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नए पड़ोसी complete

"वो जिस हॉस्टल में रहती है वही पास में मेरे भाई का घर है तो जब छोटी थी तो छुट्टियों में वहीँ चली जाती थी. हम भी अक्सर उससे मिलने वही चले जाते थे पर अब तो १२वी में है, बड़ी हो गयी है, ट्रेन में अकेले चली आती है और भाई भाभी कहीं बाहर गए थे तो वो यहाँ चली आई." दिव्या ने जवाब दिया.

"कितने साल की हो गयी सुरभि" मैंने पुछा.

"उसके बारे में कुछ गन्दा मत सोचो." दिव्या ने मुझे टोका.

"कैसी बात करती हो. मैं तो ऐसे हो पुछ रहा था. वैसे यार काफी दिन हो गए रेणुका ने भी फ़ोन नहीं किया और न ही राजेश ने. ये लोग जब पहुचे थे तब फोन किया था फिर कोई खबर ही नही दी." मैंने बात बदलते हुए कहा.

"अरे राजेश को तो नयी चूत मिली है. वो अभी कम से कम ६ महीने उसी में डूबा रहेगा और रही बात रेणुका की तो उसे भी तो खुल कर चुदाने का मौका पहली बार मिला है. तुमने देखा नहीं पर राजेश जब मूड में होता है तो औरत को एकदम रंडी बना कर चोदता है, गाली देता है, पेशाब पीना पिलाना, कोई लिमिट नहीं रखता. उस सेक्स में अपना ही एक मजा होता है. तुम तो वैसा कभी करते नहीं तो तुम्हे क्या पता होगा पर मैं जानती हूँ की रेणुका तो मस्त हो गयी होगी अब उनको हमारी याद क्या आयेगी." दिव्या ने कहा.

"मुझे पता है. ऐसा नहीं है की डर्टी सेक्स मैंने नहीं किया है." मैंने दिव्या से कहा.

"क्या रेणुका के साथ कभी किया है?" दिव्या ने पुछा.

"नहीं रेणुका के साथ तो नहीं पर अपनी बहन के साथ किया है. हम एक दुसरे से बहुत प्यार करते है. सिर्फ वही है जिसका मैंने पेशाब भी पिया है." मैंने दिव्या से कहा.

"अच्छा. वैसे देखने में तो रश्मि बड़ी सीधी लगती थी." दिव्या ने कहा.

"तुम भी तो बहुत सीधी लगती हो मेरी जान. बच्चो के स्कूल की इस टीचर को कोई चुदते वक़्त देखे." मैंने कहा और हम दोनों हसने लगे. दिव्या बोली "आज तुम भी राजेश की तरह मुझे रंडी बनाकर चोदना. गालियाँ दे देकर."

 
तभी दरवाजे की बेल बजी. मैंने दिव्या से कहा "मैं छत पर चला जाता हूँ तब तुम दरवाजा खोलना."

दिव्या बोली "नहीं. तुम बाथरूम में चले जाओ. कोई भी होगा मैं उसको टाल दूँगी."

मैं जल्दी से बाथरूम में चला गया और देखने लगा की कौन आया है. मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब मैंने देखा की दरवाजे पर रश्मि दीदी खड़ी है. दीदी दिव्या से बोली "भाभी जी मैं आपके पडोसी मनीष की बहन हूँ. उसको बर्थडे सरप्राइज देना था तो बताया नहीं की मैं आने वाली हूँ पर मुझे ही सरप्राइज मिल गया. मनीष के घर पर कोई नहीं है. काफी देर से बेल बजा रही हूँ पर कोई दरवाजा नहीं खोल रहा."

"अरे रश्मि मैं तुम्हे पहचानती हूँ. अच्छा हुआ जो मेरे घर आ गयी. मनीष यही है."दिव्या ने रश्मि दीदी को बोला और घर के अन्दर ले आई.

"कहाँ है मनीष और रेणुका." दीदी ने अन्दर आकर पुछा.

"मनीष तो बाथरूम में है पर रेणुका यहाँ नहीं है" दिव्या बोली.

" रेणुका नहीं है तो मनीष यहाँ क्या कर रहा है? " दीदी ने पुछा.

"रेणुका तो बैंकाक गयी है तो मनीष मेरे पास खाना खाने आता है." दिव्या बोली.

मुझे लगा की दीदी को सब बात मुझे ही बतानी चाहिए तो आगे कुछ बात हो इससे पहले ही मैं बाथरूम से निकल आया. आते ही मैंने रश्मि को गले लगाया और पुछा "अरे दीदी तुम अचानक बिना बताये."

