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नए पड़ोसी complete

रुची बोली "अरे इतनी भी क्या जल्दी है? कितना तो मजा आया आज. एक राउंड और हो जाये."

"जानेमन आज मजा तो बहुत आया पर तुमने फार्म हाउस की जो बात बताई है उससे मुझे थोड़ी चिंता हो गयी है. जाकर लल्ला से पूछता हूँ की इन सालों का प्लान क्या है. चलो तुम भी फटाफट कपडे पहन कर घर जाओ. आंटी तुम्हारा इंतज़ार कर रही होंगी." मैंने रुची से कहा.

"पहले देखो तो सही की लाला दुकान पर है या नहीं क्योंकि तुम्हारे पास आने से पहले मैं घर गयी थी तो दुकान बंद करके लाला मम्मी को चोदने में लगा था. इसीलिए मैं इधर आ गयी." रुची ने कहा.

मैंने कपडे पहन लिये थे. मैंने कहा "यार मैं तो जा रहा हूँ. तुम यही रुको मैं देखता हूँ की लाला कहाँ है. जब तुम जाना तो घर लॉक कर देना. मैं चाभी तुमसे कल ले लूँगा." रुची कुछ कहती उससे पहले ही मैं घर से निकल गया क्योंकि मैं आंटी की चुदाई के बारे में रुची से बात नहीं करना चाहता था. घर से निकलते ही मैंने देखा की लाला आंटी के घर से निकल रहा था. इससे पहले की वो दुकान खोलता मैंने उसे रोका और कहा "चलो लाला भाई. फार्म हाउस चलो."

"पर मनीष भाई ओम भैया तो कह गए थे की ५ बजे के बाद निकलना" लल्ला ने कहा.

"यार अभी तो बस चलो. बाकी सब रस्ते में बताऊँगा." मैंने लल्ला से कहा.

लल्ला ने ज्यादा बहस नहीं की. उसको भी लग रहा होगा की फार्म हाउस पर रश्मि की चुदाई चल रही होगी और ये यहाँ दुकान पर बैठा है तो वो बोला "अच्छा रुको, हम बाइक लेकर आते है."

५ मिनट बाद हम दोनों फार्म हाउस के रस्ते पर थे. अब लल्ला ने पुछा "अब बोलो क्या हुआ."

"यार तुम लोग वहां बाहर से भी बन्दे बुला रहे हो क्या?" मैंने पुछा.

"ऐसी तो कोई बात नहीं है. ये तुमसे किसने कहा?" लल्ला ने पुछा.

"तो वहां सलमान और रुबेन नाम का कोई आदमी ओम ने नहीं बुलाया है." मैंने सीधे ही लल्ला से पुछा.

"वो दोनों मेरे दोस्त है, ओम का उनसे क्या लेना देना." लल्ला ने कहा.

"देखो भाई, सच सच बताओ की जब ओम रुची को उस फार्म हाउस ले गया था तो वो दोनों वहाँ थे या नहीं."

"थे क्योंकि मैं नहीं जा पाया था इसीलिए सलमान को भेज दिया था और रुबेन को सलमान साथ ले गया था पर अभी वहां कोई बाहरी नही होगा सिर्फ हम चार लौंडे होंगे क्योंकि हम जानते है की रश्मि रुची नहीं है. अगर बाहर के लौंडे देखेगी तो बिदक जाएगी. बल्कि ओम ने तो प्लान किया था की एक रंडी को भी बुला लिया जाए ताकि रश्मि सिर्फ तुम्हारे साथ ही रहे लेकिन उसकी बुकिंग पहले ही कहीं हो रखी थी तो वो नहीं आ पायेगी. पर तुम परेशान न हो हम लोग आराम से करेंगे." लल्ला ने कहा.

 
"थैंक्स गॉड. वैसे पहले जब मैंने सोचा की उस नीग्रो का एक फुटिया लंड जब दीदी को चोदेगा तो कितना मजा आयेगा पर फिर मैं डर गया की जाने रश्मि दीदी की आज क्या हालत होगी." मैंने कहा.

"आज अपनी बहन को चोद लो फिर रुबेन का क्या है. कल उसको तुम्हारे घर भेज दूंगा. अपनी आँखों के सामने चुदवा लेना रश्मि को. पूरे १३.५ इंच का लंड है उसका 4 इंच मोटा. मजा तो तुम्हारी बहन को बहुत आयेगा." कहकर लाला हँसने लगा.

मैं अब थोडा नार्मल हुआ वरना रुची ने तो मुझे डरा ही दिया था. अब मैं लाला से बोला "एक बात और लल्ला भाई. अरे जब किसी को चोदा करो तो दरवाजा बंद कर लिया करो. अब आज रुची ने तुम्हे उसकी मम्मी की लेते देख लिया."

मेरी बात सुन कर लाला और जोर से हँसने लगा और बोला "यार वो तो मैंने जानबूझ कर दरवाजा खुला छोड़ा था ताकि रुची देख ले क्योंकि मेरे प्लान के लिए ये बहुत जरूरी था. चलो अब कन्फर्म हो गया की रुची ने हमें देख लिया."

