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नए पड़ोसी complete

"आज पूरी कर लेते है. पर पहले वादा करो की बात अगर बुरी भी लगे तो मुझसे ही कहोगे किसी और से नहीं कहोगे." राजेश ने मेरी तरफ देखा. मैंने हाँ में सर हिलाया तो वो बोला "देखो सबसे पहले मैंने दिव्या को पूरी छूट दे रखी है की वो जिसके साथ उठे बैठे सोये मुझे कोई ऐतराज नहीं होता और ऐसे ही उसने मुझे छूट दे दी, इससे एक दुसरे के ऊपर हमारा भरोसा बहुत बढ़ गया क्योंकि हम जो भी करते एक दुसरे को बताते जरूर है. इसके अलावा भी कई चीजे हमने की जैसे रोलप्ले, डर्टी सेक्स वगेरह पर सबसे कामयाब जो प्रयोग रहा वो था वाइफ स्वैपिंग का." राजेश ने कहा.

मुझे भरोसा नहीं हुआ जो राजेश ने कहा. मैंने कहा "ये आप क्या कह रहे है."

राजेश बोला "तुमने तो देखा ही है की मेरे घर तमाम लोग आते रहते है पर वो मेरे कोई दोस्त या रिश्तेदार नहीं है. वो यहाँ आते थे अपनी बीवी को दिव्या के साथ बदलने. अब देखो अभी तुम ऐसे बिहेव कर रहे थे की दिव्या के हाँ करते ही तुम उसके ऊपर चड़ जाते पर क्या तुम रेणुका को भी यही छूट देने को तैयार हो. अगर हाँ तो बोलो हम बात आगे बढ़ाते है."

मैं तो वैसे ही शॉक हो गया था की राजेश मुझसे वाइफ स्वैपिंग की बात कर रहा था. मैं क्या जवाब देता. अगर यही बात राजेश ने मेरी शादी से पहले कही होती तो मैं फ़ौरन हाँ कर देता क्योंकि रश्मि दीदी पर मुझे भरोसा था की वो मेरी बात नहीं टालती और रश्मि दीदी के साथ दिव्या को एक्सचेंज कर लेता पर रेणुका मुझसे ही ठीक से सेक्स नहीं करती किसी दुसरे के साथ का तो सवाल ही नहीं था.

"आराम से सोच लो. शाम तक बता देना." राजेश ने गंभीर आवाज में कहा और मैं वहां से उठ कर वापस अपने घर आ गया.

 
घर आकर मैं काफी देर सोचता रहा की क्या किया जाए. एक तरफ तो काफी दिनों से मेरा दिव्या को चोदने का जो सपना था वो पूरा होता दिख रहा था पर दिव्या के पति ने जो शर्त रखी थी वो नामुमकिन थी. एक तो शराब का नशा और उस पर वासना का नशा मैं कुछ भी तय नहीं कर पा रहा था तो मैंने रश्मि दीदी से बात करने की सोची और सोचा की उन्हें यहाँ बुला लेता हूँ. यही सोच कर मैं उन्हें फ़ोन लगाने लगा. काफी बार कोशिश की पर हर बार उनका फ़ोन बिजी आ रहा था. मैं दीदी को फ़ोन लगाने की कोशिश करते करते कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला.

जब मेरी नींद खुली तो लगा की कहीं कोई शोर हो रहा है. मैंने थोडा ध्यान दिया तो पाया की कोई मेरे घर की बेल बजा रहा है. मैंने घडी की तरफ देखा. रात का साढ़े नौ बजा था. मैं काफी देर सो गया. मैंने दरवाजा खोला तो सामने राजेश खड़ा था. वो मुझसे बोला "क्या हुआ यार, तुम्हारी भाभी परेशान है की तुम खाना खाने नहीं आये."

"वो दरअसल आँख लग गयी थी इसीलिए नहीं आ पाया. अभी अभी जगा हूँ. आइये अन्दर आइये." मैंने राजेश को बुलाते हुए कहा.

