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दोस्त की शादीशुदा बहन complete

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दूसरे दिन स्कूल में गोलू को देखते ही मेरी फुद्दी में चींटियां सी रेंगने लगी। पर गोलू मेरे से थोड़ा कटा-कटा लगा। हाफ रिसेस में मैंने उसे पकड़ा और कहा- गोलू, ये सब क्या है?

गोलू- मुझे माफ कर दो झरना। मैं वादा करके भी तुमसे कल रात को मिल नहीं पाया। असल में मैं तुम्हारे घर के नीचे पहुँच भी गया था। पर एक एमर्जेन्सी आ गई। और मुझे घर जाना पड़ा।

झरना- मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था कि ये गोलू क्या कह रहा है? कल रात को ये नहीं आया था। तो फिर वो कौन था? जो मुझे कल रात तो दमदार चुदाई से प्रसन्न कर दिया था। कौन था वो जिसकी आवाज कुछ भारी-भारी लग रही थी? मैंने इससे पहले भी गोलू के लण्ड को पकड़ा था। पर कल रात को कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा लग रहता। उत्तेजना के कारण कल रात तो मैंने कुछ ध्यान नहीं दिया पर... अब ये सब बातें एक-एक करके मुझे याद आने लगी। हे भगवान्... ये मैं किससे चुदवा बैठी हूँ? कौन है वो? जिसने मेरी कुँवारी फुद्दी को चोद-चोद के कली से फूल बना दिया।

इधर गोलू कह रहा था- तुम सुन रही हो ना झरना?

मैंने गुस्से में कहा- “मर गई झरना तेरे लिए, और आज से तू मेरे लिए मर गया। साले, मुझसे बात मत करना। जो वादा करके वादा ना निभाए मैं उससे कोई वास्ता नहीं रखना चाहती...”

गोलू माफी माँगते रह गया पर मैंने माफी नहीं दी।

मैं ये सोचती रह गई, की साला वो कौन खशनशीब हो सकता है जिसने मेरी कच्ची कुँवारी फुद्दी चोद दी? रात के 11:00 बजे होंगे। मैं हल्के-हल्के नींद में थी की मेरी नींद खुली। कोई मेरा जिश्म सहला रहा था। मैं चौंकी... ये तो कल रात वाला ही है।

मैंने भी मजा लेने की सोची और उससे लिपट गई। कुछ ही देर में दोनों नंगे हो गये और एक-दूसरे के अंगों को चाटने लगे, चूसने लगे, और फिर शुरू हो गई धमाकेदार चुदाई। दोनों ही पशीने-पशीने हो गये थे पर कोई भी हार नहीं मानना चाहता था। फिर दोनों ही एक साथ पस्त हो गये। वो मेरे बगल में लेट गया। मैं उसके लण्ड से खेलने लगी। लण्ड उसका धीरे-धीरे तनने लगा। और कुछ ही समय में हम दूसरे राउंड की तैयारी में लग गये। एकाएक मेरा हाथ बल्ब की स्विच की ओर बढ़ा... और कमरे में उजाला फैल गया।

किसी ने अपना मुँह ढक लिया। और जैसे ही मैंने उसका हाथ हटाया... तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसका गई। वो कोई और नहीं मेरा प्यारा राजदुलारा ये भाई था।

मम्मी- “हाँ बेटे? तूने... तूने मेरी बेटी की सील तोड़ी है? मैं मर ज... वां गुड़ खा के। मैं बहुत ही खुश हूँ बेटी की तूने अपने ही भाई से अपनी सील तुड़वाई। हाँ तो प्यारे बेटे... अब तुम शुरू हो जाओ...”

जीजाजी- कौन मम्मी? मैं?

मम्मी- और नहीं तो क्या? मैंने यहां अपनी बुर से दस पंद्रह बेटों को निकल रखा है?

जीजाजी- “नहीं वो बात नहीं है। तुम रामू को भी तो प्यार से बेटा बोलती हो ना...” मम्मी- “हाँ वो तो है... पर अभी तो मैं तुझसे कह रही हूँ..”

