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Guest
हमारे बिल्डिंग में एक फैमिली रहती है, उसमें पति पत्नी और दो बच्चे है. एक 12 साल का लड़का है और 14 साल की लड़की है. वो भाभी हाउसवाईफ हैं और उसका पति का किराना दुकान है. पति महोदय दिन भर दुकान पर ही रहते हैं. भाभी की हाईट 5 फुट होगी, लेकिन दिखने में एकदम माल हैं.. भाभी साड़ी या गाउन पहनती थीं लेकिन उनको देख कर तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाए. उनका साईज शायद 36-30-34 का था. उनके बॉल उभर कर दिखते थे. पहले तो मैंने कभी भी भाभी की तरफ ध्यान नहीं दिया.
हमारे यहां पर कचरा की गाड़ी आती है तो घर का कचरा नीचे जाकर देना पड़ता था. एक दिन मेरी बीवी कुछ काम कर रही थी, तो वो मुझसे बोली कि आप ये कचरा नीचे डाल आइए.
मैंने उस वक्त बनियान पहनी हुई थी और नीचे शॉर्ट पहना था. आराम मिलने के कारण मैं शॉर्ट के अन्दर कुछ नहीं पहनता था.
मैंने कचरे की बाल्टी उठाई और लिफ्ट से नीचे जाने लगा. तभी चौथे माले पे लिफ्ट रुकी और उधर से वो भाभी अन्दर आ गईं. मैं थोड़ा सहम गया क्योंकि मैंने पूरे कपड़े नहीं पहने थे. मैंने लिफ्ट में लगे बाजू वाले आईने में देखा कि वो लगातार मुझे ही देख रही थीं.
लिफ्ट नीचे आई… हम दोनों वापस कचरा फेंककर लिफ्ट में आ गए. अब मैंने थोड़ी हिम्मत जुटाई और भाभी के चेहरे की तरफ देखा तो भाभी ने एक कातिलाना मुस्कान दे दी. भाभी ने अपने होंठ को दांत के नीचे दबाया.
उनकी इस अदा से ऐसा लग रहा था कि साली लिफ्ट में ही मेरा चोदन कर देगी. भाभी का फ्लोर आ गया और लिफ्ट से निकल गईं.
फिर कई बार कभी हम लोग लिफ्ट में मिलते, तो बात करने लगे.
एक दिन मैं ऑफिस से घर आया तो वो मेरे घर में मेरे पत्नी के साथ बात कर रही थीं. उन्होंने टिफिन बनाने का काम शुरू कर दिया था. उसके बाद से उनका मेरे घर आना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था. मैं भाभी का नाम बताना भूल गया, उनका नाम कोमल है.
उधर ललित की पत्नी रश्मि भी पेट से हो गई थी तो वो भी उसके मायके चली गई थी. शनिवार का दिन था, कोमल भाभी करीबन 8.30 को घर आईं और मेरी पत्नी से बोलीं कि उनका सिलेंडर खत्म हो गया है, दूसरा लगवाना है, लेकिन मेरे पति सुबह 7 बजे ही दुकान चले गए और बच्चे भी स्कूल गए हैं, प्लीज़ आप लगवा दीजिये ना.
कोमल भाभी गाऊन पहन कर आई थीं और उसमें से उनकी ब्रा की पट्टी साफ़ दिख रही थी.
उस दिन शनिवार था इसलिए मैं भी थोड़ी देर पहले ही उठा था. मेरी पत्नी ने मुझसे बोला- प्लीज़ उनका सिलेंडर लगवा दीजिए ना.
जैसे ही मेरी बीवी के मुख से ये शब्द सुने तो कोमल भाभी के चेहरे पे मुस्कान आ गई.
मैंने भाभी से बोला- आप चलिये, मैं आता हूँ.
कोमल भाबी अपनी गांड मटकाते हुए चली गईं, मैंने कपड़े पहने और लिफ्ट से उनके घर आ गया, दरवाजा खुला था. तब भी मैंने बेल बजाई और अन्दर चला गया. उधर सोफे पे एक कोने में एक ब्रा पड़ी हुई दिखी.
