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परदेसी complete

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Guest
परदेसी

बंधुओ कहानी का नाम है "परदेसी". वैसे कहानी का नाम "परग्रही" भी हो सकता था लेकिन मुझे परदेसी ही इज़्यादा ठीक लगा.

यह कहानी है 4 लोगों की जो नॅचुरल तरीके से पैदा नही हुए और जिनका डीएनए एलीयेन्स के डीएनए के साथ मिक्स किया गया है. अब यह कौन 4 हैं और क्या कारनामे करते हैं, यह आपको आने वाले अपडेट्स में पता चलेगा. यह कहानी मेरी पिछली कहानी से काफ़ी अलग होगी. कोशिश करूँगा कि इसमें ज़्यादा एरॉटिक एनकाउंटर्स डाल सकूँ ताकि ठरक का भी प्राब्लम सॉल्व हो जाए . हमेशा की तरह गुज़ारिश है कि अपने कॉमेंट्स देते रहना, ताकि पता चलता रहे कि क्या आपको पसंद आ रहा है और क्या नहीं.



बंधुओ अब चलते हैं कहानी शुरू करने....................

दूर दूर तक जहाँ तक नज़र जाए, बस रेत ही रेत थी. गर्मी का समय था, और लू के थपेड़े इस रेगिस्तान की रेत को इधर उधर उड़ा रहे थे. इतनी गर्मी में, इस जगह पर रहना मुमकिन नही था. सूरज की किर्ने किसी को भी 2 पल में झुलसा सकती थी. उपर से मूह खोलो तो अंदर सिर्फ़ रेत ही रेत जाएगी. देखा जाए तो ऐसी जगह से किसी का कोई वास्ता नहीं होना चाहिए और ऐसी जगह सिर्फ़ सुनसान ही रहनी चाहिए. लेकिन तभी एक हेलिकॉप्टर वहाँ उतरा. उसमें से साइंटिस्ट रणवीर निकला जो अपनी सालों की मेहनत से तय्यार किए गये एक रिसर्च को आज इंप्लिमेंट करने जा रहा था. क्या यह रिसर्च सक्सेसफुल होगी? यही सोच सोच कर उसकी रातों की नींदे हराम हो रही थी. सर से पावं तक ढका रणवीर हेलिकॉप्टर के पंखे रुक जाने तक अंदर ही इंतेज़ार करता रहा. जब वापस माहौल लू की आवाज़ों से भर गया तो वो नीचे उतरा और सामने एक टीले के पास गया. पास पहुँचते ही टीले में से एक दरवाज़ा खुला और रणवीर अंदर चला गया.

अंदर का माहौल बाहर से एकदम उल्टा था. अंडरग्राउंड में एक छोटा सा गाओं बसा हुआ था. करीब 50 साइंटिस्ट्स होंगे. कुछ कंप्यूटर्स पे काम कर रहे थे और कुछ टेन्षन में इधर उधर घूम रहे थे. रणवीर के अंदर घुसते ही माहौल में थोड़ा जोश आ गया. सबकी नज़रें रणवीर पर गढ़ गयीं और सब खड़े हो गये जैसे मानो हिट्लर आया हो.

"एवेरिबडी टू दा कान्फरेन्स रूम." रणवीर ने चलते चलते बोला तो सब कान्फरेन्स रूम में चले गये. पहले से ही कुछ लोग वहाँ इंतेज़ार कर रहे थे. कुल मिला के 75 लोग थे. रणवीर के घुसते ही कान्फरेन्स रूम में सन्नाटा छा गया. सब लोगों ने अपनी अपनी कुर्सियाँ संभाली और रणवीर चढ़ गया पोडियम पे.

"सब लोग जो यहाँ आज इकट्ठा हुए हैं, मैं उनको तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ. आज का दिन इस देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक इंपॉर्टेंट दिन है. जितने लोग आज यहाँ इकठ्ठा हुए हैं, वो आज हिस्टरी बनते हुए देखेंगे" सारा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा. जब तालियाँ थमी, तो रणवीर आगे शुरू हुआ,"जैसा कि आप सब जानते हैं, हम लोग कयि सालों से दूसरे ग्रहों पे जीवन खोज रहे हैं. ब्रह्मांड इतना बड़ा है कि हमे यकीन है कि ऐसे हज़ारों तारे होंगे जहाँ पे पृथ्वी जैसा वातावरण होगा और जीवन पनप रहा होगा. हम उनसे कॉंटॅक्ट करने की कब से कोशिश कर रहे थे. हमे पता था कि कभी ना कभी तो कॉंटॅक्ट होगा, लेकिन कब होगा, यह किसी को पता नहीं था. 8 साल पहले कॉंटॅक्ट हुआ. और जो इन्फर्मेशन हमे मिली, वो सच में हिलाने वाली थी"

"हम स्पेस में लाखों सिग्नल्स छोड़ते रहते हैं इस आस में कि कभी कोई उन सिग्नल्स को रिसीव करेगा. एक दिन हमारे रेसीवर ने भी ऐसा एक सिग्नल पक्कड़ लिया. उस सिग्नल को डिकोड करने में हमे बहुत समय लगा. काफ़ी मेहनत के बाद हम ने जाना कि वो सिग्नल में किसी दुनिया के प्राणियों की डीएनए इन्फर्मेशन है. हम सब बहुत एग्जाइत हो गये थे इस बात से. पता नहीं क्यूँ हम ने ठाना कि हम धरती पे वैसे जीव बनाने की कोशिश करें ताकि उन लोगों के बारे में और जान सके. हम ने वो डीएनए इन्फर्मेशन को हुमन डीएनए के साथ कंबाइन करने की बहुत कोशिश करी जो केयी सालों तक चलती रही लेकिन डीएनए कंबाइन ही नही हो पा रहे थे. जब हमारा सब्र का बाँध टूटने ही वाला था तो हमे कामयाबी हाथ लगी. हमारी साइंटिस्ट टीम ने 4 कॉंबिनेशन निकाल लिए जिनसे एक हुमन और उस एलीयन डीएनए के कॉंबिनेशन का जीव पैदा हो सकता है." फिर तालियों की गड़गड़ाहट से सारा हॉल गूँज उठा "क्यूंकी ज़्यादातर डीएनए ह्यूमन्स का है और बहुत थोड़ा सा मॉडिफाइड है, हमे लगता है कि यह जीव देखने में आदमियों जैसे ही होंगे. और इसी लिए आज हम सब यहाँ इकट्ठे हुए हैं. 4 कपल्स ने एक्सपेरिमेंट में हिस्सा लेने के लिए हामी भर दी है. और वो भी आज यहाँ मौजूद हैं"

फिर से तालियों की गड़गड़ाहट के साथ हॉल गूँज उठा और 4 कपल्स खड़े हो गये अपने हिस्से की लाइमलाइट लेने को. "हम इन चारों कपल्स को एक एक टेस्ट ट्यूब बेबी देने जा रहे हैं. यह चारों कपल्स दुनिया के 4 अलग अलग कोनो में अपने बच्चों को पालेंगे. प्लान सिंपल है - हमे देखना है कि क्या हम एक इंप्रूव्ड स्पेसिएस को बना सकते हैं. अगर हां, तो क्या वो इंप्रूव्ड स्पीशीस हमारे बीच रह सकते हैं. अगर यह एक्सपेरिमेंट सफल हो गया, तो यह धरती रहने के लिए और भी अच्छी बन जाएगी, और इसके वासी और भी समझदार और कारगर बन जाएँगे" इस बार जो अपलॉज़ मिला वो तो छत उखाड़ देने वाला था. सब लोग अपनी जगह से खड़े हो कर बस तालियाँ पीट रहे थे. उनके शांत होने के बाद रणवीर फिर से बोला "जैसा कि आप समझ सकते हैं, यह एक्सपेरिमेंट बहुत ख़तरनाक है और इसमें कुछ भी हो सकता है. उपर से अभी जनता इस के लिए तय्यार नही है. इसलिए हम ने यह डिसाइड किया है कि यह बात सिर्फ़ हम लोगों में ही रहेगी. हम इन बच्चों को मॉनिटर करते रहेंगे और जैसे ही हमे लगेगा कि वक़्त ठीक है और एक्सपेरिमेंट सफल हुआ है, हम इस बात का खुलासा दुनिया के सामने करेंगे. तब तक यह बात हमारे बीच ही रहेगी. मैं आशा करता हूँ कि आप इस बात की कद्र करेंगे. दुनिया के सबसे इंपॉर्टेंट इवेंट का पार्ट होने के लिए फिर से आपका शुक्रिया. अब मैं निकलता हूँ." कहते हुए रणवीर पोडियम से उतरा और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सीधा अपने हेलिकॉप्टर की ओर चल दिया.

वापस जाते हुए उसको अपने और अपनी टीम पर बहुत ही गर्व हो रहा था. सब ने मिल कर साइन्स को नयी दिशा दी है और एक नयी हद बनाई है. अब बस उनका एक्सपेरिमेंट सफल हो जाए, इतनी ही उसकी दुआ थी. रह रह के उसके मन में यह ख़याल आता था कि क्या वो भगवान बनने की कोशिश कर रहा है जो एवोल्यूशन के अगेन्स्ट जा रहा है, पर वो अपने मन को यह कह के संभाल लेता कि अगर यह एक्सपेरिमेंट सक्सेसफुल हो गया, तो दुनिया ही अच्छी होगी, उसका अपना तो कोई मतलब छुपा नहीं है इसमें. हां, वो इससे मिलने वाली शोहरत का भूखा ज़रूर था, पर भगवान कहलाना उसे बिल्कुल मंज़ूर ना था.
 
आइए बंधुओ पहले कहानी के पात्रो के बारे में थोड़ी सी जानकारी ले लें

कॅरेक्टर्स:


- रणवीर - एक साइंटिस्ट. बहुत ही आंबिशियस. अपनी जॉब के चक्कर में अभी तक शादी नही की. इसका मान-ना है कि दुनिया में आए हो तो कुछ ऐसा काम करो कि मरने के बाद भी लोग तुम्हें याद रखें. कहाँ तक जा सकता है वो अपनी सालों की मेहनत पे पानी फिरता देख?? क्या वो अपनी सालों की मेहनत सॅक्रिफाइस कर देगा किसी बड़ी डिस्कवरी के लिए या धीरे धीरे उसके दिल में जगह बना चुकी सोनिया उसको एक काम करती हुई मशीन से इंसान बनाने में सफल हो पाएगी ????

- बिट्टू - रणवीर द्वारा बनाया गया पहला अजूबा. दोस्तों पे जान छिड़कने वाला और दिल फेंक. ज़िंदगी में कुछ बड़ा किया नही है और ना ही करने की उम्मीद करता है. उसको पता है कि उसको अपना जीवन अपने पापा का बिज़्नेस एक्सपॅंड करने में ही लगाना है. इस काम को शुरू करने में जितनी देर हो सके, वो करना चाहता है, जिसके लिए वो पढ़ाई करने का सहारा ले रहा है. पढ़ाई के लिए टोरोंटो जाने के बाद उसकी ज़िंदगी एकदम बदल गयी. क्या वो अपने दोस्तों और चाहने वालों को बचाने के लिए रेस्पॉन्सिबिलिटीस ले पाएगा? किस हद तक जा सकता है वो दिया के लिए, जिससे वो मन ही मन प्यार करने लगा है??

