोली: क्यों रात को क्या दिक़्क़त है ? सबके सोने के बाद मिल लेंगे।

रोहन उसको चूमते हुए बोला: माँ सच सुबह से बहुत इच्छा हो रही है। चलो ना आप थोड़ा सा चूस दो।

इशा: अरे बदमाश, नमिता कभी भी अंदर आ जाएगी। पागल जैसी बात ना कर।

उधर नमिता राज से मिलकर किचन में घुसने लगी पर फ्रिज के पास आकर रुक गयी, उसने सुना इशा रोहन को बोल रही थी।

इशा: बेटा थोड़ा सबर करो रात को चूस दूँगी और जी भर के चोद भी लेना।

रोहन : माँ आज तो पापा भी आंटी को बहुत घूर रहे थे। आपने ध्यान दिया ?

इशा: ये तो मैं तेरे बारे में भी कह सकती हूँ। मैंने तो तुझे भी नमिता को घूरते देखा है।

रोहन : माँ तुम भी ना?

इशा: चल अब छोड़ मेरे दूध और भाग यहाँ से नमिता आती होगी।

नमिता ने झाँका और देखा कि वह दोनों चिपके हुए थे और होंठ चूस रहे थे।

फिर रोहन बाहर निकलने लगा और नमिता को फ्रिज के पास देख कर चौंका पर बाहर निकल गया।

नमिता ने सोचा कि सब कुछ आसान हो गया है अब तो ,क्योंकि आग लगी है दोनों तरफ़ बराबर से।

नमिता: तो ये बात है ।

इशा हड़बड़ा कर : क्या बात है?

नमिता हँसते हुए: बेटे से मज़े लिए जा रहे हैं ।

इशा: नहीं तो ऐसा कुछ नहीं है , वह वह --

नमिता हँसते हुए: अरे कोई बात नहीं। क्यों परेशान हो रही हो। अच्छा ये तो बताओ कि राकेश को पता है ना कि तुम रोहन से मज़े करती हो?

इशा: नमिता सुनो तो वैसा कुछ नहीं है, मतलब कि कि --

नमिता: मुझे तो ऐसा लगता है कि राकेश और मानसी भी मज़े लेते हैं। चक्कर क्या है बताओ ना?

इशा: अब क्या बताऊँ? मैं नहीं जानती कि क्या और कैसे बोलूँ?

नमिता: चलो अब मैं तुमको कुछ बताती हूँ और उसके बाद तुम ख़ुद ही मुझसे सब बता दोगी।

इशा: क्या बात दोगी?

नमिता: यही कि मैं भी अपने बेटे राज से मज़े लेती हूँ।

कमरे में जैसे बम गिरा।

इशा: क्या बोली?

नमिता : वही जो तू सुनी। जैसे तुम अपने बेटे से लगी हुई हो वैसे ही मैं भी अपने ही बेटे से लगी हुई हूँ।

इशा: ओह, गॉड । अब मैं क्या बोलूँ, समझ नहीं आ रहा है। हाँ सच में हम भी इन्सेस्ट सेक्स करते हैं। हम पूरे परिवार में एक साथ सोते हैं और एक दूसरे से सेक्स करते हैं।

नमिता: अभी तुम रोहन को कह रही थी ना कि राकेश और वह भी मुझे घूर रहे थे। और राज भी तुम्हें घूर रहा था।

इशा: हाँ ये सच है पर तुम कहना क्या चाहती हो?

नमिता: यही कि सबको मौक़ा दे दो ताकि हर कोई अपनी इच्छा पूरी कर ले।

इशा : मतलब कि हम सब एक दूसरे से मज़ा ले लें?

नमिता: क्यों नहीं , इसमें बुराई क्या है? बोलो तुम क्या चाहती हो?

इशा मुस्कुरा कर बोली: सच मज़ा आ जाएगा। चलो ग्रूप सेक्स करते हैं।

नमिता हँसते हुए: हाँ बिलकुल। चलो प्लान किया जाए।

इशा : चलो।

इशा और नमिता ने खाना लगाया और सब खाने लगे। हँसी मज़ाक़ चलता रहा। कई जोक्स सुनाए गए।

खाने के बाद इशा और नमिता कपड़े बदलने के लिए इशा के बेडरूम में आयीं। नमिता ने बैग से एक सेक्सी नायटी निकाली जो वह फ़ार्म हाउस से लायी थी। यह स्लीव्लेस थी और बड़े गले की थी जिसने से उसकी आधी चूचियाँ ज़रूर दिखायी देंगीं। उसमें कमर के पास एक हिस्सा खुला हुआ भी था जहाँ से उसका आधा पेट और कमर दिखायी देगी।

अब नमिता ने अपनी टॉप उतार दी और इसकी ब्रा में फँसी हुई चूचियाँ इशा के सामने थीं। वह ललचायी निगाहों से उनको देख रही थी। तभी नमिता ने अपनी जींस भी निकाल दी और उसकी सेक्सी पैंटी इशा के सामने थी।

नमिता ने देखा कि इशा अपने होंठों पर जीभ फिर रही है।

वह बोली: क्या हुआ? ऐसे क्या देख रही है? ये सब तो तेरे पास भी है।

इशा आह भरके बोली: है तो पर इतना मस्त नहीं है।

नमिता: ज़रा मैं भी तो देखूँ कि तेरा कैसा है? चल उतार ।

इशा उसके बदन को घूरते हुए अपने कपड़े खोल दी और ब्रा और पैंटी में उसका मस्त बदन देखकर नमिता बोली: आऽऽह क्या माल है यार तू तो?

इशा : सच मैं माल हूँ?

नमिता: बिलकुल मस्त माल।

अब नमिता इशा की ओर बढ़ी और उसकी कमर पर हाथ रखकर उसकी आँखों में देखी और बोली: लेज़्बीयन चलता है?

इशा मुस्कुरा के बोली: दौड़ता है।

अब नमिता ने उसको अपने से चिपका लिया और उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए। अब दोनों ने एक लम्बा चुम्बन लिया। नमिता का हाथ उसकी पीठ और कमर से होता हुआ उसकी गाँड़ पर फिरने लगा। इशा भी उसकी गाँड़ सहलाकर मस्ती से सिसकने लगी। फिर दोनों ने एक दूसरे की छातियाँ दबानी शुरू कीं। जल्दी ही उनके हाथ पैंटी के ऊपर और फिर अंदर रेंगने लगे।

दोनों आह करके चिपकी रहीं।

इशा: चलो इसके लिए अलग से टाइम निकालेंगे। अब देखा जाय कि आगे का प्रोग्राम कैसे बढ़े ।

नमिता हँसते हुए बोली: ठीक है। अब उसने नायटी पहनी और वह उसकी घुटनों से थोड़ा ही नीचे तक थी।

इशा: ग़ज़ब की सेक्सी दिख रही हो। मैं भी कोई ऐसी ही सेक्सी नायटी निकालती हूँ ।

वह भी एक बहुत ही सेक्सी काली सी नायटी पहनी जिसमें से उसका आधा जिस्म झाँक रहा था। उसकी नायटी में से उसके आधी चूचियाँ और आधी जाँघें भी दिख रही थी।

नमिता: चलो अब हेवी मेक अप करते जैसे xxx फ़िल्मों में रंडियां करती हैं। लड़के और राकेश पागल हो जाएँगे।

इशा हँसते हुए: आज रँडियों वाला काम ही तो करना है। मेरी बुर तो तेरे चूमने से ही गीली हो गई है।

नमिता: मेरी भी गीली हो गयी है और ये सोचकर भी मैं बहुत गरम हो रही हूँ कि अभी कुछ देर में क्या होने वाला है।

 
इशा: मेरा भी बुरा हाल है और तेरा बेटा बहुत ही सेक्सी है।

नमिता: और सुन ले उसका लौड़ा भी बहुत बड़ा और मोटा भी है।

इशा: सच आऽऽहहह तब तो मज़ा ही आ जाएगा। वैसे रोहन का भी लौड़ा बड़ा ही है और वह भी मस्त चोदता है । हाँ राकेश का थोड़ा पतला है इसलिए वह गाँड़ स्पेशलिस्ट है, हा हा।

नमिता: तब तो मानसी भी उसका लौड़ा आराम से ले लेती होगी।

इशा: नहीं अभी मानसी की सील नहीं टूटी है। वह अभी कुँवारी है। उसकी सील इस जन्म दिन पर ही टूटेगी पूरे परिवार के सामने।

नमिता: परिवार मतलब

इशा: मतलब मेरे मायके वाले और मेरे ससुराल वाले सब आएँगे।

नमिता: ये क्या बात हुई?

इशा: मेरे मायके और ससुराल वाले इन्सेस्ट सेक्स में विश्वास रखते हैं। इसलिए इसकी बुर और गाँड़ का उद्घाटन समारोह सब मिलके मनाएँगे। मैं तुझे बाद में सब बताऊँगी।

नमिता: हाँ ज़रूर बताना , मुझे बहुत उत्सुकता है जानने की।

इशा: ज़रूर। मगर अब चलें मेकअप तो बढ़िया हो गया। पक्की रंडियां दिख रही हैं हम दोनों।

अब दोनों बाहर आयीं और ड्रॉइंग रूम में पहुँची। वहाँ इन दोनों को ऐसी अवस्था में देखकर जैसे सन्नाटा छा गया।

राज कभी अपनी माँ को और कभी आंटी को देख रहा था और उनकी बाहर निकली हुई चूचियाँ और नंगी जाँघें और नंगा पेट और कमर देखकर अपना लौड़ा सहलाने लगा जो अब तन सा गया था।

क़रीब यही हाल रोहन का भी था और वह भी अपनी माँ और आंटी को देखकर पागल सा होकर अपना लौड़ा सहलाने लगा।

राकेश का भी मुँह खुला रह गया था क्योंकि उसे भी पता नहीं था कि आगे क्या होने वाला है।वह कभी अपनी बीवी और कभी नमिता को देख रहा था और उसने भी अपना लौड़ा दबाना चालू किया।

भोली मानसी जब कुछ नहीं समझ पायी तो बोली: मम्मी ये आप दोनों कैसे कपड़े पहनी हों? और ये कैसा मेक अप किया है ?

इशा: बेटा, वो क्या है कि आज तेरा भाई और तेरे पापा तेरी नमिता आंटी को बहुत घूर रहे थे और ये भोला सा दिखने वाला राज भी मुझे और शायद तुझे भी घूर रहे थे। तो हमने सोचा कि ये लोग जो देखना चाहते हैं इनको दिखा दिया जाए। क्यों नमिता, ऐसा ही है ना?

नमिता: हाँ बिलकुल ऐसा ही है।

अब कमरे में पिन ड्रॉप साइलेन्स छा गया। सबको मानो साँप सूंघ गया हो।

आख़िर में राकेश ने मौन तोड़ा: वाह ये तो बढ़िया सोचा तुम दोनों ने। चलो जब इतनी तय्यार हुई तो मॉडल की तरह चल के भी दिखा दो।

इशा हँसते हुए बोली: मॉडल की तरह या रँडी की तरह?

राकेश: आऽऽऽऽहहह मज़ा तो रँडी की तरह चलोगी तो ज़्यादा आएगा मेरी जान।

इशा ने नमिता को देखा और वह मुस्कुरा दी।

अब इशा कमरे के एक सिरे से दूसरे सिरे तक गाँड़ मटका कर चल के दिखाने लगी। नमिता भी उसके साथ वैसे ही चलने लगी गाँड़ मटका मटका कर।

तभी राकेश उठा और एक भोजपुरी गाना लगा दिया जिसमें बहुत बीट्स थीं हालाँकि शब्द बड़े ही अश्लील थे।

वह आके इशा की कमर पकड़के नाचने लगा।

इशा भी अपनी छातियाँ हिला कर नाचने लगी। अब नमिता को भी जोश आ गया और वह भी अपनी कमर और छातियाँ हिलाके नाचने लगी।

राकेश ने अब नमिता की कमर में हाथ डालके उसके साथ भी नाचना शुरू किया और नमिता भी अपनी गाँड़ मटका कर दोनों लड़कों को मस्त कर दी।

पूरा कमरा सेक्सी गाने और सेक्सी अदाओं से जैसे चार्ज हो चला था।

अब नमिता ने अगली चाल चली । वह जाके मानसी को खड़ा की और उसको अपनी बाहों में लेकर नाचने लगी। जल्द ही वह भी मूड में आ गयी।वह भी अपनी छोटी छोटी चूचियाँ हिलाकर नाचने लगी। वह भी अपनी गोल गोल चूतर मटकाकर नाचने लगी।

राज और रोहन की पैंट तो आगे से पूरी तरह फूल गयी थीं। अब नमिता राज को पकड़के खड़ा की और नाचने लगी। राज भी जल्दी ही मूड में आ गया और अपनी कमर हिलाके नाचने लगा।

इशा भी अपने बेटे को उठाके लाई और वह भी उससे चिपक कर नाचने लगा।

इशा ने नाचते हुए अपनी बेटी मानसी का टॉप उतार दिया और एक छोटी सी ब्रा में उसकी जवान होती चूचियाँ देखकर सब लोग मस्ती से भर गए। अब राकेश उसको पकड़के उसकी चूचियाँ दबाने लगा। और नमिता भी नाचते हुए रोहन के पास जाके उसको अपने सीने से चिपका ली और कमर मटका कर अपने सामने के हिस्से को उसके जवान शरीर से रगड़ने लगी।

इशा भी कहाँ चुप रहने वाली थी उसने भी राज को अपने से चिपका लिया और घूम गयी। अब उसके चूतरों पर राज का खड़ा लौड़ा दस्तक दे रहा था। वह अब पीछे को धक्का मारके उसके लौड़े के ठोकर का मज़ा ले रही थी।

तभी नमिता ने अपने होंठ रोहन के गर्दन पर रख दिए और वहाँ चूमने लगी। रोहन का हाथ भी उसकी नंगी कमर पर पहुँचा और वह उसकी चिकनाई को महसूस करके अपना लौड़ा उसके पेट में दबाने लगा। अब राकेश नमिता को पकड़ा और उसकी चूचियाँ दबाने लगा और वह मस्त हो गयी। तभी राज मानसी के होंठ चूसने लगा। और उसकी गोलायीयों का मज़ा लेने लगा । उसने ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ चूमकर लड़की को गरम कर दिया। उधर इशा और रोहन एक दूसरे को चूमने लगे।

राकेश बोला: चलो हमारे बेडरूम में चलो।

सब एक दूसरे से लिपटे हुए बेडरूम में आए। बड़ा सा बिस्तर था वहाँ जिसमें सब एक दूसरे से चिपके हुए बैठ गए ।

राकेश: चलो अब कुछ नया करते हैं और वह लूडो की एक गोटी लाया और बोला: जिसका सबसे बड़ा नम्बर आएगा वह अपना एक कपड़ा खोलेगा। और सबसे प्यार करेगा।

सब हँसते हुए गोटी खेले। नमिता का नम्बर आया और उसने अपना गाउन खोल दिया।

अब वह राकेश के पास गयी तो वह उसकी चूचि ब्रा के ऊपर से चूमने लगा। राज ने भी पैंटी के ऊपर से बुर दबाई। रोहन भी उसके चूतरों को दबाके मस्ती से भर गया। मानसी और इशा ने भी चूची दबाई।

अगला नम्बर मानसी का आया और उसका स्कर्ट उतारा और उस कली को ब्रा और पैंटी में देखकर सब पागल हो गए। आख़िर में राज और रोहन भी अपनी चड्डी में आ गए थे और राकेश ने सबसे पहली अपनी चड्डी उतारी । नमिता ने देखा कि उसका लौड़ा लम्बा तो ठीक ही था पर ज़्यादा मोटा नहीं था। फिर पूरी नंगी होने वाली इशा थी। उसका भरा हुआ बदन राज के चड्डी में फँसे लौड़े को बहुत परेशान कर दिया।

अगला नंगा राज हुआ और उसके लौड़े को देखकर इशा की वाह निकल गयी। और मानसी की आँखें फैल गयी। अब बारी नमिता की आयी और उसका नंगा बदन देखकर राकेश और रोहन तो जैसे ख़ुशी से भर गए। आख़िर में रोहन की भी चड्डी उतरी और उसका लौड़ा राज के लौड़े से बस थोड़ा सा ही कम मोटा था। नमिता की आँख चमक उठी।

राकेश: देखो आप सबको बता दूँ कि मानसी अभी नहीं चुदेंगीं। हाँ इसके अलावा वह सब कुछ कर सकती है।

इशा: मुझे तो राज से चुदवाना है अगर नमिता को कोई अब्जेक्शन ना हो तो।

नमिता: मुझे क्यों अब्जेक्शन होगा।

राज ने इशा को गिरा दिया बिस्तर पर और उसपर चढ़ कर उसे चूमने लगा।

उधर नमिता को रोहन और राकेश दोनों ने पकड़ लिया और चूमने लगे। रोहन सामने से मज़े ले रहा था चूचियों के और राकेश पीछे से उसकी गर्दन चूमते हुए उसके चूतर दबा रहा था और लौड़ेको गाँड़ पर दबा भी रहा था। मानसी चुपचाप बैथे हुए सबको मस्ती करते देख रही थी और अपने एक निपल को दबाते हुए अपनी बुर में ऊँगली रगड़ रही थी।

उधर राज इशा की चूचियाँ चूसने लगा और नीचे आके उसकी बुर को देखकर मस्त हो गया। माँ जैसे गोरी नहीं थी पर आह क्या मस्त कचौड़ी सी बुर थी। उसने चिकनी बुर को सहलाया और फिर उसने अपना मुँह डाल दिया और उसकी बुर की फाँकों को फैलाकर उसके अंदर के गुलाबी हिस्से को चूमते हुए चाटने लगा।

इशा अब आऽऽऽह करने लगी और बोली: आऽऽहहह बेटा , आऽऽह मुझे भी तेरा लौड़ा चूसना है , चल ६९ में आ जाओ।

अब राज उसके ऊपर उलटा हो कर लेटा और अपने लौड़े को उसके मुँह पर रखा और इशा मज़े से उसके लौड़े के सुपाडे को चाटी और वहाँ लगे प्रीकम को मस्ती से गटक गयी और फिर चूसने लगी। राज भी उसकी बुर चूस और चाट कर गरम हो गया था। इशा ने राज के गाँड़ को भी सहलाया और उधर राज भी उसके पैरों को पूरा उठाया और उसकी गाँड़ को चाटने लगा ।

इशा हाऽऽय्यय करके बोली: आह बेटा अब चोओओओओओओ द दे नाआऽऽऽऽऽ। आह कितना मस्त लौड़ा है मेरा जी करता है कि चूसती ही जाऊँ।

वह अपनी जीभ से पूरे लौड़े और बाल्स को चूसते ही जा रही थी। फिर राज उठकर घुमा और उसके पैरों को अपने कंधे पर रख के उसकी बुर में अपना मोटा लौड़ा डालने लगा।

इशा: आऽऽहहहह बेटा धीरे सेएएएएएए। हाऽऽयय्यय मरीइइइइइओ।

अब राज ने एक धक्का और दिया और लौड़ा उसकी बुर में धँसता चला गया।

मानसी उसके पास आके देखने लगी तो वह एक हाथ से मानसी की और एक हाथ से इशा की चूचि दबाने लगा । उसने महसूस किया कि चूचियों में कितना फ़र्क़ है। माँ की बड़ी और नरम है जबकि बेटी की छोटी लेकिन सख़्त हैं।

क़रीब दस मिनट की चुदाई के बाद इशा चिल्लाने लगी: आऽऽहहहह बेएएएएएटा फ़ाआऽऽऽऽड़ देएएएएएए मेरीइइइइइइइइइ बुर हाय्य्य्य्य क्या लंड है हाऽऽय्य मैं गयी।

अब इशा अपनी कमर उछालके झड़ने लगी।

राज भी उसको ज़ोर ज़ोर से चोदते हुए बोला: आंटी, मानसी लौड़ा चूस लेती है क्या?

