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नए पड़ोसी complete

"तुम्हारी बहन नखरा बहुत करती है" रुची ने चुप्पी तोड़ते हुए धीरे से कहा. "क्या कहा?"मैंने वापस पुछा. "मैंने कहा की तुम्हारी बहन नखरा बहुत करती है. अरे कल तुम्हारे सामने मयंक से चुद चुकी है और फिर भी बातें सुनो. क्या कर रहे हो? मनीष क्या सोचेगा?" रुची ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया. मतलब मयंक ने इसको सब कुछ बता दिया. वाह भाई बहन का रिश्ता हो तो ऐसा. आपस में हर बात शेयर करते है. मैंने रुची से पुछा "तो तुम नखरा नहीं करती." "बिलकुल नहीं. अब जल्दी से आ जाओ." ये कहते हुए रुची ने खुद ही अपनी टीशर्ट उतार दी. अन्दर उसने ब्रा नहीं पहनी थी. उसके अमरुद जैसे चुंचे मेरी आँखों के सामने आ गए और अब मैं भी बिना देर किये उसके चुन्चो पर टूट पड़ा.

उस दिन मैंने पहली बार रुची की चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसा. मेरे हल्का सा चूसने के बाद ही रुची के निप्पल एकदम तन कर खड़े हो गए. उसकी अमरुद जैसी चुचियों पर खड़े हुए निप्पल बहुत प्यारे लग रहे थे. मैंने उसके निप्पल को अपनी उंगलियों से पकड़ा और हलके से दबाया.

"इस्स…" रुची के मुँह से आवाज़ आई मतलब उसे भी मज़ा आ रहा था. मैंने फिर से उसके निप्पल मुँह में लिए और चूसे. उसने मस्ती से भर कर मेरा सर अपनी छातियों में दबा दिया और मैं बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों को चूसता रहा. रुची लगातार ‘इस्स… उफ़्फ़… आह…’ जैसी आवाजे करती रही जिनसे मेरा जोश और बढ़ता जा रहा था. मैंने रुची की जीन्स उसकी पैंटी के साथ ही नीचे कर दी अब रुची की चिकनी चूत मेरी आँखों के सामने थी. मैंने अपनी उंगली से उसकी चूत के दोनों होंठों को खोल कर देखा तो अंदर से उसकी चूत गुलाबी रंग की थी जो जैसे जैसे गहरी होती जा रही थी वैसे वैसे लाल होती जा रही थी. देखने से तो उसकी चूत काफी छोटी और अनचुदी लग रही थी.
 
मैं घुटनों के बल नीचे बैठ गया और रुची की दीवार से सटा कर अपना मुँह उसकी छोटी सी चूत में लगा दिया. रुची मस्ती से तड़प उठी. आंटी को चोद चोद कर अब मैं भी थोडा बहुत चुदाई के खेल को जान गया था और दोस्तों मैं आपको बताना चाहता हूँ की लंड के लिए सबसे अच्छी एक्सरसाइज चुदाई ही है तो आंटी की चुदाई करने से मेरा लंड थोडा मोटा भी हो गया था. भले ही रुची अपने भाई के बड़े लंड से चुद चुकी थी पर मैं भी उसको पूरा मजा देने वाला था. उसकी चूत चाटते अब मुझे उसकी चूत के अंदर से आने वाले पानी का स्वाद आ रहा था जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. जब वो अच्छे से झड गयी तब मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसकी टाँगे उठा कर जीन्स और पैंटी को निकाल कर जमीन पर फेंक दिया. फिर मैंने भी अपने कपडे उतारे और रुची को सीधा लिटाने के बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत पे घिसा. जब मेरे लंड के सुपाडे ने उसकी चूत के दाने पर रगड़ खाई तो रुची के चेहरे पर आनन्द का भाव छा गया. फिर मैंने उसकी टाँगें उठा कर अपने कंधों पे रखीं और फिर नीचे झुक कर उसकी चूत से मुँह लगाया और फिर से उसकी चूत चाटने लगा. रुची के मुह से फिर से एक आःह्ह निकला. फिर मैंने उसकी कमर अपने हाथों में पकड़ी और ऊपर उठा कर अपने मुँह से लगा ली. अब मैं उसकी गाँड को चाट रहा था. रुची का मस्ती के मारे बुरा हाल था.