- दिया - रणवीर द्वारा बनाई गयी अजूबा नंबर 2. सिन्सियर और लफडों से दूर रहने वाली. उसका मान-ना है कि एक दिन उसके सपनों का राजकुमार आएगा जो उसको बहुत प्यार करेगा. प्यार में धोखा खाने और एक हादसे के बाद वो वापस अपने देश चली गयी. उसकी मुलाक़ात बिट्टू से हुई जो उसको अच्छा लगने लगा. क्या वो अपने पिछले सारे बुरे सपने भुला पाएगी?? क्या होगा उसका जब उसको पता चलेगा कि वो एक एक्सपेरिमेंट है??

- तान्या - सेक्सी, कॉन्फिडेंट, सेल्फिश. बचपन में ही माँ-बाप का साया छिन जाने के बाद, रणवीर द्वारा बनाए इस तीसरे अजूबे ने, अपनी ज़िंदगी आगे बढ़ाने के लिए क्राइम का सहारा लिया. उससे पता है कि वो बहुत पवरफुल है और मर्दों को अपनी उंगलियों पे नचा सकती है. शायद इस धरती पे बसने वाली वो सबसे ताक़तवर लड़की है. क्या वो समय आने पर और लोगों के साथ ग्रूप बना के लड़ पाएगी?? क्या वो यह क्राइम का रास्ता छोड़ पाएगी??

- रोहित - रणवीर द्वारा बनाया गया अजूबा नंबर 4. हर माँ बाप को लगता है कि उनका बेटा रोहित जैसा ही होना चाहिए - कभी कोई उल्टा काम ना करने वाला और हर चीज़ उनके ढंग से करने वाला. वो कभी किसी को उल्टा नहीं बोलता और थोड़ा रिज़र्व्ड है. उसका एकलौता शौक है उसका सेक्स अडिक्ट होना. लड़कियाँ कपड़े की तरह बदलता है और घरवालों से दूर इसकी अलग ही ज़िंदगी होती है. क्या रोहित कभी प्यार का महत्व समझ पाएगा?? क्या होगा जब उसको अपने बारे में ना सोच कर बाकी लोगों की ज़िंदगी बचाने का मौका मिलेगा?

- सोनिया - रणवीर की कोलीग. वो उससे इतना प्यार क्यूँ करती है, शायद इसको भी नही पता. इसे उम्मीद है कि हर वक़्त रणवीर के आस पास रहने से, वो उसके अंदर परिवर्तन ला सकेगी और उसको यकीन दिला सकेगी कि काम ही सब कुछ नही है और अपनी ज़िंदगी जीने के लिए वो अभी भी लेट नही हुआ है. क्या यह संभव हो पाएगा??
 
20 साल बाद

1) बिट्टू

"वाह यार मज़ा आ गया. क्या बटर चिकन बनाया है लकी ने. पेट ठूंस गया पर नीयत नही भरी. ओये लकी !!बिल ले आ रे." एक लंबी सी डकार मारने के बाद बिट्टू ने कहा. "अफ़ीम मिलाते हो क्या बटर चिकेन में यार, रुकने का दिल ही नही करता. बस खाए जाओ" इस बार अपने पिछवाड़े से डकार मारते हुए बिट्टू बोला. लकी बिल ले कर आ गया था "ले यह 10 रुपये की टिप. ऐश करना. मेरी तरफ से" कहकर वो उठा और सिगरेट पीने को चल दिया.

"यार बिट्टू एक सिगरेट दे यार" हॅपी बिट्टू से बोला

"ले साले. मर जा फूँक फूँक के. कभी अपने पैसे की भी खरीद लिया कर. तुझे देखना लंग कॅन्सर होगा". हॅपी बिट्टू का सबसे पुराना दोस्त था. स्कूल से लेकर कॉलेज तक दोनो साथ रहे और बहुत ही गहरी दोस्ती हो गयी दोनो में. दोनो का एक दूसरे के घर आना जाना लगा रहता. दोनो के फादर्स भी साथ ही काम करते थे और मदर्स साथ में गॉसिप. दोनो की पसंद एक जैसी थी - सेम सुट्टा, सेम दारू, सेम कपड़े, यहाँ तक दोनो ने कई बार सेम लड़की भी बजाई थी.

"अब सिगरेट दे रहा है या लानत. नही पीनी मुझे. रख अपने पास. आज मेरी तरफ से एक घुसेड लियो अपने पीछे" हॅपी भी बोला और दोनो पागलों की तरह हँसने लग गये."कॉलेज जाना है क्या?"

"अबे पढ़ लिख के किस का भला हुआ है? साला निकलवा लेंगे एग्ज़ॅम से पहले पेपर, ले आएँगे अच्छे मार्क्स."

"अबे स्वीटी का पीरियड स्टार्ट होने वाला है 15 मिनिट में. एक पीरियड को तो चल ही लेते हैं"

"हां स्वीटी का पीरियड है तो चलना पड़ेगा ही. दिन भर उससे देखते नहीं तो यार अजीब सा लगता है". दोनो अपनी-अपनी बुलेट पे सवार हुए और चल दिए कॉलेज की तरफ.

स्वीटी जिसके बारे में यह ऐसे बात कर रहे थे इनकी अकाउंट्स टीचर थी. उमर 38 की थी, लेकिन कहीं से भी 21 से एक साल उपर की नही लगती थी. काले घने बाल जो उसने स्टाइल में कटवा रखे थे उसके कंधों तक आते थे. जब चलती थी तो हर कोई सास रोक कर बस उसे ही देखता रहता. रह रह के उसके बालों की एक लट उसके चेहरे पर आती तो ऐसा लगता मानो बदल से चाँद रूपी चेहरा ढँक रहा हो. जिस किसी की तरफ वो अपनी आँखें दौड़ाती, वो वहीं घायल हो जाता. उसकी हरी हरी बिल्ली जैसी आँखें उसकी खूबसूरती और बढ़ाती. वो खूबसूरत थी और इस बात को जानती थी. इसलिए हमेशा लो कट स्लीवलेशस ब्लाउस ब्लाउस ही पहनती साड़ी के साथ कॉलेज के लिए. स्टूडेंट्स क्या, टीचर्स भी पूरा वक़्त उसपे लाइन मारते थे. लेकिन वो किसी के हाथ ना आने वाली थी. उसको सबको तडपा के ही मज़ा आता था. बिट्टू और हॅपी भी उसके दीवानों की लाइन में थे. यह एकलौती क्लास थी जिसमें वो आगे बैठ ते थे.

"यह पीछे कौन सोया हुआ है" स्वीटी ने आते ही पूछा

"मेडम बलबीर है" किसी ने बोला

"उठाओ उसे. सोना है तो बाहर जा के सोए. क्लास में कोई सोने आता है भला"

"मेडम दफ़ा करो ना, सोने दो बेचारे को"

"शट अप आंड डू ऐज आइ आम सेयिंग. जस्ट वेक हिम अप"

"अर्रे मेडम थोड़ा हिन्दी में बोल दो. आइ अंडरस्टॅंड इंग्लीश लॅंग्वेज नोट"

"उठाओ उसको तुम"

"अर्रे मेडम मैं कह रहा हूँ ना सोने दो बेचारे को. कल रात उसके बाप ने दारू पी के खूब बवाल मचाया है घर में, यहाँ नही सोएगा तो और कहाँ सोएगा? कितनी निर्दयी हो आप" जब यह आखरी शब्द ख़तम हुए तो सारी क्लास "ऊऊऊऊ" करने लग गयी ज़ोर ज़ोर से

"चुप रहो सब. मैं कहती हूँ चुप रहो. बड़ी मस्ती सूझ रही है. चलो आज में टेस्ट लेती हूँ सबका"

"यह सही है. साला दारू बलबीर का बाप पी के आए और सज़ा हमें मिले. हम नही देते कोई टेस्ट वेस्ट" हॅपी भी पूरा मज़ाक के मूड में आ गया था

"मेडम क्यूँ खून गरम करती हो. सोने दो ना बेचारे को. क्यूँ हमारी लगा रही हो. अच्छा लगेगा जब हम सब टेस्ट में अंडा लाएँगे और फिर प्रिंसी से कंप्लेन करेंगे कि तुम्हें पढ़ाना नही आता. हमें तो दूसरी टीचर मिल जाएगी. आप इस भरी जवानी में कहा जाओगी" बिट्टू बोला तो फिर से क्लास किल्कारियाँ मार के हँसने लगी.

"शट अप एवेरिबडी. जस्ट शट अप"

"ओये शोर मत मचाओ रे. साला घर पे बाप नही सोने देता. यहाँ तुमने दिमाग़ खराब कर रखा है. साला आदमी को कहीं तो चैन से रहने दो" बलबीर ने भी नींद की हालत में बोला.

"लगता है तुम्हारा आज पढ़ने का मूड नही है. ऐसे ही मेरा दिमाग़ खराब कर रहे हो"

"मेडम दिमाग़ खराब ना करो. आओ कॅंटीन में चल कर एक मस्त चाय पीते हैं." बिट्टू ने मौके पे चौका मारने की कोशिश करी

"शट अप. आज की क्लास डिस्मिस्ड. मुझे पढ़ाने का कोई शौक नहीं है अगर तुम लोगों को पढ़ना ही नही है तो" कहते हुए स्वीटी बाहर चली गयी

"लो कर्लो बात. साला हम बियर छोड़ कर यहाँ स्वीटी-दर्शन को आए और क्लास ही नही हुई. चल ओये बिट्टू, चलते हैं"

"अब रुक यार. अब आ ही गये हैं तो थोड़ी सी पतंग उड़ा ही लेते हैं. हो सकता है किसी और के साथ पेच लग जायें" बिट्टू बोला और खड़ा हो गया, "अर्रे माला.. आज कहाँ बिजली गिराने का इरादा है.. क्या कयामत लग रही हो... अर्रे पपोज़ा, तेरे जैसा नही दूजा, मैं तेरा चक्कु, तू मेरी खरबूजा" वो हर एक लड़की पे कॉमेंट मारने लगा

"साले तू तो पिटेगा, मुझे भी पिटवाएगा. अपनी नही तो कम से कम मेरी इज़्ज़त का तो ख़याल रख यहाँ"

"तेरी बड़ी इज़्ज़त आ गयी साले. तूने तो अपनी इज़्ज़त उसी दिन खो दी थी जब दारू पी के गधे पे बैठ के कॉलेज आया था"

"यार याद ना दिला तू वो दिन. चल आजा.. आज बियर का प्रोग्राम रखते हैं. चलते हैं अब. बहुत हो गयी तेरी पतंगबाज़ी"

अब दोनो वापस अपनी अपनी बुलेट पे सवार हुए और चल दिए ठेके की तरफ.

"ओये पप्पी. 4 बोटले किंगफिशर और एक तंदूरी मुर्गा ले कर आइयो. और बीमार मुर्गा मत लाना.. थोड़ा हेल्ती वाला लईयो" पहुँच कर बिट्टू ने ऑर्डर दिया

"यार बिट्टू, तूने कभी सोचा है कि हम अपनी ज़िंदगी के साथ क्या करेंगे? कभी कभी तो डर लगता है यार"

"साले दारू से पहले दिमाग़ की माँ बहेन मार कर. इतना बड़ा बिज़्नेस कौन संभालेगा? हमारे लिए ही तो है"

"यार वो तो ठीक है, लेकिन हमें कुछ अपना भी करना चाहिए ना"

"करेंगे यार. एक दारू की दुकान खोलेंगे. दुनिया भर की दारू रखेंगे. किसी और को एंट्री नही देंगे. मस्त दिन में दारू पीएँगे, रात रंगीली करेंगे"

"बात तो तू भी सही कह रहा है... चल आजा, आज इसी बात पे पीते हैं"

अच्छी तरह से खा पी के, अब दोनो के घर जाने का टाइम हुआ.