"अरे तेरे जीजा कुछ दिनों के लिए बाहर गए है तो मैं बोर हो रही थी. सोचा की कुछ दिन तेरे और रेणुका के साथ गुजारू और कल तेरा बर्थडे भी तो है इसीलिए चली आई पर रेणुका किसके साथ गयी तूने मुझे बताया नहीं." दीदी ने पुछा.

"चलो पहले घर चलो बाकी बात वहीँ करते है." मैंने दीदी से कहा.

"पर खाना" दिव्या ने पुछा.

"
 
:?: "बस अभी आते है. दीदी का सामान रख आऊं और दीदी कपडे भी बदल लेंगी." मैंने कहा और दीदी का बैग उठा कर दीदी के साथ घर आ गया. घर आते मैंने दीदी को पकड़ा और उन्हें

किस करने लगा दीदी ने भी मेरा साथ दिया तो मैंने दीदी का ब्लाउज खोल दिया और दीदी की चून्चियो को दबाने लगा.

दीदी बोली "रुक जा रुक जा. पहले जरा नहा लूं तो थकान उतर जाए. फिर तो मैं १५ दिन तेरे पास ही हूँ पर पहले ये बता की रेणुका का क्या सीन है."

"वो बैंकाक गयी है. काफी दिन हो गए अब तो २-३ दिन में आने वाली होगी. अपने राजेश के साथ गयी है " मैंने कहा.

"कौन राजेश." दीदी ने पुछा.

"अरे अपना पडोसी राजेश." मैंने कहा.

"क्या? तूने अपनी बीवी को पडोसी के साथ विदेश भेज दिया." रश्मि ने पुछा.

"अरे दीदी वो मेरी बीवी ले गया और बदले में अपनी बीवी मुझे दे गया है." मैंने दीदी को समझाते हुए कहा.

"अच्छा तो मतलब तू वहां खाना खाने नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ करने गया था." दीदी ने कहा.

"राजेश वहां दिन रात मेरी बीवी को पेल रहा होगा तो मैं उसकी बीवी को न चोदुं." मैंने दीदी से कहा तो वो हसने लगी और बोली "हमको हमारे पडोसी भी कमाल के मिलते है. पहले वाला बहन बदलता था और ये वाला बीवी बदलता है. मैं तो तुझे बर्थडे गिफ्ट में अपनी चूत देने आई थी पर तूने तो पहले ही इन्तेजाम कर रखा है."

"गिफ्ट तो लूँगा ही. आज तुमको और दिव्या को एक ही बिस्तर पर चोद कर." मैंने दीदी को जकड़ते हुए कहा.

"तो क्या उसको पता है की तू मुझे चोदता है?" दीदी ने पुछा.

"हाँ उसको और राजेश दोनों को पता है. अब तुम १५ दिन के लिए आई हो तो वो तुम्हे बिना चोदे नहीं छोड़ेगा. बहुत ठरकी आदमी है." मैंने कहा.

"अच्छी बात है पर लंड कैसा है उसका. ठीक ठाक है न." दीदी ने पुछा मतलब उनको कोई ऐतराज नहीं था.

"मेरे जैसा ही है. तुम्हे मजा आयेगा. चलो अब वापस चलो." मैंने दीदी से कहा.

"तू जा. मैं नहा कर आती हूँ." बोल कर दीदी नहाने चली गयी और मैं दिव्या के पास चला गया. दिव्या ने पुछा "अब क्या होगा." मैंने बोला "वही जो होने वाला था बस मुझे अब कुछ दिन एक की जगह दो चूतें मिलेंगी. मैंने दीदी को हमारे बारे में सब बता दिया है वो बस आती ही होंगी."

 
दिव्या शरारत से बोली "अरे नहाना तो मुझे भी है. चलो हम दोनों साथ में नहाते है."

