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नए पड़ोसी complete

"अरे कमाल तो है ही. मजा ही कुछ ऐसा आ रहा है. सुनो तुम दोनों मेरे बाद रश्मि को भी मिल कर ऐसे ही चोदना तब इसको पता चलेगा की असली मजा क्या होता है." रुची हम दोनों से बोली. दीदी उसकी बात से नाराज़ हो गयी. "क्या उल्टा सीधा बोलती हो. मनीष मेरा भाई है." तब तक मयंक ने रश्मि दीदी को पकड़ के अपने पास खींच लिया और उनकी किस लेते हुए बोला "तो क्या हुआ मेरी जान. ये मैं जिसकी गांड मार रहा हूँ वो भी तो मेरी बहन है." फिर उसने दीदी की चूंची को उनके कुरते के ऊपर से ही दबा दिया. दीदी की सिसकी निकल गयी. दीदी ने नीचे पैजामा नहीं पहना था तो मैंने भी मौका देख कर उनकी मोटी जांघ पर हाथ रख दिया. पर दीदी इसके लिए बिलकुल तैयार नहीं थी वो मुझे और मयंक को गुस्से से देखती हुई कमरे से बाहर चली गयी.

मयंक बोला "भाई तेरी किस्मत ख़राब है. अगर रश्मि तुझे अपनी चूत दे देती तो तू भी जान जाता की बहन चोद कर क्या मज़ा आता है". तभी रुची बोली "अरे जो अभी दे रही है उस पर ध्यान दो न उसके चक्कर में सूख रहे हो जो नहीं दे रही." फिर हम दोनों ने रश्मि के ऊपर से ध्यान हटाया और रुची को ताबड़तोड़ चोदना शुरू किया. हमारे लंड रुची की कसी हुई चूत और गांड में थे फिर भी ऐसे लग रहा था की आपस में रगड़ रगड़ कर अन्दर बाहर हो रहे है. इसीलिए हम दोनों कुछ ही देर बाद लगभग एक साथ रुची की चूत और गांड में झड गए और बेड पर निढाल हो कर लेट गए. थोड़ी देर बाद मयंक उठा और बोला "रश्मि नाराज़ हो गयी थी. जाकर मना लेता हूँ. रुची तुम भी कपडे पहन लो फिर घर चलेंगे." मयंक दीदी के कमरे में चला गया और रुची भी उठ कर अपने कपडे लेकर बाथरूम में चली गयी पर मैं नंगा ही बेड पर पड़ा रहा और दीदी के नंगे बदन को याद करके सोचता रहा की क्या वाकई मैं कभी दीदी को चोद नहीं पाऊँगा. तभी रुची कपडे पहन कर वापस आ गयी और बोली "अरे ये तो फिर से तैयार हो गया. मन नहीं भरा क्या?" मैंने देखा वाकई मेरा लंड फिर से तन गया था. मैंने सोचा की दीदी को चोदने के ख्याल से ही इसमें जान आ जाती है. रुची ने मेरे लंड पर एक प्यार भरा किस किया और बोली हम लोग जा रहे है. कल फिर आऊंगी. और वो चली गयी. दरवाजा खुलने और बंद होने की आवाज से मैं समझ गया की मयंक और रुची अपने घर जा चुके है. मैंने आँखे बंद कर ली और दीदी के नंगे बदन को याद करके लंड सहलाने लगा. मुझे लगा की कोई मुझे देख रहा है तो मैंने थोड़ी सी आँख खोल कर देखा तो दीदी आंखे फाड़ फाड़ कर मेरा लंड देख रही थी. अचानक उन्होंने देखा की मैं उन्हें देख रहा हूँ तो वो बोली "मन नहीं भरा तेरा अभी. अब कपडे पहनेगा या युही पड़ा रहेगा." और मुड कर वापस जाने लगी. उनकी लचकती हुई गांड देख कर मेरे दिल में और छुरिया चल गयी.
 