"साला आज फिर घर में कोहराम मच जाएगा कि पी के आयें है" हॅपी बोला

"अबे सीधा जा के सो जाना. मैं तो कह देता हूँ कि पढ़ने जा रहा हूँ और रूम में जा के सो जाता हूँ"

"यार दिमाग़ बहुत घूम रहा है, लगता नही है कि गाड़ी चलाई जाएगी आज"

"अबे कुछ नही होगा. चल मेरे साथ. मैं हूँ ना. धीरे धीरे चलाना"

लेकिन ऐसा कभी हुआ है? दारू पी के तो उस्तादों का खून और गरम होता है, धीरे धीरे चलाने की बजाए गाड़ी 100 की स्पीड पे भागने लगी. हल्की हल्की बारिश भी शुरू हो गयी थी जिससे उनको और भी मज़ा आ रहा था.

तभी हॅपी की गाड़ी स्लिप हो गयी. तेज़ होने के कारण गाड़ी थोड़ी दूर तक स्लिप करी.

"हॅपी!!!" बिट्टू ज़ोर से चिल्लाया जैसे ही उसने देखा कि हॅपी के ठीक सामने से एक ट्रक आ रहा है. उसने अपनी गाड़ी साइड में फेंकी और हॅपी की तरफ भागने लगा उसको खीचने के लिए. वो जैसे जैसे हॅपी के पास जा रहा आता, उसको यकीन हो रहा था कि ट्रक उससे पहले पहुँच जाएगा. दिल उसका भागते भागते इतनी ज़ोर से धड़क रहा था मानो अभी छाती फाड़ के बाहर ही आ जाएगा. हॅपी निढाल पड़ा था और बिट्टू उसके पास पहुँचा ही था कि ट्रक ने आ कर ज़ोर से टक्कर मार दी.

अब बिट्टू हॅपी के आगे खड़ा था इसलिए हॅपी को तो कुछ हुआ नही, 2 पल के बाद बिट्टू को समझ में आया कि हुआ तो उसे भी कुछ नहीं. पीछे मूड के देखा तो उससे टकराने के बाद ट्रक की हालत ऐसी हो गयी थी जैसे वो किसी मज़बूत बिल्डिंग से टकरा गया हो. आगे का हिस्सा पूरा चिपक गया था और आगे का काँच भी टूट गया था. अंदर के दोनो ड्राइवर झटके के कारण बेहोश हो चुके थे और उनके माथे से खून बह रहा था. बिट्टू को कुछ समझ नही आया. उसने हॅपी को उठाया और उसको रोड के साइड पे रखा. सड़क बिल्कुल सुनसान थी. उसने हॅपी की बुलेट भी साइड में पार्क करी, फोन कर के अपने दोस्त सुखविंदर को बोला कि आ के बुलेट उठा ले और हॅपी को अपने पीछे बिठा के अपने घर ले गया

 
2) दिया

"दिया एक पेग तो पी ले. इतना डरती क्यूँ है"

"बात डरने की नही है. मुझे नही पीनी, तो मैं नही पिउन्गी. तुको पीना है तो पीयो, मैने मना किया है क्या"

"हां हां मेडम.. आप क्यूँ पीने लगी.. आपकी तो शान के खिलाफ है ना पीना. इतने अमीर बाप की बेटी, नॉर्मल लोगों के साथ पीते देखी जाएगी तो शान घट जाएगी ना"

"शट अप प्रिया. तुम जानती हो ऐसा कुछ नही है. तुम्हें पीना है तो पीयो, नहीं तो चलते हैं यहाँ से. मुझे यह जगह अच्छी नही लग रही"

"अच्छी नही लग रही !!! मेडम यह शहेर का बेस्ट डिस्को है. यह जगह अच्छी नही लग रही तो कौन सी जगह अच्छी लगेगी? लड़के देखो कितने क्यूट क्यूट घूम रहे हैं आस पास." प्रिया ने अपनी ड्रिंक से एक घूट लेते हुए बोला

"लड़के लड़के लड़के.. तुझे और कुछ सूझता भी है इन चीज़ों के अलावा? कितने लड़के फसाएगी? 2 बॉय फ्रेंड्स तो तेरे पहले से ही हैं"

"अर्रे मुझे कौन सा सब से शादी करनी है. लड़के पैसों की तरह होते हैं मेडम. जितने ज़्यादा होते हैं, उतनी ही ऐश होती है"

"चल अब फिलॉसोफी झाड़नी बंद कर और जल्दी से ड्रिंक पी. मुझे लेट हो रहा है"

"लेट हो रहा है? हॉस्टिल जा के करना क्या है? सोना है क्या इतनी जल्दी? कितनी बोरिंग है तू. रुक जा थोड़ी और देर. कल वैसे भी छुट्टी है. एंजाय कर ना यार."

दिया और प्रिया की दोस्ती को एक साल हो गया था. दोनो का रूम हॉस्टिल में एक ही था. जब वो पहली बार मिले थे तो दिया को लगा था कि उनकी दोस्ती कभी नही हो सकती. प्रिया एकदम नकचाढ़ि, हाज़िर जवाब और बिंदास लड़की थी. वो अपना सारा समान यहाँ वहाँ फेंक के रखती थी. एक तरह से देखा जाए तो वो दिया के बिल्कुल उलट थी. दिया की आदत थी कि सबसे तहज़ीब से बात करती और अपनी सारी चीज़ें संभाल के रखती. प्रिया इस बात से उसकी बहुत खिल्ली उड़ाती और हर समय उसको बिंदास रहने की सलाह देती. दोनो की दोस्ती हुई थी जब दिया को बुखार चढ़ गया था और प्रिया ने उसकी बहुत अच्छी तरह से देखभाल करी थी. उस दिन के बाद से दोनो दो जिस्म और एक जान बन गये. हर जगह साथ आते-जाते. देखने मैं भी दोनो बहुत सुंदर थी. एक तरफ जहाँ प्रिया हर किसी से फ्लर्ट करती और हर 10-15 दिन में बॉय फ्रेंड बदल देती, वहीं दिया अभी तक 'मिस्टर. राइट' को ढूँढ रही थी. पिछले महीने उसे लगा था कि उसको उसका राजकुमार मिल गया है और वो राज के साथ बहुत घुल मिल गयी थी. लेकिन लड़कों की फ़ितरत से अंजान, वो जान भी ना पाई कि राज उससे सिर्फ़ सेक्स चाहता था. एक बार वो उससे मिल गया, तो वो गधे के सर पे सींग की तरह गायब हो गया. उस हादसे के बाद, यह पहली बार था जब दिया बाहर आई थी.

"क्या सोचने लग गयी दिया?"

"कुछ नहीं यार"

"देख वो सामने से कितने हॅंडसम लड़के आ रहे हैं, चल उनके साथ फ्लर्ट करते हैं. मज़ा आएगा"

"तू कर. मुझे नहीं करना"

"कैसी है यार तू. चल आ जा डॅन्स करते हैं थोड़ा. अब यह मत कहना कि तुझे नहीं करना वरना यह ड्रिंक का ग्लास उठा के तेरे सर पे मारूँगी. अक्कल भी ठिकाने आ जाएगी और दारू भी चख लेगी" प्रिया के बोलने के तरीके से सॉफ लग रहा था कि दारू उसपे असर दिखाना शुरू कर दी है. लेकिन दिया जानती थी कि वो अपने आप को संभाल सकती है क्यूंकी यह उसके लिए नयी बात नही हैं.

"चल चलते हैं" दिया ने प्रिया का हाथ पकड़ा और डॅन्स फ्लोर पर चल दी

डॅन्स फ्लोर एकदम खचाखच भरा था. इंसानो में एक अजीब से बात होती है के जो भीड़ लोकल बस/ट्रेन में उन्हे अजीब सी लगती है, उसी भीड़ में डॅन्सेफ्लॉर पे उन्हे इंटिमेसी लगती है. दोनो बहुत एग्ज़ाइटेड हो कर फ्लोर पे पहुँचे और नाचने लगे. दो खूबसूरत लड़कियों को अकेला नाचते देख, काफ़ी लड़के जल्द ही आस-पास इकट्ठे हो गये और उनके साथ डॅन्स करने लग गये. प्रिया बहुत एग्ज़ाइटेड हो रही थी और रह रह कर किसी किसी से चिपक के डॅन्स कर रही थी. थोड़ी देर बाद दिया थोड़ा थक गयी और जा के बैठ गयी और डॅन्सेफ्लॉर की तरफ देखने लग गयी. प्रिया का जलवा अब ज़ोरों पर था. वो अपनी छाती और नितंब हिला हिला के डॅन्स कर रही थी. कभी किसी से चिपकती तो कभी किसी से. तभी उसने देखा कि प्रिया के आगे और पीछे एक एक लड़का खड़ा हो गया है. आगे वाला लड़का उसे किस करने लगा और पीछे वाला उसके नितंबों पे हाथ फेरने लगा. प्रिया भी बड़े जोश के साथ आगे वाले को किस करने लगी और अपने कूल्हे हिला हिला कर पीछे वाले पे रगड़ने लगी. उसकी उत्तेजना छप्पर फाड़ रही थी.

धीरे धीरे आगे वाले लड़के ने उसका पैर उठाया और उसकी जांघों पे हाथ फेरने लगा. थोड़ी देर ऐसा चलता रहा और फिर पीछे वाले ने उसके कान में कुछ बुद्बुदाया और तीनो एक कोने में बने कमरे में चले गये. दिया को डर लगने लगा कि कुछ अनर्थ ना हो जाए और वो उनके पीछे पीछे हो ली. जब वो वहाँ पहुँची तो अंदर का नज़ारा देख के हैरान रह गयी. दरवाज़ा खुला हुआ था और अंदर काफ़ी लोग संभोग कर रहे थे. प्रिया सोफे पे बैठी हुई थी एक लड़के के साथ. लड़के का हाथ उसकी मिनी स्कर्ट के अंदर था और वो बेतहाशा उसके होठों को चूम रहा था. प्रिया भी आहें भर रही थी. तभी लड़के ने अपना हाथ उसके स्कर्ट में से निकाला. उसकी उंगलियाँ बिल्कुल गीली थी. वो उंगलियाँ उसने प्रिया के होठों पे रख दी और प्रिया उनको चाटने लगी. धीरे धीरे उससने प्रिया का टॉप उतार दिया. प्रिया के निपल्स एकदम टाइट खड़े थे. थोड़ी देर उन्हें निहार के, उस लड़के ने उन्हें चूसना चालू कर दिया. प्रिया के मूह से आहों के सिवा कुछ नहीं निकल रहा था. थोड़ी देर में प्रिया का स्कर्ट भी उतार दिया. अब प्रिया सोफे पे सिर्फ़ अपनी चड्डी में बैठी थी जो कुछ ही पलों में उतर गयी. प्रिया की चूत एकदम गीली थी और उसकी हरकतों से सॉफ लग रहा था के वो उत्तेजना के सातवे आसमान पर है. दिया को पता था कि एक अच्छा दोस्त होने के कारण उसको यह सब रोकना चाहिए, पर वो जानती थी कि प्रिया के लिए यह सब नॉर्मल है और वो उसी पे भड़केगी. इसलिए वो चुप चाप बाहर खड़ी नज़ारा देखती रही.

