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परिवार(दि फैमिली) complete

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महेश ने पूरी तरह से नीलम को अपने बस में कर लिया तब उसने नीलम को कुतिया बना के पेलना शुरू कर दिया।जब महेश की नज़र नीलम की गांड के भूरे छेद पर पड़ी तो उसका लंड अपनी बहु की संकरी गांड के छेद में घूसने को मचलने लगा।

वैसे भी महेश सोच चूका था की अपनी बहु नीलम की

गांड की सील खोल देगा या उसे प्रेग्नेंट कर देगा ताकि आगे बच्चा होने तक अपनी बहु से एक दिन की भी जुदाई न हो।

अब महेश ने अपनी ऊँगली में थूक लगाकर अपनी बहु के गांड में अपनी एक ऊँगली पेलने लगा।साथ में अपना लंड भी अपनी बहु की चूत में घचाघच पेल रहा था।बहु भी पूरी मस्ती में अपनी गांड पीछे धकेल रही थी।अब धीरे धीरे महेश नीलम की गांड में दो ऊँगली आराम से पेल रहा था।

नीलम -क्या कर रहे हो पिताजी।

महेश ने अपना लंड बहु की गांड के छेद से अड़ा दिया।

“धत्त, वहाँ मैंने कभी नहीं करवाया.”

“तो आज करवा के देखो. वहाँ भी बहुत मज़ा आता है बिल्कुल चूत की तरह!”

“नहीं बाबा वहाँ नहीं. बहुत मोटा है आपका, मैं वहाँ नहीं सह पाऊँगी.”

“अरे एक बार ट्राई तो कर लो बेटी, मज़ा नहीं आये तो मत करने देना.”

“अच्छा, एक बार घुसाने के बाद आप क्या मान जाओगे?”

“सच में नीलम बेटी, बहुत दिनों से मन में था तेरी गांड मारने का. आज मत रोक मुझे!”

“पर पिता जी मुझे बहुत बहुत डर लग रहा है वहाँ नहीं. आप चूत में जितना चाहो कर लो !”

“कुछ नहीं होता बेटी, वहाँ और ज्यादा मज़ा आता है और अपना माल तुम्हारी चूत में ही डालूंगा प्लीज बहु”

“अच्छा करो धीरे से, लेकिन दर्द होगा तो निकाल लेना जल्दी से अगर मैं कहूँ तो!”

“ठीक है बेटी तू चिंता मत कर अब.”

महेश ने पास रखे तेल से लंड को अच्छे से चुपड़ लिया और बहू के दोनों हाथ सामने बेड पर रख दिए और उसे झुका कर कमर पकड़ कर पीछे की तरफ खींच लिया जिससे बहु का पिछवाड़ा अच्छी पोजीशन में उसके लंड के सामने आ गया.
 
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कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
इसी स्थिति में महेश ने अपनी बहू नीलम की चूत में लंड पेल दिया और दस बारह धक्के लगा कर नीलम को तैयार किया. फिर महेश ने नीलम की दोनों टांगों को दायें बाएं फैला के लंड को उसके गांड के छेद से सटा दिया और उसके कूल्हों पर चपत लगाने लगा, पहले इस वाले पे, फिर उस वाले पे.

नीलम बेटी , जरा अपनी गांड को अन्दर की तरफ सिकोड़ो और फिर ढीली छोड़ दो.”

“कोशिश करती हूँ पिताजी.” नीलम बोली और अपनी गांड को सिकोड़ लिया. उसकी गांड के झुर्रीदार छेद में हलचल सी हुई और उसका छेद सिकुड़ गया.

“गुड वर्क, बेटी. ऐसे ही करो तीन चार बार!”

महेश के कहने पर नीलम ने अपनी गांड को तीन चार बार सिकोड़ के ढीला किया.

“बेटी, अब बिलकुल रिलैक्स हो जाओ. गहरी सांस लो और गांड को एकदम ढीला छोड़ दो.”

नीलम ने बिल्कुल वैसा ही किया.

“नीलम बेटी, गेट रेडी, मैं आ रहा हूँ.” महेश ने कहा. और लंड से उसकी गांड पर तीन चार बार थपकी दी.

“पिता जी आराम से”नीलम बोली।

“आराम से ही जाएगा बेटी, बस तू ऐसे ही रहना; एकदम रिलैक्स फील करना.”