उस दिन के बाद हमारी चुदाई का सिलसिला चल पड़ा. लगभग रोज ही मयंक रुची के साथ दोपहर को हमारे घर आ जाता और फिर मैं रुची के साथ अपने कमरे में और मयंक रश्मि दीदी के साथ उनके कमरे में. हम दोनों ने एक दुसरे की बहनों को तबियत से चोदा. छुट्टियों भर हमारी चुदाई का दौर चलता रहा. मयंक रोज दिन में तो रश्मि दीदी की चोदता साथ ही साथ रात में मौका मिलने पर रुची की चूत भी मारता था पर इधर मैं सिर्फ रुची की चूत ही मार पा रहा था. काफी दिनों से आंटी की चूत के दर्शन भी नही हुए थे और रही बात रश्मि दीदी की तो उनको नंगी करके चोदने के सपने देख कर ही मैं कभी कभी लंड हिला लेता था. दीदी मयंक की चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट थी तो मेरा तो कोई चांस ही नहीं था.

हमारी गर्मी की छुट्टी खत्म हो रही थी और हमारे रिजल्ट भी आ गए थे. मैं अच्छे नंबर से पास हो गया था पर मयंक सेकंड डिविसन में पास हुआ था. मेरा एडमिशन शहर के एक अच्छे कॉलेज में हो गया पर मयंक को कम नम्बरों की वजह से एडमिशन नहीं मिल पा रहा था. एक दिन शाम को मैं मयंक के पास उसके एडमिशन के बारे में पूछने जा रहा था तभी ओम ने मुझे रोक लिया और बोला "क्या मनीष भाई, आज कल तो हमसे बात करने की फुर्सत ही नही है तुमको. क्या हुआ मयंक और रुची से कुछ लड़ाई हो गयी है क्या?"

 
"अरे ओम भाई, आपको आंटी और चेतन की मम्मी से फुर्सत मिले तब तो हम आपसे बात करे. और लड़ाई की क्यों पूछ रहे हो?" मैंने भी ओम को सुनते हुए कहा. "अरे कहाँ भाई. आज कल तो हमारा मामला बिलकुल सूखा है, चेतन घर लौट आया है तो उधर नीलम भौजी ने भी कुछ दिनों के लिए मना कर दिया और लड़ाई की भी इसलिए पूछी की इधर कुछ दिनों से रुची और मयंक भी घर में ही रहते है, वैसे तो रोज तुम्हारे घर चले जाते थे तो अपना काम हो जाता था पर अब तो यहाँ भी सूखा है." ओम ने मुस्कुराते हुए कहा.

"वो हम लोग एडमिशन के चक्कर में बिजी थे न इसीलिए. अब मेरा एडमिशन तो हो गया अब मयंक का क्या हुआ वही पूछने जा रहा था पर आपने टोक दिया." मैंने बताया. "अच्छा अच्छा. वोही हमे लगा की इस खेल से भी किसी का दिल भरा है कभी जो तुम लोगो ने खेल बंद कर दिया."

"हम लोगों का खेल? क्या मतलब है आपका?" मैंने ओम से तल्खी में पुछा. तो ओम बोला "अरे नाराज क्यों होते हो. भाई तुमने कहा था की तुम मयंक की बहन चोदना चाहते हो और मयंक भी तुम्हारी बहन रश्मि को चोदना चाहता था अब तुम दोनों अपनी बहनों के साथ इधर एक महीने से ज्यादा हो गया दोपहर भर अपने घर में बंद रहते हो तो हमने सोचा की कुछ न कुछ तो खेलते ही होगे. हम तो तुमसे सब बता देते है और तुमने बताया ही नहीं की रुची को चोद कर तुम्हे कैसा लगा."