तभी दीदी बोली- हाँ हाँ... जरा हम भी तो सुनें कि कौन है वो खूबसूरत हसीना जिसे आपका कुँवारा लण्ड नसीब हुआ था? जैसा की झरना दीदी ने कहा है कि उनकी सील तो आपने तोड़ी थी। इसका मतलब है कि मुझे तो आपका लौड़ा चुदा चुदाया ही मिला था। पर मैं ये जरूर जानना चाहती हूँ की अपने किस फुद्दी में अपनी सील तोड़ी थी।

जीजाजी- बात तब की है, जब मैं मंजरी बुआ के यहाँ रहकरके स्कूल में पढ़ता था। जैसा की आप सबको पता है। की मजारी बुआ की एक लड़की है जो उमर में मुझसे पाँच साल बड़ी है। जिसे हम प्यार से कजरी दीदी कहते हैं।

मम्मी- हाँ हाँ बेटे... और जिसे अक्सर अब तुम उसी के भाई कालू के साथ रात रात भर जमकर पेलते हो।

 


झरना- “क्या भाई? आप कजरी दीदी को भी नहीं छोड़े हो, वो भी कालू भैया के साथ मिलकर। पर भैया कालू भैया का लण्ड तो एकदम पतला है...”

जीजाजी- हाँ... पर तुम्हें कैसे पता?

झरना- कैसे पता? अरे भैया, जैसे आप कजरी दीदी को पेलते हो। वैसे ही मैं जब उनके घर जाती हैं तो मैं भी कालू भैया से पेलवाती हूँ।

जीजाजी- बहुत खूब मेरी चुदक्कड़ बहन। ऐसे ही लण्ड खाने में लगी रह। हाँ तो मैं कहाँ था?

झरना- “भैया, आप कजरी दीदी के चूत में मुँह मार रहे थे...”

जीजाजी- “हाँ... हम सब बच्चे एक कमरे में नीचे बिस्तर लगाकर सोते थे। एक दिन मैंने रात को देखा की कालू भैया कजरी दीदी के ऊपर लेटे हुए नाइटी को उठाकर चूचियों को दबा रहे हैं। और अपनी कमर हिला रहे हैं।

कजरी दीदी ने कहा- “देख भैया, प्लीज... आज बीच धार में मत छोड़ देना, प्लीज... अरें रे... ये क्या कालू भैया? आज फिर आपका पानी निकल गया। हाय... अब मैं अपनी प्यास कैसे बुझाऊँ?

कालू ने कहा- “फिकर नोट दीदी, रात को एक बार फिर...”

कजरी- “ठीक है, पर मुझे डिस्टर्ब नहीं करना शुरू हो जाना...”

कालू- “ओके दीदी...”

जीजाजी- “मैंने सोचा कि मौका अच्छा है। आज कजरी दीदी की बुर में अपना लण्ड पेल ही देना चाहिए। मैंने थोड़ी देर के बाद उनकी नाइटी को कमर तक उठाकर चूतड़ सहलाने लगा। इतने में ही बाहर कुछ आहट हुई तो मैं सोने का नाटक करने लगा।

तभी बुआ ने कमरे में प्रवेश किया और दीदी की नाइटी को कमर के ऊपर देखकर सन्न रह गई। फिर उन्होंने लाइट जलाई और कजरी दीदी की फुद्दी को देखने लगी। फुद्दी में से कालू भैया के लण्ड का रस अभी भी चू रहा था...”

जीजाजी- मैं आँखें बंद करके चुपचाप लेटा हुआ था। अब बुआ ने कालू भैया की लुंगी के अंदर हाथ डाला और लण्ड के ऊपर चिपचिपा पानी देखकर और सन्न रह गई। फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा, कुछ सोचा... मैंने डर के मारे अपनी आँखों को जोर से बंद किए रखा।

बुआ मेरे नजदीक आ गई और एकाएक उनका हाथ मेरी लुंगी में.. मेरा लण्ड तो पहले ही उत्तेजना के कारण फनफना रहा था। उनके मुँह से एक सिसकारी निकल गई। उन्होंने हाथ हटा लिया और थोड़ी देर के बाद मेरा नाम पुकारी पर मैंने कोई जवाब नहीं दिया। अब उन्होंने लाइट बंद कर दिया और मेरे पास आकर बैठ गई, और लण्ड को हाथ में लेकर सहलाने लगी।