"कैसा प्लान" मैंने पुछा.

"दोनों माँ बेटी को एक साथ एक ही बिस्तर पर चोदने का प्लान." लाला बोला और बाइक की स्पीड बढ़ा दी. करीब ४० मिनट बाद हम दोनों शहर से बाहर एक फार्म हाउस पर खड़े थे.

आस पास दूर दूर तक कुछ भी नहीं था. कोई दूसरा फार्म हाउस भी नही. मैंने लाला से पुछा "ये फार्म हाउस है किसका."

"है तो मेरे दोस्त सलमान का ही. पुश्तैनी चमड़े का व्यापारी है. १०-१२ साल पहले उसके घरवालों ने अपनी ऐयाशी के लिए बनवाया था पर अब उन्होंने एक दूसरा फार्म हाउस शहर से थोडा पास बनवा लिया है तो वो अब इधर कम ही आते है. अब ये दोस्तों के काम ही ज्यादा आता है." लाला ने बाइक बंद करदी और धीरे से अन्दर घुसा. मैं भी पीछे पीछे चल दिया. मैंने कुछ बोलने की कोशिश की तो लाला ने मुझे इशारे से चुप करवा दिया और बाइक एक किनारे लगा कर पेड़ो की ओट से फार्म हाउस के किनारे से बनी सीढियों से मुझे छत पर ले आया. छत पर एक कमरा बना था जिसमे एक टीवी और एक सोफा पड़ा था. हम दोनों सोफे पर जाकर बैठ गए.

"ये लोग कहाँ है. नीचे दिखे नहीं." मैंने लाला से पुछा.

"यार ओम आ तो गया है. गाडी तो थी बाहर. नीचे हाल या बेडरूम में होंगे. अभी देखता हूँ." कहकर लाला ने टीवी ऑन कर दिया. रंगीन टीवी पर छोटे छोटे कई दृश्य आ गए. अब तो cctv आम बात है पर तब मैंने ऐसा कभी नहीं देखा था. पूछने पर लाला ने कहा की ये कमरा सिक्यूरिटी वालों का था और इस टीवी से वो पूरे फार्म हाउस पर नज़र रखते थे. एक जगह रश्मि मयंक और ओम के साथ एक स्विमिंग पूल में नज़र आ रही थी. मैंने कहा यार ये सीन पूरे स्क्रीन पर नहीं आ सकता. लाला ने कुछ बटन दबाया और अब सिर्फ स्विमिंग पूल का सीन पूरे टीवी पर आ गया. छोटे में पता नहीं चल रहा था पर जब पूरे स्क्रीन पर देखा तो हमे पता चला की तीनो पूरे नंगे होकर पूल में तैर रहे थे. रश्मि दीदी के नंगे बदन को देख कर लाला ने अपना लंड मसला और मुझसे कहा "यार मानो न मानो तेरी बहन है एक नंबर माल."

 
"तो चलो न हम भी वहीँ चलें. यहाँ क्यों बैठे है." मैंने लाला से बोला.

"ओम ने बोला था की तुझे देख कर रश्मि कही भड़क न जाए इसीलिए तेरे चक्कर में मुझे भी यहाँ बैठना पद रहा है वरना अभी इसी पूल में चोद देता तेरी बेहेनिया को. पर चिंता न कर ओम सही समय पर हमें बुला लेगा."

हम दोनों वापस टीवी पर दीदी और उन दोनों की जल क्रीडा देखने लगे. ओम और मयंक अपने लंड रश्मि दीदी के बदन पर यहाँ वहां रगड़ रहे थे. कभी गांड पर और कभी चूत पर. फिर उन दोनों ने दीदी को पूल से निकाला और उलटा करके लिटा दिया फिर ओम ने दीदी के हाथ पकडे और मयंक ने पैर और दीदी को झुलाते हुए लेकर अन्दर चले गए. लाला ने फ़ौरन चैनल बदला और बेडरूम का सीन आ गया. वो दोनों दीदी को झुलाते हुए अन्दर लेकर आये और दीदी को बेड पर लिटा दिया. दीदी ने ओम से कुछ कहा जो हम सुन नहीं पाए तब लाला ने टीवी की आवाज़ तेज़ कर दी. मयंक बोला मैं टॉवल लेकर आता हूँ. मयंक टॉवल लेकर आया तो ओम ने टॉवल ले ली और रश्मि दीदी की जांघो पर बैठ कर दीदी का गीला बदन पोछने लगा.

ओम का लंड पूरा खड़ा हो चूका था. अब मयंक ने दीदी की टाँगे पकड़ कर फैला दी तो ओम का लंड दीदी की चूत पर टक्कर मारने लगा पर ओम ने लंड दीदी की चूत में डाला नहीं बल्कि उसने आराम से दीदी को पोछा और फिर दीदी के बगल में लेट गया. दूसरी तरफ मयंक लेट गया और दीदी की चुन्चियो से खेलने लगा.

