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मैं भी आंटी के पास जाकर नाचने लगा. ओम ने नीचे बैठ कर आंटी की पेंटी अपने दोनों अंगूठो में फंसा कर उतार दी. आंटी ने अपने पैर उठा कर ओम का साथ दिया. मैंने नीलम आंटी की बिना बालों वाली चूत की सिर्फ एक झलक ही देखी और ओम ने अपने होठ आंटी की चूत पर रख दिए. आंटी के मुह से एक सिसकारी निकली और उनका थिरकना बंद हो गया. आंटी की चुंचिया एक दम तन कर मुझे मुह चिड़ाने लगी तो मैंने भी आगे बढ़ कर नीलम आंटी की एक चुन्ची पर हाथ रखा और दूसरी के निप्पल को मुह में लेकर चूसने लगा. आंटी की सिस्कारियां बहुत बढ़ गयी. आंटी की चुंचिया साइज़ में तो बहुत बड़ी थी पर थी काफी कड़क. अचानक आंटी के मुह से आआह्ह्ह्ह निकली तो मैंने देखा की ओम ने अपनी दो उंगलिया आंटी की चूत में पेल दी है और अन्दर बाहर कर रहा है.
मैंने ओम से कहा "ओम भाई कब तक खड़े रहेंगे बेड पर चले."
ओम ने मुझे तो कोई जवाब नहीं दिया पर आंटी को पकड़ कर बेड पर गिरा दिया और वापस उनकी चूत में ऊँगलीयां अन्दर बाहर करने लगा. मैं भी नीलम आंटी की चुन्चियो को चूसने लगा और आंटी ने पहली बार मेरे लंड को अपनी मुठ्ठी में पकड़ा. मेरी उत्तेजना और बढ़ गयी और मैंने आंटी के गुलाबी होठो पर पाने होठ रख दिए और चूमने लगा. जिसका असर आंटी पर ये हुआ की वो मेरे लंड को जोर जोर से हिलाने लगी और मैं उनकी चुचिया जोर जोर से दबाने लगा.
मैंने ओम से कहा "ओम भाई कब तक खड़े रहेंगे बेड पर चले."
ओम ने मुझे तो कोई जवाब नहीं दिया पर आंटी को पकड़ कर बेड पर गिरा दिया और वापस उनकी चूत में ऊँगलीयां अन्दर बाहर करने लगा. मैं भी नीलम आंटी की चुन्चियो को चूसने लगा और आंटी ने पहली बार मेरे लंड को अपनी मुठ्ठी में पकड़ा. मेरी उत्तेजना और बढ़ गयी और मैंने आंटी के गुलाबी होठो पर पाने होठ रख दिए और चूमने लगा. जिसका असर आंटी पर ये हुआ की वो मेरे लंड को जोर जोर से हिलाने लगी और मैं उनकी चुचिया जोर जोर से दबाने लगा.