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दूसरे दिन स्कूल में गोलू को देखते ही मेरी फुद्दी में चींटियां सी रेंगने लगी। पर गोलू मेरे से थोड़ा कटा-कटा लगा। हाफ रिसेस में मैंने उसे पकड़ा और कहा- गोलू, ये सब क्या है?
गोलू- मुझे माफ कर दो झरना। मैं वादा करके भी तुमसे कल रात को मिल नहीं पाया। असल में मैं तुम्हारे घर के नीचे पहुँच भी गया था। पर एक एमर्जेन्सी आ गई। और मुझे घर जाना पड़ा।
झरना- मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था कि ये गोलू क्या कह रहा है? कल रात को ये नहीं आया था। तो फिर वो कौन था? जो मुझे कल रात तो दमदार चुदाई से प्रसन्न कर दिया था। कौन था वो जिसकी आवाज कुछ भारी-भारी लग रही थी? मैंने इससे पहले भी गोलू के लण्ड को पकड़ा था। पर कल रात को कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा लग रहता। उत्तेजना के कारण कल रात तो मैंने कुछ ध्यान नहीं दिया पर... अब ये सब बातें एक-एक करके मुझे याद आने लगी। हे भगवान्... ये मैं किससे चुदवा बैठी हूँ? कौन है वो? जिसने मेरी कुँवारी फुद्दी को चोद-चोद के कली से फूल बना दिया।
इधर गोलू कह रहा था- तुम सुन रही हो ना झरना?
मैंने गुस्से में कहा- “मर गई झरना तेरे लिए, और आज से तू मेरे लिए मर गया। साले, मुझसे बात मत करना। जो वादा करके वादा ना निभाए मैं उससे कोई वास्ता नहीं रखना चाहती...”
गोलू माफी माँगते रह गया पर मैंने माफी नहीं दी।
मैं ये सोचती रह गई, की साला वो कौन खशनशीब हो सकता है जिसने मेरी कच्ची कुँवारी फुद्दी चोद दी? रात के 11:00 बजे होंगे। मैं हल्के-हल्के नींद में थी की मेरी नींद खुली। कोई मेरा जिश्म सहला रहा था। मैं चौंकी... ये तो कल रात वाला ही है।
मैंने भी मजा लेने की सोची और उससे लिपट गई। कुछ ही देर में दोनों नंगे हो गये और एक-दूसरे के अंगों को चाटने लगे, चूसने लगे, और फिर शुरू हो गई धमाकेदार चुदाई। दोनों ही पशीने-पशीने हो गये थे पर कोई भी हार नहीं मानना चाहता था। फिर दोनों ही एक साथ पस्त हो गये। वो मेरे बगल में लेट गया। मैं उसके लण्ड से खेलने लगी। लण्ड उसका धीरे-धीरे तनने लगा। और कुछ ही समय में हम दूसरे राउंड की तैयारी में लग गये। एकाएक मेरा हाथ बल्ब की स्विच की ओर बढ़ा... और कमरे में उजाला फैल गया।
किसी ने अपना मुँह ढक लिया। और जैसे ही मैंने उसका हाथ हटाया... तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसका गई। वो कोई और नहीं मेरा प्यारा राजदुलारा ये भाई था।
मम्मी- “हाँ बेटे? तूने... तूने मेरी बेटी की सील तोड़ी है? मैं मर ज... वां गुड़ खा के। मैं बहुत ही खुश हूँ बेटी की तूने अपने ही भाई से अपनी सील तुड़वाई। हाँ तो प्यारे बेटे... अब तुम शुरू हो जाओ...”
जीजाजी- कौन मम्मी? मैं?
मम्मी- और नहीं तो क्या? मैंने यहां अपनी बुर से दस पंद्रह बेटों को निकल रखा है?
जीजाजी- “नहीं वो बात नहीं है। तुम रामू को भी तो प्यार से बेटा बोलती हो ना...” मम्मी- “हाँ वो तो है... पर अभी तो मैं तुझसे कह रही हूँ..”