दीदी को लगा था की शायद ओम अब उनकी चुदाई करेगा इसीलिए उन्होंने पुछा "क्या हुआ. लेट क्यों गए"

ओम बोला "डार्लिंग तुम तो जानती हो की आज मेरा बर्थडे है और मैं और मेरे दोस्त केक एक ख़ास तरह से खाते हैं इसीलिए मैंने रुची को बुलाया था. पर जब वो नहीं आई तो एक रंडी को बुलाया पर वो भी धोखा दे गयी तो अब हम केक कैसे काटेंगे और कैसे खायेंगे."

"अरे रंडी की क्या जरूरत? तुम लोगों ने मुझे भी तो रंडी बना ही दिया है. और वैसे भी जो रुची कर सकती है वो मैं क्यों नहीं कर सकती? बोलो क्या करना है" दीदी ने हँसते हुए कहा.

"देख तेरी बहन अपने मुह से बोल रही है की वो रंडी है." लाला अपना लंड मसलते हुए बोला.

उधर ओम ने कहा "वैसे कोई बड़ी बात नहीं है बस बिना कपड़ो के तुम केक लेकर पार्टी में आओगी और तुम्हारे बदन पर रख कर केक कटेगा और फिर तुम्हारे ही बदन पर मल दिया जायेगा. उसके बाद जिसको भी केक खाना हो वो तुम्हारे बदन से चाट कर खा लेगा."

"पार्टी में? कहाँ है पार्टी?" दीदी ने पुछा.

"इसी फार्म हाउस में १ घंटे बाद. पर परेशान न हो हम लोगों को मिला कर सिर्फ ५-६ लोग ही होंगे और वो भी सब नंगे ही होंगे तो तुमको ज्यादा शर्म नहीं आयेगी." ओम ने जाल बिछाते हुए कहा.

 
"नहीं नहीं अगर सिर्फ तुम दोनों होते तो बात और थी पर और लोगो के सामने. न बाबा न." दीदी ने इंकार किया.

ओम ने कहा "मैं तो जानता था की तुम्हे प्रॉब्लम होगी. इसीलिए रुची को बोला था और वो तैयार भी थी पर उसकी मम्मी ने गड़बड़ कर दी. यार मयंक अब तो नाक कट जाएगी. एक काम करते है. पार्टी कैंसिल कर देते है और वापस चलते है. वरना थोड़ी ही देर में लाला वगेरह आ सकते है."

मयंक ने दीदी से कहा "क्या यार रश्मि, मान जाओ न. कितने दिन से प्लान किया था की रात भर मस्ती करेंगे पर तुम हो की सारा मूड ख़राब कर रही हो."

उधर दीदी ने लाला का नाम सुन कर सोचा की ओम ने बोला है की ५-६ लोग होंगे. अब ३ हम हो गए और एक लाला मतलब बाहर के १ या २ आदमी होंगे. दीदी के ऊपर वैसे भी वासना का नशा हावी था. उन्होंने कहा "तुम भी क्या याद करोगे की रश्मि ने क्या बर्थडे गिफ्ट दिया था. ठीक है ले आऊँगी केक नंगी होकर. अब बस जल्दी से चूत में लंड डाल दो. बहुत तड़प रही है लंड के लिए."

"वाह रश्मि वाह. थैंक्यू. चुदाई के लिए तो पूरी रात पड़ी है पहले तो तुम्हारे हां करने की ख़ुशी में शम्पैन खोली जाएगी. क्यों मयंक." ओम ने मयंक को इशारा किया. मयंक तो पहले ही तैयार था फ़ौरन बोतल और गिलास लेकर आ गया. ओम ने बोतल खोली और सारा झाग दीदी के बदन पर गिरा दिया और गिलास में डाल कर दीदी की तरफ बढ़ा दिया.

दीदी ने मना करते हुए कहा "ओम तुम तो जानते हो की मैं शराब नहीं पीती."

"अरे शैम्पेन शराब नहीं होती. पी कर तो देखो." ओम ने दीदी के मुह में गिलास लगा दिया और मयंक ने दीदी का सर पकड़ लिया. आधी शैम्पेन दीदी के मुह में गयी और आधी गिर पड़ी. ओम ने थोडा नाराज़गी दिखाते हुए कहा "क्या यार रश्मि, तुम मेरे लिए जरा सी शैम्पेन नहीं पी सकती."

ओम को नाराज़ होता देख दीदी बोली "अच्छा लाओ पी लेती हूँ."

ओम ने कहा "अब इस बोतल में बचा ही क्या है. ये तो मैं पी लूँगा जाओ मयंक अपने और रश्मि के लिए और शैम्पेन ले आओ."

लाला ने फ़ौरन चैनल बदला. ये किचेन का सीन था. स्लैब पर दो केक और काफी सारी शराब के बोतले रखी थी. एक कोने में कुछ खाने का सामान था. तभी मयंक अन्दर आया और उसने दो गिलासों में आधा गिलास स्कॉच डाली और बाकी आधा स्प्राइट और लेकर वापस बेडरूम में चला गया. लाला ने फिर से बेडरूम का चैनल लगा दिया. यहाँ ओम दीदी के बदन से खेल रहा था पर उन्हें चोद नहीं रहा था. मयंक ने वापस आ कर एक गिलास दीदी की तरफ बढ़ा दी पर ओम ने उसे अपने हाथ में ले लिया और एक एक घूँट अपने मुह में भरकर फिर दीदी को किस करके उनके मुह में डाल देता था. अब दीदी बिना किसी नखरे के उसे पी रही थी. थोड़ी ही देर में पूरा गिलास खाली हो गया.