वो अन्दर आ गया और सोफे पर बैठ गया और बोला "चलो जल्दी से हाथ मुह धो लो और घर चलो. मैंने भी अभी खाना नहीं खाया."

मैं बाथरूम में घुसा और सोचने लगा की अजीब आदमी है. दोपहर को बीविया बदलने की बात कर रहा था और अभी ऐसे बोल रहा है जैसे की कुछ हुआ ही न हो. मैं हाथ मुह धोकर बाहर आया. मुझे देख कर राजेश चलने के लिए उठ कर खड़ा हो गया और बोला "चलो दिव्या वेट कर रही होगी और कुछ सोचा रेणुका के बारे में."

"दो मिनट बैठिये, बात करके ही चलते है." मैंने कहा. मैं नहीं चाहता था की दिव्या के सामने बात हो.

"हां हां बोलो." राजेश वापस बैठ गया.

"देखिये राजेश भैया, ये सच है की मैं आपकी पत्नी को चोदना चाहता हूँ और आप चाहे तो उसके बदले मैं रश्मि दीदी को आपसे चुदवा सकता हूँ पर मेरी बीवी को भूल जाइये क्योंकी वो मेरी बात नहीं मानेगी और जबरदस्ती मैं करूंगा नहीं. अब आप से क्या छुपाना मेरी शादी को इतने दिन हो गए मैंने उसे रौशनी में पूरा नंगा नहीं देखा, उसने कभी मेरा लौंडा नहीं चूसा मैंने कभी उसकी गांड नहीं मारी. वो सेक्स को एन्जॉय नहीं करती बल्कि कतराती है. अब आप ही बताओ इतनी दकियानूसी बीवी को आप स्वैपिंग के लिए मांग रहे हो." मैंने साफ़ साफ़ कह दिया.

"रश्मि को चुदवा सकते हो इसका मतलब तुम भी रश्मि को चोदते हो न." राजेश ने पुछा.

"उसकी शादी से पहले चोदता था पर अभी भी आप कहो तो कुछ दिन के लिए उसे यहाँ बुला लूं वो मेरा कहना नहीं टालेगी." मैंने कहा.

 
"मैंने कई बार दिव्या को बोला की मुझे लगता है की मनीष रश्मि को चोदता है पर वो मानती नहीं थी अब तुम अपने मुह से कहोगे तो उसे भरोसा होगा. वैसे तो तुम्हारी बहन भी बहुत मस्त माल है लेकिन अभी तो रेणुका की बात करो." राजेश ने मेरे प्लान पर पानी फेर दिया.

"फिर तो ये नहीं होगा क्योंकि रेणुका कभी नहीं मानेगी." मैंने हथियार डाल दिए.

"रेणुका को तैयार करना तुम मेरे ऊपर छोड़ दो बस तुम हाँ करो. बस तुम हाँ कर दो. और अगर वो नहीं भी मानी तो फिर रश्मि तो है ही." राजेश ने मुझे आप्शन दिए तो मैं फ़ौरन राजी हो गया. मैंने कहा "अगर ऐसी बात है तो मेरी तरफ से हाँ ही समझिये पर रेणुका के साथ कोई जबरदस्ती..."

"कैसी बात करते हो यार. मैं उसके साथ कोई जबरदस्ती नहीं करूंगा लेकिन एक बात का ख्याल रखना की अब तुमने हाँ कहा है तो आगे से मेरी हर स्कीम में तुम्हे मेरा साथ देना होगा." राजेश ने मुझे भरोसा दिलाया.

"तो फिर बात पक्की पर पहले थोडा अपनी स्कीम के बारे में बताइए." मैंने राजेश से पुछा.