गांड के छेद का छल्ला थोड़ा सख्त होता है. लंड एक बार उसके पार हो जाए फिर तो कोई प्रॉब्लम नहीं आती. अतः महेश ने अपनी फोरस्किन को कई बार आगे पीछे करके सुपाड़े को तेल से और चिकना किया और नीलम की गांड पर रख कर उनकी कमर कस के पकड़ ली और लंड को ताकत से पेल दिया गांड के भीतर.

लंड का टोपा पहले ही प्रयास में गप्प से नीलम की गांड में समा गया. उधर नीलम जलबिन मछली की तरह छटपटाई- उई मम्मी रे… बहुत दर्द हो रहा है, पिताजी… फाड़ ही डाली आपने तो; हाय राम मर गयी, हे भगवान् बचा लो आज!

नीलम ऐसे ही चिल्लाने लगी.

ऐसे अनुभव महेश को पहले भी अपनी पत्नी के साथ हो चुके थे, वो भी ऐसी ही रोई थी और रो रो कर आसमान सिर पर उठा लिया था, बाद में जब मज़ा आने लगा था तो अपनी गांड हिला हिला के लंड का भरपूर मज़ा लिया था।
 
महेश जानता था कि बस एक दो मिनट की बात थी और बहू भी अभी लाइन पर आ जायेगी. अतः वह बहू की चीत्कार, रोने धोने को अनसुना करके यूं ही स्थिर रहा और उसकी पीठ चूमते हुए नीचे हाथ डाल कर उसके बूब्स की घुन्डियाँ मसलता रहा और उसे प्यार से सांत्वना देता रहा.

उधर बहू बेड पर अपना सिर रख के सुबक सुबक के रोती रही.

कुछ ही मिनटों बाद महेश को अनुभव हुआ कि उसके लंड पर गांड का कसाव कुछ ढीला पड़ गया साथ ही बहू भी कुछ रिलैक्स लगने लगीं थी. हालांकि रोते रोते उसकी हिचकी बंध गई थी.

“नीलम बेटी, अब कैसा लग रहा है?” महेश ने लंड को गांड में धीरे से आगे पीछे करते हुए पूछा.

“पहले से कुछ ठीक है पिताजी, लेकिन दर्द अब भी हो रही है.”

“बस थोड़ी सी और हिम्मत रखो बेटी, दर्द अभी ख़त्म हो जाएगा फिर तुझे एक नया मज़ा मिलेगा.”

महेश लंड को यूं ही उसकी गांड में फंसाए हुए उसके चूतड़ सहलाता और मसलता रहा; बीच बीच में पीठ को चूम कर चुचियाँ दबाता रहा. कुछ ही मिनटों में नीलम नार्मल लगने लगी, लंड पर उसकी गांड की जकड़ कुछ ढीली पड़ गई और उसकी कमर स्वतः ही लंड लीलने का प्रयास करते हुए आगे पीछे होने लगी.

“पिता जी, अब थोडा मज़ा आ रहा है. जल्दी जल्दी करो अब!” बहू ने अपनी गांड उचका के दायें बाएं हिलाई.

“आ गई ना लाइन पे, बहुत चिल्ला चिल्ला के रो रो के दिखा रही थी अभी!” महेश बहू के चूतड़ों पर चांटे मारते हुए कहा.

“अब मुझे क्या पता था कि पीछे वाली भी दर्द के बाद इतना ढेर सारा मज़ा देती है.”नीलम बोली।

“तो ले बेटी, अपनी गांड में अपने ससुर के लंड का मज़ा ले.” महेश ने कहा और लंड को थोडा पीछे ले कर पूरे दम से पेल दिया बहू की गांड में.

“लाओ, दो पिता जी.. ये लो अपनी बहू की गांड!” नीलम बोली और अपनी गांड को अपने ससुर के लंड से लड़ाने लगी.

“शाबाश बेटी, ऐसे ही करती रह.” महेश ने बहू की पतली कमर दोनों हाथों से कसके पकड़ के उसकी गांड में लंड से कसकर ठोकर लगाई, साथ में नीचे उसकी चूत में अपनी बीच वाली उंगली घुसा के अन्दर बाहर करने लगा.
 
“आह…पिता जी, आज तो गजब कर रहे हो आज, मेरा मन जोर जोर से चिल्ला चिल्ला के चुदने का कर रहा है.”नीलम बोली।

“तो चिल्ला जोर से!”महेश उसकी चूत के दाने को मसलते हुए बोला.