 
"क्या फालतू बात करते हो ओम भैया. अब इतनी गर्मी में दोपहर को क्या हम लोग सड़क पर क्रिकेट खेलेंगे. और वैसे भी हम लोग जो भी करे आपसे क्या मतलब है." मैंने थोडा गरम होकर कहा. इस पर ओम बोला "नहीं मतलब तो कुछ नहीं बस हम तुम्हारे आभारी है जो तुम मयंक और रुची को अपने घर बुला लेते थे तो हम यहाँ आंटी को आराम से चोदते थे. गर्मी तो अभी भी उतनी ही है तो कल भी बुला लेना दोनों को अपने घर तो हमारे प्यासे लंड की प्यास बुझ जाएगी."

"देखो आज के बाद मुझसे ये फालतू बात मत करना समझे." मैंने गुस्सा करते हुए कहा. "अच्छी बात है. पर हमारी आखिरी बात सुनते जाओ... सुनो चेतन का एडमिशन इंजीनियरिंग में हो गया है. एक हफ्ते बाद चला जायेगा. उसके बाद हम नीलम अरोड़ा को रोज पेलेंगे. तुमको क्या बताये जब नीलम भौजी ब्रा पैंटी पहन कर डांस करती है तो लौड़े में आग लग जाती है. अगर देखना हो नीलम भौजी का ब्रा पैंटी में मुजरा तो हमको बोलना भाई." नीलम आंटी का मलाई मक्खन जैसा बदन ब्रा पैंटी में दिखाने का ऑफर जो ओम आज मुझे दे रहा था अगर एक महीने पहले दिया होता तो मैं लपक लेता पर अब मैं ये जान गया था की ये बदले में मुझसे भी कुछ मांगेगा क्योंकि इसको शक हो गया है की मैं रुची को और मयंक रश्मि दीदी को चोदते है तो इससे ज्यादा बात करना खतरे से खाली नहीं है इसीलिए मैं ओम की बात का कोई जवाब दिए बिना मयंक के पास चला आया.

 
एडमिशन की बात पूछने पर मयंक ने मुझे बताया की अंकल ने कुछ जान पहचान से मयंक का एडमिशन उसके मामा के शहर में करवा दिया और कुछ ही दिनों में वो अपने मामा की यहाँ चला जायेगा. मेरा दिल ख़ुशी से उछल पड़ा क्योंकि मैं जानता था की अब दीदी को रोज लंड लेने की आदत लग गयी है. अब अगर मयंक अपने मामा के यहाँ जाता है तो दीदी की चुदास मेरी किस्मत खोल सकती है. मैंने मयंक से पुछा "रश्मि दीदी को बता दिया." उसने कहा "अभी नहीं बताया है तुम ही बता देना." मैंने कहा "दीदी बहुत उदास हो जायेंगी ये सुन कर. और तुम भी वह रुची और दीदी के बिना कैसे काम चलाओगे." तो मयंक हँसते हुए बोला "यार रश्मि को दिक्कत जरूर होगी पर वो भी अब तेज हो गयी है, कुछ न कुछ कर ही लेगी वरना जब मैं छुट्टियों में आऊंगा तो पूरे साल का कोटा पूरा कर दूंगा. रुची के लिए तुम तो हो ही और रही बात मेरी तो वहीँ मेरी मौसी भी रहती है जिनकी बड़ी लड़की को मैं दो-चार बार चोद चूका हूँ और मामा की भी एक जवान लड़की है तो हो सकता है घर में भी जुगाड़ बन जाए. और नए कॉलेज में तो नए माल सेट होंगे ही."