"मुझे तुम्हे यही उम्मीद थी. चलो मैं जाता हूँ और दिव्या को ही खाना लेकर तुम्हारे पास भेज देता हूँ. उससे कह दूंगा की तुम्हारे पास रुक कर तुम्हे प्लान के बारे में बता देगी." राजेश ये कह कर चला गया और मैं बेसब्री से दिव्या का इंतज़ार करने लगा. करीब २० मिनट बाद दिव्या खाना लेकर आ गयी. मैंने खाना टेबल पर रखा और दिव्या को बाँहों में भर कर चूमने लगा पर दिव्या ने मुझे रोका और बोली "पहले खाना खा लो इसके लिए तो पूरी रात पड़ी है."

"ठीक है मैं जब तक खाता हूँ तब तक तुम मुझे राजेश भैया का प्लान बताओ." ये कह कर मैं खाना खाने लगा और दिव्या की बात सुनने लगा. दिव्या कहने लगी "देखो तुम रेणुका को अगले हफ्ते लेने जा रहे थे न अब तुम नहीं जाओगे और कल रेणुका को फ़ोन करके बता देना की तुम बैंक की ट्रेनिंग के लिए १५ दिन के लिए बाहर जा रहे हो और उसे लेने नहीं आ पाओगे पर राजेश किसी जरूरी काम से अपनी कार से दिल्ली जा रहे है और तुम्हारे कहने पर वो वापसी में रेणुका को लेते आएंगे."

"पर रेणुका कहेगी की जब मैं यहाँ नहीं हूँ तो वो यहाँ आकर क्या करेगी." मैंने खाते हुए पुछा.

"तुम उससे कह देना की आजकल यहाँ चोरिया बहुत हो रही है तो इतने दिन घर खाली छोड़ना ठीक नहीं है." दिव्या ने मुझे समझाया.

"हाँ ये ठीक रहेगा रहेगा पर एक बात और. मेरी १५ दिन की ट्रेनिग तो है नहीं तो १५ दिन मैं कहा रहूँगा." मैंने पुछा.

"देखो मैंने अगले हफ्ते स्कूल से करीब १५ दिनों की छुट्टी ली है गोवा जाने के लिए पर अब राजेश को जरूरी काम से दिल्ली जाना पड रहा है तो उसका टिकट वेस्ट हो जायेगा तो क्यों न हम तुम गोवा चले १५ दिनों के लिए." दिव्या ने कहा तो मेरा दिल उछल पड़ा. दिव्या के साथ गोवा में १५ दिनों का हनीमून. इसके लिए तो मैं कुछ भी कर सकता था. मैं फ़ौरन राजी हो गया और बोला "कल क्यों मैं अभी रेणुका को फ़ोन लगा देता हूँ." मैंने रेणुका को फ़ोन पर सब बात बता दी. पहले तो वो यही बोली की जब आप ट्रेनिंग से लौट आना तब आकर मुझे ले जाना पर मेरे समझाने पर राजेश के साथ लौटने पर मान गयी. फ़ोन रखकर मैंने अब दिव्या पर ध्यान दिया. जब मैं फ़ोन पर बात कर रहा था तबी तक दिव्या ने अपनी साडी उतार दी थी और अब वो ब्लाउज पेटीकोट में मेरे सामने खडी थी. मुझे विश्वास नहीं हो रहा था की ये सब इतना जल्दी जल्दी हो रहा था. दिव्या की मोटी चून्चिया ब्लाउज फाड़ के बाहर निकलना चाहती थी. मैंने फ़ौरन आगे बढ़ कर उसके ब्लोसे के सारे हुक खोल दिए और ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाने लगा.
 
उसके बूब्स बहुत सॉफ्ट थे. वो आँखे बंद कर के मजे ले रही थी. अब मैंने उसकी दोनों चूचियाँ कसकर पकड़ ली और उनके होठो पर अपने होठ रख कर चूसने लगा. दिव्या भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. मैं उसे किस कर रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. मैं दिव्या को गले पर किस करने लगा तो वो मदहोश हो जोर से सिसकारियाँ लेने लगी.