“पिता जी आ… तीन उंगलियां घुसेड़ दो मेरी चूत में और धक्के लगाओ जोर जोर से!”नीलम बोली।

“ये लो बेटी… ऐसे ही ना?” महेश ने हाथ का अंगूठा और छोटी अंगुली मोड़ कर तीनों उंगलियाँ बहू की बुर में घुसा दीं और उसकी गांड में धक्के पे धक्के देने लगा.

नीलम की चूत रस बरसा रही थी. महेश की सारी उंगलियां और हथेली उसके चूत रस से सराबोर हो गयी.

“और तेज पिताजी और तेज… अंगुलियां और भीतर तक घुसा दो चूत में पिताजी!” बहू चिल्ला कर बोली.

अबकी महेश ने अपनी चारों उंगलियां अपनी प्यारी बहु की चूत में जितना संभव था उतनी गहराई तक घुसा के उसकी गांड ठोकने लगा.

“आह… यू आर ग्रेट पिताजी …मुझे रंडी की तरह चोदो … फाड़ के रख दो मेरी गांड को और उंगलियां गहराई तक घुसा दो मेरी चूत में और चोदो मेरी गांड को!” नीलम अब अपने पे आ चुकी थी और मज़े के मारे बहकी बहकी बातें करने लगी थी.

आह कितनी मज़ा दे रही है तेरी गांड बेटी।तू मेरी पर्सनल रंडी है बहु।अभी तो तुझे कुतिया बना के तेरी गांड में पेल रहा हूँ मुझे ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सुख मिल रहा है।क्या मस्त गरम गांड है तेरी।महेश जोर जोर से अपनी बहु की गांड मारते हुए बोला।

महेश जानता था कि औरत जब पूरी गरम हो जाये तो उसे बड़े ही एहितयात से टेक्टफुल्ली संभालना होता है; इसी पॉइंट पर पुरुष की सम्भोग कला और धैर्य का इम्तिहान होता है.

“हाँ नीलम बेटी ये ले!” महेश ने कहा और उसकी चोटी अपने हाथ में लपेट के खींच लिया जिससे उसका मुंह ऊपर उठ गया और अपने धक्कों की स्पीड कम करके लंड को धीरे धीरे उसकी गांड में अन्दर बाहर करने लगा.

“पिता जी, लंड को चूत में दीजिये न कुछ देर प्लीज!”

“ये लो बेटी!” महेश ने कहा और लंड को गांड से निकाल कर फचाक से बहू की चूत में पेल दिया और चोदने लगा.

“वाओ पिताजी… चोदो तेज तेज चोदो… लंड के साथ अपनी दो अंगुलियां भी घुसा दो भीतर.” बहू रानी किसी हिस्टीरिया से पीड़ित लड़की की तरह बहकने लगी.
 
नीलम की गांड का छेद मुंह बाए लंड के इंतज़ार में कंपकंपा सा रहा था लेकिन महेश एक अंगुल नीचे उसकी चूत को अपने लंड से संभाले हुए था.

तभी महेश को एक आईडिया आया. बेड के सामने टेबल पर फल रखा था. उसकी नज़र मोटे केलों के गुच्छे पर गयी जिसमें बड़े बड़े लम्बे मोटे साइज़ के कड़क कठोर केले थे. बहू को केले बहुत पसंद है न.

“नीलम बेटी तुझे केले बहुत पसंद है ना?” महेश उसकी चूत को लंड से धकियाते हुए पूछा.

“हाँ, पिता जी. अभी थोड़े कच्चे है आप कल खाना.केले मस्त लगते है मुझे तो!” बहू ने अपनी कमर पीछे लाके लंड लीलते हुए कहा.

“तो बेटी, आज तेरी चूत को कच्चे केलों का स्वाद चखाता हूँ मैं!” महेश ने कहा और केलों के गुच्छों में से सबसे बड़े वाले केला तोड़ लिया और अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाल के एक सबसे बड़ा वाला केले पर तेल चुपड़ के बहूरानी की चूत में कोशिश करके पूरा घुसा दिया, इसी स्थिति में महेश लंड को फिर से नीलम की गांड में घुसाने लगा. नीचे चूत में केला फंसे होने के कारण लंड को केले की रगड़ महसूस हो रही थी और वो अटकता हुआ सा गांड में घुस रहा था. महेश धीरे धीरे करके लंड को आगे पीछे करते हुए आखिर पूरा लंड अपनी प्यारी बहू की गांड में जड़ तक पेल दिया. और उसकी कमर पकड़ कर अपनी बहु की मस्त गदराई गांड मारने लगा.

