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परिवार(दि फैमिली) complete

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झड़ने के कारण पिंकी का बदन एक पल के लिए थोड़ा सा ढीला हुआ तो नरेश ने पिंकी को बेड पर लेटा दिया।पिंकी को बेड पर लेटाने के बाद नरेश ने अपनी पेंट और अंडरवियर एक साथ नीचे की और अपना लम्बा और मोटा लंड निकाल कर पिंकी के मुँह के पास कर दिया।

मोटा लंड देख कर पिंकी घबरा गई, पिंकी ने नजदीक से लंड को पहली बार देखा था।

नरेश ने अपना लंड पिंकी के होंठो से लगाया तो पिंकी ने मुँह फेर लिया- भाई, मुँह में मत लगाओ, ये गन्दा है!

‘पगली जिसे तू गन्दा कह रही है, लड़कियाँ तरसती है इसे मुँह में लेने के लिए… एक बार ले कर देख, फिर बार बार चूसने का मन ना करे तो कहना..’

पिंकी ना ना करती रही पर नरेश ने जबरदस्ती लंड का सुपाड़ा पिंकी के मुँह में घुसा दिया।

पिंकी तड़प उठी थी पर वो बेबस थी, शुरू में पिंकी ने बुझे मन से लंड के सुपारे पर जीभ चलाना शुरू किया पर फिर पिंकी को भी लंड से निकले कामरस का स्वाद अच्छा लगने लगा और वो मस्ती में लंड को आइसक्रीम की तरह चाटने और चूसने लगी।

अपनी सगी बहन के ऐसा करने से नरेश तो मस्ती के मारे सातवें आसमान पर था, उसकी मस्ती भरी आहें और सिसकारियाँ निकल रही थी।

नरेश ने पिंकी को बेड पर सीधा किया और 69 की अवस्था में आते हुए लंड को पिंकी के मुँह में देते हुए अपनी जीभ पिंकी की कुंवारी चूत पर रख दी।

दोनों भाई बहन मस्त होकर एक दुसरे के यौन अंगों को चाट और चूम रहे थे, दोनों दिन-दुनिया से बेखबर मस्ती में लगे हुए थे।

कुछ देर की चूसा चुसाई के बाद पिंकी की चूत से अमृत वर्षा होने लगी तो नरेश के लंड ने भी पिचकारी छोड़ कर पिंकी का मुँह वीर्य से भर दिया।

पिंकी को एक बार तो उबकाई आई पर नरेश का लंड अभी भी पिंकी के मुँह के अन्दर था तो बेबसी में वो सारा माल गटक गई।

दोनों ही पस्त हो चुके थे पर असली काम तो अभी बाकी था।

तभी पिंकी बोली- भाई अब और मत करो, मम्मी और दीदी अब आने वाले होंगे और अगर कहीं वो बीच में आ गए तो सारा मज़ा ख़राब हो जाएगा।

नरेश अब रुकना नहीं चाहता था क्यूंकि ऐसा मौका दुबारा मिलना मुश्किल था। फिर भी नरेश ने शीला को फ़ोन किया यह सुनिश्चित करने के लिए कि वो लोग कितनी देर में आ रहे हैं।
 
फ़ोन नरेश की मम्मी ने उठाया और बताया की अभी कम से कम दो घंटे और लगेंगे उनको आने में।

इतना समय तो पिंकी और नरेश के लिए बहुत था अपनी जवानी की भूख को शांत करने के लिए।

फ़ोन काटते ही नरेश एक बार फिर से पिंकी पर छा गया और अपना लंड एक बार फिर से पिंकी के होंठों के हवाले कर दिया।

मात्र दो मिनट में ही नरेश का लंड फिर से लोहे की छड़ की तरह सख्त हो गया था।

नरेश ने पिंकी को बेड के किनारे पर लेटाया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख कर एक बार फिर अपनी जीभ पिंकी की छोटी सी चूत पर लगा दी।