मैंने मन ही मन मयंक के हरामीपन की तारीफ़ की और दीदी को ये खुशखबरी देने घर पहुच गया और जैसा मैंने सोचा था जब रश्मि दीदी ने जब ये सुना की मयंक अपने मामा के यहाँ जा रहा है तो दीदी का मुह लटक गया. मैंने फ़ौरन मौके पे चौका मारते हुए कहा "दीदी परेशान क्यों होती हो. मयंक चला भी गया तो मैं तो हूँ." दीदी ने गुस्से से मेरी तरफ देखा और बोली "कभी सोचना भी मत समझे." और गुस्से से कमरे से बाहर चली गयी और मैं उनकी लचकती हुई गांड देख कर सोचने लगा की क्या मेरे लंड की किस्मत में ये गांड फाड़ना है या नहीं.

 
मुझे लगा की रश्मि दीदी ऐसे तो मुझे नहीं चोदने देंगी लेकिन शायद वो मयंक की बात मान ले तो मैं अगले दिन सुबह ही मयंक के पास पहुच गया. दरवाजा आंटी ने खोला और मुझे देख कर मुस्कुराते हुए बोलीं "क्या बात है. आज कल अपनी आंटी की याद नहीं आती."

"ऐसी बात नहीं है आंटी पर आप आज कल अकेली कहाँ मिलती है." मैंने जवाब दिया. "कोई बात नहीं. अगले हफ्ते रुची की छुट्टियाँ ख़तम हो जाएगी और मयंक भी परसों अपने मामा के यहाँ चला जायेगा फिर तो मैं घर पर अकेली बोर हो जाया करूंगी." आंटी ने बताया. "चिंता न कीजिये जब तक हम है आपकी बोरिंग करने के लिए आपको बोर नहीं होने देंगे बाकी ओवरटाइम के लिए ओम भैया तो है ही पर अभी तो जरा मयंक को बुला दीजिये कुछ काम है." मैंने हँसते हुए कहा.

"मयंक अपने कमरे में ही है. वही चले जाओ." आंटी ने मुझे अन्दर बुलाते हुए कहा. मैं मयंक के कमरे में पंहुचा तो देखा की वो पैकिंग में लगा हुआ है. मैंने पुछा "यार परसों जाना है और तुम आज सुबह से ही पैकिंग में क्यों लगे हो." वो बोला "यार कल मम्मी पापा के साथ गाँव के मंदिर जाना है, लौटते लौटते रात हो जाएगी और परसों सुबह की ट्रेन है तो सोचा सुबह सुबह पैकिंग कर लेता हूँ ताकि दोपहर को थोडा टाइम रश्मि के साथ बिता सकूं, तुम बताओ सुबह सुबह कैसे. रश्मि को बोला तो था की मैं आज दोपहर में आऊँगा." "अच्छा. दीदी ने बताया नहीं. पर अच्छा ही हुआ की मैं आ गया. अब आज के बाद तो तुम मिलोगे नहीं तो आज तुमको मेरा एक काम करना पड़ेगा." मैंने मयंक से बोला.

"हाँ हाँ बताओ." मयंक ने काम पुछा. "यार तुम्हारे और रुची के बारे में जान कर और रश्मि दीदी को नंगा देख कर मेरा बहुत मन है की मैं भी अपनी बहन को चोदुं. अब जब तुम जाने वाले हो तो दीदी की लंड की जरूरत मैं पूरी कर सकता हूँ. तुम दीदी को मुझसे चुदवाने आईडिया दे देना और राजी भी कर लेना पर उनसे ये न कहना की मैंने तुमसे कहा है." मैंने मयंक से कहा.

 
"देखो भाई. मैंने पहले भी एक दो बार रश्मि से कहा था तुम्हारे साथ थ्रीसम करने के लिए लेकिन वो तुम्हारा नाम सुन कर भड़क जाती है. वो तुमसे चुद्वाने के लिए तैयार नहीं है फिर भी तुम्हारा दिल रखने के लिए मैं आज उससे एक बार और बात करके देखता हूँ." मयंक ने जवाब दिया. "यार अगर दीदी तैयार होती तो मैं तुम्हारे पास क्यों आता. पहले की बात दूसरी थी जब तुम दीदी को रोज लंड दे रहे थे पर अब तो तुम जा रहे हो दीदी को भी तो भूख मिटाने का जुगाड़ चाहिए न. मुझे लगता है की तुम कहोगे तो मान जाएगी." मैंने मयंक से बोला. "ठीक है अभी 2 घंटे में तुम्हारे घर आता हूँ फिर रश्मि से बात करूंगा." मयंक ने कहा और मैं वापस घर आ गया और मयंक का वेट करने लगा.