मुझे आईडिया अच्छा लगा तो मैंने दिव्या से कहा "ये किचन का काम बंद करो और चलो मेरे साथ." और उसको लेकर छत के रास्ते मैं वापस अपने घर आ गया. दिव्या को दीवार कूदने में दिक्कत होती थी तो मैंने छत की दीवार एक जगह से तुडवा कर आने जाने का रास्ता बनवा दिया था. उसी से हम दोनों नीचे आ गए. बाथरूम से शावर की आवाज आ रही थी. मैंने फ़ौरन अपने कपडे उतारे और दिव्या को भी कपडे उतारने का इशारा करके बाथरूम का दरवाजा खोल कर अंदर घुस गया. शावर के नीचे रश्मि दीदी पूरी नंगी होकर नहा रही थी और उन्होंने पूरी बॉडी पे साबुन लगा रखा था. उनके चेहरे पे भी साबुन लगा था वो अपने शरीर पर साबुन मल रही थी. दीदी का फिगर शादी के बाद और कातिल हो गया था. अचानक दीदी साबुन धोकर घूमी तो मुझे देखकर उनकी चीख निकल गई. इतने में दिव्या भी बाथरूम में घुस गई एकदम नंगी.

दीदी मुझसे बोली "अरे सबर नहीं है. बोला तो था की आ रही हूँ और तुम दोनों सीधे बाथरूम में घुस गए. खामखा डरा दिया."

तो दिव्या बोली "मनीष ने सोचा तुम्हे सरप्राइज दे"

दीदी मेरे करीब आई और मेरे सीने पर उंगली घुमाते हुए बोली "आज कल बड़ा सरप्राइज देने लगा है तू. पर दिव्या हम दोनों नंगी खड़ी हैं और ये कमीना चड्डी में. इसको कितनी बार बताया कि बाथरूम में पूरा नंगे होकर नहाते हैं. चलो निकालो इसकी चड्डी" और दोनों ने मिलकर मेरी चड्डी भी उतार दी.

मेरा लंड दीदी को देख कर पूरा लंड खड़ा था. उसको दोनों हाथों से सहलाते हुए दीदी बोली "आज तो इसका पूरा जूस पी जाऊंगी"

दिव्या बोली "थोडा मेरे लिए भी छोड़ देना"

रश्मि दीदी हसी और फिर दोनों नीचे बैठ गई और जीभ निकाल कर लंड को ऐसे चाटने लगी जैसे कोन आइसक्रीम खा रही हो.

थोड़ी देर बाद दिव्या खड़ी हुई और मुझे किस करने लगी मैंने उसके मुँह में जीभ घुसा दी और वो मेरी जीभ चूसने लगी. नीचे रश्मि दीदी लंड को चूस रही थी. और मैं दोनों हाथों से कभी दिव्या के बूब्स दबाता कभी उसकी बड़ी गांड को सहलाता.

दिव्या बोली "रश्मि एक काम करते है. मनीष तुम नीचे लेटो."

मैं नीचे लेट गया तो दिव्या बोली "रश्मि अब हम दोनों लंड चूसेंगे और मनीष हम दोनों की चूत"

 
दोनों मेरे मुँह की तरह चूत करके झुक गई. दोनों की पाव रोटी जैसी क्लीन शेव और चिकनी चूत पीछे को उभर आई. सबसे पहले दिव्या ने रश्मि दीदी को मेरे मुँह पर चूत रखने को कहा और रश्मि दीदी ने मेरे कंधों के दोनों तरफ घुटने रख कर चूत मेरे मुँह पर रख कर दिव्या के साथ मेरा लंड चूसने लगी. मैंने अपनी जीभ निकाली और रश्मि दीदी की चूत के होंठों को चाटने लगा, फिर जीभ को होंठों के भीतर घुस कर चाटने लगा फिर चूत के दाने को चाटने लगा और चूसने लगा.

मैं दीदी की चूत चूसता हुआ एक हाथ से उनके मम्मे दबा रहा था और दूसरे हाथ से दिव्या की चूत सहला रहा था. दिव्या की चूत भी दीदी की चूत की तरह पानी छोड़ रही थी जिससे मेरी उंगली भीग गई जिनको मैं मुंह में लेकर चाट गया और अब दिव्या की चूत में दो उंगली डाल कर उसकी चूत उंगलियों से चोदने लगा और रश्मि दीदी की चूत को जीभ से चोदने लगा.

थोड़ी देर में दीदी का शरीर अकड़ा और उसने मुँह में लंड को भी दबा लिया और उसकी चूत ने मेरे मुँह में पानी की बौछार कर दी. नमकीन चूत रस मेरे मुँह में भर गया और दीदी मेरे ऊपर ही लेट गई तो दिव्या ने उनको साइड किया और खुद मेरे साथ 69 हो गई.

अब दिव्या लंड चूस रही थी और मैं दिव्या की चूत. दिव्या की चूत का टेस्ट तो मुझे बहुत ही पसंद था. थोड़ी देर बाद दीदी भी दिव्या के साथ लण्ड चूसने लगी. अब मैं दिव्या की चूत चूसते हुए एक हाथ से उसके मम्मे दबा रहा था और एक हाथ से दीदी की चूत सहला रहा था.

