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Guest
पूजा ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और ताले पर दे मारा ताला तिड़क गया और हम अंदर गए और देखा की पुरे कमरे में बदबू सी भरी थी दीवारों पर जगह जगह खून था ताज़ा खून कही कही राख थी जो खून से गीली सी हुईं पड़ी थी
पर एक कोने में संदूक था लकड़ी का जो काफी पुराना सा लग रहा था जिसे दीमक लगी हुई थी मैंने उसे खोला तो उसमें एक लाल जोड़ा था
पूजा- दुल्हन का जोड़ा है
मैं- हाँ ऐसे लगता है जैसे आजकल में ही बनवाया गया हो
वो- पुराना है इसपे सितारों की झालर है अब ऐसा कोई नहीं पहनता पर कुछ साल पहले ऐसे जोड़े चलन में थे और देख कुछ है क्या
मैंने देखा कुछ और कपडे थे और फिर नीचे बहुत से गहने थे सोने चांदी के
मैं- वजन तो काफी होगा
वो- हमें क्या रख देते है जिसका होगा ले जायेगा
हमने वो सामान रखा और कमरे को बंद किया और कुछ दूर एक पेड़ के नीचे बैठ गए बल्कि ये कहु की गहरी सोच में डूब गए
मैं- पूजा किसका होगा सामान
वो- अब मैं क्या जानू पर इतना जरूर है की यहाँ एक राज़ है जिसे हमे कुरेदना नहीं चाहिये यहाँ जो भी है या नहीं है अपने को उससे माफी मांग लेनी चाहिये और फिर यहाँ नहीं आएंगे
मैं- तुझे जो ठीक लगे वैसे भी इन ऊपरी पंगो में कुछ नहीं रखा है
मैंने पूजा की बात मान ली और हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगी फिर हम वहाँ से निकल लिए पूजा अपने घर चल दी और मैं गांव की ओर हमारे खेतो की तरफ आ ही रहा था की तभी मुझे साइकिल पर वो छज्जे वाली आती दिखी तो मैं रुक गया वो भी साइकिल से उतरी
मैं खेत के डोले पर बैठ गया वो मेरे पास आई
मैं- कैसी हो
वो- कैसी भी हु आपको क्या
मैं- नाराज हो
वो- मैं भला क्यों नाराज होने लगी
मैं- जानता हूं नाराज हो तुम्हारी नाराजगी जायज है पर बीते कुछ दिनों में जरा भी फुर्सत नहीं आयी लाल मंदिर वाले दिन के बाद कुछ समय हॉस्पिटल में बिताना पड़ा अभी घरवाले थोड़ी सख्ताई करते है तो इतना बाहर नहीं निकल पाया पर मैं सोच ही रहा था की आपसे मिलु
वो- जानते है कितनी फ़िक्र हो रही थी हमे और एक आप है क़ी
मैं- अब माफ़ भी करदो वैसे तुम इस तरफ तुम कहा जा रही थी
वो- आज सोचा खेतो की तरफ घूम लू बहुत दिन से इस तरफ आना हुआ नहीं था
मैं- अच्छा किया इसी बहाने मुलाकात हो गयी
वो- मुलाकात तो तब हो जब आप गांव में रुके हमने अपनी सहेली से पता किया था आप पता नहीं कहा लापता रहते है
मैं- बताया न बस उलझा हु कुछ कामो में
वो- इतने उलझे है की हमारी झूठी सी याद भी नहीं आयी
मैं- याद उनकी आती है जो दूर होते है भला आप मुझसे कहा दूर है
वो मुस्कुरा दी फिर बोली- जब हमें पता चला की आप को बहुत ज्यादा चोट लगी तो जी बहुत घबरा गया था
मैं- तो फिर मिलने क्यों न आयी
वो- हम गए थे हॉस्पीटल अपनी सहेली के साथ बहाना करके बस देखना चाहते थे एक बार आपको पर आपके घरवाले थे तो बस आ गए