 
लाला बोला "भाई कम से कम 4 पेग गटक गयी साली. अगर सच में नहीं पीती तो खड़ी भी न हो पायेगी."

ओम ने खाली गिलास मयंक को दे दिया और दूसरा उसके हाथ से ले लिया और रश्मि दीदी को दे दिया. दीदी नाक भौ सिकोड़ती उसे भी पी गयी. लाला उठ कर खड़ा होकर अपने कपडे उतारने लगा और बोला "जब रश्मि को केक लेने भेजे तो नंगा होकर नीचे आ जाना."

लाला के नीचे जाते ही मैंने अपने कपडे उतारे और नंगा हो गया. टीवी पर मैं देख ही रहा था की ओम और मयंक दीदी के बदन से खेलने में लगे थे. लाला भी अब बेडरूम में पहुच चूका था. दीदी ने लाला को देखा तो पहले तो पहचान नहीं पाई. फिर इन दोनों ने जब बताया की ये लाला है तो दीदी लडखडाती जबान में बोली "अरे कब हिक्क्क आये तुम्म्म "

मैं समझ गया की इन लोगों ने दीदी को इतनी क्यों पिलाई है ताकि वो मुझे न पहचान सकें पर मैं तो चाहता था की दीदी को होश में चोदू. दीदी को पता चले की वो अपने सगे भाई से चुदवा रही है.

उधर ओम ने दीदी से कहा "जाओ जानेमन अब केक ले आओ."

दीदी ने उठने की कोशिश की और लडखडा गयी. मयंक ने दीदी को सहारा दिया और बाहर ले गया. ओम ने लाला से पुछा "मनीष कहा है. स्कॉच व्हिस्की का नशा ज्यादा देर नहीं टिकता. थोड़ी देर में कम होने लगेगा और २-३ घंटे में होश में आ जाएगी. उससे पहले ही उसका काम करवाना है."

"ऊपर है. आ जाओ मनीष" लाला ने कैमरे में इशारा करते हुए कहा.

मैं फ़ौरन नीचे पंहुचा. लाला और ओम मुझे लेकर हाल में आ गए. दीदी सामने से अपने हाथों में केक लेकर आ रही थी. दीदी नशे में लडखडा रही थी. मयंक उनके पीछे पीछे आ रहा था की अगर वो गिरे तो मयंक उनको संभाल ले. पर दीदी जैसे तैसे डाइनिंग टेबल तक आ गयी और केक वहां पर रख दिया. दीदी ने मुझ मर कोई ध्यान नहीं दिया. अब मयंक ने दीदी को डाइनिंग टेबल पर लिटा दिया और केक ट्रे से उठा कर दीदी के पेट पर रख दिया. ठंडा केक पेट पर रखे जाने से दीदी के मुह से सिसकारी निकल गयी.

अब ओम आगे बढ़ा और प्लास्टिक की चाकू से दीदी के पेट पर रखे केक को काटने लगा. हम लोग ताली बजा कर हैप्पी बर्थडे गाने लगे. दीदी भी नशे में हैप्पी बर्थडे गा रही थी और ताली बजा रही थी. ओम ने पहला टुकड़ा दीदी को खिलाया और बाकी का केक दीदी की चुचियों, चूत, गाल, होठ और जांघो पर लगा दिया. और हम लोगों से कहा की हाँ तो भाई लोग अब आप लोग सेल्फ सर्विस कीजिये.

ओम के इतना कहते ही सारे लोग दीदी के बदन पर टूट पड़े. मयंक दीदी की चुन्चियों को चूस चूस कर केक खाने लगा तो लाला दीदी के गाल काटने लगा. ओम ने दीदी के होठ चूसने शुरू किये तो मैंने सोचा की मैं दीदी के हनी होल से शुरुवात करता हूँ. ओम ने दीदी की चूत के अन्दर तक केक भर दिया था तो मैंने अपनी जीभ अन्दर तक डाल कर केक खाना शुरू किया.
 
काफी देर से दीदी के जिस्म के साथ खिलवाड़ हो रहा था पर उनकी चुदाई नहीं हो रही थी इसीलिए वो काफी गरम हो रखी थी पर अब इस चौतरफा हमले ने दीदी की हालत ही ख़राब कर दी और दीदी झड़ने लगी. मैंने भी मौका न गवाते हुए ओम के बर्थडे केक के साथ आज पहली बार दीदी की चूत का अमृत चखा और पूरा चाट गया. अब फार्म हाउस का सीन बहुत हसींन हो गया था. मेरी जवान और खूबसूरत बहिन पूरी तरह से नंगी डाइनिंग टेबल पर पड़ी थी और हम चारों उनके बदन को चूस चाट रहे थे. जब हमने सारा केक खा लिया तो लाला ने दीदी को गोद में उठाया और अन्दर बाथरूम में ले जाकर शावर के नीचे खड़ा कर दिया. ५ मिनट में दीदी का बदन लाला ने पूरी तरह से साफ़ कर दिया. फिर उसने दीदी के गले में कुत्ते का पत्ता डाला और बोला "डार्लिंग अब तुम एक कुतिया की तरह बाहर चलो और सबके लंड चूसो."