रश्मि दुबारा से रेडी हो रही थी. शावर का पानी भी दिव्या की गांड से होता हुआ मेरे मुँह पर आ रहा था. थोड़ी देर बाद दिव्या उठी और मेरे खड़े लंड पर बैठ कर उसे अपनी रसीली चूत में लेते हुए दीदी को बोली "तुम अपने भाई के मुँह पर बैठो. जब तक मैं लंड की सवारी करती हूँ तुम इसकी जीभ से चूत चुदाई का आनन्द लो."

अब हमारी पोजीशन ये थी कि मैं फर्श पर पीठ के बल लेटा था. मेरे ऊपर दीदी ऐसे बैठी थी कि उनकी पीठ मेरी टांगों की तरफ थी और वो घुटनों के बल मेरे मुंह पर बैठ थी और हाथों से उसने दीवार पर लगा टॉवल स्टैंड पकड़ा हुआ था. दिव्या का मुँह मेरे मुँह की तरफ था और वो मेरे लंड पर सवार थी. मेरे हाथ दिव्या की चूचियों पर थे और दिव्या ने रश्मि दीदी की चूचियों को पकड़ा हुआ था.

मेरे ऊपर एक साथ दो चूत सवार थी. एक मेरे मुँह पर और दूसरी मेरे लंड पर. मैं रश्मि दीदी की चूत को जीभ से चोद रहा था और दिव्या मेरे लंड से खुद चुदवा रही थी और दीदी की चुची भी दबा रही थी. ऊपर से ठंडा पानी हमारी चुदाई और वासना की आग को और भड़का रहा था.

दिव्या बोली "आहह… रश्मि उम्म्म… मनीष का लंड तुझे देख कर ज्यादा मोटा हो गया है तभी तो मेरी चूत में कस कर घुसा लग रहा है उम्म्म… ओहह… लगता है चूत फट जायेगी. बहुत मस्त हो गया है इसका लौड़ा अपनी बहिन को नंगा देखकर. आज इसको जी भर कर चोदेंगे और चुदवायेंगे भी.

 
रश्मि दीदी "ओहह… हाँ दिव्या पहले आप कर लो लंड की सवारी उम्म्म… फिर मैं भी करुँगी. अभी तो ये कमीना मेरी चूत को जीभ से ही ऐसे चोद रहा है जिसका कि मैं बता नहीं सकती आहहह… ऐसे ही चूस बहन के लौड़े!"

दिव्या ने रश्मि दीदी के मुँह को पीछे किया और एक दूसरे को किस करते हुए मेरे लंड पर उछलने लगी. अब रश्मि दीदी टॉवल स्टैंड को पकड़ के पीछे को झूल गई जिससे दिव्या रश्मि दीदी की चुची भी चूसने लगी अभी किस करती कभी चुची दबाती कभी चुचियों को चूसती.

फिर 5 मिनट बाद दिव्या ने रश्मि दीदी को छोड़ा और मेरे सीने पर हाथ रखकर जोर जोर से लंड पर उछलने लगी. मैंने भी नीचे से लंड की स्पीड बढ़ा दी तो दिव्या बकने लगी "बहनचोद साले, फाड़ दे मेरी इस चूत को! बहुत आग लगी हुई है इसमें आहह… ओह्ह… मादरचोद साले आज एक हफ्ते से तेरे लंड के लिए तड़प रही हूँ. आज बुझा दे इस कमीनी चूत की आग…

ओह्ह हाँ ऐसे ही आहह… आहह… ओह्ह… मैं जाने वाली हूँ… आहह… मेरी चूत बहन की लौड़ी निगोड़ी छिनाल चूत अहःहःहः मेरी चूत ओह्ह मेरी कमीनी चूत आहह गई."

और उसने मेरे सीने को अपनी मुठ्ठियों में भींच लिया और मैंने रश्मि दीदी की चूत को मुँह में दबा लिया तो दीदी की भी चीख निकल गई और दिव्या मेरे ऊपर ही गिर गई.

दो तीन मिनट बाद दिव्या एक साइड हुई और लंड को किस किया और फिर दीदी से बोली "चलो डार्लिंग, अब अपने भाई के लौड़े का मजा दे तेरी इस कमीनी चुदक्कड़ चूत को!"