थूक से पिंकी की चूत को अच्छे से गीला करने के बाद नरेश ने खड़े होकर अपने लंड का सुपाड़ा पिंकी की चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया।

पिंकी अपनी पहली चुदाई से पहले घबरा रही थी, वो नरेश को बोली- भाई, मेरा पहली बार है और मुझे बहुत डर लग रहा है, फिर तुम्हारा लंड भी तो देखो कितना मोटा और लम्बा है जबकि मेरी चूत का छेद कितना छोटा सा है।

‘मेरी जान जिसे तू छोटा सा छेद कह रही है, उसमें तो सारा का सारा जहान समा जाए फिर भी जगह बच जायेगी… तू घबरा मत तेरा भाई अपनी बहन की चुदाई बहुत प्यार से करेगा।’

नरेश के लंड के चूत पर रगड़ने से पिंकी की चूत भी अब लंड को अन्दर लेने के लिए बेचैन होने लगी थी। वो भी बार बार गांड उठा कर लंड का स्वागत करने लगी थी।

तभी नरेश ने थोड़ा लंड को चूत में दबाया तो पिंकी के चेहरे पर दर्द की लकीरें दिखाई देने लगी।

नरेश ने भी अंदाजा लगाया कि ऐसे तो पिंकी की चूत फट जायेगी और यह शोर भी बहुत मचाएगी, वो उठा और पास में रखी तेल की शीशी लेकर आया और ढेर सारा तेल पहले पिंकी की चूत पर लगाया और फिर अपने लंड का सुपारा भी तेल में अच्छे से तर कर लिया और फिर से लंड को पिंकी की चूत पर रगड़ने लगा।

‘भाई और कितना तड़पाओगे अब डाल भी दो अन्दर… अब नहीं रुका जा रहा है!’ बस यह बोल कर पिंकी ने अपनी शामत बुला ली क्यूंकि यह सुनते ही नरेश ने जोश जोश में लंड के सुपारे को चूत के मुहाने पर लगा कर एक जोरदार धक्का लगा दिया और फट की आवाज के साथ नरेश के लंड का सुपाड़ा पिंकी की कुँवारी चूत को फाड़ता हुआ उसके अन्दर घुस चूका था।
 
पिंकी नहीं जानती थी कि पहली चुदाई में चूत के साथ साथ गांड भी फट जाती है, वो जोर से चीख पड़ी और दर्द के मारे हाथ पैर मारने लगी।

नरेश ने पिंकी के होंठों पर होंठ रख कर उसको शांत करने की कोशिश की।

पिंकी नरेश के नीचे दबी हुई छटपटा रही थी, लंड अभी सिर्फ दो इंच ही घुसा था।

नरेश ने देर करना सही नहीं समझा और एक बार उचक कर फिर से दो जोरदार धक्के लगा कर आधे से ज्यादा लंड अपनी छोटी बहन की चूत में उतार दिया।

पिंकी की हालत ऐसी थी कि जैसे अभी बेहोश हो जायेगी।

चूत से खून निकल कर गांड तक फ़ैल गया था। नरेश का लंड भी जैसे किसी शिकंजे में फंस गया था क्यूंकि पिंकी की कुंवारी चूत थी ही इतनी टाईट।

फिर भी रोहन ने एक लम्बी सांस ली और फिर लगातार दो तीन धक्के लगा कर पूरा लंड पिंकी की चूत में फिट कर दिया।

अब नरेश ने धक्के लगाने बंद कर दिए और पिंकी की चूचियों को मुँह में लेकर चुभलाने लगा और दूसरी को मसलने लगा।

पिंकी दर्द के मारे अभी भी रोये जा रही थी।

‘बस मेरी बहना… बस अब दर्द नहीं होगा… देख पूरा लंड तेरी चूत में जा चुका है। जिसे तू छोटा सा छेद कहती थी वो छेद मेरा पूरा आठ इंच का लंड निगल गया है।’