मैं- मैं सोच ही रहा था की एक दो दिन में आपसे मिलु
वो- मिलने वाले सोचते नहीं जनाब
मैं- अजी आप कहिये तो सही हम तो 24 घंटे आपका ही दीदार करते रहे
वो- दीदार बाद में कीजियेगा यहाँ ऐसे खुले में बाते करना ठीक नहीं आइये हमारे खेतो की तरफ चलते है
मैं- चलिये
मैं बहुत खुश था कि छज्जे वाली से मुलाकात हो गयी उसकी साइकिल का हैंडल थामे हुए मैं उसके साथ उसके खेतो की तरफ आ गया पर हम वहां नहीं रुके वो मुझे एक तरफ ले आयी जहा पर कुछ घने पेड़ थे और उनके एक तरफ एक छोटा सा बगीचा सा बना था
वो- इसे हमने बनाया है
मैं- अच्छा है
वो- जब भी तन्हा होते है यहाँ आ जाते है इस तरफ की फिजा ही अलग है राहत सी मिलती है सुकून है
सच ही तो कहा था उसने राहत है सुकून हैं इसी तरफ तो मुझे पूजा मिली थी और उसके आने से कैसे ज़िन्दगी बदल सी गयी थी तभी मैंने उसे देखा वो मेरी और ही देख रही थी और मुझे ऐसे लगा की जैसे मैं कोई चोर हु
वो- कहा खो गए
मैं- बस यु ही
वो-आपके खेत भी इस तरफ ही है ना
मैं- हाँ कुछ दूर आगे है यहाँ से
वो- चलो अब खेतो के बहाने से ही मुलाकात हो जाया करेगी
मैं- एक बात कहु आप बहुत खूबसूरत है
वो- हां जानते है हम सब ऐसे ही कहते है
मैं- सोचता हूं आपसे पहले क्यों नहीं मिला
वो- हम तो आपको हमेशा से जानते है पर शायद आपको देर हो गयी हमारी तरफ तवज्जो देने में
मैं- अब क्या कर सकते समय से पहले क्या हो अब देखो कई बार दिल करे तो भी न मिल पाए कई बार मज़बूरी हो जाती तो कई बार बस किसी न किसी काम में उलझ जाते
वो- बात सही है पर अपनों के लिए थोड़ा टाइम निकाल लेना चाहिए किसी ने कहा है कि रिश्तो को भावनाओ और अपनेपन से सींचा जाना चाहिए तभी बात बनती है
मैं- कोशिश रहेगी आगे से आपको इंतज़ार न करना पड़े
वो- हम कर लेंगे इंतज़ार
वो हँसने लगी तो मैं भी मुस्कुरा दिया थोड़ा सा समय जो मिला उसके साथ अच्छा लगा बहुत सी बातें की हमने बस एक दूसरे से खुलने की कोशिश कर रहे थे हम
मैं- फिर कब मिलोगी
वो- कुछ दिन के लिए हम बुआ के घर जा रहे है उसके बाद मिलूंगी
मैं- कितने दिन के लिए
वो- हफ्ता भर तो लग जायेगा
मैं- आते ही खबर करना
वो- आप पता कर लेना
करीब दो घंटे हमने बाते की शाम भी होने लगी थी तो हम फिर थोड़ी दूरी बनाते हुए गांव की तरफ हो लिए घर के दरवाजे पर ही भाभी मिली पर उन्होंने कुछ कहा नहीं ये बात और थी की अंदर माँ सा से खूब खरी खोटी सुननी पडी
मैं अपने कमरे में आ गया कुछ देर बाद भाभी भी आई
भाभी- खाना लगा दू या खाकर आये हों
मैं- खाऊंगा
भाभी खाना ले आयी मैं पलंग पर बैठ के खाना खाने लगा वो पास में कुरसी पर बैठ गयी
भाभी- तो कहा थे
मैं- बस ऐसे ही
वो- ऐसे ही क्या
मैं- एक जरुरी काम आन पड़ा था तो समय लग गया
वो- अच्छा
मैं- भाभी उस रात घर पे कोई नहीं था कहा गए थे सब लोग