दीदी की वासना की आग और भड़क गयी थी. दीदी फ़ौरन कुतिया बन कर बाहर आ गयी. इस पोज़ में मेरी बहिन की गोरी गोरी गांड बहुत चमक रही थी. ऊपर वाले ने उसे वैसे ही भरपूर गांड दी थी और उस पर लाला और ओम ने उसे और चौड़ा कर दिया था. दीदी की गांड को देखते ही मेरा लंड और तन गया था. लाला दीदी को चेन से खीचता हुआ सबसे पहले मेरे ही पास ले आया. दीदी ने थोड़ी देर मेरी शकल देखी जैसे पहचानने की कोशिश कर रही हो और फिर मेरे लंड को अपने मुह में भर कर चूसने लगी. मैं तो जन्नत में पहुच गया. अचानक दीदी ने मेरा लंड मुह से निकाला और लाला का लंड चूसने लगी. वो बारी बारी से हम दोनों के लंड चूस रही थी. ओम और मयंक अब दीदी के पास आकर दीदी की चूत और चुन्ची से खेल रहे थे. फिर दीदी ने हम दोनों के लंड छोड़े और ओम और मयंक के लंडो पर धावा बोल दिया.

मैं प्यार से देख रहा था की कैसे मेरी एकलौती बहिन रंडी की तरह हम चारो का लंड चूस रही है. आज मेरे सामने मेरी वही बहिन थी जिसने सुबह मेरे हाथ पर राखी बांधी थी पर मैं जानता

था कि इस रंडी को रक्षा की कोई ज़रूरत ही नहीं है. ये तो खुद ही मर्दो के लंड के लिये तड़पती है. मैं तो बस रश्मि दीदी के मस्त बदन को देख रहा था. कुछ ही महीनो में कैसा निखर गया था. पूरा जवानी से भरा हुआ. एकदम देसी चुचिया. मस्त मोटी गांड और टाइट चूत. दीदी काफी देर से ओम और मयंक का लंड चूस रही थी पर तभी लाला ने दीदी के गले का पट्टा खीचा और उनकी गांड पर ज़ोर ज़ोर से दो थप्पड़ लगाई तो रश्मि दीदी ऊऊइ मा धीरे मार कहकर चिल्लाई और मेरा लंड चूसने लगी. अब हम चारों बारी बारी से दीदी से अपने लंड चुसवा रहे थे. रश्मि दीदी अकेली थी और लंड थे चार तो वो चूसते चूसते थक जाती थी क्यूंकि जैसे ही एक लंड उसके मुहँ से निकलता तो दूसरा अपना लंड दीदी के मुहँ में घुसा देता. आखिर में दीदी लंड चूसते चूसते हाफ़ने लगी और ओम का लंड मुह से बाहर निकल गया तो लाला ने फिर से दीदी के मुह पर जोर से थप्पड़ जड़ दिया. दीदी का मुहँ लाल हो गया और वो जोर से चिल्लाई "मार भडवे मार अभी देखती हूँ तेरे अंदर कितनी ताक़त है आज तेरा सारा लंड निचोड़ लूँगी साले”

ये सुन कर लाला ने दीदी के मुह में ज़ोर से लंड घुसा दिया बाल पकड़कर घचा घच उनका मुहँ चोदने लगा. लाला का लंड बड़ा था तो वो दीदी के गले तक अपना लंड घुसा देता तो दीदी घबरा जाती. इसी तरह हम लोग काफी देर तक दीदी के मुह को चोदते रहे पर झड कोई नहीं रहा था क्योंकि थोड़ी थोड़ी देर में लंड बदल जाते थे. अब ओम ने मुझसे कहा "मनीष अब ज्यादा वक़्त नहीं है. अब इसको चोद लो. हमारे पास तो पूरी रात है पर पूरी तरह होश में आने से ले लो अपनी बहन की."

 
दीदी अभी भी डॉगी स्टाइल में लाला का लंड चूस रही थी. ओम ने दीदी की चेन अपने हाथ में ले ली और मुझे इशारा किया. मैं दीदी के पीछे गया और पूरी ताकत से अपना लंड दीदी की गोरी गोरी गांड में घुसा दिया था. दीदी थोडा चिहुंकी पर ओम ने चेन कस दी और लाला का लंड दीदी के गले में फंसा होने के कारण दीदी कुछ न कर पाई और मैं घचा घच दीदी की गोरी गोरी गांड को चोदने लगा. दीदी आहह की सिसकियां ले रही थी. मैं पूरा लंड रश्मि की गांड में घुसाता और पूरा बाहर निकालता फिर एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड मेरी प्यारी बहना की गांड में घुसा देता. इसी तरह से मैं दीदी की गांड चोद रहा था क्योंकि मैं जानता था की मैं जल्दी ही झड जाऊँगा इसीलिए मैंने लंड दीदी की गांड में डाला था ताकि जब दीदी की चूत चोदू तो ज्यादा देर तक चोदु. थोड़ी ही देर में मैं झड गया और किनारे जाकर बैठ गया. मेरे दीदी के गांड से लंड निकालते ही मयंक ने दीदी की गांड में लंड डाल दिया और हुमक हुमक कर दीदी की गांड चोदने लगा.