मैंने भाभी को पुकारा तो वो बोलीं- भैया, आप किचन में आ जाइये.
मैं अन्दर गया तो देखा वो जमीन पे बैठ कर सब्जी काट रही थीं. मुझे देख कर वो उठने को हुईं, तो झुकने की वजह से उनके चुचे गाऊन बाहर आने के लिए बेताब दिखे.. अन्दर ब्रा नहीं दिखी. मतलब भाभी ने घर आने के बाद तुरंत ब्रा निकाल दी थी और सोफे पर डाल दी थी.
कुछ बात मेरी समझ में आने लगी थी.
मैंने उनसे पूछा- बताइये किधर लगाना है सिलेंडर!
तो भाभी ने जवाब दिया- नीचे लगाईये न.. मतलब किचन की स्लैब के नीचे रेग्युलेटर है.
मैंने उनको बोला- वहां पे बहुत कचरा है पहले आप साफ कर लो, तो मैं वहां पे सरका के लगवा देता हूँ.. सिलेंडर.
हम दोनों लंड चूत लगाने की बात कर रहे थे या सिलेंडर लगाने की बात कर रहे थे ये हम दोनों को समझ में आ रहा था.
फिर मैं वहीं खड़ा रहा, वो झाड़ू लेकर आईं और मेरी ओर गांड करके एकदम मुझे सटक कर खड़ी हो गईं. फिर झुकी और झाड़ू लगाने लगीं और आगे पीछे होने लगीं. इससे उनकी गांड मेरे लंड पे रगड़ रही थी, जिस वजह से मेरा लंड अपना आकार ले रहा था.
भाभी ने सब कचरा साफ किया, तभी वो खड़ी हुईं. तभी एक घटना घटी, उनके गाऊन से एक छोटा सा खीरा नीचे गिरा जो पूरा गीला था. मैंने वो खीरा उठाया तो कोमल भाभी वहां से भाग गईं. मैंने वो खीरा को सूंघा तो पेशाब और चुत के पानी की सुगंध आ रही थी. मैंने खीरा किचन की स्लैब पर रख दिया.
फिर मैं नीचे बैठकर सिलेंडर लगा रहा था, तभी कोमल भाभी वहां आ गईं.
मैं बोला- खीरा के बजाए हमें बुला लिया होता.
तो बोलीं- इसलिए तो बुलाया है.
हमारे यहां पर कचरा की गाड़ी आती है तो घर का कचरा नीचे जाकर देना पड़ता था. एक दिन मेरी बीवी कुछ काम कर रही थी, तो वो मुझसे बोली कि आप ये कचरा नीचे डाल आइए.
मैंने उस वक्त बनियान पहनी हुई थी और नीचे शॉर्ट पहना था. आराम मिलने के कारण मैं शॉर्ट के अन्दर कुछ नहीं पहनता था.
मैंने कचरे की बाल्टी उठाई और लिफ्ट से नीचे जाने लगा. तभी चौथे माले पे लिफ्ट रुकी और उधर से वो भाभी अन्दर आ गईं. मैं थोड़ा सहम गया क्योंकि मैंने पूरे कपड़े नहीं पहने थे. मैंने लिफ्ट में लगे बाजू वाले आईने में देखा कि वो लगातार मुझे ही देख रही थीं.
लिफ्ट नीचे आई… हम दोनों वापस कचरा फेंककर लिफ्ट में आ गए. अब मैंने थोड़ी हिम्मत जुटाई और भाभी के चेहरे की तरफ देखा तो भाभी ने एक कातिलाना मुस्कान दे दी. भाभी ने अपने होंठ को दांत के नीचे दबाया.
उनकी इस अदा से ऐसा लग रहा था कि साली लिफ्ट में ही मेरा चोदन कर देगी. भाभी का फ्लोर आ गया और लिफ्ट से निकल गईं.
फिर कई बार कभी हम लोग लिफ्ट में मिलते, तो बात करने लगे.