मैंने उसकी ब्रा को उतार कर फेंक दिया और मैंने अपने कपडे भी उतार दिए. मैंने दिव्या को बेड पर लिटाया और खुद उसके ऊपर लेट गया. मैंने उसको उल्टा किया और कमर पर किस करने लगा. ऐसा करते वक्त मेरा लण्ड उसकी गांड के बीच में रगड़ रहा था. उसको भी बड़ा मजा आ रहा था. थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद वो बहुत कामुक हो गयी और सिसकारियाँ लेकर बेडशीट नोचने लगी. फिर मैंने उसे सीधा किया और उनके बूब्स को मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा. वो तड़पने लगी और अहहहह अहहहहह आहहहहहह करने लगी.

उनकी दोनों चूचियाँ चूसने के बाद मैंने उसकी पैंटी उतार कर उसे एकदम नंगा कर दिया फिर मैंने उनको सिर से लेकर पाँव तक चूमा. मेरे हर किस पर वो मचल रही थी. फिर मैं उनकी जांघों पर किस करने लगा और धीरे धीरे उसकी बिना बालों वाली चूत की तरफ बढ़ा. ये वही चूत थी जिसकी तमन्ना बहुत दिनों से मेरे दिल में थी और बहुत दिनों से मैंने कोई चूत चूसी भी नही थी तो मैं पागलो की तरह दिव्या की चिकनी चूत चूसने लगा. दिव्या भी मस्ती से अपने हाथ पैर पटकने लगी. फिर अचानक से मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाल दी तो उसके मुंह से अहहहह निकल गयी. कई लंड खाने के बाद भी दिव्या की चूत कसी हुई थी. मैं धीरे धीरे उसकी चूत में अपनी ऊँगली को अंदर बाहर करने लगा था. वो जोर जोर से अहहआा स्सस्सस्सस्स अहहहहहह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् कर रही थी. थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद दिव्या ने मेरे अंडरवियर में हाथ डाल दिया और मेरे लण्ड को सहलाते हुए बोली "अह्ह्ह्ह मनीष अब और मत तड़पाओ…"

लेकिन मुझे तो अभी उसकी चूत का और मजा लेना था तो मैं ६९ पोजीशन में आ गया और अपना मुंह फिर से उसकी टांगो के बीच में लगा दिया. मेरा लण्ड अब उसके मुंह के सामने थे. मैंने उसकी कमर के नीचे एक पिलो लगा दिया और चूत को फिर से चाटना शुरू कर दिया. दिव्या बहुत ही उत्तेजित हो उठी और मेरे लण्ड को पकड़ हिलाने लगी. फिर उसने भी मेरा लण्ड अपने मुंह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी. करीब १० मिनट के बाद हम दोनों झड़ गए. वो मेरा सारा पानी पी गई और उस ने मेरे लण्ड को चाटकर फिर से कड़क कर दिया.

अब उसकी चूत में लण्ड डालने की बारी थी. मैंने उसकी गांड के नीचे एक और तकिया लगा दिया और उसकी दोनों टांगो को फैला दिया. फिर मैं अपने हथियार को ले कर तैयार हो गया. फिर मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत पर लगाया और रगड़ना शुरू कर दिया. दिव्या एकदम से तड़प उठी और अपनी गांड को उठा कर मेरे लण्ड को अंदर लेने की कोशिश करने लगी. मैंने धीरे से अपने लण्ड को उसकी चूत के अंदर कर दिया. चूत गीली होने की वजह से लण्ड पूरा एक ही बार में अंदर चला गया. दिव्या और मेरे मुह से एक साथ संतुष्टि की सिसकारी निकल गयी. लण्ड के अंदर जाते ही वो मुझ से लिपट गयी और मुझे किस करने लगी.

मैंने भी उसको कसकर जकड लिया और अपनी बाहो में ले कर उसी पोजीशन में धक्का लगाने लगा. दिव्या को मजा आ रहा था और वो अहहहहह अहहहहह अहहहह ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ करके मजे ले रही थी. पुरे रूम में फट फट की आवाज़ गूंज रही थी. दिव्या भी चुतर उछाल उछाल कर मेरे लण्ड को अंदर ले रही थी. उसको चोदते हुए मैं उसकी गदराई हुई चुन्चियो को दबा रहा था.