अब वो लड़का धीरे धीरे प्रिया के टाँगों के बीच घुस गया और उसको चाटने लगा. कभी हॉरिज़ॉंटेली तो कभी वर्टिकली वो अपनी जीभ टेक्सी सी घुमा रहा था और प्रिया के शरीर में अजीब हरकतें हो रही थी. धीरे धीरे उस लड़के ने अपना लंड बाहर निकाला और प्रिया को पूरी तरह से सोफे पे लिटा दिया. फिर उसने अपना लंड उसके होठों के पास रखा और प्रिया ने झट से उसका सुपाडा मूह में ले लिया. धीरे धीरे प्रिया ने उसका पूरा लंड अपने मूह में ले लिया और और वो उसको अंदर बाहर करने लगा. प्रिया एक हाथ से उसके लंड को पकड़े हुए थी और दूसरे से अपनी चूत से खेल रही थी. तभी अंदर बना एक और दरवाज़ा खुला और उसमें से एक लड़का लड़की बाहर निकले. प्रिया को पकड़ के उस लड़के ने झट से उस कमरे में एंट्री ले ली. तब दिया ने देखा कि जो दूसरा लड़का उनके साथ आया था, वो भी पीछे पीछे चल रहा था अपने मोबाइल के साथ. दिया समझ गयी कि वो वीडियो शूटिंग कर रहा है और यह समझते ही उसकी सिट्टी पीटी गुम हो गयी.

वो फटाफट से अंदर घुसी और उस कमरे में दाखिल हुई. प्रिया किसी रंडी की तरह उस लड़के का लंड चूस रही थी और दूसरा लड़का साइड में खड़ा वीडियो निकाल रहा था.

"क्या कर रहे हो तुम. बंद करो यह सब" दिया उस आदमी की तरफ बढ़ी और फोन झपटने की कोशिश करी. पर वो ज़्यादा फुर्तीला निकला और अपना हाथ पीछे कर लिया. दिया अपना बॅलेन्स नही रख पाई और फिसल के उसकी बाहों में चली गयी

"अर्रे वाह. आज तो एक टिकेट पे दो-दो मूवी बनेंगी. आ जा मेरी बुलबुल" कहते हुए उस लड़के ने उसको एक चुम्मि दे दी

"डोर हटो मेरे से. छोड़ो मुझे" दिया ने उसकी ग्रिप से निकलने की कोशिश करी पर निकल ना पाई. उसको एहसास हुआ जैसे उसकी बाह में एक निडिल घुस रही है पर वो उस आदमी की पक्कड़ में इतनी बुरी तरह उलझी हुई थी कि अपना सिर भी नही हिला पा रही थी. . धीरे धीरे उसको अपने अंदर कुछ इंजेक्ट होता महसूस हुआ और वो बेहोश हो गयी.

जब उसे होश आया तो उसने पाया कि वो अपनी कार के पीछे वाली सीट पर लेटी हुई है. उसके कपड़े नदारद थे. और टाँगों के बीच में बहुत दर्द हो रहा था. तभी उसे प्रिया के चीखने की आवाज़ सुनाई दी. वो किसी तरह से कार से बाहर निकली तो उसने देखा कि वोही दोनो लड़के एक साथ मिल के प्रिया को चोद रहे हैं. एक लड़का नीचे लेटा हुआ था और प्रिया उसके उपर थी. दूसरे ने प्रिया को झुका दिया था और उसकी गान्ड मार रहा था. दिया का माथा बहुत घूम रहा था और उसे कुछ ज़्यादा समझ में नही आ रहा था. वोही हाल शायद प्रिया का भी था. तभी एक लड़के की नज़र दिया पर पड़ी और वो प्रिया की गान्ड छोड़ कर दिया की तरफ बढ़ने लगा. वो उसके पास आया और अपने होठों से उसके होठों को दबा दिया. डर के मारे दिया काँपने लग गयी थी. उसको पता चल गया था कि उसका रेप हुआ है और अभी शायद और होगा. तभी उस लड़के ने दिया की एक टाँग उठानी चाही.

"छोड़ दो मुझे प्लीज़" कहते हुए दिया उसके सामने गिडगिडाने लगी

"अभी नही मेरी जान. थोड़ी देर और बस. फिर तुम्हें छोड़ देंगे" कहते हुए उस आदमी ने अपना लंड एक झटके के साथ दिया की चूत के अंदर घुसा दिया.

"अयाया" करके दिया ज़ोर से चिल्लाई और अपने दोनो हाथ उस आदमी की छाती पे मारे. जैसे ही दिया के हाथों ने उस आदमी से कॉंटॅक्ट किया, चिर्र्र की आवाज़ के साथ एक झटका लगा दोनो को और वो आदमी दूर जा गिरा. दिया का दिमाग़ एकदम क्लियर हो गया. उसको ऐसा लगा जैसे किसी ने उसको बिजली का झटका दे दिया हो. अपने साथी की हालत देख दूसरे आदमी ने प्रिया को अपने उपर से उतार फेका और दिया की तरफ बढ़ा

"क्या किया रे तूने उसके साथ?"

"देखो मेरे पास मत आना"

"बहुत दम है तेरे में? मैं भी तो देखूं ज़रा" कहते हुए उस आदमी ने दिया पे झपट्टा मारा. जैसे ही उस ने दिया को छुआ, उसको भी ज़ोर से एक बिजली का झटका लगा और वो भी दूर जा गिरा.

दिया की समझ में कुछ नही आ रहा था. उसने फटाफट कार में से अपने और प्रिया के कपड़े निकाले, खुद पहने और उसको पहनाए और कार लेकर वहाँ से चंपत हो गयी

 
3) रोहित

रोहित ने आहना को अपनी छाती से लगा लिया. आहना थोड़ा गुस्से में थी इसलिए थोड़ा रेज़िस्ट किया, पर रोहित ने धीरे से उसके कानो में बोला "टेन्षन मत लो जान, सिर्फ़ पढ़ाई के लिए जा रहा हूँ, हमेशा के लिए थोड़े ना" और वो जैसे उसकी बाहों में पिघल गयी. फिर उसने उसकी आँखो में झाँका और उसके होठों को अपने होठों से दबा दिया. उसकी जीभ आहना के मूह में घूमने लगी और हाथ धीरे धीरे उसके उरोज़ सहलाने लगे. आहना के मूह से एक आह निकली और वो भी रोहित की जीभ को चूसने लगी. जब रोहित के ठंडे हाथ उसकी पीठ पर पड़े, तब उसको रीयलाइज़ हुआ कि उसकी टी-शर्ट उपर उठ चुकी है और उसके उरोज़ पूरे बाहर हैं. रोहित धीरे धीरे उन्हे चूस रहा था और अपना हाथ आहना की पीठ पर फेर रहा था. धीरे धीरे रोहित ने उसकी टी-शर्ट उतारी. वो इतना गरम हो चुकी थी कि उसने खुद ही अपने हाथ उपर उठा दिए ताकि कोई मुश्किल ना हो.

आहना ने रोहित को धक्का दे कर सोफे पे बैठा दिया और उसकी जीन्स और अंडरवेर उतार दी. फिर वो उसके लंड को सहलाने लगी और धीरे धीरे उससे अपने मूह में लेने लगी. रोहित धीरे धीरे रिदम बनाता गया और झटके दे कर अपना लंड उसके मूह के अंदर बाहर करने लगा. लंड को चूस्ते हुए आहना की बड़ी बड़ी काली आँखें रोहित को ही देख रही थी. उनमें एक अजीब सी शैतानी थी जैसे उसको चॅलेंज कर रही हो कि आज जो कुछ भी कर सकता है कर दे. उसने अपनी जीब से रोहित का पूरा लंड गीला कर दिया था और उसकी गोटियों को सहला रही थी. अब रोहित से रहा नही जा रहा था. वो खड़ा हुआ और उसने अपनी पोज़िशन बदल ली. अब आहना सोफे पे थी और रोहित खड़ा था. रोहित का लंड, एकदम गीला होकर सलामी दे रहा था. रोहित ने आहना की जीन्स और अंडरवेर उतारी और अपना मूह उसकी चूत के पास रख दिया. वो धीरे धीरे गरम साँसें फेंकने लगा उसकी चूत की फांको पे. उससे पता था कि इससे वो और ज़्यादा उत्तेजित होती है. फिर वो अपनी जीभ उसकी फांको के बाहरी हिस्से पे फिराने लगा. आहना की दोनो टांगे रोहित के कंधे पर थी और वो अपने हाथों से अपनी चूचियाँ मसल्ने लगी. उसके निपल पत्थर की तरह हार्ड हो चुके थे. धीरे धीरे रोहित अपनी जीभ उसके क्लिट पे फेरने लगा जिससे आहना के जिस्म में मानो करेंट की एक ल़हेर दौड़ गयी. वो समझ गयी कि रोहित की कलाकारी के आगे उसको झड़ने में ज़्यादा टाइम नही लगेगा.

रोहित अपनी ज़बान उसके क्लिट पर फेरते हुए, अपनी 2 उंगलियाँ उसकी चूत से अंदर बाहर कर रहा था. "ओह... रोहित..... आआआः" कहते हुए आहना ने अपना पानी छोड़ दिया जिससे रोहित ने अपनी जीभ भिगो दी. फिर उसने अपना मूह उसकी टाँगों के बीच से निकाला और उसको फ्रेंच किस करने लगा. अपने रस का स्वाद चख कर आहना और भी गरम हो गयी.

"रोहित प्ल्ज़ फक मी."

"ज़रूर आहना. चलो पलट जाओ" कहते हुए उसने आहना को पलटना में मदद करी. अब आहना टाँगें नीचे कर की ऑर अपने कूल्हे उठा कर, रोहित के लंड को अंदर लेने के लिए तय्यार हो गयी. रोहित ने अपने लंड को फिर थोड़ा थूक से भिगोया और उसकी चूत के द्वार पर रख दिया. उसने अपने दोनो हाथ उसकी गान्ड पर रख दिए और एक झटके के साथ अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया.

"अयाया.. आराम से.. रूओह्ह्हीईत"

"आज आराम नही है आहना. पता नही आज के बाद कब मिलेंगे" कहते हुए रोहित ने उससे डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू कर दिया. पूरा माहौल आहना की आहो और उनके जिस्म के टकराने की आवाज़ से भर गया. झटकों से आहना के उरोज़ उपर नीचे हो रहे थे. रोहित ने थोड़ा आगे झुक कर उन्हे पकड़ लिया और चोदते हुए ही उनके साथ खेलने लग गया. अब आहना से और नही रहा गया और फिर एक लंबी चीख के साथ उसने अपना पानी छोड़ दिया. उसकी चूत की दीवारों ने रोहित के लंड को जक्कड़ लिया और रोहित को पता चल गया कि वो भी अब ज़्यादा देर टिकने नही वाला. उसने अपना लंड बाहर निकाला और आहना को घुमा कर अपना लंड उसके मूह में डाल दिया. आहना ने अपनी जीभ उसपर फेरनी शुरू ही करी थी कि रोहित ने उसके बाल पक्कड़ कर उसका मूह थोड़ा उपर किया और दूसरे हाथ से लंड की हिलाते हुए अपना वीर्य उसके मूह पर झटकने लगा.

रोहित का वीर्य आहना के मूह और बालों पर गिर गया. रोहित जानता था कि इस बात से आहना बहुत चिड़ती है लेकिन उसको यह करने में बहुत मज़ा आता था. जब उसका पूरा रस निकल गया तो वो निढाल हो कर नीचे बैठ गया और आहना से चिपट गया. दोनो एक दूसरे को किस कर रहे थे कि तभी रोहित का फोन बज पड़ा.

