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Guest
पूजा- बाबा, आखिर क्यों छुपा रहे हो आप जबकि हम जानते है मेनका आज भी जिंदा है तो ये ढोंग करने की जरूरत नहीं और मुद्दे पे आओ मैं समझ गयी हु इस षड्यंत्र को और मेनका के इरादे को भी अप्सरा सिद्धि से मेनका का प्रयोजन क्या है ये जानना है मुझे अभी
पूजा की बात सुनकर बाबा के चेहरे का रंग फक्क से उड़ गया साँस जैसे अटक सी गयी पानी का जो गिलास उसके हाथ में था अचानक से गिर गया बाबा की आँखों में मैंने एक डर सा देखा
बाबा- बेटी,ये एक बहुत ही गूढ़ सिद्धि होती है जिसमे एक हज़ार लड़कियों की बलि दी जाती है पर ये कोई साधारण बलि नहीं होती है उन लड़कियों की स्वर्ण प्रतिमा भेंट की जाती है परंतु वो स्वर्ण ऐसा वैसा नहीं होता मंदिर का स्वर्ण होता है
मैं-मंदिर का स्वर्ण समझा नहीं बाबा
बाबा- कुछ प्राचीन मंदिर अपने आप में बहुत राज़ समेटे होते है जैसे तंत्र का गहन ज्ञान कुछ जाग्रत देवी देवता या फिर खजाना और ऐसा ही खजाना जिसमे से कुछ स्वर्ण अगर उसके रक्षक किसी को प्रसन्न होकर दे दे वो ही ये अप्सरा सिद्धि कर सकता है
पूजा- पर कोई क्यों करता है ये सिद्धि
बाबा- क्योंकि, क्योंकि अगर कोई ये सिद्धि कर पाता है तो समस्त जग के महा भट्ट, नाहरवीर , यहाँ तक की श्री श्री जी जिन्होंने तंत्र के मंत्र लिखे है उनके साक्षत दर्शन हो जाते है धरती में जहाँ भी धन गड़ा हो हर पल सिद्ध करने वाले को नजर में रहेगा चाहे वो उसका मालिक हो न हो
मैं- मुझे नहीं लगता कि धन के लिए ये सिद्धि की जायेगी मेनका और राणाजी के पास धन की कोई कमी नहीं मामला यहाँ फस रहा है
बाबा- तो फिर एक ही बात हो सकती है
मैं- क्या
बाबा- देखो इस बात का कोई प्रमाण नहीं है की अब जो मैं तुम्हे बताने जा रहा हु वो पूर्ण सच हो, पर एक किवंदिति है कि जो अप्सरा सिद्धि कर ले उसके लिए एक और सिद्धि का मार्ग खुल जाता है और वो सिद्धि है क्षण को बदलने की
मैं- मतलब
पूजा- मतलब ये कुंदन की व्यक्ति समय पर विजय प्राप्त कर लेता है और अपनी मर्ज़ी अनुसार समय की धारा मोड़ सकता है
मैं- क्या ये हो सकता है
बाबा- अब ये स्तय है या नहीं इसका कोई प्रमाण नहीं पर किवंदिति अवश्य है
पूजा- पर किसका इतना सामर्थ्य बाबा
बाबा- पता नहीं, इतना साहस तो पद्मिनी भी न करती बेटी
पूजा- तो कौन आसरा अब क्योंकि समय पर जिसका जोर वो तो प्रलय ला दे
बाबा- एक रास्ता है पर राह कठिन है
मैं- उपाय बताओ बाबा
बाबा ने कुछ गहरी सांस ली फिर बोले- ऐसी सुहागन नारी जिसने 21 नाहरवीर साधे हो जिसकी आँखे स्वर्ण आभा वाली हो जिसका गठबंधन किसी ऐसे पुरुष से हुआ हो जिसने माता को अपने पौरुष से विजित बलि दी हो अगर वो उस दरबार में हाज़री लगाये और प्रार्थना करे तो बात बन जाये पर इस यज्ञ में जो की रात के तीसरे पहर पूरा होगा किसी तरह का विघ्न न आये