मेरे चाटने से वो बार बार अपनी कमर को झटके दे रही थी. कभी ऊपर को, कभी दायें को कभी बाएँ को. मैंने उसकी तड़प का अंदाज़ा लगा लिया था कि अब यह चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार है. मैंने उसकी कमर छोड़ दी और उसे वापस बेड पर लिटा दिया. "रुची, मेरी जान, अपने यार का लंड अपनी चूत पे रखो" मैंने कहा तो रुची ने मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत पर रख लिया. मैंने ज़ोर लगाया मगर लंड फिसल गया अंदर नहीं गया. मैंने उठ कर रुची की टाँगे वापस अपने कंधे पर रख ली तो उसकी दोनों टाँगें पूरी तरह खुल गयी और मैंने अपने लंड से ही टटोल कर उसकी चूत का छेद ढूंढा और अपना लंड उस पर टिका दिया फिर मैंने अपने लंड पर ज़ोर डाला और मेरे लंड का टोपा उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर घुस गया.
 
मयंक ने मुझसे कहा था की वो रुची को चोद चूका है मगर रुची की चूत बहुत कसी हुई थी. रुची के मुह से हलकी सी चीख भी निकल गयी जो शायद मयंक ने भी सुनी और वही से चिल्लाया "क्या हुआ रुची." मैंने भी चिल्ला कर जवाब दिया "कुछ नहीं. मैंने तुम्हारी बहन का उद्घाटन कर दिया." रश्मि और मयंक की हँसने का आवाज आई और फिर मैंने थोड़ा सा अपना लंड पीछे को किया. रुची के चेहरे पर थोड़ा सा आराम आया और उसके बाद मैंने और जोर से वापिस अपना लंड उसकी चूत में ठेल दिया.

‘आह…’ अबकी बार चीख और ऊंची और ज़्यादा दर्द भरी थी. "आराम से भाई देखो रश्मि की आवाज आ रही है क्या?" मयंक ने बोला. मैंने उसकी बात अनसुनी करके फिर से अपना लंड थोड़ा सा पीछे करके दोबारा पूरी दम से अंदर धकेल दिया. रुची के मुह से एक जोर की सीत्कार निकल गयी. मैंने देखा तो मेरा लंड जड़ तक रुची चूत में घुस चूका था. मैंने रुची के होंठों को चूमा और अपना लंड धीरे से बाहर निकाल लिया.

अब मैं बड़े आराम से रुची को चूम चाट कर चोद रहा था ताकि मयंक को कोई शिकायत न हो और मेरा पानी भी जल्दी न निकले. मैं तो चाहता था कि कम से कम एक घंटा मैं रुची की चुदाई करूँ. रुची वैसे भी फूल जैसी हल्की थी. मैंने उसे चोदते चोदते ही अपने से लिपटा लिया और बेड से उतर कर नीचे खड़ा हो गया. फिर रुची को दरवाजे से लगा कर हवा में लटका कर चोदने लगा. ये पोजीशन मैंने एक ब्लू फिल्म में देखी थी और तभी से मेरा मन रुची को इस पोज़ में चोदने का था क्योंकि आंटी के साथ मैंने कोशिश की थी पर उनका वजन मैं नही उठा पाया था. आज मेरा एक और सपना पूरा हो गया था. थोड़ी देर रुची को ऐसे ही चोदने के बाद मैंने उसे नीचे उतारा और कुतिया बनने को कहा. वो फ़ौरन अपने चारों पाँव पर आ गई और मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला. साथ ही मैंने देखा उसकी गोल गोल गाँड के बीच में छोटा सा छेद.

मैंने उसकी गाँड के छेद पर थूका और अपना एक अंगूठा धीरे धीरे करके उसकी गाँड में डालना शुरू किया मगर उसने मना कर दिया "नहीं नहीं, ये मत करो." "क्यों? क्या मयंक ने पीछे नहीं डाला कभी." मैंने रुची से पुछा. "भाई ने क्या किसी ने भी पीछे नहीं डाला कभी. आगे भी तो आज कई महीनों बाद किसी ने डाला है. गाँव में अच्छा भला मामला फिट हो रहा था पर नानी ने पकड़ लिया और फिर मम्मी पापा आकर मुझे वापस ले आये. लेकिन मेरी चूत की पुकार ऊपरवाले ने सुन ही ली और तुम्हारा लंड मिल ही गया." रुची ने जवाब दिया. मेरी तो बाछे खिल गयी की चलो इसका कोई छेद तो कुवारा है. मैंने अपना अंगूठा बाहर निकाल लिया और उसे और जोर जोर से चोदने लगा.
 