‘प्लीज भाई, बहुत दर्द हो रहा है प्लीज निकाल लो… मेरी चूत फट गई है… प्लीज मुझे नहीं चुदवाना…’

‘अरे देख तो पूरा लंड घुस चुका है अब दर्द नहीं होगा…’

नरेश लगातार पिंकी की उभरती चूचियों और होंठों को चूमता रहा।

करीब दो तीन मिनट बाद पिंकी को अपना दर्द कुछ कम होता महसूस हुआ तो वो भी नरेश के चुम्बन का जवाब चुम्बन से देने लगी। नरेश ने भी ग्रीन सिग्नल मिलते ही लंड को कुछ हरकत दी, उसने धीरे धीरे अपना लंड चूत से लगभग आधा निकाला और फिर धीरे धीरे ही दुबारा पिंकी की चूत में उतार दिया।

पिंकी को दर्द हुआ पर अब वो इस दर्द को सहने के लिए तैयार थी।

ऐसे ही पहले धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करते करते नरेश ने अपने धक्को की स्पीड बढ़ा दी। पिंकी की चूत ने भी थोड़ा पानी छोड़ दिया था जिस कारण थोड़ा चिकनापन आ गया था चूत में और लंड अब पिंकी की चूत में फिसलने लगा था।

पिंकी को भी अब चुदाई में मज़ा आने लगा था, वो भी अब नरेश के हर धक्के का स्वागत अपनी गांड उठा उठाकर कर रही थी जो इस बात का सबूत था कि अब दोनों मज़े में थे।
 
करीब पांच मिनट और धीरे धीरे चुदाई चली फिर तो जैसे बेड पर तूफ़ान आ गया और दोनों बहन भाई जोरदार चुदाई में लीन हो गए, दोनों एक दूसरे को पछाड़ने की कोशिश कर रहे थे।

लगभग दस मिनट के बाद पिंकी का शरीर अकड़ा और एक सरसराहट के साथ पिंकी की चूत पानी फेंकने लगी।

पिंकी की चूत का पानी नरेश को अपने लंड के पास से जाता हुआ साफ़ महसूस हो रहा था।

झड़ने के बाद पिंकी थोड़ी सुस्त हुई पर नरेश लगातार धक्के पर धक्के लगा रहा था।

कुछ देर की चुदाई के बाद पिंकी फिर से हरकत में आई और नरेश के धक्कों का जवाब देने लगी।

एक ही आसन में चुदाई करते करते नरेश अब कुछ अलग करने के मूड में था तो उसने पिंकी को बेड पर घोड़ी बना लिया और फिर पीछे जाकर अपना लंड फिर से पिंकी की चूत में उतार दिया।

और फिर से चुदाई शुरू हो गई, नरेश के टट्टे हर धक्के के साथ थाप दे रहे थे और कमरे में फच्च फच्च की आवाज आने लगी थी जो कमरे के माहौल को मादक बना रही थी।

समय का अंदाज नहीं पर ये चुदाई बहुत लम्बी चली और फिर पहले पिंकी की चूत ने तीसरी बार अपने काम रस से नरेश के लंड को भिगो दिया और फिर कुछ देर बाद नरेश के लंड ने भी पिंकी की चूत को वीर्य से लबालब भर दिया।

झड़ते ही दोनों पस्त होकर लेट गए।

नरेश का लंड अभी भी उसकी छोटी बहन पिंकी की चूत में ही था जो की कुछ देर बाद सुकड़ कर फ़क की आवाज के साथ बाहर निकल गया।

लंड के निकलते ही पिंकी की चूत से नरेश का वीर्य निकलकर बेड की चादर पर फैलने लगा।
 
कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
करीब पांच मिनट बाद दोनों की साँसें थोड़ी शांत हुई तो पिंकी उठी।