और रश्मि मेरे मुँह से खड़ी होकर मेरे लंड पर चढ़ गई. मैं भी बाथरूम की दीवार का सहारा लेकर बैठ गया और दीदी के बूब्स चूसने लगा. अब दीदी मेरे लंड पे जोर से उछलने लगी तो मैं दीदी की बड़ी गांड पर दोनों हाथों से जोर जोर से थपकी देने लगा.

फिर मैंने दीदी को खड़ा किया घोड़ी बनाया तो दिव्या फर्श पर टाँगें फैलाकर लेट गई और मैं दीदी को घोड़ी बना कर चोदने लगा. रश्मि दिव्या की चूत में उंगली करने लगी और थोड़ी देर बाद दीदी घुटनों के बल बैठ गई. मैं भी दीदी की बड़ी बड़ी चुचियों को दबाते हुए कभी उसकी गांड पर थपकी मारते हुए चोदने लगा. रश्मि अब दिव्या की चूत चूसने लगी.

थोड़ी देर में दीदी की गांड की स्पीड पीछे की ओर बढ़ गई और उसने दिव्या की चुचियाँ पकड़ के जोर से दबाते हुए उसकी चूत चूसने लगी. फिर दीदी दिव्या के ऊपर लेट गई पर मैंने स्पीड बढ़ा दी तो रश्मि बोली "साले कमीने, जलन हो रही है चूत में! रुक जा, थोड़ी देर फिर चोद लेना!"

लेकिन मेरी स्पीड बढ़ती गई, आखिर रश्मि पलट गई और लंड चूत से बाहर आ गया पर तुरंत ही दिव्या ने मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और शॉवर बन्द कर दिया. अब रश्मि भी दिव्या के साथ चूसने लगी. थोड़ी देर में लंड ने अपनी गाढ़ी मलाई फेंकना शुरू किया जिसे दिव्या और रश्मि दीदी ने अपने मुँह में ले लिया कुछ उनके मुँह पर भी फैल गया. जिसे बाद में उन दोनों ने एक दूसरे के मुँह को चाट कर साफ़ किया.

फिर हम अच्छे से नहाये और बाहर आये.

 
रश्मि दीदी बोली "सच बहुत दिनों बाद आज इतना मजा आया है."

दिव्या ने कहा चलो घर चलते है. खाना भी तो खाना है. रात हो ही चुकी थी तो हम तीनो नंगे ही छत से दिव्या के घर वापस आ गये. हम सभी किचन में आ गए. किचन में दिव्या और रश्मि ने मिल कर कुछ खाना बनाया और मैं उन दोनों के बदन से खेलता रहा.

मैंने कहा- "रोटी बाद में बना लेंगे. पहले कुछ मस्ती हो जाये! खाने के समय गर्म गर्म रोटी बना लेना."

किचन में दीदी को काफी गर्मी लग रही थी तो दीदी बोली "यार यहाँ भी दिल्ली की तरह बहुत गर्मी है, बीयर है क्या ठंडी?"

दिव्या "यार फ्रीज़ में होगी बीयर देखो मनीष. राजेश ही रख गए थे तो काफी ठंडी होगी वरना तो आइस क्यूब भी हैं फ्रीज़र में, ट्रे में निकाल ले!"

वो किचन काफी बड़ी थी. किचन के बीच में बड़ा स्लैब बना था. रश्मि दीदी बीयर और आइस क्यूब ले आई. दिव्या ने तीन बीयर मग निकाले और उसमें रश्मि दीदी ने बीयर डाली. दिव्या और रश्मि दीदी ने लंड से मग टकरा कर मुझे बर्थडे विश किया और हम तीनों एक दूसरे के मग से बीयर पीने लगे.

मैंने रश्मि दीदी को बीयर की बोतल दी और उसको अपनी चुचियों पर बीयर डालने को कहा. दीदी ने अपनी चुचियों पर बीयर डाली और मैं चुचियों और पेट से होते हुए चूत पर आई बियर को मुह लगा कर पीने लगा.

अब दिव्या को भी स्लैब पर बिठा दिया और उसको भी एक बीयर की बोतल दे दी. अब मैं कभी रश्मि दीदी की चूत से तो कभी दिव्या की चूत से बीयर का मजा लेने लगा.

उन दोनों को भी चूत चूसवाने में बड़ा मजा आ रहा था, दोनों अब साथ में बैठी थी तो एक दूसरे को भी किस कर रही थी. अब मैं दीदी की चूत को चाट रहा था और बहती बीयर का मजा ले रहा था कि अचानक दिव्या नीचे उतर कर मेरे साथ आ बैठी और मुझे उसने खुद रश्मि दीदी की चूत चाटने का इशारा किया.