मैं रुची को हर अंदाज़ में चोद लेना चाहता था इसलिए मैंने उसे उल्टा लेटा दिया खुद उसके ऊपर लेट गया और अपना लंड उसकी चूत में डाला फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसे अपने ऊपर कर लिया और मैं नीचे लेट गया. अब रुची मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर खुद चुदाई कर रही थी मगर इस स्टाईल में उसे हल्का दर्द हो रहा था तो मैंने उसे फिर से नीचे लेटा कर खुद ऊपर आ गया. इसी तरह खेल तमाशे करते करते करीब 40 मिनट बीत गये पर मैंने अपना माल नहीं झड़ने दिया. इतनी लंबी चुदाई के दौरान रुची दो बार झड चुकी थी. मैं उसके साथ सारे तौर तरीके आज़मा चुका था और अब खुद भी झड़ने वाला था तो मैंने उसकी दमदार ताबड़तोड़ चुदाई शुरू की. रुची भी खुद ऊपर उठ उठ कर बार बार मेरे होंठ चूम रही थी. उसकी चूत ने फिर से पानी छोड़ना शुरू कर दिया और वो एकदम से नीचे को गिरी "आह… आह… आ…" की आवाज करते हुए रुची एक बार और झड गयी. उसके झड़ने के साथ ही मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके पेट और चूचियों पर अपना सारा वीर्य झाड़ दिया. "छि‘ईईए, ये क्या किया?’ उसने बोला. "जानेमन अगर ये तेरे अंदर छोड़ देता तो पक्का तुझे 9 महीने बाद बच्चा हो जाता." मैंने उसे बताया. "अरे वो तो ठीक किया पर मेरे ऊपर क्यों गिरा दिया. मुह में दे देते. चलो अब एक टिश्यू पेपर तो दे दो ये सब साफ़ करने के लिए." रुची ने कहा. मैंने उसे टिश्यू पेपर देते हुए कहा "चलो कोई बात नही तुम अब मुह में ले लो." अपनी छाती और पेट की सफाई करने के बाद उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी.
 
इधर रुची मेरा लंड चूस रही थी तो मैंने बगल वाले कमरे पर ध्यान लगाया तो वहां से ठप ठप की आवाजें आ रही थी मतलब मयंक दीदी की जोर शोर से चुदाई कर रहा था. दीदी के चुदाई के ख्याल और रुची की मेहनत से मेरा लंड फिर से तैयार हो गया. मैंने फिर से रुची को घोड़ी बनाया और रुची के चूतड़ सहलाते हुए कहा "देखो रुची, तुम जितनी अपनी गाण्ड मरवाओगी, उतनी ये सुन्दर दिखेगी जैसे जितने तुम मम्मे दबवाया करोगी उतने वो बढ़ें होगे. इसका सीधा मतलब ये है कि जितनी तुम चुदोगी उतनी ही सुन्दर होती जाओगी. तुम रास्ते पर चलोगी तो लोगो का लंड तुम्हे देखते ही खड़ा हो जायेगा."

रुची बोली "मैंने कोई कसम नहीं खाई है गांड न मरवाने की बस डर लगता है की बहुत दर्द होगा. देखो न कई बार चुदने के बाद भी चूत अभी भी दर्द होती है."