पूरी चादर पर पिंकी की चूत से निकले खून और चुदाई से निकले कामरस के धब्बे ही धब्बे नजर आ रहे थे।

कुछ देर बाद पिंकी उठ कर चलने लगी तो दर्द के मारे वो कराह सी उठी, उसने झुक कर अपनी चूत को देखा तो चूत सूज कर डबल रोटी जैसी हो गई थी।

उसे देख कर वो रो पड़ी और अपने भाई को मुक्के मारने लगी।

‘यह देखो भाई तुमने मेरी चूत का क्या हाल कर दिया है… कोई भाई भला अपनी बहन के साथ ऐसा करता है?’

‘करता है ना… तुमने भी तो भाई और बहन की चुदाई की बहुत सी कहानियाँ पढ़ी है जिसमे भाई ने अपनी बहन की चूत को चोदा है..’

नरेश के ऐसा कहने पर पिंकी हैरान होकर नरेश को देखने लगी- तुम्हें कैसे पता भाई की मैं भाई बहन की चुदाई की कहानियाँ पढ़ती हूँ… कहीं तुम ही तो नहीं…???

नरेश ने हाँ में सर हिलाया तो पिंकी एक बार फिर नरेश पर मुक्के बरसाने लगी- बहुत कमीने हो भाई तुम… अपनी बहन को चोदने के लिए कैसा रास्ता अपनाया तुमने…

नरेश हँस पड़ा।

‘पर भाई मैं ही क्यूँ… शीला क्यों नहीं… वो तो मुझ से बड़ी है, पहले तो उसकी चूत फटनी चाहिए थी।’

‘तू इसलिए क्यूंकि तू मेरी जान है… जानती है शीला से ज्यादा मैं तुम्हें प्यार करता हूँ और तू शीला से ज्यादा खूबसूरत भी है।नरेश ने शीला वाली बात छुपा लिया।

‘अच्छा… अगर तुम मुझे प्यार करते तो इतनी बेदर्दी से मेरी चूत ना फाड़ते…’

‘कभी ना कभी तो तेरी फटनी ही थी… आज फट गई तो क्या बुरा हुआ…. मज़ा तो आया ना..?’

‘हाँ मज़ा तो बहुत आया… पर शुरू में दर्द भी बहुत हुआ… मुझे तो लग रहा था कि मैं अब मरने वाली हूँ… पर फिर वो मज़ा आया जिसके सामने ये दर्द कुछ भी नहीं…’

‘तू खुश है ना चुदवा कर…’

पिंकी कुछ नहीं बोली बस उसने शर्मा कर अपनी नजरें झुका ली।
 
नरेश ने दुबारा पूछा तो उसने हाँ में अपनी गर्दन हिलाई और एक बार फिर अपना नंगा बदन नरेश की बाहों के हवाले कर दिया।

नरेश ने पिंकी के होंठ चूम लिए और उसको अपने साथ लिपटा लिया।

तभी नरेश का ध्यान घड़ी की तरफ गया, लगभग एक घंटा बीत चुका था। उसने एक बार फिर से शीला को फ़ोन मिलाया और आने के बारे में पूछा तो शीला ने फ़ोन उठाया और बताया कि वो लगभग पंद्रह मिनट तक आ रहे हैं।

नरेश ने जल्दी से पिंकी को उठाया और उसको कपड़े पहनने के लिए कहा और फिर अपने कपड़े उठा कर जल्दी से अपने कमरे में चला गया।

पिंकी ने भी जल्दी से अपने कपड़े पहने और फिर बेड की चादर को उठा कर संभल कर अपनी पर्सनल अलमारी में छुपा कर रख दिया अपनी पहली चुदाई की निशानी के तौर पर।

कमरे को दुरुस्त करने के बाद वो बाथरूम में गई और जब तक शीला और उसकी मम्मी नहीं आ गए तब तक शावर के नीचे खड़ी होकर नहाती रही।