बाबा- अब ऐसा जोड़ा कहा से मिलेगा और बड़ी बात ये की वो हमारे लिए ऐसा क्यों करेगा
बाबा- इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता परन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि जातक को अपने ह्रदय का रक्त उतनी बार ही माता को अर्पण करना होगा जितनी बार उसकी पत्नी मन्त्र पढ़ेगी उतने ही छींटे वो देवी की प्रतिमा पर मारेगा और जैसे ही पत्थर की मूर्ति स्वर्ण प्रतिमा हो जाये समझो सिद्धि पूर्ण हुई
पूजा- बहुत दुष्कर राह है बाबा
बाबा ने अगले ही पल हमे जाने को कहा मैं कुछ और जानना चाहता था पर पूजा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- चलो
हम गाड़ी में बैठे पूजा- कुंदन हमे अभी लाल मंदिर चलना होगा
मैं- चलो
पूजा- एक बात और
मैं- क्या
वो- ये प्रण हम दोनों को पूरा करना होगा
मैं- पर कैसे
पूजा- मैं वो सुहागन हु जिसने 21 नाहरवीर साधे है मेरी आँखे देखो सुनहरी है, है ना
मैं- इस पर तो मेरा ध्यान ही ना गया
पूजा-और तुमने लाल मंदिर के अंगार की बलि दी थी हम ही वो जोड़ा है जो ये कर सकते है
मैं- पर हम कैसे
पूजा- हम ही क्योंकि लगता है राणाजी और मेनका अप्सरा सिद्धि से ऊपर चले गए होंगे
मैं- तो इसका मतलब जीजी
पूजा- हां भी और ना भी तंत्र में एक नियम है कि 999 ही होते है जबकि 1000 बोलते है क्योंकि 1000वाला खुद जातक होता है वो अपने रक्त से भोग जो देता है
मैं- तो जीजी
पूजा-अभी समय नहीं है तू चल बस
अगले कुछ घण्टे हमारे अफरा तफरी में बीते मैं नए पुजारी से मिलने गया और उसे बताया की कल रात हमे मंदिर खाली चाहिए पूजा तब तक आवश्यक तैयारियां करने गयी, मंदिर से लौटते समय मैं सोच रहा था की राणाजी कहा होंगे इस समय पल पल मुझे डर लग रहा था की कही जरा सी देरी हुई और कविता जीजी।।।।
सबसे अहम् बात थी की वो और मेनका आखिर क्यों वक़्त की धारा को मोड़ना चाहते थे, ऐसा कौन सा क्षण था जिसे वो बदलना चाहते थे राणाजी का जीवन सामान्य न होकर अपितु किसी चक्रव्यूह जैसा था जिसमे हम सब फस गए थे और दांव पर था मेरी बहन का जीवन
ऐसा लगता था की मैं जैसे बरसो से थका हुआ था मैं दिवार के सहारे बैठा हुआ था पूजा मेरे पास आई और बोली- घबराना नहीं मैं ढाल हु तुम्हारी
मैं- घबरा नहीं रहा हु सोच रहा हु की तूने मुझसे बाते छुपाई
पूजा- मज़बूरी थी मेरी पर तेरी कसम इस काम से निपट लू तुझे हर वो बात बता दूँगी जो तू जानने का हकदार है
मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसकी आँखों में देखते हुए बोला- मेरी जान है तू बस इतना जान ले कुंदन सिर्फ इसलिए ही है ताकि तू है
पूजा- जानती हूं
मैं- तो फिर बस
पूजा- कुंदन ये यज्ञ बहुत मुश्किल होगा हो सकता है की मेरे कदम डगमगाये, हों सकता है की मैं राख हो जाऊ हो सकता है की कोई ऐसा नजारा तू देखे जो तुझे पथ से भटकाये पर तू डिगना नहीं