मैंने रुची को बेड पर लिटा दिया और उसके पेट के नीचे एक तकिया लगा दीया जिससे उसकी गाण्ड ऊपर की ओर निकल आई. उसकी गांड के भूरे छेद को सहलाते हुए मैंने बोला "बड़ी मस्त गाण्ड है तुम्हारी. एक बार लंड लेकर तो देखो. मजा आएगा. मैंने जैसे ही रुची की गांड के छेद को सहलाया रुची मचलने लगी और उसने अपनी गाण्ड के छेद को जोर से बंद कर लिया फिर मैं उसकी गाण्ड को हाथ से फैला कर जीभ से चाटने लगा. वो एकदम से सिहर गई. मैं अपनी जीभ को नुकीला करके उसकी गाण्ड के छेद पर रख कर अन्दर डालने की कोशिश करने लगा और साथ में उसकी चूत के दाने को भी रगड़ने लगा जिससे रुची और मस्ती में आ गई और अपनी कमर को घुमाने लगी और आवाज भी निकालने लगी. उसको बहुत मजा आ रहा था, उसकी गाण्ड का छेद खुल गया था और अन्दर का गुलाबी रंग दिखने लगा था. मेरा लन्ड अब और टाइट हो गया था. मैं उसकी चूत को भी सहला रहा था और गाण्ड को भी चाट रहा था. इस दोहरी मार ने रुची की हालत एकदम ख़राब कर दी थी और वो बोली "मेरी चूत मैं अपना लन्ड डाल कर मेरी चूत की गर्मी बुझा दे यार"
 
मगर मैं उसकी चूत में अपना लंड डालने के मूड में नहीं था.. मैंने अब अपना लंड अपने हाथ में पकड़ा.. जो कि एकदम फूल गया था.. और उसकी नसें भी उभर चुकी थीं. सुपारा फूल कर एकदम लाल हो चुका था. मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रख कर रगड़ने लगा, जिससे रुची पूरी तरह से काँप उठी. उसको अंदाज नहीं था कि मैं उसकी गांड पर लंड रख दूँगा. उसकी गांड एकदम गरम थी.. जो मैं अपने लंड पर महसूस कर रहा था. मैंने अपने सुपाड़े को उसकी गांड के छेद पर रखा और जोर देकर अन्दर डालने लगा मगर रुची की गांड बहुत ज्यादा टाइट थी, उसमें मेरा लंड अन्दर नहीं जा रहा था. मैंने पास में रखी हुई फेस क्रीम उठाया और आधा रुची की गांड में खाली कर दिया. रुची समझ गयी की क्या होने वाला है "वो बोली नहीं मनीष बहुत दर्द होगा. रुको तो." पर तब तक मैंने फिर से अपना लंड उसके छेद पर रखा और जोर का धक्का दिया जिससे मेरा सुपाड़ा उसकी गांड में घुस गया. इसके साथ ही रुची की चीख निकल गई. वो लंड निकालने को कहने लगी. मगर मैं समझ रहा था कि एक बार निकाल दिया तो फिर ये कभी भी गांड मारने नहीं देगी. मैंने पीछे से ही हाथ आगे बढ़ा कर उसकी चूचियों को कब्जे में ले लिया और अपने पूरा जिस्म का भार उसके नंगे जिस्म पर डाल दिया. उसकी गर्दन को चूसने लगा और जीभ से चाटने लगा.

"अरे अब क्या किया?" मयंक फिर से चिल्लाया. "कुछ नहीं यार. तुम रश्मि पर ध्यान दो. रुची की जिम्मेदारी मेरी" मैंने चिड़ते हुए जवाब दिया और एक हाथ को उसकी चूचियों से हटा कर उसकी चूत के दाने को मसलने लगा जिससे थोड़ी देर में उसके मुँह से हल्की-हल्की मादक सिसकारियाँ निकलने लगी. थोड़ी देर ऐसे ही करने के बाद मैंने वापस से एक जोर का झटका मारा.. जिससे मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुस गया और लंड के मोटे हिस्से तक जाकर रुक गया. अब तो रुची को और भी जोर का दर्द होने लगा और वो जोर से चिल्लाने लगी. वो अपना सर सामने तकिये पर पटक कर रोने लगी और अपना सर इधर-उधर पटकने लगी. अब मैंने इन्तजार नहीं किया और एक आखिरी झटका और मार दिया जिससे मेरा पूरा लंड उसके गांड में घुस गया और वो और जोर की चीख़ मार के अपना सर तकिये पर मार बैठी. मुझे लगा कि साली बेहोश न हो गई हो पर ऐसा नहीं था.