थोड़ी देर में जब मेरे लंड में फिर से तनाव आया तो मैं फिर से दीदी के पास जाकर अपना लंड चुसवाने लगा. तब ओम दीदी की गांड मार रहा था. जब मेरा लंड पूरी तरह से तन कर खड़ा हो गया तो मैंने ओम को इशारा किया की अब मैं दीदी को चोदने के लिए तैयार हूँ. तब ओम और लाला ने दीदी को उठाया और बेड रूम में ले जाकर लिटा दिया. जैसे ही मैं दीदी की टांगो के बीच बैठा दीदी ने मेरा चेहरा देखा. उनका नशा काफी कम हो गया था और वो मुझे देखकर उठने की कोशिश करने लगी तब मयंक ने दीदी का एक हाथ पकड़ा और ओम ने दूसरा. लाला ने दीदी की टाँगे पकड़ कर अलग अलग की और मुझे इशारा किया. मैंने लंड दीदी की चूत पर लगाया और घिसने लगा.

दीदी समझ गयी की अब क्या होने वाला है. वो बोली "नहीं मनीष ये मत कर्न्न्नन्न्न्नन्न आआआ ह्ह्ह्हह्ह." उनके बोलने से पहले ही मैंने लंड दीदी की चूत में उतार दिया. दीदी काफी कोशिश कर रही थी की मेरा लंड उनकी चूत से बाहर आ जाये पर लाला और ओम के आगे दीदी की एक न चली. मेरे लिए ये सपना सच होने जैसा अनुभव था. जिन रश्मि दीदी ने मुझे इतना तरसाया था आज वो मेरे नीचे लेती थी और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुए अन्दर बाहर हो रहा था. दीदी के मुह से नहीईईइ भैया नहीईईईइ की आवाजे आ रही थी. वैसे दीदी कितना भी विरोध करती पर सच तो ये था की वो सुबह से लंड के लिए तड़प रही थी. धीरे धीरे दीदी को भी मजा आने लगा था और वह भी आगे पीछे होकर मेरे लंड को पूरी तरह से चूत की गहराइयों में लेने लगी और अपने मुहँ से ऊऊऊऊऊ आआआआह की आवाजें निकालने लगी.

अब लाला ने मुझे इशारा किया की मैं दीदी को अपने ऊपर ले लूं क्योंकि सिर्फ उसी ने अभी तक दीदी की गांड नहीं मारी थी बाकी मैं ओम और मयंक दीदी की गांड में झड चुके थे. मैंने करवट बदली और दीदी को अपने ऊपर ले लिया. दीदी उछल उछल कर मेरा लंड अपनी चूत में लेने लगी. अब लाला ने दीदी के पीछे आकर उनकी गांड को चाटा और एक ही झटके में अपना लंड दीदी की गांड में उतार दिया. रश्मि दीदी सम्भल भी नहीं पाई थी और उसके मुहँ से एक बहुत जोर की चीख निकली और उसकी आँखों से आंसू निकल आये क्योंकि लाला का हलब्बी लंड की आदत अभी दीदी को हुई नहीं थी. पर इससे बेफिक्र लाला धीरे धीरे धक्के देने लगा और फिर उसने अपनी रफ़्तार बड़ा दी और जोर जोर से चोदने लगा. मैं भी नीचे से धक्के मारे जा रहा था. अब दीदी की चूत और गांड में हमारे लोड़े पिस्टन की तरह आगे पीछे हो रहे थे लगभग आधे घंटे की जंगली चुदाई के बाद हम दोनों दीदी की चूत और गांड में झड़ गये.
 
अब ओम और मयंक ने मोर्चा संभाला और दीदी के चूत और गांड में फिर से लंड पेल दिया. दीदी एकदम बिलबिला उठी लेकिन उनके तो आज सारे छेद डबल होने वाले थे. दोनों फुल स्पीड पर दीदी को आगे और पीछे से बजाने लगे. मैं और लाला अभी अभी दीदी को चोद कर झडे थे पर फिर से दीदी की चुदाई देख कर हमारे लंड खड़े हो गए. करीब ४० मिनट तक दीदी को ओम और मयंक ने चोदा और उनके हटते ही लाला ने दीदी की चूत में लंड पेल दिया और मैंने गांड में. रात के 9 बजते बजते हम चारों दीदी की 4 बार चुदाई कर चुके थे. और हर बार आगे पीछे से साथ साथ. अब दीदी ने साफ़ कह दिया की उनमे अब दम नहीं बचा. तो हम लोग ने डिनर ब्रेक ले लिया और बाहर चले गए. दीदी ने कहा की मुझमे उठने की हिम्मत नहीं बची है तो मेरा खाना यही ले आओ.