एक दिन मैं ऑफिस से घर आया तो वो मेरे घर में मेरे पत्नी के साथ बात कर रही थीं. उन्होंने टिफिन बनाने का काम शुरू कर दिया था. उसके बाद से उनका मेरे घर आना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था. मैं भाभी का नाम बताना भूल गया, उनका नाम कोमल है.
उधर ललित की पत्नी रश्मि भी पेट से हो गई थी तो वो भी उसके मायके चली गई थी. शनिवार का दिन था, कोमल भाभी करीबन 8.30 को घर आईं और मेरी पत्नी से बोलीं कि उनका सिलेंडर खत्म हो गया है, दूसरा लगवाना है, लेकिन मेरे पति सुबह 7 बजे ही दुकान चले गए और बच्चे भी स्कूल गए हैं, प्लीज़ आप लगवा दीजिये ना.
कोमल भाभी गाऊन पहन कर आई थीं और उसमें से उनकी ब्रा की पट्टी साफ़ दिख रही थी.
उस दिन शनिवार था इसलिए मैं भी थोड़ी देर पहले ही उठा था. मेरी पत्नी ने मुझसे बोला- प्लीज़ उनका सिलेंडर लगवा दीजिए ना.
जैसे ही मेरी बीवी के मुख से ये शब्द सुने तो कोमल भाभी के चेहरे पे मुस्कान आ गई.
मैंने भाभी से बोला- आप चलिये, मैं आता हूँ.
कोमल भाबी अपनी गांड मटकाते हुए चली गईं, मैंने कपड़े पहने और लिफ्ट से उनके घर आ गया, दरवाजा खुला था. तब भी मैंने बेल बजाई और अन्दर चला गया. उधर सोफे पे एक कोने में एक ब्रा पड़ी हुई दिखी.
मैंने भाभी को पुकारा तो वो बोलीं- भैया, आप किचन में आ जाइये.
मैं अन्दर गया तो देखा वो जमीन पे बैठ कर सब्जी काट रही थीं. मुझे देख कर वो उठने को हुईं, तो झुकने की वजह से उनके चुचे गाऊन बाहर आने के लिए बेताब दिखे.. अन्दर ब्रा नहीं दिखी. मतलब भाभी ने घर आने के बाद तुरंत ब्रा निकाल दी थी और सोफे पर डाल दी थी.
कुछ बात मेरी समझ में आने लगी थी.
मैंने उनसे पूछा- बताइये किधर लगाना है सिलेंडर!
तो भाभी ने जवाब दिया- नीचे लगाईये न.. मतलब किचन की स्लैब के नीचे रेग्युलेटर है.
मैंने उनको बोला- वहां पे बहुत कचरा है पहले आप साफ कर लो, तो मैं वहां पे सरका के लगवा देता हूँ.. सिलेंडर.
हम दोनों लंड चूत लगाने की बात कर रहे थे या सिलेंडर लगाने की बात कर रहे थे ये हम दोनों को समझ में आ रहा था.
फिर मैं वहीं खड़ा रहा, वो झाड़ू लेकर आईं और मेरी ओर गांड करके एकदम मुझे सटक कर खड़ी हो गईं. फिर झुकी और झाड़ू लगाने लगीं और आगे पीछे होने लगीं. इससे उनकी गांड मेरे लंड पे रगड़ रही थी, जिस वजह से मेरा लंड अपना आकार ले रहा था.
भाभी ने सब कचरा साफ किया, तभी वो खड़ी हुईं. तभी एक घटना घटी, उनके गाऊन से एक छोटा सा खीरा नीचे गिरा जो पूरा गीला था. मैंने वो खीरा उठाया तो कोमल भाभी वहां से भाग गईं. मैंने वो खीरा को सूंघा तो पेशाब और चुत के पानी की सुगंध आ रही थी. मैंने खीरा किचन की स्लैब पर रख दिया.
फिर मैं नीचे बैठकर सिलेंडर लगा रहा था, तभी कोमल भाभी वहां आ गईं.
मैं बोला- खीरा के बजाए हमें बुला लिया होता.
तो बोलीं- इसलिए तो बुलाया है.