मैं अब खड़ा हो गया और ऊपर स्लैब पर चढ़ गया और दीदी के दोनों और पैर रख कर खड़ा हो गया. रश्मि दीदी के मुँह के ठीक ऊपर लण्ड करके बीयर डालते हुए दीदी को बोला "डार्लिंग अब तेरी बारी अब तुम लंड से बीयर पीओ और दिव्या तेरी चूत से बीयर पीयेगी.आह कितना मस्त मजा आ रहा है चिल्ड बीयर से लंड को… कितनी ठंडक मिल रही है. आहह चाटो मेरे अण्डों को, मेरी गोलियों को चूसो और बीयर का मजा लो."

रश्मि दीदी "अःहः दिव्या ऐसे ही चाटो. क्या चाट रही हो… बहुत चुदक्कड़ हो साली… आज चूत का रस और बीयर दोनों का मजा लो. बहन के लौड़े मनीष. जरा आराम से बीयर डाल ना लंड पर आधी पी रही हूँ और आधी मेरे ऊपर बह रही है.

 
मैं "कुतिया बीयर ज्यादा इसलिए डाल रहा हूँ कि इस कमीनी दिव्या को लंड की भी बीयर तेरी चूत के साथ पीने को मिले."

अचानक दीदी जोर जोर से मेरे लंड और मेरी गोलियों को चूसने लगी और थोड़ी उछलने लगी शायद वो झड़ने वाली थी और अचानक से शांत हो गई. दीदी ने ढेर सारा चूत रस दिव्या के मुँह में छोड़ दिया जो बीयर के साथ मिलकर दिव्या के पेट में चला गया.

अब दिव्या अच्छे से रश्मि दीदी की चूत चाट कर खड़ी हुई और उनको अपनी जगह बिठा कर खुद दीदी की जगह बैठ कर मेरे लंड से बीयर चाटने लगी. वो कभी लंड चाटती. कभी मेरी गोलियों को चूसती और नीचे अब रश्मि दीदी भी दिव्या की चूत से बियर पीने लगी.

दिव्या मेरे हाथ से बीयर की बोतल खुद लेकर खुद कभी बियर डालती तो कभी बीयर की घूँट लेकर लंड पर उगल देती. दिव्या लंड को जोर जोर से चूसने लगी और काफी देर से शांत लंड ने अपनी मलाई फेंकनी शुरू की जो कुछ तो बीयर के साथ दिव्या के मुँह में गई कुछ पिचकारी उसकी चुचियों पर गिरी जो बीयर के साथ बह कर दिव्या की चूत से होते हुए रश्मि दीदी के मुंह से पेट में चली गई.

अब रश्मि दीदी और दिव्या ने मुझको चाट कर बीयर साफ़ की फिर मैंने उन दोनों के शरीर को चाट कर साफ़ किया और किचन में ही दोनों एक साथ फिर मेरे लंड को चूस चूस कर खड़ा करने लगी.

कुछ ही देर में मेरा लंड फिर से लोहे की रॉड जैसा सख्त हो गया तो मैंने दीदी को स्लैब पर बिठा कर दिव्या को उसकी चूत चूसने को कहा और मैंने दिव्या की चूत में लंड पेल दिया. दिव्या रश्मि दीदी की चूत चाटते और चूसते हुए मुझसे चुदवाने लगी.

15 मिनट में दिव्या की चूत ने पानी छोड़ दिया. मैं और दिव्या खड़ी चुदाई से थक गए तो रश्मि दीदी को साइड में खिसक कर मैं स्लैब पर लेट गया. मेरी कमर स्लैब के कोने पर थी और दीदी मेरे लंड पर सवार हो गई और दिव्या नीचे जमीन पर घुटनों के बल बैठ कर मेरा लंड और रश्मि दीदी की चूत चाटने लगी. कभी दिव्या मेरी गोलियों को चूसती तो कभी मेरे लंड को चाटने लगती जब लंड दीदी की चूत के अंदर बाहर होता.

