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पडोसन भाभी की ठरक

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Guest
हमारे बिल्डिंग में एक फैमिली रहती है, उसमें पति पत्नी और दो बच्चे है. एक 12 साल का लड़का है और 14 साल की लड़की है. वो भाभी हाउसवाईफ हैं और उसका पति का किराना दुकान है. पति महोदय दिन भर दुकान पर ही रहते हैं. भाभी की हाईट 5 फुट होगी, लेकिन दिखने में एकदम माल हैं.. भाभी साड़ी या गाउन पहनती थीं लेकिन उनको देख कर तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाए. उनका साईज शायद 36-30-34 का था. उनके बॉल उभर कर दिखते थे. पहले तो मैंने कभी भी भाभी की तरफ ध्यान नहीं दिया.

हमारे यहां पर कचरा की गाड़ी आती है तो घर का कचरा नीचे जाकर देना पड़ता था. एक दिन मेरी बीवी कुछ काम कर रही थी, तो वो मुझसे बोली कि आप ये कचरा नीचे डाल आइए.

मैंने उस वक्त बनियान पहनी हुई थी और नीचे शॉर्ट पहना था. आराम मिलने के कारण मैं शॉर्ट के अन्दर कुछ नहीं पहनता था.

मैंने कचरे की बाल्टी उठाई और लिफ्ट से नीचे जाने लगा. तभी चौथे माले पे लिफ्ट रुकी और उधर से वो भाभी अन्दर आ गईं. मैं थोड़ा सहम गया क्योंकि मैंने पूरे कपड़े नहीं पहने थे. मैंने लिफ्ट में लगे बाजू वाले आईने में देखा कि वो लगातार मुझे ही देख रही थीं.

लिफ्ट नीचे आई… हम दोनों वापस कचरा फेंककर लिफ्ट में आ गए. अब मैंने थोड़ी हिम्मत जुटाई और भाभी के चेहरे की तरफ देखा तो भाभी ने एक कातिलाना मुस्कान दे दी. भाभी ने अपने होंठ को दांत के नीचे दबाया.

उनकी इस अदा से ऐसा लग रहा था कि साली लिफ्ट में ही मेरा चोदन कर देगी. भाभी का फ्लोर आ गया और लिफ्ट से निकल गईं.

फिर कई बार कभी हम लोग लिफ्ट में मिलते, तो बात करने लगे.

एक दिन मैं ऑफिस से घर आया तो वो मेरे घर में मेरे पत्नी के साथ बात कर रही थीं. उन्होंने टिफिन बनाने का काम शुरू कर दिया था. उसके बाद से उनका मेरे घर आना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था. मैं भाभी का नाम बताना भूल गया, उनका नाम कोमल है.

उधर ललित की पत्नी रश्मि भी पेट से हो गई थी तो वो भी उसके मायके चली गई थी. शनिवार का दिन था, कोमल भाभी करीबन 8.30 को घर आईं और मेरी पत्नी से बोलीं कि उनका सिलेंडर खत्म हो गया है, दूसरा लगवाना है, लेकिन मेरे पति सुबह 7 बजे ही दुकान चले गए और बच्चे भी स्कूल गए हैं, प्लीज़ आप लगवा दीजिये ना.

कोमल भाभी गाऊन पहन कर आई थीं और उसमें से उनकी ब्रा की पट्टी साफ़ दिख रही थी.

उस दिन शनिवार था इसलिए मैं भी थोड़ी देर पहले ही उठा था. मेरी पत्नी ने मुझसे बोला- प्लीज़ उनका सिलेंडर लगवा दीजिए ना.

जैसे ही मेरी बीवी के मुख से ये शब्द सुने तो कोमल भाभी के चेहरे पे मुस्कान आ गई.

मैंने भाभी से बोला- आप चलिये, मैं आता हूँ.

कोमल भाबी अपनी गांड मटकाते हुए चली गईं, मैंने कपड़े पहने और लिफ्ट से उनके घर आ गया, दरवाजा खुला था. तब भी मैंने बेल बजाई और अन्दर चला गया. उधर सोफे पे एक कोने में एक ब्रा पड़ी हुई दिखी.