 
जीजाजी- मैंने भी अंधेरे का फायदा उठाकर अपनी आँखें खोल दी। अब वो एक हाथ से मेरा लण्ड सहला रही थी तो दूसरे हाथ से अपनी चूत को खुजला रही थीं। फिर वो मेरे लण्ड के ऊपर झुक करके लण्ड को अपने मुँह में ले ली। मैं उत्तेजना के मारे थोड़ा सा कॉंपा तो उन्होंने लण्ड को तुरंत अपने मुँह से निकाल दिया। फिर थोड़ी देर के पश्चात उन्होंने फिर से लण्ड को मुँह में लेकर चूसना जारी रखा।

अबकी बार उन्होंने लण्ड को नहीं छोड़ा। मेरे अंडकोष में गरमी बढ़ने लगी। मेरा शरीर छटपटाने लगा। पर उन्होंने लण्ड को नहीं छोड़ा। मेरे लण्ड ने पिचकारी छोड़ना शुरू किया तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। इधर मंजरी बुआ भी कहाँ हार मानने वाली थी। उन्होंने भी लण्ड से निकले आखिरी बूंद तक को अपने गले में उड़ेल लिया।

झरना- हेहेहे... भैया, आपको तो बहुत मजा आया होगा?

जीजाजी- “हाँ बहना मजा तो आया.. पर तेरे जितना नहीं...”

झरना- क्यों झूठ बोल रहे हो भैया? भला कोई अपनी पहली चुदाई भूल सकता है? अब मुझे ही लो, आपसे अंजाने में हुई चुदाई को मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकती। आपसे भी ज्यादा मजा मेरे पति मुझे देते हैं। मेरे देवर, जेठ, ससुर, और नंदोई भी मस्त चुदाई करते हैं, आज की तारीख में।

रामू भैया ने आपसे भी ज्यादा सुख मुझे चुदाई का दिया हो, पर आपके साथ की वो पहली चुदाई, भैया मैं नहीं भूल सकती...” झरना भावुक हो उठी।

दीदी- “हाँ दीदी, अपनी पहली चुदाई को कोई भी लड़की भूल नहीं सकती...”

झरना- अच्छा भाभी, आपके सील किसने तोड़ी थी? क्या दमऊ भैया ने? या और किसी ने?

दीदी- “अभी उसमें टाइम है दीदी। अभी तो आपके भैया की आप बीती सुन रहे हैं. उसे सुनिए.” दीदी अपनी चूत को खुजलते हुए बोली।

मम्मी- “हाँ बेटे हाँ.. बहुत रसदार कहानी है तेरी तो बेटा। बस इस कहानी के बाद अपना खाट-कबड्डी का एक दौर चलेगा। फिर बाकी लोग अपनी-अपनी कहानी लेकर सुनाएंगे।

ठीक है?” सासूमाँ मेरे लण्ड को सहलाते हुए बोली।

सब लोग जीजजी की ओर देखने लगे।

 


जीजाजी ने अपने लण्ड को सहलाते हुए कहना शुरू किया- उस टाइम मैं जन्नत में था। बुआजी मेरे लण्ड के ऊपर से अपने होंठों को हटाने का नाम ही नहीं ले रही थीं। मेरा लण्ड दुबारा खड़ा होने लगा। अबकी बार बुआ ने उसे छोड़ा और मेरे कान में फुसफुसाया- “बेटा मैं जानती हूँ कि तुम जागे हुए हो। कोई भी लड़का इतनी गहरी । नींद में तो सो ही नहीं सकता की कोई औरत उसके लण्ड का सारा रस निचोड़ ले और उसे मालूम नहीं पड़े। चल मुझे लेटने की जगह दे और मेरी फुद्दी को चाटना शुरू कर.”

अब कोई बहाना नहीं चलने वाला था। मैं उठा तो बुआ ने मुझे अपने गले से लगाते हुए एक पप्पी दी। और कहा- “बेटा तेरा लण्ड। तेरे बाप से भी बड़ा है...”

जीजाजी- सच में बुआ?

मंजरी बुआ- “हाँ बेटा, और दिखा दे आज की तेरे लण्ड में चोदने की ताकत भी उस लण्ड से ज्यादा है...” जीजाजी- क्या मतलब बुआ? इसका मतलब आप बाबूजी से चुदवा रक्खी हो?