मैं- तू बस हाथ थामे रखना मेरा बाकि जो हो देख लेंगे
पूजा बस हौले से मुस्कुरा दी
पूजा की बात सुनकर बाबा के चेहरे का रंग फक्क से उड़ गया साँस जैसे अटक सी गयी पानी का जो गिलास उसके हाथ में था अचानक से गिर गया बाबा की आँखों में मैंने एक डर सा देखा
बाबा- बेटी,ये एक बहुत ही गूढ़ सिद्धि होती है जिसमे एक हज़ार लड़कियों की बलि दी जाती है पर ये कोई साधारण बलि नहीं होती है उन लड़कियों की स्वर्ण प्रतिमा भेंट की जाती है परंतु वो स्वर्ण ऐसा वैसा नहीं होता मंदिर का स्वर्ण होता है
मैं-मंदिर का स्वर्ण समझा नहीं बाबा
बाबा- कुछ प्राचीन मंदिर अपने आप में बहुत राज़ समेटे होते है जैसे तंत्र का गहन ज्ञान कुछ जाग्रत देवी देवता या फिर खजाना और ऐसा ही खजाना जिसमे से कुछ स्वर्ण अगर उसके रक्षक किसी को प्रसन्न होकर दे दे वो ही ये अप्सरा सिद्धि कर सकता है
पूजा- पर कोई क्यों करता है ये सिद्धि
बाबा- क्योंकि, क्योंकि अगर कोई ये सिद्धि कर पाता है तो समस्त जग के महा भट्ट, नाहरवीर , यहाँ तक की श्री श्री जी जिन्होंने तंत्र के मंत्र लिखे है उनके साक्षत दर्शन हो जाते है धरती में जहाँ भी धन गड़ा हो हर पल सिद्ध करने वाले को नजर में रहेगा चाहे वो उसका मालिक हो न हो
मैं- मुझे नहीं लगता कि धन के लिए ये सिद्धि की जायेगी मेनका और राणाजी के पास धन की कोई कमी नहीं मामला यहाँ फस रहा है
बाबा- तो फिर एक ही बात हो सकती है
मैं- क्या
बाबा- देखो इस बात का कोई प्रमाण नहीं है की अब जो मैं तुम्हे बताने जा रहा हु वो पूर्ण सच हो, पर एक किवंदिति है कि जो अप्सरा सिद्धि कर ले उसके लिए एक और सिद्धि का मार्ग खुल जाता है और वो सिद्धि है क्षण को बदलने की
मैं- मतलब
पूजा- मतलब ये कुंदन की व्यक्ति समय पर विजय प्राप्त कर लेता है और अपनी मर्ज़ी अनुसार समय की धारा मोड़ सकता है
मैं- क्या ये हो सकता है
बाबा- अब ये स्तय है या नहीं इसका कोई प्रमाण नहीं पर किवंदिति अवश्य है
पूजा- पर किसका इतना सामर्थ्य बाबा
बाबा- पता नहीं, इतना साहस तो पद्मिनी भी न करती बेटी
पूजा- तो कौन आसरा अब क्योंकि समय पर जिसका जोर वो तो प्रलय ला दे
बाबा- एक रास्ता है पर राह कठिन है
मैं- उपाय बताओ बाबा
बाबा ने कुछ गहरी सांस ली फिर बोले- ऐसी सुहागन नारी जिसने 21 नाहरवीर साधे हो जिसकी आँखे स्वर्ण आभा वाली हो जिसका गठबंधन किसी ऐसे पुरुष से हुआ हो जिसने माता को अपने पौरुष से विजित बलि दी हो अगर वो उस दरबार में हाज़री लगाये और प्रार्थना करे तो बात बन जाये पर इस यज्ञ में जो की रात के तीसरे पहर पूरा होगा किसी तरह का विघ्न न आये
बाबा- अब ऐसा जोड़ा कहा से मिलेगा और बड़ी बात ये की वो हमारे लिए ऐसा क्यों करेगा