वो- तुम्हारे भैया के दोस्त के घर गए थे तुमको कितना जगाया था पर तुम पड़े थे
मैं- कब जगाया था मुझे क्यों नहीं पता
वो- आजकल तुम्हे होश ही कहा रहता है
भाभी ने मेरी तरफ देखते हुए हलकी सी अंगड़ाई ली जिस से उनका सीना तन सा गया उनके माध्य्म आकार की चूचिया खड़ी होने लगी जब उन्होंने देखा की मेरी निगाहे कहा है तो वो बोली- पहले खाना खा लो ये तो हमेशा ही तुम्हारे सामने रहती है
मैं बुरी तरह से लजा गया मैंने नजरे नीची कर ली और खाना खाने लगा जल्दी ही मैंने खाना ख़तम कर लिया तो उन्होंने मुझे पानी का गिलास पकड़ाया और बोली- कल हमे अपनी सहेली से मिलने जाना है और हम चाहते है की तुम साथ चलो
मैं- पर भाभी कल तो मुझे पढ़ने जाना है
वो- तुमने हमारी बात ठीक से सुनी नहीं कल दोपहर बाद चलेंगे
मैं- जैसा आप कहे वैसे भाई कहा है
वो- चाची के साथ नोहरे में गए है
मैं- ध्यान रखा कीजिये उनका कही चाची उनपर भी डोरे ना डाल ले
वो- देवर जी आप शायद भूल जाते है कि ठाकुरो की रगों मे खून के साथ साथ हवस भी दौड़ती है जब ठाकुरो की प्यास जागती हैं तो रिश्तो की डोर कब टूट जाती है पता भी नहीं चलता खैर, तुम्हारी जानकारी के लिए बता दू की चाची के तुम्हारे भाई से भी वैसे ही संबंध है जैसे की तुमसे है
भाभी ने ये बात बोलकर जैसे धमाका ही कर दिया था कुछ पलों के लिए मैं सोचने समझने की शक्ति ही खो बैठा जैसे चाची भाई से भी चुदती है नहीं ऐसा नहीं हो सकता
मैं- होश में तो हो भाभी आप अपने पति के बारे में ये बात कर रही है
वो- बुरा लगा न तुम्हे पर यही सच है शादी क़े कुछ महीनो बाद ही मैं इस बात को जान गयी थी बुरा लगता था पहले पर अब समय के साथ समझौता कर लिया है मैंने पर मैं नहीं चाहती थी की चाची अब तुम्हे भी उसी राह पर ले जाए इसिलिये मैंने तुम्हे उनसे दूर रहने को कहा
मैं- पर भाई सा आपके साथ ऐसे कैसे कर सकते है आपका हक़ चाची नहीं छीन सकती है
वो- ठाकुरायिनो का हक़ बस इन चार दिवारी के अंदर ही दम तोड़ देता हूं रही बात चाची की तो याद करो वो परिस्तिथियाँ जिनमे वो कितनी आसानी से तुम्हारी बाहों मे आ गिरी होगी
भाभी की बात सोलह आने सच थी मुझे कोई खास दिक्कत नहीं हुई थी उसको चोदने में पर मैं मुर्ख इस बात को समझ नहीं पाया था
भाभी- तुम्हे अपना मानती हूं तुमपर अपना हक समझती हूं इसलिए कभी कठोर व्यवहार करती हूं पर चाहती हु तुम इस दलदल से दूर रहो जीवन में तुम्हे बहुत वफादार लोग मिलेंगे अच्छे और गलत में फर्क करना सीखो
मैं- जैसा भाभी सा कहेंगी वैसा कुंदन करेगा
भाभी ने बर्तन समेटे और बोली- बाद में मिलते है तुमसे
मैं बहुत अच्छे मूड से घर आया था सोचा था की आराम करते हुए गाने सुनेंगे आयत को महसूस करेंगे पर अब दिमाग खराब हो चला था बहुत देर तक बस मैं सोचता रहा फिर मैंने निर्णय लिया की चाची से अब खुलके बात करूंगा
