S
StoryPublisher
Guest
"तुम्हारी बहन नखरा बहुत करती है" रुची ने चुप्पी तोड़ते हुए धीरे से कहा. "क्या कहा?"मैंने वापस पुछा. "मैंने कहा की तुम्हारी बहन नखरा बहुत करती है. अरे कल तुम्हारे सामने मयंक से चुद चुकी है और फिर भी बातें सुनो. क्या कर रहे हो? मनीष क्या सोचेगा?" रुची ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया. मतलब मयंक ने इसको सब कुछ बता दिया. वाह भाई बहन का रिश्ता हो तो ऐसा. आपस में हर बात शेयर करते है. मैंने रुची से पुछा "तो तुम नखरा नहीं करती." "बिलकुल नहीं. अब जल्दी से आ जाओ." ये कहते हुए रुची ने खुद ही अपनी टीशर्ट उतार दी. अन्दर उसने ब्रा नहीं पहनी थी. उसके अमरुद जैसे चुंचे मेरी आँखों के सामने आ गए और अब मैं भी बिना देर किये उसके चुन्चो पर टूट पड़ा.
उस दिन मैंने पहली बार रुची की चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसा. मेरे हल्का सा चूसने के बाद ही रुची के निप्पल एकदम तन कर खड़े हो गए. उसकी अमरुद जैसी चुचियों पर खड़े हुए निप्पल बहुत प्यारे लग रहे थे. मैंने उसके निप्पल को अपनी उंगलियों से पकड़ा और हलके से दबाया.
"इस्स…" रुची के मुँह से आवाज़ आई मतलब उसे भी मज़ा आ रहा था. मैंने फिर से उसके निप्पल मुँह में लिए और चूसे. उसने मस्ती से भर कर मेरा सर अपनी छातियों में दबा दिया और मैं बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों को चूसता रहा. रुची लगातार ‘इस्स… उफ़्फ़… आह…’ जैसी आवाजे करती रही जिनसे मेरा जोश और बढ़ता जा रहा था. मैंने रुची की जीन्स उसकी पैंटी के साथ ही नीचे कर दी अब रुची की चिकनी चूत मेरी आँखों के सामने थी. मैंने अपनी उंगली से उसकी चूत के दोनों होंठों को खोल कर देखा तो अंदर से उसकी चूत गुलाबी रंग की थी जो जैसे जैसे गहरी होती जा रही थी वैसे वैसे लाल होती जा रही थी. देखने से तो उसकी चूत काफी छोटी और अनचुदी लग रही थी.
उस दिन मैंने पहली बार रुची की चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसा. मेरे हल्का सा चूसने के बाद ही रुची के निप्पल एकदम तन कर खड़े हो गए. उसकी अमरुद जैसी चुचियों पर खड़े हुए निप्पल बहुत प्यारे लग रहे थे. मैंने उसके निप्पल को अपनी उंगलियों से पकड़ा और हलके से दबाया.
"इस्स…" रुची के मुँह से आवाज़ आई मतलब उसे भी मज़ा आ रहा था. मैंने फिर से उसके निप्पल मुँह में लिए और चूसे. उसने मस्ती से भर कर मेरा सर अपनी छातियों में दबा दिया और मैं बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों को चूसता रहा. रुची लगातार ‘इस्स… उफ़्फ़… आह…’ जैसी आवाजे करती रही जिनसे मेरा जोश और बढ़ता जा रहा था. मैंने रुची की जीन्स उसकी पैंटी के साथ ही नीचे कर दी अब रुची की चिकनी चूत मेरी आँखों के सामने थी. मैंने अपनी उंगली से उसकी चूत के दोनों होंठों को खोल कर देखा तो अंदर से उसकी चूत गुलाबी रंग की थी जो जैसे जैसे गहरी होती जा रही थी वैसे वैसे लाल होती जा रही थी. देखने से तो उसकी चूत काफी छोटी और अनचुदी लग रही थी.