इशा हाँफती हुई बोली: आऽऽहहह हाँ बेटा बहुत मस्ती से चूसती है। हाऽऽय्यय अब रुक जा , मैं और नहीं सह सकती , निकाल अपना लंड और मानसी से चूसवा ले।

राज ने अपना लौड़ा निकाला और पूरा रस से भरा गन्ना मानसी के मुँह के पास ले आया और वह उसे पकड़के चूसने लगी। उसके छोटे से मुँह के लिए राज का लौड़ा काफ़ी बड़ा था पर वह बड़े उत्साह से चूसे जा रही थी। राज भी उसकी कठोर सेबों को दबाकर मस्ती से चूसवा रहा था।

राज ने मुँह घुमाके देखा तो वह मुस्कुरा उठा । नमिता रोहन के ऊपर चढ़ी हुई थी और उसकी बुर में उसका लौड़ा घुसा हुआ था और वह उछल उछल के चुदवा रही थी और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ रोहन बड़े मज़े से दबाए जा रहा था। राकेश ने अपने लौड़े पर क्रीम लगायी और नमिता को थोड़ा रुकने को बोला और उसकी गाँड़ में भी क्रीम लगाके अपने लौड़े को नमिता की गाँड़ में पेल दिया। नमिता की आऽऽऽहहह निकल गयी । जल्दी ही उसका लौड़ा उसकी गाँड़ में अजस्ट हो गया और वह उसकी गाँड़ मारने लगा। अब नमिता भी दोनों छेदों में लौड़े डलवाके मस्त हो चुकी थी और चूतर हिला हिला के डबल चुदायी का आनंद ले रही थी।

रोहन भी नीचे से चूतर उछालके उसकी बुर को चोदे जा रहा था। राकेश पीछे से गाँड़ मारे जा रहा था।

नमिता चिल्लाने लगी: आऽऽऽहहहब फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओ मेरीइइइइइइइ गाँड़ हाऽऽऽय्यय मैं तो गइइइइइइइइ ।

वह अब झड़ने लगी। उधर राकेश और रोहन भी झड़ने लगे।

 
तभी राज ने भी मानसी के मुँह में पिचकारी छोड़ दी। वह बड़े प्यार से उसका वीर्य पीती चली गई। जब राज की आख़री बूँद भी वह चूस ली तभी उसने लौड़े को मुँह से निकाला।

अब मानसी अपना मुँह पोंछते हुए अपने पापा के मुँह में अपना बुर रख के बैठ गयी मानो वह उसके मुँह में मूत रही हो। राकेश भी अपनी प्यारी बिटिया की बुर चाटने लगा और जल्दी ही उइइइइइइइइइइ कहके मानसी ज़ोर ज़ोर से अपने चूतर हिलाते हुए झड़ने लगी और राकेश उसकी बुर का रस पी गया।

अब सभी झड़ के आराम करने लगे।

सब लोग बाथरूम से फ़्रेश होकर आए और बिस्तर पर एक दूसरे से लिपटकर लेटे रहे।

बड़ा सा बिस्तर था जिसने ६ नंगे जिस्म उलटे सीधे लेटे हुए और बैठे हुए थे ।

इशा: नमिता तुम्हारा और राज का ये कब से चल रहा है।

नमिता ने उसको पूरी कहानी सुनाई कि कैसे राज की पढ़ाई के लिए उसको यह सब करना पड़ा, और उससे क्या फ़ायदा हुआ।

इशा : वाह क्या त्याग किया है तुमने अपने बेटे के लिए।

नमिता: मेरी छोड़ , अपनी बता ,ये सारे नंगे कब से ऐसे नंगे हुए? यह कहते हुए वह हँसने लगी और रोहन का लंड सहला दी।

इशा भी हँसते हुए बोली: अरे बड़ी लम्बी कहानी है। सुनना है क्या?

राज ने इशा की चुचि दबाके कहा: आंटी, प्लीज़ सुनाओ न?

इशा हंस कर बोली: बेटा, तेरी तो हर बात मानूँगी क्योंकि तूने मुझे आज बहुत ख़ुश कर दिया है। क्या मस्त चुदायी की है और बहुत ही मोटा लौड़ा है तेरा। ये कहते हुए वह उसका लौड़ा सहला दी।

इशा ने अब कहना शुरू किया:--------:-------:------

नमिता याद है जब हम स्कूल में पढ़ती थी तो तुमको कहती थी कि मैं अक्सर चुदायी का मज़ा लेती हूँ। तुम हैरान होती थी और पूछती थीं कि कौन चोदा ? और मैं नाम बताती थी कि पड़ोसी का बेटा या फिर पापा का दोस्त वग़ैरह।

नमिता: हाँ याद है अच्छे से ।

इशा: दरअसल उसमें आधा सच था और आधा झूठ। ये सच है कि मैं अक्सर ही चुदवाती थी पर सिर्फ़ पापा और भैया से।

कमरे में पिन ड्रॉप साइलेन्स हो गया।

नमिता: क्या कहा? पर तुमने तो कभी बताया ही नहीं?

इशा: क्या और कैसे बताती ? तुम तो शॉक में आ जाती।

उन दिनों तुम ये सब सोच भी नहीं सकती थी।

नमिता: ओह, ये शुरू कैसे हुआ

इशा: असल में मेरे पापा ने भाग कर अपनी चचेरी बहन से शादी की थी। समाज इसको सही नहीं मानता इसलिए वो दोनों इस शहर में आ गए। हमारे परिवारों को इसके कुछ भी इतराज नहीं था,पर दिखावे के लिए वो भी विरोध किए। हम चार ही परिवार में थे, मैं और भय्या को मिलाकर।

एक दिन मैंने पापा और मम्मी का सेक्स देखा । हुआ ये कि मुझे बुखार हुआ और मम्मी मुझे अपने साथ सुला ली। रात में शायद पापा को चुदाई की इच्छा हुई और वो मम्मी के रोकने के बावजूद चुदाई में लग गए। मैं जागकर भी ऐसा दिखाई कि मानो सो रही हूँ। तभी पापा की आँखें मेरी आँखों से मिल गयी और मुझे आँख मार दिए। मैं तो शर्म से आँख बंद कर ली। पर मम्मी की आहें सुनकर मैंने फिर आँख खोली और पूरी चुदाई देखी। मेरी कमसिन बुर गीली हो गई थी। चुदाई के बाद मम्मी जब बाथरूम गयीं तो पापा ने नंगे ही मुझे अपने से चिपका लिया और बोले: बेटे मज़ा आया? इसको चुदायी कहते हैं। अब तुम भी जवान हो गयी हो , चाहो तो मज़ा ले लो इसका । ये कहते हुए उन्होंने अपना लंड मेरे हाथ ने से दिया। उसको पकड़ते ही जैसे मेरे बदन में आग लग गयी। तभी मम्मी आयीं बाथरूम से और पापा ने मुझे अलग कर दिया और मैं भी सोने का नाटक करने लगी।

उस रात और कुछ नहीं हुआ पर अगले दिन वह मुझे अकेला पाकर मेरा चुम्बन लिए और मुझे बाहों में भरके प्यार किए और मैं मस्त हो गयी।

एक दिन मम्मी मंदिर गयी थी और मैं अकेली थी तभी पापा आ गए और मुझे अपनी गोद में बिठाके बहुत प्यार किए ।

उन्होंने पहली बार मेरी चूचियाँ दबायी और मेरा टॉप उतार कर मेरी चूचियाँ दबाकर उनको चूसने लगे। मैं सी सी करने लगी। पापा का खड़ा लौड़ा मेरी गाँड़ में दस्तक दे रहा था ।

पापा ने मेरी पैंटी भी उतारी और मेरी नरम झाँटों को देखकर उसे सहलाते हुए बोले: बेटी, इसको हमेशा साफ़ रखा करो।

फिर वह पहली बार मेरी बुर चूमे और चाटके मुझे पागल कर दिए आऊँ मैं उनके मुँह में झड़ गयी। वह पूरा रस पी गए।

अब हम दोनों जब भी मौक़ा मिलता यही खेल खेलते। मैं उनका लौड़ा भी अब मज़े से चूसने लगी थी।

एक दिन हम मज़े कर रहे थे तभी मम्मी अचानक आ गयी और हमको नंगे देख ली। ओह उसके बाद एक तूफ़ान आया घर में।

नमिता: ओह ये तो बड़ी मुश्किल हो गयी । फिर क्या हुआ?

राज: हाँ आंटी फिर क्या हुआ? आपकी कहानी सुनके तो मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है। देखो!

नमिता हँसती हुई उसके लौड़े को चूसने लगी और फिर मुँह उठाने बोली: अब या यो लौड़ा चूसवा लो या कहानी सुन लो ।

नमिता : चल मानसी चूस देगी , इशा तुम कहानी सुनाओ।

मनाई ख़ुशी से आगे आकर राज का लौड़ा चूसने लगी और इशा ने कहानी आगे बढ़ाई।

 
इशा बोलने लगी: मम्मी हम दोनों को देख कर बहुत शाक में आ गयी। पापा ने अपने आप को ढँकने का कोई प्रयास नहीं किया और वैसे ही नंगे उठकर उनसे बोले: देखो रानी मैं तुमको सब बताना ही चाहता था पर क्या हुआ ना, बताने का अवसर ही खोज रहा था और आज तुमने देख ही लिया।मम्मी रोने लगी और चुप ही नहीं हो रही थी।

फिर पापा ने उनको अपनी गोद में खिंच लिया और उनके आँसू पोंछने लगे। मैं तो खड़ी काँप रही थी। मैंने अपने कपड़े उठाए पहनने के लिए पर पापा ने मुझे कहा: मत पहनो अभी कपड़े। मैं वैसे ही डर के खड़ी रही।

पापा ने कहा: अरे बेटी तुम क्यों डर रही हो।वो मुझे भी अपने पास खिंच लिए और मेरे गाल भी चूम दिए।

वह मम्मी से बोले: देखो रानी,तुम जानती हो कि मैंने कभी तुमको धोका नहीं दिया। जहाँ तक इशा की बात है ये तो घर का ही मामला है। वह मुझे अच्छी लगती है और मैं भी उसे अच्छा लगता हूँ । वो मेरे नंगे चूतरों को सहलाते हुए बोले। मम्मी सब देख रही थी।

उन्होंने मम्मी के होंठ चूमे और बोलने लगे: देखो रानी, मैंने तो कई बार तुमको कहा है कि तुम सोनू (याने भय्या )को पटा लो, पर तुम मेरी बात मानती ही नहीं हो। सोनू भी तुमको घूरता रहता है, तुमने ही मुझे बताया था, जो कि बिलकुल सामान्य बात है उसकी उम्र में । कभी शीशे में अपने आप को देखो क्या मस्त माल हो तुम? ये बड़ी बड़ी चूचियाँ और ये बड़े गोल गाँड़ किसी को भी पागल कर दें।

मम्मी अपनी तारीफ़ सुनकर ख़ुश हो गयी और बोली: आप भी ना , बेटी के सामने कुछ भी बोले जा रहे हैं। और सोनू मेरा बेटा है उसके साथ मुझे ये सब करने में झिझक होती है। वह ज़रूर मुझसे चिपकता है और अपना हथियार मेरे पीछे रगड़ता है। पर मुझे अभी भी बड़ा अजीब सा लगता है।

पापा मम्मी को सामान्य होता देख कर बोले: देखो ये हमारी बिटिया की जवानी भी क्या फूटी है, इसके संतरे तो देखो, तुम्हें भी चूसने का मन होगा। अब वो मुझे सामने ले आए और मम्मी से मेरे एक दूध को चूसने को बोले। मम्मी थोड़ा झिझक रही थी तो वो ख़ुद एक चूचि चूसने लगे। और मम्मी का मुँह दूसरी चुचि पर रख दिए।

आऽऽऽहहहह क्या अहसास था मेरे बदन में, मेरे पापा और मम्मी मेरी दोनों चूचियाँ चूस रहे थे। पापा की ऊँगली अब मेरे बुर में भी अठखेलियाँ कर रही थीं। मैं मस्ती में डूब गयी और हाऽऽऽऽय्यय करके अपने मज़े का आभास कराई।

पापा के साथ अब मम्मी भी मस्ती में आ गयी थी और वो दोनों पूरे जोश अव मेरी चूचियाँ चूस रहे थे ।

पापा: रानी चलो ना बेडरूम में तुमको अभी चोदूंग़ा इशा के सामने। ये कहते हुए वह मम्मी की चूचियाँ कपड़े के ऊपर से ही दबाने लगे।

मम्मी: आह क्या करते हैं, कोई इतना ज़ोर से दबाता है क्या?

पापा: चलो ना प्लीज़ अभी चुदायी करते हैं।

मम्मी: इशा के सामने ?

पापा: अरे ये भी तो नंगी ही खड़ी है चलो तुम भी नंगी हो जाओ।

पापा खड़े हुए तो उनका लौड़ा बुरी तरह से तना हुआ था और ऊपर नीचे हो रहा था। मम्मी ने उसको सहलाकर कहा: आह इसको शांत को करना ही होगा। चलिए कर लीजिए।

अब हम तीनों बेडरूम में आए और पापा ने मम्मी की साड़ी और ब्लाउस उतार दिया। अब पापा ने मम्मी की ब्रा और और पैंटी भी उतारके वो उनकी चूचि खड़े खड़े ही चूसने लगे। फिर उन्होंने मम्मी को लिटाया और मुझे बोले: देखो तुमने अपनी मम्मी की चूचि देखी? क्या बड़ी बड़ी हैं? आओ हम दोनों इसको चूसते हैं। अब मैं और पापा एक साथ उनकी एक एक चूची चूसने लगे।

मम्मी मस्ती से भर के हाऽऽय्यय करने लगी। अब पापा ने उठकर मम्मी की बुर में अपना लौड़ा डाला और उनको बुरी तरह से चोदने लगे। फ़च फ़च की आवाज़ के साथ मम्मी बड़ी मस्ती से चुदवा रही थी अपनी कमर उछालकर ।

मैं भी वहाँ बैठी अपने पापा और मम्मी की चुदायी देख रही थी और पापा एक हाथ से मेरी चूची भी मसल रहे थे। अब अचानक उनकी स्पीड बढ़ गयी और मम्मी भी चिल्लाके झड़ने लगी और पापा भी ह्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ गए।

अब दोनों एक दूसरे के बग़ल में लेट गए। मेरी बुर पूरी तरह से पनिया गई थी और मैंने एक ऊँगली वहाँ डालके खुजाने लगी। मम्मी बोली: जा पापा के मुँह के ऊपर अपनी बुर रख दे वह चूस देंगे।

पापा: हाँ बेटी आओ बैठो मेरे मुँह पर । मेरा यह पहला अनुभव था इस तरह का। मैं पापा के मुँह पर बैठ गयी और पापा मेरी बुर फैलाकर उसमें जीभ डालके मुझे इतना गरम किए कि मैं जल्दी ही झड़ने लगी और पापा मेरा सारा रस पी गए ।

मम्मी: बेटी, मज़ा आया?

मैंने शर्माके हाँ में सर हिला दिया।

इस तरह मैं पहली बार पारिवारिक सेक्स में शामिल हुई।

मानसी अब भी राज का लौड़ा चूस रही थी। और नमिता की बुर को रोहन सहलाए जा रहा था। राकेश अपनी बेटी के चूतरों को सहलाते हुए उसकी बुर और गाँड़ में ऊँगली कर रहा था। इशा की बुर पर राज की उँगलियाँ चल रही थी।

इशा बोलती चली गयी:------:-----

अब पापा सोनू के बारे में मम्मी को बताने में लग गए और बोले कि कल मैं जब रात को बाथरूम जाने के लिए उठा तो सोनू के कमरे से आवाज़ें आ रही थीं । मैं उसके कमरे में खिड़की से झाँका और देखा कि वह अपने बिस्तर में तुम्हारी बहुत सी फ़ोटो बिछाया हुआ था और मूठ्ठ मार रहा था। और मम्मी मम्मी कहता हुआ अपना रस निकाल दिया।

मम्मी का तो मुँह खुला रह गया। वह हैरान थी कि उसका अपना बेटा ही उसे वासना की दृष्टि से देखता है। तभी पापा ने उसकी बुर में ऊँगली डाली और कहा कि देखो तुम ये सोचके गरम हो गयी कि तुम्हारा बेटा ही तुमको चोदना चाहता है ।देखो कितनी गीली है तुम्हारी बुर? और उन्होंने अपनी गीली उँगलियाँ चाट लीं।

मेरे लिए ये सब बड़ा अजीब था।

फिर पापा बोले: चलो आज रात को प्लान करते हैं । सोनू स्कूल से आएगा तब उससे बात करेंगे।

रात को खाना खाके सब TV देखने लगे। तभी सोनू भय्या उठकर अपने कमरे की ओर जाने लगा। पापा ने उसे आवाज़ देकर रोका और बोले: बेटा रुको आज मुझे तुम सबसे कुछ बातें करनी है।

वह आके बैठ गया।

पापा बोले: आज मुझे तुम सबसे कुछ बात करनी है। आज जो मैं बोलूँगा थोड़ा अजीब लगेगा पर इसमें ही हमारी सब की ख़ुशी निहित है।

सोनू: मैं समझा नहीं पापा।

पापा: बेटा ये सच है ना कि तुम अपनी मम्मी को वासना भरी निगाहों से देखते हो?

सोनू भय्या हकलाते हुए : नहीं पापा ऐसा कुछ नहीं है। वह मम्मी को देखते हुए बोला: मम्मी ऐसा कुछ नहीं है।

पापा: बेटा ऐसा है , कल मैंने तुम्हें अपनी मम्मी का नाम लेते हुए उसकी फ़ोटो को देखकर मूठ्ठ मारते देखा था।

सोनू का चेहरा सफ़ेद पद गया।

वह रोने लगा और बोला:मम्मी मुझे माफ़ कर दो , मैं बहुत गन्दा हूँ।

मम्मी उठी और उसके पास बैठ कर उसको अपनी बाहों में लपेट कर बोली: मत रो बेटा, मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँ। पर एक बात बात तुझे अपनी बुड्ढी माँ क्यों पसंद है तेरी कोई गर्ल फ़्रेंड नहीं है क्या?

सोनू: माँ आप कहाँ से बूढ़ी हो गयीं? आप तो बिलकुल जवान हो। ये कहते हुए वह डर गया और पापा को देखते हुए बोला: पापा सॉरी मेरा ग़लत मतलब नहीं था।

पापा हँसने लगे और बोले: तुम सही बोल रहे हो तेरी माँ अभी मस्त जवान है। माल है वो हा हा ।

सोनू हैरानी से पापा को देखता रह गया।

मम्मी सोनू के आँसू पोंछकर उसे चुम ली और बोली: दिल छोटा मत कर। अच्छा ये बता कि मेरा क्या सबसे अच्छा लगता है तुझे ?

सोनू उसकी आँखों में देखकर बोला: क्या मतलब मम्मी?

पापा उठके उनके पास आकर घुटने के बल बैठ गए और बोले। बता ना मम्मी का कौन सा अंग तुमको सबसे अच्छा लगता है?

सोनू थोड़ा सा डरते हुए बोला: मम्मी का गोरा पेट।

पापा और मम्मी हँसने लगे। पापा ने मम्मी की साड़ी हटाने उनका पेट नंगा किया और बोले: ले देख ले मम्मी का पेट । छू ले । ये कहते हुए पापा ने उसका हाथ मम्मी के पेट पर रख दिया । सोनू पापा को देखते हुए मम्मी का पेट सहलाने लगा। फिर उसने मम्मी की नाभि को ऊँगली से छूना शुरू किया।

अब पापा बोले: और क्या अच्छा लगता है मम्मी का?