मैंने भाभी को पुकारा तो वो बोलीं- भैया, आप किचन में आ जाइये.

मैं अन्दर गया तो देखा वो जमीन पे बैठ कर सब्जी काट रही थीं. मुझे देख कर वो उठने को हुईं, तो झुकने की वजह से उनके चुचे गाऊन बाहर आने के लिए बेताब दिखे.. अन्दर ब्रा नहीं दिखी. मतलब भाभी ने घर आने के बाद तुरंत ब्रा निकाल दी थी और सोफे पर डाल दी थी.

कुछ बात मेरी समझ में आने लगी थी.

मैंने उनसे पूछा- बताइये किधर लगाना है सिलेंडर!

तो भाभी ने जवाब दिया- नीचे लगाईये न.. मतलब किचन की स्लैब के नीचे रेग्युलेटर है.

मैंने उनको बोला- वहां पे बहुत कचरा है पहले आप साफ कर लो, तो मैं वहां पे सरका के लगवा देता हूँ.. सिलेंडर.

हम दोनों लंड चूत लगाने की बात कर रहे थे या सिलेंडर लगाने की बात कर रहे थे ये हम दोनों को समझ में आ रहा था.

फिर मैं वहीं खड़ा रहा, वो झाड़ू लेकर आईं और मेरी ओर गांड करके एकदम मुझे सटक कर खड़ी हो गईं. फिर झुकी और झाड़ू लगाने लगीं और आगे पीछे होने लगीं. इससे उनकी गांड मेरे लंड पे रगड़ रही थी, जिस वजह से मेरा लंड अपना आकार ले रहा था.

भाभी ने सब कचरा साफ किया, तभी वो खड़ी हुईं. तभी एक घटना घटी, उनके गाऊन से एक छोटा सा खीरा नीचे गिरा जो पूरा गीला था. मैंने वो खीरा उठाया तो कोमल भाभी वहां से भाग गईं. मैंने वो खीरा को सूंघा तो पेशाब और चुत के पानी की सुगंध आ रही थी. मैंने खीरा किचन की स्लैब पर रख दिया.

फिर मैं नीचे बैठकर सिलेंडर लगा रहा था, तभी कोमल भाभी वहां आ गईं.

मैं बोला- खीरा के बजाए हमें बुला लिया होता.

तो बोलीं- इसलिए तो बुलाया है.

 
इतना बोल कर भाभी साईड से नीचे झुक कर देखने लगीं कि मैं क्या कर रहा हूँ.. वे ऐसे झुक कर देख रही थी कि जैसे उन्होंने वो जगह कभी देखी ही नहीं थी. लेकिन असल बात ये थी कि उन्होंने गाऊन के ऊपर वाले अपने दो बटन खोल दिए थे, जिससे उनके चुचे लगभग बाहर आ रहे थे. एक तो बड़े बड़े मम्मे थे और पूरे के पूरे बाहर को लटकने की पोजीशन में थे. मतलब मेरी तो कंडीशन बहुत बुरी हो चली थी, ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड भाभी के चुचे देख कर बस यहीं पे ही पानी निकाल देगा.

मैंने सिलेंडर लगाया और अपने लंड पर हाथ से दबाते हुए भाभी से बोला- लो, अब आप चैक कर लो.

कहा तो मैंने सिलेंडर चैक करने का था, लेकिन यूं कहा था कि जैसे अपना लंड चैक करने के लिए कहा हो. लेकिन भाभी ने गैस सिलेंडर ही चैक किया.

फिर मैं उधर से निकल ही रहा था… तो भाभी बोलीं कि एक मिनट रुको… मुझे ऊपर से शक्कर निकालनी है, तो आप मुझे पकड़ने में मेरी मदद कर देंगे?

मैं बोला- ठीक है.