कुछ देर में दिव्या का पानी निकल गया तो मैंने भी अपने धक्कों की स्पीड बड़ा दी और थोड़ी देर बाद मैंने अपना सारा माल दिव्या की चूत में डाल दिया और फिर उसके ऊपर ही लेट गया.

 
मैंने दिव्या से पुछा "कैसा लगा मेरी जान." वो मुस्कुरा कर बोली "मजा आ गया. तुम राजेश से इक्कीस ही हो." मुझे जान कर ख़ुशी हुई की दिव्या को मेरी चुदाई से संतुष्टि हुई थी फिर हम बाथरूम चले गए. कुछ देर में फिर से मेरा लण्ड खड़ा हो गया. अब दिव्या घुटनो के बल बैठ गई और मेरे लण्ड को मुंह में ले कर चूसने लगी. क्या बताऊ दोस्तों ऐसा लग रहा था जैसे कि स्वर्ग में पहुंच गया हु.

फिर मैंने उसको आगे की तरफ झुकाया और पीछे खड़ा हो गया. मैंने अपने लण्ड को पीछे की तरफ से उनकी चूत में लगा दिया और उनकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया. वो भी अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी और लण्ड को अंदर लेने की कोशिश कर रही थी. मैंने पूरा लण्ड दिव्या की चूत में डाल दिया और उसकी कमर को पकड़ कर धक्के लगाने लगा.

 
वो फिर से अहहह अहहहह अहहह कर के अपनी कमर को जोर से हिला रही थी. उसके मुंह से ये आवाजे और कामुक लग रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड उसकी छुट से निकाला और गांड में डाल दिया. लंड दिव्या की चूत के रस से भीगा हुआ था इसीलिए आराम से गांड में घुस गया पर दिव्या को हल्का सा दर्द हुआ. "वो बोली यार कम से कम गांड में क्रीम तो लगा देते."
 
मैंने कहा अब तो घुस ही गया और फिर से धक्के मारने लगा. कुछ देर दिव्या की गांड मारने के बाद मैंने फिर से लंड उसकी चूत में डाल दिया. कुछ देर बाद हम दोनों एकसाथ झड़ गए. थोड़ी देर आराम करने के बाद दिव्या अपने कपडे पहनने लगी तो मैंने उसे रोका "क्या हुआ जान, क्या कर रही हो."

"काफी रात हो गयी है. कल सुबह मुझे स्कूल भी जाना है." दिव्या कपडे पहनते हुए बोली.

"पर राजेश भैया तो कह गए थे की तुम पूरी रात रुकोगी." मैंने उसका हाथ पकड़ा तो हसने लगी "बोली रुक तो जाऊंगी पर सोने देना वरना कल दिक्कत होगी."

मैंने कहा "ठीक है पर सोना बिना कपड़ो के ही". दिव्या ने वापस कपडे उतारे और मेरे साथ बेड में घुस गयी. हम दोनों चिपक कर सो गए. उस रात और कुछ नहीं हुआ. अगले दिन सुबह ६ बजे दिव्या ने मुझे जगाया और बोली "मैं जा रही हूँ. तुम आज बैंक से छुट्टी ले लेना."