"बेटा कहाँ हो? हम एरपोर्ट के लिए निकल रहे हैं.."

"पा आप निकलो, मैं सीधा वहीं पहुँचता हूँ. फ्रिड्ज के उपर मेरा पासपोर्ट और टिकेट्स पड़े हैं. उनको लेना मत भूलना"

"हां बेटा मैने वो ले लिए हैं. जल्दी आ जाना. ज़्यादा टाइम नही बचा है फ्लाइट में"

"बस अभी पहुँचता हूँ पा" कहते हुए रोहित ने फोन काटा और जल्दी से उठ के अपने कपड़े पहनने लगा. आहना मायूस हो कर बस उससे देखे जा रही थी. उनके 6 महीने का प्यार आज इस मोड़ पर आ कर शायद ख़तम होने वाला था. "बहुत लेट हो गया मैं आहना"

"मैं तो चाहती हूँ कि तुम्हारी फ्लाइट ही मिस हो जाए"

"ऐसा मत बोलो.. बहुत उम्मीदें हैं मुझसे घर वालों को"

"तुम मेरे टच में रहोगे ना रोहित."

"बिल्कुल आहना. बिल्कुल टच में रहूँगा. कैसी बात करती हो तुम भी"

"वहाँ जा कर किसी और से दिल ना लगा बैठना"

"शट अप आहना. चलो अब गले मिलो और एक गुड बाइ किस दो. जल्द ही दोबारा मुलाक़ात होगी. और प्लीज़ आँसू बहाना बंद करो. मुझे बिल्कुल अच्छा नही लगता जब कोई रोता है तो" कहते हुए उसने आहना के आँसू पोछे, उसे किस करी और भारी मन से निकल गया एरपोर्ट को.

"कितनी देर लगा दी बेटा पहुँचने में. फ्लाइट के चेक्किन का अनाउन्स्मेंट हो चुका है" एरपोर्ट पहुँचते ही उसकी माँ ने उसको फटकार लगाई

"माँ थोड़ा दोस्तों से मिल रहा था. देरी हो गयी. कोई टेन्षन नही है"

"बेटा तू बड़ा हो गया है अब, ज़िम्मेदारी लेनी सीख.."

"माँ प्ल्ज़ यह लेक्चरबाजी नही यहाँ. मूड मत खराब करो"

"हां हां.. कुछ भी अच्छी बात बताओ तो साहबज़ादे का मूड खराब हो जाता है. वहाँ अच्छी तरह से रहना बेटा और रोज़ फोन करना"

"हां माँ रोज़ फोन करूँगा. और प्लीज़ आप आँसू बहा के टिपिकल मदर इंडिया मत बनो. देखो कितने लोग सी ऑफ करने आए हैं, कोई आपकी तरह सेनटी है क्या"

"अर्रे इन गोरों को तो अपने बच्चों से लगाव ही नही होता. यह तो बस उनसे जान छुड़ाना चाहते हैं. पर बेटा वहाँ बुरी संगत में ना पड़ना"

"पा कुछ समझाओ ना माँ को. क्या एक ही रेकॉर्ड बजाए जा रही हैं"

"बेटा हम तुम्हारे पेरेंट्स हैं. हम तुम्हें नही बताएँगे तो और कौन बाएगा"उसके पापा बोले

"अच्छा तो आप दोनो की मिली भगत है यह. कुछ नही होता. सुना लो जितना सुनाना है. अब तो थोड़े दिन बाद ही मुलाक़ात होगी"

तभी सेक्यूरिटी चेक इन की फाइनल अनाउन्स्मेंट हो गयी.

"अच्छा माँ... पा... मैं चलता हूँ. आप दोनो अपना ख़याल रखना और ज़्यादा टेन्षन मत लेना. मैं बिल्कुल ठीक रहूँगा वहाँ पे" कहते हुए उसने अपने माँ और पापा के पैर छुए और समान ले कर चल दिया चेक-इन के लिए.

"ओह्ह नो.. प्ल्ज़ .. नोट दा मेर्गेंसी सीट. डोंट यू हॅव एनी अदर सीट अवेलबल ?"

"आइ आम सॉरी सर, बट दा एंटाइयर क्रॅफ्ट इस कंप्लीट्ली बुक्ड. दट ईज़ दा ओन्ली सीट विच वी कॅन अलॉट. इफ़ यू वान्ट यू कॅन एक्सचेंज दा सीट इनसाइड दा क्रॅफ्ट वित एनी पॅसेंजर"

"वो तो मैं कर ही लूँगा गोरी, तुझे बताने की ज़रूरत नही है. ओके देन, आइ गेस आइ डोंट हॅव आ चाय्स" कहते हुए उसने बोरडिंग पास लिया और चल पड़ा प्लेन की तरफ. बचपन से ही उसे प्लेन्स से बहुत डर लगता था. वो बिल्कुल नही जानता था कि ऐसा क्यूँ है, पर जब भी वो प्लेन में बैठता, डर के मारे उसका बुरा हाल होता. आज भी कुछ अलग नही था. उपर से यह एमर्जेन्सी सीट. उसने सोचा 2 घंटे का ही तो सफ़र है, किसी तरह से निकाल लेंगे, किसी का एहसान क्या लेना, इसी लिए उसने सीट भी एक्सचेंज नही करी.

अभी फ्लाइट टके ऑफ भी नही हुई थी कि उसका पूरा चेहरा पसीने से भर चुका था.

"आर यू ओके सर? डू यू नीड एनी असिस्टेन्स?" एर होस्टेस्स ने उसकी हालत देख कर उससे पूछा

"नो आइ आम फाइन. जस्ट सम बटरफ्लाइस इन दा स्टमक. आइ एम श्योर एवेरितिंग विल बी ऑलराइट आंड वी विल लॅंड सेफ्ली"

"श्योर सर. इफ़ यू नीड एनितिंग, जस्ट प्रेस दिस बटन" कह कर एर होस्टेस्स चली गयी

"पहली बार प्लेन से सफ़र कर रहे हो क्या आप?" उसके साथ वाले आदमी ने उससे पूछा. शकल से वो इंडियन लगता था और पान चबा रहा था जिससे शक की कोई गुंजाइश नही रही

"जी नहीं"

"ह्म्म शकल से भी नही लगते. हमारा तो प्लेन में बहुत आना जाना लगा रहता रहता है. कभी न्यू यॉर्क, कभी यहाँ कभी वहाँ. क्या करें कुछ काम ही ऐसा है. आप भी टोरोंटो जा रहे हैं?"

"जी जब यह प्लेन टोरोंटो जा रहा है तो ज़ाहिर सी बात है के मैं भी वहीं जा रहा होऊँगा"

"वैसे बात तो सही है. मेरा तो कारोबार हैं वहाँ पे. अपनी कॅब एजेन्सी है. काफ़ी मुनाफ़ा होता है"

"आप कौन है और यह सब मुझे क्यूँ बता रहे हैं? शादी का रिश्ता पक्का करना है क्या?" उसने थोड़ा खीजते हुए बोला

"अर्रे मैं तो बस ऐसे ही बात कर रहा था. गुस्सा क्यूँ होते हो. अब नहीं करूँगा" कहते हुए उसने उधर की तरफ मूह कर लिया. रोहित ने अभी चैन की सास ली ही थी कि वो आदमी फिर से बोल पड़ा "देखिए अगर मैं आपकी मॅगज़ीन ले जाउ तो आपको कोई ऐतराज़ तो नही होगा ना?"

"मेरी मॅगज़ीन क्यूँ ले जाएँगे आप? आपके पास भी तो है.."

"अर्रे दो ले जाउन्गा घर पे तो ठीक रहेगा ना.. मेरी 2 बेटियाँ है. दोनो एक एक ले लेंगी. नहीं तो लड़ाई हो जाएगी"

"यह लीजिए. रख लो. और मुझे बख्स दो"

"अर्रे देखो प्लेन चल पड़ा. अभी यह उड़ेगा. लेकिन यह क्या सीट मिल गयी है.. विंग के सिवा कुछ दिखता ही नही है"

"क्या देखना है बाहर? किसी को हाथ हिला कर बाइ करना है क्या? यार भगवान के लिए मुझे बख्स दो"

"अर्रे भगवान को बीच में क्यूँ ला रहे हैं.. वैसे भी उनके बहुत करीब से उड़ रहे हैं, ऐसा ना हो कि उनको आप पसंद आ जाओ" कहता हुआ वो खिलखिला कर हँसने लगा.

रोहित को बहुत गुस्सा आ रहा था, लेकिन उसने किसी तरह से अपने उपर काबू किया और दूसरी तरफ मूह फेर के सोने की कोशिश करने लगा. कब उसकी आँख लग गयी, उसको पता भी नही चला. थोड़ी देर में एक झटके के साथ उसकी आँख खुली. उसने देखा कि प्लेन को काफ़ी झटके लग रहे हैं. तभी अनाउन्स्मेंट हुई कि बाहर बहुत टर्ब्युलेन्स है. ऑक्सिजन मास्क्स भी नीचे लटक गये. बाहर बारिश बहुत तेज़ हो रही थी और बिजली कड़कती दिखाई दे रही थी. तब एक झटके के साथ प्लेन लड़खड़ाने लगा. रोहित ने देखा के प्लेन के विंग में आग लग गयी है और उसकी हालत बहुत खराब हो गयी. एक बिजली कबोल्ट प्लेन पे गिरा और इससे पहले रोहित कुछ समझ पाता, अंदर आग ही आग हो गयी. लोग चीखने चिल्लाने लगे और प्लेन का एक हिस्सा जलने लग गया. बाहर और अंदर के प्रेशर के डिफरेन्स के कारण, प्लेन का पीछे का हिस्सा टूट गया और रोहित और कयि लोगों समेत, प्लेन से अलग हो गया और नीचे गिरने लग गया. नीचे गिरते वक़्त उसे एक ज़ोर के धमाके की आवाज़ आई और वो समझ गया कि आधा प्लेन ब्लास्ट हो चुका है. बचे हुए लोग, तेज़ी से ज़मीन की तरफ गिर रहे थे और उनका बचना भी नामुमकिन था.

रोहित ने अपनी आँखें बंद कर ली और उसकी पूरी ज़िंदगी की तस्वीरें उसके आगे घूमने लगी. उसके माँ बाप, उसके दोस्त, उसके सभी चाहने वाले एक एक करके उससे याद आने लगे. ज़िंदगी के आखरी चन्द लम्हों में वो अपनी सारी खुशियाँ याद करने लगा और उसकी आँखों से आसू बहने लगे. तभी अचानक उसकी छाती पर हवा का ज़ोरदार वार हुआ और उसे ऐसा लगा मानो वो उपर की ओर खिच रहा है. उसने अपनी आँखें खोली तो सामने का मंज़र देख कर उसे यकीन नही हुआ. जहाँ सब कुछ नीचे गिरता जा रहा था, वहीं किसी कारण से रोहित उपर उठ रहा था. उसने अपने आप को थोड़ा संभाला और एक तरफ झुक गया. अब तो जो हो रहा था उसपे यकीन करना एकदम असंभव था. वो हवा में ग्लाइड कर रहा था. बिल्कुल एक पक्षी की तरह. दायें, बायें, उपर, नीचे - जिस दिशा में वो जाना चाहता था, वो जा पा रहा था. वो सच मूच उड़ रहा था

 
बंधुओ आज का अपडेट दे दिया है आपको कैसा लगा
 
4) तान्या

"1 मिलियन यूएसडी ?? यू मस्ट बी जोकिंग. 10 मिलियन से कम में मैं काम नही करूँगी" तान्या गुस्से में बोली

"10 मिलियन बहुत ज़्यादा है" आदमी बोला

"तो फिर ढूँढ लो किसी को जो तुम्हारा काम 1 मिलियन में करे. मैने पहले ही बोला था, काम तुम्हारा, दाम मेरा. इतना बड़ा काम है, आइ विल नोट कॉंप्रमाइज़ ऑन मनी"

"मुझे सोचना पड़ेगा"

"तो सोच लो. पूरे 5 मिनिट हैं तुम्हारे पास. फिर कभी मुलाक़ात नही होगी" कहते हुए तान्या उठी और बाल्कनी में जा कर सिगरेट पीने लगी.