सोनू ने मम्मी की छातियों को देखा पर हिम्मत नहीं पड़ी बोलने की।

पापा: तुझे मम्मी की छातियाँ पसंद है ना?

सोनू धीरे से सिर हिलाया हाँ में।

पापा ने मम्मी का पल्लू नीचे किया और अब ब्लाउस में कसी उनकी चूचियाँ पहाड़ सी खड़ी थीं ।

अब पापा ने उसके दोनों हाथ पकड़कर उनकी छातियों पर रख दिया। सोनू पागल सा होकर उनको दबाने लगा। मम्मी आह्ह्ह्ह्ह करने लगी। अब मम्मी ने भी देखा कि उसके पैंट में तंबू तन गया था। वह उसको पकड़कर सहलाने लगी और बोली: देख तेरा कैसा तय्यार है मेरे अंदर घुसने के लिए।

पापा हँसने लगे और बोले: अरे ये तो अपने जन्म स्थल के अंदर घुसने के लिए मरे जा रहा है।

अब हम सब हँसने लगे।

पापा बोले: चलो अब बेडरूम में जाकर अपनी माँ को मस्ती से चोदो और ख़ूब मज़ा लो दोनों।

मम्मी: और इशा की चुदायी का क्या? उसे आप कब लड़की से औरत बनाओगे?

पापा: बस तुम्हारी चुदायी के बाद मैं भी इसे चोदूंग़ा। ठीक है ना बेटी?

मैंने हाँ में सिर हिला दिया।

अब हम चारों बेडरूम में आ गए।

इशा बोले जा रही थी:----

 
बेडरूम में जाकर पापा ने मम्मी की साड़ी और ब्लाउस खोला और सोनू उसकी ब्रा में क़ैद बड़े दूध देखकर अपना लौड़ा सहलाने लगा। अब पापा ने मम्मी को बिस्तर पर लिटा दिया और सोनू को कहा: आ जा अपनी माँ से मज़ा कर ले। पर पहले कपड़े तो खोल ले।

सोनू ने अपनी शर्ट और लोअर उतार दी और सिर्फ़ चड्डी में उसका तगड़ा बदन देखकर मैं दंग रह गयी । उसकी चड्डी में छिपा हथियार भी काफ़ी बड़ा सा लग रहा था। अब वह मम्मी के ऊपर लेट गया और मम्मी की चूचियाँ दाबने लगा। फिर उसने ब्रा खोली और मम्मी ने उसको ब्रा निकालने में पूरी मदद की। अब वह मम्मी की बड़ी चूचियाँ देखकर मस्ती से उनकी चूचियाँ दबाने लगा। मम्मी की आऽऽझह निकलने लगी। तभी पापा ने मम्मी की पैंटी उतार दी। मम्मी ने अपने चूतर उठाए ताकि पैंटी उतर जाए। अब पापा बोले: ले देख तेरी मम्मी की बुर ।ये कहते हुए पापा ने भय्या को मम्मी की बुर फैलाके दिखायी। भय्या मम्मी कि बुर के अंदर का गुलाबी हिस्सा देखा और बोला: आऽऽह मम्मी आपकी बुर कितनी सुंदर है।

पापा मुझे भी बुलाए और हम दोनों को खुली हुई गुलाबी बुर दिखाके बोले: देखो बच्चों तुम्हारा जन्म स्थल, यहीं से तुम दोनों बाहर आए थे इस दुनिया में।

मैं और भय्या दोनों बड़े ध्यान से मम्मी की बुर देख रहे थे।फिर उन्होंने बुर के ऊपर एक दाना दिखाया और जिसको clit कहते हैं। और बोले: ये भगनासा है इसे छुओ,तुम्हारी मम्मी मस्त हो जाएगी। भय्या ने उस दाने को ऊँगली से सहलाया और मम्मी आह कर उठी।

पापा बोले: इसको जीभ से चाटो वो पागल हो जाएगी।

भय्या ने जीभ से दाने को चाटा और मम्मी चीख़ उठी हाऽऽयय्यय करके।

अब पापा ने मम्मी की बुर में तीन उँगलियाँ डाली और मम्मी की बुर से अपनी गीली उँगलियाँ निकाली और बोले: देखो सोनू तुम्हारी मम्मी कितनी चुदासि हो रही है। ये कहते हुए उन्होंने एक ऊँगली चूसी और एक ऊँगली सोनू की तरफ़ किए जिसे वह चूस लिया। फिर उन्होंने आख़री ऊँगली मुझे दी और मैंने भी चूस ली।

अब पापा बोले: इशा तुम अपने भय्या की चड्डी खोलो और उसका लौड़ा बाहर निकाल के सहलाओ।

मैं भय्या की आँखों में देखी और वहाँ सिर्फ़ वासना ही नज़र आ रही थी। वह मेरी चूचियों को घूर रहा था।

पापा: बेटा अपनी बहन की चूचि भी दबा के मज़ा ले ले।

मैं नीचे बैठ गयी और उसकी चड्डी निकालने लगी। जैसे ही उसका लौड़ा बाहर आया , मैं चौक गयी। कितना बड़ा हो गया था वह । मुझे याद है जब मैंने पिछली बार देखा था तब वह छोटी सी नुनु हुआ करता था अब तो वह सांप सा बड़ा हो चुका था।

पापा के कहने पर मैंने भय्या का लौड़ा सहलाया और वहाँ से प्रीकम निकलने लगा। तभी पापा ने कहा: बेटी इसको चूस ले, जैसे मेरा चूसती है। मैंने जीभ से भय्या के लौड़े पर आया हुआ प्रीकम चाट लिया। उधर भय्या झुककर मेरी चूचियाँ दबाने लगा।

पापा: चल अब अपनी मम्मी को चोद ले।

भय्या उठकर मम्मी पर चढ़ गया और उनके होंठ चूसने लगा और चूचियाँ मसलने लगा, और फिर वह एक चूचि पीने लगा । पापा ने कहा: बेटी जाओ तुम भी अपनी मम्मी की एक चूची पी लो। मम्मी को बहुत अच्छा लगेगा कि उसके दोनों बच्चे अब बड़े होकर भी उसका दूध पी रहे हैं।

अब मैं भी उनकी एक चूचि चूसने लगी। अब हम दोनों मम्मी के एक एक दूध पिए जा रहे थे। मम्मी की हाय्य्य्य्य निकलते जा रही थी ।

पापा बोले: अरे क्यों अपनी मम्मी को तड़पा रहा है , चल चुदायी चालू कर।

अब सोनू मम्मी की बुर के पास आके बैठ गया।

पापा: आज तक कोई गर्ल फ़्रेंड को चोदा है?

सोनू: नहीं पापा कभी नहीं।

पापा: ओह तो मम्मी तुम्हारा पहली बार कुँवारा बदन भोगेगी। चल मैं तुझे सिखाता हूँ।

अब पापा ने उसके लौड़े को पकड़ा और मम्मी की बुर पर रखा और धक्का मारने को बोला। सोनू ने धक्का मारा और क़रीब पूरा लौड़ा अंदर डाल दिया। अब पापा को उसको कुछ सिखाने की ज़रूरत नहीं पड़ी क्योंकि वह अपने आप ही अपना इंजन दौड़ाने लगा। मम्मी की आऽऽऽहहह निकले जा रही थी। पापा ने अब मुझे अपनी गोद में खिंच लिया और मेरे होंठ चूसते हुए मेरी चूचि दबाने लगे। फिर उन्होंने मेरे कपड़े एक एक करके निकाले और मुझे पूरा नंगी कर के मेरे बदन से खेलने लगे। अब वो भी पूरा नंगे ही गए। अब मैंने भी उनका लौड़ा सहलाया और मम्मी को भय्या से चुदती देख रही थी। पापा भी मस्ती से भरके अपनी बीवी को बेटे से चुदते देखकर बहुत गरम हो गए थे। कमरे में फ़च फ़च की आवाज़ें आ रही थीं । मम्मी की सिसकारियाँ भी कमरे में गूँज रही थीं । वह चिल्ला रही थी: आऽऽहहहह चोओओओओओओओओओद मेंएएएएएएएरे बेएएएएएएटे हाऽऽय्यय मरीइइइइइइइइइइ । मैं गयीइइइइइइइइइइइइइ । अब सोनू ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म कहते हुए झड़ने लगा।

दोनों लस्त होकर पड़े थे और मैं पापा की गोद में उनके लौड़े को अपनी गाँड़ के नीचे दबाके बैठी थी। पापा मेरी चूचि चूसकर मस्त हो रहे थे। पापा लेट गए मम्मी की बग़ल में और बोले: क्या जानु मज़ा आया?

मम्मी : बहुत मज़ा आया। मेरा बेटा तो जन्मजात चुदक्कड है जी। देखो ना पहली बार में ही क्या चुदायी किया है। मुझे तो मस्त कर दिया।

पापा हँसते हुए सोनू से बोले: तू बोल मज़ा आया?

सोनू: पापा मैं तो पागल ही हो गया था । वाह क्या मज़ा आता है इस काम में। मम्मी की बुर भी काफ़ी गरम है।

अब पापा मुझे लौड़ा चूसने को बोले और मैं चूसने लगी।

सोनू उठकर हमारे पास आया और मेरे संतरों से खेलने लगा। तब तक मम्मी बाथरूम से सफ़ाई कर के आयी और मुस्कुरा के बोली: बेटी मज़ा आ रहा है? भय्या चूचियाँ दबा रहा है और तू पापा का लौड़ा चूस रही है? कहते हुए मम्मी ने मेरी बुर को सहलाकर मुझे मस्ती से भर दिया।

अब मम्मी ड्रेसिंग टेबल से एक क्रीम की डिब्बी लायीं और बोलीं: चलो जी अब इसकी कुँवारी जवानी को चोदो और इसका कौमार्य भंग करो और लड़की से औरत बनाओ।

पापा के लौड़े ने ये सुनकर मेरे मुँह में एक झटका सा मारा। मैं समझ गयी कि पापा को मस्ती चढ़ गयी है।

अब पापा बोले: हाँ बेटी चलो अब लेट जाओ और अब तुम्हारी सील तोड़ेंगे।

मैं लौड़े को मुँह से निकाली और लेट गयी और मम्मी की तरह टाँगें फैला दीं। अब मम्मी ने पापा के लौड़े पर ढेर सा क्रीम लगाया। उन्होंने सोनू से कहा: तुम संतरों को चूसते रहो और इसको गरम रखो। सोनू तो जैसे मेरे संतरों का दीवाना सा हो गया था। अचानक मुझे उसका लौड़ा भी खड़ा हुआ दिखा। सोनू ने मेरा हाथ अपने लौड़े पर रखा और मैं उसे सहलाने लगी। तभी मम्मी ने मेरे चूतरों के नीचे एक तकिया रखा और मेरी टांगों को घुटने से मोड़कर पूरा फैला दिया। अब पापा अपना मुँह मेरी बुर में डालके थोड़ी देर चाटे। जब मैं पूरी पनिया गई तब मम्मी ने उसमें भी क्रीम लगाया।

मम्मी बोली: बेटी थोड़ा सा दर्द होगा, तुम्हारा पहली बार है ना? सह लेना, ठीक है? फिर मज़ा ही मज़ा।

मैं: जी मम्मी सह लूँगी।

मैं बहुत उत्तेजित थी । भैया चूचियाँ चूसे जा रहा था।

अब पापा ने अपने लौड़े को मेरी मेरी बुर के छेद पर रखा, जिसकी फाँकों को मम्मी ने फैलाया हुआ था। अब उनका सुपाड़ा अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। तभी पापा ने हल्का सा दबाव डाला और सुपाड़ा अंदर की झिल्ली को फाड़ता हुआ मेरी बुर में घुस गया। मेरी चीख़ निकल गई और मैं चिल्लायी: आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह पापा प्लीज़ निकाऽऽऽऽऽऽऽऽऽल लोओओओओओओ। हाऽऽऽयय्यय बहुत दुखताआऽऽऽऽऽऽ है।

मम्मी मेरे गाल को सहला के बोली: बेटी बस अब नहीं दुखेगा थोड़ा धीरज रखो ।

अब पापा ने फिर से लौड़े को अंदर दबाया और मेरी बुर में तलवार की भाँति वह घुसता चला गया और मैं मारे दर्द के रोने लगी। मम्मी मेरे गाल चूमती हुई आँसू पोंछी और बोली: बस बेटी बस, अभी आराम मिलेगा।

मैं चिल्लायी: पापा निकाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽलोओओओओओ ना हाऽऽऽऽऽऽय्यय मरीiiii

भय्या मेरी चूचियाँ दबा रहा था और चूस भी रहा था। अब मम्मी ने मुझे प्यार से समझाया की बस हो गया अब तुझे मज़ा आयेगा। पापा भी रुक गए थे और उनका मोटा लौड़ा मेरी बुर में मानो फँस सा गया था। तभी मम्मी मेरी दूसरी चूचि भी चूसने लगी, और मेरे निपल्ज़ पर भी जीभ फिराने लगी। मैं अब मस्ती में आने लगी थी । उन्होंने भय्या को भी जीभ से निपल को छेड़ना सिखाया। उधर पापा भी मेरे पेट ,जाँघों और मेरे चूतरों को सहला रहे थे। अब मैं गरम होने लगी और बोली: आऽऽहहह मम्मी अच्छा लग रहा है।

मम्मी: लगेगा बेटी अच्छा ही लगेगा।

फिर पापा को बोलीं: चलिए चोदना शुरू करिए। अब इशा तय्यार है मस्त चुदायी के लिए।

पापा बोले: बेटी चोदूँ ?

मैंने हाँ में सिर हिलाया।

पापा: मुँह से बोलो ,क्या करूँ?

मैं हाँफते हुए बोली: आऽऽऽहहहह पापा चोदिए ना क्यों तड़पा रहें हैं?

पापा हँसते हुए अब धक्के लगाने लगे, और मैं अपनी पहली चुदायी के आनंद में जैसे डूबती ही चली गयी।

आह्ह्ह्ह्ह क्या सुख मिल रहा था। मम्मी और भय्या एक एक चूचि पी रहे थे और पापा बुर में लौड़ा घिस रहे थे। पापा ने मेरे दोनों चूतरों के नीचे हाथ रखा हुआ था और उसको ऊपर की ओर करके मेरी बुर में पूरा लौड़ा जड़ तक पेल रहे थे। मैं तो मज़े के सागर में जैसे गोते लगा रही थी। मेरे परिवार के सभी सदस्य मेरी चुदायी और सेवा में लगे थे। क्या फ़ीलिंग थी ! बता नहीं सकती। पापा बीच बीच में मेरी गाँड़ के छेद में भी ऊँगली कर देते थे। मैं उत्तेजना और दर्द से उछल जाती थी और ऐसा करने से लौड़ा और गहरे में अंदर तक धँस जाता था।

तभी मुझे लगा कि मैं झड़ने वाली हूँ और हाऽऽऽऽयय्यय पाआऽऽऽऽऽऽपा मैं गयीइइइइइइइइइइ कहके झड़ गयी। और अपनी कमर उछाल के पापा का लौड़ा अपनी बुर में भींचने लगी । पापा भी मेरा ये हमला नहीं सह पाए और आऽऽऽऽऽऽहहह बेएएएएएएएएटी क्याआऽऽऽऽऽऽ मस्त बुर है तेरी आऽऽऽहह कितनी टाइट है आऽऽऽह ह्म्म्म्म्म्म कहते हुए वो अपना वीर्य मेरे अंदर छोड़ते चले गए। मैं भी उनसे बुरी तरह से चिपकी हुई थी और उनके स्पाज़म का मज़ा ले रही थी।

अब तीनों मेरे ऊपर से हट गए।

पापा हाँफते हुए: सुनो इसको आज से वही पिल्ज़ खिला देना जो तुम लेती हो , कहीं प्रेग्नन्सी ना हो जाए।

मम्मी: जी पक्का खिला दूँगी।

अब मम्मी उठी और मेरी बुर का मुआयना किया।

वह बोली: सोनू आ के देख , कैसी फटी हुई दिख रही है तेरी बहन की बुर।भय्या उठके मेरी बुर को देखा और बोला: मम्मी ये तो ख़ून से लाल हो रही है।

मम्मी: हाँ पहली चुदायी में लड़की का ख़ून निकलता है, ये बड़ी सामान्य सी बात है।

फिर मुझे बोली: बेटी अब भी दर्द है क्या?

मैं: हाँ मम्मी थोड़ी सी जलन सी हो रही है।

मम्मी: चल बाथरूम में ठंडे पानी से साफ़ कर देती हूँ। कल तक पूरा आराम आ जाएगा।

हम दोनों बाथरूम गयीं, वहाँ मम्मी ने मुझे मूतने को कहा और फिर मेरी बुर की डेटोल के पानी से सफ़ाई की।

फिर खड़े होकर मुझे बाहों में लेकर चूमते हुए बोली: बेटी बधाई हो आज तुम्हारी बुर का उद्घाटन हो ही गया और अब तुम जी भर के अपने पापा और भैय्या से चुदाई करवाओ। पर बाहर वालों से मत चुदवाना।

बाहर आए तो कमरे में कोई नहीं था और TV चलने की आवाज़ आ रही थी। हम नंगी ही ड्रॉइंग रूम में गयी , वहाँ पापा और भय्या अग़ल बग़ल बैठके बातें कर रहे थे। पापा का लंड नरम होकर उनकी जाँघ पर लेटा हुआ था और भय्या का लंड आधा खड़ा था। मैं जाके सामने बैठ गयी और मम्मी भय्या के पास बैठ कर उसके लौड़े को सहलाने लगी। जल्दी ही भय्या का लौड़ा पूरा खड़ा हो गया। पापा ये देखके मुस्कुराए।

तभी मैं बोली: पापा आप मेरे पीछे के छेद में क्यों ऊँगली डाल रहे थे? मुझे जलन सी होती थी वहाँ।

पापा: मज़ा नहीं आया था? उसको गाँड़ कहते हैं, समझी।

मैं शर्माके बोली: आया तो था।

सब हँसने लगे।

भय्या बोला: पापा आप मम्मी की गाँड़ भी मारते हो?

मम्मी: तुझे पता है कि गाँड़ भी मारी जाती है, मैं तो तुझे सीधा समझती थी।

पापा: हाँ तेरी मम्मी को गाँड़ मरवाने में बहुत मज़ा आता है।

भय्या का लौड़ा अभी भी मम्मी सहला रही थी और वह बुरी तरह से तन गया था।

पापा: हाँ हाँ क्यों नहीं अभी मार ले। तेरा तो तय्यार ही है।

अब पापा मम्मी को अपनी गोद में पेट के बल लिटा दिए। अब मम्मी के बड़े चूतरों का उभार देखते ही बनता था। पापा ने मुझे भी पास बुलाया और मैं भी आके उनके साथ ही खड़ी हो गयी।

पापा: देखो गाँड़ मारने के लिए कुछ तय्यारी करनी होती है। क्योंकि बुर की तरह इसने कोई लूब्रिकेशन नहीं होता है।

अब पापा ने मम्मी के बड़े चूतरों को फैलाके हमको उनकी गाँड़ का सुराख़ दिखाया और बोले: ये देखो कितना सुकडा हुआ सा है गाँड़ का छेद।

वह छेद पर ऊँगली फेरकर बोले: देखो अब इसने क्रीम या तेल लगाकर इसको चिकना करते हैं।

भय्या भी वहाँ ऊँगली फेरे और उनका लौड़ा झटके मारने लगा।

पापा के कहने पर मैं क्रीम लायी और पापा ने अपनी ऊँगली में क्रीम लेकर ढेर सारी क्रीम मम्मी की गाँड़ में लगा दिए और ऊँगली अंदर बाहर करने लगे। हम दोनों भाई बहन आँख फाड़े ये देख रहे थे। अब वह दो ऊँगली में क्रीम लिए और आसानी से उँगलियाँ अंदर बाहर करने लगे।

भय्या: पापा मैं भी ऊँगली डालूँ क्या?