मंजरी बुआ- “अरे हाँ रे... बेटा, शादी से पहले जब तक एकबार मेरी फुद्दी को चाटकर रस निकाल ना दें। मेरे मुँह में एकबार अपने लण्डराज का रस छोड़ ना दें.. तब तक उन्हें नींद नहीं आती थी। इसीलिए पिताजी से चुदवाने के बाद मैं सीधे उनके कमरे में चुदवाने जाती थी।

जीजाजी- हे भगवान्... बुआजी, आप दादाजी से भी चुदवा रखी हो?

मंजरी बुआ- क्या करती बेटा? तेरी दादी गुजरने के बाद मुझसे उनका मूठ मारना देखा नहीं जाता था। इसीलिए चूत का दरवाजा उनके लिए खोल बैठी...”

जीजाजी- यू आर ग्रेट बुआ जी। कोई लड़की अपने दादाजी के लिए इतना बलिदान नहीं दे सकती। पर बुआजी। अब जब आपकी शादी हो गई है, तब दादा जी कैसे करते हैं?

मंजरी बुआ- अरे... एक दिन तेरी मम्मी ने मुझे पकड़ लिया उनके कमरे से चुदवाकर आते वक्त। फिर क्या? दूसरी रात चुपचाप उनके कमरे में पहुँच गई और चुदवा भी ली। पर एक गड़बड़ हो गई। मेरी फुद्दी एकदम सफाचट थी, और तेरी मम्मी की झांटों से भरी। चोदने के बाद तेरे दादाजी ने लाइट जला दी और सारी पोलपट्टी खुल गई। उस दिन से मैं और तेरी मम्मी दोनों बारी-बारी चुदवाने जाती थी।

जीजाजी- मैं बुआ के टाँगों को फैलाकर फुद्दी चाटने लगा।

बुआजी सिसकियां छोड़ने लगी- “बस-बस बेटा, अब और ना तड़पाओ। बस आ जाओ। भर दो इस लण्ड को मेरी फुद्दी में। फाड़ तो चूत को मेरी...”

जीजाजी- मैंने धक्का लगाया तो आधे से ज्यादा लण्ड उनकी फुद्दी में घुस चुका था।

बुआ चिल्ला रही थी- “बेटा, धीरे-धीरे क्या धक्का लगा रहे हो। आज खाना नहीं खाया है क्या? लग धक्के...”

जीजाजी- मैंने जोश में आकर ऐसा धक्का लगाया की बुआजी के चीख निकल गई।

कजरी दीदी और कालू भाई दोनों उठ चुके थे। मैंने दोनों को देख लिया था पर जो मजा आ रहा था उसे मैं छोड़ना भी नहीं चाहता था। मैंने ताबड़तोड़ धक्के लगाए और पूछा- “बताओ बुआ, कैस लग रहा है?

बुआ- “अरे बेटा मैं तो जन्नत में हैं। बस धक्का लगाते रह..” बुआ ने नीचे से चूतड़ उछालते हुए कहा- “बेटा, मेरी चूचियों को भी चूस... देख बेचारी दोनों कैसे मुँह को फुलाकर बैठी हैं?

जीजाजी- मैंने एक को दबया तो दूजे को चूसना चालू रखा।

बुआ का बदन इतने में ही अकड़ने लगा- “अरे बेटा मैं तो गई.. सच में बेटा ऐसी मस्त चुदाई तो तेरे बाप ने भी मेरे साथ नहीं की। तू आज तक का लण्ड का सिरमौर है..."

जीजाजी- “अरे बुआ, मेरा तो अभी तक नहीं निकला है.”

बुआ- “फिर लगे रह बेटा। तेरा निकलेगा उस समय तक तो मेरा एक बार और निकल जाएगा..” और सच में मेरा पानी निकलने के समय बुआ और एक बार झड़ रही थे। हम दोनों पस्त होकर एक-दूसरे से लिपटकर गहरीगहरी साँस ले ही रहे थे की कमरे की लाइट जली।

जीजाजी- मैंने घबरा कर चद्दर को लपेटना चाहा।

 
कजरी दीदी ने कहा- “कोई फायदा नहीं है भैया। हम दोनों ने आप दोनों की चुदाई देख ली है। आने दो पिताजी को... आप दोनों की रंगरेलियां उनको बताऊँगी...” कजरी दीदी ने नाइटी के ऊपर से चूत को खुजलाते हुए कहा।

बुआ- “हाँ हाँ आने दे बेटी? आने दे तेर पिताजी को। उनको कालू और तेरी चुदाई का क्या जवाब देगी बेटा?