वाकई कुवारी गांड का मजा ही अलग है. अब मैं अपना पूरा भार उसके बदन पर डाल कर उसके कान को चूसने लगा और उसकी एक चूची को सहलाने लगा. मैं कभी उसके गले को चूसता चाटता तो कभी पीठ को चाटता. धीरे-धीरे उसका बदन हिलने लगा और वो कहने लगी "गांड से लंड निकाल दो. बहुत दर्द हो रहा है. मेरी गांड फट गई है. निकालो वरना दुबारा कभी हाथ भी नहीं लगाने दूँगी."

 
मैंने उसकी बात को अनसुनी कर दी और उसके बदन को सहलाता और मसलता रहा. बहुत ही ज्यादा कसी हुई गांड थी साली की. बहुत मुश्किल से मैंने लंड अन्दर-बाहर करना शुरू किया. मैं उसको कुतिया बना कर पीछे से उसकी गांड में अपना लंड पेल रहा था और उसकी चूची को मसल रहा था. मुझे तो बहुत मजा आ रहा था मगर रुची की गांड बहुत टाइट थी. पर कुछ देर में क्रीम जब अच्छे से उसकी गांड में फ़ैल गयी तो मैं पूरी जोर से लंड को उसकी गांड में पेलने लगा था और उसकी गांड पर चपत भी मार रहा था. अब तो रुची भी चिल्ला कर कह रही थी "जोर-जोर से मारो मेरी गांड". यह सुन कर मैं भी पूरे जोश में उसकी गांड मार रहा था.

आवाज मयंक के कानो में भी पड़ी तो उसने पुछा "अरे रुची की गांड भी मार दी क्या? उसकी गांड कुवारी है." "यार मेरी बहन की तो चूत भी कुवारी थी तो क्या तुमने छोड़ दी थी." मैंने जवाब दिया और दूने जोश से रुची की गांड मरने लगा. अचानक मुझे लगने लगा कि मेरे लंड की नसें फूल रही हैं और लंड का सारा पानी एक जगह जमा हो रहा है. रुची की कमर को जोर-जोर से पकड़ कर पंद्रह-सोलह झटके मारने के बाद मेरे लंड ने अपना गरम लावा उसकी गांड में ही छोड़ दिया और मैं उसकी पीठ पर ही लेट गया. रुची की गांड को चोद कर बहुत मजा आया. इतना मजा तो उसकी चूत मार के भी नहीं आया था. इसके बाद हम दोनों कुछ देर निढाल पड़े रहे फिर उठ कर बाथरूम में जाकर साफ-सफाई की और वापस कमरे में आ गए. कमरे में आते वक़्त हम दोनों ने दीदी के कमरे की खिड़की से देखा की मयंक भी रश्मि दीदी को कुतिया बना कर उनकी गांड मार रहा है.

मैं रुची से बोला "देखा साला खुद मेरी बहन की चूत गांड सब पेल रहा है और अपनी बहन की बहुत चिंता है." रुची बोली "चिंता विंता कुछ नहीं वो तो खुद मेरी गांड की सील खोलना चाहता था पर यहाँ आकर मम्मी ने जॉब छोड़ दी है. अब वो पूरे दिन घर पर रहती है तो ये इस घर में कुछ कर नहीं पाता." हम दोनों बेड पर लेट गए और बगल के कमरे से आती रश्मि और मयंक की चुदाई की थापे सुनते सुनते कब सो गए पता ही नहीं चला. मेरी नींद तो तब खुली जब मयंक ने मेरा लंड पकड़ कर दबाया. मैं हडबडा कर उठ बैठा. मयंक बोला "यार बहुत दिन हो गए रुची को चोदा नहीं है. आज मौका है एक राउंड लगा लेता हूँ. जरा जगह देना." मैं बेड से हट कर खड़ा हो गया और मयंक रुची के बगल में लेट गया. मयंक का लंड एकदम खड़ा था मतलब वो काफी देर से अपनी सोती हुई नंगी बहन को देख रहा था. वो रुची की चुचिया चूसने लगा तो रूची कुनमुनाने लगी. मयंक ने आव देखा न ताव अपना लंड रुची की चूत के मुह पर रखा और एक जोर का झटका मारते हुए अन्दर कर दिया. दर्द से रुची की नींद खुल गयी और वो चीखती इससे पहले ही मयंक ने उसके होठ अपने होठो से बंद कर दिए और एक और धक्का मार के पूरा लंड अपनी बहन की चूत में उतार दिया. थोड़ी देर बाद जब मयंक ने रुची के होठ छोड़े तो वो बोली "तुम दोनों को बस अपने मजे की पड़ी रहती है. पहले इसने गांड मार कर मेरा बुरा हाल कर दिया और अब तुमने मेरी सूखी ले ली."
 