वो किचन की स्लैब पे चढ़ गईं और किचन की स्लैब के विपरीत दिशा में माला था. जब वो ऊपर चढ़ीं, तब उन्होंने अपना गाऊन करीबन जांघ तक ऊपर को उठा लिया था. स्लैब पर चढ़ जाने के बाद अपने गाउन को और ऊपर ले लिया और गांठ बांध ली. उनकी इस हरकत की वजह से उनकी नंगी चुत मुझे दिखाई दे रही थी. इस वक्त मेरा मुँह उनके चुत के एकदम सामने था.. और भाभी की चुत से पानी टपक रहा था. शायद वो बहुत ही उत्तेजित हो गई थीं.

वो माले से डब्बा लेने के लिए हुईं तो उनकी चुत मेरे मुँह पे लग गई. जब चुत मुँह के सामने होगी तो जीभ बाहर तो आएगी ही. मैंने बिना देर किए जीभ निकाली और भाभी की चुत चूसने लग गया. क्योंकि भाभी का तो ये बहाना था कि उनको शक्कर का डब्बा निकालना है, दरअसल भाभी कुछ और ही चाहती थीं.

मैंने जैसे ही चुत पर जीभ फेरी, भाभी की तो मानो मुराद पूरी हो गई, उन्होंने मेरे सिर को पकड़ा और जोर से अपनी चुत पर दबा दिया. मैं भी भाभी की चुत में जीभ डालकर चुत को चोदने लगा. साथ ही चुत के दाने को मैंने जोर से दबा दिया.

शायद कोमल भाभी इस हमले के लिए तैयार नहीं थीं, वो एकदम उत्तेजित होकर दो मिनट में ही झड़ गईं. भाभी की चुत का पूरा पानी मेरे मुँह में आ गया और वे मेरे शऱीर पर निढाल होकर गिर गईं. मैंने उन्हें गोद में लिया और नीचे उतारा. किस करने के बहाने मैंने उनकी ही चुत का पानी थोड़ा उनके मुँह में डाल दिया. उनकी साँसें जोर जोर से चल रही थीं.

भाभी मुझसे लिपटते हुए बोलीं- भैय्या, जिंदगी में पहली बार किसी ने मेरी चुत चाटी है… मेरे पति तो कुछ करते नहीं इसलिए गाजर, मूली और खीरे का सहारा लेना पड़ता है.

मैंने कोमल भाभी से पूछा- ये सब मेरे साथ ही क्यों?

तो बोलीं- ये बहुत लंबी कहानी है…. मुझे किसी ने बोला है कि आपका ध्यान रखूँ…. इसमें तो मेरा भी फायदा है ना.. आपको जो चाहिए और आपने सोचा नहीं होगा वो भी मिलेगा.

तभी मेरा मोबाईल बजा, मेरी पत्नी का फोन था. वो बोली- क्या सिलेंडर चेंज कर दिया?

तो मैंने जवाब दिया- हां हो गया.. बस 5 मिनट में आता हूँ…. रेग्युलेटर का थोड़ा सा प्रोब्लम है… तेल डाला है, अभी शायद सिलेंडर में भी तेल लगाना पड़ेगा क्योंकि वो रेग्यूलेटर में नहीं जा रहा है.. अभी आता हूँ.

तो वो बोली- ठीक है, मैं नहाने जा रही हूँ.. दरवाजा खुला है.

मैं बोला- ठीक है.

कोमल भाभी मेरी तरफ देख रही थीं. मैंने उनको बोला- आपका तो हो गया, मेरा कौन करेगा.. अभी सिलेंडर पर अपना तेल लगाओ मतलब मेरा लंड चूसो.

भाभी ने समय न गंवाते हुए मेरे शॉर्ट को नीचे किया और लंड मुँह में लेकर चूसने लगीं. भाभी ने मेरा पूरा लंड मुँह में अन्दर तक ले लिया. मेरा लंड भाभी के गले तक जा रहा था.

भाभी बहुत उत्तेजित थीं.. मैंने उनका सर पकड़ कर उसके मुँह को ही चोदने लगा. मैं भी गरम था तो 5 मिनट में ही मेरा भी वीर्य निकल गया, जो उन्होंने एक बूंद भी बर्बाद नहीं किया और सारा निगल गईं. उनके चेहरे पे एक खुशी झलक रही थी. मैं फिर वहां से घर आ गया.

चूंकि समय कम था इसलिए चुदाई का मजा नहीं लिया जा सका.
 