बाबा- इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता परन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि जातक को अपने ह्रदय का रक्त उतनी बार ही माता को अर्पण करना होगा जितनी बार उसकी पत्नी मन्त्र पढ़ेगी उतने ही छींटे वो देवी की प्रतिमा पर मारेगा और जैसे ही पत्थर की मूर्ति स्वर्ण प्रतिमा हो जाये समझो सिद्धि पूर्ण हुई
पूजा- बहुत दुष्कर राह है बाबा
बाबा ने अगले ही पल हमे जाने को कहा मैं कुछ और जानना चाहता था पर पूजा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- चलो
हम गाड़ी में बैठे पूजा- कुंदन हमे अभी लाल मंदिर चलना होगा
मैं- चलो
पूजा- एक बात और
मैं- क्या
वो- ये प्रण हम दोनों को पूरा करना होगा
मैं- पर कैसे
पूजा- मैं वो सुहागन हु जिसने 21 नाहरवीर साधे है मेरी आँखे देखो सुनहरी है, है ना
मैं- इस पर तो मेरा ध्यान ही ना गया
पूजा-और तुमने लाल मंदिर के अंगार की बलि दी थी हम ही वो जोड़ा है जो ये कर सकते है
मैं- पर हम कैसे
पूजा- हम ही क्योंकि लगता है राणाजी और मेनका अप्सरा सिद्धि से ऊपर चले गए होंगे
मैं- तो इसका मतलब जीजी
पूजा- हां भी और ना भी तंत्र में एक नियम है कि 999 ही होते है जबकि 1000 बोलते है क्योंकि 1000वाला खुद जातक होता है वो अपने रक्त से भोग जो देता है
मैं- तो जीजी
पूजा-अभी समय नहीं है तू चल बस
अगले कुछ घण्टे हमारे अफरा तफरी में बीते मैं नए पुजारी से मिलने गया और उसे बताया की कल रात हमे मंदिर खाली चाहिए पूजा तब तक आवश्यक तैयारियां करने गयी, मंदिर से लौटते समय मैं सोच रहा था की राणाजी कहा होंगे इस समय पल पल मुझे डर लग रहा था की कही जरा सी देरी हुई और कविता जीजी।।।।
सबसे अहम् बात थी की वो और मेनका आखिर क्यों वक़्त की धारा को मोड़ना चाहते थे, ऐसा कौन सा क्षण था जिसे वो बदलना चाहते थे राणाजी का जीवन सामान्य न होकर अपितु किसी चक्रव्यूह जैसा था जिसमे हम सब फस गए थे और दांव पर था मेरी बहन का जीवन
ऐसा लगता था की मैं जैसे बरसो से थका हुआ था मैं दिवार के सहारे बैठा हुआ था पूजा मेरे पास आई और बोली- घबराना नहीं मैं ढाल हु तुम्हारी
मैं- घबरा नहीं रहा हु सोच रहा हु की तूने मुझसे बाते छुपाई
पूजा- मज़बूरी थी मेरी पर तेरी कसम इस काम से निपट लू तुझे हर वो बात बता दूँगी जो तू जानने का हकदार है
मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसकी आँखों में देखते हुए बोला- मेरी जान है तू बस इतना जान ले कुंदन सिर्फ इसलिए ही है ताकि तू है
पूजा- जानती हूं
मैं- तो फिर बस
पूजा- कुंदन ये यज्ञ बहुत मुश्किल होगा हो सकता है की मेरे कदम डगमगाये, हों सकता है की मैं राख हो जाऊ हो सकता है की कोई ऐसा नजारा तू देखे जो तुझे पथ से भटकाये पर तू डिगना नहीं
मैं- तू बस हाथ थामे रखना मेरा बाकि जो हो देख लेंगे
पूजा बस हौले से मुस्कुरा दी