आदम को सोचने की कोई ज़रूरत नही थी. उसको पता था कि तान्या से अच्छी लड़की नही मिलेगी उसको यह चोरी करने के लिए. ऐसी चोरियाँ करने में वो माहिर थी और जिस चीज़ की चोरी कर रही थी, उसका दाम तो वैसे भी बिलियन्स में था. रह रह के आदम एक ही बात सोच रहा था कि एक ऐसी लड़की कैसे चोरियों में पड़ गयी. उसको देख कर कोई नही कह सकता था कि वो एक चोर है. देखने में वो किसी मॉडेल से कम नही लगती थी. पतली, लंबी, बड़ी बड़ी आँखें, लंबे काले बाल और चाल तो ऐसी के चौराहे पर पूरा ट्रॅफिक रुकवा दे. शायद इस दुनिया की लड़कियों को कोई नही समझ सकता था. जो लड़की आराम से मॉडेलिंग कर के या किसी अमीर आदमी की ट्रोफी वाइफ बन के अपनी सारी उमर गुज़ार सकती थी, वो चोरियाँ कर रही है. लेकिन आदम को अपने काम से मतलब था, लड़की की हिस्टरी-जियोग्रफी से नही. जब तान्या वापस आई तो उसने झट से बोल दिया "ठीक है तान्या. 10 मिलियन इट ईज़. 1 मिलियन अभी और बाकी 9 मिलियन काम होने के बाद"

"मंज़ूर है. कोई धोखाधड़ी करने की कोशिश करी तो याद रखना, पाताल से ढूँढ लाउन्गी और ऐसी हालत करूँगी कि तुम रोज़ दुआ करोगे कि मौत आ जाए, लेकिन मौत भी नखरे दिखाएगी और आएगी नही"

"मेरी ज़बान है तान्या. तुम मेरा काम करो और मैं तुम्हें पैसे दूँगा. चोरों की ईमानदारी पे कभी शक नही करना चाहिए"

"हां हां. फिल्मी बातें बंद करो और बॅंक का ब्लू प्रिंट निकालो. कोई प्लान बनाना पड़ेगा अगर तुम्हारे पास पहले से प्लान नही है तो."

"मेरे पास कोई प्लान नही है. यह रहे ब्लूप्रिंट. अच्छी तरह से देख लो और जैसा तुम्हें ठीक लगे वैसा प्लान बनाओ" कहते हुए आदम ने ब्लू प्रिंट निकाल के टेबल पर रख दिए.

तान्या काफ़ी देर तक उन ब्लूप्रिंट्स को स्टडी करती रही और कुछ सोचती रही. प्लान तो उसने 2 मिनिट में ही बना लिया था, पर जब पार्टी 10 मिलियन दे रही है तो उसको लगना भी चाहिए कि मेहनत बहुत हो रही है. आख़िर तान्या की इमेज का सवाल था.

"आदम हम कल ही चोरी करेंगे" थोड़ी देर में वो बोली.

"कल? पर कल सॅटर्डे है. बहुत भीड़ रहेगी बॅंक में"

"इसी लिए तो कह रही हूँ. अब प्लान सुन और जैसा मैं कहती हूँ वैसे ही करना. नहीं तो हम दोनो की जान ज़ोख़िम में पड़ जाएगी. मैं तो किसी तरह निकल लूँगी. तुम्हारा नहीं कह सकती" और तान्या अपना सारा प्लान उसे बताने लगी.

अगले दिन सुबह तान्या आदमी को बॅंक के बाहर मिली. उसने बुरखा पहन के अपने आप को कवर किया हुआ था.

"आओ, अंदर चलते हैं. भूले तो नहीं ना प्लान? लॉकर नंबर याद है?"

"बिल्कुल याद है. 4 से शुरू होने वाला लॉकर चाहिए"

"गुड. चलो अब अंदर." दोनो हाथ में हाथ डालकर बॅंक में दाखिल हो गये. एंट्रेन्स पे सेक्यूरिटी चेक हुआ, लेकिन उनके पास ऐसा कुछ भी नही था जो पकड़ा जाता. आदम अभी भी सोच रहा था कि पता नही कैसे तान्या वो पेपर्स अंदर से निकलेगी

"आइ वान्ट आ सेफ्टी डेपॉज़िट लॉकर" आदमी ने काउंटर पे जा के कहा.

"सर वी डू नोट गिव लॉकर्स टू पीपल हू डू नोट हॅव आन अकाउंट वित अस"

" मेरा अकाउंट हैं यहाँ पर. आइ आम अन ओल्ड कस्टमर"

"ओह्ह सॉरी सर. फिर आप यह फॉर्म भर दीजिए आंड वी विल डू दा नीडफुल" उसने एक फॉर्म आदमी के आगे कर दिया. कोने में जा कर आदमी वो फॉर्म भरने लग गया. उसने वो सारी जाली डीटेल्स उस में डाल दी जो उसने यहाँ अकाउंट खोलते वक़्त दी थी.

"हियर यू गो मेडम."

"थॅंक यू सर. मैं ज़रा वेरिफाइ कर लूँ, फिर आपको लॉकर दिखा देंगे"

"मेडम एक रिक्वेस्ट है. लॉकर नंबर 4 से शुरू होना चाहिए. दट ईज़ माइ लकी नंबर"

"मैं देखती हूँ कि क्या कर सकती हूँ सर" कहते हुए वो वेरिफिकेशन करने लग गयी आंड 2 मिनिट बाद बोली, "सर हो गया. आपका लॉकर नंबर 4035 है. यह रही चाबी. थे सेक्यूरिटी पर्सन विल गाइड यू देयर."

"मॅम आपके पास 4 से शुरू होने वाला कोई 3 डिजिट्स का लॉकर नही है? आइ आम वेरी सूपरस्टिशस. प्लीज़ हेल्प मी."

"ह्म... ओके .. फिर आपको 454 दे देती हूँ. विल तट बी ऑलराइट?"

"पर्फेक्ट है मेडम. थॅंक्स. प्लीज़ मुझे लॉकर दिखा दीजिए. आओ बेगम. समान रख दो उसमें" कहते हुए उसने फिर से तान्या का हाथ पकड़ा और उसे ले कर लॉकर्स की तरफ चल पड़ा. उसके दिल की धड़कनें बहुत तेज़ हो रही थी. बस यहीं तक का प्लान उसको पता था. उसका काम भी यहीं ख़तम हो रहा था. आगे जो भी करना है, तान्या को ही करना था.

"आइए मॅम, इस तरफ है" सेक्यूरिटी वाला उनके आगे आगे चलने लगा. उसने अंदर जा कर उनको लॉकर दिखाया.

"डार्लिंग, य डोंट यू वाइ आउटसाइड. मैं आती हूँ सब रख कर" तान्या बोली

"ओके. श्योर" आदमी अचरज में पड़ गया. कैसे करेगी वो अब और कहीं उसको धोखा तो नहीं देगी?

"और आप भी यहा खड़े घूरते ही रहेंगे या बाहर जा कर वेट करेंगे?" उसने सेक्यूरिटी गार्ड से पूछा.

"जी मेडम. मैं बाहर वेट करता हूँ." सकपका कर सेक्यूरिटी वाला बोला

अब रूम में तान्या अकेली थी. जो लॉकर से उसको डॉक्युमेंट्स चुराने थे, वो साथ वाले कमरे में था. उस कमरे का दरवाज़ा लोहे के गेट से बंद था जिसपे सेन्सर लगे हुए थे. अगर उसको खोलने की कोशिश करी जाती तो अलार्म बज उठता. चारों ओर कैमरे लगे हुए थे जो हर एक चलकदमी को रेकॉर्ड कर रहे थे. सबसे अच्छी बात यही थी कि एक बार में बस एक ही पर्सन अलोड था लॉकर्स में, तो और कोई नही था आस पास. तान्या ने अपना आल्लोटेड लॉकर खोला और अपने साथ लाया बॅग उसमें रख दिया. अब बारी थी कॅमरा की. नॉर्मल किसी के लिए कॅमरास को काबू करना मुश्किल होता, लेकिन तान्या के लिए नहीं.

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपनी आखें गढ़ा दी कॅमरा पे. कॅमरा खुद ब खुद डिसकनेक्ट हो गया. फिर तान्या दो कदम पीछे हुई और अपने दिमाग़ में साथ वाले रूम को देखने लगी. उसके और रूम के बीच में सिर्फ़ एक दीवार थी इस साइड पर जो दोनो तरफ से लॉकर्स से घिरी हुई थी. आँखें बंद करके तान्या धीरे धीरे चलना शुरू हुई और धीरे धीरे पहले लॉकर, फिर दीवार और फिर दूसरी तरफ के लॉकर्स के थ्रू हो गयी. उसने काफ़ी पहले अपनी एबिलिटीस को पहचान लिया था और उनको कंट्रोल करना सीख लिया था. अब वो 'उस' लॉकर के पास पहुँची पहले उसने अपने दिमाग़ की शक्ति से उसको खोलने की कोशिश करी पर ताला तोड़ना कॉंप्लिकेटेड था. तो उसनेस्टील के थ्रू हाथ डाल के अंदर का काग़ज़ पक्कड़ लिया. अब वो धीरे धीरे अपना हाथ वापस खीचने लगी. हाथ तो वापस आ रहा था पर पेपर लोहे के थ्रू नही हो पा रहा था. तान्या ने ओर ज़ोर से कॉन्सेंट्रेट किया और उस सेफ्टी बॉक्स में बड़ा सा छेद कर दिया. उसने वो पेपर उस में से निकाला और वापस उस होल को सील कर दिया. इतना करने से वो बहुत थक चुकी थी. उसको पूरा यकीन नही था कि वो वापस दीवार के थ्रू जंप मार पाएगी या नहीं, लेकिन उसको वो तो करना ही था. उसने फिर 2 कदम पीछे लिए और और इस बार जल्दी से जंप मार के पार हो गयी. इतने एक्शेरशन से उसकी हालत खराब हो गयी थी और वो निढाल हो कर ज़मीन पर गिर गयी.

"उठो तान्या, उठो"

उसको होश आया तो देखा कि आदमी और सेक्यूरिटी वाला उसको घूर रहे हैं और वो ज़मीन पर पड़ी हुई है

"क्या हुआ मेडम... आप ठीक तो हैं"

"मुझे चक्कर आ गया था, चलो जल्दी से यहाँ से चलते हैं. मेरी तबीयत ठीक नही है. लॉकर का काम भी हो गया है" उसने किसी तरह से उठते हुए आदमी को बोला. आदमी उसको सहारा दे कर कार की तरफ ले आया

"काम हो गया"

"हां हो गया. मेरी तबीयत सच में खराब है . तुम पैसे लाए हो?"