मयंक बोला "सॉरी बहना. बहुत दिनों बाद तुम्हे नंगा देखा तो रहा नहीं गया." और वापस रुची को चोदने लगा. मैं उन दोनों भाई बहन की चुदाई देख कर मस्त हुआ जा रहा था. अचानक मुझे रश्मि दीदी की याद आई. मैंने मयंक से पुछा की दीदी कहाँ है. वो चुदाई करते करते बोला "वो थक कर सो गयी तो मैंने जगाया नहीं." मैं अपने कमरे से निकल कर दीदी के रूम में चला आया. डोर तो मयंक खोल ही चूका था. दीदी पूरी नंगी बेड पर पड़ी सो रही थी. मैं भी पूरा नंगा था और जाकर रश्मि दीदी के बगल मे बैठ गया और गौर से उनके नंगे बदन को देखने लगा. रुची और आंटी का बदन दीदी के बदन के आगे कुछ नहीं है मेरे दिल से आवाज उठी. मुझे सबसे प्यारी तो दीदी की चुंचिया ही लगती है एक दम तोतापरी आमों जैसे. मैंने दीदी की चूत को भी ध्यान से देखा. मयंक का मोटा तगड़ा लंड लेकर दीदी की चूत थोड़ी खुल गयी थी और बहुत प्यारी लग रही थी. मन तो कर रहा था की इसे खा जाऊं पर मैं वापस दीदी की चुचियों की तरफ आया और धीरे से एक हाथ दीदी की नर्म चूंची पर रख दिया. उफ्फ्फ क्या एहसास था. दीदी सोती ही रही तो मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने दीदी की चूंची को मुह में ले लिया और चूसने लगा. दीदी बिना आँख खोले नींद में ही बोली "अब रहने भी दो मयंक बहुत थक गयी हूँ" और मैं भी चुपचाप वहा से उठा और वापस आ गया.
 
मेरा लंड दीदी के नंगे बदन को देख कर फिर से खड़ा हो गया था. जब मैं वापस कमरे में आया तो देखा की मयंक अब रुची को पलटा कर उसकी गांड मारने की कोशिश कर रहा था और रुची मना कर रही थी. मयंक ने मुझे देख कर बोला "देखो ना यार. तुमसे गांड मरवा ली और मुझे मना कर रही है". रुची बोली "अरे मनीष के लंड ने ही मेरी गांड फाड़ दी है और तुम्हारा तो उससे भी बड़ा है. न बाबा न. तुमसे मैं गांड नहीं मरवाऊंगी" मैंने मयंक को समझाते हुए कहा "यार ये कहा भागी जा रही है. फिर किसी दिन ले लेना. अब देखो न कितनी बार चुद चुकी है लेकिन अभी भी इसको चुदने में दर्द होता है. ऊपर बैठ कर तो लंड ले ही नहीं पाई". "अच्छा. वो तो बहस आसान है. कुछ गलत कर रहे होगे तुम लोग. दिखाओ तो कैसे कर रहे थे." मयंक ने मुझे आँख मार कर कहा. मैंने कहा "अभी दिखाता हूँ" और बेड पर लेट गया. लंड तो मेरा पहले ही दीदी को देख कर खड़ा था तो मैंने रुची को लंड चूत में लेकर मेरे ऊपर बैठने को कहा. रुची लंड लेकर बैठी तो दर्द से कराह उठी. अचानक मयंक रुची के पीछे से आया और बोला की जब ऐसे में दर्द हो तो आगे झुक कर सामने वाले को चूमना चाहिए और उसने रुची को धक्का देकर मेरे ऊपर झुका दिया. रुची मुझे किस करने लगी तो मयंक ने मुझे इशारा किया की मैं उसे अपनी बाँहों में भर लूं. मैंने वैसा ही किया और मयंक बेड पर चढ़ कर मेरी दोनों टांगो के बीच बैठ गया.