मैंने उसी दिन बैंक में छुट्टी के लिए बात कर ली और बुधवार की सुबह मैं दिव्या और राजेश दिल्ली के लिए निकल पड़े. शाम को हम तीनो दिल्ली में थे. राजेश ने हम दोनों को एअरपोर्ट ड्राप किया. उसने पहले से ही हम दोनों के टिकट करवा दिये थे और गोवा में हम लोगो के लिए होटल भी बुक करवा दिया था. राजेश ने मुझसे कहा "देखो तुम दोनों का लौटने का टिकट वाया मुंबई है. तुम दोनों को २-३ दिन मुंबई में रुकना पड़ेगा. वहां भी होटल बुक है. दिव्या के पास सब डिटेल्स है. अगर सब ठीक रहा तो मैं तुम दोनों को उसी होटल में मिलूंगा. अब तुम लोग जाओ. मैं रात किसी होटल में काट कर सुबह रेणुका के पास जाऊँगा." ये कह कर राजेश चला गया और मैं और दिव्या फ्लाइट पकड़ कर गोवा चले गए.

 
फ्लाइट में मुझे रेणुका की थोड़ी चिंता भी हो रही थी की राजेश और रेणुका के बीच क्या होगा. कहीं रेणुका बाद में कोई बवाल न खड़ा कर दे पर दिव्या ने मुझे भरोसा दिलाया की राजेश दूसरो की बीवियां फ़साने में बहुत एक्सपर्ट है और जब तक रेणुका उसे ग्रीन सिग्नल नहीं देगी तब तक वो बातों से कुछ भी नहीं करेगा. यही सब बात करते हुए हमारी फ्लाइट लंड हो गयी. गोवा पहुंचकर हम दोनों राजेश के बुक कराये होटल में पहुच गए. होटल काफी शानदार था. मैंने दिव्या से कहा की राजेश भैया ने काफी पैसा खर्च कर दिया. तो दिव्या बोली अब अपनी बीवी पर ही तो किया है किसी गैर पर तो नहीं. रात काफी हो गयी थी तो हम दोनों ने खाना खाया और अपने कमरे में जाकर सो गए. अगले ७ दिन हम दोनों कमरे में ही रहे और मैं दिव्या की धुआधार चुदाई करता रहा बीच में सिर्फ एक बार मैंने और दिव्या ने घर फोन किया. रेणुका ने मुझे बताया की राजेश भैया ने ठीक से उसे घर पंहुचा दिया और राजेश ने दिव्या से कहा की अभी तक मामला आगे नहीं बढ़ा है बस वो रेणुका के साथ थोडा हसी मजाक कर लेता है. मुझे थोड़ी तसल्ली हुई की वहां सब ठीक है. आठवे दिन दिव्या बोली "यार अब ये चुदाई तो वापस लौट कर भी होती ही रहेगी लेकिन गोवा आये है तो थोडा घूम भी लेते है." दिन में तो हम दोनों बीच में नहाने चले गए. दिव्या का सेक्सी बदन बिकिनी में इतना कमाल लग रहा था की मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं उसे चोदने के लिए होटल में वापस ले आया.
 
दोपहर भर मैंने दिव्या को चोदा और शाम को फिर से नहा धोकर हमने अपने अपने कपड़े पहने और घूमने बाहर निकल गए.

गोवा आकार दिव्या तो एकदम बिंदास हो गयी थी. सुबह वो बिकिनी में बीच में घूम रही थी और अब उसने एक बहुत छोटी और ट्रांसपेरेंट ड्रेस पहनी थी जिसमे दिव्या का शरीर बहुत खूबसूरत लग रहा था. उसकी भरी हुई चूचियां और उसकी गोल मटोल गांड बहुत ही सेक्सी लग रही थी. रस्ते में बहुत से लोग पीछे से उसकी गांड को मटकते हुए बहुत वासना भरी नजरों से देख रहे थे जैसे उसका पिछवाड़ा नंगा करके वहीं चोद लेंगे. उस छोटी और ट्रांसपेरेंट ड्रेस में दिव्या ऐसा चुदाई वाला माल लग रही थी की 20 साल के लड़कों से लेकर 50 साल तक के आदमी दिव्या के शरीर को वासना भरी नजरों से नजरों से घूर रहे थे. दिव्या की ड्रेस जांघों पर सिर्फ वहीं तक आ रही थी जहां से चूत की लाइन शुरू होती है.