कजरी- क्या मतलब है मम्मी आपका?

बुआ- “मतलब ये है बेटी की रोज रात को जो तुम कालू के साथ चुदाई करती हो मैं सब जानती हूँ...”

कजरी ने अपना सिर झुका लिया। पर कनखियों से मेरे खड़े लण्ड को देख रही थी।

बुआ ने कहा- “तो दो में दो मिलने से चार बात ये हुई की आप हमारी बातें किसी को नहीं बताएंगी। और हम आपकी बातें किसी को नहीं बताएंगी। बस हो गया ना फैसला, फाइनली?

कजरी- फाइनली कहाँ हुआ मम्मी? कजरी मेरी ओर बढ़ते हुए कहने लगी।

बुआ- क्या मतलब अब और क्या रह गया?

कजरी- “अब ये रह गया...” कालू को बुआ की तरफ धक्का देते हुए कजरी ने कहा- “कालू भैया... तेरी इच्छा थी ना माँ को चोदने की? जा शुरू हो जा। मैं भैया के लण्ड से चुदवा के अपनी फुद्दी की प्यास बुझाती हूँ...”

बुआ- “तुम दोनों पागल हो गये हो क्या? कालू मेरा सगा बेटा है...”

कजरी- तो क्या हुआ मम्मी। मैं भी अपने सगे भैया से चुदवाती हूँ। आप भी तो मामाजी से, नानाजी से, चुदवा रखी हो तो फिर कालू क्यों नहीं... कालू तू क्या देखता है साले शुरू हो जा...”

बुआ मना करती रही पर कालू उनकी फुद्दी को चाटने लगा। थोड़े ही देर में उनकी चुदाई चालू हो गई। इधर कजरी दीदी ने मेरे ऊपर चढ़कर लण्ड को चूसना शुरू कर दिया। मैंने भी उसकी चूचियां दबाई। फिर उसे नीचे पटकते हुए उसकी टाँगों को फैलाया और धीमा सा एक धक्का लगाया की लण्ड का सुपाड़ा अटक गया। दूसरे धक्के में उसका बदन अकड़ा तो तीसरे में चीख ही निकल गई।

कजरी- “अरी मम्मी, मरी रे... नहीं चुदवाना है भैया, आपके गधे लण्ड से। मेरी फुद्दी के लिये तो कालू भैया का पतला लण्ड ही काफी है...”

जीजाजी- “मैंने उसका सुना अनसुना करते हुए चूची चुसना जारी रखा और धक्के देना भी...”

थोड़े ही देर में कजरी बोली- “क्या भैया? लण्ड में ताकत नहीं है क्या? इतने धीर-धीरे करने से काम कैसे चलेगा?

जीजाजी ने कहा- मेरे धक्के स्पीड बढ़ने लगी।

कजरी- “हाँ भैया... बस ऐसे ही। हाँ हाँ... मेरा निकला भैया... भैया... ओहह... भैया...”

मैंने कहा- “कजरी दीदी, मेरा कहाँ निकालूं?

कजरी- “मेरे मुँह में निकल ना भैया...” उसने अपना मुँह खोला।

 
मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में ढूंस दिया। वो मुँह को नीचे ऊपर करने लगी और मेरी पिचकारी चूत गई। कजरी ने सारा माल गटक लिया। चुदाई से थक कर हम नंगे ही बिस्तर पर लेट गये। और कब सो गये। हमें पता ही नहीं चला।

सुबह नींद खुली तो कालू बुआजी के ऊपर चढ़कर उन्हें चोद रहा था। और कजरी मेरे ऊपर चढ़कर मुझे चोद रही थी। और इसी तरह हमारी चुदाई का कार्यक्रम रात दिन चलते रहा, चलते रहा।

इधर कमरे में वासना की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी।

सासूमाँ ने कहा- “बस बस... अब रहने दो। ये सब बातें सुनकर मेरी तो चूत में आग लगी हुई है, पहले इसे बुझाना जरूरी है...”