पापा हँसते हुए बोले: चलो क्रीम लगाओ और दो उँगलियाँ डालो।

अब भय्या भी दो ऊँगली क्रीम लगाके डाले और बोले: आह मम्मी आपकी गाँड़ तो बहुत मस्त टाइट है और गरम भी है।

पापा: अब तीन उँगलियाँ डालो क्रीम लगाकर।

भय्या तीन उँगलियाँ डालने के बाद मज़े से अंदर बाहर करने लगे।

मम्मी की हाऽऽऽऽऽऽय्यय निकल गयी।

अब पापा ने सोनू को कहा : बेटी, ले अब अपने भय्या के लौड़े पर क्रीम लगा ले और वह गाँड़ मार लेगा अपनी मम्मी की।

मैंने भय्या के लौड़े पर क्रीम लगाया और पापा ने मम्मी के चूतरों को छोड़ दिया और बोले: चलो अब सोफ़े के सहारे आगे की ओर झुक जाओ।

मम्मी झुकी और पापा ने मम्मी के चूतरों को फिर से फैलाया और सोनू के लौड़े को पकड़कर उन्होंने मम्मी की गाँड़ के छेद पर रखा और बोले: धीरे से अपने लौड़े को दबाते जाओ। धक्का नहीं मारना।

अब सोनू का लौड़ा धीरे धीरे मम्मी की गाँड़ में घुसता चला गया।

मम्मी की आऽऽऽहहह निकल गयी।

अब पूरा लौड़ा मम्मी की गाँड़ में समा गया और पापा बोले: शाबाश अब मारो गाँड़। धक्के से चोदो और अपनी मम्मी को मस्ती से भर दो।

अब सोनू ने मम्मी की ज़बरदस्त चुदायी चालू की। अब मम्मी की चीख़ें निकलने लगीं। ठप ठप की आवाज़ आ रही थी जब सोनू की जाँघें मम्मी के मोटे चूतरों से टकराती थी। अब दोनों मस्ती से चुदायी कर रहे थे और पापा मेरे चूतरों को दबाते हुए मेरी गाँड़ के छेद को छेड़ने लगे। मैंने भी पापा के खड़े हो रहे लौड़े को पकड़ लिया और सहलाते हुए मस्त होने लगी।

तभी पापा बोले: चल अब अपनी मम्मी की बुर सहला तभी वह झड़ेगी। सोनू ने दो उँगलियाँ उसकी बुर में डाल दी और वह मज़े से चूतरों को पीछे धकिया कर चुदवाने लगी।

पापा: clit को छेड़ो बुर की ,जैसा बताया था वह मस्त हो जाएगी।

भय्या ने जैसे ही मम्मी के दाने को रगड़ा ,मम्मी की सिसकारियाँ गूँजने लगी।कमरा ज़बरदस्त चुदायी की आवाज़ों से भर उठा और दोनों आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हम्म्म्म्म कहते हुए झड़ने लगे।

जल्दी ही सोनू अपना अभी भी तना हुआ लौड़ा निकालके सोफ़े पर बैठ गया और मम्मी भी बाथरूम चली गयी।

पापा सोफ़े पर बैठ गए और मुझे अपने पास ज़मीन में बिठाके अपना लौड़ा चूसवाने लगे। मैं भी पूरी ताकत से उनका लौड़ा चूसती गयी और क़रीब दस मिनट बाद पापा मेरे मुँह में झड़े और मैं उनका पूरा रस पी गयी।

अब हम सब शांत होकर बैठ गए।

इशा कहानी सुनाके चुप हो गयी। तब तक वहाँ फिर से सब गरम हो चुके थे और इशा को राकेश चोदने लगा। उधर राज भी नमिता को चोदने लगा। रोहन भी अपने लौड़े को मानसी से चूसवाने लगा। सब मस्ती से भर कर मज़े से झड़ गए।

सब बाथरूम से फ़्रेश होकर आए , तब नमिता बोली: इशा, ये बताओ कि तुम्हारे मायक़े में तो तुम अपनो से चुदी पर ससुराल वालों से कैसे चुदीं? और राकेश को कब पता चला कि तुम अपने भय्या और पापा से चुदवाती हो?

इशा अपने पति राकेश को देखकर मुस्करायी और बोली: बता दूँ?

राकेश नमिता की चूचियों को दबाकर बोला: अरे ये तो अब अपने ही है , सब बता दो ।

इशा हँसते हुए बोलने लगी:----

इशा बोलती गयी: उस दिन के बाद मेरे भय्या और पापा मुझे और मम्मी को रोज़ चोदते थे। फिर भय्या की शादी हुई उनकी पसंद कि लड़की से । भय्या ने उसे पहले से बता रखा था कि हम लोग पारिवारिक चुदायी में विश्वास करते हैं। भाभी भी बहुत जल्द हमारे जैसी हो गयीं ।अब हमारी पारिवारिक चुदाई में वह भी शामिल रहती थी और पापा को एक और जवान लड़की चोदने को मिल गयी थी।

फिर मैं जब २१ साल की हुई तो मेरी शादी राजेश से हो गयी।इन्होंने मुझे बहुत प्यार दिया पर मैं भय्या और पापा को भी मिस करती थी। हर महिने मैं मायक़े जाती और दोनों से ख़ूब चुदवाती। इसी तरह दिन कटते गए और हमारी शादी को ६ महीने हो गए। उसके बाद क्या हुआ ये राकेश बताएँगे।

राकेश बोला: सब कुछ बढ़िया चल रहा था,हम लोग रोज़ दो या तीन बार चुदायी करते थे। कभी कभी मैं एक या दो दिनों के लिए टूर पर जाता तो जब वापस आता और आयशा बहुत प्यासी रहती और फिर हम ज़बरदस्त चुदायी करते। फिर इशा हर महीने मायक़े चली जाती और ४/५ दिन दिन रहकर वापस आती। मैं बहुत प्यासा हो जाता था पर यह बिलकुल प्यासी नहीं दिखती थी।

वह एक दो दिन तो चुदायी में मज़ा भी नहीं लेती थी। फिर धीरे धीरे नोर्मल हो जाती थी। मैं अजीब उलझन में पड़ गया कि ये कैसे हो सकता है? एक दिन के टूर पर जाने से प्यासी हो जाने वाली मायक़े से आके प्यासी कैसे नहीं होती है? यह हर बार हुआ तो मुझे पक्का विश्वास हो गया कि इसका कोई आशिक़ है मायक़े में जो इसको चोद कर तृप्त कर देता है और ये प्यासी नहीं रहती।

हर महीने मेरा शक यक़ीन में बदलने लगा था। कौन हो सकता है कोई पड़ोसी या कोई कॉलेज का बोय फ़्रेंड?

अब मैंने फ़ैसला किया कि पता लगा कर ही रहूँगा कि कौन है वह जो मेरी आयशा को उसके शहर में इतना मज़ा देता है कि वह कुछ दिन चुदायी करना ही नहीं चाहती?

अगली बार जब वह मायक़े गयी तो मैं भी दो दिन बाद इसके शहर पहुँचा और होटेल में ठहरा और नक़ली दाढ़ी मूँछ लगाके इसके घर के आसपास मँडराने लगा।

क़रीब १२ बजे दिन को पूरे परिवार के साथ इशा बाहर आइ और कार में बैठके चल पड़ी। मैंने ऑटो से उनका पीछा किया। वो सब एक माल में पहुँचे और शॉपिंग किए। बाद में एक रेस्तराँ में खाना खाए और फिर घर वापस आये और फिर घर का दरवाज़ा बंद हो गया। मैंने बाद में बहुत देर इंतज़ार किया पर कोई वहाँ नहीं आया।

मैं थक कर वापस होटेल आ गया। बाद में मेरे दिमाग़ में एक बात आयी कि हो सकता है कोई रात को चुपचाप आता हो? मैंने डिनर के बाद वापस वहाँ जाने का सोचा। रात के दस बजे वहाँ वापस गया और घर बाहर से पूरे अंधेरे में डूबा हुआ था और अंदर कमरों में कहीं कहीं रौशनी नज़र आ रही थी।

यह मकान एक अलग सा बना हुआ बंगला था। मैंने उसके मेन गेट को चेक किया तो पाया कि वहाँ ताला लगा था। मैं उसपर चढ़ के धीरे से दूसरी तरफ़ को उतर गया और इशा के बेडरूम की ओर चला गया। मैंने देखा कि उसके बेडरूम में अँधेरा था और लगता था कि वहाँ कोई नहीं है।

अब मैं घूम कर साइड में गया तो वहाँ मुझे लाइट नज़र आयी और मैंने सोचा कि ये तो ड्रॉइंग रूम ही होगा।

अब वहाँ सब खिड़कियाँ मैंने चेक की और सबको बंद पाया। वहाँ मोटे परदे भी लगे थे। अंदर का कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। तभी जब मैं आख़री खिड़की के पास पहुँचा तो वहाँ खिड़की का एक काँच टूटा हुआ दिखा। नीचे एक बॉल भी पड़ी थी। मैं समझ गया कि किसी ने गेंद मारी है और शीशा टूट गया है।

मैंने धीरे से टूटे काँच के टुकड़ों को बिना आवाज़ किए निकाला, और हल्के से परदे को हटाया और अंदर को झाँका। मेरी तो जैसे साँस ही रुक गयी। अंदर का दृश्य बड़ा ही अजीब था।

इशा के पापा समीर सिर्फ़ लूँगी में थे और उनकी गोद में जुली ( सोनू की ईसाई बीवी ) बैठी थी जिसने एक नायटी पहनी थी। पापा का हाथ उसकी नायटी के अंदर उसकी जाँघों को सहला रहे थे।तभी मेरी निगाह सोनू पर पड़ी, वह मुस्कुराता हुआ अपनी बीवी को अपने पापा से मज़े लेता देख कर अपनी लूँगी के ऊपर से अपने लौड़े को सहला रहा था। तभी इशा भी कमरे में आयी और आकर अपने भय्या की गोद में बैठ गयी। मेरी तो आँखें बाहर आने लगी। सोनू इशा को चूमने लगा और अपनी बाहों में भींच लिया। हे भगवान ये क्या हो रहा है? अब इशा अपने गाँड़ को ऐसे अजस्ट की जैसे नीचे गड़ रहे खूँटे से बचना चाहती हो। पर ये क्या उसने हाथ नीचे करके उसके लौड़े को लूँगी के ऊपर से सहलाना चालू कर दिया। तभी मेरी सास सीमा नायटी पहने एक ट्रे में पाँच ग्लास दूध लेकर आयी। उसने मुस्कुराते हुए सबसे पहले समीर को और जुली को दूध दिया। समीर ने दूध लिया और सीमा के दूध दबाकर बोला: रानी ये बड़े बड़े दूध भी पिला दो।

सब हँसने लगे और सास बोली: बहु के पिलो अभी, मेरे बाद में पी लेना।

फिर वह सोनू और इशा को दूध दी। सोनू भी उसके दूध दबाया और बोला: मम्मी आपके दूध सच में ज़्यादा स्वादिष्ट हैं ।

सीमा हँसके बोली: क्यूँ मेरी इशा के दूध में क्या कमी है?

सोनू:अरे इसके तो छोटे हैं और आपके बड़े बड़े हैं। चूसने में मज़ा आ जाता है।

अब सब हँसने लगे। फिर सीमा सोनू के पास ही बैठ गयी। इशा और सोनू एक दूसरे के होंठ चूसने लगे। और सोनू उसकी चूचियाँ दबाए जा रहा था। जल्दी ही सोनू ने उसकी नायटी उतार दी ।इशा ने ख़ुद ही अपने ब्रा खोल कर उतार दी। उसकी मस्त चूचियाँ बाहर आते ही सोनू उनको दबाके चूसने लगा। वह भी उसकी लूँगी खींच के उतार दी और अब दोनों नंगे एक दूसरे को चूम और चाट रहे थे।

उधर ससुर और बहु का भी यही हाल था। मैंने पहली बार जुली को नंगी देखा और मेरे लौड़ा भी खड़ा हो गया था। क्या माल थी, गदरायी हुई जवानी। पापा मज़े से उसकी मोटी चूचियाँ दबाके चूस रहे थे और वह पापा का लौड़ा सहलाए जा रही थी।

फिर पापा उसको सोफ़े पर बैठाए और ख़ुद नीचे बैठके उसकी

जाँघें फैलाके उसकी बुर चाटने लगे। मम्मी उठके वहाँ गयी और जुली की चूचियाँ दबाने लगी।

 
उधर इशा भी उठके नीचे बैठी और सोनू का लौड़ा मस्ती से चूसने लगी। मैंने भी अपना लौड़ा पैंट से बाहर निकाल लिया और मस्त होके चुदायी देखने लगा।

अब पापा सोफ़े पर बैठे और जुली उनके लौड़े को चूसने लगी। फिर जुली उठके पापा के गोद में ऐसे बैठी कि उनका लौड़ा उसकी बुर में घुसता चला गया। अब जुली उछल के पापा से चुदवाने लगी।

उधर सोनू ने इशा को सोफ़े के सहारे झुकाया और पीछे से उसकी बुर चाटा और फिर उसने अपना लौड़ा अंदर डाल दिया और उसको चोदने लगा। इशा भी गाँड़ पीछे करके उससे मज़े से चुदवा रही थी। मम्मी अब उठके इशा की चूचि दबाने लगी।

अब कमरे में डबल चुदायी की आवाज़ें भर गयीं। जुली आऽऽहहहह करके पापा के लौड़े पर उछलते हुए झड़ने लगी। पापा भी ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर शायद झड़ गए।

इधर इशा भी हाय्य्य्य्य्य मैं गयीइइइइइइइइ कहकर झड़ गयी। पर सोनू उसे चोदे जा रहा था। वह चिल्लायी: भय्या छोड़ो मुझे आऽऽहहह अब दर्द हो रहा है।

सोनू ने अपना गीला लौड़ा बाहर निकाल लिया और मम्मी से बोला: चलो मम्मी गाउन उतारो , इसे शांत करो। वह अपना लौड़ा दिखाकर बोला।

मम्मी हँसते हुए अपना गाउन खोल दी और अपनी ब्रा भी उतार दी। वह पैंटी नहीं पहनी थीं। मैंने मम्मी को पहली बार नंगी देखा था। आह क्या मस्त माल है वह, बड़े चूतर बड़ी चूचियाँ और थोड़ा सा निकला हुआ गोल पेट। अब मम्मी भी वैसे ही झुक गयी और सोनू ने उसकी बुर में ३ ऊँगली डाली और बोला: मम्मी आप तो बिलकुल गीली हो, लौड़ा डाल देता हूँ।

मम्मी: तुम लोग मेरे सामने चुदायी करते रहोगे और मैं गीली भी नहीं होऊँगी क्या? चल डाल दे अब अपना लौड़ा।

अब सोनू अपनी मम्मी को चोदने लगा और मम्मी की आऽऽहहहह निकलने लगी। सोनू मम्मी की बड़ी बड़ी लटकती हुई चूचियाँ भी दबाए जा रहा था। पापा भी मज़े से पड़े हुए अपनी बीवी को चुदते हुए देख रहे थे। और जुली भी अपने पति को सास को चोदते हुए देख कर मुस्कुरा रही थी।

जल्दी ही दोनों आह्ह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगे।

साफ़ सफ़ाई करके अब सब बैठके आराम करने लगे।

इशा और मम्मी के बीच में पापा बैठे थे। और दूसरे सोफ़े पर जुली और सोनू बैठे थे। अभी भी सभी नंगे थे।

मम्मी पापा के नरम लौड़े से खेल रही थी और इशा भी उनके बॉल्ज़ को दबाती हुई मज़े ले रही थी और उनकी झाँटों पर हाथ फेर रही थी।

इशा: चलो मैं राकेश को गुड नाइट कर देती हूँ। और वह मुझे घर के लैंड लाइन पर फ़ोन लगायी। बाद में थोड़ी परेशान होकर बोली: इस समय ये घर पर नहीं हैं , कहाँ गए होंगे?

जुली: अरे बाहर किसी लड़की के पास गए होंगे मज़े लूटने।

इशा: नहीं ये ऐसे नहीं हैं , मैं जानती हूँ।

वह पापा के बॉल्ज़ को प्यार से हथेली में भरते हुए बोली।

पापा: अरे इशा बेटी, तू राकेश को भी क्यूँ नहीं इस ग्रूप में शामिल कर लेती , उसे भी तेरी मम्मी और भाभी का मज़ा मिल जाएगा।

इशा: पापा मैं तो कभी चुदायी के बीच में उनको बोलती हूँ कि आपको मम्मी के बड़े दूध कैसे लगते हैं तो वह मुझे डाँट देते हैं कि अपनी मम्मी के बारे में कैसे ऐसा बोल सकती हो?

मम्मी भी पापा के लौड़े को झुक कर चूसने लगी। फिर मुँह उठायी और बोली: सच में बहुत ही शरीफ़ है हमारा दामाद बाबू।

मैंने अपना नाम सुनकर अपना लौड़ा हिलाया और सोचा कि कल बताऊँगा कि मैं कितना शरीफ़ हूँ।

फिर मैंने देखा कि जुली भी सोनू के लौड़े को दबा रही थी और वह भी उसकी चूचि दबा रहा था।

इशा: चलो अब सोया जाए। पापा मैं आज आपके साथ सो जाऊँ। कल भय्या भाभी के साथ सोयी थी तो भय्या ने रात दो बजे उठाके मुझे चोद दिया। सोना मुश्किल है इनके साथ।

सोनू: पापा ये झूठी है, इसने मेरा लौड़ा चूसा और मेरी नींद खुल गयी तब मैंने इसे चोदा।

सब हँसने लगे।

पापा प्यार से उसकी चूचि दबाए और बोले: चल आज हमारे साथ सो जा। मैं रात को तंग नहीं करूँगा। हाँ अगर तेरी मम्मी ऐसे ही चूसती रहेगी तो एक राउंड की चुदायी करनी ही होगी।

मम्मी मुस्कुरा के बोली: आपसे चुदवाए बग़ैर मुझे नींद नहीं आती।

फिर सब हँसने लगे और एक दूसरे से लिपट कर प्यार किए और अपने अपने कमरों में चले गए। इशा अपने पापा और मम्मी के कमरे में चली गयी।

मैं भी अपने लौड़े को पैंट के अंदर डाला और वहाँ से होटेल जाकर मूठ्ठ मारा और सो गया। अगले दिन सुबह मैं होटेल ख़ाली किया और अपने ससुराल पहुँचा। इशा के बोय फ़्रेंड का तो पता चल ही चुका था। मैं तो कल्पना भी नहीं कर सका था कि वह अपने पापा और भय्या से ही चुदवा रही है मायक़े में। अब मुझे भी इस ग्रूप में शामिल होना था, मगर कैसे?