होटल से निकल कर मैंने एक बाइक रेंट पर ली और बीच की तरफ घूमने निकल गया. बीच पर पहुंचकर मैंने देखा वहां पर एक मार्केट लगी हुई थी जहां पर म्यूजिक बज रहा था और लोग डांस कर रहे थे एक तरफ शराब की दुकान और बार था. बार में लड़के-लड़कियों बैठकर दारु पी रहे और डांस कर रहे थे. हमने अपने लिए भी शराब का ऑर्डर दिया और हम बैठकर दारु पीने लगे. वहां का माहोल बहुत ही खुला और सेक्सी था. शराब के नशे में लड़के और लड़कियां चिपक चिपक कर नाच रहे थे हम दोनों को भी नशा चढ़ गया था. तो हम दोनों भी नाचने पहुच गए. मैं तो आराम से नाच रहा था पर दिव्या काफी बेपरवाह होकर नाचने लगी. हमारे पास एक खूबसूरत सा फिरंगी लड़का भी नाच रहा था. मैंने देखा की वो लड़का जान बूझ कर नाचते नाचते दिव्या को टच कर रहा था. मुझे ये देख कर बहुत उत्तेजना हुई पर दिव्या उस से थोड़ा अलग हटने लगी. मैंने दिव्या को रोका और लड़के का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और हम तीनो डांस करने लगे.

लड़का उम्र में मुझसे भी छोटा होगा पर सुंदर था उसकी बॉडी भी काफी अच्छी थी. जब दिव्या उस लड़के की तरफ मुंह करके नाची तो मैं मौका देख कर दिव्या के पीछे की तरफ आ गया और दिव्या से चिपक कर डांस करने लगा. मैंने दिव्या को पीछे से पकड़ लिया और उसको धीरे-धीरे आगे सरका कर उस लड़के के साथ सटा दिया. अब हम दोनों ने दिव्या को बीच में दबा लिया था और दिव्या को बीच में लेकर सैंडविच की तरह सहलाना शुरू किया. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. दिव्या भी डांस को एंजॉय कर रही थी. उसने दोनों हाथों से लड़के की कमर पकड़ ली और इस तरह से डांस करने लगी जिससे मुझे लगा कि शायद उस लड़के का लंड दिव्या की चूत से टच हो रहा है. मुझे लगा की अगर वो लड़का अपना लंड दिव्या की चूत में डाले तो कितना मजा आयेगा. थोड़ी देर में मैंने दिव्या का मुंह अपनी तरफ घुमा लिया अब वो लड़का भी डांस करते हुए दिव्या की गांड के बीच में अपने लंड को रगड़ रहा था. मैंने उस लड़के के हाथ उठा कर दिव्या की चून्चियो पर रख दिए. मेरी तरफ से छूट पाकर उसने दिव्या की चूचियां दबाना शुरू कर दिया. दिव्या की ड्रेस छोटी थी तो उस लड़के ने उसे ऊपर उठा दिया और दिव्या की पेंटी पर अपना लंड रगड़ने लगा.

 
मैंने देखा की काफी लोग वहां खुले आम किस कर रहे है. कई लडकिया तो बिकिनी में नाच रही थी तो मैंने भी दिव्या को पकड़कर किस कर लिया. दिव्या अब एकदम पागल हुई जा रही थी. वो डांस छोड़ कर टेबल पर वापस आ गयी. मैं भी उस लड़के को लेकर उस टेबल पर आ गया. मैं उस लड़के से बात करने लगा. उसने बताया की वो नार्वे से है और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ गोवा आने वाला था पर उसकी गर्लफ्रेंड को कुछ काम पड़ गया तो वो अगले हफ्ते आएगी तो फिलहाल वो यहाँ अकेला है और अपनी गर्लफ्रेंड का वेट कर रहा है. उसने अपना नाम सनी बताया. मैंने खाना आर्डर किया और खाने लगे. उसने मेरे बारे में पुछा तो मैंने बताया की हम दोनों पति पत्नी है और गोवा घूमने आये है. उसने मुझसे पुछा की मेरी पत्नी उम्र में मुझसे थोड़ी बड़ी लगती है तो मैंने कहा की हमारी लव मैरिज है और दिव्या की ये दूसरी शादी. दिव्या की सारे शरीर की रगड़ाई करके अब वह खुल गया था और दिव्या भी उससे खुल गई थी.