लंड के धक्कों से केला जोर जोर से हिलने लगता साथ में चूत में भी कम्पन होने लगते इस तरह नीलम की चूत और गांड दोनों छेदों में जबरदस्त हलचल मचने लगी. महेश पूरी ताकत और स्पीड से दांत भींच कर लंड पेलता रहा.

गांड मारने का अपना अलग ही मज़ा है कारण की गांड के छल्ले में लंड फंसता हुआ अन्दर बाहर होता है जिससे दोनों को अविस्मरणीय सुख की अनुभूति होती है. चूत तो चुदते चुदते सभी की ढीली ढाली हो ही जाती है और फिर चुदाई के टाइम इतना पानी छोड़ती है कि लंड को बीच में रोक के पौंछना ही पड़ता है; जबकि गांड हमेशा एक सा मज़ा देती रहती है.

“पिता जी… बहुत थ्रिलिंग महसूस हो रहा है चूत में. ऐसा मज़ा तो पहले कभी भी नहीं आया मुझे!” नीलम बोली और अपना हाथ पीछे ला कर केले को चूत में और भीतर तक घुसा लिया और अपनी गांड पीछे की तरफ करके धक्कों का मजा लेने लगी और बहुत जल्दी झड़ने पे आ गयी.

“आह..मैं तो आ गयी पिताजी” नीलम बोली और खड़ी हो गई और अपनी पीठ महेश के सीने से चिपका के अपनी बांहें पीछे लाकर गले में डाल के उन्हें लिपटा लिया. उत्तेजना के मारे बहू का जिस्म थरथरा रहा था.
 
महेश लंड अभी भी उसकी गांड में फंसा हुआ था. महेश भी झड़ने के करीब ही था, महेश बहू के दोनों मम्में मुट्ठियों में दबोच लिए और जल्दी जल्दी धक्के मारने लगा जिससे चूत में घुसा हुआ केला धक्कों से नीचे गिर गया अब महेश ने जल्दी से अपना लंड नीलम की गांड से निकल कर उसकी चूत में जड़ तक पेल दिया और 10-12 जोरदार धक्के मारकर अपनी बहु की बच्चेदानी में झड़ने लगा और महेश के लंड से रस की फुहारें निकल निकल के उसकी कोख में समाने लगीं.

“पिता जी मुझे नीचे लिटा दो अब अब खड़ा नहीं रहा जाता मुझसे!” नीलम कमजोर स्वर में बोली.

महेश उसे पकड़े हुए ही धीरे से बेड पर लिटा दिया और और खुद उसके बगल में लेट कर हाँफने लगा.

“पिताजी, आज तो गजब का मज़ा आया पहली बार!”नीलम प्यार से अपने ससुर की आंखों में देखती हुई बोली और उनके सीने पर हाथ फिराने लगी.

महेश ने भी उसे चूम लिया और अपने से लिपटा लिया. बहुत देर तक हम दोनों ससुर बहू यूं ही चिपके पड़े रहे.

“छोड़ो पिता जी, लंच भी तो बनाना है अभी!” नीलम बोली और उठ के खड़ी होने लगी और जैसे तैसे खड़ी होकर बेड का सहारा ले लिया और धीरे धीरे बाथरूम की तरफ चल दी.

महेश ने नोट किया कि बहू की चाल बदली बदली सी लगने लगी थी.

