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पर शायद उनकी चुदाई भी काफी देर से चल रही थी इसीलिए 5 मिनट के अन्दर ही रश्मि दीदी कहने लगी "और जोर से मयंक मैं बस झड़ने वाली हूँ. हाँ जोर से हाम्म्म आःह्ह्ह." मयंक ने भी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और अब उसका लंड दीदी की चूत से ऐसे अन्दर बाहर हो रहा था जैसे की किसी इंजन का पिस्टन और एक मिनट के अन्दर ही दोनों साथ साथ झड गए. मयंक ने दीदी की चूत से अपना लंड निकाला तो पक्क की आवाज आई और दीदी की चूत से मयंक का वीर्य बह कर बाहर आने लगा. मयंक दीदी के साथ की सोफे पर बैठ गया. दीदी के पानी से भीगा मयंक का लंड हाल की रौशनी में चमक रहा था.
दो मिनट बाद मयंक उठा और अपने कपडे पेहनने लगा और बोला "रश्मि आज तो सच में तुमने कमाल ही कर दिया. इतना मजा तो आज तक मुझे नहीं आया. इतनी पोजीशन तो मुझे भी नहीं आती है जो तुमने सिखा दी." दीदी बोली "अब तुम जा रहे हो तो इतना तो बनता था की ये वाली चुदाई तुमको हमेशा याद रहे और वैसे भी आज मनीष और रुची भी नहीं थे तो खुल के मस्ती की जा सकती थी."
"देखो मैं तो परसों चला जाऊँगा तो अभी बता दो की तुम्हारी क्या चॉइस है." मनीष ने दीदी से कहा. "मनीष वाली बात तो नहीं हो सकती हाँ तुमने जो दूसरी बात कही है मुझे लगता है की आगे के लिए वो ही ठीक रहेगा. उसमे कोई रिस्क भी नहीं है." दीदी ने मयंक को जवाब दिया. "तो ठीक है यही तय रहा फिर. चलो मैं चलता हूँ. बाकी सब तो फिक्स है ही." मयंक ने दीदी को गले लगाकर किस किया और चला गया. दीदी भी दरवाजा बंद करके बाथरूम में घुस गयी और मैं अपने कमरे में चला गया. मैं ये तो समझ गया था की मयंक ने दीदी को मुझसे चुदवाने के लिए कहा होगा जो दीदी ने मना कर दिया पर ये दूसरी बात इसने दीदी से क्या कही है जिसके लिए दीदी तैयार है. थोड़ी देर बाद दीदी नहा कर निकली तो मैं भी अपने रूम से निकल आया. दीदी अभी भी पूरी नंगी थी. मुझे घर में देख कर दीदी चौंक गयी और वापस बाथरूम में घुस गयी.
वो बाथरूम के अन्दर से ही बोली "तू कब आया और अन्दर कैसे आया." मैंने झूठ बोल दिया "अभी अभी आया हूँ. दरवाजा खुला था तो बेल नहीं बजाई." "पर दरवाजा तो मैंने बंद किया था खुला कैसे रह गया. अच्छा जरा मेरे रूम से मेरे कपडे तो देना." दीदी बोली. "ओफ्फो दीदी. देख तो लिया है मैंने तुम्हे बगैर कपड़ो के तो फिर क्यों ड्रामा कर रही हो." मैंने थोडा चिढ़ते हुए बोला. "तो क्या हुआ? जो गलती से हुआ वो जान बूझ कर करूं. फिर से याद दिला रही हूँ की हम भाई बेहेन है. जा कपडे ले कर आ." दीदी गुस्से से बोली.
दो मिनट बाद मयंक उठा और अपने कपडे पेहनने लगा और बोला "रश्मि आज तो सच में तुमने कमाल ही कर दिया. इतना मजा तो आज तक मुझे नहीं आया. इतनी पोजीशन तो मुझे भी नहीं आती है जो तुमने सिखा दी." दीदी बोली "अब तुम जा रहे हो तो इतना तो बनता था की ये वाली चुदाई तुमको हमेशा याद रहे और वैसे भी आज मनीष और रुची भी नहीं थे तो खुल के मस्ती की जा सकती थी."
"देखो मैं तो परसों चला जाऊँगा तो अभी बता दो की तुम्हारी क्या चॉइस है." मनीष ने दीदी से कहा. "मनीष वाली बात तो नहीं हो सकती हाँ तुमने जो दूसरी बात कही है मुझे लगता है की आगे के लिए वो ही ठीक रहेगा. उसमे कोई रिस्क भी नहीं है." दीदी ने मयंक को जवाब दिया. "तो ठीक है यही तय रहा फिर. चलो मैं चलता हूँ. बाकी सब तो फिक्स है ही." मयंक ने दीदी को गले लगाकर किस किया और चला गया. दीदी भी दरवाजा बंद करके बाथरूम में घुस गयी और मैं अपने कमरे में चला गया. मैं ये तो समझ गया था की मयंक ने दीदी को मुझसे चुदवाने के लिए कहा होगा जो दीदी ने मना कर दिया पर ये दूसरी बात इसने दीदी से क्या कही है जिसके लिए दीदी तैयार है. थोड़ी देर बाद दीदी नहा कर निकली तो मैं भी अपने रूम से निकल आया. दीदी अभी भी पूरी नंगी थी. मुझे घर में देख कर दीदी चौंक गयी और वापस बाथरूम में घुस गयी.
वो बाथरूम के अन्दर से ही बोली "तू कब आया और अन्दर कैसे आया." मैंने झूठ बोल दिया "अभी अभी आया हूँ. दरवाजा खुला था तो बेल नहीं बजाई." "पर दरवाजा तो मैंने बंद किया था खुला कैसे रह गया. अच्छा जरा मेरे रूम से मेरे कपडे तो देना." दीदी बोली. "ओफ्फो दीदी. देख तो लिया है मैंने तुम्हे बगैर कपड़ो के तो फिर क्यों ड्रामा कर रही हो." मैंने थोडा चिढ़ते हुए बोला. "तो क्या हुआ? जो गलती से हुआ वो जान बूझ कर करूं. फिर से याद दिला रही हूँ की हम भाई बेहेन है. जा कपडे ले कर आ." दीदी गुस्से से बोली.