तभी दीदी बोली- हाँ हाँ... जरा हम भी तो सुनें कि कौन है वो खूबसूरत हसीना जिसे आपका कुँवारा लण्ड नसीब हुआ था? जैसा की झरना दीदी ने कहा है कि उनकी सील तो आपने तोड़ी थी। इसका मतलब है कि मुझे तो आपका लौड़ा चुदा चुदाया ही मिला था। पर मैं ये जरूर जानना चाहती हूँ की अपने किस फुद्दी में अपनी सील तोड़ी थी।
जीजाजी- बात तब की है, जब मैं मंजरी बुआ के यहाँ रहकरके स्कूल में पढ़ता था। जैसा की आप सबको पता है। की मजारी बुआ की एक लड़की है जो उमर में मुझसे पाँच साल बड़ी है। जिसे हम प्यार से कजरी दीदी कहते हैं।
मम्मी- हाँ हाँ बेटे... और जिसे अक्सर अब तुम उसी के भाई कालू के साथ रात रात भर जमकर पेलते हो।
गोलू- मुझे माफ कर दो झरना। मैं वादा करके भी तुमसे कल रात को मिल नहीं पाया। असल में मैं तुम्हारे घर के नीचे पहुँच भी गया था। पर एक एमर्जेन्सी आ गई। और मुझे घर जाना पड़ा।
झरना- मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था कि ये गोलू क्या कह रहा है? कल रात को ये नहीं आया था। तो फिर वो कौन था? जो मुझे कल रात तो दमदार चुदाई से प्रसन्न कर दिया था। कौन था वो जिसकी आवाज कुछ भारी-भारी लग रही थी? मैंने इससे पहले भी गोलू के लण्ड को पकड़ा था। पर कल रात को कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा लग रहता। उत्तेजना के कारण कल रात तो मैंने कुछ ध्यान नहीं दिया पर... अब ये सब बातें एक-एक करके मुझे याद आने लगी। हे भगवान्... ये मैं किससे चुदवा बैठी हूँ? कौन है वो? जिसने मेरी कुँवारी फुद्दी को चोद-चोद के कली से फूल बना दिया।
इधर गोलू कह रहा था- तुम सुन रही हो ना झरना?
मैंने गुस्से में कहा- “मर गई झरना तेरे लिए, और आज से तू मेरे लिए मर गया। साले, मुझसे बात मत करना। जो वादा करके वादा ना निभाए मैं उससे कोई वास्ता नहीं रखना चाहती...”
गोलू माफी माँगते रह गया पर मैंने माफी नहीं दी।
मैं ये सोचती रह गई, की साला वो कौन खशनशीब हो सकता है जिसने मेरी कच्ची कुँवारी फुद्दी चोद दी? रात के 11:00 बजे होंगे। मैं हल्के-हल्के नींद में थी की मेरी नींद खुली। कोई मेरा जिश्म सहला रहा था। मैं चौंकी... ये तो कल रात वाला ही है।
मैंने भी मजा लेने की सोची और उससे लिपट गई। कुछ ही देर में दोनों नंगे हो गये और एक-दूसरे के अंगों को चाटने लगे, चूसने लगे, और फिर शुरू हो गई धमाकेदार चुदाई। दोनों ही पशीने-पशीने हो गये थे पर कोई भी हार नहीं मानना चाहता था। फिर दोनों ही एक साथ पस्त हो गये। वो मेरे बगल में लेट गया। मैं उसके लण्ड से खेलने लगी। लण्ड उसका धीरे-धीरे तनने लगा। और कुछ ही समय में हम दूसरे राउंड की तैयारी में लग गये। एकाएक मेरा हाथ बल्ब की स्विच की ओर बढ़ा... और कमरे में उजाला फैल गया।
किसी ने अपना मुँह ढक लिया। और जैसे ही मैंने उसका हाथ हटाया... तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसका गई। वो कोई और नहीं मेरा प्यारा राजदुलारा ये भाई था।
मम्मी- “हाँ बेटे? तूने... तूने मेरी बेटी की सील तोड़ी है? मैं मर ज... वां गुड़ खा के। मैं बहुत ही खुश हूँ बेटी की तूने अपने ही भाई से अपनी सील तुड़वाई। हाँ तो प्यारे बेटे... अब तुम शुरू हो जाओ...”
जीजाजी- कौन मम्मी? मैं?
मम्मी- और नहीं तो क्या? मैंने यहां अपनी बुर से दस पंद्रह बेटों को निकल रखा है?
जीजाजी- “नहीं वो बात नहीं है। तुम रामू को भी तो प्यार से बेटा बोलती हो ना...” मम्मी- “हाँ वो तो है... पर अभी तो मैं तुझसे कह रही हूँ..”
तभी दीदी बोली- हाँ हाँ... जरा हम भी तो सुनें कि कौन है वो खूबसूरत हसीना जिसे आपका कुँवारा लण्ड नसीब हुआ था? जैसा की झरना दीदी ने कहा है कि उनकी सील तो आपने तोड़ी थी। इसका मतलब है कि मुझे तो आपका लौड़ा चुदा चुदाया ही मिला था। पर मैं ये जरूर जानना चाहती हूँ की अपने किस फुद्दी में अपनी सील तोड़ी थी।
जीजाजी- बात तब की है, जब मैं मंजरी बुआ के यहाँ रहकरके स्कूल में पढ़ता था। जैसा की आप सबको पता है। की मजारी बुआ की एक लड़की है जो उमर में मुझसे पाँच साल बड़ी है। जिसे हम प्यार से कजरी दीदी कहते हैं।
मम्मी- हाँ हाँ बेटे... और जिसे अक्सर अब तुम उसी के भाई कालू के साथ रात रात भर जमकर पेलते हो।