मैं दीदी की चुचियों को मसल भी रहा था और चूस भी रहा था. 5-6 मिनट बाद ही रश्मि दीदी और मेरी दोनों की स्पीड बढ़ गई और रश्मि दीदी "आह मेरी चूत, ओह्ह मेरी कमीनी चूत साली कुतिया आहह दिव्या ओह्ह भैया आः फाड़ ही दोगे आज मेरी निगोड़ी चूत को… आह और जोर से चोदो मुझे… आह और जोर से चाट साली रंडी दिव्या मेरी चूत को… ओहह मर गई… आह मैं गई…" बडबडाने लगी और झड गयी.

झड़ते ही लंड से उतर कर दीदी मेरे ऊपर 69 में होकर लंड को चूसने लगी और नीचे से दिव्या मेरी गोलियों को चूसने लगी. रश्मि दीदी मेरे मुँह पर अपनी चूत को रगड़ते हुए जोर जोर से चूसने लगी.

मैं रश्मि दीदी की चूत रस चाटते हुए उसको चूसने लगा. थोड़ी देर में मेरे लंड की नसें फूलने लगी और मेरे लंड से जोर से पिचकारी मारी जो सीधे रश्मि दीदी के गले में गिरी. रश्मि दीदी को खाँसी सी आई पर उसने लंड को मुँह से नहीं निकाला. उस समय मेरे लंड से खूब मलाई निकली जो दीदी के मुँह से बाहर बहने लगी. रश्मि दीदी ने लंड को मुँह निकाला और साँस लेने लगी.

 
फ़ौरन लंड की पिचकारियों को दिव्या ने अपने मुँह में ले लिया एक दो पिचकारी दिव्या के बूब्स पर गिरी जिनको बाद में दीदी ने चाट लिया. रश्मि दीदी और दिव्या ने लंड को अच्छे से चाटा और साफ़ किया. फिर हम लोगों ने नंगे ही खाना खाया. खाने के बाद दिव्या बोली "बर्थडे है तो मीठा तो होना ही चाहिए." और वो फ्रीज़र से आइसक्रीम निकाल लाई.

रश्मि दीदी को मस्ती आ रही थी. वह एक बड़ा सा पीस काटकर अपनी चुचियों के बीच रख कर मुझसे बोली "भैया आज मेरा आइसक्रीम खाने का अलग मूड है. लंड को मेरी चुचियों के बीच में इस आइसक्रीम में रगड़ो. मैं लंड से ही आइसक्रीम खाऊंगी."

मैं खड़ा हुआ और रश्मि दीदी ने अपनी दोनों चुचियों को आपस में मिलाया. मैंने लंड को चुचियों के बीच में घुसाया और दिव्या से बोली "भाभी, थोड़ी और आइसक्रीम डालो न लंड के टोपे पर!" तो दिव्या ने काफी आइसक्रीम मेरे लंड के टोपे पर डाल दी.

अब मैं लंड से दीदी की चुचियों को चोदने लगा. जैसे ही लंड आगे जाता तो दीदी जीभ से लंड के टोपे को चाटकर साफ़ कर देती और फिर जब लंड पीछे आता तो लंड के टोपे पर फिर आइसक्रीम लग जाती लंड भी ठंडा हो रहा था तो मुझे भी मजा आ रहा था.

रश्मि दीदी को इस तरह आइसक्रीम खाते देख दिव्या भी ‘ऐसे ही मैं भी आइसक्रीम खाऊंगी’ कह कर बची आइसक्रीम को वापस फ्रीज़र में रख आई की पिघले ना!

रश्मि दीदी ने अपनी पूरी आइसक्रीम लंड के टोपे से खाई. अब मैंने लंड को दीदी की चुचियों से निकाल कर उनके मुँह में दे दिया जिसको दीदी ने अच्छे से चाटकर साफ़ कर दिया और मैंने रश्मि की चुचियों पर बची हुई आइसक्रीम को चाट कर साफ़ कर दिया. दिव्या ने भी मुझे लंड उसकी चुचियों के बीच घुसाने को बोली तो अब मैंने लंड को दिव्या की चुचियों में घुसा दिया. लंड बिलकुल लोहे की रॉड की तरह हो रहा था जिससे लंड का टोपा पूरा खुला हुआ और लाल टमाटर की तरह चमक रहा था.

दिव्या ने रश्मि दीदी से आइसक्रीम लाकर दिव्या की चुचियों पर डालने को कहा तो रश्मि दीदी आइसक्रीम निकल लाई और काफी सारी आइसक्रीम दिव्या की चुचियों और लंड के टोपे पर गिरा दी. अब फिर मैं दिव्या की चुचियों को चोदने लगा तो दिव्या भी रश्मि दीदी की तरह आइसक्रीम खाने लगी. उधर रश्मि दीदी ने थोड़ी आइसक्रीम दिव्या की चूत पर डालकर खुद भी खाने लगी तो मैं बोला "साली कमीनी रश्मि की बच्ची, कुछ आइसक्रीम मेरे लिए भी तो छोड़! मुझे भी तुम दोनों की चुचियों और चूत पर डाल कर आइसक्रीम खानी है."