उधर नरेश भी अपने बाथरूम में जाकर नहाया और फिर बेड पर लेट कर कुछ देर पहले बीते पलों को याद करते करते सो गया।

शीला और उसकी मम्मी लगभग आधे घंटे बाद आई, तब तक घर में आया चुदाई का तूफ़ान पूरी तरह से शांत हो चुका था।

पिंकी ने जाकर दरवाजा खोला।

पिंकी के कदम कुछ कुछ लड़खड़ा रहे थे इसलिए उसने अपनी मम्मी के सामने जाना ठीक नहीं समझा और सर दर्द का बहाना बना कर अपने कमरे में आकर सो गई।

बाकी दिन ऐसे बीता जैसे कुछ हुआ ही ना हो।

रात को खाने की टेबल पर सब लोग इकठ्ठा हुए।

सबसे पहले पिंकी और नरेश ही आये क्यूंकि शीला अपनी मम्मी की रसोई में मदद कर रही थी।

नरेश ने बेशर्मी से पिंकी की जाँघों पर हाथ फेरा और धीरे से उसकी चूची दबाई तो पिंकी घबरा गई और नरेश से बोली– मरवाओगे क्या भाई… मम्मी ने देख लिया तो समझ लो दोनों का घर से निकाला हो जाएगा…

‘हो जाने दो निकाला, मैं मेरी प्यारी बहना को लेकर बहुत दूर चला जाऊँगा और फिर वहाँ तुम और मैं एक साथ अपनी जिन्दगी बिताएंगे।’

‘हटो… तुम तो बिल्कुल पागल हो गए हो भाई…’ पिंकी ने हँसते हुए कहा।
 
तभी शीला टेबल पर कुछ सामान रखने आई और पिंकी को हँसते हुए देख कर पूछ लिया- क्या गिटपिट हो रही है तुम दोनों में??

‘कुछ नहीं, यह हम बहन-भाई के बीच की बात है, तुम्हें क्यों बतायें?’

‘अच्छा ना बताओ.. तुम्हारी मर्जी…’ शीला ने कहा और फिर दुबारा रसोई में चली गई।

शीला के जाते ही नरेश ने फिर से पिंकी की चूची को पकड़ा और जोर से दबा दिया।

‘क्या करते हो भाई… दिन में मन नहीं भरा… पता है तुमने मसल मसल कर और चूस चूसकर दोनों चूचियाँ लाल कर दी हैं।’

‘अच्छा दिखाओ तो ज़रा…’ और नरेश पिंकी के टॉप को ऊपर उठाने लगा।

पिंकी डर गई और उठ कर जल्दी से रसोई में चली गई।

चुदाई के कारण उसकी चाल अभी भी थोड़ी बदली हुई थी। वो जानबूझ कर रसोई में रखे सामान से टकरा गई और फिर लंगड़ा कर चलने लगी जैसे उसे बहुत चोट लग गई हो।

‘ये लड़की भी ना देख कर तो चल ही नहीं सकती, लग गई ना चोट!’ पिंकी को उसकी मम्मी ने डांटा।

तभी नरेश भी उठ कर रसोई में आया तो पिंकी ने नरेश को आँख मार दी।

नरेश पिंकी का नाटक समझ चुका था- कहाँ चोट खाती घूम रही है… चल तुझे कुर्सी पर बैठा दूँ।

नरेश ने पिंकी की बाजू ऐसे पकड़ी जैसे वो उसे सहारा देना चाहता हो और पिंकी को लेकर डाइनिंग टेबल की तरफ चल पड़ा।

नरेश ने मुड़ कर देखा तो मम्मी और शीला अपने काम में लग गए थे। बस मौका देखते ही नरेश ने फिर से पिंकी की बगल में हाथ डाल कर उसकी एक चूची पकड़ कर मसलनी शुरू कर दी और तब तक मसलता रहा जब तक पिंकी को कुर्सी पर नहीं बैठा दिया।

‘भाई तुम बहुत बेशर्म हो और बदमाश भी.. कुछ तो शर्म करो!’