उसने इंग्लिश में दिव्या से कहा " यू आर अन अमेजिंग लेडी. यू अर वैरी हॉट एंड सेक्सी"

दिव्या के चेहरे पर शर्म से लाली आ गई पर फिर दिव्या बोली "आप भी बहुत सुंदर हो और मैंने आज लाइफ का सबसे सेक्सी डांस किया मुझे बहुत मजा आया." हम दोनों उस लड़के से अच्छी-अच्छी बातें करते खाना खाते खाते हमारी अच्छी दोस्ती हो गई. खाना खत्म होने के बाद जब चलने की बारी आई तो मैंने दिव्या से पुछा की क्यों न सनी को होटल ले चले पर दिव्या बोली की "नहीं. बस डांस तक ठीक था"

वैसे राजेश ने मुझे खुली छूट दे रखी थी. उसने मुझसे कह दिया था की अब अगले १५ दिन दिव्या तुम्हारी प्रॉपर्टी है. मेरा उससे कुछ लेना देना नहीं होगा. जो करना चाहो वो करना पर बस वो मत करना जो अपनी बीवी के साथ नहीं करोगे मत ब उसे किसी तरह को कोई चोट न लगे इसीलिए मेरा बहुत मन होने के बाद भी मैंने सनी को बाय किया और वापस होटल की तरफ चल दिए. रास्ते में बाइक पर मैंने महसूस किया की दिव्या मुझे बार-बार जोर से पकड़ कर मुझसे चिपक रही थी. मैं समझ गया की सैंडविच बन कर डांस करना उसे याद आ रहा है. हम होटल के कमरे में आ गए. कुछ गोवा का माहौल कुछ शराब का नशा और इन सबके ऊपर एक खूबसूरत अजनबी के बीच सैंडविच डांस का मजा दिव्या को पागल कर रहा था.

मैं और दिव्या दोनों ही बहुत एक्साइटेड थे. मैंने आते ही दिव्या की ड्रेस उतार दी और उसने मेरे कपड़े उतार दिए और एक दूसरे को चाटने लगे. अब मैं नीचे लेट गया और दिव्या ने मेरे ऊपर आकर 69 वाला आसन बनाकर मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और अपनी चूत मेरे मुंह के ऊपर रख दी मैंने चूत में जीभ डालकर उसे जोर जोर से चाटने लगा और दिव्या भी मेरा लंड पूरा मुंह में लेकर जोर जोर से चाटने लगी. उसकी चूत चाटने वजह से बहुत पानी छोड़ रही थी और वह बुरी तरह चुदना चाहती थी पर दिव्या ने मेरा लंड चूसते हुए मेरा पानी निकाल दिया और पूरा पी गयी. मैंने दिव्या से कहा " देखो मेरी बात मान लेती तो मेरा निकलने के बाद भी मस्त चुदाई करवाती रहती"

दिव्या सेक्स में पागल हुई जा रही थी मेरी तरफ देख कर बोली "सही में मजा आ जाता. गलती हो गई. आज तक किसी फिरंगी के साथ किया भी नहीं और वो लड़का तो पूरा माल था. आज साले को चोद डालती."

मैंने दिव्या से पुछा "अब बुला लूं क्या?" दिव्या बोली "अब कहां से आएगा"

मैंने कहा "तुम यह चिंता छोड़ो उसका इंतजाम मैं कर देता हूं. मैंने उसका फोन नंबर ले लिया था. फोन करेंगे तो फ़ौरन आ जाएगा क्योंकि वो इसी होटल में रुका है."

 
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