मैं किचेन में गया और दीदी के लिए एक प्लेट में खाना निकालने लगा. लाला बोला एक पेग भी बना कर ले जा रश्मि के लिए. थोड़ी एनर्जी आएगी. अभी तो पूरी रात बाकी है. मैंने दीदी के लिए एक मोटा पेग बनाया और खाना दारू दीदी को ले जाकर दिया. दीदी ने अब मुझसे कोई शर्म नहीं दिखाई और नंगी ही मेरे से खाना लेकर खाने लगी और साथ में दारु भी पीने लगी. मैं रूम से बाहर आने लगा तो दीदी बोली "तूने ये ठीक नहीं किया."

"अब जो हो गया वो हो गया. फिर तुम सबसे तो चुदवा लेती हो मेरे में क्या कांटे लगे है." मैंने चिढ कर कहा.

"तू मेरा भाई है. अब आज जो हुआ सो हुआ पर आगे से नहीं करने दूँगी. समझा." दीदी बोली.

"देखो दीदी मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ. और आज के बाद मैं रोज तुम्हे चोदुंगा. समझी" मैंने दीदी से कहा.

दीदी ने कुछ जवाब नहीं दिया और खाना खाने लगी और बोली ये ड्रिंक मेरे लिए एक और ले आ. मैंने मयंक से कहा की रश्मि एक ड्रिंक और मांग रही है तो मयंक ड्रिंक लेकर अंदर चला गया और मैं बाहर बैठ कर सबके साथ ड्रिंक करके खाना खाने लगा. खाना खाकर १ घंटे बाद जब हम अन्दर गए तो देखा की मयंक रश्मि दीदी को चोद रहा था. हम सब आराम से बैठ गए और उनकी चुदाई देखने लगे. थोड़ी देर में मयंक झड गया. उसके उठते ही लाला रश्मि पर चढ़ गया. अब मयंक खाना खाने बाहर चला गया और मैं और ओम दीदी की चुदाई देखने लगे. लाला के उठने के बाद ओम ने दीदी को ठोका और उसके बाद मैंने. दीदी कुछ नहीं बोली और आराम से चुदवा लिया. काफी देर तक ऐसे ही राउंड चलते रहे. एक एक करके हम सब दीदी को आगे पीछे से ठोक रहे थे. आखिर में रश्मि दीदी गिडगिडाने लगी की अब बस भी करो. क्या मेरी जान लोगे. हम सब भी काफी थक गए थे तो हम सबने एक एक पेग और लगाया और सो गए.

 
अगले दिन जब मेरी नींद खुली तो नज़ारा बहुत ही हसीं था. रश्मि दीदी नंगी बेड के बीच में सो रही थी और उनके दोनों तरफ ओम और लाला सो रहे थे. मैं और मयंक साइड में पड़े सोफों पर सो रहे थे. मैंने घडी की तरफ देखा सुबह के ६ बजे थे. सुबह की रौशनी में दीदी के नंगे बदन को देख कर मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा और मैंने जाकर दीदी की चूंची मुह में भर ली और चूसने लगा. दीदी की नींद खुल गयी और उन्होंने देखा की मैं उनकी चूंची चूस रहा हूँ. उन्होंने पुछा "क्या टाइम हुआ है मनीष." मैंने चुन्ची मुह से बाहर निकालते हुए कहा

"६ बजे है."

"अच्छा हट बाथरूम जाने दे." दीदी बोली. मैं हट गया और दीदी उठ कर लड़खड़ाते हुए बाथरूम चली गयी. दीदी की चाल देख कर साफ़ पता चल रहा था की रात भर दीदी के ऊपर तबियत से चढ़ाई हुई है. अब मैंने ओम को जगाया. उसने पुछा की रश्मि कहाँ है. मैंने कहा की बाथरूम में. ओम ने लाला और मयंक को भी जगा दिया.

मयंक ने कहा "सच में मजा आ गया ओम भाई. ऐसी चुदाई तो कभी की ही नहीं पर अभी दिल नहीं भरा. एक काम करते है दोपहर तक रुकते है और थोडा मजा और करते है."

तब तक रश्मि दीदी बाथरूम से निकल आई. उसने ब्रा और पैंटी पहन ली थी. वो बोली "देखो अब मेरे बस की बात नहीं है. तुम लोगो ने चोद चोद कर मेरी गांड और चूत सुजा दो है. चलने में भी बहुत दर्द हो रहा है तो अब मैं तो नहीं करवा पाऊंगी." ओम ने कहा "कोई बात नहीं. तुम कपडे पहनो. मनीष और लाला तुम दोनों भी तैयार हो जाओ. मैं तुम लोगो को वापस छोड़ आता हूँ."

मयंक बोला "क्या ओम भाई. थोडा मजा और करते."