झरना- “हाँ मम्मी, मेरी भी चूत में चिींटियां रेंग रही हैं..."

दीदी- “और मम्मीजी मेरी चूत में भी खुजली हो रही है...”

मम्मी- “अच्छा... हम तीन औरतें हैं, और लौड़ा सिर्फ दो। बहुत ना-इंसाफी है ये तो। किसी एक को तो अपनी ही उंगली से काम चलाना ही पड़ेगा...”

तभी मेरी दीदी बोली- “मैं तो उंगली से काम चला नहीं सकती मम्मीजी... कहे देती हैं कि मेरी चूत में जोरों की खुजली हो रही है। इस खुजली को कोई मस्ताना लण्ड ही मिटा सकता है। कमरे में मेरे पास दो-दो लण्ड मौजूद हैं, और मैं क्यों अपनी चूत में उंगली घुसाऊँगी? एक मेरे भाई का है, दूसरा मेरे पति का है... बल्कि मैं तो कहती हूँ, मैं बारी-बारी से दोनों से चुदवाऊँगी।

झरना- “और मैं भाभी? मैं क्यों उंगली घुसाऊँगी अपनी चूत में... मेरे पास भी तो यहाँ पे दो-दो लण्ड हैं घुसवाने के लिए... एक मेरे भाई का है तो दूसरा मेरे भाभी के भाई का है..”

मम्मी- “और मैं साली बुर मरानियों? बाकी बची मैं... दोनों ही एक-एक लण्ड ले जाओगी तो क्या मैं उंगली घुसाऊँगी अपनी बुर में? साले डूब मरो चुल्लू भर पानी में... एक जवान बेटा लण्ड लिए खड़ा है। उसका कोई फर्ज़ नहीं बनता अपनी माँ के जिश्म की भूख मिटाने की। शादी से पहले तो मेरी बुर के पीछे ही पड़ा रहता था। कहता था की माँ तेरी बुर दुनिया की सबसे मस्त बुर है। कजरी... मंजरी... झरना... इन सबकी बुर तेरी बुर के आगे पानी भरती हैं। और आज देखो, उसी बुर की आग बुझाने के लिए मुझे उंगली की सहायता लेनी पड़ेगी। दूसरा बहू का भाई है... उसका भी ये तो फर्ज बनता ही है की दीदी की सास को अगर कोई तकलीफ है तो उसे मिटाये। साले के पास इतना मस्त लौड़ा है की एक साथ हम तीनों को रात भर चोद-चोदकर बुर को फाड़ सकता है। बुर को फाड़ तो नहीं सकता, क्योंकी पहले से फटी फटाई है। हाँ... सुजा तो सकता है... देखो तो कितने बेशर्म हैं दोनों के दोनों... अरे सालों कुछ तो बोलो? अरे बोल दो की मैं बूढ़ी हो गई हूँ। मेरी फुद्दी अब तुम्हारे लण्ड के लायक नहीं रही... मेरी फुद्दी में अब वो आकर्षण नहीं रहा की तुम्हारा लण्ड मेरे लिए खड़ा हो। अरे बोलो... कुछ तो बोलो नामुरादों..”

 
मैंने गला खंखारते हुए कहा- “अरे सासूमाँ, नाराज क्यों होती हो? बात की शुरुआत तो अपने ही की कि फुद्दी तीन और लौड़ा दो। अब आप ही हमपे नाराज हो रही हैं.. चिंता मत करो सासूमाँ। पहली चुदाई आपकी ही होगी, और ऐसी चुदाई होगी की आप इस चुदाई को जिंदगी भर ना भूल सकें।

मम्मी- “वही तो बेटा... मैं भी तो यही चाहती हूँ की तू आज मेरी ऐसी चुदाई करे की मैं हमेशा इसे याद करूँ..”

और हमारा क्या होगा?” मेरी दीदी और झरना ने एक साथ कहा और हँस पड़ी।

मम्मी- “अरे बेटी और बहू... तुम्हारे चुदने के लिए तो पूरी जिंदगी पड़ी है..."