अब तक आपने पढ़ा कि कोमल भाभी और मैंने एक दूसरे के लंड चूत का रस चुसाई करके निकाल दिया था.

अब आगे..

इस वक्त हमें सेक्स करने का मौका नहीं मिला था. लेकिन ये तय हो गया था कि वो मेरे लंड को अपनी चुत में लेकर ही रहेंगी.

फिर वो टाईम भी आ गया कि मैंने भाभी को सेक्स का सुख दिया.

यूं ही दिन बीतते गए.. हालांकि जल्दी मौका नहीं मिला. बस 2-3 महीने तक कभी कभार लिफ्ट में मिल जाती तो किस कर देतीं या मेरा लंड दबा देतीं. मैं भी उनके चूतड़ और चुचे दबा देता. किसी को शक भी नहीं होता. कोमल भाभी का टिफिन का बिजनेस भी अच्छा चल रहा था. उनका मेरे घर आना जाना चालू ही था.

घर पे आने का बाद अगर मेरी बीवी सामने ना हो तो नीचे झुक कर भाभी अपने चुचों का दीदार करा देती थीं. भाभी जब भी मेरे घर आतीं तो अन्दर कुछ नहीं पहनती थीं. उनको लगता था कि पता नहीं कब लंड लेने का मौका मिल जाए.

गरमी के दिन थे मेरी बीबी बच्चे लेकर 15 दिन के लिेए छुट्टी बिताने मायके चली गई. जाते वक्त मेरी बीवी ने कोमल भाभी को बोल दिया कि आप सुबह शाम का टिफिन घर पे भेज दिया करो.

भाभी बोलीं- सब लोग गाँव जा रहे हैं तो खाली भैया का ही टिफिन है.. तो कोई दिक्कत नहीं.. मैं सब संभाल लूँगी.

दो तीन दिन तक कोमल भाभी के बच्चे ने टिफिन लाकर दिया. एक दिन सुबह टिफिन आया ही नहीं, तो मैं वैसे ही ऑफिस चला गया. शाम को ऑफिस से आते वक्त उनके घर गया तो पता चला… गाँव में कोई बीमार है तो बच्चे और उसके पति 10-12 दिन के लिए गाँव गए हैं.

मैंने उनको बोला- जाने दो, मैं बाहर से कुछ मंगवा लेता हूँ.

भाभी बोलीं- क्यों, मेरे हाथ का स्वाद अच्छा नहीं लगता क्या?

मैंने तुरंत जवाब दिया- जब चुत का स्वाद अच्छा लगता है.. तो हाथ की क्या पूछ रही हो मेरी जान?

भाभी इठला कर बोलीं- ठीक है आप फ्रेश होकर आ जाओ, मैं आपके लिए मस्त खाना बनाकर रखती हूँ.. और भी कुछ परोसती हूँ.

बिल्डिंग में से बहुत से लोग छुट्टी पे गए थे, तो ज्यादातर फ्लैट बंद थे. मैं आठ बजे कोमल भाभी के घर गया, बेल बजाई तो भाभी ने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी. उन्होंने साड़ी बहुत टाईट पहनी थी और ट्रांसपेरेंट थी. पूरा पल्ला ऊपर लपेट लिया था, कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, ज्यादातर वो ऐसा पल्ला नहीं लेती थीं. हॉल में डिम लाईट लगी थी, तो कुछ ज्यादा दिखाई नहीं दिया.

मैं बैठ गया, वो अन्दर चली गईं. फिर 5 मिनट बाद भाभी ने आवाज लगाई- आ जाइये भाईसाहब खाने के लिए..

मैंने अन्दर जाकर देखा तो मैं दंग रह गया. उनकी साड़ी जो पूरी पारदर्शी थी, उनके बदन से लिपटी थी और उन्होंने साड़ी के नीचे कुछ भी नहीं पहना था. मतलब अपने जिस्म पर ऊपर खाली साड़ी ही लपेटी हुई थी.

मेरा तो लंड उठने लगा. लंड को फूलता देखकर भाभी बोलीं- इतनी जल्दी क्या है.. जरा सब्र करो.