ओम बोला "रश्मि को आराम की जरूरत है पर तुम चिंता न करो. मैं लौटते वक़्त रुची को लेता आऊंगा"

ये सुन कर लाला बोला "तो फिर मैं भी रुकता हूँ."

ओम ने नाराज़ होकर कहा "क्यों दुकान नहीं खोलनी क्या. चलो जल्दी तैयार हो. रुची के कॉलेज निकलने से पहले मुझे वहां पहुचना है." मुझे भी रुची से घर की चाभी लेनी थी तो हम तीनो फटाफट तैयार हुए और ७ बजे तक फार्म हाउस से निकल गए. रस्ते में लाला ने ओम से पुछा "तुम लोग कब तक फार्म हाउस पर रहोगे?"

ओम ने कहा "दोपहर तक वापस आ जायेंगे. क्यों?"

"वो सलमान आज दोपहर में वहां जायेगा." लाला ने जवाब दिया.

"कोई बात नहीं, हम तब तक वहां से निकल जायेंगे और नहीं भी निकले तो भी सलमानतो पहले भी रुची को चोद चूका है. आज फिर से चोद लेगा." ओम ने कहा. करीब एक घंटे में हम लोग वापस आ गए. हमको घर पर उतारते हुए ओम ने लाला से कहा की जाकर दुकान खोले और दीदी को दो गोलियां दी और कहा "नाश्ता करके ये दोनों खा लेना. एक तो गर्भ निरोधक है और दूसरी गोली खाकर शाम तक एक दम ठीक हो जाओगी. सारा दर्द और सूजन गायब हो जाएगी. ये गोली रंडिया खाती है जब ओवरटाइम करती है."

दीदी ने मुस्कुरा कर दोनों गोलिया ले ली और घर के अन्दर जाकर मुझसे डोर खोलने को कहा. मैं रुची के घर पहुच गया घर की ताली लेने. किस्मत अच्छी थी की आंटी नहा रही थी तो दरवाजा रुची ने ही खोला. मैंने रुची से चाभी ले ली और उसे बता दिया की ओम उसे फार्म हाउस ले जाने आया है. रुची ने कहा की ओम को बोलो थोडा वेट करे. वो तैयार होकर आती है. मैं वापस आया और ओम को ये बात बता कर घर का लॉक खोलकर दीदी के साथ अन्दर आ गया.

दीदी नहाने चली गयी और मैं वापस बाहर आ कर ओम से बातें करने लगा. थोड़ी देर बाद रुची तैयार होकर आ गयी और ओम उसको लेकर वापस चला गया. मैं वापस घर में आया. तब तक दीदी नहा कर निकल आई थी और सिर्फ टॉवल लपेट कर बैठी थी. मुझे देख कर बोली "सुन मनीष मुझे दो ब्रेड सेक कर दे दे. दर्द हो रहा है. दवाई खा कर थोडा सो जाती हूँ."

मैंने दीदी को ब्रेड दी और कहा "तुम खाकर दवा खा लो.. मैं भी नहा कर कुछ खा लेता हूँ फिर कहोगी तो तुम्हारी सिकाई कर दूंगा. तुम्हे आराम मिलेगा." और मैं नहाने बाथरूम में चला गया.

 
जब मैं नहा कर निकला तो देखा की दीदी वैसे हो टॉवल लपेटे लपेटे सो गयी है. मैंने भी नाश्ता करके थोडा आराम करना ठीक समझा. करीब ३ घंटे बाद मेरी नींद खुली तो मैंने देखा दीदी अभी भी सो रही थी पर अब उनका टॉवल खुल गया था और गुलाबी रंग की ब्रा पैंटी में वो बहुत खूबसूरत लग रही थी. मैंने फोन करके खाना आर्डर किया और दीदी की चूत की सिकाई करने के लिए थोडा पानी गुनगुना किया और जाकर दीदी को जगाया. "दीदी उठो. दोपहर होने वाली है. लाओ तुम्हारी सिकाई कर दूं."

"उफ्फ सोने दे न. रात भर की जागी हूँ. तू ऐसे ही सिकाई कर दे." रश्मि दीदी कुनमुना कर बोली.

मैंने दीदी की पैंटी उतारने के लिए नीचे खीची तो दीदी ने अपने चुतड उठा कर मेरा साथ दिया. मुझे अच्छा लगा की दीदी की मेरे सामने नंगा होने की हिचक ख़तम हो गयी है. अब दीदी को लग रहा था की भाई ने चोद ही लिया तो क्या नखरा करना. वो समझ गयी थी की भाई के लंड और पराये लंड में कोई फरक नहीं होता है. मजा दोनों से बराबर आता है बल्कि भाई से थोडा ज्यादा ही आता है. पैंटी उतार कर मैंने देखा की दीदी की चूत जो सुबह काफी सूजी हुई थी अब काफी ठीक लग रही थी. मैंने फिर भी चूत की सिकाई शुरू कर दी. गरम गरम एहसास पाकर दीदी के मुह सी सिसकारी निकल गयी. दीदी बोली "आह बहुत अच्छा लग रहा है भैया. थोडा यहाँ कर फिर पीछे भी कर देना."

 
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