मयंक अकेले ही आया तो मैंने रुची के बारे में पुछा तो वो बोला "रुची अपनी फ्रेंड के घर गयी है शाम तक आयेगी. अब आज के बाद मेरे पास टाइम नहीं होगा तो मैं रश्मि से मिलने आ गया." मैंने कहा "कोई बात नहीं. अच्छा ही है. सुनो मैं भी 2-3 घंटे के लिए बाहर चला जाता हूँ फिर तुम पूरे घर में दौड़ा दौड़ा कर दीदी की लेना और मेरी बात भी कर लेना. दरवाजा बंद कर लो. दीदी अपने रूम में ही तुम्हारा वेट कर रही है."

मैं घर से बाहर निकल आया और मयंक ने दरवाजा बंद कर लिया. दरअसल मैंने सोचा की जब रुची भी घर में नहीं है और मयंक मेरे घर पर है तो मैं आंटी की सुबह वाली शिकायत दूर कर दूं और मैं आंटी को चोदने उनके घर चल दिया. पीछे वाले दरवाजे पर पहुच कर मैंने बेल बजाई तो थोड़ी देर बाद आंटी ने दरवाजा खोला और मुझे देख कर बोली "मयंक तो तुम्हारे यहाँ ही गया है." "हाँ वो आया था पर हमारा एक दोस्त और भी आ गया जिसके पास फिल्म का एक्स्ट्रा टिकेट था तो वो दोनों फिल्म देखने चले गए. मयंक ने बताया की रुची भी घर पर नहीं है तो मैंने सोचा की आप बोर हो जाएगी तो चला आया."

 
आंटी हँसने लगी और मुझे अन्दर बुला कर बोली "अच्छा हुआ तुम आ गये वरना मैं ओम को बुलाने ही वाली थी" "अरे उससे तो मैंने ओवरटाइम करवाने को बोला था तो अभी क्यों बुलाने वाली थी उसको?" मैंने चिड़ते हुए कहा. "अरे नहाने जा रही थी तो सोचा की उसको बुला कर पीठ में साबुन लगवालूं."आंटी ने जवाब दिया. मैं बोला "अरे मेरे होते हुए आपको कोई और नहलाये लानत है मुझ पर" और मैंने आंटी को लपक कर गले लगा लिया. आज बहुत दिन बाद आंटी को चोदने के ख्याल से लंड ज्यादा ही झटके खा रहा था. साथ ही मन में उम्मीद भी थी की शाम को मयंक भी खुशखबरी दे सकता है. तो मैंने आंटी को कुछ ज्यादा कस के दबा दिया. "अरे अरे कुछ ज्यादा ही भूखे लग रहे हो. चलो कपडे उतर कर बाथरूम में चलो मैं अभी आती हूँ." आंटी ने अपने आपको छुडाते हुए कहा.

मैं फ़ौरन कपडे उतर कर बाथरूम में पहुच गया और बेसब्री से आंटी का इंतज़ार करने लगा. जैसी उम्मीद थी आंटी लाल रंग की ब्रा पैंटी में बाथरूम में आई जिनको देख कर मेरे लंड ने एक जोर की सलामी दी. आंटी मेरे लंड को देख कर बोली "लगता है थोड़े दिनों में ही लम्बा और मोटा हो गया है." "रोज कसरत जो करवाता हूँ इससे." मैंने हँसते हुए कहा और मन में सोचा की इनको क्या पता की ये रोज इनकी बेटी के बिल में जा जा कर मोटा तगड़ा हो रहा है. "चलो पहले पीठ में साबुन लगा दो." आंटी शावर के नीचे जाकर ब्रा खोलती हुई बोली. आंटी के ब्रा खोलते ही उनकी दोनों चुंचिया कैद से आजाद होकर मुझे मुह चिढाने लगी.

मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने आगे बढ़ कर आंटी की चूंची को मुह में ले लिया और चूसने लगा. आंटी ने कहा अरे पहले नहा तो लेने देता. मैंने बोला "आंटी सबसे पहले चुदाई फिर बाकी के काम" ये सुन कर आंटी ने पैंटी भी उतार दी और अपने पांव को थोड़ा फैलाया और मेरे मुह को पकड़ कर अपनी चूत पर जोर से दबा कर बोली "तो ठीक है पहले इसको चाट".

मैं फ़ौरन नीचे झुक गया और किसी प्यासे कुत्ते की तरफ उनकी चूत को खोल खोल के अंदर तक मेरी जीभ घुमा घुमा के चाटने लगा. मेरी इतनी जबदस्त चूत चटाई से आंटी झड़ने लगी उन्होंने मेरे बाल को जोर से पकड़ कर मेरा मुह अपनी चूत पर दबा दिया और बोली "पी ले मनीष, सारा पानी पी जा" उनकी चूत के पानी के साथ साथ शावर का पानी उनके जिस्म से एक एक अंग से बह कर मेरे मुह में जा रहा था जो मुझे और भी उत्तेज़ित कर रहा था. आंटी की चूत चाटने के बाद मैं वापस उनकी चून्चियो पर आ गया और आंटी भी अब छोटे बच्चे की तरह मुझसे अपनी चुंचिया चुसवाने लगी. फिर आंटी मेरे लंड को पकड़ कर निचे बैठी और मेरा लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. मेरा लंड जो पहले से ही बहुत टाईट था उन्होंने चूस चूस के और टाइट कर दिया फिर आंटी मेरे सामने बाथरूम के फर्श पर बैठ गयी और अपनी टांगे फैलाकर चूत को खोल दिया. मैंने आंटी की चूत पर लंड ले जाकर धक्का मारा और पूरा लंड एक धक्के में अंदर चला गया.

 
आंटी मुझे जोश दिलाने के लिए एकदम से आवाजें निकालने लगी "आह्ह ओह्ह हह्ह्ह ओह्ह हहह आऊउ मनीष आज तू तेरा पूरा लंड मेरी चूत में डाल कर मेरी चूत को फाड़ दे आज अपनी आंटी की चूत को एकदम से फाड़ दे अहह ओह अग्घ्घ उऔऔ उम्म्म अघ्घ्ग ओह हह्ह्ह उस्सस एस अह्ह्ह अय्य्य्य उम्म्म ओह्ह मनीष."

मैं और जोश में आकर उनको जोर जोर से चोदने लगा. फिर मैंने आंटी को बाथरूम के फर्श पर कुतिया बनाया और उनकी चूत में अपना लंड डाला और उनको पागल कुत्ते की तरह चोदने लगा. आंटी बोली मनीष घुटने में दर्द हो रहा है चलो बेडरूम में चलो. हम दोनों गीले ही बाथरुम से बाहर आये और उनके बेड रूम में चले गए. आंटी बेड पर लेट गयी. मैंने आंटी को पलटाया और अपना लंड उनकी गांड के छेद पर रखा और धीमे धीमे धक्का लगाने लगा. वह धीमे धीमें चीख रही थी "आह्ह ओह्ह हहह दुख रहा है धीरे धीरे कर, अरे क्रीम तो लगा लेता." जब लंड का सुपाडा अंदर चला गया और मैंने जोर से धक्का मारा.