अपने सूट केस के साथ मैं उनके घर पा खड़ा होकर बेल बजाया। दरवाज़ा मम्मी ने खोला। इस समय भी वह नायटी में ही थी। मुझे देखकर हैरान हुई और फिर ख़ुशी से मुझे गले लगा लिया। आज मैंने भी उनको अच्छे से अपनी बाहों में भींचकर उनके थोड़े से ज़्यादा ही भरे बदन का मज़ा लिया। उनकी बड़ी बड़ी छातियाँ जैसे मेरे सीने पर चिपक के फैल सी गयीं।मेरा हाथ उनकी कमर से थोड़ा नीचे गया और मज़े अहसास हुआ की उन्होंने पैंटी नहीं पहनी है। नायटी के नीचे वो पूरी नंगी थीं।

मम्मी ने मुझे थोड़ा हैरानी से देखा क्यूँकि इसके पहले मैंने उनसे कभी इतनी ज़ोर से चिपकने की कोशिश नहीं की थी।

अब हम अंदर आए तो सोफ़े पर पापा बैठ नज़र आए । वो एक लूँगी और बनयान में थे। मुझे देखकर ख़ुशी से मुझसे लिपट गए और मुझे अहसास हुआ कि उन्होंने चड्डी नहीं पहनी है।

तभी सोनू आया और वह भी बनयान और लूँगी में था और वह भी मुझसे लिपट गया। मैंने महसूस किया कि वह भी चड्डी नहीं पहने था। मैंने सोचा कि क्या परिवार है!

तभी जुली भी एक टॉप और स्कर्ट में आयी और मुझे नमस्ते की। और आख़री में इशा आयी और मुझसे लिपटके बोली: ये क्या बिना बताए आप कैसे यहाँ ?

मैंने उसकी भी कमर सहलायी और समझ गया कि वह भी पैंटी नहीं पहनी है। मेरा तो लौड़ा खड़ा सा होने लगा, ये सोचकर की सब हमेशा तय्यार रहते हैं चुदायी के लिए। तभी मैंने देखा कि कामवाली काम कर रही थी। शायद इसीलिए ये कपड़े पहने हैं नहीं तो कौन जाने ये हमेशा नंगे ही रहें।

अब इशा मेरी चारों तरफ़ घूम रही थी जैसे मुझे बहुत मिस की हो, सच्चाई तो मैं जानता ही था।

ख़ैर दामाद की तरह ख़ातिर करवाने के बाद मैंने इशा को धीरे से कहा: चलो ना तुमसे कुछ बात करनी है। ये कहते हुए मैंने उसका हाथ दबाके चुदायी का इशारा किया।

वह धीरे से बोली: छी अभी दिन में नहीं रात को कर लीजिएगा।

ख़ैर नाश्ता करने के बाद सोनू और पापा तो ऑफ़िस चले गए और बोले कि लंच पर मिलेंगे।

अब घर में मैं और तीन औरतें रह गयीं ,जिनकी चुदासि मैं कल रात देख ही चुका था। अब मैंने कहा : चलो आप बातें करो, मैं नहा कर आता हूँ।

अब इशा मेरे कपड़े निकालने आयी तो मैंने उसको अपनी बाहों में लेकर ख़ूब प्यार किया और फिर नहाने चला गया। जब मैं बाहर आया बाथरूम से तो मुझे धीरे धीरे बातें करने की आवाज़ें आ रही थीं। मैं बनयान और लोअर में चुपचाप खिड़की के पास होकर उन बातों को सुनने की कोशिश किया।

तीनों महिलाएँ सोफ़े पर पास पास बैठी थीं और धीरे धीरे बातें कर रही थीं। मुझे सुनने के लिए काफ़ी ध्यान लगाना पड़ा।

मम्मी: बेटी देखो अगर उसे इस ग्रूप में लाना है तो तुम्हें ही रास्ता निकालना पड़ेगा ।

इशा: मम्मी आप तो मेरा तलाक़ ही करा दोगी। अगर वो ये सब जानके नाराज़ हो गए और मुझे हमेशा के लिए छोड़ दिए तो मेरा क्या होगा?

जुली: हाँ ये डर तो है, सब लोग इसको पसंद नहीं करते। पर क्या करें? और कोई रास्ता है क्या?

इशा: उन्होंने मेरे सिवाय कभी किसी और में रूचि या झुकाव दिखाया ही नहीं।

जुली: मम्मी जब राकेश आपसे चिपके थे तब मैंने देखा था कि वह आपकी कमर सहलाए थे। मुझे तो लगा कि आपके चूतर भी सहलाए थे।

मम्मी: नहीं चूतर नहीं सिर्फ़ कमर सहलाया था उसने।

इशा: हाँ मम्मी और एक बात बड़े दूध उनकी कमज़ोरी है।

मम्मी: तो?

जुली: इसका मतलब ये ही कि आप उनको सिडयूस करो।

इशा: वो कैसे?

जुली: आप अभी नहाके एक ऐसी पारदर्शी मैक्सी पहनो जिसमें आपकी आधी छातियाँ दिखायी दे और नीचे ब्रा पैंटी भी नहीं पहने।

मम्मी: ओह बड़ा अजीब लगेगा ये सब करते हुए मुझे।

जुली: अब उनको लुभाना है तो ये सब तो करना ही होगा ना?

मम्मी: एक काम करते हैं कि हम तीनों ही ऐसे कपड़े पहन लेते हैं। तब मुझे भी अजीब नहीं लगेगा।

जुली: हाँ ये ठीक है जब हम कोई भी ब्रा नहीं पहनेंगी तो वह शायद यह सोचेगा कि घर में हैं इसलिए नहीं पहनी।

इशा: पर वह मुझसे तो पूछेंगे कि मैंने क्यों नहीं पहनी?

जुली: तुम बोल देना कि गरमी है इसलिए और सिर्फ़ आप ही तो मर्द हो इस समय, और आपसे क्या पर्दा?

मम्मी: हाँ ये ठीक रहेगा, पर उसके बाद?

जुली: मम्मी ज़्यादा प्लानिंग नहीं करते है जैसे जैसे स्तिथि बनेगी वैसे वैसे फ़ैसला करते चले जाएँगे,पर आज लंच के पहले हम उनको अपने ग्रूप में शामिल कर ही लेंगे।

मैंने मन ही मन सोचा कि यहाँ मैं भी तो इनके ग्रूप में शामिल होने को मरा जा रहा हूँ। आग लगी है दोनों तरफ़ बराबर से

मैं वापस आके सोफ़े पर बैठ गया और तीनों बोलीं कि चलो हम भी नहा लेती हैं। मैंने देखा कि कामवाली जा चुकी थी। मैंने TV चालू किया और इंतज़ार करने लगा कि कब मेरा तथाकथित सिडक्शन चालू होता है। मैं मन ही मन मुस्कुराया।

आधे घंटे के बाद जुली आयी और अपने तौलिए से बाल पोछते हुए बाहर पीछे के आँगन में तौलिया सुखायी। मैंने साफ़ देखा कि बिना ब्रा और पैंटी के वह पतली सी मैक्सी में क़ातिलाना नज़र आ रही थी। उसकी पारदर्शी मैक्सी से उसके डोलते चूतर ग़ज़ब का नज़ारा दिखा रहे थे। उसकी ब्रा के बिना चूचियाँ इधर उधर होकर मुझे मस्ती से भर गयी।मेरा लौड़ा फूलने लगा।

तभी इशा आयी और मेरी ओर मुस्कुरा के देखा और अपना तौलिया बाहर आँगन में सुखाने लगी। उसकी भी चूचियाँ और चूतर इधर उधर हो रहे थे। मैं उठा और आँगन में जाके उसको पकड़ लिया और चूमते हुए उसके चूतरों को दबाया और बोला: आज पैंटी नहीं पहनी हो? फिर दूध दबाके बोला: ब्रा भी नहीं ? क्या बात है?वह बोली: बहुत गरमी है ना इसीलिए। और आप ही तो हैं यहाँ और कोई है ही नहीं।

तभी किसी के आने की आवाज़ आयी और मैंने वापस सोफ़े पर आके बैठ गया। अगला दृश्य तो बहुत ही मादक था। मम्मी भी एक मैक्सी में लगभग पूरी नंगी दिख रही थी और उनके बड़े बड़े दूध तो जैसे उछल से रहे थे और उनके बड़े चूतरों ने तो जैसे धमाल ही मचा रखा था। वह भी आँगन में तौलिया सुखायी और अंदर आ के बोली: बेटा चाय लोगे?

मैं उनके अर्ध नग्न शरीर को देखते हुए बोला: जी मम्मी जी।

वह मुस्कुराते हुए पलटी और अपने विशाल नितम्बों को मटकाते हुए किचन में गयीं।

अब इशा और जुली आयीं और मेरे सामने वाले सोफ़े पर बैठ गयीं। उनकी मैक्सी ऊपर चढ़ गयी थी और उनकी घुटनों तक नंगी थीं। तभी मम्मी चाय लायी और झुककर मुझे देने लगी । उनकी छातियाँ आधी से ज़्यादा नंगी दिख रही थीं। मेरी आँखें उनपर चिपक गयीं। मम्मी ने देखा कि मैं उनकी छातियों को बेशर्मी से देख रहा हूँ तो वो शरारत से मुस्करायी।

मैंने भी अब मम्मी के हाथ से चाय ली और पीने लगा। मम्मी वहीं मेरे पास बैठ गयी।

मैंने सोच रहा था कि वो सब चूदने को तय्यार हैं और मैं चोदने को मरा जा रहा हूँ। पर ये शर्म की दीवार कैसे टूटे।

अब मैंने देखा कि जुली ने अपनी टाँगें फैला दी थी और उसकी मैक्सी में से उसकी जाँघे दिखने लगी थी। मेरा लौड़ा अब मुझे छुपाने में बड़ी मुश्किल हो रही थी।

अब मम्मी फिर से झुकी और बोली: बेटा भूक तो नहीं लगी?

उनकी आधी नंगी छातियाँ फिर से मेरे सामने थीं। मैंने उनको बेशर्मी से घूरते हुए कहा: मम्मी अभी नहीं लगी है। हाँ पानी पी लूँगा।

मम्मी पानी लायीं और फिर जब झुकीं आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्या नज़ारा था। बड़ी बड़ी चूचियाँ हिले जा रही थीं।

फिर सब बातें करने लगे।

हम सब एक ही चीज़ चाहते थे पर समझ नहीं आ रहा था कि शुरुआत कहाँ से हो? आइस ब्रेकिंग नहीं हो पा रही थी।

जुली बोली: चलिए ताश खेलते हैं।

मैंने कहा: चलो।

अब चारों नीचे क़ालीन पर बैठ गए और ताश खेलने लगे। मैं और इशा आमने सामने बैठे थे और मम्मी और जुली आमने सामने बैठी थीं। मेरी आँखें बार बार उनकी चूचियों पर जा रहा था। और नीचे बैठने के कारण उनकी मैक्सी भी जाँघों पर चढ़ गयी थीं और किसिने भी पैंटी नहीं पहनी थी इसलिए मुझे थोड़ी कोशिश से उनकी जाँघों का ऊपर का हिस्सा भी दिख रहा था।

इशा ने खेलते हुए एक जोक सुनाया और जुली हँसते हुए लोट पोट हो गयी और उसके हिलने से उसकी चूचियाँ हिलने लगी और उसकी जाँघें फैल गयी और इसकी बुर के दर्शन हो गए। मेरी आँख वहीं गड़ गयी थी और इशा हँसने लगी ।मैं चौक के इशा को देखा तो उसने आँख मार दी।

मम्मी भी हँसकर बोली: क्या हुआ बेटा ? कुछ देख लिया क्या?

अब मैं भी बेशर्म होकर बोला: हाँ मम्मी बहुत सुंदर सी एक चीज़ देखी। मज़ा आ गया।

मम्मी: वह चीज़ तो इशा के पास भी है और तुम अक्सर उसको देखते और उसके अंदर बहुत कुछ करते हो।

इशा: मम्मी आप भी ना कुछ भी बोल देते हो।

जुली: आप लोग तो मेरे पीछे ही पड़ गए हो।

इशा: मम्मी एक बात तो है,मेरी चीज़ तो अब इनकी ही है और इशा की चीज़ तो देख ली है, अब आपकी चीज़ ही देखना बची है।

मम्मी: मुझे अपनी चीज़ दिखाने में कोई परेशानी नहीं है बस एक शर्त है कि राकेश अपनी चीज़ भी हम सबको दिखाए।

अब जुली और इशा अपने मुँह में हाथ रख के हँसने लगी।

मैं भी बोला: जैसा आपका आदेश मम्मी जी।

मेरे ये बोलते ही वहाँ चुप्पी छा गयी। मज़ाक़ मज़ाक़ में बात बहुत आगे बढ़ गयी थी।

मम्मी ने इशा और जुली को देखा और वो दोनों भी अब थोड़ा सा कन्फ़्यूज़्ड थे।

मैं समझ गया कि अगर हम पीछे हटे तो फिर पता नहीं कब मौक़ा मिले।अब मैं बोला: क्या हुआ मम्मी दिखाइए ना।

मम्मी ने गहरी साँस की और अब अपनी मैक्सी ऊपर करने लगी और अब उनकी गदरायी हुई जाँघें मेरे सामने थी। आह क्या गोरी गुलाबी जाँघें थीं भरी हुई। अब उनकी मैक्सी और ऊपर हुई और उनकी बुर जो बहुत ही फूली हुई थी मेरे सामने थी। मेरा लौड़ा झटके मारने लगा। उनकी खुली बुर के अंदर का गुलाबीपन भी साफ़ दिखायी दे गया , जब उन्होंने अपनी जाँघों को और फैलाया।

मैंने देखा कि इशा और जूली की आँखें मेरे ऊपर ही थीं। वो मेरी प्रतिक्रिया के इंतज़ार में थी। मैं अब मम्मी की बुर को देखा और मुस्कुरा के बोला: मम्मी आपकी चीज़ सबसे मस्त है क्या मस्त कचौड़ी की तरह फूली हुई है।

मम्मी ने हँसते हुए अपनी मैक्सी नीचे कर दी।

फिर सब हँसने लगे और इशा बोली: तो आपने सबकी चीज़ देख ली आख़िर में।

जुली : अब आप मम्मी की शर्त पूरी करो।

मैंने इशा को देखा और बोला: क्या कहती हो?

इशा : आपको अपनी शर्त तो पूरी करनी ही चाहिए।

मम्मी: हाँ आदमी को अपनी ज़ुबान से नहीं मुकरना चाहिए।

अब मैं भी हँसते हुए खड़े होकर बोला: चलिए आपका आदेश सिर आँखों पर। ये कहते हुए मैंने अपना लोअर नीचे कर दिय, और चड्डी में मेरा लौड़ा फँसा हुआ सबके सामने था।

सबकी आँखें अब मेरी चड्डी पर ही थी। अब मैंने धीरे धीरे अपनी चड्डी नीचे की और मेरा खड़ा लौड़ा सबकी आँखों के सामने था।

मम्मी और जूली की आँखें चमक उठीं मेरे लौड़े को देखकर।

आइस ब्रेक हो गयी थी, शर्म लिहाज़ का पर्दा अब उठ गया था।

मैं बोलता चला गया:--------::::::----------

 
मेरा लौड़ा हवा में ऊपर नीचे हो रहा था और तीनों औरतों की आँखें भी उसी पर जमी हुई थीं।

अब मम्मी ने हाथ बढ़ाके मेरे लौड़े को पकड़ा और उसके सुपाडे की चमड़ी को पीछे करके नंगे मोटे गुलाबी सुपाडे को देखकर मस्ती से उसपर अपना अँगूठा फेरने लगीं। जुली भी पास आइ और मेरे बॉल्ज़ को सहलाने लगी।

अब इशा हँसते हुए बोली: वाह मेरे हिस्से का हथियार मेरी मम्मी और भाभी लेकर बैठीं हैं।

अब जुली ने अपनी जीभ निकाली और मेरे बॉल्ज़ को चाटने लगी।

मम्मी: वाह तो क्या तू ही सबके लौड़े का मज़ा लेगी और हमें क्या नहीं लेने देगी।

मैं अनजान बनकर बोला: मम्मी ये और कौन से लौडों का मज़ा ले रही है? ये आप क्या कह रही हैं?

एक मिनट की चुप्पी सी छा गयी । फिर मम्मी हिम्मत करके बोली: बेटा देखो अब तुमसे क्या छिपाना , असल में हम सब इन्सेस्ट सेक्स में विश्वास करते हैं। और इशा अपने पापा और भय्या से भी चुदवाती है।

मैंने नाटक चालू रखते हुए कहा: ओह, तभी ये जब भी मायके से वापस आती है बिलकुल संतुष्ट रहती है। अब समझा मैं इसका राज़।

इशा मेरे पास आकर बोली: जानू आप नाराज़ तो नहीं हो?

मैं क्या नाराज़ होता, उस समय मम्मी मेरा लौड़ा चूस रही थी और जुली मेर बॉल्ज़ चाट रही थी, मैं तो मज़े के मारे मस्ती से भरा हुआ था।

मैंने इशा की चूचियाँ दबाकर कहा: अरे नहीं मेरी जान मैं तो ख़ुश हूँ, पर ये बात तुम्हें मुझे पहले ही बता देनी चाहिए थी।

ये कहते हुए मैंने उसके होंठ चूसने शुरू किए।

तभी मुझे लगा कि एक हाथ मेरी गाँड़ के छेद को सहला रहा है। मैंने मुड़कर देखा तो वह हाथ जूली का था। वह अब मेरी गाँड़ में ऊँगली कर रही थी ।

मैं अपने आप को किसी राजा के बराबर महसूस कर रहा था जिसे दो औरतें बैठ कर और एक झड़ी होकर मज़े दे रहीं थीं।

फिर मम्मी बोली: बेडरूम में चलें और मज़े को आगे बढ़ाएँ?

