S
StoryPublisher
Guest
दुनिया से दूर
उसकी खूबसूरती सितारों को मात दे रही थी। उसके चेहरे पर वो कशिश थी कि नज़र एक बार पड़ने के बाद हटना गवारा नहीं करती थी। पूरे पाँच सौ लोगों की भीड़ में हर व्यक्ति उसी को घूर रहा था। लेकिन खुद उसकी निगाहें किसको ढूंढ रही हैं, यह किसी को मालूम नहीं था।
‘‘एक्सक्यूज़ मी, क्या आप मेरे साथ डाँस करना पसंद करेंगी?’’ एक नौजवान उसके पास आकर बोला। लेकिन उसने मुस्कान बिखेरते हुए नहीं में सर को हिलाकर उसे मायूस कर दिया।
‘‘तो तुम्हें भी उसने मना कर दिया।’’ जैसे ही वह नौजवान आगे बढ़ा, उसके दोस्त ने उसे टोक दिया।
‘‘बहुत घमंडी मालूम होती है । उसका नाम क्या है?’’
‘‘उसका नाम ज़ारा है। और वह सम्राट के खास वज़ीर की बेटी है।’’
‘‘ओह, फिर तो मैं उसके साथ डाँस के क़ाबिल ही नहीं हूं।’’ कहते हुए नौजवान दूसरी लड़की की तरफ बढ़ गया।
जबकि ज़ारा की नज़रें अचानक ही चमकने लगी थीं। और उन नज़रों का केन्द्र था दरवाज़े से अन्दर दाखिल होने वाला एक युवक। ज़ारा बेताबी के साथ उसकी ओर बढ़ी।
‘‘कितनी देर लगा दी शीले तुमने। मैं कब से तुम्हारा इंतिज़ार कर रही थी।’’ ज़ारा ने उसके पास पहुंचकर शिकायती अंदाज़ अख्तियार किया।
‘‘माफ करना ज़ारा। दरअसल मैं सम्राट के लिये गिफ्ट खरीद रहा था।’’ शीले ने अपने हाथ की ओर इशारा किया, जिसमें वह गिफ्ट नज़र आ रहा था।
‘‘और मेरा गिफ्ट?’’ ज़ारा ने शोख अंदाज़ में पूछा।
‘‘अभी तुम्हारा बर्थडे एक महीने बाद आयेगा। उस वक्त गिफ्ट भी मिल जायेगा।’’ शीले के लापरवाही भरे अंदाज़ पर ज़ारा ने उसे घूरा। फिर वह कुछ कहने वाली थी लेकिन उसी समय एक नक्कारे जैसी आवाज़ ने सबको खामोश कर दिया। दरअसल ये सम्राट के आने का एलान था। सम्राट अपने खास दरवाज़े से अन्दर दाखिल हो रहा था। फिर वहाँ मौजूद लोगों ने उसकी जय जयकार शुरू कर दी।
यह जय जयकार उस समय बन्द हुई जब सम्राट का खास वज़ीर भाषण देने के लिये स्टेज पर आया।
‘‘दोस्तों, आज हम यहाँ अपने प्रिय सम्राट का जन्मदिन मनाने के लिये इकट्ठा हुए हैं। आप लोग खूब खुशियां मनाईए। क्योंकि ये हमारे प्रिय बादशाह का जन्मदिन है।’’ उसकी बात खत्म होते ही हाल में तेज़ म्यूज़िक गूंज उठा और वहाँ मौजूद तमाम लोग उसकी धुन पर थिरकने लगे।
‘‘हमारे सम्राट आज कितने साल के हो गये हैं?’’ शीले के साथ थिरकते हुए ज़ारा ने पूछा।
‘‘तीन सौ बीस साल के।’’ शीले ने जवाब दिया।
-------
उसकी खूबसूरती सितारों को मात दे रही थी। उसके चेहरे पर वो कशिश थी कि नज़र एक बार पड़ने के बाद हटना गवारा नहीं करती थी। पूरे पाँच सौ लोगों की भीड़ में हर व्यक्ति उसी को घूर रहा था। लेकिन खुद उसकी निगाहें किसको ढूंढ रही हैं, यह किसी को मालूम नहीं था।
‘‘एक्सक्यूज़ मी, क्या आप मेरे साथ डाँस करना पसंद करेंगी?’’ एक नौजवान उसके पास आकर बोला। लेकिन उसने मुस्कान बिखेरते हुए नहीं में सर को हिलाकर उसे मायूस कर दिया।
‘‘तो तुम्हें भी उसने मना कर दिया।’’ जैसे ही वह नौजवान आगे बढ़ा, उसके दोस्त ने उसे टोक दिया।
‘‘बहुत घमंडी मालूम होती है । उसका नाम क्या है?’’
‘‘उसका नाम ज़ारा है। और वह सम्राट के खास वज़ीर की बेटी है।’’
‘‘ओह, फिर तो मैं उसके साथ डाँस के क़ाबिल ही नहीं हूं।’’ कहते हुए नौजवान दूसरी लड़की की तरफ बढ़ गया।
जबकि ज़ारा की नज़रें अचानक ही चमकने लगी थीं। और उन नज़रों का केन्द्र था दरवाज़े से अन्दर दाखिल होने वाला एक युवक। ज़ारा बेताबी के साथ उसकी ओर बढ़ी।
‘‘कितनी देर लगा दी शीले तुमने। मैं कब से तुम्हारा इंतिज़ार कर रही थी।’’ ज़ारा ने उसके पास पहुंचकर शिकायती अंदाज़ अख्तियार किया।
‘‘माफ करना ज़ारा। दरअसल मैं सम्राट के लिये गिफ्ट खरीद रहा था।’’ शीले ने अपने हाथ की ओर इशारा किया, जिसमें वह गिफ्ट नज़र आ रहा था।
‘‘और मेरा गिफ्ट?’’ ज़ारा ने शोख अंदाज़ में पूछा।
‘‘अभी तुम्हारा बर्थडे एक महीने बाद आयेगा। उस वक्त गिफ्ट भी मिल जायेगा।’’ शीले के लापरवाही भरे अंदाज़ पर ज़ारा ने उसे घूरा। फिर वह कुछ कहने वाली थी लेकिन उसी समय एक नक्कारे जैसी आवाज़ ने सबको खामोश कर दिया। दरअसल ये सम्राट के आने का एलान था। सम्राट अपने खास दरवाज़े से अन्दर दाखिल हो रहा था। फिर वहाँ मौजूद लोगों ने उसकी जय जयकार शुरू कर दी।
यह जय जयकार उस समय बन्द हुई जब सम्राट का खास वज़ीर भाषण देने के लिये स्टेज पर आया।
‘‘दोस्तों, आज हम यहाँ अपने प्रिय सम्राट का जन्मदिन मनाने के लिये इकट्ठा हुए हैं। आप लोग खूब खुशियां मनाईए। क्योंकि ये हमारे प्रिय बादशाह का जन्मदिन है।’’ उसकी बात खत्म होते ही हाल में तेज़ म्यूज़िक गूंज उठा और वहाँ मौजूद तमाम लोग उसकी धुन पर थिरकने लगे।
‘‘हमारे सम्राट आज कितने साल के हो गये हैं?’’ शीले के साथ थिरकते हुए ज़ारा ने पूछा।
‘‘तीन सौ बीस साल के।’’ शीले ने जवाब दिया।
-------