जिस दिन की यह घटना है उस दिन रात को और अगले दिन बहू ने महेश को कुछ भी नहीं करने दिया; कहने लगी कि उसकी गांड बहुत दर्द कर रही है और उसे चलने फिरने में भी परेशानी हो रही है. अतः महेश भी ज्यादा कुछ नहीं कहा क्योंकि अब उसकी नज़र अपनी बेटी ज्योति की गांड पर थी।
 
अगले दिन जब समीर ऑफिस चला गया और नीलम सोने चली गई तो महेश धीरे से अपनी बेटी ज्योति के बेडरूम में घुस गया।

वहाँ ज्योति अभी अभी बाथरूम से नहा कर निकली थी और सिर्फ पेंटी और ब्रा में बहुत सेक्सी दिख रही थी।

महेश ने अपनी बेटी को अपनी बाहों में भर लिया और अपनी बेटी ले रसीले होंठो को चूसना शुरू कर दिया।

फिर महेश अपनी बेटी की पेंटी को सूंघने लगा।

पिताजी, किसकी खुश्बू ज़्यादा अच्छी लगी, मेरी पेंटी की या चूत की?”ज्योति बोली।

“अरे बेटी, दोनो ही बहुत मादक हैं.कहकर महेश ने अपनी बेटी के पेंटी को निचे करके निकाल दिया और बेड पर बिठाकर अपनी बेटी ज्योति की गीली चूत को चाटने लगा

“हाय पिताजी, अब तो ये चूत और पेंटी दोनो आपकी है, जब मन करे ले लीजिए.” काफ़ी देर चूत चाटने के बाद महेश खड़े हुए और अपने मोटे लंड का सूपाड़ा अपनी बेटी ज्योति के होंठों पे टीका दिया. ज्योति ने जीभ निकाल के सुपारे को चाटा और फिर पूरा मुँह खोल के उस मोटे मूसल को मुँह में लेने की कोशिश करने लगी. बड़ी मुश्किल से उसने महेश का लंड मुँह में लिया. अपने बाप का लंड चूस के तो ज्योति धन्य हो गयी। महेश अपनी बेटी के मुँह को पकड़ के उसके मुँह को चोदने लगे. उनके मोटे मोटे बॉल्स नीचे पेंडुलम की तरह झूल रहे थे. फिर महेश ने ज्योति के मुँह से लंड निकाला और उसके होंठों को चूमते हुए बोले,

“ज्योति मेरी जान, अब अपनी प्यारी चूत को चोदने दो.” ज्योति चुदवाने की मुद्रा में अपनी टाँगें चौड़ी कर के मोड़ ली. अब ज्योति की चूत उसके बाप के सामने थी.

“लीजिए पिताजी, अब मेरी चूत आपके हवाले है.” महेश ने अपना मोटा सुपारा ज्योति की चूत के मुँह पे टीका दिया. ज्योति का दिल ज़ोर ज़ोर से धक धक करने लगा. आख़िर वो घड़ी भी आ गयी थी जब पापा का लंड कई दिनों के बाद फिर से उसकी चूत में जाने वाला था. महेश ने लंड के सुपारे को ज्योति की चूत के कटाव पे थोड़ी देर रखा और फिर धीरे से उसकी चूत में दाखिल कर दिया.
 
“हाँ पिताजी, अब जी भर के चोद लीजिए अपनी प्यारी बिटिया को.” ज्योति उनके कान मफुसफुसाते हुए बोली. अब पिताजी ने पूरा लंड बाहर निकाल के ज्योति की चूत में पेलना शुरू कर दिया. सच! ज़िंदगी में किसी मरद से चुदवाने में ज्योति को इतना मज़ा कभी नहीं आया था. अब ज्योति को एहसास हुआ कि क्यूँ वह रोज़ चुदवाने के लिए उतावली रहती है. उसकी चूत बहुत गीली हो गयी थी उसमें से फ़च...फ़च...फ़च का मादक संगीत निकल रहा था. कुच्छ देर तक चोदने के बाद उसके पिताजी ने अपना लंड ज्योति की चूत से बाहर खींचा और उसके मुँह में डाल दिया. महेश का पूरा लंड और बॉल्स ज्योति की चूत के रस में सने हुए थे. ज्योति में अपने बाप का लंड और बॉल्स चाट चाट कर साफ कर दिए. अब पिताजी बोले।

“ज्योति बेटी, अब थोड़ा कुतिया बन जाओ. अपने इन जानलेवा गांड के दर्शन भी तो करा दो.”

“आपको अपनी बहु के नितम्ब बहुत अच्छे लगते हैं ना?” ज्योति पापा के बॉल्स सहलाते हुए बोली।

“हां बेटी बहुत ही सेक्सी नितम्ब हैं नीलम के.”

