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झरना दीदी ने उन्हें क्रीम पकड़ाते हुए कहा- “ये लो भैया...” फिर बोली- “भाभी, ये दोनों तो मम्मी के आगे-पीछे लग गये। लगता है किसी एक को नहीं हम दोनों को ही अपनी-अपनी बुर में उंगली डाल के सोना पड़ेगा। अच्छा भाभी मैं किचेन में देखकर आऊँ क्या? कल बाजार से जो लंबा बैगन आया था उसमें से एक को मैंने छुपा के रखा है..."
दीदी- “अरे... उसे तो अपनी नौकरानी चम्पा ले गई...”
झरना- चम्पा ले गई? हे भगवान्... कितनी मुश्किल से लंबा सा बैगन बाजार से लेकर आई थी, अपनी बुर में घुसाने के लिए और आपने सब्जी बनाने के लिए चम्पा को दे दिया।
दीदी- “सब्जी बनाने के लिए नहीं पगली...”
झरना- और क्या भाभी, उसका वो अचार बनायेगी?
दीदी- “अरे... तू जैसे अपनी बुर की खुजली मिटाती है ना, कभी बैगन, कभी गाजर, कभी मूली से, उसी तरह वो भी..."
झरना- क्या? वो भी?
इधर हम दोनों जीजा साले लगे हुए थे सासूमाँ के ऊपर। सासूमाँ की गाण्ड और बुर दोनों में ही लण्ड अटके पड़े थे।
दीदी- हाँ... चम्पा भी आखिर औरत है, उसकी भी कुछ चाहत है। जब से उसका मर्द उसे छोड़ के गया है। बेचारी और क्या करे?
झरना दीदी ने कहा- “हाँ, अब तो भैया भी नहीं चोदते उसे...”
दीदी- क्या तुम्हारे भैया उसे भी चोदते थे?
झरना- हाँ... क्या आपको भैया ने कभी नहीं बताया?
दीदी- नहीं तो... तेरे भैया भी ना। एक नंबर के... छोड़... फिर चोदना क्यों बंद कर दिया?
झरना- “अरे, तुम्हारी शादी से पहले की बात है। उसके मर्द को गये साल भर हो चुका था। चम्पा गाभिन हो। गई... बड़ी मुश्किल से मम्मी ने दवाई दिलवाई, और भैया को पता भी ना चलने दिया। पर चम्पा को खबरदार कर दिया गया की भैया की तरफ आँख उठाकर भी ना देखे। उस दिन का दिन और आज का दिन... चम्पा पूरी तरह से सुधर गई है।
तभी जीजाजी ने अपनी मम्मी की गाण्ड में धक्का लगाते हुए कहा- तभी मैं सोचू साली इतना भाव क्यों खा रही है
दीदी- “अरे... उसे तो अपनी नौकरानी चम्पा ले गई...”
झरना- चम्पा ले गई? हे भगवान्... कितनी मुश्किल से लंबा सा बैगन बाजार से लेकर आई थी, अपनी बुर में घुसाने के लिए और आपने सब्जी बनाने के लिए चम्पा को दे दिया।
दीदी- “सब्जी बनाने के लिए नहीं पगली...”
झरना- और क्या भाभी, उसका वो अचार बनायेगी?
दीदी- “अरे... तू जैसे अपनी बुर की खुजली मिटाती है ना, कभी बैगन, कभी गाजर, कभी मूली से, उसी तरह वो भी..."
झरना- क्या? वो भी?
इधर हम दोनों जीजा साले लगे हुए थे सासूमाँ के ऊपर। सासूमाँ की गाण्ड और बुर दोनों में ही लण्ड अटके पड़े थे।
दीदी- हाँ... चम्पा भी आखिर औरत है, उसकी भी कुछ चाहत है। जब से उसका मर्द उसे छोड़ के गया है। बेचारी और क्या करे?
झरना दीदी ने कहा- “हाँ, अब तो भैया भी नहीं चोदते उसे...”
दीदी- क्या तुम्हारे भैया उसे भी चोदते थे?
झरना- हाँ... क्या आपको भैया ने कभी नहीं बताया?
दीदी- नहीं तो... तेरे भैया भी ना। एक नंबर के... छोड़... फिर चोदना क्यों बंद कर दिया?
झरना- “अरे, तुम्हारी शादी से पहले की बात है। उसके मर्द को गये साल भर हो चुका था। चम्पा गाभिन हो। गई... बड़ी मुश्किल से मम्मी ने दवाई दिलवाई, और भैया को पता भी ना चलने दिया। पर चम्पा को खबरदार कर दिया गया की भैया की तरफ आँख उठाकर भी ना देखे। उस दिन का दिन और आज का दिन... चम्पा पूरी तरह से सुधर गई है।
तभी जीजाजी ने अपनी मम्मी की गाण्ड में धक्का लगाते हुए कहा- तभी मैं सोचू साली इतना भाव क्यों खा रही है