अब हम सब बेडरूम में पहुँचे और मम्मी ने मुझे कहा : चलो अपने कपड़े उतार दो। मैंने अपनी शर्ट खोल दी, अब मैं पूरा नंगा था।

मम्मी मेरी मस्कूलर जाँघों पर हाथ फेरकर बोली: वह क्या मर्दाना बदन है बेटा तेरा? इशा सच में बहुत क़िस्मत वाली है।

मैं: अब आप लोग भी तो अपनी जवानी का दर्शन कराओ।

जूली हँसते हुए अपनी मैक्सी उतार दी और पूरी नंगी होकर बिस्तर पर लेट गयी और मुझे देखकर एक रँडी की तरह आँख मारी और अपने होंठ को दाँत में दबाकर एक सेक्सी लूक दी।

इशा भी नंगी हो चुकी थी।

मैं मम्मी की मैक्सी उतारा और उनका भारी और भरा हुआ बदन देखकर मस्ती से उनको चूमने लगा। अब हम दोनों एक दूसरे से चिपके खड़े थे और मेरे हाथ मम्मी की विशाल छातियों पर आके उनको दबाकर मज़े से भर रहे थे।

अब मैं झुक कर उनकी चूचियाँ चूसने लगा। मम्मी आऽऽहहह कर उठी। मेरा हाथ उनके विशाल नितम्बों पर भी घूमने लगा और मैं मज़े से उनको दबाकर जैसे पागल सा होने लगा।

इशा और जुली बिस्तर पर लेट कर ये सब देख रही थीं। अब इशा की चूचि जूली के मुँह में आ गई थी और वह भी जुली की चूचि दबा रही थी।

मैंने मम्मी को बिस्तर पर लिटाया और अब उनकी जाँघों के बीच आकर उनकी बुर को चूमने और चाटने लगा। मम्मी हाऽऽऽऽऽहह्यय करके चिल्लाने लगी।

इशा उठकर बैठी और बोली: क्यूँ तड़पा रहे हैं मम्मी को, चोद दीजिए ना जल्दी से।

मैं मुस्कुरा के बोला: लो जान ,मैं तुम्हारी माँ चोदता हूँ। और ये कहकर उनकी बुर में अपना लौड़ा फ़िट किया और दबाने लगा। लौड़ा जैसे माँस की गुफ़ा में धँसता ही चला गया। अब मेरी भी मज़े से ह्म्म्म्म्म्म्म निकल गयी और मम्मी तो आऽऽऽऽहहह बेटाआऽऽऽऽऽ कहके अपनी गाँड़ ऊपर उछाली और मेरा पूरा लौड़ा अपने अंदर निगल लिया।

जल्दी ही मैंने और मम्मी ने चुदायी की ताल को पकड़ लिया धमाकेदार चुदायी चालू हो गइ ।फ़च फ़च की आवाज़ और मम्मी की सिसकारियाँ गूँजने लगीं। मैं पूरे जोश से उनकी चूचियाँ मसलते हुए उन्हें चोदे जा रहा था। इशा भी अपनी मम्मी के बदन पर हाथ फेर रही थी। जुली पीछे से मेरे बॉल्ज़ को पकड़कर उनसे खेल रही थी। अब हम दोनों मज़े में भरकर एक दूसरे के अंदर घुसे जा रहे थे। और फिर हम चिल्ला कर झड़ने लगे। मैंने अपना रस मम्मी की बुर में भर दिया।

फिर मैं आकर मम्मी के बग़ल में लेट गया और हाँफने लगा।

बाथरूम से फ़्रेश होकर वापस आने के बाद हम लेट कर बातें कर रहे थे। क़रीब २० मिनट के बाद जूली मेरे नरम लौंडे को मुँह में लेकर चूसने लगी।

इशा: लो अब आपको भाभी को भी चोदना होगा। देखिए कितनी मेहनत कर रही है आपसे चुदवाने के लिए।

मम्मी मुस्कुरा के बोली: तो क्या हुआ ? तू भी तो उसके पति से चुदवाती है, वो आज तेरे पति से चुदवा लेगी। हिसाब बराबर।

हम सब हंसने लगे। अब मेरा लौड़ा मस्ती से खड़ा होकर चुसाई का मज़ा ले रहा था। अब जुली मेरे ऊपर आकर बैठ गयी और अपनी बुर मेरे लौड़े के ऊपर रखकर उसको अपनी बुर में हल्के से दबायी और मेरा सुपाड़ा उसकी बुर के छेद में घुस गया और फिर वो हाऽऽऽयय्यय करके अपनी बुर को मेरे लौड़े पर दबाकर मस्ती से भर कर पूरे जड़ तक अंदर दबा ली। अब वह आह्ह्ह्ह्ह कहकर उछल कर मेरे ऊपर कूदने लगी और मेरी चुदायी का मज़ा दुगुना कर दी।मैं भी अब नीचे से अपनी कमर उछालके चोदने लगा।क्या टाइट बुर थी जूली की। मज़ा आ गया और मैं भी आऽऽऽहहह बेबी क्या बुर है तुम्हारी? कहते हुए झड़ने लगा और वह भी आऽऽह्ह्ह्ह्ह मैं झड़ीइइइइइइइइइइइ कहते हुए शांत हो गयी।

अब हम सब फिर से नंगे होकर लेटे थे तभी दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी और जुली बोली: लगता है दोनों आ गए खाने के लिए।

तभी कमरे में पापा और सोनू आए और मुझे और तीनों औरतों को देख कर बोले: वाह कृष्ण जी गोपियों से मज़े ले रहे हैं।

इशा: पापा ये राकेश बहुत ख़राब हैं। इन्होंने मम्मी और जूली से मज़ा ले लिया है पर मेरा इनको बिलकुल भी ख़याल नहीं है। मैं तो अभी भी प्यासी हूँ।

पापा : अरे बेटी हमारे होते तुम प्यासी कैसे रह सकती हो? सोनू, इस राकेश ने हमारी बीवियों को चोदा है , चल हम दोनों इसकी बीवी को चोदते हैं।

सब हँसने लगे और पापा और सोनू ने अपने कपड़े निकाल दिए। उनके लौड़े मस्ती से खड़े थे। इशा ने आगे बढ़ कर उनके लौडों को पकड़ा और एक एक करके चूसने लगे। दोनों उसकी चूचियाँ दबाए जा रहे थे।

फिर पापा वहाँ बिस्तर पर लेट गए और इशा उनके ऊपर आ गयी और उनका लौड़ा अपनी बुर में डाल लिया ।अब इशा उनके लौड़े के ऊपर अपनी गाँड़ उछाल कर चुदवाने लगी। तभी सोनू भी अपने लौड़े पर क्रीम लगाया और फिर इशा की गाँड़ में भी क्रीम लगाया और फिर वह उसकी गाँड़ में अपना लौड़ा डालके उसकी पिछवाड़े की ठुकायि करने लगा।मैं भी उसकी डबल चुदाई अपने पापा और भय्या से देखके मस्त हो गया।

इशा भी हाऽऽऽऽय्यय और आऽऽऽऽहहह मज़ाआऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ रहा है । ये कहते हुए ज़ोर ज़ोर से चुदवा रही थी। उधर फ़च फ़च और ठप ठप्प की आवाज़ों से ज़बरदस्त चुदायी का पता चल रहा था।

तभी इशा उइइइइइइइइ कहते हुए झड़ने लगी, उधर पापा और सोनू भी ह्म्म्म्म्म कहकर झड़ते चले गए।

फिर तीनों मज़े से झड़कर एक दूसरे से चिपक कर पड़ गए।

अब सब नंगे ही उठ कर खाने पर बैठे। खाना तीनों औरतें सर्व कर रही थीं और हम सब कभी उनकी चूची तो कभी पेट और कभी चूतरों पर हाथ फेर देते थे। इसी तरह खाना निपटा।

उसके बाद एक घंटे के बाद जो २ घंटे चुदायी हुई उसके क्या कहने। ये याद ही नहीं रहा कि कौन किसे चोद रहा है? जो छेद ख़ाली दिखता उसमें लौड़ा पेल दिया जाता।

जब सब थक गए तो आराम से लेटे हुए थे, उस वक़्त मम्मी ने कहा: अब तो हम लोग राकेश और इशा के घर भी जाते रहेंगे। वहाँ भी यही मज़ा लेंगे।

इशा: हाँ मम्मी क्यों नहीं? पर जब मेरे ससुराल वाले आएँगे तब हमको इस सबसे बचना होगा।

मम्मी: अरे तुम दोनों हमारे समधी और समधन को भी इसने खिंच लो ना।

मैं: मतलब?

जुली: मतलब ये कि आप अपनी माँ को चोद लो जैसे सोनू अपनी माँ को चोदता है। और इशा भी अपने ससुर से चुदवा ले जैसे मैं यहाँ पापा से चुदवा रही हूँ।

मेरा तो सिर ही घूम गया। ये सब क्या हो रहा है? ससुराल की बात और थी पर मैं अपनी सगी माँ को चोदूँ या अपनी बीवी को अपने पापा से चुदवाऊँ? ये थोड़ा अजीब सा लग रहा था।

ऐसा नहीं है कि मैं कभी अपनी मम्मी की तरफ़ आकृष्ट नहीं हुआ था बल्कि एक समय तो मैं उनको कपड़े बदलते हुए चोरी से देखा करता था। पर अब शादी के बाद ये सब,वह भी जब वो क़रीब ४७ की हो चुकी थी,बड़ा अजीब लग रहा था। और क्या पापा अपनी बहु के साथ ये सब करना चाहेंगे ?

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राकेश अब चुप हो गया तो इशा बोली: नमिता, जानती हो , मेरे घर वालों ने बार बार इनको कहा कि तुम अपनी माँ और पापा को भी इसमें शामिल कर लो।

और ये आख़िर में तय्यार हो गए।

नमिता: तो तुमने अपने ससुर को कैसे पटाया? और राकेश आपने अपनी मम्मी को कैसे पटाया?

राज इशा की चूचियाँ दबाके बोला: हाँ बताइए ना आपने ससुर जी को कैसे पटाया?

अब इशा बोलने लगी: -----------

 
इशा बोलने लगी:-----

हम जब वापस अपने घर आए तो कुछ दिनों बाद राकेश के पापा का फ़ोन आया कि वो और मम्मी हमारे घर कुछ दिनों के लिए आ रहे हैं। राकेश बोले: पापा का फ़ोन था वो यहाँ मम्मी के साथ आ रहे हैं। अब क्या होगा?

मैं बोली: कुछ नहीं होगा। मैं पापा को सम्भालूँगी और आप मम्मी को सम्भाल लेना।

राकेश: पापा तो मर्द हैं वह तो तुमसे पट ही जाएँगे। मुझे दिक़्क़त होगी मम्मी को मनाने में।

इशा: हाँ शायद मुझे भी ऐसा लगता है। चलो कल आएँगे तब देखेंगे।मुझे कुछ सेक्सी कपड़े पहनने होंगे और उनको रिझाना होगा।

राकेश: मुझे भी सोचना होगा कि मैं क्या करूँ?

दूसरे दिन राकेश और मैं स्टेशन गए । मैंने एक टॉप पहना था जो मेरी आधी चूचियों को ही छुपा रहा था। मेरी लो जींस भी मेरे नितम्बों को उभार रही थी। राकेश भी टी शर्ट और जींस में बहुत सेक्सी दिख रहे थे। अब जैसे ही पापा और मम्मी बाहर आए ट्रेन से ,मैंने झुक कर पापा के पैर छुए। मैंने तिरछि निगाह से देखा तो पापा की आँख मेरी अर्ध नग्न चूचियों पर ही थी।मुझे समझ में आ गया था कि मेरा काम ज़्यादा कठिन नहीं है। अब मैंने पापा की तरफ़ अपने चूतर किए और मम्मी के पैर छूने लगी। मैंने थोड़ा सा टेढ़ा होकर देखा कि पापा की आखें मेरी गाँड़ पर ही थी।राकेश ने मुझे बाद में बताया था कि मेरी जींस नीचे खिसक गयी थी और मेरा आस क्रैक यानी कि मेरी गाँड़ की दरार पापा को नंगी दिख गयी थी।

जब मैं उठी तो मैंने देखा कि राकेश से पापा कुछ अजीब तरीक़े से गले मिल रहे थे। वो अपने पेट के नीचे के हिस्से को पापा से दूर रखे हुए थे। तब मैंने ध्यान दिया कि उनका पैंट का आगे का हिस्सा थोड़ा अजीब सा फूला हुआ था। शायद उनका लौड़ा खड़ा हो गया था।अब राकेश भी मम्मी से गले लगे और उन्होंने जैसे मम्मी को अपने आप में जकड़ सा लिया। मम्मी की बड़ी छातियाँ राकेश के चौड़े सीने पर जैसे फैल सी गयीं थीं। राकेश का हाथ मम्मी की चिकनी नंगी कमर पर थे और वह वहाँ सहलाने लगा। मम्मी ने साड़ी पहनी थी। फिर राकेश के हाथ थोड़ा नीचे गए और मम्मी के चूतरों के उभार जहाँ शुरू होते थे , वहाँ तक पहुँच गए।

मैंने देखा कि मम्मी के चेहरे पर उलझन के भाव थे।

फिर वह दोनों अलग हुए और राकेश ने मम्मी का सामान उठाया और मम्मी का हाथ पकड़के चलने लगा। मैं भी पापा का एक बैग उठा कर पापा के आगे आगे चलने लगी ताकि पापा मेरी मटकती हुई गाँड़ से मस्त हो जाएँ। पापा मेरे पीछे पीछे आ रहे थे।

प्लैट्फ़ॉर्म पर सीढ़ियाँ चढ़ते हुए राकेश ने मम्मी की कमर में हाथ डाल दिया मानो सहारा दे रहा हो। अब उसके हाथ बार बार कमर और चूतरों के उभार के ऊपरी हिस्से पर आ जाते थे। उधर मैंने सीढ़ी चढ़ते हुए अपनी पैंट को नीचे खिसकते हुए महसूस किया पर उसे वैसे ही रहने दिया। तभी मैंने देखा कि मेरे पीछे से आगे जाने वाले मुड़कर मेरे चेहरे को देख रहे थे। मैं समझ गयी कि वो जानना चाहते थे कि ये अपने चूतरों की दरार दिखाने वाली लड़की सामने से कैसे दिखती है।

तभी पापा मेरे पास आए और बोले: बेटी पैंट ऊपर करो, पीछे से नंगी दिख रही हो। मैंने शर्माने का अभिनय किया और पैंट ऊपर कर ली।

पापा धीरे से बोले: बेटी इस बार बहुत माडर्न ड्रेस पहनी हो क्या बात है?

मैं: पापा आपको अच्छी नहीं लगी तो आगे से नहीं पहनूँगी।

पापा: अरे नहीं बेटी मुझे तो बड़ी अच्छी लगी तुम इस ड्रेस में। ये कहते हुए वो मेरी अर्धनग्न छातियों को घूरने लगे।

फिर बोले: बेटों तुम्हारी फ़िग्यर अब मस्त हो गयी है। तुम पहले से ज़्यादा ग़दरा गयी हो। लगता है राकेश तुमको बहुत प्यार दे रहा है। ये कहते हुए उन्होंने एक शरारती हँसी के साथ मेरे बाँह को दबा दिया।

मैं भी शर्माने का अभिनय करके बोली: पापा आप भी ना कुछ भी बोल देते हैं।

तभी पापा सामने की ओर इशारा करके बोले: देखो राकेश कैसे अपनी माँ से चिपका जा रहा है? क्या तुम इसको अपने से नहीं चिपकाती? वह हँसने लगे और मेरी कमर में चुटकी काट दिए।

ऐसा ही चुहल करते हुए हम बाहर आए। राकेश ने तो हद ही कर दी और अपने आप को अपनी मम्मी से एक पल के लिए भी अलग नहीं होने दिए।

बाहर आके राकेश ने कार निकाली और डिकी खोलने के बाद मैं उसने सामान रखने को झुकी और मेरी पैंट फिर नीचे हो गयी। पापा ने मेरे पीछे से मुझे देखते हुए और एक एक बैग दिया जिसे मैंने अंदर डिकी में रखने लगी। फिर मैंने डिकी बंद की और राकेश के साथ मम्मी आगे बैठी। मैं और पापा

पीछे की सीट पर बैठे। राकेश ने गाना लगा किया। अब पापा धीरे से बोले: बेटी, क्या तुमने पैंटी नहीं पहनी है? तुम बार बार पीछे से नंगी हो जाती हो जैसे ही तुम झुकती हो और तुम्हारी पैंट नीचे हो जाती है।

मैं: पापा आप भी ना ये कैसा सवाल है? मुझे जवाब देने में भी शर्म आ रही है।

तभी पापा ने मेरी पीठ पर हाथ रखा और उसको नीचे ले जाकर मेरी नंगी कमर पर सहलाते हुए मेरी नीचे की ओर ले गए और उनका हाथ मेरे नीचे की ओर खिसकी हुई पैंट पर आ गया। अब उनकी उँगलियाँ मेरे आस क्रैक के ऊपर आ गयी और वहाँ छेड़ खानी करने लगी। मैंने उनकी ओर देखा तो वह शरारत से मुस्कुराए और फुसफुसाए: सच में तुमने पैंटी नहीं पहनी है।मैं शर्माने का नाटक की।

मैंने उनको इशारा किया कि हाथ हटा लें। वह अब हाथ हटा लिए। फिर मैंने देखा कि पापा अपने पैंट को ऊपर से दबा रहे थे जहाँ उनका लौड़ा एक डंडे की तरह अकड़ा हुआ साफ़ दिखाई दे रहा था।

अब हम घर पहुँचे और मैंने सबको पानी दिया। जब मैंने पापा को पानी दिया तो वह मेरी चूचियों को देखे जा रहे थे।

राकेश ने भी यह देखा और मुस्कुराए। मम्मी ने भी देखा और थोड़ी सी परेशान दिखाई दी।

जब मैं किचन में थी चाय बनाने के लिए तब मम्मी भी वहाँ आयीं और बोली: बेटी, ये तुम क्या कर रही हो? मैंने तुमको ऐसे कपड़ों में कभी नहीं देखा? तुम तो साड़ी का पल्लू लेती थी सिर पर।फिर ये क्या अर्ध नग्न से कपड़े पहन कर घूम रही हो?

मैं: मम्मी, आपके बेटे यही चाहते हैं कि मैं ऐसे कपड़े पहनूँ।

मम्मी: ओह राकेश ऐसा चाहता है? बड़ी अजीब बात है।

मैं: अगर आपको पसंद ना हो तो मैं नहीं पहनूँगी।

मम्मी: ओह नहीं इसके बारे में बाद में बात करेंगे।

फिर मैं सबके लिए चाय लायी और जब पापा को दी तब फिर वही चूचि दर्शन करने लगे। अबके मम्मी भी अच्छी तरह से देख ली थी कि पापा मुझमें इंट्रेस्ट ले रहे हैं।

फिर मम्मी पापा से बोली: चलो जी नहा धो लो अब फिर नाश्ता करेंगे।

पापा: हाँ चलो । फिर वह दोनों गेस्ट रूम में चले गए।

राकेश मेरे को चूमते हुए बोले: पापा तो गए काम से। वह तो तुम्हारे बदन के दीवाने हो चुके है।

मैं भी हँसते हुए बोली: मेरा काम तो आसान हो चला है, आपके काम का क्या हाल है?

राकेश: मैंने भी मम्मी को पूरे टाइम पकड़े रखा और वह बहुत ख़ुश थी कि मैं उनका इतना ख़याल रख रहा हूँ। हाँ और उन्होंने मेरे द्वारा अपनी कमर को और चूतरों को छूने का कोई विरोध नहीं किया।

मैं: चलो शुभारम्भ हो गया इसका मतलब।

हम दोनों हँसने लगे।

फिर मैं किचन में जाकर नाश्ता बनाने लगी।

राकेश tv देखने लगे।

अब इशा चुप हो गयी और उसका बेटा बहुत गरम होकर उसकी बुर में अपना लौड़ा डालके उसको चोदने लगा। इशा चुदवाते हुए बोली: हाऽऽऽऽय्यय राकेश अब तुम आगे की कहानी सुनाओ। आऽऽऽऽह मुझे इससे चुदवा लेने दो।

अब राकेश नमिता और बाक़ी सबको बताने लगा:::::::------

थोड़ी देर बाद मम्मी अपना गीला तौलिया लेकर बाहर आइ वह बहुत सुंदर दिख रही थीं काली साड़ी में। उनकी एक छाती साड़ी के पल्ले से बाहर थी और ब्लाउस में बहुत तनी हुई दिख रही थी। वह तौलिया बाहर जाके आँगन में सुखायी ।

अंदर आके वह किचन में चली गयी और इशा की खाना बनाने में मदद करने लगी।

मेरी आँख लग गयी,जब मेरी आँख खुली तो देखा कि मम्मी और इशा किचन से बाहर आ गयीं थीं और बातें कर रही थीं। इतवार होने की वजह से मुझे कहीं नहीं जाना था। मम्मी और इशा अपना पसीना सुखा रही थीं।

फिर पापा भी आ गए और हम सब बातें करने लगे। अब इशा बोली: मम्मी मैं ज़रा बाज़ार से आती हूँ, थोड़ी सब्ज़ी और राशन लाना है। मैं कार ले जा रही हूँ।

पापा: बेटी, मैं भी चलता हूँ, यहाँ बोर ही होऊँगा। बाज़ार में मेरा भी मन बहल जाएगा और थैले उठाने में तुम्हारी मदद भी कर दूँगा।

मम्मी: इशा, तुम अपनी पैंट बदल लो नहीं तो सब्ज़ी लेने के जितनी बार झुकोगी उतनी बार तुम्हारा नंगा पिछवाड़ा सबको दिखेगा।

इशा: छी मम्मी आप भी कैसे बोलती हो?