‘अब तुमसे कैसी शर्म… अब तो तुम मेरी रानी हो…’ नरेश हँस पड़ा।

‘आज रात का क्या प्रोग्राम है..?’

‘ना भाई रात को नहीं.. फिर शीला दीदी भी तो साथ होती है अगर उसको शक हो गया तो फिर तरसते रह जाओगे मज़े के लिए!’

नरेश ने पिंकी को समझाया कि तुम पढ़ाई के बहाने मेरे कमरे में आ जाना और फिर वहीं सो जाना। अगर कोई उठाने आएगा तो मैं कह दूंगा कि अगर सो गई है तो यहीं सो जाने दो और फिर जब बाकी सब सो जायेंगे तो फिर तुम और मैं… समझ गई ना।

कह कर नरेश ने पिंकी को आँख मारी तो पिंकी शर्मा गई और नरेश को मुक्का मार कर बोली- भाई तुम पूरे बहनचोद हो…’

पिंकी के मुँह से बहनचोद की गाली सुन कर नरेश हँस पड़ा और बोला- मुझे बहनचोद बनाया भी तो तुमने ही है मेरी प्यारी बहना!
 
उसके बाद खाना आ गया, सब बैठ कर खाना खाने लगे।

खाने के दौरान दोनों भाई बहन ने कोई हरकत नहीं की और चुपचाप खाना खाया।

खाना खाने के बाद सब कुछ देर बैठे बातें करते रहे।

नरेश की मम्मी ने नरेश के पापा को फ़ोन किया तो उन्होंने बताया कि वो रात को नहीं आयेंगे।

फिर लगभग दस बजे सब सोने जाने लगे तो पिंकी ने तय प्रोग्राम के तहत शीला और मम्मी को बोला कि नरेश भैया के पास बैठ कर पढ़ाई करेगी क्यूंकि उसे नरेश से कुछ समझना है।

बहन भाई पर भला कौन शक करता।

शीला ने तो कहा भी कि मैं समझा दूंगी पर पिंकी ने मना कर दिया।

फिर सब सोने के लिए चले गए। क्यूंकि पिंकी नरेश के कमरे में जाने वाली थी तो शीला भी अपनी मम्मी के साथ उनके कमरे में सोने चली गई।

कमरे में जाते ही नरेश और पिंकी दोनों ही किताबें खोल कर बैठ गए।

पिंकी और नरेश दोनों ही जानते थे कि थोड़ी देर में मम्मी दूध देने के लिए कमरे में एक बार जरूर आएगी।

और फिर करीब बीस पच्चीस मिनट के बाद मम्मी दूध देकर चली गई।

पिंकी ने मम्मी को बोल दिया कि मैं आज रात यही भाई के पास ही सो जाऊँगी क्यूंकि होम वर्क ज्यादा है और रात को देर हो जायेगी। मम्मी ने बोला- जैसा ठीक लगे कर लेना।

मम्मी के जाते ही नरेश ने पिंकी को बाहों में भर लिया और पिंकी के रसीले होंठों का रसपान करने लगा।

तभी पिंकी ने नरेश को रोका और उठ कर बाहर गई और देख कर आई कि मम्मी और शीला क्या कर रहे हैं।

दोनों दूध पी कर सोने की तैयारी में थे।

वापिस आई तो पिंकी ने कमरे की कुण्डी लगा ली।

नरेश उस समय बाथरूम में गया हुआ था। नरेश वापिस आया तो देखा कि पिंकी बेड पर बैठी हुई है और उसने अपने दुपट्टे से घूँघट निकाला हुआ है।

जब नरेश ने पिंकी से इस बारे में पूछा तो पिंकी ने शर्मा कर कहा– अजी अपनी सुहागरात है ना आज, तो अपने सैंया का इंतज़ार कर रही हूँ..
 