“ और हमारे ? हमारे नितम्ब नहीं अच्छे लगे आपको?”ज्योति बोली।

“तुम्हारे नितम्ब तो बिल्कुल जानलेवा हैं बेटी.तुम जब नहा के टाइट पेटिकोट में घूमती हो तो ऐसा लगता है जैसे पेटिकोट फाड़ के बाहर निकल आएँगे. तुम्हारे मटकते हुए चूतड देख के तो हमारा लंड ना जाने कितनी बार खड़ा हो जाता है.”

“हाय पापा इतना तंग करते हैं हमारे नितम्ब आपको? ठीक है मैं कुतिया बन जाती हूँ. अब ये नितम्ब आपके हवाले. आप जो चाहे कर लीजिए.”ज्योति बोली और ये बोल कर ज्योति जल्दी से अपने बाप के लंड के मोटे सुपारे को चूम लिया और फिर कुतिया बन गयी. अब ज्योति की बड़ी बड़ी चूचियाँ बिस्तर पे टिकी हुई थी और चूतड हवा में लहरा रहे थे.

ज्योति ने चूतड चुदवाने की मुद्रा में उचका रखे थे.महेश अपनी बेटी के विशाल चूतडो को देख कर दंग रह गये. उन्होने ज्योति के दोनो चूतडो को अपने हाथ में दबोचा और अपना मुँह उनके बीच में घुसेड दिया. अब ज्योति कुतिया बनी हुई थी और सगा बाप पीछे कुत्ते की तरह अपनी बेटी के चूतडो के बीच मुँह दिए उसकी चूत चाट रहे थे. फिर उन्होने ज्योति के चूतडों को पकड़ के चौड़ा किया और अपनी बेटी के गांड के छेद के चारों ओर जीभ फेरने लगे.
 
ज्योति तो अब सातवें आसमान पे थी. बहुत ही मज़ा आ रहा था. महेश ने अपनी जीभ ज्योति के गांड के छेद में घुसेड दी. ज्योति ये ना सह सकी और एकदम से झड़ गयी. काफ़ी देर तक इसी मुद्रा में महेश अपनी बेटी की चूत और गांड से सारा पानी चाटने के बाद अपने दोनो हाथों से ज्योति के चूतरो को पकड़ा और अपने मोटे लंड का गरम गरम सुपारा अपनी बेटी की लार टपकाती चूत पे टिका दिया........

ज्योति का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. तभी महेश ने एक ज़बरदस्त धक्का लगा दिया और उनका लंड चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर समा गया.

“ आाऐययईईई….आआअहह….आह.” ज्योति के मुँह से ज़ोर की चीख निकल गयी.

“बेटी ऐसे चिल्लाओगी तो नीलम जाग जाएगी.”

“आप भी तो हमें कितनी बेरहमी से चोद रहे हैं पिताजी.” महेश के मोटे मूसल ने ज्योति की चूत को बुरी तरह से फैला के चौड़ा कर दिया था. ज्योति को डर था की कहीं मेरी चूत सुचमुच ही ना फट जाए. अब महेश ने ज्योति की कमर पकड़ के धक्के लगाना शुरू कर दिया. आसानी से लंड ज्योति चूत में जा सके इसलिए अब ज्योति ने टाँगें बिल्कुल चौड़ी कर दी थी. मीठा मीठा दर्द हो रहा था.अब ज्योति अपने ही बाप से कुतिया बन के चुदवा रही थी.

“ ज्योति बेटी तुम्हारी चूत तो बहुत गरम है.” फ़च फ़च.. फ़च…..फ़च फ़च….फ़च… की आवाज़ें ज़ोर ज़ोर से आ रही थी. ज्योति की चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी. अब ज्योति इतनी उत्तेजित हो गयी थी की अपने चूतड पीछे की ओर उचका उचका के अपने बाप का लंड अपनी चूत में ले रही थी.

ज्योति तो वासना में पागल हुई जा रही थी. शायद अपने ही बाप से चुदवाने के एहसास ने उसकी वासना को और भड़का दिया था. महेश अपनी बेटी ज्योति के चूतडो को पकड़ के ज़ोर ज़ोर से धक्के मारते हुए बोले।

“ज्योति बेटी. सच इन चूतडो ने तो हमारा जीना ही हराम कर रखा था. और तुम्हारा ये गुलाबी छेद!” ये कहते हुए उन्होने एक उंगली ज्योति की गांड में सरका दी.

“आआआहह…….. ईीइससस्स... ये क्या कर रहे हैं पिताजी?”
 
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