रात को मैं चाची के घर गया तो वो मुझे देखते ही खुश हो गयी और सीधा मेरी गोद में आ बैठी चाची ने अपने होंठ मेरे होंठो से जोड़ दिए और किस करने लगी पर मैंने उसे अपने से दूर कर दिया
पर एक कोने में संदूक था लकड़ी का जो काफी पुराना सा लग रहा था जिसे दीमक लगी हुई थी मैंने उसे खोला तो उसमें एक लाल जोड़ा था
पूजा- दुल्हन का जोड़ा है
मैं- हाँ ऐसे लगता है जैसे आजकल में ही बनवाया गया हो
वो- पुराना है इसपे सितारों की झालर है अब ऐसा कोई नहीं पहनता पर कुछ साल पहले ऐसे जोड़े चलन में थे और देख कुछ है क्या
मैंने देखा कुछ और कपडे थे और फिर नीचे बहुत से गहने थे सोने चांदी के
मैं- वजन तो काफी होगा
वो- हमें क्या रख देते है जिसका होगा ले जायेगा
हमने वो सामान रखा और कमरे को बंद किया और कुछ दूर एक पेड़ के नीचे बैठ गए बल्कि ये कहु की गहरी सोच में डूब गए
मैं- पूजा किसका होगा सामान
वो- अब मैं क्या जानू पर इतना जरूर है की यहाँ एक राज़ है जिसे हमे कुरेदना नहीं चाहिये यहाँ जो भी है या नहीं है अपने को उससे माफी मांग लेनी चाहिये और फिर यहाँ नहीं आएंगे
मैं- तुझे जो ठीक लगे वैसे भी इन ऊपरी पंगो में कुछ नहीं रखा है
मैंने पूजा की बात मान ली और हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगी फिर हम वहाँ से निकल लिए पूजा अपने घर चल दी और मैं गांव की ओर हमारे खेतो की तरफ आ ही रहा था की तभी मुझे साइकिल पर वो छज्जे वाली आती दिखी तो मैं रुक गया वो भी साइकिल से उतरी
मैं खेत के डोले पर बैठ गया वो मेरे पास आई
मैं- कैसी हो
वो- कैसी भी हु आपको क्या
मैं- नाराज हो
वो- मैं भला क्यों नाराज होने लगी
मैं- जानता हूं नाराज हो तुम्हारी नाराजगी जायज है पर बीते कुछ दिनों में जरा भी फुर्सत नहीं आयी लाल मंदिर वाले दिन के बाद कुछ समय हॉस्पिटल में बिताना पड़ा अभी घरवाले थोड़ी सख्ताई करते है तो इतना बाहर नहीं निकल पाया पर मैं सोच ही रहा था की आपसे मिलु
वो- जानते है कितनी फ़िक्र हो रही थी हमे और एक आप है क़ी
मैं- अब माफ़ भी करदो वैसे तुम इस तरफ तुम कहा जा रही थी
वो- आज सोचा खेतो की तरफ घूम लू बहुत दिन से इस तरफ आना हुआ नहीं था
मैं- अच्छा किया इसी बहाने मुलाकात हो गयी
वो- मुलाकात तो तब हो जब आप गांव में रुके हमने अपनी सहेली से पता किया था आप पता नहीं कहा लापता रहते है
मैं- बताया न बस उलझा हु कुछ कामो में
वो- इतने उलझे है की हमारी झूठी सी याद भी नहीं आयी
मैं- याद उनकी आती है जो दूर होते है भला आप मुझसे कहा दूर है
वो मुस्कुरा दी फिर बोली- जब हमें पता चला की आप को बहुत ज्यादा चोट लगी तो जी बहुत घबरा गया था
मैं- तो फिर मिलने क्यों न आयी
वो- हम गए थे हॉस्पीटल अपनी सहेली के साथ बहाना करके बस देखना चाहते थे एक बार आपको पर आपके घरवाले थे तो बस आ गए
मैं- मैं सोच ही रहा था की एक दो दिन में आपसे मिलु
वो- मिलने वाले सोचते नहीं जनाब