दीदी- “अच्छा सासूमाँ, आप चुदाई करें और हम यहाँ पर खरताल बजायें...”

मैंने बीच बचाव किया- सब लोग ध्यान से सुनें... पहली चुदाई मैं सासूमाँ की करूंगा। पीछे से उनकी गाण्ड में अपना लण्ड जीजाजी घुसेड़ेंगे, इस तरह सासूमाँ की चुदाई होगी।

मम्मी- “वाह बेटे... तूने तो मेरे वर्षों के सपनों को साकार करने की सोची है। दुआकरती हूँ भगवान से कि तुझे नई-नई चूत चोदने को मिले...”

दीदी- “अच्छा कमरे में तीन औरतें... दो मर्द। और वो साले भी एक ही औरत के आगे और पीछे... और हम दोनों उनको देखकर एक दूसरे की चूत में उंगली करेंगे...”

मैं- नहीं दीदी, उससे भी सही उपाय है... मैं नीचे रहूँगा। सासूमाँ आप मेरे ऊपर आ जाओ।

पलंग पर मेरे लेटते ही सासूमाँ फटाक से मेरे ऊपर चढ़ गई, इस डर से की कहीं और कोई मेरे लण्ड पर नहीं चढ़ जाए... सासूमाँ ने एक झटके से मेरे आधे लण्ड को अपनी फुद्दी में समेट लिया। मैंने भी नीचे से धक्का मारा तो सासूमाँ की चीख निकल गई- बेटा रे, दर्द हो रहा है?

तभी झरना ने पूछा- दर्द हो रहा है क्या मम्मी?

मम्मी- “हाँ बेटी दर्द हो रहा है। साले इस रामू का लण्ड है भी मोटा और तगड़ा...”

झरना- “तो एक काम करो ना मम्मी..”

मम्मी- क्या बेटी?

 
झरना- “आप इनके ऊपर से उठ जाओ, मैं सवारी कर लेती हैं। इस तरह आपका दर्द भी कम हो जाएगा, और दर्द जो होना है मुझे होगा... देखो मम्मी मुझसे आपका ये दर्द देखा नहीं जा रहा है। मुझे अपनी बेटी का फर्ज़ निभाने दो...” ।

मम्मी- “चल परे हट, लण्डखोर कहीं की। अरे बेटी मैं इसी दर्द को तो कई सालों से ढूँढ़ रही थी। पर आज सही लण्ड मिला है जो मुझे और मेरी फुद्दी को दर्द के साथ-साथ मजा भी दे रहा है। हाँ बेटे, मैं ऊपर से धक्का लगा रही हूँ। तू भी नीचे से धक्का लगा...”

मैंने जीजाजी से कहा- “जीजाजी आप पीछे से सासूमाँ की गाण्ड में अपना लण्ड घुसायें..”

तभी मेरी दीदी ने उनका लण्ड पकड़ते हुए कहा- “नहीं मेरे सैंया, पहले मेरी चूत की खुजली दूर करो...”

मैंने कहा- “दीदी, आप मुझपे विश्वास तो करो..”

दीदी ने उनका लण्ड को छोड़ते हुए कहा- “चलो ठीक है, मुझे तुझपे विश्वास है...”

जीजाजी ने सासूमाँ की गाण्ड में लण्ड घुसाने की कोशिश की पर नाकाम रहे। मैंने हँसते हुए कहा- आप भी जीजाजी सही गान्डू हैं। गाण्ड मरवाना तो अच्छी तरह जानते हैं। पर गाण्ड कभी नहीं मारी क्या?

जीजाजी- अरे तेरी दीदी कभी मारने दे तब ना?

दीदी- छीः भैया... गाण्ड भी कोई मारने की चीज है?

जीजाजी ने अपने गाण्ड को खुजलाते हुये कहा- “अरे रानी, तू क्या जाने गाण्ड मरवाने में कितना मजा आता है?”

मैं- “जीजाजी थोड़ी सी क्रीम लगा दो अपने मम्मी की गाण्ड में...”

जीजाजी- “अरे हाँ रे... साले साहब, मैं तो भूल ही गया था। पहले जब हास्टल में मेरी गाण्ड का उद्घाटन हुआ था तो वैसेलीन लगाकर हुआ था... अभी लाता हूँ."

 
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