भाभी ने खाना परोसा और बोलीं- पहले आप खाना खा लो.

फिर मैंने बोला- कैसे खाऊँ.. आप ही खिला दो.

तो बोलीं- खाना मेरे मुँह से खाओगे या हाथ से खाओगे?

मेरी समझ में नहीं आया… मैंने बोल दिया- मुँह से खाऊंगा.

उसने एक ग्रास उठाया, थोड़ा सा चबाया और बोली- अभी मुँह खोलो अपना!

भाभी ने मेरी गोद में आकर मेरे मुँह में सब डाल दिया.

यह कुछ नया था.. मुझे मजा आ गया. हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे को खाना खिलाते रहे.

फिर बोलीं- आपके लिए स्वीट डिश अन्दर रखी है, अगर आपको पसंद तो निकालूँ.

मैंने हां किया, तो भाभी ने साड़ी निकाल दी और पूरी नंगी हो गईं. मेरी कुछ समझ में नहीं आया कि स्वीट डिश किधर है.
 
साड़ी निकलने के बाद देखा तो उनकी चुत में कुछ फंसा सा दिख रहा था.

मैंने बोला- ये क्या है?

तो भाभी बोलीं- तुम्हारे लिए स्वीड डिश यानि केला है.

ये छोटा वाला केला था, वो भी छिला हुआ था. मैंने उसे सूंघा तो चुत के पानी की सुगंध आ रही थी. फिर भाभी ने केला अपनी चुत से निकाल कर मेरे मुँह में डाला और हम दोनों ने एक दूसरे के मुँह डाल के उसको चूसते हुए खाया. ये मेरे लिए बहुत उत्तेजित होने वाली बात थी. मेरा लंड अभी बाहर आने के लिए उतावला हो गया था.

फिर हम दोनों किचन से हॉल में आ गए. भाभी तो पूरी नंगी ही थीं.. उन्होंने मेरा लोअर निकाल दिया और टीशर्ट को भी निकाल दिया. मुझे भी नंगा कर दिया. फिर किचन से चाकलेट सॉस लेकर आईं और मेरे लंड के ऊपर लगाकर जोर जोर से लंड चूसने लगीं.

जब तक मेरा वीर्य नहीं निकल गया, तब तक भाभी मेरे लंड को चूसती रहीं और फिर पूरा पानी पी गईं.

थोड़ी देर आराम करने के बाद मैंने चॉकलेट सॉस उनकी चुत पे डाल के चूसने लगा. पांच मिनट में ही भाभी की चुत ने पानी छोड़ दिया.

अब भाभी बोलने लगीं- अभी बस भी करो भाईसाहब.. अब डाल भी दो लंड को मेरी चुत में.. अब मुझसे सहन नहीं हो रहा है… आपके लंड के लिए कितने महीने से मैं तड़प रही हूँ.

मैंने उनको बेड लिटाया और पोजीशन बना कर एकदम जोर से अपने लंड को भाभी की चुत में पेल दिया. भाभी जोर से चिल्लाईं. वो तो अच्छा हुआ कि बिल्डिंग में कोई नहीं था. मैंने तुरंत उनके मुँह पर हाथ रखा और उसके ऊपर चिल्लाया- साली मेरे को मरावाएगी तू…

तो बोलीं- कमीने धीरे नहीं डाल सकता क्या लंड चुत में… मैं कोई रंडी नहीं हूँ. एक तो 6-7 महीने बाद मैं चुदवा रही हूँ.. ऊपर से तेरा मूसल लंड मेरी चूत में एकदम से ठूंस दिया.

मैंने उनसे माफी मांगी, तो बोलीं- मुझे भी माफ कर देना… मैंने आपको गाली दी.

मैंने उनको समझाया- देख, गाली देने में ही तो मजा आता है!

भाभी बोलीं- फिर कमीने रुका क्यों तू भोसड़ी के.. चोद ना जोर से मुझे..

मैंने भी उनकी गाली का मजा लिया और चालू हो गया- ले कुतिया साली लंड खा छिनाल!