मैं- अजी आप कहिये तो सही हम तो 24 घंटे आपका ही दीदार करते रहे
वो- दीदार बाद में कीजियेगा यहाँ ऐसे खुले में बाते करना ठीक नहीं आइये हमारे खेतो की तरफ चलते है
मैं- चलिये
मैं बहुत खुश था कि छज्जे वाली से मुलाकात हो गयी उसकी साइकिल का हैंडल थामे हुए मैं उसके साथ उसके खेतो की तरफ आ गया पर हम वहां नहीं रुके वो मुझे एक तरफ ले आयी जहा पर कुछ घने पेड़ थे और उनके एक तरफ एक छोटा सा बगीचा सा बना था
वो- इसे हमने बनाया है
मैं- अच्छा है
वो- जब भी तन्हा होते है यहाँ आ जाते है इस तरफ की फिजा ही अलग है राहत सी मिलती है सुकून है
सच ही तो कहा था उसने राहत है सुकून हैं इसी तरफ तो मुझे पूजा मिली थी और उसके आने से कैसे ज़िन्दगी बदल सी गयी थी तभी मैंने उसे देखा वो मेरी और ही देख रही थी और मुझे ऐसे लगा की जैसे मैं कोई चोर हु
वो- कहा खो गए
मैं- बस यु ही
वो-आपके खेत भी इस तरफ ही है ना
मैं- हाँ कुछ दूर आगे है यहाँ से
वो- चलो अब खेतो के बहाने से ही मुलाकात हो जाया करेगी
मैं- एक बात कहु आप बहुत खूबसूरत है
वो- हां जानते है हम सब ऐसे ही कहते है
मैं- सोचता हूं आपसे पहले क्यों नहीं मिला
वो- हम तो आपको हमेशा से जानते है पर शायद आपको देर हो गयी हमारी तरफ तवज्जो देने में
मैं- अब क्या कर सकते समय से पहले क्या हो अब देखो कई बार दिल करे तो भी न मिल पाए कई बार मज़बूरी हो जाती तो कई बार बस किसी न किसी काम में उलझ जाते
वो- बात सही है पर अपनों के लिए थोड़ा टाइम निकाल लेना चाहिए किसी ने कहा है कि रिश्तो को भावनाओ और अपनेपन से सींचा जाना चाहिए तभी बात बनती है
मैं- कोशिश रहेगी आगे से आपको इंतज़ार न करना पड़े
वो- हम कर लेंगे इंतज़ार
वो हँसने लगी तो मैं भी मुस्कुरा दिया थोड़ा सा समय जो मिला उसके साथ अच्छा लगा बहुत सी बातें की हमने बस एक दूसरे से खुलने की कोशिश कर रहे थे हम
मैं- फिर कब मिलोगी
वो- कुछ दिन के लिए हम बुआ के घर जा रहे है उसके बाद मिलूंगी
मैं- कितने दिन के लिए
वो- हफ्ता भर तो लग जायेगा
मैं- आते ही खबर करना
वो- आप पता कर लेना
करीब दो घंटे हमने बाते की शाम भी होने लगी थी तो हम फिर थोड़ी दूरी बनाते हुए गांव की तरफ हो लिए घर के दरवाजे पर ही भाभी मिली पर उन्होंने कुछ कहा नहीं ये बात और थी की अंदर माँ सा से खूब खरी खोटी सुननी पडी
मैं अपने कमरे में आ गया कुछ देर बाद भाभी भी आई
भाभी- खाना लगा दू या खाकर आये हों
मैं- खाऊंगा
भाभी खाना ले आयी मैं पलंग पर बैठ के खाना खाने लगा वो पास में कुरसी पर बैठ गयी
भाभी- तो कहा थे
मैं- बस ऐसे ही
वो- ऐसे ही क्या
मैं- एक जरुरी काम आन पड़ा था तो समय लग गया
वो- अच्छा
मैं- भाभी उस रात घर पे कोई नहीं था कहा गए थे सब लोग
वो- तुम्हारे भैया के दोस्त के घर गए थे तुमको कितना जगाया था पर तुम पड़े थे
मैं- कब जगाया था मुझे क्यों नहीं पता
वो- आजकल तुम्हे होश ही कहा रहता है