मैं समझ गया की क्या होने वाला है तो मैंने रुची के होठो को जोर से दबा दिया और उसको कस के पकड़ लिया. पीछे से मयंक ने अपना लौड़ा क्रीम लगा कर रुची की गांड के छेद में ठूस दिया. पता नहीं कितना लंड अन्दर गया पर रुची की आँखे निकल कर बाहर आ गयी. मयंक ने एक झटका और मारा और रुची की आँख से आंसू निकल कर मेरे चेहरे पर टपक गए. वो चीखना चाहती थी पर मैंने उसके होठ जकड़े हुए थे. आखिर में मयंक ने एक धक्का और मार कर अपना लंड पूरा जड़ तक रुची की गांड में ठूस दिया और अब आगे पीछे करने लगा. मुझे अपने लंड पर उसका लंड रगड़ खाता साफ़ महसूस हो रहा था. आज का दिन तो वाकई कमाल था. न सिर्फ आज मैंने रुची को चोदा, उसकी गांड का उद्घाटन भी किया. दीदी की चूंची भी मैंने आज ही चूसी और आज ही अपनी जिंदगी का पहला थ्रीसम कर रहा था.
 
मयंक ने मुझसे कहा "सोच क्या रहा है तू भी धक्के मार तभी तो इसको मजा आयेगा." उसकी बात सुन कर जैसे ही मैंने रुची के होठ छोड़ कर धक्के लगाना शुरू किया रुची ने हम दोनों को गाली देना शुरू कर दिया. वो कहने लगी "हाय मादरचोदो, उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ रंडी समझ रखा है क्या. साले कुत्तो हाय्यय्य्य मेरा क्या हाल कर रहे हो तुम दोनों. बस्सस्सस्सस करूऊऊऊऊओ एक तो तुम दोनों को मजे दिए हाय्य्यय्य्य और साले कुत्ते तूऊऊऊऊऊ तो मेरा सगा भाई है. बस्स्स्सस्स्स्स करूऊओ आगे पीछे से एक साथ डाल रखा है. रुक्कक्कक्क भी जऊऊऊऊ. ये भी नहीं सोचा की मेरा क्या हाल होगा. बस करो निकलूऊऊऊओ" रुची जोर जोर से चिल्ला रही थी. रश्मि दीदी वैसे भी कच्ची नींद में थी तो रुची की चीखे सुन कर वो जग गयी और हमारे कमरे के दरवाजे पर आ गयी. जब उन्होंने देखा की की हम दोनों ही रुची को रौंद रहे है तो वो दरवाजे से ही चिल्लाई "अरे क्या कर रहे हो तुम दोनों. बेचारी की जान लोगे क्या. छोड़ो उसे." मैं तो नीचे था क्या करता पर मयंक ने दीदी की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और रुची की गांड मारते हुए बोला "अरे रश्मि कैसी बात करती हो. कभी चुदाई से भी कोई मरता है क्या और मेरी प्यारी बहना तुझे पता भी है की औरतें इसी तमन्ना को दिल में लिए मर जाती है की काश हमको कभी दो मर्द एक साथ चोदे. तुझे तो अपनी किस्मत पर खुश होना चाहिए की तेरी जिंदगी में ये मौका इतनी जल्दी आ गया. तू बस मजे ले. देखना आज के बाद तुझे एक लंड से मजा नहीं आयेगा. हमेशा दो-तीन लंड माँगा करेगी. शाबास मनीष. और धक्के मारो." मयंक ने रुची को समझाते हुए कहा. अब मैंने और मयंक ने अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी.

दीदी थोड़ी देर दरवाजे पर खड़ी देखती रही पर अन्दर नहीं आई. शायद नंगी वो मेरे सामने वो नहीं आना चाहती थी. वो वापस अपने कमरे में चली गयी और थोड़ी देर में कुरता पहन कर वापस आई पर तब तक रुची को दो लंडो का मजा आने लगा था. रश्मि दीदी ने आकर मयंक को पकड़ कर कहा :अरे अब छोड़ भी दो बेचारी को". तो रुची ने ही मना कर दिया "खबरदार जो अब तुम दोनों में से कोई रुका. बस चोदते जाओ दोनों. बहुत मजा आ रहा है". रश्मि दीदी बोली "कमाल है. अभी तो चिल्ला रही थी और अब कह रही है की रुको मत."
 
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