“हां चोद मादरचोद.. अपनी इस रंडी की चुत फाड़ डाल… आह.. आ जोर जोर.. से चुदाई कर आह.. आह.. और जोर से…”

बस कुछ ही मिनट में भाभी शांत हो गईं और बोलीं- पहली बार मेरा पानी निकला… चुदते समय…

मैं समझ गया कि भाभी का आदमी इनकी चूत के पानी निकलने से पहले ही झड़ जाता होगा.

अभी मेरा पानी निकलना बाकी था… मैंने उनको घोड़ी बनने के लिए कहा… और पीछे से चोदने लगा… और 20 मिनट बाद मेरा होने आया था..

मैंने उनकी चूचियां मसलते हुए पूछा- मेरी रंडी.. बता पानी कहां निकालूँ… चुत में या बाहर.

तो बोलीं- मेरे मुँह में डाल दो.

मैंने लंड का पानी भाभी के मुँह में डाला और शांत हो गया.

फिर हम दोनों चिपक कर सो गए. रात को 3 बजे नींद से जागा, भाभी को उठाया और मेरे घर चला आया.

दूसरे दिन ऑफिस से भाभी को फोन किया कि रात को कल जैसा खाना रेडी रखना… आज मेरे घर पे खाएंगे.

तो बोलीं- नहीं, आप मेरे घर पर ही आ जाओ.

शाम को ऑफिस से घर आने के बाद फ्रेश होकर भाभी के घर खाना खाने चला गया. मेरे आने के बाद वो फ्रेश होने चली गईं और नहा कर बिना कुछ पहने ही मेरे सामने आ गईं. भाभी ने मुझसे कपड़े उतारने को बोला. मैंने झट से कपड़े उतार दिए. भाभी मेरी गोद में आकर बैठ गईं.
 
अब हम दोनों ने खाना खाया. हम खाना खाने चेयर पे बैठे थे. बीच में ही उसको हिचकी आई.. तो बोलीं- मुझे पानी चाहिए, आप अपना नल चालू करो ना..

मैं कुछ नहीं समझा… तो उन्होंने नीचे बैठकर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और बोलीं- मेरे मुँह थोड़ा मूत दो ना… मेरी हिचकी बंद हो जाएगी.

फिर मैंने उनके मुँह में मूता.. तो बोलीं- भाईसाहब, आपके वीर्य से आपका मूत तो बहुत ही अच्छा है.. इसको वेस्ट मत करना… ये बहुत काम की चीज है. हां आज जिंदगी में मैंने अपने पति का मूत नहीं पिया… लेकिन आपका पिया.. आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं.

फिर हम दोनों ने खाना खाया और नंगे ही टीवी देखने लगे. थोड़ी देर बाद भाभी मेरा लंड चूसने लगीं.. चुदास बढ़ गई तो हम दोनों 69 में आकर एक दूसरे का आइटम चूसने लगे. भाभी की चुत चुसने के पहले मैं फ्रिज से बर्फ लेके आया था.. मैं बर्फ उनकी चुत में डालके चूसने लगा. इससे भाभी एकदम हिल गईं.. और जोर जोर से मेरे मुँह पे चुत दबाने लगीं. उन्होंने मेरा लंड मुँह से निकाल दिया था.. उनको चुत में बर्फ की ठंडक सहन नहीं हो रही थी.

में सीधा होकर उनकी चुत चूसने लगा. वो लगातार मेरा मुँह चुत पर दबा रही थी और मोन कर रही थीं. फिर उनका पानी निकल गया और वे शांत हो गईं.

इसके 5 मिनट बाद मैंने 2 बर्फ के पीस उनकी चुत में फिर से डाल दिए.

वो मुझे गाली देने लगीं- बहन का लौड़ा साला, क्या कर रहा है? मेरी जान लेगा क्या?

नीचे उनकी चुत में बर्फ थी, लेकिन वो पसीने से लथपथ थीं.

मैं उनकी चुत को जोर जोर से चूस रहा था. मुझे मालूम था कि अब क्या होने वाला है. मैंने उनको उठाया और नीचे जमीन पे डाल कर चुत चूसने लगा. जैसे ही लगा कि उनका होने वाला है, रुक गया… और दो पल बाद फिर से चुत चूसने लगा.. ऐसा मैंने कई बार किया.