भाभी ने मेरी तरफ देखते हुए हलकी सी अंगड़ाई ली जिस से उनका सीना तन सा गया उनके माध्य्म आकार की चूचिया खड़ी होने लगी जब उन्होंने देखा की मेरी निगाहे कहा है तो वो बोली- पहले खाना खा लो ये तो हमेशा ही तुम्हारे सामने रहती है
मैं बुरी तरह से लजा गया मैंने नजरे नीची कर ली और खाना खाने लगा जल्दी ही मैंने खाना ख़तम कर लिया तो उन्होंने मुझे पानी का गिलास पकड़ाया और बोली- कल हमे अपनी सहेली से मिलने जाना है और हम चाहते है की तुम साथ चलो
मैं- पर भाभी कल तो मुझे पढ़ने जाना है
वो- तुमने हमारी बात ठीक से सुनी नहीं कल दोपहर बाद चलेंगे
मैं- जैसा आप कहे वैसे भाई कहा है
वो- चाची के साथ नोहरे में गए है
मैं- ध्यान रखा कीजिये उनका कही चाची उनपर भी डोरे ना डाल ले
वो- देवर जी आप शायद भूल जाते है कि ठाकुरो की रगों मे खून के साथ साथ हवस भी दौड़ती है जब ठाकुरो की प्यास जागती हैं तो रिश्तो की डोर कब टूट जाती है पता भी नहीं चलता खैर, तुम्हारी जानकारी के लिए बता दू की चाची के तुम्हारे भाई से भी वैसे ही संबंध है जैसे की तुमसे है
भाभी ने ये बात बोलकर जैसे धमाका ही कर दिया था कुछ पलों के लिए मैं सोचने समझने की शक्ति ही खो बैठा जैसे चाची भाई से भी चुदती है नहीं ऐसा नहीं हो सकता
मैं- होश में तो हो भाभी आप अपने पति के बारे में ये बात कर रही है
वो- बुरा लगा न तुम्हे पर यही सच है शादी क़े कुछ महीनो बाद ही मैं इस बात को जान गयी थी बुरा लगता था पहले पर अब समय के साथ समझौता कर लिया है मैंने पर मैं नहीं चाहती थी की चाची अब तुम्हे भी उसी राह पर ले जाए इसिलिये मैंने तुम्हे उनसे दूर रहने को कहा
मैं- पर भाई सा आपके साथ ऐसे कैसे कर सकते है आपका हक़ चाची नहीं छीन सकती है
वो- ठाकुरायिनो का हक़ बस इन चार दिवारी के अंदर ही दम तोड़ देता हूं रही बात चाची की तो याद करो वो परिस्तिथियाँ जिनमे वो कितनी आसानी से तुम्हारी बाहों मे आ गिरी होगी
भाभी की बात सोलह आने सच थी मुझे कोई खास दिक्कत नहीं हुई थी उसको चोदने में पर मैं मुर्ख इस बात को समझ नहीं पाया था
भाभी- तुम्हे अपना मानती हूं तुमपर अपना हक समझती हूं इसलिए कभी कठोर व्यवहार करती हूं पर चाहती हु तुम इस दलदल से दूर रहो जीवन में तुम्हे बहुत वफादार लोग मिलेंगे अच्छे और गलत में फर्क करना सीखो
मैं- जैसा भाभी सा कहेंगी वैसा कुंदन करेगा
भाभी ने बर्तन समेटे और बोली- बाद में मिलते है तुमसे
मैं बहुत अच्छे मूड से घर आया था सोचा था की आराम करते हुए गाने सुनेंगे आयत को महसूस करेंगे पर अब दिमाग खराब हो चला था बहुत देर तक बस मैं सोचता रहा फिर मैंने निर्णय लिया की चाची से अब खुलके बात करूंगा
रात को मैं चाची के घर गया तो वो मुझे देखते ही खुश हो गयी और सीधा मेरी गोद में आ बैठी चाची ने अपने होंठ मेरे होंठो से जोड़ दिए और किस करने लगी पर मैंने उसे अपने से दूर कर दिया