तो आंटी बोली "भोसड़ीके क्या कर रहा है? निकाल और पहले क्रीम लगा." मैंने आंटी के मुंह पर हाथ रखा तो आंटी मेरा हाथ काटने लगी. मुझे थोड़ा गुस्सा आया और मैंने जोर से अपना लंड आंटी की गांड में पेल दिया. लंड आराम से अन्दर नहीं जा रहा था तो मैंने ज्यादा जोर डाला जिससे आंटी को काफी दर्द हुआ पर मैंने उनका मुह कसके बंद कर रखा था तो वो सिर्फ गों गों करके रह गयी और मैं जोर जोर से उनकी गांड मारने लगा. पूरे रुम में ठप ठप की आवाज सुनाई दे रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने एक दम से लंड बाहर निकाला और उनकी गांड के होल मैंने अपनी जीभ को हल्की हल्की घुमाने लगा. फिर मेने पूछा की क्या अब भी दर्द हो रहा है?

तो आंटी गुस्से से बोली "अरे पिछवाड़े में डालने से मना कब किया तुझे. बस क्रीम लगाने को की तो बोला था. अरे चूत तो पानी छोडती है तो चिकना रहता है. गांड में कुछ तो लगाना चाहिए था न. उफ्फ कितना दर्द हुआ मुझे." उन्होंने कहा "लेकिन अब तू डाल न दर्द के साथ मजा भी आ रहा है अब". ये सुनते ही मैंने वापिस उनकी गांड में एक झटके के साथ लंड पूरा अंदर घुसा दिया और उनकी गांड मारने लगा. साथ में उनकी चूत में भी एक साथ अपनी तीन उंगलिया घुसा दी.
 
आंटी बोली "तू खुद इतने दिन नहीं आया और बदला मुझसे ले रहा है? मुझे क्यों तड़पा तड़पा कर चोद रहा है? क्या हुआ क्यों ऐसा कर रहा है?" मैंने कहा "आंटी ये भी मोहब्बत का एक रंग है. इसके भी मजे लीजिये न." और लंड को उनकी गांड से निकालकर आंटी के बाल पकड़कर उनके मुंह में पूरा घुसा दिया, आंटी उह्ह ओह्ह कर रही थी, थूक बहार फेंक रही थी, आंखों से पानी निकल रहा था, लेकिन मैंने वह लंड उनके गले तक अंदर डाला फिर बाहर निकाला और मैंने पूछा "कैसा लगा?" आंटी बोली "अरे अभी इस सब ड्रामे का टाइम नहीं है. जल्दी से एक बार मेरी चूत में डाल के इसकी आग को ठंडा करदे. रुची कभी भी आ सकती है और अभी बहुत काम करने है." मैंने सोचा आंटी सही कह रही है और जल्दी घर जाकर मयंक और दीदी की चुदाई भी देखने को मिलेगी तो मैंने आंटी को सीधा लिटाया उनकी टाँगे अपने कंधो पर रखी और आंटी को बटरफ्लाई पोजीशन में चोदना शुरू किया और करीब 20 मिनट बाद अपना माल आंटी की चूत में छोड़ दिया. थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे फिर आंटी बोली "अब तू कपडे पहन कर जा. मैं भी नहाने जा रही हूँ." मैं कपडे पहन कर छत के रस्ते से चुपचाप अपने घर में आ गया. नीचे आकर मैंने देखा की मयंक और दीदी पूरे नंगे है और मयंक दीदी को सोफे पर लिटा कर ताबड़तोड़ तरीके से चोद रहा था और पूरा हाल उसकी थापों से गूँज रहा था. दीदी भी मस्ती में आह मयंक और जोर से अआः मर्र गयीईईईइ येस्स्स्स हाँ हां आःह्ह्ह की आवाजे निकाल रही थी. मैं छुप कर रश्मि दीदी का खुबसूरत नंगा बदन और मयंक को उन्हें चोदता हुआ देखने लगा.
 
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