मम्मी: मैं क्या ग़लत बोल रही हूँ, और ये टॉप भी बदल लो इस लो नेक में तुम्हारा आधा बदन तो नंगा दिख रहा है।

इशा: अच्छा अच्छा मैं जाकर अभी बदल लेती हूँ।

थोड़ी देर बाद वह कपड़े बदल कर आइ और पापा की तो आँखें जैसे उसके टॉप पर ही चिपक गयीं। उसने अब लो नेक के जगह अब पूरे गले तक का टॉप पहना था जो कि इतना टाइट था जिसमें से उसके कसे हुए कबूतर साफ़ ब्रा के साथ दिखाई पड़ रहे थे। उसने अब प्रॉपर जींस पहनी थी जिसमें उसके गोल चूतर पूरे कसे हुए बहुत सेक्सी लग रहे थे। मुझे पता था कि उसने नीचे पैंटी भी नहीं पहनी है। क्या मस्त माल लग रही थी और पापा को तो अपना लौड़ा पैंट में ठीक करना ही पड़ा। मैं समझ गया था कि पापा का तो आज क़त्ल हो कर ही रहेगा। पापा इशा के पीछे पीछे उसकी गोल गाँड़ का मज़ा लेते हुए बाहर चले गए।

अब मुझे मम्मी को पटाना था। जो आसान काम नहीं था।

मैं मम्मी को बोला: आप भी चली जाती इशा के साथ?

मम्मी: तेरी बीवी को पता नहीं क्या हो गया है? ऐसे कपड़े पहन कर गयी है अपने ससुर के साथ। तेरे पापा भी उसके पीछे पीछे जा रहे हैं। मुझे ये सब अजीब सा लग रहा है।

मैं: अरे मम्मी आप भी ना, इशा एक माडर्न लड़की है आप क्या उलटा पलटा सोच रही हो? अच्छा ये बताओ कि आप नहा कर किचन में क्यों गयीं? पूरे पसीने से भीग गयीं है।

मम्मी: अरे बेटा मुझे भी तो बहु की मदद करनी चाहिए।

चलो पसीना अभी सूख ही जाएगा।

अब मैंने लाड़ दिखाते हुए कहा: मम्मी कितने दिन हो गए हैं, मैं आपकी गोद में लेटा नहीं हूँ ।

मम्मी हँसने लगी और बोली: अरे इतना बड़ा हो गया है और अभी भी मेरी गोद में लेटेगा? अच्छा चल आ जा लेट जा।

मैं उनकी गोद में अपना सिर रख के लेट गया। मैंने अपना सिर उनके पेट की ओर घुमा लिया और उनके नंगे पेट को सहलाने लगा। फिर मैंने उनके गोरे चिकने पेट पर अपना चेहरा रगड़ा और वह गुदगुदी से उछल गयीं।

मम्मी: अरे तेरी दाढ़ी गड़ रही है, बंदर।

मैं: मम्मी मुझे तो आपके नरम पेट को छूना बड़ा अच्छा लग रहा है।

मम्मी: चल हट बदमाश कहीं का। ये कहते हुए उन्होंने अपना माथा पोंछा , तब मैंने देखा कि उनकी ब्लाउस की बग़लें पसीने से भीगी हुई हैं।

मैंने फिर उनको कहा: मम्मी ,आपकी ब्लाउस की बग़लें भीग गयी है ।

मम्मी: हाँ मुझे पसीना थोड़ा ज़्यादा ही आता है।

मैं: मुझे पता है, मैंने तो कई बार आपके ब्लाउस की बग़लें सूंघी है।

मम्मी हैरानी से पूछी: क्या मतलब ? ये तूने कब किया?

मैं: मैं जब ९ थ में पढ़ता था तब भी मैं आपके उतारे हुए ब्लाउस को बाथरूम में सूंघता था। आपकी बग़लों की गंध मुझे बहुत अच्छी लगती थी।

मम्मी: हे भगवान, तुम लड़के लोग भी कब क्या करोगे पता ही नहीं चलता?

मैं: मम्मी अभी भी एक बार सूँघने की इच्छा हो रही है, सूंघ लूँ?

मम्मी: तू इशा की सूंघ, समझे मेरी कोई ज़रूरत नहीं है सूँघने की।

मैं: मम्मी उसकी तो सूंघता ही हूँ, पर जो गंध आपकी है वैसी उसकी नहीं है। प्लीज़ एक बार सूँघने दो ना, आप बस हाथ उठा दो, मैं सूंघ लेता हूँ।

मम्मी थोड़ी सी झिझकी फिर बोली: चल इतनी ज़िद कर रहा है तो ठीक है ये ले। और ये कहते हुए उन्होंने अपनी बाँह उठा दी और मेरे सामने उनकी गीली बग़ल थी। मैंने अपना सिर उनकी गोद से उठाया और उनके विशाल छातियों पर अपना सिर रगड़ते हुए उनकी बग़ल में अपनी नाक ले गया और ज़ोर से सूँघने लगा। मेरे गाल उनके ब्लाउस में कसे विशाल वक्ष को छू रहे थे।

मैं: आह मम्मी क्या मस्त गंध है, अब दूसरी भी सूंघ लेता हूँ। ये कह कर मैंने अपना सिर उनकी छातियों पर रगड़ते हुए दूसरे बग़ल के पास के गया। मम्मी ने चुप चाप दूसरी बाँह भी उठा दी और मैं अपने गाल को उनकी छाती पर दबाते हुए उनकी ये बग़ल भी सूँघने लगा।

अब मम्मी बोली: चल अब हो गया ना , चल अब छोड़ मुझे।

मैं हँसते हुए बोला: मम्मी आपको पता है कि मैंने आपको कई बार कपड़े बदलते हुए भी देखा है?

मम्मी चौक कर बोली: क्या ? कब देखा?

मैं: उन्ही दिनों जब आपके ब्लाउस सूंघता था। मैंने आपको कई बार ब्रा और पैंटी में देखा है।

मम्मी: हे राम, बहुत ही गंदा बच्चा है तू, कोई अपनी माँ के साथ ये सब करता है?

मैं: असल में मम्मी आपकी ये बड़ी बड़ी छातियाँ हमेशा से मुझे आकर्षित करती थीं। मैं तो इनका दीवाना हूँ। और फिर इसने ग़लत क्या है? आपने तो मुझे इनसे दूध पिलाया ही होगा, आख़िर तो ये मेरी ही हैं ना?

मम्मी: वह तो तब की बात है जब तू बहुत छोटा था। अब तुझे ऐसी बात नहीं करनी चाहिए।

मैं: मम्मी मैंने कितने साल तक आपका दूध पिया था?

मम्मी: तीन साल तक तूने पिया था। बड़ी मुश्किल से छुड़वाया था मैंने।

मेरे मुँह से निकल गया: और पापा कितने साल तक पिए?

मम्मी चौंक के बोली: ये कैसा सवाल है?

मैं अब पूरी नंगाई पर उतर चुका था,सो बोला: मम्मी मेरा मतलब है कि जैसे मैं इशा का दूध अभी चूसता हूँ और जब हमारा बच्चा होगा तब मैं भी पियूँगा। क्या मैं जब पापा की उम्र का हो जाऊँगा तब भी इशा का दूध चूसूँगा? और पापा भी तो पीते होंगे मेरे साथ आपका दूध?

मम्मी: ओह। ये तो सच है कि सभी मर्द अपने बच्चे के साथ साथ अपनी बीवी का भी दूध पीते हैं। और जहाँ तक दूध चूसने का सवाल है सभी मर्द अपनी बीवी का चूसते है! तेरे पापा भी कोई अपवाद नहीं है।

मैं: मम्मी क्या पापा अभी भी अपने दूध चूसते हैं?

मम्मी: फिर वही बकवास? कहा ना कि सभी चूसते हैं, हाँ आज भी चूसते हैं, बस हो गया?

मैं: तो मम्मी क्या मैं भी नहीं चूस सकता आपके दूध?

मम्मी: तेरे लिए इशा है ना, चूस उसके, किसी ने मना किया है?

मैं: मम्मी, उसके बहुत छोटें है, मुझे तो आपके जैसे बड़े बड़े पसंद है, ये कहते हुए मैंने मम्मी की छातियों को एक हाथ से धीरे से छू लिया।

मम्मी मेरा हाथ हटाते हुए बोली: ये ग़लत है बेटा, ये नहीं कर सकते हम।

मैं: मम्मी, एक बार अगर मुझे दूध पिला दोगी तो क्या हो जाएगा? मुझे बहुत मन कर रहा है, प्लीज़।

मैंने फिर से हाथ उनकी छाती पर रख दिया।

इस बार मम्मी मेरे गाल पर हाथ फेरी और बोली: बेटा, कुछ बातें ग़लत है माँ बेटे में, वो हम नहीं कर सकते ।

इस बार उन्होंने मेरे हाथ को अपनी छाती से नहीं हटाया। मैं भी धीरे धीरे उनकी छाती को बहुत हल्के से दबाया और बोला: मम्मी कितने बड़े हैं आपके दूध। आपका एक दूध इशा के दोनों दूध के बराबर होगा।

मम्मी हँसते हुए बोली: पर उसके कड़े अनार जैसे होंगे मेरे तो अब नरम पड़ गए हैं।

मैं: मुझे तो नहीं लग रहा है कि आपके नरम पड़ गए हैं। ये बोलते हुए इस बार मैंने अच्छे से दूध दबा ही दिए।

मम्मी: आऽऽऽह क्या करता है, ज़ोर से मत दबा। अरे ब्रा के कारण तुझे पता नहीं चल रहा है , वरना अब तो नरम हो ही गए हैं।

मैं: मम्मी, एक बार ब्रा के अंदर से छूने दो ना तभी तो पता चलेगा कि कैसे हैं?

मम्मी: नहीं बेटा ये सही नहीं है। चल अब मेरी गोद से उठ।

शायद अब इशा और तेरे पापा भी आने वाले होंगे।

मैं: अरे मम्मी वो अभी कहाँ आएँगे? मुझे तो लगता है कि पापा इशा को लाइन मार रहे हैं, आपको नहीं लगता?

मैं अब भी एक छाती को हल्के से दबा रहा था।

मम्मी थोड़ा सा परेशान होकर बोलीं: हाँ मुझे भी तेरे पापा के रंग ढंग ठीक नहीं लग रहे। पर वो तो उनकी बहु है ना? मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा।

मैं: मम्मी आप भी ना, बेकार हो परेशान हो रही हो, अगर पापा ने इशा के साथ कुछ कर भी लिया तो क्या हुआ, आख़िर घर की बात तो घर में ही रहेगी ना, किसी को क्या पता चलेगा? और पापा और इशा अगर एक दूसरे को पसंद करते हैं तो इसमें क्या बुराई है?

अब मैंने मम्मी की दूसरी छाती को दबाया।

मम्मी हैरानी से बोली: तेरी बीवी को तेरे पापा कुछ करेंगे तो तुझे बुरा नहीं लगेगा?

मैं: अरे मम्मी मेरे पापा ही तो करेंगे कोई बाहर का थोड़ी करेगा?

मम्मी: ओह। पर ये ठीक नहीं है बेटा।

मैंने मम्मी के निपल को ब्रा के ऊपर से दबाया।

मैं: मम्मी,सब ठीक है आप बेकार परेशान हो रही हो, बस एक बार मुझे आपके ब्लाउस में हाथ डालकर आपकी नरम छाती छूने दो ना।

मम्मी की आह निकल गयी निपल को छूते ही।

वह बोली: आह अच्छा चल छू ले, तू कहाँ मानने वाला है।

मैं उठकर बैठा और उनके ब्लाउस के हुक खोलने लगा। वो चुपचाप मुझे देख रही थीं। तीनों हुक के खोलकर उनके ब्लाउस के पल्ले अलग किए और उनकी ब्रा में क़ैद उनकी बड़ी बड़ी छातियाँ मेरे आँखों के सामने थीं। अब मैंने उनकी ब्रा में एक हाथ डाला और उनकी नरम और बड़ी छाती को पकड़कर दबाने लगा। मम्मी की उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ निकल गयी।

मैं: आऽऽहहह मम्मी कितनी नरम है आपके दूध और कितने बड़े भी। फिर मैंने उनके निपल को मसल दिया। मम्मी उछल पड़ी और बोली: आऽऽहहह बेटा चल हो गया अब छोड़ मुझे।

मैं: मम्मी दूसरे दूध को भी छूने दो ना प्लीज़।

अब मैंने ब्रा के दूसरे कप में हाथ डाला और उसको भी दबाने लगा और निपल भी मसल दिया।

मम्मी: हाऽऽऽय्यय चल अब छोड़ मुझे । ये कहकर मेरा हाथ बाहर निकाली और अपने ब्लाउस को बंद करने लगी।

मैं: मम्मी, दूध कब पिलाओगी?

मम्मी: बाद में देखेंगे। चल मुझे बाथरूम जाना है।

फिर वह खड़ी हुई तो मैं भी खड़ा हो गया और उनको पीछे से पकड़ लिया । मेरे हाथ उनके पेट पर थे और मैं उनकी गर्दन चूमने लगा और अपना लोअर के अंदर खड़ा हुआ लौड़ा उनके बड़ें नितम्बों पर चिपका दिया।

मम्मी: हाऽऽय्य छोड़ दे बेटा, मुझे मुझे ज़ोर की बाथरूम आयी है।

मैं भी अपना लौड़ा उनके नरम और बड़े नितम्बों पर रगड़ते हुए मज़े से भर गया था। अब मैंने हिम्मत करके हाथ बढ़ाए और पीछे से उनकी दोनों छातियों पर हाथ रख दिए और फिर से उनकी गर्दन चूमते हुए उनके गाल भी चूम लिया।

अब मम्मी ने थोड़ा सा विरोध दिखाया और मैंने उनको छोड़ दिया। वो बाथरूम जाते हुए मुझे मुड़कर देखीं और उनकी नज़र मेरे लोअर के निचले फूले हुए हिस्से पर पड़ी और उनकी आँखें चौड़ी हो गयीं।

वो बाथरूम से बहुत देर बाद बाहर आयीं। मैं समझ गया कि उन्होंने बुर को ऊँगली से शांत किया होगा।

वो बाहर आयीं तो मैंने शरारत से पूछा: मम्मी क्या कर रही थी बाथरूम में इतनी देर?

मम्मी मुझे ग़ुस्से से घूरी और इसके पहले कि कुछ बोल पाती दरवाज़ा खुला और इशा अंदर आयी। उसके पीछे पापा भी अंदर आए। दोनों थके हुए दिख रहे थे।

पापा अपने रूम में चले गए।

मैंने ध्यान से देखा कि इशा के टॉप का हिस्सा बुरी तरह से मसला हुआ नज़र आ रहा था। मैं मन ही मन मुस्कुराया।

फिर मैं इशा के पीछे किचन में गया और बोला: क्या रहा? कुछ बात बनी?

इशा मुस्करायी : पूरा काम हो गया।

मैं: मतलब? पापा ने तुम्हें चोद दिया?

वो हँसते हुए बोली: नहीं मैंने पापा को चोद दिया।

अब मैं भी हँसने लगा।

वो बोली: चलो बाद में बताती हूँ। तुम्हारा और मम्मी का क्या रहा?

मैं: अब मम्मी मज़े से चूचि तो दबवा लीं है। आगे भी हो जाएगा जल्दी ही।

इशा: तुम आज मम्मी को मेरी और पापा की चुदायी दिखा देना , फिर वह भी तुमसे चुदवा ही लेंगी।

मैं: हाँ ये ठीक रहेगा।

फिर मैं उसको चूमकर बाहर आया और मम्मी को बोला: मम्मी, इशा की छातियों के ऊपर का कपड़ा देखिए आप, पूरा मसला हुआ है, पापा ज़रूर उसकी चूचियाँ दबायें हैं। और वो दोनों कितने थके हुए लग रहे हैं, मुझे तो दाल में काला लग रहा है।

मम्मी: तुझे अपनी बीवी के बारे में ऐसी बात करते ख़राब नहीं लगता?

मैं: अभी इशा को बुलाता हूँ, आप ख़ुद देख लेना उसके कपड़े कैसे मुड़े टुडे हैं उसकी चूचियों के पास।

मैंने जान बूझ कर चूचि शब्द का प्रयोग किया।

मैं: इशा पानी पिला दो मम्मी को।

इशा पानी लेकर आयी और मम्मी की आँखें उसकी छातियों पर ही थीं। वो भी साफ़ साफ़ देख रहीं थीं कि मैं वाक़यि सच बोल रहा था। वो थोड़ी सी परेशान दिखने लगीं।

इशा के जाने के बाद मैं बोला: मम्मी, अब तो विश्वास हो गया ना?

मम्मी: हाँ सच कह रहा है तू, उसके कपड़े बहुत दबे से लग रहे हैं वहाँ पर ।

मैं: मम्मी आपको मैं बोल रहा हूँ कि उन दोनों ने आज कुछ ना कुछ किया है।

मम्मी: बाज़ार में?

मैं: अरे मम्मी इशा को कार में चुदवाने में बहुत मज़ा आता है। ज़रूर वह कार में चुदायी होगी पापा से।

मम्मी: छी, कितनी गंदी भाषा बोल रहा है रिक्शे वालों जैसी, वो भी अपनी बीवी के बारे में।

मैं: मम्मी,आज मैं आपको दिखाता हूँ कि इन दोनों में क्या चल रहा है?

मम्मी: क्या दिखाएगा?

मैं: आज दोपहर को मैं कुछ काम के बहाने बाहर चला जाऊँगा। पर थोड़ी देर बाद आकर स्टोर रूम में छिप जाऊँगा। आप तो दोपहर को सोती हो ना। आज आप सोने का नाटक करना और अगर पापा आपको सोता देखकर कमरे से बाहर आए तो आप मुझे स्टोर रूम में आकर बताना। तब मैं आपको पापा और इशा की करतूत दिखा दूँगा।

मम्मी बोली: ठीक है बेटा, मैं सच में जानना चाहती हूँ कि क्या तेरे पापा इशा के साथ में ये सब कर रहे हैं या ये तेरी कोरी कल्पना ही है?

मैं: ठीक है मम्मी लंच के बाद देखते हैं।

मम्मी भी उठकर अपने कमरे में चली गयी।

मैं सीधा अपने कमरे में गया और दरवाज़ा बंद किया। इशा अपना टॉप उतार चुकी थी। उसने पैंट भी उतार दी।

मैंने कहा: पूरी नंगी हो जाओ।

वो मुस्कुराते हुए अपनी ब्रा खोल दी। मुझे उसकी चूचियों पर लाल निशान दिखायी दिए। उसने पैंटी नहीं पहनी थी इसलिए वह पूरी नंगी हो चुकी थी।

मैंने उसे अपने पास बुलाया और उसकी चूचियाँ सहलाकर बोला: पापा ने बहुत दबाया है? ये निशान कैसे?

इशा: अरे वह जोश में काट भी दिए ना। ओह क्या पागल से हो गए थे मेरी चूचियों को देखकर। बहुत चूसे और काटे भी।

मैं: और चुदायी कैसी रही?

इशा: कार में वो अपना लौड़ा बाहर निकाल लिए और मैं उनके ऊपर आकर उनके लौड़े पर बैठ कर चुदवायी।

मैं: कैसा चोदते हैं?

इशा: बहुत मस्त, सच इस उम्र में भी घोड़े का सा जोश है उनमे। बहुत मज़ा दिए। पूरे ४० मिनट चोदें होंगे। मैं तो दो बार झड़ी।

मैं: लाओ अपनी बुर मेरे मुँह पर रखो, मैं चाटकर पापा का वीर्य टेस्ट करता हूँ।

वो हँसते हुए मेरे मुँह पर बैठी और मेरे मुँह में पापा के वीर्य और इशा की बुर के रस का मिला जुला स्वाद भर गया। अब मैं उसकी बुर चाटने लगा। वो भी मेरा लोअर नीचे करके मेरा लौड़ा ६९ पज़िशन में चूसने लगी। जल्दी ही हम उत्तेजना से झड़ गए और एक दूसरे का रस पी गए।

मैं: अच्छा बताओ पापा को कैसे पटाया?