"हां कार में पड़े हैं"

"गुड. कॅन यू ड्रॉप मी टू एरपोर्ट?"

"यॅ श्योर"

दोनो जा कर कार में बैठ गये. तान्या पीछे लेट गयी और पैसों से भरे बॅग को अपने पास रख लिया. अभी वो थोड़ी ही दूर गये थे के आदम ने कार रोक दी. तभी 2 काली गाड़ियाँ भी आ के आदमी की कार के ऑपोसिट रुक गयी जिनमे से 6 लोग गन्स ले कर निकले. "गेट आउट तान्या"

तान्या उठी और उसके समझ में कुछ नही आया. उसकी एनर्जी अभी तक वापस नही आई थी. उसने बॅग पकड़ा और बाहर निकल गयी

"पेपर्स दो तान्या"

"कौन है यह लोग उसने अपने साथी से पूछा?"

"मेरे साथी हैं. पेपर्स दो, यह 9 मिलियन भी दो और चलती बनो अब, नहीं तो तुम्हें यहीं मार के गाढ देंगे हम. तुम क्या सोचती हो कि मेरे से बारगेन कर लोगि? कभी नहीं. मैने एक मिलियन बोला तो बस एक मिलियन ही, ना कम ना ज़्यादा"

"तुम मुझे डबल क्रॉस कर रहे हो ?" हँसते हुए तान्या ने बोला

"हसो मत और पेपर्स और पैसे इधर दो" कहते हुए आदमी ने हाथ आगे बढ़ाया. लेकिन वो जानता नहीं था कि पंगा किस से ले रहा है. तान्या इतनी आराम से हारने वालों में से नही थी.

तान्या ने अपने हाथ का एक इशारा किया और आदमी के कंधे में ज़ोर से दर्द होना शुरू हो गया."मैने बोला था ना , ऐसी हालत करूँगी, के मौत भी नही मिलेगी तुम्हें"

"शूट हर .. शूट हर.. खड़े हुए क्या देख रहे हो" आदम के ऐसा कहते ही 6 आदमियों ने अपनी बंदूक तान कर तान्या पर गोलियाँ चलाना शुरू कर दिया.

तान्या ने अपनी आँखें बंद कर दी और दोनो हाथ अपनी छाती से सटा लिए. धड़ल्ले से उसपर चलती गोलियाँ, जैसे किसी अदृश्य दीवार से टकराकर रुक रही थी. फिर उसने अपनी आखें खोली जिनमें गुस्सा सॉफ झलक रहा था

"अब जब तुमने इतना देख लिया है तो मैं तुम्हें ज़िंदा नही छोड़ सकती. आइ आम सॉरी" कह कर तान्या ने अपने हाथ धीरे धीरे उपर करने लगी. उसके हाथ उपर करने के साथ ही वो सातों आदमी धीरे धीरे हवा में उठने लगे. फिर हाथ के एक इशारे से उसने उन सातों को खीच के कारो पे मार दिया. वो सभी निढाल हो कर वहीं पस्त हो गये. फिर तान्या धीरे धीरे मेन रोड की तरफ चलती गयी. अभी वो 5 मिनिट दूर ही गयी थी कि उसको एक टॅक्सी मिल गयी. वो उसमें बैठी और एरपोर्ट के लिए रवाना हो गयी. टॅक्सी में बैठ कर जब वो थोड़ा दूर पहुँचे, तब उसने अपनी दिमागी शक्ति से उन तीनो गाड़ियों में आग लगा दी. वो आज तक इसी लिए बची हुई थी क्यूंकी उसको कोई अच्छी तरह से नही जानता था. एरपोर्ट तक जाते हुए वो सोचने लगी कि अपने 10 मिलियन कैसे खर्च करेगी और जो डॉक्युमेंट्स उसने चुराए हैं, वो किसको बेचेगी

 
आइए इधर बिट्टू की तरफ की कुछ जानकारी ले लेते है

"बेटा क्या हुआ" बिट्टू को हॅपी को ले कर आते देख उसके बाप ने पूछा

"हॅपी थोड़ा बाइक से फिसल गया था, कुछ नही हुआ. सब ठीक है" उसने अपने पापा को बोला. "उसके घर पे फोन कर के कह दो प्लीज़ कि आज रात वो हमारे यहाँ रुक रहा है. और बताना मत कि बाइक से फिसला है, नहीं तो हमेशा की तरह उसके पापा मेरी संगत को ही दोष देंगे"

"हां मैं बोल देता हूँ बेटा. वैसे तुम पी के चला रहे थे क्या?"

"हां थोड़ी सी पी थी, पर रोड गीली थी ना इसलिए फिसल गया"

"बहाने मत बनाओ. कितनी बार तुम्हें कहा है कि पी के गाड़ी नही चलानी. सुनता क्यूँ नही है बात को?"

"अर्रे मैं ठीक हूँ, हॅपी को चोट लगी है. उसके बाप को कहो कि इसको बोले पी के ना चलाने को. मेरे उपर क्यूँ चढ़ते हो"

"चुप कर बेशरम. ऐसे बात करते हैं अपने बाप से?" तभी उसकी माँ बीच में आ गयी. "और यह क्या तमाशा लगाया हुआ है.. हर दूसरे दिन पी के घर आ जाता है... पागल है क्या?"

"अच्छा.. पागल ही पीते हैं क्या?? पापा रोज़ पीते हैं तो क्या वो भी पागल हो गये? सारी दुनिया जो पीती है वो भी पागल है? थोड़ा पी लिया तो क्या गुनाह हो गया... आप ऐसे बोल रही हो जैसे पता नही किसी कि बकरी चुरा के आ गया हूँ मैं... कुछ ज़्यादा नहीं हुआ है."

"तेरे से तो मैं कल निपट ता हूँ बिट्टू. अभी तू ले जा हॅपी को. कल देखते हैं" उसका बाप गुस्से से आग बाबूला हो गया.

बिट्टू हॅपी को रूम में ले आया. हॅपी की साँस बिल्कुल ठीक चल रही थी और कहीं से खून भी नहीं बह रहा था. पैर पर थोड़ी बहुत खरोन्चे थी बस. उसको यकीन था कि हॅपी को तो ज़्यादा कुछ नही हुआ है. पर उसके साथ जो हुआ था, वो यकीन करना थोड़ा मुश्किल था. इतनी बड़ी गाड़ी, इतनी स्पीड से आती हुई अगर किसी को टकराती तो उसका मारना तो पक्का था. पर ऐसा कैसे हो गया कि बिट्टू से टकराने के बाद गाड़ी टूट गयी, लेकिन उसको खरॉच तक नही आई. वो लेता हुए यही सोच रहा था, कब उसको नींद आ गयी उसको पता ही नही चला.

सुबह उसकी नींद हॅपी ने खोली.

"यार पावं बड़ा दर्द कर रहा है. हिलाया भी नहीं जा रहा. लगता है टूट गया है"

"सतयानाश हो तेरा मनहूस. सुबह सुबह उठा के यह बोल रहा है. कीड़े पड़ेंगे तेरेको बड़े बड़े"

"अबे तू लानत देनी बंद कर. मुझे हॉस्पिटल ले कर जा. मैं बची हुई उमर लन्गडे बापू के नाम से नही पहचाना जाना चाहता"

"अबे पड़ा रह 10 मिनिट. टाय्लेट तो हो लूँ. फिर लेकर चलता हूँ. नहीं तो वहाँ तुझे संभालना तो दूर, खुद की नही संभाल पाउन्गा" कहते हुए वो उठा और टाय्लेट चला गया.

जब वो हॅपी को प्लास्टर लगवा कर, उसको घर छोड़ कर अपने घर पे आया, तो एक और 'आक्सिडेंट' उसका इंतजार कर रहा था.

"बिट्टू. इधर आ. कहाँ से आ रहा है सुबह सुबह" उसके पापा ने उसको देखते ही पुकारा

"हॉस्पिटल गया था बिट्टू को ले कर. हड्डी टूट गयी है उसकी. फिर घर छोड़ के आया हूँ उसको. आपको क्या हो गया ? सुबह सुबह बवाल क्यूँ कर रहे हो"

"मैने तो कल रात ही बात करनी थी, पर तू हालत मैं नही था. टोरोंटो की यूनिवर्सिटी से चिट्ठी आई है. तेरा वैटलिस्ट कॉनवर्ट हो गया है. 5 दिन में क्लासस स्टार्ट हैं"

"5 दिन में? फिर तो सवाल ही नही उठता पहुँचने का. 5 दिन में फीस का पैसा कैसे जुटाएँगे"

"कल तक मुझे भी ऐसा ही लग रहा था, लेकिन तेरी आय्याशी को देखते हुए मैने डिसाइड कर लिया है कि तू वहाँ जाएगा"

"पर पापा यह नही हो सकता. पैसे कहाँ से आएँगे?"

"पैसे की चिंता तू मत कर. उसका इंतज़ाम हो गया है. पहले तुझे इंग्लेंड जा कर अपने चाचा से मिलना है. वो तुझे सब समझा देंगे. फिर वहाँ से टोरोंटो जाना है"

"पर पापा...."

"पर वार कुछ नहीं. बहुत हो गयी तेरी आय्याशी और मनमानी. जो मैं कहता हूँ चुप चाप कर"

उसने बहुत ना-नुकार करी लेकिन उसकी एक ना चली. घर में फ्लाइट के टिकेट आ गये और आख़िर में बिट्टू ने भी मन बना लिया जाने का. सब कुछ प्लान के हिसाब से चला. 2 दिन में वो इंग्लेंड जा कर अपने चचे से मिला, उन्होने समझा दिया कि पैसा कॉलेज के अकाउंट में ट्रांसफर हो चुका है. वहाँ से उसने टोरोंटो की फ्लाइट पकड़ी, और निकल लिया अपने डेस्टिनेशन की ओर

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बंधुओ आइए यहाँ दिया के यहाँ क्या हो रहा है ये भी जान लेते हैं

"माँ मुझे यहाँ नही रहना. मैं वापस आ रही हूँ" दिया ने फोन पे कहा

"क्यूँ बेटा? क्या हुआ?" उसकी माँ ने शैतानी में पूछा

"बस मुझे यहाँ नही रहना. मैं वापस घर पे आ रही हूँ"

"अर्रे बेटा क्या हुआ.. कुछ बता तो"

"कुछ बताने को नही है मम्मी"

"आगे की पढ़ाई का क्या करेगी?"

"पापा से बोलो. वो कह रहे थे कि टोरोंटो की एक यूनिवर्सिटी में उनकी जान पहचान है. मैं वहाँ पर पढ़ लूँगी. बस यहाँ से मुझे बाहर निकालो. बहुत गंदी जगह है यह"

"ठीक है बेटा. मैं बात करती हूँ. फिर तुझे वापस कॉल करूँगी"

कल रात का हादसा रह रह के दिया के ज़हेन में कोंध रहा था. वो चाहते हुए भी वो तस्वीरें अपने दिमाग़ से बाहर नही निकाल पा रही थी. प्रिया का उन दोनो लड़कों से सेक्स करना, दिया का रेप होना, फिर उसका वहाँ से भागना - यह सारे सीन्स उसके दिमाग़ में मूवी की तरह चल रहे थे. वो अभी तक हैरान थी कि उन 2 लड़कों को इतनी ज़ोर का झटका क्यूँ लगा उसको टच करते हुए. उसके मन में सिर्फ़ सवाल ही थे लेकिन जवाब कोई नही था. तभी प्रिया भी उठ गयी.