पिंकी की बात सुन कर नरेश के लंड ने एकदम से खड़े होकर सलामी दी। उसने भी बिलकुल फिल्मी स्टाइल में पिंकी का घूँघट उठाया। पिंकी ने भी स्टाइल से उसको पास में रखा दूध पिलाया, आधा नरेश ने पिया और बाकी पिंकी को पीने के लिए दे दिया।

‘पूरा पी लो भाई… आज रात बहुत मेहनत करनी है तुम्हें..’

चुदाई की कहानियाँ पढ़ पढ़ कर पिंकी ऐसे बहुत से डायलॉग सीख गई थी।

मुँह दिखाई में तुम्हे क्या चाहिए मेरी जान।नरेश बोला।

वो उधर रहा भइया जब जरुरत होगा ले लुंगी।पिंकी बोली।

मुझे तुमसे एक प्रॉमिस चाहिए जानू की तुम हमेशा मेरी बन के रहोगी।जब तक तुम्हारी या मेरी शादी नहीं हो जाती तुम सिर्फ मेरी बनकर रहोगी और शादी के बाद भी हमारा प्यार रहेगा।नरेश बोला।

ठीक है भइया आज के बाद मेरी शादी होने तक आपके सिवा किसी को अपनी जवानी का रस चखने दूंगी।मेरी जवानी अब सिर्फ आपके लिए है।इससे जी भर के खेलो।

ये सुनकर नरेश ने पिंकी को अपनी बाहों में भर लिया और होंठों पर होंठ रख दिए, नरेश के हाथ पिंकी के संतरों से जूस निकालने की कोशिश करने लगे थे।

‘बहना… मर्द को असली ताक़त तो औरत के दूध से मिलती है भैंस के दूध से नहीं…’ कहते हुए नरेश ने एक ही झटके में पिंकी का टॉप उतार कर एक तरफ उछाल दिया।

चूचियाँ नंगी होते ही नरेश ने पिंकी की चुचियों के चुचक अपने होंठो में दबा लिए और फिर जोर जोर से पिंकी की चूचियों को चूसने लगा।

पिंकी की सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगी थी ‘आह्ह्ह… भाई… चूस लो… चूस लो अपनी बहन का सारा दूध… आह्ह्ह… उफ्फ्फ… निचोड़ लो मेरी चूचियों को… बहुत मज़ा आ रहा है भाई… सी… आह्ह्ह!’

नरेश भी मस्त होकर पूरी चूची को अपने मुँह में भर भर कर चूस रहा था और बीच बीच में चूचुक को अपने दांतों से काट लेता था जिससे पिंकी तड़प उठती थी।

पिंकी के हाथ भी अब नरेश के लंड को टटोल रहे थे।

पिंकी ने जल्दी से नरेश का लंड बाहर निकाला और लंड को जोर जोर से मसलने लगी।

नरेश ने भी बिना देर किये अपना लंड पिंकी के होंठों पर लगा दिया। पिंकी ने लंड का सुपारा अपने होंठों में दबाया और जीभ से अपने भाई के लंड को चाटने लगी।

दोनों वासना की आग में जल रहे थे, दिन दुनिया से बेखबर थे दोनों, बस एक दूसरे में समा जाने को बेताब थे।

पिंकी नरेश का लंड चूस रही थी, नरेश ने भी पिंकी की स्कर्ट और पेंटी उतार कर साइड में फेंक दी और उसने भी अपनी जीभ पिंकी की एक बार चुदी चूत पर लगा दी।

पिंकी की चूत अभी भी कुछ सूजी सूजी सी लग रही थी, सूजती भी क्यों ना, आखिर दिन में नरेश ने जबरदस्त चुदाई की थी पिंकी की कुँवारी चूत की।
 
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