वो बोली: ---------/---------///////---------------

कार में बैठते ही पापा पूछे: बेटी, पैंटी नहीं पहनी हो ना?

मैं: पापा आप भी ना, कोई लड़की से ऐसे सवाल पूछता है भला?

पापा: बेटी, क्या है ना , मैंने तेरी पैंट में पैंटी के निशान नहीं देखे तो मुझे लगा कि तुमने पैंटी नहीं पहनी हुई है।

मैं: पापा आपको इससे क्या करना है ।

पापा: अच्छा चलो नाराज़ ना हो। चलो बाज़ार चलो।

मैंने कार चलायी और फिर पापा बोले: बेटी, तुम्हारे ऊपर यह टॉप भी बहुत अच्छी लग रही है। मस्त सेक्सी दिख रही हो।

मैं: अपनी बहु को सेक्सी कह रहे हैं। आपके बेटे को पता चलेगा तो पता नहीं क्या होगा?

पापा: अरे सेक्सी को सेक्सी कहने में क्या हर्ज है? देखो ना तुम्हारे कबूतर कैसे फड़फड़ा रहे हैं इस टॉप में?

मैं: छी पापा कुछ भी बोल रहे हैं।

फिर बाज़ार ने जब मैं सब्ज़ी ख़रीद रही थी तभी जब मैं झुकती तो वो पीछे से अपना लौड़ा मेरे पिछवाड़े पर जमा देते और हल्के से रगड़ भी देते। मैं भी मज़े ले रही थी।

फिर हम राशन की दुकान से सामान लिए और वापस कार में बैठे। पापा ने कहा: बेटी,तुम्हारा पिछवाड़ा बहुत सेक्सी है जब तुम सामान लेने के लिए झुकती हो तो मैं तो पागल ही हो जाता हूँ।

मैं: पापा आपको क्या हो गया है? मैं आपकी बहू हूँ आप ऐसे कैसे बात कर सकते हो ?

पापा ने हाथ बढ़ाकर मेरी जाँघ पर रखा और दबाते हुए बोले: बेटी मैं तो पागल ही हो गया हूँ तुम पर।

मैं: पापा किसी को पता चलेगा तो क्या होगा?

पापा: बेटी तुम किसी को नहीं बताओगी तो कैसे पता चलेगा? चलो ना किसी होटेल में चलते हैं और तुम्हारी जवानी का मज़ा लेते हैं।

मैं: पापा आप क्या बोल रहे हो? ऐसा कैसे हो सकता है? मैं तो आपकी बहु हूँ।

पापा: बेटी , इस दुनिया में कई लोग अपनी सगी बेटी को नहीं छोड़ते तो तुम तो मेरी बहु हो। देखो मैं कैसे पागल हो रहा हूँ तुम्हारी जवानी के लिए। ये कहते हुए वह मेरा हाथ जो गियर शिफटर पर था पकड़कर अपने पैंट के ऊपर से लौड़े पर रख दिए।

मैंने हाथ हटाने का नाटक किया पर वह बोले: बेटी देखो कैसा तड़प रहा है तुम्हारे लिए। इसे शांत कर दो।

पापा का लौड़ा बहुत मोटा है। मैं तो मस्ती से भरके उसको दबाने लगी। पापा ख़ुश हो गए। वह भी मेरी जाँघ से होते हुए मेरी बुर को जींस के ऊपर से ही दबा कर मुझे भी मज़े में भर दिए। अब तो सब कुछ साफ़ था कि आग लगी थी दोनों तरफ़ बराबर से।

पापा: चलो ना किसी होटेल में चलकर मस्त चुदायी करते हैं।

मैं: नहीं पापा , मैं कार को एक जगह ले चलती हूँ जहाँ मैं राकेश के साथ भी जा चुकी हूँ । मस्त सुनसान जगह है।

अब मैं उसी जगह पहुँची वो पार्क के पीछे सुनसान रास्ते में, जहाँ एक बार हम दोनों चुदायी किए थे।

तब तक पापा ने अपनी पैंट खोल दी थी और अपना मोटा काला लौड़ा बाहर निकाल लिए। जैसे ही कार रोकी मैं भी उठ कर पापा की गोद में आ गयी और फिर पापा ने मुझे चूमना चालू किया और मेरी चूचियाँ दबाने लगे। फिर उन्होंने मेरा टॉप उतारा और ब्रा के स्ट्रैप भी खोल कर मेरी चूचियों पर टूट पड़े। फिर मेरी जींस की पैंट निकाले और मुझे अपने लौड़े पर बिठाकर मेरी बुर में अपना मोटा काला लौड़ा डाल दिए और मैं उछल उछल कर उनके लौड़े से चुदवाने लगी।

मेरी चूचि उनके मुँह में थी और उनकी एक ऊँगली मेरी गाँड़ में थी और मुझे बुरी तरह से नीचे से कमर उठाके ज़बरदस्त चुदायी करने लगे।

अब मैं भी उइइइइइइइ कहते हुए चिल्ला कर चुदवाने लगी। वो भी ह्म्म्म्म्म कहकर मेरी बुर फाड़ने में लगे थे।

फिर मैं झड़ने लगी। पर पापा तो जैसे साँड़ हैं वह चुदायी चालू रखे और जल्दी ही मैं फिर से गरम होने लगी और अब मैं फिर से उनका साथ देने लगी। फिर हम दोनों साथ साथ ही झड़े।

फिर हम वापस घर आए। बस यही हुआ।

इशा के चुप होने पर राकेश ने भी उसे सब बताया कि मम्मी के साथ वह कहाँ तक पहुँचा। फिर राकेश ने उसको बताया कि अब वो मम्मी को इशा और पापा की चुदायी दिखाएगा और फिर मम्मी को चुदायी के लिए राज़ी कर लेगा।

इशा बोली: मस्त प्लान है आज मम्मी चुद कर ही रहेंगी मुझे पूरा विश्वास है।

हम दोनों हँसने लगे।

दोपहर को खाना खाने के बाद मैं बहाना बना कर बाहर चला गया और थोड़ी देर में वापस स्टोर रूम में आके छिप गया। करीब आधे घंटे के बाद मम्मी आयी। और बोलीं: तू ठीक कह रहा था , तेरे पापा मेरे सोने का नाटक को देख कर चुप चाप उठे और बाहर निकल गए। मैंने देखा कि वो तेरे कमरे में गए हैं। वहाँ इशा अकेली है, उसे ही मिलने गए हैं।

मैं: मम्मी वह उसको मिलने नहीं चोदने गए हैं ।

मम्मी: फिर गंदी बात। ज़रूरी है गंदी बात करना।

मैं: मम्मी चलो आप देख लो पापा की करतूत।

अब मैं मम्मी का हाथ पकड़कर उनको अपने कमरे की ओर ले गया और उस खिड़की के पास ले गया जहाँ से पूरा कमरा साफ़ दिखाई देता था।

मैंने अंदर पर्दा हटाके देखा तो मस्त हो गया। पापा लेटे हुए थे और पूरी नंगी इशा उनका लौड़ा चूस रही थी। पापा इशा की हिलती चूचि दबा रहे थे । अब मैं पीछे हटा और मम्मी से बोला: देख लो अपने पति को क्या मज़ा कर रहे हैं।

मम्मी आगे आयी और झाँकने लगी। अब उनका मुँह खुला रह गया। उनकी आँखें फटी रह गयीं।

मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया और उनके गर्दन को चूमते हुए अपना लौड़ा उनकी गाँड़ पर रगड़ने लगा। फिर मैं मम्मी की चूचियाँ दबाने लगा। मम्मी ने मुझे मना नहीं किया। फिर मैंने मम्मी के पीछे से देखा तो वहाँ अंदर चुदायी शुरू हो चुकी थी। पापा इशा की टांगों को पूरा उठाकर और फैलाकर पूरे ज़ोर शोर से चुदायी करने में लगे थे। कमरे में फ़च फ़च की आवाज़ गूँज रही थी। अब मैंने भी अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया था और मैंने मम्मी का हाथ उस पर रख दिया। मम्मी एक पल के लिए चौंकी पर फिर चुप चाप मेरा लौड़ा पकड़ ली।

अब मैं बोला: मम्मी देख लिया अपने पति को? कैसे मेरी बीवी को चोद रहे हैं। अब मैं भी उनकी बीवी को चोदूँगा।

मम्मी चुप रही और मेरी तरफ़ हैरानी से देखती रही।

राकेश ने बोलना चालू रखा:---

 
राकेश बताए जा रहा था::::::----::::---

मैं मम्मी को ,पापा और इशा की चुदायी दिखाकर ,गरम कर दिया था अब मैं उनको लेकर दूसरे बेडरूम में ले गया और वो बिस्तर पर बैठ गयीं। मेरा लौड़ा तो पैंट से बाहर ही था। मैंने मम्मी के मुँह के पास अपने लौड़े को लाया और उसे उनके होंठों पर रगड़ा। मम्मी का मुँह खुल गया और मेरा लौड़ा उनके मुँह में घुस गया। अब वह उसे चूसने लगीं।

मैं:.आऽऽहहह मम्मी चूसो मेरा लौड़ा , इशा भी तो पापा का क्या मज़े से चूस रही थी।

मम्मी मज़े से चूसे जा रही थीं, अब मैं उनकी चूचियाँ दबाने लगा। मम्मी भी अब मस्त हो रही थी, अब मैंने मम्मी को कपड़े निकालने को कहा और उनको खड़ा करके उनकी साड़ी और ब्लाउस खोल दिया। मम्मी ब्रा और पेटिकोट में बड़ी ज़ालिम लग रही थी। फिर ब्रा का स्ट्रैप निकाला और ब्लाउस के हटते ही बड़ी बड़ी गोरी चूचियाँ मेरी आँखों के सामने थीं। उनके काले निपल्ज़ कड़े हो कर खड़े थे।

अब मैंने उनको बिस्तर पर लिटा दिया और अपने कपड़े निकाल के उनके ऊपर आ गया। मैं उनके होंठ चूसते हुए उनकी चूचियाँ दबाने लगा। वह भी अब उइइइइइइ करके मस्त हो गयीं थीं। जब मैंने उनकी चूची चूसी तो वह मदहोश सी हो गयीं और मेरा सिर अपनी छाती पर दबाने लगीं।

चूची चूसने से जैसे मेरा मन ही नहीं भर रहा था।

अब मैं नीचे आया और उनके पेटिकोट का नाड़ा खोल कर उसको नीचे खिसकाया और मम्मी ने अपने बड़े चूतरों को उठाकर पेटिकोट निकालने में मेरी मदद की।मम्मी ने पैंटी तो पहनी नहीं थी सो जैसे ही पेटिकोट निकला वह नीचे से भी नंगी हो गईं। अब मैं उनके जाँघों के बीच में उनकी बुर को देख कर मस्ती से भर गया। मस्त फूली हुई बुर थी जैसे सासु माँ की थी। मैंने उसकी फाँकों को फैलाया और अंदर की गुलाबी भाग को देखकर बोला: मम्मी मैं यहाँ से ही बाहर आया था ना?

मम्मी: नहीं मेरा सिजेरीयन हुआ था , तेरे पापा नहीं चाहते थे कि मेरी बुर ख़राब हो।

अब मैं झुक कर बुर को चूमा और फिर जीभ से चाटने लगा।

मम्मी आऽऽऽहहह करके अपनी गाँड़ उछाल रही थी।

फिर वो बोली: आऽऽह बेटा अब डाल दे ना अंदर।

मैं: क्या डालूँ मम्मी?

मम्मी: हाऽऽऽऽय तेराआऽऽऽ लौड़ाआऽऽऽ और क्या।

मैं हँसते हुए अपना लौड़ा उनकी बुर के छेद पर रखा और एक धक्के में पूरा लौड़ा जड़ तक पेल दिया। अब मम्मी भी मज़े से हाऽऽय्यय मरी कहते हुए नीचे से अपनी गाँड़ उठाकर चुदवाने लगी। क़रीब आधे घंटे की ज़बरदस्त चुदायी में मम्मी दो बार झड़ीं और फिर मैं भी झड़ गया।

हम बाथरूम से सफ़ाई करके नंगे ही एक दूसरे को चूमते हुए लेटे थे, तभी इशा और पापा पूरे नंगे ही कमरे में आए। मम्मी उठने की कोशिश की पर पापा ने उन्हें लिटाते हुए कहा: असल में इशा और राकेश दोनों मिलकर हमें चुदायी के लिए फँसाए हैं। अभी इशा ने बताया है कि ये सब इन दोनों ने प्लान बनाकर किया है।

मम्मी मुझे देखकर बोली: ये सच बोल रहें हैं क्या?

मैं: हाँ मम्मी ये सच है अब हम चारों एक साथ ग्रूप सेक्स कर सकते हैं।

पापा ने मम्मी के बड़े चूतर सहलाए और बोले: बहुत मज़ा आएगा अब अपने बच्चों के साथ चुदायी करने में।

इशा ने पापा के लौड़े को सहलाते हुए कहा: पापा आपको एक बात और भी बतानी है कि मेरे पापा , भय्या , मम्मी और भाभी भी हमारे साथ सेक्स कर चुके हैं। अब वह लोग आप सबके साथ भी मज़े करना चाहते हैं।

पापा: क्या मतलब? मुझे अपनी समधन और तुम्हारी मस्त भाभी भी चोदने को मिलेगी?

ये सुनकर ही पापा का लौड़ा इशा के हाथ में फूलने लगा।

मैं: मम्मी आपको भी अपने समधी और उनके बेटे का लौड़ा मिलेगा मस्ती से मज़े लेने के लिए।

मम्मी: हे भगवान वो लोग भी इसमें शामिल हैं?

इशा: मम्मी हमारे घरवाले तो कई सालों से मज़ा के रहे हैं इस सबका। मेरी बुर का उद्घाटन तो पापा ने ही किया था।

फिर हम सब गरम हो गए और एक चुदाई का ज़बरदस्त दौर चला।

मैं: तो ये थी हमारी कहानी जिसमें बाद में दोनों परिवार मिलकर सेक्स किए।

राकेश ने अपनी बात ख़त्म की और रोहन अब नमिता की चुदायी करने लगा और राज भी इशा के ऊपर आकर उसे मस्ती से चोदने लगा। मानसी अपने पापा का लंड चूस रही थी। फिर राकेश ने उसे ६९ की पज़िशन में लेकर एक दूसरे की बुर और लौड़ा चूसे।

सब मज़े से झड़कर शांत हो गए।

फिर राज और नमिता अगले दिन अपने शहर के लिए रवाना हो गए।

इतने दिनों के बाद माँ बेटा अपने घर आए तो उनको बड़ा अच्छा लगा। दोपहर हो गयी थी, खाना उन्होंने रास्ते में ही खा लिया था।

नमिता: बेटा बहुत थक गयीं हूँ अभी सोऊँगी।

राज अपनी माँ से चिपट कर बोला: हाँ माँ मैं आपके साथ सो जाऊँ?

नमिता: उसने पूछने की क्या बात है बेटा? अब से तू मेरे साथ ही सोएगा।

नमिता अब कपड़े खोलकर ब्रा और पैंटी में आ गयी थी। राज ने देखा कि अब वह उससे किसी भी तरह का संकोच नहीं कर रही थी। अब वह मियाँ बीवी की तरह व्यवहार कर रहे थे।

राज भी कपड़े उतार और चड्डी में हीं बिस्तर पर आ कर लेट गया। नमिता ने एक गाउन पहना और आकर उसके बग़ल में लेट गयी। अब दोनों एक दूसरे को चूमे और चिपक कर सो गए।

शाम को नमिता की नींद खुली तो वह उठी और उसने देखा कि राज की चड्डी में उसका लौड़ा पूरी तरह खड़ा था।

उसने प्यार से उसे चड्डी के ऊपर से पकड़ लिया और फिर चड्डी के अंदर हाथ डालकर उसके मोटे गरम लौड़े को पकड़ कर अपनी बुर गीली कर बैठी। फिर वह उसकी चड्डी से उसको बाहर निकाली और मुँह में लेकर चूसने लगी।

राज की नींद खुली और माँ को लौड़ा चूसते देखकर वह बहुत मस्त हो गया।

नमिता उसकी आँखों में देखकर मुस्करायी और चूसते हुए उसको आँख मार दीं।

राज ने भी उसके सिर को दबाकर अपनी कमर हिलाके अपनी तरफ़ से उसके मुँह की चुदायी शुरू कर दी।

जल्दी ही नमिता उसको डीप थ्रोट देने लगी और राज भी मज़े से कमर उछालकर उसके मुँह में अपना वीर्य छोड़ने लगा। नमिता मज़े से एक एक बूँद रस का पी गयी। फिर आख़री बूँदें सुपाडे के ऊपर से जीभ फेरकर चाट गयी।

राज ने उसे खींचकर अपनी बाँह में भर लिया और बोला: आऽऽऽऽह माँ क्या चूसती हो आप? मज़ा आ गया।

नमिता: सच ? मुझे भी तो तेरा रस बहुत स्वाद लगता है।

फिर थोड़ी देर पहरे करने के बाद नमिता उठी और चाय बनायी। अब दोनों एक दूसरे के पास बैठकर चाय पीने लगे।

नमिता: अच्छा अब कल से वापस स्कूल चालू और पढ़ाई पर पूरा ध्यान दो।

राज: ठीक है माँ अब पढ़ाई पर ध्यान दूँगा, पर चुदायी तो चालू रहेगी ना?

नमिता: बदमाश कहीं का। हाँ हाँ चालू रहेगी। पर पढ़ाई पर से ध्यान नहीं हटना चाहिए।

राज उसको चूमते हुए बोला: माँ पढ़ाई भी चालू और चुदायी भी। ये बोलते हुए उसने उसकी चूचि दबा दी ।

अब दोनों हँसने लगे।

राज बोला: माँ मैं थोड़ा बात घूम कर आता हूँ।

नमिता भी खाना बनाने लगी।

तभी घंटी बजी , नमिता ने दरवाज़ा खोला, सामने पड़ोसन खड़ी थी। दोनों गले लगे।

नमिता: कैसी हो?

सुषमा: बिलकुल ठीक हूँ। तुम लोग इतने दिन कहाँ गए थे?

नमिता: अरे बैठो , बड़ी लम्बी कहानी है।

सुषमा: बताओ तो, एकदम से कहाँ ग़ायब हो गए।

नमिता ने उसको संक्षेप में बताया कि कैसे वो फ़ार्म हाउस गए और राज और उसका मिलन हुआ और फिर नदीम के परिवार के साथ ग्रूप सेक्स हुआ और फिर वो अपनी पुरानी सहेली इशा के परिवार के साथ भी ग्रूप सेक्स करी।

सुषमा: ओह तो ये बोलो ना पूरा मज़ा लेकर आ रही हो? राज को कोई समस्या नहीं है कि तुम किसी और से चुदवा रही हो?

नमिता: अरे नहीं उसे कोई समस्या नहीं है। बल्कि वह तो ख़ुद भी नदीम के साथ मिलकर मुझे चोदा था।

सुषमा: ओह पता नहीं मेरा बेटा राजू और उसके पापा इस बारे में क्या सोचते हैं? एक बात बोलूँ, अगर तू बुरा नहीं मानेगी तो?

नमिता: अरे बोल ना, नहीं मानूँगी।

सुषमा: तेरी बात सुनकर मुझे भी राज से चुदवाने की इच्छा हो रही है। तू मानेगी इसके लिए?

नमिता ने उसके हाथ को पकड़ा और उसको अपनी बाँहों में लेकर उसके होंठ चूसते हुए बोली: रानी इसमें क्या समस्या है, जब चाहे तब चुदवा लेना।

और दोनों एक दूसरे की चूचियाँ मसलने लगीं।

 
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