तो रश्मि दीदी बोली "मैंने अभी देखा की एक पैक और रखा है. खा लेना, क्यों भूखा मर रहा है, तेरा लंड तो खा ही रहा है आइसक्रीम!"

फिर दिव्या लंड के टोपे से आइसक्रीम खा रही थी और रश्मि दीदी दिव्या की चूत से. अब मेरा लंड अपनी मलाई भी फेंकने लगा तो दिव्या की आइसक्रीम स्पेशल आइसक्रीम बन गई. लंड की मलाई के साथ आइसक्रीम का मजा दिव्या ले रही थी. जैसे ही आइसक्रीम खत्म हुई दिव्या ने लंड को अच्छे से चूस कर साफ़ किया और मेरी गोलियों को भी चूस कर साफ़ किया. मेरा बर्थडे ऐसा कभी नही मना था. अब हम लोग दिव्या के बैडरूम में आकर वापस बाथरूम में घुस गए और एक बार फिर नहाये और बाहर आकर हम तीनो नंगे ही बैडरूम में सो गए.

 
अगले दिन सुबह हम काफी देर से उठे. उठते ही जब मैंने दिव्या और दीदी का नंगा बदन देखा तो उन्हें एक बार और चोदने का मन करने लगा पर बैंक के लिए देर हो रही थी तो मैं फटाफट तैयार होकर बैंक निकल गया और रश्मि दीदी और दिव्या नहाने बाथरूम में घुस गए. शाम को जब मैं बैंक से लौटा तो घर पर ताला लगा था. मैं समझ गया की दीदी दिव्या के घर पर ही हैं. मैं कपडे बदल कर जब दिव्या के यहाँ पंहुचा तो मैंने देखा की दिव्या और दीदी एक दुसरे की बाँहों में नंगे ही सो रहे थे.

मैंने उनको जगाया नहीं और किचेन में जाकर कुछ खाने के लिए बनाने लगा. थोड़ी देर बाद आवाज से दिव्या जाग गयी और किचन में आ गयी. मुझे देख कर बोली "अरे हमे जगाया क्यों नहीं."

"तुम दोनों नंगी सोती हुई बहुत सुन्दर लग रही थी. जगाने का मन नहीं हुआ." मैंने कहा.

दिव्या हसने लगी और बोली "सब लडको को नंगी औरत बहुत सुन्दर लगती है पर तुम्हारी बहन भी कमाल है. आज स्कूल की छुट्टी करवा दी. पूरे दिन में मुझे निचोड़ डाला रश्मि ने. पूरे बदन में मीठा मीठा दर्द हो रहा है."

तब तक रश्मि भी जग कर आ गयी. मुझे देख कर बोली "भैया ये क्या? जब हूँ तीनो घर पर अकेले हो तो तुम कपडे नहीं पहनोगे. समझे चलो उतारो कपडे."

दीदी के कहने पर मैं भी नंगा हो गया. हम तीनो ने मिल कर खाना बनाया, खाया और फिर से हम तीनो चुदाई में जुट गए. अगले दो दिन यही चलता रहा. रात भर हम लोग चुदाई करते और लगभग सुबह होते होते मैं सोता और ९ बजे थ कर बैंक भाग जाता. तीसरे दिन सुबह दिव्या ने मुझे जगाया और कहा "सुनो मनीष मैं आज कई दिन बाद स्कूल जा रही हूँ. तुम राजेश और रेणुका को एअरपोर्ट से ले आना."

मैं फटाफट तैयार होकर उन दोनों को लेने एअरपोर्ट पहुच गया. राजेश और रेणुका की फ्लाइट आ चुकी थी तो मैं दोनों का लगेज काउंटर पर इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर में राजेश और रेणुका आ गए. उफ्फ्फ रेणुका की तो कायापलट हो गयी थी. एक महीने में राजेश ने उसे क्या बना दिया था. हमेशा साड़ी में ढकी रहने वाली मेरी शर्मीली बीवी हॉट पैन्ट्स और टीशर्ट में सामने से आ रही थी और पूरा एअरपोर्ट उसे घूर रहा था.

 
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