"अर्रे दिया.. आज तुम इतनी जल्दी कैसे उठ गयी? कल बड़ा मज़ा आया ना. मैं तो चाहती हूँ कि ऐसी पार्टीस बार बार करें हम. अंजान लोगों से सेक्स करने का अपना ही अलग मज़ा है"

"खाक मज़ा आया, तुझे पता भी है तू वहाँ क्या कर रही थी? वो लड़के तेरी वीडियो भी उतार रहे थे... और तो और.. उन्होने मेरे साथ...." कहते हुए दिया फिर रोने लगी

"क्या तेरे साथ??"

"रेप किया उन्होने मेरा. और सब तेरे कारण हुआ"

"अर्रे तू तो ऐसे कह रही है जैसे मैने कुछ किया हो तेरे साथ... तुझे कहा किसने था बीच में आने को...."

"मुझसे तेरी हालत नही देखी जा रही थी प्रिया. मैं तुझे बचाने के लिए बीच में आई थी.." सुबक्ते हुए दिया बोली

"रहने दे तू... मुझे पता है कि तेरा भी मूड कर रहा था. और सेक्स ही तो किया है उन्होने तेरे साथ.. गोली ले लेना.. इतना बड़ा हव्वा क्यूँ बना रही है?"

"चुप कर प्रिया. ऐसी बात तू सोच भी कैसे सकती है... तेरी वजह से मेरा यह हाल हुआ और तुझे तो कोई फरक ही नही पड़ता.."

"क्या फरक पड़ेगा दिया.. तू ऐसे बोल रही है जैसे तू अभी तक कुँवारी थी.. तूने भी तो अपने बाय्फ्रेंड के साथ खूब चुदाई मचाई थी.. तब मैं बीच में आई थी क्या... तुझे भी बीच में आने की कोई ज़रूरत नही थी.. ना तू बीच में आती और ना ही तेरा रेप होता... लेकिन तुझे तो हमेशा से ही मेरे कामों में टाँग अडाने की आदत है ना..."

"कितनी बेशरम है तू प्रिया... तू सारा ब्लेम मुझ पर ही डाल रही है..."

"मैं कोई ब्लेम किसी पे नही डाल रही. बस यह कह रही हूँ कि कल रात को भूल जा. और अपनी बाकी की ज़िंदगी आराम से जी."

"ऐसे कैसे भूल जाउ प्रिया... बिल्कुल नही भूल सकती मैं.. मैं वापस इंग्लेंड जा रही हूँ"

"दिया आर यू मॅड? ऐसे कैसे जा सकती हो तुम?? इतनी छोटी सी बात का बतंगड़ मत बनाओ.. हम ने बस सेक्स ही किया है, कोई गुनाह नही किया"

"तेरे लिए छोटी सी बात होगी प्रिया, मुझे अपने रोम रोम से घिंन आ रही है... मुझे नही लगता कि मैं वापस वैसी दिया बन पाउन्गी... आइ म स्कार्ड फॉर लाइफ"

"जो तेरे मन में आए, तू कर... मैं कुछ नही बोलूँगी आगे... " कहते हुए प्रिया उठी और बाथरूम में घुस गयी

तभी दिया का फोन वापस बजा, "हां मम्मी"

"बेटा मैने पापा से बात कर ली है. वो करवा देंगे तुम्हारा अड्मिशन. 5 दिन में कॉलेज स्टार्ट है. तुम वहाँ से सीधे टोरोंटो ही चली जाओ"

"नहीं माँ. मैं कुछ दिन के लिए घर आ रही हूँ. आज रात की फ्लाइट की टिकेट मैने बुक कर ली है. वहाँ से ही टोरोंटो चली जाउन्गी"

"ठीक है बेटा, जैसा तू ठीक समझे. पर तू ठीक तो है ना?"

"हाँ माँ. मैं बिल्कुल ठीक हूँ"

प्रिया ने फोन रखा और जल्दी जल्दी अपनी सारी पॅकिंग करने लगी. वो इस देश में एक पल भी और नही बिताना चाहती थी. यहाँ की हर एक चीज़, बल्कि प्रिया भी, उसको उस हादसे की याद दिला रही थी. यहाँ से दूर रहेगी तो अपने आप सब ज़ख़्म भर जाएँगे. उसने अपनी पॅकिंग करी, कॉलेज के डीन को एक ई-मैल भेजा जिसमें उसने लिखा कि वो किन्ही पर्सनल कारणों से घर जा रही है और शायद वापस कॉलेज ना जाय्न करे और रात होते ही, सबको बाइ कह कर निकल ली इंग्लेंड के लिए. घर पहुँच कर वो बिल्कुल नॉर्मल तरीके से सब से मिली. वो नही चाहती थी कि किसी को भी शक हो कि उसके साथ कुछ बुरा हुआ है. उसने बस अपने घर वालों को यह बोल दिया कि बॉय फ्रेंड का चक्कर है और उसको वो कॉलेज भी पसंद नही है. घर वालों से मिल कर, वो भी टोरोंटो की 'उस' फ्लाइट में सवार हो गयी और निकल पड़ी अपने नये गन्तव्य की ओर - अपनी सारी अच्छी और बुरी यादों को पीछे छोड़

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इधर तान्या क्या हो रहा है जान लेते हैं बंधुओ

तान्या चोर भले ही हो, पर वो पूरी ज़िंदगी चोर रहना नही चाहती थी. उसका हर एक मूव, बहुत कॅल्क्युलेटेड होता था. यहाँ आने से पहले ही उसने टोरोंटो की एक यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया था अपनी हाइयर स्टडीस के लिए. यहाँ वो बस इसलिए आई थी ताकि कुछ पैसा इकठ्ठा कर पाए. बाकी लोगों की तरह, उसके सर पर माँ बाप का हाथ ना होने से, उसके पास कोई फाइनान्षियल सोर्स नही था. उसके माँ बाप की मौत एक आक्सिडेंट में 2 साल पहले हुई थी. तान्या भी कार में ही थी जब कार एक पेट्रोल के टॅंकर से टकरा गयी. कार ब्लास्ट हो गयी, लेकिन उसका बाल भी बांका नही हुआ था. वो तभी समझ गयी थी कि वो कोई ऑर्डिनरी लड़की नही है.

पिछले 2 साल में उसने अपने आप को बहुत अच्छी तरह से जान लिया था. उसके पास इतनी सारी पवर्स कैसे हैं, वो नही जानती थी. उसके लिए बस यही इंपॉर्टेंट था कि उसके पास पवर्स हैं. अपनी हर एक पवर को पहचान-ने और उसको पर्फेक्ट करने में उसकी बहुत मेहनत लगती थी. दुनिया के लिए भले ही वो उस आक्सिडेंट में मर गयी हो, पर अंडरवर्ल्ड में उसका नाम बहुत हो गया था. उसने छोटी छोटी चोरियों से शुरू किया अपना खेल और आज 10 मिलियन की बाज़ी मार ली थी. उसने आज तक किसी पे अपनी पवर्स ज़ाहिर नही होने दी थी पर आज डबल क्रॉसिंग से सारा खेल बिगड़ गया. उसको उन आदमियों को मार के बिल्कुल अच्छा नही लग रहा था लेकिन उसके पास कोई और चारा भी नही था. अब पैसों से लबालब भरा बॅग उसकी गोद में था और टिकेट उसकी जेब में.

एरपोर्ट पहुँच कर उसने डिसाइड किया कि वो यह बॅग अपने पास कॅबिन लगेज में ही रखेगी. चेक इन के टाइम उससे बहुत प्राब्लम हुई क्यूंकी इस साइज़ का बॅग कॅबिन में अलोड नही था. बक को लगेज में ना रखने के लिए, उसने एक एक्सट्रा सीट का टिकेट ले लिया. ताकि आराम से रहे. अभी वो अपनी जगह पर बैठी ही थी कि एक लड़का उसके पास आ गया

"मेडम जी यह बॅग आपका है?"

"हां मेरा है"

"इसको कहीं और रखिए ना, सीट बैठने के लिए होती हैं. यह ट्रेन का कॉमपार्टमेंट नही है के सीट पर ही बॅग लाद दिया"

"यह बाग यहीं रहेगा. और तुम थोड़ा तमीज़ से बोलो"

"अर्रे ऐसे कैसे यहाँ रहेगा. यहाँ वाली सीट से मुझे खिड़की नही दिख रही. मैने बाहर देखना है. तुम इस बाग को कहीं और रखो. मैं वहाँ बैठूँगा. या तुम मुझे विंडो सीट दे दो"

"यह बॅग कहीं नही जाएगा. मैने 2 सीट के पैसे दिए हैं. मैं भी यहीं रहूंगी और विंडो सीट से नहीं हिलूंगी"

"कमाल है.. 2 सीट के पैसे... इतना कितना प्रेम है इस बाग से... चलो विंडो में बारी बारी बैठ जाते हैं"

"अजीब जाहिल किस्म के इंसान है आप. एक बार बोल दिया नही देनी सीट तो क्यूँ पीछे पड़ रहे हो"

"देखिए बिट्टू नाम है मेरा. प्लेन में दूसरी बार बैठ रहा हूँ. अब थोड़ा आनंद लेना है तो विंडो सीट पे बैठने का मन कर रहा है. तुम क्यूँ इतना अकड़ रही हो... इतनी ज़्यादा ही तमीज़ वाली हो तो वो सीट मुझे दे दो.."

"जस्ट शट अप... डोंट टॉक टू मी"

"रूको मैं ज़रा टीटी को बुलाता हूँ... ही विल डिसाइड. मंज़ूर है"

"अर्रे तुम्हारी अकल में बात क्यूँ नही घुसती... मैं यहाँ से नही हिल रही... और यह टीटी क्या है?? यह ट्रेन नही है"

बिट्टू ने भी सोचा कि क्यूँ इस पागल लड़की से मथापच्ची करी जाए, भाड़ में जाए यह और इसकी विंडो सीट. तभी फ्लाइट टेक ऑफ कर गयी और बिट्टू इन-फ्लाइट मूवी में मस्त हो गया. तान्या भी अब थोड़ा रिलॅक्स हो गयी और सोने लग गयी.

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आइए बंधुओ ज़रा दिया का भी आँखो देखा हाल देख लेते हैं

उधर दिया की हालत भी कुछ ज़्यादा अच्छी नही थी. एक तो उसको एमर्जेन्सी रो मिली थी उपर से वो भी आइल सीट. सोने पे सुहागा तब हुआ जब उसके साथ बैठा बंदा बड बड बोलता जा रहा था.

"जी मुझे आपकी कंपनी या आपने फ्लाइट में कितनी बार सफ़र किया है उसमें कोई इंटेरेस्ट नही है. आप प्लीज़ मेरे से बात मत करें नहीं तो मैं कंप्लेन कर दूँगी." जब 5 मिनिट तक वो बंदा नोन स्टॉप बोला तो दिया ने यह कह कर उसे धमकाया. तभी एक हॅंडसम सा दिखने वाला बंदा आया और विंडो सीट पर बैठ गया. अब वो बला उसके सर पड़ गयी थी और उसके साथ नोन स्टॉप बात कर रही थी. दिया ने अपने आईपेड़ के इयरफोन्स अपनी कान में डाले और शांति से आँखें मूंद के लेट गयी.

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