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"क्यों क्या अभी भी बहुत दर्द हो रहा है." मैने दीदी से पुछा.
"दर्द तो बिलकुल गायब हो गया है. कमाल की दवा दी ओम ने बस थकन है लेकिन तू सिकाई कर दे बहुत आराम मिल रहा है." दीदी ने कहा. थोड़ी देर मैंने दीदी की चूत की सिकाई की फिर दीदी पलट कर लेट गयी तो मैंने उनकी गांड की भी सिकाई कर दी. गांड का हाल चूत के मुकाबले थोडा बुरा था. सूजन कम तो हुई थी लेकिन ख़तम नहीं हुई थी और उस पर दीदी की गांड थोड़ी छिलने के कारण काफी लाल भी हो गयी थी. सिकाई करके मैंने दीदी की गांड में क्रीम भी लगा दी. क्रीम लगते लगाते मेरी ऊँगली दीदी की गांड में घुस गयी तो दीदी चिहुक उठी. "अरे क्या कर रहा है. अभी मन नहीं भरा तेरा."
"अरे वो गलती से हो गया. दवा लगाते लगाते पर दीदी मन तो तुमसे जिंदगी भर नहीं भरेगा." मैंने दीदी को पैंटी पहनाते हुए कहा. तभी घर की घंटी बजी. मैंने घडी में देखा तो १.३० बजे थे. दीदी ने पुछा तो मैंने कहा "शायद खाना आ गया होगा. मैंने 2 बजे मंगाया था शायद जल्दी भेज दिया हो."
मैंने दरवाजा खोला तो सामने लाला खड़ा था. उसने पुछा "अब रश्मि कैसी है."
"ठीक है, क्यों क्या हुआ." मैंने पुछा. तभी लाला ने किसी को इशारा किया तो मैंने देखा की एक ७ फुट का हट्टा कट्टा अफ्रीकन लड़का मेरे घर की तरफ आ गया. लाला उसे लेकर जल्दी से हमारे घर के अन्दर घुस गया मैंने दरवाजा बंद करते हुए लाला की तरफ सवालिया नजरो से देखा.
"अरे येही है रुबेन, मेरा दोस्त. कल बात हुई थी न तुमसे." लाला ने कहा.
"बात? क्या बात हुई थी यार. मजाक कर रहे थे हम दोनों और तुमने इसको बुला भी लिया. तुमको पता है न रश्मि दीदी की क्या हालत है." मैंने गुस्सा होते हुए कहा.
अब रुबेन मेरी बात सुन कर बोला "क्या लाला तुमने मुझको मजाक में इतनी दूर बुला लिया."
"तुमको हिंदी आती है." मैंने रुबेन से पुछा.
"मैं १० सालों से इंडिया में हूँ. पढाई भी यही की है." रुबेन ने जवाब दिया.
"लाला को कुछ ग़लतफहमी हो गयी इसीलिए तुमको बुला लिया. सॉरी." मैंने रुबेन से कहा.
"सॉरी? लाला तुमको पता है न की मैं कितना इम्पोर्टेन्ट काम छोड़ कर आया हूँ वो भी सिर्फ इसलिए की तुमने कहा था की माल बहुत जबरदस्त है. अब ये सब क्या हो रहा है." रुबेन लाला से बोला.
"यार नाराज़ न हो. अभी तुम अपनी आँखों से देख लेना की माल कितना कड़क है. यार मनीष अब तुम ये सब क्या बोल रहे हो. कल तुम्ही ने कहा था की दीदी को एक फुटिया लंड से चुदते देखना है." लाला बोला.
"भाई वो तो ऐसे ही बात हो रही थी. मुझे क्या पता था की तुम सच में इसको बुला लोगे." मैंने कहा.
"मतलब तुम्हे नहीं देखना की रश्मि कैसे इसका मोटा लौड़ा अपनी सकरी चूत में लेती है." लाला ने पुछा.
"देखना तो है पर आज नहीं. अभी भी दीदी की गांड और चूत में सूजन है. दवा की वजह से दर्द ख़तम हो गया है पर अभी वो सेक्स नहीं कर पायेगी. तुम रुबेन को बाद में कभी बुला लेना" मैंने कहा.
"बाद में कब? यार आज मौका बहुत अच्छा है. देख तेरा घर भी खाली है. कल रश्मि के सारे छेद हमने बड़े कर ही दिए हैं. अब वो आराम से ले लेगी रुबेन का और कुछ दिक्कत हुई तो ओम से एक गोली और लेकर खिला देंगे." लाला ने मुझे समझाते हुए कहा.
"यार लड़कियां लडको से ज्यादा गरम होती है. तुमको लगता है की तुम्हारी बहन का मन भर गया है लेकिन देखना मेरा लंड देखते ही फ़ौरन तैयार हो जाएगी." रुबेन ने मुझे समझाया.
"यार मुझे नहीं पता. रश्मि अपने कमरे में है, तुम खुद बात करके देख लो." मैंने लाला से कहा. तभी फिर से डोर बेल बजी तो मैं दरवाजा खोलने गया और ये दोनों दीदी के कमरे में घुस गए.