इस वजह से भाभी जंगली बिल्ली जैसी हो गईं… मेरे बाल नोचने लगीं. मेरे अंग का जो भी भाग उनके हाथ में आ रहा था, उसके ऊपर नाखून मारने लगीं.. और जोर जोर से चिल्लाने लगीं- आहहह आहहह.. मार डाल इस रंडी को… आह.. क्या कर रहे हो.. मेरी जान निकालोगे क्या?

भाभी ने मेरा मुँह चुत पे दबा के रखा हुआ था. मुझे सांस लेने भी तकलीफ हो रही थी लेकिन उन्होंने मुँह को और तेज दबाया, जोर से पानी का फव्वारा दे मारा और झड़ गईं. लेकिन झड़ते वक्त भाभी ने पेशाब भी कर दी.. और मुझे भी अपना मूत पीने पे मजबूर कर दिया. मैं हट नहीं सका क्योंकि उन्होंने अपनी चुत पर मेरा सर अपने हाथों से दबाया हुआ था.

दो-तीन मिनट तक भाभी झड़ते हुए काँपती रहीं और रुक रुक कर पेशाब करती रहीं. फिर भाभी शांत होकर निढाल होकर पड़ी रहीं. आधे घंटे तक भाभी वैसी ही पड़ी रहीं. उनकी आँख से पानी आ रहा था.

मैंने कारण पूछा- क्या हुआ… कुछ तकलीफ हुई क्या?

भाभी बोलीं- यार इस तरह का सेक्स मैंने जिंदगी में पहली बार किया है… ये खुशी के आंसू है प्रकाश… मैं ऐसी कभी नहीं झड़ी थी… ये पहली बार हुआ है.

फिर हम लोग एक घंटे तक बातें करते रहे. भाभी मेरे लंड से खेल रही थीं…लंड तैयार था… मैंने भाभी को नीचे लिटाया और बोला- आप चुदने के लिए तैयार हैं?

तो बोलीं- कभी कभी जल्दी से भी डाल दिया करो, मुझे चीखने का मजा लेना अच्छा लगता है.

मैंने फिर दो आईस-क्यूब उनकी चुत के अन्दर डाल दिए… और लंड चुत में डाल के चुदाई करने लगा.

भाभी एकदम से सिहर उठीं और गाली देने लगीं- उई माँ मादरचोद क्या कर रहा है…

तो मैं बोला- भैन की लौड़ी रंडी.. चुप बैठ… मैं अपनी रंडी की चुत मार रहा हूँ.

भाभी की चुत की गर्मी की वजह से आईस क्यूब पिघल चुका था. अब वो गांड उठा उठा के चुदा रही थीं. थोड़ी देर बाद बोलीं- अब रुको आप… मैं ऊपर आती हूँ.

उन्होंने मुझे नीचे लिटाया और मेरे लंड पर बैठ कर चुत मारने लगीं. दो मिनट में ही वो झड़ गईं.. और शांत हो गईं. मैंने अब उन्हें घोड़ी बनने के लिए बोला.. और पीछे से चुत मारने लगा… इन 15 मिनट में वो 3 बार झड़ चुकी थीं. भाभी बोलीं- प्लीज़ जल्दी करो ना… मैं थक चुकी हूँ.

तो मैंने अपना पिस्टन जोर जोर से मारना शुरू किया… और पूरा पानी उनकी चुत में डालके ही उसके ऊपर पड़ा रहा.

इसके बाद हम दोनों नंगे ही सो गए. आधी रात को मैं अपनी फ्लैट में आ गया.

ये सब जब तब मेरे और उसके घर वालों के आने तक ही हुआ. उसके बाद तो जब कभी मौका मिलता तो हम लोग सेक्स कर लेते हैं.

दोस्तो, ये थी मेरी कहानी… आपको ये कहानी कैसे लगी, कृपया अपने कमेन्ट जरूर करे.
 


ये दिवाली आपके जीवन

में खुशियों की बरसात

लाए,

धन और शौहरत की

बौछार करे,

दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं!
 
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