"दर्द तो बिलकुल गायब हो गया है. कमाल की दवा दी ओम ने बस थकन है लेकिन तू सिकाई कर दे बहुत आराम मिल रहा है." दीदी ने कहा. थोड़ी देर मैंने दीदी की चूत की सिकाई की फिर दीदी पलट कर लेट गयी तो मैंने उनकी गांड की भी सिकाई कर दी. गांड का हाल चूत के मुकाबले थोडा बुरा था. सूजन कम तो हुई थी लेकिन ख़तम नहीं हुई थी और उस पर दीदी की गांड थोड़ी छिलने के कारण काफी लाल भी हो गयी थी. सिकाई करके मैंने दीदी की गांड में क्रीम भी लगा दी. क्रीम लगते लगाते मेरी ऊँगली दीदी की गांड में घुस गयी तो दीदी चिहुक उठी. "अरे क्या कर रहा है. अभी मन नहीं भरा तेरा."
"अरे वो गलती से हो गया. दवा लगाते लगाते पर दीदी मन तो तुमसे जिंदगी भर नहीं भरेगा." मैंने दीदी को पैंटी पहनाते हुए कहा. तभी घर की घंटी बजी. मैंने घडी में देखा तो १.३० बजे थे. दीदी ने पुछा तो मैंने कहा "शायद खाना आ गया होगा. मैंने 2 बजे मंगाया था शायद जल्दी भेज दिया हो."
मैंने दरवाजा खोला तो सामने लाला खड़ा था. उसने पुछा "अब रश्मि कैसी है."
"ठीक है, क्यों क्या हुआ." मैंने पुछा. तभी लाला ने किसी को इशारा किया तो मैंने देखा की एक ७ फुट का हट्टा कट्टा अफ्रीकन लड़का मेरे घर की तरफ आ गया. लाला उसे लेकर जल्दी से हमारे घर के अन्दर घुस गया मैंने दरवाजा बंद करते हुए लाला की तरफ सवालिया नजरो से देखा.
"अरे येही है रुबेन, मेरा दोस्त. कल बात हुई थी न तुमसे." लाला ने कहा.
"बात? क्या बात हुई थी यार. मजाक कर रहे थे हम दोनों और तुमने इसको बुला भी लिया. तुमको पता है न रश्मि दीदी की क्या हालत है." मैंने गुस्सा होते हुए कहा.
अब रुबेन मेरी बात सुन कर बोला "क्या लाला तुमने मुझको मजाक में इतनी दूर बुला लिया."
"तुमको हिंदी आती है." मैंने रुबेन से पुछा.
"मैं १० सालों से इंडिया में हूँ. पढाई भी यही की है." रुबेन ने जवाब दिया.
"लाला को कुछ ग़लतफहमी हो गयी इसीलिए तुमको बुला लिया. सॉरी." मैंने रुबेन से कहा.
"सॉरी? लाला तुमको पता है न की मैं कितना इम्पोर्टेन्ट काम छोड़ कर आया हूँ वो भी सिर्फ इसलिए की तुमने कहा था की माल बहुत जबरदस्त है. अब ये सब क्या हो रहा है." रुबेन लाला से बोला.
"यार नाराज़ न हो. अभी तुम अपनी आँखों से देख लेना की माल कितना कड़क है. यार मनीष अब तुम ये सब क्या बोल रहे हो. कल तुम्ही ने कहा था की दीदी को एक फुटिया लंड से चुदते देखना है." लाला बोला.
"भाई वो तो ऐसे ही बात हो रही थी. मुझे क्या पता था की तुम सच में इसको बुला लोगे." मैंने कहा.
"मतलब तुम्हे नहीं देखना की रश्मि कैसे इसका मोटा लौड़ा अपनी सकरी चूत में लेती है." लाला ने पुछा.
"देखना तो है पर आज नहीं. अभी भी दीदी की गांड और चूत में सूजन है. दवा की वजह से दर्द ख़तम हो गया है पर अभी वो सेक्स नहीं कर पायेगी. तुम रुबेन को बाद में कभी बुला लेना" मैंने कहा.
"बाद में कब? यार आज मौका बहुत अच्छा है. देख तेरा घर भी खाली है. कल रश्मि के सारे छेद हमने बड़े कर ही दिए हैं. अब वो आराम से ले लेगी रुबेन का और कुछ दिक्कत हुई तो ओम से एक गोली और लेकर खिला देंगे." लाला ने मुझे समझाते हुए कहा.
"यार लड़कियां लडको से ज्यादा गरम होती है. तुमको लगता है की तुम्हारी बहन का मन भर गया है लेकिन देखना मेरा लंड देखते ही फ़ौरन तैयार हो जाएगी." रुबेन ने मुझे समझाया.
"यार मुझे नहीं पता. रश्मि अपने कमरे में है, तुम खुद बात करके देख लो." मैंने लाला से कहा. तभी फिर से डोर बेल बजी तो मैं दरवाजा खोलने गया और ये दोनों दीदी के कमरे में घुस गए.